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Idea-Pitching-IIC-02

Call for Proposals for Idea Pitching Contest

Theme: To Promote Entrepreneurship Amongst Tribal Women of Nation

  • Choose any of the area mentioned below : –
    • Tribal Healing
    • Forest Products
    • Tribal Art and Craft
    • Tribal traditional Process or Indigenous Practises
  • Background of any new idea you want to propose or the solution to the existing problem you want to suggest (1000 words)
  • State its Objectives (Only 2-3 focused objective that can be observed, measured or clearly assessable):
  • Describe the Methodology (1000 words):
    (Describe how your idea or plan will leverage livelihood/economic opportunities and solve societal challenges in a sustainable way. Support with defined steps/relevant process details, e.g., flow chart, model, survey procedures, – as applicable to achieve the stated objectives)
  • Suggest a viable solution to make the proposed idea scalable
  • Submit your Big Idea Via the link below: –

Register Now Link

    Rules:

  • Students all across India can register for the Idea Pitching individually or in teams.
  • There can be no more than 4 members in a team (1 Female and 1 Tribal representation is mandatory in team)
  • Selected ideas on the criteria mentioned below will be asked to give presentation for 15-20 minutes (max 10 power point slides) defining a specific solution to a local problem in front of the Jury. The date and time of presentation which will be informed to the selected participants.
  • The idea must be original.
  • No team/contestant can take part in more than one category.
  • Few Selected ideas will be incubated by the University and mentored by WICCI- Tribal Welfare and Entrepreneurship council.
  • Jury reserves the right of admittance for all contestants and can eliminate contestants without disclosing any reason.
    Selection Criteria
    The new ideas or the solution to the problems identified by the participants will be judged on the following criteria:

    1. Quality of the proposal: 25%

    2. Has any research into the idea been done?
    3. How complete is the idea?
    1. Impact: 25%

    2. Does it solve a problem that exists?
    3. What is the potential market? How many people could it potentially benefit? Is the plan scalable?
    4. Is it in line with the pitching theme and the objective of promoting sustainable livelihood and self-reliance amongst Tribal Women.
    1. Innovation: 25%

    2. Is this a new solution to the problem or completely new idea? Does a similar product/solution exist? Does it have any unique features to distinguish it?
    3. Is there a new approach to an old solution (within the product) that already exists?
    1. Sustainability: 25%

    2. Is there a long-term vision for the idea and product?
    3. Is there a team behind this idea?
    4. How will this drive forwards after the start, until completion?
    5. Is there a possibility for funding of the project? Has this been identified and clearly described?

For more details contact:
Kumar Amrendra
Convener, Jharkhand Rai University, Ranchi
Contact: 7368000411

Rashmi Raj
Convener, WICCI
Contact: 7903881604 / 9431579389

Idea-Pitching-IIC-02

आईडिया पिचिंग प्रतियोगिता के प्रस्ताव के लिए आवेदन प्रारूप

थीम : देश की आदिवासी महिलाओं में उद्यमिता को बढ़ावा।

    दिए गए विषयों में से किसी एक का चुनाव करें।

  • आदिवासी चिकित्सा
  • वन उत्पाद
  • आदिवासी कला और शिल्प
  • जनजातीय पारंपरिक प्रक्रिया और स्वदेशी प्रथाएँ।
  • किसी भी नए विचार की पृष्ठ्भूमि जिसे आप प्रस्तावित करना चाहें या मौजूदा समस्या का समाधान उपलब्ध करना चाहें ( 1000 शब्दों में )
  • उद्देश्यों का परिचय : ( 2 या 3 महत्वपूर्ण उद्देश्यों का परिचय दें जिन्हें स्पष्ट रूम में मापा या मूल्यांकित करने योग्य हो)
  • कार्यप्रणाली का विवरण ( 1000 शब्द में ):
    (आपके दिए गए विचार किस प्रकार आजीविका /आर्थिक विकास सामाजिक चुनौतियों को बदलने में लाभ दायक साबित हो सकते है। निम्नलिखित प्रक्रिया एवं विवरण में प्रस्तुत करें जैसे :फ्लो चार्ट,मॉडल, सर्वे प्रक्रिया इत्यादि। जिनके माध्यम से उद्देश्यों को पूरा किया जा सके।)
  • प्रस्तावित विचार को मापने योग्य बनाने के लिए वयवहारिक समाधान का सुझाव दें।
  • अपने मौलिक विचार को निचे दिए गए लिंक के जरिये भेजें।

