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झारखंड राय यूनिवर्सिटी में एचआर कॉन्क्लेव का आयोजन। कॉरपोरेट वर्ल्ड के दिग्गजों का लगा जमावड़ा

झारखंड राय यूनिवर्सिटी, रांची में आयोजित ऑनलाइन एक दिवसीय एच आर कॉन्क्लेव का शुभारंभ शनिवार को किया गया। कॉन्क्लेव का विषय’ ट्रांस्फोर्मिंग एच आर – अ टर्न अराउंड इन न्यू नार्मल ‘ रखा गया था।
कॉन्क्लेव का विधिवत उद्घाटन दीप प्रज्वलित करते हुए सरस्वती वंदना के साथ किया गया।
विषय प्रवेश कराते हुए झारखंड राय यूनिवर्सिटी की कुलपति प्रो.(डॉ.) सविता सेंगर ने अपने संबोधन के दौरान कॉन्क्लेव के ट्रांस्फोर्मिंग एचआर थीम को विस्तार के साथ परिभाषित किया।

उन्होंने कोविड के संक्रमण काल में बदलते मानव संसाधन और मानव प्रबंधन कार्यो की चर्चा की। शिक्षा,उद्योग जगत में देखे जा रहे बदलावों पर अपना विचार रखते हुए डॉ. सेंगर ने कहा कि ऑनलाइन माध्यमयों का उपयोग मानव संसाधन प्रबंधन से जुड़े कार्यों में अगर किसी ने किया है तो वह एचआर विभाग रहा है।

उन्होंने चुनौतियों और संभावनाओं पर भी अपने निजी विचारों से सभी को अवगत कराने का कार्य किया।

स्वागत भाषण करते हुए बीओपीटी ( पूर्वी क्षेत्र) के डायरेक्टर एजाज अहमद ने “स्किल डेवलपमेंट एंड ट्रेनिंग की चैलेंजेज एंड न्यू बिजनेस मॉडल पोस्ट कोविड19” विषय पर अपना विचार रखा। उन्होंने कहा कि मेरे यह विचार मेरे 20 साल के अनुभव का सार है । पिछले 100 वर्षों के दौरान कोरोना का यह संकट सबके किये पहला अनुभव रहा । इस आपदा ने श्रम और रोजगार के क्षेत्र को सबसे ज्यादा प्रभावित किया । शिक्षा जगत अभी भी पूरी तरह पटरी पर नहीं लौट पाया है। लेकिन तकनीक के सहयोग से हमने इस संकट का चुनौती पूर्वक सामना किया है। ‘डूइंग बाई लर्निंग ‘ डिस्टेंस लर्निंग,ऑनलाइन लर्निंग ने संभावनाओं के नए द्वार खोले है । पब्लिक,प्राइवेट पार्टनरशिप ने इसे और मजबूती प्रदान करने का कार्य किया है।

कॉन्क्लेव में विशेष व्याख्यान देते हुए एचईसी के पूर्व सीएमडी अभिजीत घोष ने ‘चैलेंजेज एंड ऑपरट्यूनिटी इन मैनुफैक्चरिंग इंडस्ट्रीज इन पोस्ट कोविड 19 ‘ पर अपनी बातें रखी ।उन्होंने बताया कि मैनुफैक्चरिंग इंडस्ट्री के लिए यह आपदा काल किसी बड़े संकट की तरह था जिसमें ट्रांसपोर्ट, शिपिंग, प्लेन सर्विसेज सभी बंद हो गए थे। मैनुफैक्चर किये गए सामानों को बाजार नहीं मिल रहा था। कुछ इसी तरह का हाल एडुकेशन और अन्य सर्विस सेक्टरों का था। लेकिन जल्द ही हमने इन चुनौतियों से सामना करना सीख लिया और इसमें तकनीक,आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स का बहुत बड़ा योगदान रहा है।

सीसीएल, रांची के सीएमडी पी.एम. प्रसाद ने कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए वैश्विक स्तर पर इन डेढ़ वर्षो के दौरान हुए बदलाओं, वर्क फ्रॉम होम , काम के घंटो में आई कमी और भारत के पड़ोसी देशों में बदलती परिस्थिति की भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि आपदा के कारण आयी मंदी और उत्पादन में कमी को पूरा करने में कोल इंडस्ट्रीज का महत्वपूर्ण योगदान होगा।

कॉन्क्लेव के उदघाटन सत्र के समापन अवसर पर धन्यवाद ज्ञापन करने का कार्य यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रार प्रो. डॉ. पीयूष रंजन ने किया। उन्होंने कॉन्क्लेव में शामिल सभी अतिथियों का स्नेह पूर्ण धन्यवाद किया और पैनल डिस्कसन में शामिल होने वाले कॉर्पोरेट जागत के दिगज्जओं का अभिवादन और अभिनंदन किया।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. अमृता मजूमदार ने किया।

ISC 12th EXAMS CANCELLED RANCHI JHARKHAND STUDENTS 2021

ISC 12th EXAMS CANCELLED – 2021

The decision to cancel ISC 12th examinations by CISCE came after the Central Board of Secondary Education cancelled its class 12th examination 2021. Director of CISCE, Gerry Arathoon, announced that CISCE ISC 12th exams are cancelled due to Covid 19 situation.

The alternative assessment criteria will be announced soon.

READ THE ISC EXAM PRESS RELEASE HERE

In view of the pandemic conditions due to Covid and the feedback obtained from various stakeholders, it was decided that Class XII board exams would not be held this year.

PM Modi chaired a review meeting on June 1, 2021 regarding the Class 12 Board exams of CBSE. Following the meeting, PM Modi announced the decision to cancel the 12th exams and said: “COVID-19 has affected the academic calendar and the issue of Board Exams has been causing immense anxiety among students, parents and teachers, which must be put to an end.”

The Prime Minister said that the decision on Class XII CBSE Exams has been taken in the interest of students. He stated that Covid-19 has affected the academic calendar and the issue of Board exams has been causing immense anxiety among students, parents and teachers, which must be put to an end.

CISCE ISC 12TH EVALUATION CRITERIA

As for the evaluation criteria, the Council of Indian School of Certificate Examination has not announced any final evaluation criteria for ISC 12th students yet. It is most likely that CISCE will follow the CBSE 12th evaluation criteria of 2021.

CBSE EXAMS CANCELLED 2021 RANCHI JHARKHAND STUDENTS

Class 12th Board Exams Cancelled

Due to COVID and the feedback obtained from various stakeholders, it was decided that Class XII Board Exams would not be held this year. It was also decided that CBSE will take steps to compile the results of class XII students as per a well-defined objective criteria in a time-bound manner.

The Hon’ble Prime Minister said that the decision on Class 12 CBSE Exams has been taken in the interest of students. He stated that COVID-19 has affected the academic calendar and the issue of Board Exams has been causing immense anxiety among students, parents and teachers, which must be put to an end.

PM said that the Covid situation is a dynamic situation across the country. While the numbers are coming down in the country and some states are managing the situation through effective micro-containment, some states have still opted for a lockdown.

CBSE EXAMS CANCELLED 2021 RANCHI JHARKHAND STUDENTS

Students, parents and teachers are naturally worried about the health of the students in such a situation. PM said that students should not be forced to appear for exams in such a stressful situation.

The Prime Minister stressed that the health and safety of our students is of utmost importance and there would be no compromise on this aspect. He said that in today’s time, such exams cannot be the reason to put our youth at risk.

HOW WILL CBSE RESULTS BE PREPARED?

PM directed officials to ensure that the results are prepared in accordance with well-defined criteria, in a fair and time-bound manner.

Referring to the wide consultative process, PM expressed appreciation that a student friendly decision has been reached after consulting all stakeholders from across the length and breadth of India. He also thanked the States for providing feedback on this issue.

CAN I STILL APPEAR FOR CBSE EXAMS?

It was also decided that like last year, in case some students desire to take the exams, such an option would be provided to them by CBSE, as and when the situation becomes conducive.

The Prime Minister had earlier held a high-level meeting on 21/05/21 which was attended by Ministers & officials. Thereafter a meeting under the Chairmanship of Union Defence Minister was held on 23.05.2021 which was attended by the Education Minsters of States. Various options for conduct of CBSE examinations were discussed in the meeting and feedback obtained from the States and UTs.