Register Now Link

    नियम :

  • देश भर के स्टूडेंट्स आईडिया पिचिंग कांटेस्ट में निबंधित होकर एकल या टीम के तौर पर भाग ले सकते है।
  • एक टीम में 4 से अधिक सदस्य नहीं हो सकते हैं (टीम में 1 महिला और 1 आदिवासी प्रतिनिधित्व अनिवार्य है)
  • मानदंडों के आधार पर चयनित विचारों को 15-20 मिनट का मौका ( अधिकतम स्लाइड में ) प्रतुतीकरण के लिए दिया जायेगा। स्थानीय समस्या का विसिष्ट समाधान प्रतियोगिया के जजों के समक्ष करना होगा। चयनित प्रतिभागियों को प्रतुतीकरण से जुड़ी जानकारी (समय और तारीख़ ) की जानकारी समय पर दे दी जाएगी।
  • विचार मौलिक होने चाहिए।
  • प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाली टीम या प्रतिभागी एक से ज्यादा वर्ग में हिस्सा नहीं ले सकते है।
  • चुनिंदा मौलिक विचारों को यूनिवर्सिटी और विक्की – ट्राईबल वेलफेयर एंड इंटरप्रेनरशिप कौंसिल द्वारा संरक्षित कर आगे बढ़ाया जायेगा।
  • जूरी सभी प्रतियोगियों के प्रवेश का अधिकार सुरक्षित रखता है और किसी भी कारण का खुलासा किए बिना प्रतियोगियों को समाप्त कर सकता है।

चयन प्रक्रिया :
नए विचारों या प्रतिभागियों द्वारा पहचानी गई समस्याओं के समाधान को निम्न मानदंडों पर आंका जाएगा:

1. प्रस्ताव की गुणवत्ता: (25 % )

  1. क्या विचार में कोई शोध किया गया है?
  2. विचार पूर्ण कैसे हुआ है ?

2. प्रभाव: (25 %)

  1. क्या यह मौजूद किसी समस्या का हल है?
  2. संभावित बाजार क्या है? संभावित रूप से कितने लोगों को इसका लाभ मिल सकता है? क्या योजना मापनीय है?
  3. क्या यह दिए गए (पिचिंग) विषय और आदिवासी महिलाओं के बीच स्थायी आजीविका और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य के अनुरूप है।

3. नवोन्मेष : ( 25 %)

  1. क्या यह समस्या का एक नया समाधान है या पूरी तरह से नया विचार है? क्या एक समान उत्पाद / समाधान मौजूद है? क्या इसे भेद करने के लिए कोई अनोखी विशेषताएं हैं?
  2. क्या एक पुराने समाधान (उत्पाद के भीतर) के लिए एक नया दृष्टिकोण है जो पहले से मौजूद है?

4. स्थिरता : ( 25 %)

  1. क्या यह विचार और उत्पाद के लिए दीर्घकालिक दृष्टि है?
  2. क्या इस विचार के पीछे कोई टीम है?
  3. यह ड्राइव शुरू होने के बाद, पूर्ण होने तक कैसे चलेगी?
  4. क्या परियोजना के वित्तपोषण के लिए कोई संभावना है? क्या इसकी पहचान और स्पष्ट रूप से वर्णन किया गया है?

For more details contact:
Kumar Amrendra
Convener, Jharkhand Rai University, Ranchi
Contact: 7368000411

Rashmi Raj
Convener, WICCI
Contact: 7903881604 / 9431579389

mining engineering

माइनिंग इंजीनियरिंग : रोजगार की गारंटी

खनिज संपदा हमारे जीवन का मुख्य आधार है। खनिज संपदा को निकालने का काम प्रशिक्षित लोगों के नेतृत्व में किया जाता है, जिन लोगों को माइनिंग इंजीनियर कहते हैं। खनिज संपदा को निकालने के कार्य को खनन (माइनिंग) इंजीनियरिंग कहते हैं।