(Source: PIB)

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झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी का जागरूकता अभियान: सफाई भी, दवाई भी और कड़ाई भी

रांची सहित देश के कई हिस्सों में कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रसार को रोकने के लिए यूजीसी के द्वारा विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को आगे आने के लिए कहा गया है। यूजीसी ने सभी कुलपति और कॉलेज प्राचार्यों को पत्र भेज कर कोरोना से बचाव के लिए ‘दवाई भी, कड़ाई भी ‘ के तहत जागरूकता अभियान चलाने को कहा है। विश्वविद्यालय और कॉलेज के एनएसएस और एनसीसी इकाई का सहयोग जागरूकता अभियान को गति देने के लिए लिया जा सकता है। यूजीसी के पत्र में कहा गया है की विश्विद्यालय और कॉलेज के शिक्षक, अधिकारी और विद्यार्थी इस जागरूकता अभियान को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँचाने के लिए प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक,सोशल मीडिया का सहारा लिया जाय। जागरूकता के तहत लोगों के बीच हमेशा मास्क लगाने, हाथ को साबुन से धोने, अल्कोहल युक्त सैनिटाइजर उपयोग में लाने,आँख, कान , नाक और मुँह को बार बार छूने से बचने, एक दूसरे के बीच सामाजिक दुरी का पालन करने, किसी को बुखार, कफ और साँस लेने में तकलीफ होने पर तुरंत टॉल फ्री नंबर 1075 और राज्य सरकार (झारखण्ड ) द्वारा जारी हेल्प लाइन नंबर 104/181 पर कॉल करने के लिए प्रेरित करने का कार्य करें।

पत्र में विश्वविद्यालय को राज्य सरकार एवं जिला प्रशासन के साथ मिल कर जागरूकता अभियान चलाने का आग्रह किया गया है।

झारखण्ड राय विश्वविद्यालय ने यूजीसी के निर्देश के आलोक में एक्सटेंशन एक्टिविटी के तहत अपने ऑफिसियल वेबसाइट और सोशल मीडिया पेज पर जागरूकता अभियान चला रखा है। इसे अलावा विश्वविद्यालय एनएसएस इकाई के सहयोग से आयुर्वेदिक इम्युनिटी बूस्टर टैबलेट्स का निः शुल्क वितरण भी किया जा रहा है। यह अभियान पिछले तीन महीनो से चलाया जा रहा है। इस कार्य को सफलतापूर्वक संपन्न करने में एनएसएस स्वयंसेवकों का सहयोग लिया जा रहा है। पिछले दिनों इसी कड़ी में रांची के रातू अंचल कार्यालय में कवाथ इम्युनिटी टैबलेट्स का निः शुल्क वितरण किया गया।

झारखंड राय यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार प्रो. (डॉ.) पीयूष रंजन ने जानकारी देते हुए बताया कि “यूजीसी के निर्देश के तहत विश्वविद्यालय ने पूर्व में ही हेल्पलाइन नंबर 1800 120 2546 जारी किया हुआ है। यह हेल्पलाइन नंबर विद्यार्थियों की किसी भी शैक्षणिक, मानसिक परेशानी होने पर निवारण करने में सहयोग प्रदान करता है।“

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी के माइनिंग इंजीनियरिंग स्टूडेंट दीपक सिंह ड्रीम बिग सीजन वन फोटोशूट में चयनित

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी, डिपार्टमेंट ऑफ़ माइनिंग इंजीनियरिंग के सेमेस्टर चार के स्टूडेंट दीपक किशोर सिंह का चयन “ड्रीम बिग सीजन वन फोटोशूट” के लिए किया गया है। आसनसोल के रहने वाले दीपक डिप्लोमा माइनिंग इंजीनियरिंग की पढ़ाई बीआईटी नागपुर से पूरी की है और बीटेक माइनिंग इंजीनियरिंग के लिए उनकी पसंद झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी रांची थी। अपनी सफलता को लॉक डाउन और कोरोना पैंडेमिक से जोड़ते हुए इन्होंने बताया ” उस दौरान मैं भी सभी स्टूडेंट्स की तरह ऑनलाइन अच्छे कॉलेज में एडमिशन सर्च कर रहा था और खली समय में नेट सर्फिंग किया करता था। इस दौरान मैंने एक ब्लॉग बनाया और कुछ लिखने के साथ वीडियो ब्लॉगिंग की शुरुवात अपने गृह नगर आसनसोल से किया। इसका नाम ‘फैसनेबल आसनसोल’ रखा था। सोशल मीडिया सर्च के दौरान मुझे प्रिंस नरूला के द्वारा लॉक डाउन के दौरान आयोजित होने वाले टैलेंट हंट कार्यक्रम की जानकारी मिली। प्रिंस नरूला एक जाने माने मॉडल और एमटीवी रोडीज़ 12 के विजेता रह चुके हैं। उन्होंने कई टीवी धारावाहिकों में भी काम किया है जिनमे रियलिटी शो बिग बॉस खासा चर्चित रहा। बिग बॉस 9 को उन्होंने जीता भी है। बस यही मुझे आकर्षित करने के लिए काफी था और मैंने फिर इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेने का फैसला किया। ”

दीपक के अनुसार प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए मैंने अपना फोटो और एक शार्ट वीडियो प्रोफाइल बनाकर भेजा। प्रतियोगिता में 40 बेहतरीन चेहरों का चयन किया गया जिनका पोर्टफोलियो शूट प्रिंस नरूला के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।

ड्रीम बिग सीजन एक में चयनित होने के बाद दीपक के पास मॉडलिंग से जुड़े तीन ऑफर भी है जिस पर वह काम चल रहा है। दीपक ने अपने हॉबी और अकादमिक करियर पर बात करते हुए बताया की ” मुझे क्रिकेट खेलना पसंद है और मैंने डिप्लोमा की पढ़ाई के दौरान अपने यूनिवर्सिटी को रिप्रजेंट भी किया। बीटेक की पढ़ाई पूरी करने के बाद मैं माइनिंग इंजीनियरिंग में ही एमटेक करना चाहता हूँ। आने वाले समय में मुझे रणविजय सांगा के साथ काम करने का मौका मिलने वाला है जो मुझे इस फील्ड में एक नई पहचान दिलाने में मददगार साबित होगा।“

विभाग के छात्र दीपक की सफलता पर विभाग समन्वयक प्रो. सुमित किशोर सहित अन्य शिक्षकों ने हर्ष वयक्त किया है।

यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार प्रो. (डॉ) पियूष रंजन ने दीपक सिंह के उज्वल भविष्य की कामना करते हुए पढ़ाई के साथ मॉडलिंग को करियर के तौर पर अपनाने पर हर्ष जताया है। उन्होंने अपने संदेश में माइनिंग इंजीनियरिंग विभाग के शिक्षकों का भी धन्यवाद किया है।

FUTURE OF WORK AND JOB 2021

HAS THE ‘FUTURE OF WORK’ ARRIVED?

Yes. It has arrived. This is according to the recent report by World Economic Forum. It indicates that what used to be considered the “future of work” has already arrived.

The report predicts that by 2025, automation and a new division of labour between humans and machines will disrupt 85 million jobs globally in medium and large businesses across 15 industries and 26 economies.

So, what are the roles that are expanding in the work space? The report suggests automation and digitization in the workplace are increasing.

FUTURE OF WORK AND JOB 2021

More than 80% of business executives are accelerating plans to digitize work processes and deploy new technologies; and 50% of employers are expecting to accelerate the automation of some roles in their companies.

By 2025, employers will divide work between human and machines equally. Roles that leverage human skills will rise in demand.

The tasks where humans are set to retain their comparative advantage include managing, advising, decision-making, reasoning, communicating and interacting.

There will be a surge in demand for workers who can fill green economy jobs, roles at the forefront of the data and artificial intelligence economy, as well as new roles in engineering, cloud computing and product development.

The report focuses repeatedly on reskilling and upskilling. In other words, those who are getting themselves ready for the new age job scenario.

FUTURE OF WORK 2021 3

According to The Future of Jobs Survey, core skills such as critical thinking, analysis and problem-solving are consistently top of the reskilling and upskilling priorities for educators and businesses. Newly emerging are skills in self-management such as resilience, stress tolerance and flexibility.

WHAT CAN YOU DO TO BE FUTURE READY?