भारत में खनिज संपदा का बहुत भंडार है। बिहार, झारखंड, उड़ीसा, मध्य प्रदेश व पश्चिम बंगाल जैसे राज्य में खनिज पदार्थ भारी मात्रा में हैं। खनिज संपदा देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसको देखते हुए देश में माइनिंग इंजीनियर्स की डिमांड काफी तेजी के साथ बढ़ती जा रही है। खनन इंजीनियरिंग में धरती के खनिज पदार्थों का पता लगाना और उनकी खुदाई कर बाहर निकालना होता है। खनन इंजीनियरिंग में प्रमुख रूप से उत्खनन, कच्चे खनिज पदार्थों का टेस्ट करना होता है।

माइनिंग या खनन इंजीनियरिंग में कैरियर बनाने के लिए सबसे पहले उम्मीदवार का किसी मान्यताप्राप्त विद्यालय से साइंस स्ट्रीम में 12 वीं कक्षा पास करना अनिवार्य है. इसके बाद उम्मीदवार माइनिंग से बीटेक (B. Tech), बीई (B.E) और बीएससी (BSC) कोर्स कर सकते है.

माइनिंग कोर्स के अन्तर्गत उम्मीदवार को ड्रिलिंग (Drilling), ब्लास्टिंग (Blasting), माइन कॉस्ट इंजीनियरिंग (Mine Cost Engineering), अयस्क रिजर्व विश्लेषण (Ore Reserve Analysis), ऑपरेशन विश्लेषण (Operation Analysis), माइन वेंटीलेशन (Main ventilation), माइन प्लानिंग (Mine Planning), माइन सेफ्टी (Mine Safety), रॉक मैकेनिक्स (Rock Mechanics), कम्प्यूटर एप्लीकेशन (Computer Applications), इंडस्ट्रियल मैनेजमेंट (Industrial Management) से सम्बंधित जानकारी दी जाती है।

मुख्य रूप से इस कोर्स के तहत उम्मीदवार को खनिज पदार्थों की संभावनाओं (Prospects) का पता लगाना, उनके नमूने एकत्रित करना (To collect their samples), भूमिगत (Underground) तथा भूतल खदानों का विस्तार (Surface mines expand) और विकास करना, खनिजों को परिष्कृत करना (To refine minerals) आदि के बारे में जानकारी प्रदान की जाती है।

माइनिंग इंजीनियरिंग में पढ़ाई के बाद कैंडिडेट्स के पास सरकारी और निजी सेक्टरों में रोजगार के अवसर हैं। टाटा आयरन एंड स्टील, रिलायंस पेट्रोलियम, इंडियन ऑयल, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया, यूरेनियम कॉपोरेशन ऑफ इंडिया, सरकारी खनन निगम, हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड, नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन, इंडियन ब्यूरो ऑफ माइंस लिमिटेड, माइनिंग रिसर्च सेंटर, इंडियन एक्सप्लोसिव लिमिटेड, इंडियन डेटोनेटर्स लिमिटेड में करियर शुरू कर सकते हैं।

    झारखण्ड में माइनिंग इंजीनियरिंग के टॉप संस्थान :

  • आटीआईटी धनबाद
  • बीआईटी सिंदरी
  • सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ़ माइनिंग एंड फ्यूल रिसर्च धनबाद गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक, निरसा, धनबाद
  • झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी, रांची
WICCI NEW-01

“जनजातीय समृद्ध विरासत एवं बुद्धिमता को वैश्विक पहचान देते हुए आदिवासी महिलाओं को उद्यमिता से जोड़ने के लिए कौंसिल प्रतिबद्ध “- ड़ॉ. सेंगर ।

विमेंस इंडियन चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (विकी), ट्राइबल वेलफेयर एंड इंटरप्रेन्योरशिप कॉउन्सिल देश की आदिवासी महिलाओं को उद्यमिता और नवाचार से जुड़े कार्यो के लिए प्रेरित करने एवं उनके सामाजिक- आर्थिक विकास के लिए प्रतिबद्ध है। विकी की स्थापना ऑल लेडीज लीग (ALL) और वीमेन इकनोमिक फोरम (WEF ) की तर्ज पर हुआ है। इसके वैश्विक दायरे और संपर्क का लाभ महिलाओं मिलता रहा है। संस्था ने अपने प्रयासों से महिलाओं को व्यापार और बाजार से जुड़े कार्यो को करने के लिए प्रेरित किया है, आत्मनिर्भर बनने, स्वयं निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने एवं उद्यमिता और नवाचार से जुड़े कार्यों को करने के लिए प्रोत्साहित किया है।

विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आयोजित कौंसिल की बैठक में देश भर की आदिवासी महिलाओं को एक मंच प्रदान करने और उनके उद्यमिता और नवाचार से जुड़े मौलिक विचारों को मंच प्रदान करने के लिए ” आईडिया पिचिंग कांटेस्ट” के आयोजन पर सहमति बनी। कौंसिल की नेशनल प्रेसीडेंट ड़ॉ. सविता सेंगर (वाइस चांसलर झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी,रांची ) ने बैठक के बाद जानकारी देते बताया की ” कौंसिल की सभी सदस्य उद्यमिता और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए संकल्पित है और इस क्षेत्र में कार्य करते हुए जनजातीय संस्कृति में छिपे नवाचार को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए कार्य कर रही है। इस आयोजन का उद्देश्य जनजातीय समाज के समृद्ध विरासत, उपरचात्मक कार्यों और बुद्धिमता को पहचान देते हुए आदिवासी महिलाओं में छिपे उद्यम और नवाचार को पहचान दिलाना है। ” ड़ॉ. सेंगर ने ट्राइबल वेलफेयर एंड इंटरप्रेन्योरशिप कॉउन्सिल की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया की ” कौंसिल, विकी के सेंटर फॉर एक्सीलेंस की तर्ज पर कार्य करते हुए देश की आदिवासी महिलाओं के सतत आजीविका संवर्धन और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए कार्य करता है। विकी के अखिल भारतीय संपर्क के जरिये कौंसिल आदिवासी महिलाओं को जोड़ने का कार्य करती है। इनके सामाजिक आर्थिक विकास के लिए समय- समय पर परामर्श , प्रशिक्षण भी दिया करती है। उत्पादों का मानदंड और प्रमाणीकरण निर्धारित करने एवं वैश्विक स्तर के उत्पाद के तौर पर पहचान दिलाने में मदद करती है। कौंसिल के प्रमुख कार्यों में जनजातीय समाज के प्राचीन ज्ञान और बुद्धिमत्ता को बनाये रखते हुए उत्तम कोटि केउद्यम, नवाचार,रचनात्मकता,उद्यमिता को बढ़ावा देना है।“ विकी और कौंसिल के संयुक्त प्रयास आईडिया पिचिंग कांटेस्ट को झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी, रांची में संचालित इंस्टीटूशन इनोवेशन कौंसिल (आईआईसी ) के सहयोग से आयोजित किया जायेगा। कौंसिल की बैठक में कामाक्षी रमण एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर एचआरडी, सेल, मालविका शर्मा , सोशल एंटरप्रेन्योर और एक्टिविस्ट, साँची कुमारी, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर छोटानागपुर सांस्कृतिक संघ , प्रवीण माला हेम्ब्रम, चीफ जनरल मैनेजर (पर्सनल एंड एडमिनिस्ट्रेशन )सेल, हरमीत सेहरा, हेड सीएसआर,वेदांता राजस्थान, अरुणा तिर्की ,सोशल एंटरप्रेन्योर एंड फाउंडर डायरेक्टर आजम एम्बा लिमिटेड उपस्थित थी।

higher-education

एनइपी 2020 : वॉट टू थिंक नहीं हाऊ टू थिंक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हायर एजुकेशन पर हुए कॉन्क्लेव में नई शिक्षा नीति पर कहा है कि अब वॉट टू थिंक नहीं बल्कि हाऊ टू थिंक पर फोकस किया जा रहा है।सरकार ने 30 जुलाई को नई शिक्षा नीति घोषित की थी। इसमें स्कूलों के एडमिनिस्ट्रेशन को लेकर बड़े बदलाव किए गए हैं। ऑनलाइन एजुकेशन को बढ़ावा दिया जाएगा। पढ़ाई के पैटर्न में 10 साल के अंदर धीरे-धीरे बदलाव किए जाएंगे।

https://www.jru.edu.in/blog-post/new-education-policy-2020-approved-after-34-years/

प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन की 10 बातें :