Academicians feel that students who dropped out of admissions process last year made a mistake. Economy, we have seen in the past is subject to volatility. Ups and downs are a given. But it is better for students to enroll into a course than just wait around for the economy to recover.

No one can predict when the ‘recovery’ will happen? But those who are ready with skills, those who have the necessary training to be hired will find a job.

Every economic scenario throws something off balance. Simultaneously, it also throws new kinds of jobs that emerge in that particular situation. For example, look at how the digital disruption has created jobs at several levels which was unthinkable just 5 years back.

The smart way to handle the situation is to talk to counsellors and find out which is the best course for you, based on your acumen and the market situation. Talk to a career counsellor if you are confused – 18001202546

To deal with a tough scenario, find a way. Don’t just drop out of competition. Find a way to be future ready!

SHOULD I DROP A YEAR

TO DROP A YEAR IS A TRICKY DECISION. KNOW WHY

Are you thinking of dropping a year? Then wait! That’s a big decision. You have to cautiously analyse before you think of dropping one academic year.

Why? Because these decisions are tricky. If you are unable to decide, then let’s walk you through some points that will help you take a better decision.

LOSING ONE YEAR

This means giving up an entire year of your career. Remember, lost time never comes back. What seems like a sensible reason now, can be difficult to live through when you see your school batchmates involved in college assignments and are ahead of you by one whole year in life forever.DROPPING ADMISSIONS THIS YEAR

GAP YEAR BEFORE COLLEGE

IF you take a gap year and end up spending the entire year on social media, digital devices or binge-watching series on some platforms, it will be a complete waste of an entire year.

With such junk habits and a tendency to delay career decisions, you might end up wasting a whole year without doing anything productive.

The drop year may make you more disorganised and you may find it difficult to cope with the university schedule once you join.

PLAN & PLAN

You may think of dropping a year, it is essential to help you take a break. But you need to plan ahead.

Even if you are considering dropping a year, still do a detail research on the college or university you would like to join next year now itself.

This way, through research and after talking to career counsellors you may discover may be dropping a year is not such a great idea.

Research the course you want to enroll on and the location you want to study at. These are important decisions that should not be left until the last moment.

LATE THAN YOUR OWN BATCHMATES

Imagine after completing your university study, you accept a job. Your school mate who did not take a gap year is already working in the same company. He is one year senior to you, while you will be joining the same company as a fresher.

After all, lost time never traces its steps back. While your classmates and school friends are moving ahead in life and career, you will lose one year.

When you join university, your friends will be one year senior to you. Because they have already completed their study before you. It would also mean that you will get a job one year later to them.

Keep this in mind before you decide to go for the gap year option.

GAP IN YOUR RESUME/CV

When you take a gap year, it is going to become a part of your CV throughout your life. At every interview, you will have to explain why you took a year off. And you will have to justify how the gap year helped you grow academically, professionally or personally.

Are you ready to carry this tag in your CV forever? Think before you decide.

There are many reasons why students opt to take a gap year before they step into university life. Irrespective of the reason, taking a gap year before university is not a very good idea.

 

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स्प्रिंकलर सिंचाई में पानी की खपत हो कम और किसानों को मिले भरपूर फसल

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी, रांची के द्वारा उन्नत कृषि को बढ़ावा देने के लिए कई कार्य किये जा रहे है इनमें शामिल है स्प्रिंकलर सिंचाई तकनीक के जरिये किया जाने वाला कृषि कार्य। इस तकनीक से कैसे खेती करते हुए ज्यादा फसल प्राप्त करें इसका लाभ आस-पास रहने वाले किसानो को भी मिल रहा है। उन्नत कृषि को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय द्वारा ड्रिप एरिगेशन, मल्चिंग, पोली हाउस, स्प्रिंकलर सिंचाई का प्रचार प्रसार भी किया है।

किसानों को उन्नत फसल और तकनीक की जानकारी प्रदान करने में यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ़ एग्रीकल्चर साइंस के अनुभवी शिक्षकों का लाभ भी किसानों को मिलता रहता है। झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी नामकुम कैंपस में बेहत उन्नत तकनीक का हाइड्रोफोनिक्स लैब भी स्थापित है जहाँ स्टूडेंट्स को प्रशिक्षण पूरा करने पर प्रमाणपत्र भी उपलब्ध करवाया जाता है।