  1. बदलाव के लिए पॉलिटिकल विल जरूरी:
    मोदी ने शिक्षा नीति बनाने वाले एक्सपर्ट से कहा कि यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि इतना बड़ा रिफॉर्म जमीन पर कैसे उतारा जाएगा। इस चैलेंज को देखते हुए व्यवस्थाओं को बनाने में जहां कहीं कुछ सुधार की जरूरत है, वह हम सभी को मिलकर करना है। आप सभी राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने में सीधे तौर पर जुड़े हैं। इसलिए आप सब की भूमिका बहुत अहम है।
  2. नेशनल वैल्यूज के साथ लक्ष्य :
    हर देश अपनी शिक्षा व्यवस्था को नेशनल वैल्यूज के साथ जोड़ते हुए और नेशनल गोल्स के अनुसार रिफॉर्म्स करते हुए आगे बढ़ता है, ताकि देश का एजुकेशन सिस्टम वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों का फ्यूचर तैयार कर सके। भारत की पॉलिसी का आधार भी यही सोच है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 21वीं सदी के भारत की फाउंडेशन तैयार करने वाली है।
  3. नई नीति में स्किल्स पर फोकस:
    21वीं सदी के भारत में हमारे युवाओं को जो स्किल्स चाहिए, राष्ट्रीय शिक्षा नीति में इस पर विशेष फोकस है। भारत को ताकतवर बनाने के लिए, विकास की नई ऊंचाई पर पहुंचाने के लिए इस एजुकेशन पॉलिसी में खास जोर दिया गया है। भारत का स्टूडेंट चाहे वो नर्सरी में हो या फिर कॉलेज में, तेजी से बदलते हुए समय और जरूरतों के हिसाब से पढ़ेगा तो नेशन बिल्डिंग में कंस्ट्रक्टिव भूमिका निभा पाएगा।
  4. https://www.jru.edu.in/blog-post/first-green-house-research-center-in-jharkhand-state-located/

  5. इनोवेटिव थिंकिंग पर जोर:
    बीते कई साल से हमारे एजुकेशन सिस्टम में बदलाव नहीं हुए, जिससे समाज में क्यूरोसिटी और इमेजिनेशन की वैल्यू को प्रमोट करने के बजाय भेड़ चाल को बढ़ावा मिलने लगा था। जब तक शिक्षा में पैशन और परपज ऑफ एजुकेशन नहीं हो, तब तक हमारे युवाओं में क्रिटिकल और इनोवेटिव थिंकिंग डेवलप कैसे हो सकती है?
  6. होलिस्टिक अप्रोच की जरूरत :
    बीते कई साल से हमारे एजुकेशन सिस्टम में बदलाव नहीं हुए, उच्च शिक्षा हमारे जीवन को सद्भाव में लाती है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति का बड़ा लक्ष्य इसी से जुड़ा है। इसके लिए टुकड़ों में सोचने की बजाय होलिस्टिक अप्रोच की जरूरत है।शुरुआती दिनों में सबसे बड़े सवाल यही थे कि हमारी शिक्षा व्यवस्था युवाओं को क्यूरोसिटी और कमिटमेंट के लिए मोटिवेट करती है या नहीं? दूसरा सवाल था कि क्या शिक्षा व्यवस्था युवाओं को एम्पावर करती है? देश में एक एम्पावर सोसाइटी बनाने में मदद करती है? पॉलिसी बनाते समय इन सवालों पर गंभीरता से काम हुआ।
  7. 10+2 से आगे निकले :
    एक नई विश्व व्यवस्था खड़ी हो रही है। एक नया स्टैंडर्ड भी तय हो रहा है। इसके हिसाब से भारत का एजुकेशन सिस्टम खुद में बदलाव करे, ये भी किया जाना बहुत जरूरी था। स्कूल करिकुलम के 10+2 से आगे बढ़ना इसी दिशा में एक कदम है। हमें अपने स्टूडेंट्स को ग्लोबल सिटीजन भी बनाना है, साथ ही ध्यान रखना है कि वे जड़ों से भी जुड़े रहें। घर की बोली और स्कूल में पढ़ाई की भाषा एक होने से सीखने की गति बेहतर होगी।
  8. https://www.jru.edu.in/blog-post/jharkhand-rai-university-ke-11-diploma-students-ka-chayan/