स्प्रिंकलर सिंचाई तकनीक ड्रिप सिंचाई की तरह ही बूंद बूंद सिंचाई तकनीक है।इसे बौछारी सिंचाई भी कहा जाता है। इसमें पानी पौधों के जड़ों में नहीं जाकर वर्षा के फुहारों की तरह गिरता है। यह सिंचाई करने का आधुनिक तरीका है। इसमें छिद्र वाली नालियों से जल का प्रवाह किया जाता है और फिर फुहारों की तरह पानी की बूंदें पौधों पर गिरती है। इसमें मुख्य तत्व मोटर पंप, पाइप फ़िल्टर ,पाइप की मुख्य नली, बौछार करने वाली पाइप की नली और पानी फेखने वाला फुहारा है। इनकी सहायता से ही स्प्रिंकलर कार्य करता है।

स्प्रिंकलर का पानी छिड़कने वाला नॉजील हमेशा घूमता रहता है जिससे आस -पास के पौधों पर पानी की फुहार पड़ती रहती है। स्प्रिंकलर सेट को एक जगह से दूसरी जगह आसानी से ले जाया जा सकता है। इसका मतलब है इसे एक खेत से दूसरे खेत में आसानी से शिफ्ट कर सकते है और सिंचाई के काम को कर सकते है।

बौछार सिंचाई प्रणाली के मुख्य घटक :

बौछारी सिंचाई पद्धती मे मुख्य भाग पम्प, मुख्य नली, बगल कि नली, पानी उठाने वाली नली एंव पानी छिडकाव वाला फुहारा होता है |
बौछार सिंचाई प्रणाली कि क्रिया विधि :

बौछारी सिंचाई में नली में पानी दबाव के साथ पम्प द्वारा भेजा जाता है जिससे फसल पर फुहारा द्वारा छिडकाव होता है | मुख्य नली बगल कि नलियों से जुडी होती है | बगल कि नालियों में पानी उठाने वाली नली जुडी होती है |

पानी उठाने वाली नली जिसे राइजर पाइप कहते है इसकी लम्बाई फसल कि लम्बाई पर निर्भर करती है | क्योंकी फसल कि उंचाई जितनी रहती है राइजर पाइप उससे ह्मेशा उंचा रखना पड़ता है | इसे सामान्यत: फसल कि अधिकतम लम्बाई के बराबर होना चाहिए | पानी छिडकाव वाले हेड घुमने वाले होते है जिन्हें पानी उठाने वाले पाइप से लगा दिया जाता है |पानी छिडकने वाले यंत्र भूमि के पुरे क्षेत्रफल पर अर्थात फसल के उपर पानी छिडकते है | दबाव के कारण पानी काफी दूर तक छिडका जाता है जिससे सिंचाई होती है |

    स्प्रिंकलर सिंचाई की विशेषताएँ :

  • सिंचाई के दौरान मजदूरों पर होने वाले खर्च में कमी।
  • इस तकनीक की मदद से पानी के साथ -साथ समय की बचत होती है।
  • आवश्यकता के अनुसार फसल को पानी एक या दो दिन छोड़ कर दिया जाता है।
  • इस तकनीक का उपयोग उबर खाबर जमीन और कम पानी उपलब्धता वाली भूमि में किया जाता है।
  • यह सिंचाई तकनीक आसान और बेहद कम खर्च में उपलब्ध है।
  • इस तकनीक की मदद से काम पानी में ज्यादा भूमि पर सिंचाई की जा सकती है।
  • इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है की पानी की फुहारें पौधों की पत्तियों पर पड़ती है जिनसे पत्ते साफ़ रहते है और उन्हें अपना भोजन बनाने में आसानी होती है। इस कारण से पौधों का विकास भी होता है।
  • छिटकावा विधि से बोई गयी फसलों में यह तकनीक बेहतर मानी जाती है।
  • स्प्रिंकलर सिंचाई (Sprinkler Irrigation) के लाभ :
  • सतही सिंचाई मे पानी खेत तक पहुँचने मे 15-20 प्रतिशत तक अनुपयोगी रहता है |
  • सिंचाई में एकसा पानी नही पहुँचता जबकी बौछारी सिंचाई से संचित क्षेत्रफल 1.52 गुना बढ जाता है अर्थात इस विधि से सिंचाई करने पर 25-50 प्रतिशत तक पानी की सीधे बचत होती है |
  • जब पानी वर्षा कि भांती छिडकाया जाता है तो भूमि पर जल भराव नही होता है जीससे मिट्टी कि पानी सोखने कि दर कि अपेक्षा छिडकाव कम होने से पानी के बहने से हानी नही होती है |
  • जिन जगहों पर भूमि ऊची-नीची रहती है वहाँ पर सतही सिंचाई संभव नहीं हो पाती उन जगहों पर बौछारी सिंचाई वरदान साबित होती है |
  • बौछारी सिंचाई बलुई मिट्टी एव अधिक ढाल वाली तथा उची-नीची जगहों के लिए उपयुक्त विधि है | इन जगहो पर सतही विधि से सिंचाई नही कि जा सकती है |
  • इस विधि से सिंचाई करने पर मिट्टी में नमी का उपयुक्त स्तर बना रहता है जिसके कारण फसल कि वृद्धी उपज और गुणवत्ता अच्छी रहती है |
  • इस विधि मे सिंचाई के पानी के साथ घुलनशील उर्वरक, कीटनाशी तथा जीवनाशी या खरपतवारनाशी दवाओं का भी प्रयोग आसानी से किया जा सकता है|
  • पाला पड़ने से पहले बौछारी सिंचाई पद्धती से सिंचाई करने पर तापक्रम बढ जाने से फसल को पाले से नुकसान नही होता है |
  • पानी कि कमी, सीमित पानी कि उपलब्धता वाले क्षेत्रो मे दुगुना से तीन गुना क्षेत्रफल सतही सिंचाई कि अपेक्षा किया जा सकता है|
    स्प्रिंकलर सिंचाई का रखरखाव एवं सावधानियाँ :

  • सिंचाई के प्रयोग के समय एवं प्रयोग के बाद परीक्षण कर लेना चाहिए और कुछ मुख्य सावधानियाँ रखने से स्प्रिंकलर सेट अच्छी तरह चलता है |
  • प्रयोग होने वाला सिंचाई जल स्वच्छ तथा बालू एवं अत्यधिक मात्रा घुलनशील तत्वो से युक्त नही होना चाहीए |
  • उर्वरको, फफुंदी / खरपतवारनाशी आदी दवाओं के प्रयोग के पश्चात सम्पूर्ण प्रणाली को स्वच्छ पानी से सफाई कर लेना चाहीए |
  • प्लास्टिक वाशरो को आवश्यकतानुसार निरीक्षण करते रहना चाहिए और बदलते रहना चाहीए |
  • रबर सील को साफ रखना चाहीए तथा प्रयोग के बाद अन्य फिटिंग भागों को अलग कर साफ करने के उपरान्त शुष्क स्थान पर भण्डारीत करना चाहीए |
Webinar on impact and strategies for the education sector during COVID-19

इंपैक्ट एंड स्टैट्जीज़ फॉर द एजुकेशन सेक्टर ड्यूरिंग कोविड -19 पैंडेमिक पर वेबिनार का आयोजन

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी और डोरंडा कॉलेज रांची के सयुंक्त तत्वावधान में “इंपैक्ट एंड स्टैट्जीज़ फॉर द एजुकेशन सेक्टर ड्यूरिंग कोविड -19 पैंडेमिक ” पर वेबिनार का आयोजन किया गया। इसे बिनोबा भावे विश्वविद्यालय, हज़ारीबाग़ के पूर्व कुलपति प्रो. डॉ. रमेश शरण और अमेज़ॉन वेब सर्विसेज एकडेमी के साउथ एशिया हेड लोकेश मेहरा ने संबोधित किया ।