  9. हाउ टू थिंक पर जोर :
    अभी तक की व्यवस्था में वॉट यू थिंक पर फोकस रहा है, जबकि नई नीति में हाऊ टू थिंक पर जोर दिया जा रहा है। हर तरह की जानकारी आपके मोबाइल पर है, लेकिन जरूरी ये है कि क्या जानकारी अहम है। नई नीति में इस बात पर ध्यान रखा गया है। ढेर सारी किताबों की जरूरत को खत्म करने पर जोर दिया गया है। इन्क्वायरी, डिस्कवरी, डिस्कशन और एनालिसिस पर जोर दिया जा रहा है। इससे बच्चों में सीखने की ललक बढ़ेगी। हर छात्र को यह मौका मिलना ही चाहिए कि वह अपने पैशन को फॉलो करे।
  10. रीस्किल-अपस्किल से प्रोफेशन बदल सकेंगे :
    अक्सर ऐसा होता है कि कोई कोर्स करने के बाद स्टूडेंट जॉब के लिए जाता है तो पता चलता है कि जो पढ़ा वो जॉब की जरूरतों को पूरा नहीं करता। इन जरूरतों का ख्याल रखते हुए मल्टीपल एंट्री-एग्जिट का ऑप्शन दिया गया है। स्टूडेंट वापस अपने कोर्स से जुड़कर जॉब की जरूरत के हिसाब से पढ़ाई कर सकता है।
    कोई कोर्स बीच में छोड़कर दूसरे में एडमिशन लेना चाहे तो यह भी संभव है। हायर एजुकेशन को स्ट्रीम से मुक्त कर देना, मल्टीपल एंट्री और एग्जिट के पीछे लंबी दूरी की सोच के साथ हम आगे आए हैं। उस युग की तरफ बढ़ रहे हैं, जहां कोई व्यक्ति जीवनभर किसी एक प्रोफेशन में नहीं टिका रहेगा। इसके लिए उसे लगातार खुद को रीस्किल और अपस्किल करते रहना होगा।
  11. रिसर्च और एजुकेशन का गैप होगा खत्म :
    कोडिंग पर फोकस हो या फिर रिसर्च पर ज्यादा जोर, ये सिर्फ एजुकेशन सिस्टम ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की अप्रोच को बदलने का जरिया बन सकता है। वर्चुअल लैब जैसे कंसेप्ट लाखों साथियों के पास बेहतर शिक्षा को ले जाने वाला है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति रिसर्च और एजुकेशन के गैप को खत्म करने में भी अहम भूमिका निभाने वाली है। आज इनोवेशन और एडेप्शन की जो वैल्यू हम समाज में निर्मित करना चाहते हैं वो हमारे देश के इंस्टीट्यूशंस से शुरू होने जा रही है।
  12. टीचर सीखेंगे तो देश बढ़ेगा :
    भारत का टैलेंट भारत में ही रहकर आने वाली पीढ़ियों का विकास करे, इस पर जोर दिया गया है। टीचर्स ट्रेनिंग पर बहुत फोकस है। आई बिलीव वेन ए टीचर लर्न, ए नेशन लीड। राष्ट्रीय शिक्षा नीति सिर्फ एक सर्कुलर नहीं है, इसके लिए मन बनाना होगा। भारत के वर्तमान और भविष्य को बनाने के लिए यह एक महायज्ञ है। 21वीं सदी में मिला बहुत बड़ा अवसर है।
education system

34 साल बाद नई शिक्षा नीति 2020 को मंजूरी

नई शिक्षा नीति-2020 को कैबिनेट की मंज़ूरी मिल गई है। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक और सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने प्रेस वार्ता कर इसकी जानकारी दी ।

इससे पहले 1986 में शिक्षा नीति लागू की गई थी. 1992 में इस नीति में कुछ संशोधन किए गए थे. यानी 34 साल बाद देश में एक नई शिक्षा नीति लागू की जा रही है।

पूर्व इसरो प्रमुख के कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में विशेषज्ञों की एक समिति ने इसका मसौदा तैयार किया था, प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने इसे मंज़ूरी दी।

https://www.jru.edu.in/blog-post/eleven-students-placed-during-lockdown-in-a-leading-company/

नई शिक्षा नीति 2020 की मुख्य बातें :

  • मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदल कर शिक्षा मंत्रालय कर दिया गया है ।
  • नई शिक्षा का लक्ष्य 2030 तक 3-18 आयु वर्ग के प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करता है।
  • छठी क्लास से वोकेशनल कोर्स शुरू किए जाएंगे। इसके लिए इसके इच्छुक छात्रों को छठी क्लास के बाद से ही इंटर्नशिप करवाई जाएगी ।इसके अलावा म्यूज़िक और आर्ट्स को बढ़ावा दिया जाएगा।इन्हें पाठयक्रम में लागू किया जाएगा।
  • उच्च शिक्षा के लिए एक सिंगल रेगुलेटर रहेगा (लॉ और मेडिकल एजुकेशन को छोड़कर)। यानी अब यूजीसी और एआईसीटीई समाप्त कर दिए जाएंगे और पूरे उच्च शिक्षा के लिए एक नेशनल हायर एजुकेशन रेगुलेटरी अथॉरिटी का गठन किया जाएगा।
  • https://www.jru.edu.in/blog-post/job-required-after-12th-job-guarantee-in-these-courses/

  • पहली बार मल्टीपल एंट्री और एग्ज़िट सिस्टम लागू किया गया है। इसे इस तरह समझ सकते हैं:- आज की व्यवस्था में अगर चार साल इंजीनियरिंग पढ़ने या छह सेमेस्टर पढ़ने के बाद किसी कारणवश आगे नहीं पढ़ पाते हैं तो आपके पास कोई उपाय नहीं होता, लेकिन मल्टीपल एंट्री और एग्ज़िट सिस्टम में एक साल के बाद सर्टिफ़िकेट, दो साल के बाद डिप्लोमा और तीन-चार साल के बाद डिग्री मिल जाएगी. इससे उन छात्रों को बहुत फ़ायदा होगा जिनकी पढ़ाई बीच में किसी वजह से छूट जाती है।
  • उच्च शिक्षा में कई बदलाव किए गए हैं. जो छात्र रिसर्च करना चाहते हैं उनके लिए चार साल का डिग्री प्रोग्राम होगा। जो लोग नौकरी में जाना चाहते हैं वो तीन साल का ही डिग्री प्रोग्राम करेंगे. लेकिन जो रिसर्च में जाना चाहते हैं वो एक साल के एमए (MA) के साथ चार साल के डिग्री प्रोग्राम के बाद सीधे पीएचडी (Ph.D) कर सकते हैं। उन्हें एमफ़िल (M.Phil) की ज़रूरत नहीं होगी।
  • शोध करने के लिए नेशनल रिसर्च फ़ाउंडेशन (एनआरएफ़) की स्थापना की जाएगी. एनआरएफ़ का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालयों के माध्यम से शोध की संस्कृति को सक्षम बनाना होगा. एनआरएफ़ स्वतंत्र रूप से सरकार द्वारा, एक बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स द्वारा शासित होगा।
  • https://www.jru.edu.in/blog-post/which-industry-is-hiring-engineers/

  • उच्च शिक्षा संस्थानों को फ़ीस चार्ज करने के मामले में और पारदर्शिता लानी होगी।
  • ई-पाठ्यक्रम क्षेत्रीय भाषाओं में विकसित किए जाएंगे. वर्चुअल लैब विकसित की जा रही है और एक राष्ट्रीय शैक्षिक टेक्नोलॉजी फ़ोरम (NETF) बनाया जा रहा है।
  • उच्च शिक्षा में 2035 तक 50 फ़ीसद GER (Gross Enrolment Ratio) पहुंचाने का लक्ष्य है।
Job-Interview

12 वीं के बाद चाहिए जॉब: इन कोर्सेज में है जॉब की गारंटी

बारहवीं के रिजल्ट जारी हो चुके हैं। जैक बोर्ड, सीबीएसई, आईसीएसई बोर्ड द्वारा आयोजित होने वाली परीक्षाओं के परिणाम घोषित हो चुके हैं। बारहवीं के बाद छात्रों के मन में सबसे बड़ा सवाल ये खड़ा होता है कि आगे वो किस क्षेत्र में अपना करियर बनाएं। भीड़ से अलग दिखने वाले कोर्सेज ही सफलता की गारंटी है जरुरी नहीं। पारंपरिक कोर्सेज आज भी लोकप्रिय और रोजगारपरक बने हुए है।एक नजर वैसे कोर्सेज पर जो बारहवीं के बाद आप कर सकते है जिनसे व्यक्तित्व तो निखरेगा ही, साथ ही अच्छे पैसे भी कमा सकते हैं।

https://www.jru.edu.in/blog-post/which-industry-is-hiring-engineers/

पारंपरिक कोर्स :