वेबिनार का शुभारंभ सरस्वती वंदना के साथ किया गया। अमेजॉन के लोकेश मेहरा ने सर्वप्रथम विषय प्रवेश करते हुए माजूदा दौर में एजुकेशन सेक्टर की चुनौतियाँ अवसर, विकास और तकीनीकी छमता को रेखांकित करते हुए अपनी बात रखी। उन्होंने पुरातन शिक्षा वयवस्था और कोविड के बाद हुए बदलाओं पर विस्तार से अपनी बात रखते हुए बताया की ” बेहतर भविष्य को हासिल करने के लिए एजुकेशन फील्ड से जुड़े लोगों ने आगे आकर इस विषम परिस्थिति में भी बेहतर कार्य किया है।

तकनीक ने नए अवसर भी पैदा किये है वर्चुअल एजुकेशन ने इस दौर में बड़े बदलाव किये है जिनसे सभी को दो चार होना पड़ा है। तमाम चुनौतियों के साथ नए अवसर भी सामने आये है। कोविड- 19 के कारण कई बड़ी कंपनियों को बंद होना पड़ा है। तकनिकी प्रसार के साथ तालमेल बिठाने में कई समस्यायें भी देखने को मिली रहती है। लेकिन सोशल मीडिया के जरिये इसको समझने में सहायता भी मिली है। आज का दौर सोशल मीडिया, बिग डेटा, मोबाइल फ़ोन और क्लाउड कंप्यूटिंग का दौर है। बदलाओं की बात करे तो जॉब पोजीशन ही नहीं बल्कि माइंड सेट भी बदलते देखे गए है।

प्रो डॉ रमेश शरण ने अपने संबोधन के दौरान डिजिटल एजुकेशन सिस्टम को रेखांकित करते हुए कहा की ” डिजिटल एजुकेशन की सबसे बड़ी दिक्कत इसके इस्तेमाल में आने वाली तकनिकी बाधाएँ है जिनसे दो चार होना पड़ता है। उन्होंने कहा की आज भी डिजिटल एजुकेशन सबके लिए संभव नहीं हो पाया है। ग्रामीण इलाकों में आज भी सुविधाजनक तरीके से इसका इस्तेमाल नियमित तौर पर नहीं हो पता है। खासकर स्कूली शिक्षा में अभी भी काफी काम किया जाना बाकि है। प्रो शरण ने डिजिटल एजुकेशन के भविष्य की चर्चा करते हुए कहा की इसमें काफी संभावना है और आगे जाकर यही मिश्रित शिक्षा व्यवस्था कार्य करेगी। उन्होंने स्टूडेंट्स से तकनिकी रूप से सक्षम होने के लिए भी कहा। भविष्य की शिक्षा तकनीक आधारित होगी।“

वेबिनार के दौरान प्रश्न उत्तर सत्र का भी आयोजन किया गया जिसमें स्टूडेंट्स के सवालों का जवाब दिया गया।

वेबिनार के समापन पर झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार प्रो. डॉ. पियूष रंजन ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा की वक्ताओं ने अपना कीमती समय निकाल कर बहुमूल्य राय से सबको अवगत कराया इसके लिए उनका धन्यवाद। उन्होंने कहा की सफलता किसी की मुहताज नहीं होती यह आप दोनों ने साबित किया है। डॉ. पियूष ने पुनः वेबिनार को सफल बनाने में शामिल फैकल्टी और टेक्निकल टीम के सदस्यों एवं वेबिनार के आयोजन में शामिल प्रो. रश्मि और डोरंडा कॉलेज की प्रो. नीलू कुमारी को का धन्यवाद किया।

Webinar on IMPACT AND STRATEGIES FOR THE EDUCATION SECTOR DURING COVID -19 PANDEMIC

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Date : 14 Dec, 2020
Time : 11:00 am onwards

Webinar WhatsApp Group 1

Webinar WhatsApp Group 2

Webinar WhatsApp Group 3

Webinar WhatsApp Group 4

Webinar WhatsApp Group 5

SPEAKERS :

Prof. (Dr.) Ramesh Sharan
Dean, Faculty of Social Sciences, Ranchi University Former Vice Chancellor – Vinoba Bhave University

Mr. Lokesh Mehra
Head – South Asia, Amazon Web Services Academy

Convenor : Dr. Neelu Kumari
Assistant Professor, Deptt. of Economics Doranda College, Ranchi Mobile No : 9470193857

Convenor : Prof. Rashmi
Assistant Professor, Deptt. of Life Skills Jharkhand Rai University, Ranchi Mobile No : 9431579389