  • मास्टर ऑफ़ बिज़नेस एडमिनिस्ट्रेशन (एमबीए )
  • बैचलर ऑफ़ बिज़नेस एडमिनिस्ट्रेशन (बीबीए )
  • मास्टर ऑफ़ कंप्यूटर एप्लीकेशन (एमसीए )
  • बैचलर ऑफ़ कंप्यूटर एप्लीकेशन (बीसीए )
  • बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीटेक )
  • डिप्लोमा इन इंजीनियरिंग ( डीई )

https://www.jru.edu.in/blog-post/mining-engineer-bankar-sawaren-apna-bhavishya/

आज कल का ट्रेंड :
12 वीं के बाद रोजगार देने वाले कोर्स की बात करें तो आज भी एग्रीकल्चर और फार्मेसी अपना क्रेज बनाये हुए है। ये दोनों ही कोर्स मार्केट में अपनी मजबूत उपस्थिति रखते है और स्टूडेंट्स को आकर्षितकरते है।

  • डिप्लोमा इन फार्मेसी ( डी. फार्म )
  • बैचलर ऑफ़ फार्मेसी ( बी. फार्म )
  • बैचलर और साइंस इन एग्रीकल्चर (बीएससी एग्रीकल्चर )

https://www.jru.edu.in/blog-post/bba-logistics-ranchi-college/

जरा हटके कोर्स :

  • माइनिंग इंजीनियरिंग
  • डिप्लोमा इन माइनिंग इंजीनियरिंग
  • बीटेक इन माइनिंग इंजीनियरिंग

10 वीं उत्तीर्ण छात्र डिप्लोमा में ले सकते है नामांकन

  • पोस्ट डिप्लोमा प्रैक्टिकल ट्रेनिंग ( पीडीपीटी) इन माइनिंग।
  • पोस्ट ग्रेजुएट प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (पीजीपीटी ) इन माइनिंग।
  • ओवरमैन सर्टिफिकेट ऑफ़ कॉम्पिटेंसी।
  • औद्योगिक प्रशिक्षण के दौरान 9000 तक छात्रवृति सुविधा।
  • इंटर्नशिप / ट्रेनिंग ( सीसीएल, एनसीएल, एचसीएल , इसीएल,बीसीसीएल, सेल टाटा स्टील)

बीबीए इन लॉजिस्टिक्स | हाई लाइट्स ऑफ़ द कोर्स :

  • सरकार के उच्च शिक्षा मंत्रालय और कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय द्वारा संचालित।
  • इंडस्ट्रियल सेक्टर की जरूरतों को पूरा करने वाला।
  • स्किल्ड और इंडस्ट्री रेडी बनाने में मददगार ।
  • लाइफ स्किल्स और पर्सनालिटी डेवलपमेंट ।
  • पढ़ाई के दौरान 18 महीने का औद्योगिक प्रशिक्षण।
  • प्रत्येक प्रशिक्षण समाप्त होने पर सरकार द्वारा प्रमाणपत्र।
  • औद्योगिक प्रशिक्षण के कार्य अनुभव को मान्यता।
  • औद्योगिक प्रशिक्षण के दौरान 9000-15000 छात्रवृति सुविधा।
  • ग्रामीण छात्रों के लिए रोजगार प्राप्त करने का सुनहरा अवसर।
  • लॉजिस्टिक्स सेक्टर स्किल कौंसिल द्वारा नौकरी की सुविधा।
  • स्टार्टअप्स और इंटरप्रेन्योर बनने का अवसर।
STUDENTS PLACMENTS DIPLOMA IN ENGINEERING RANCHI 1

ELEVEN STUDENTS PLACED DURING LOCKDOWN IN A LEADING COMPANY

Getting a job during the lockdown is a difficult task. But the Placement Team at Jharkhand Rai University continues to network with various industries to help students in their final placements.

Recently, eleven students from Diploma in Engineering got exciting job opportunities in Marelli Motherson Automotive Lighting India Pvt. Ltd.. The company is a joint Venture between SAMIL and Marelli Motherson Holding S.p.A, Italy. The company has plants in Manesar and Pune in India. Students will be trained during the initial few months at the Pune plant.

The University is proud of these students. We wish them all the best for their future prospects.

STUDENTS PLACMENTS DIPLOMA IN ENGINEERING RANCHI 1

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BEST DIPLOMA ENGINEERING COLLEGE RANCHI