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Placement at JRU

झारखंड राय यूनिवर्सिटी के 11 डिप्लोमा स्टूडेंट्स का चयन

झारखंड राय यूनिवर्सिटी, रांची के 11 स्टूडेंट्स का चयन मरेली मदर संस ऑटोमेटिव लाइटिंग इंडिया कंपनी के लिए हुआ है। मरेली मदरसंस ऑटोमेटिव सेक्टर की लीडिंग कंपनी है । यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ मेकेनिकल इंजीनियरिंग और डिपार्टमेंट ऑफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के डिप्लोमा पास स्टूडेंट्स का चयन विभिन्न पदों के लिए कंपनी द्वारा किया गया है। कोरोना काल और लॉक डाउन को देखते हुए कैम्पस प्लेसमेंट का आयोजन टेलीफोनिक इंटरव्यू के जरिये किया गया जिसमें 12 स्टूडेंट्स शामिल हुए और फाइनल राउंड के बाद 11 का चयन किया गया।

चयनित होने वाले स्टूडेंट्स में प्रद्युम्न कुमार, दीपू कुमार, दीपक कुमार, राजीव सिन्हा, अपूर्व सिन्हा, लक्श्चमी मिंज, राजकुमार गोप, रोहित उरांव,अरबाज़ खान, अनीश शर्मा और सुमित कुमार का नाम शामिल है।

यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डॉ. पीयूष रंजन ने 11 स्टूडेंट्स के एक ही कंपनी में चयनित होने पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा की “यूनिवर्सिटी का कैरियर मैनेजमेंट सेल स्टूडेंट्स को बेहतर अवसर देने के किये कार्य कर रहा है। इसी कड़ी में डिप्लोमा के स्टूडेंट्स का चयन हुआ है। चयनित स्टूडेंट्स को उनके बेहतर जीवन और नई शुरुवात के लिए उन्होंने पुनः अपनी शुभकामनाएं दी। “

झारखंड राय यूनिवर्सिटी, कमड़े के करियर मैनेजमेंट सेल ने ऑनलाइन प्लेसमेंट दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यूनिवर्सिटी के प्लेसमेंट सेल के प्लेसमेंट अधिकारी प्याली दास, प्रो. गौरव, प्रो. राजीव नयन ने भी स्टूडेंट्स के फाइनल चयन के बाद अपनी शुभकामनाएं दी।

कैंपस चयन के संबंध में जानकारी मीडिया प्रभारी डॉ. प्रशांत जयवर्द्धन ने उपलब्ध कराई।।

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WHICH INDUSTRY IS HIRING ENGINEERS?

MINING INDUSTRY IS THE FUTURE FOR ALL ENGINEERS

Good news for those who want to study B.Tech or Diploma in Mining. Mining industry is the future for you. Because, tremendous growth in this sector is creating new jobs. There are several careers related to mining. Jobs in mining offer the opportunity for world travel, good income and the opportunity to make a difference.

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DID YOU KNOW?

  • India is home to 1,531 operating mines and produces 95 minerals
  • The country is the 2nd largest producer of coal.
  • India is the 2nd largest crude steel producer in the world
  • Coal production grew at CAGR 4.6% over FY14-FY19 (to 730.35 MT)
  • Coal’s share in India’s primary energy consumption is expected to be 48% in 2040.
  • India’s steel consumption has risen 7.5% Y-o-Y
  • 100% FDI is now allowed through automatic route in the steel and mining sectors
  • 100% FDI for coal and lignite under automatic route

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WHAT DO THESE NUMBERS TELL YOU?

For B.Tech or Diploma Mining students, this sector offers plenty of job opportunities. It offers career growth. In future, students with a degree in Mining Engineering will be hired by this growing industry.

WHY YOU SHOULD STUDY B.TECH MINING IN JHARKHAND?

  1. Jharkahnd has 40% of nation’s mineral reserves
  2. Provides a solid base for mining and mineral industries
  3. Jharkhand has variety of minerals in abundance
  4. Jharkhand is the sole producer of Coking Coal, Uranium and Pyrite.
  5. It ranks first in India in the production of Coal, Mica, Kyanite and Copper.

MINING CAPITAL OF INDIA – JHARKHAND

Abundant minerals in Jharkhand has led to setting up of a numerous industries in the State including – Iron & Steel, Cement, Coke Ovens, Washeries, Refractories, Alumina, Sponge Iron, Ceramic, Graphite processing, Granite cutting and polishing, etc.

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The State Industrial Policy has identified Mineral based Industries as a thrust area. Hence, creating plenty of jobs in this sector.

NCC exam

राज्य के पुलिस फोर्सेज परीक्षा में एनसीसी सर्टिफिकेट धारकों को मिलेगी वरीयता

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) में भारत के युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए एनसीसी सर्टिफिकेट धारकों को बोनस अंक देने का निर्णय लिया है. अब केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF), राज्य सशस्त्र बलों की परीक्षाओं में एनसीसी कैडेट को अलग से अंक दिए जाएंगे।

केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल में एनसीसी कैडेट होने का फायदा :

  • एनसीसी ‘C’ सर्टिफिकेट धारकों को परीक्षा के अधिकतम अंकों का 5% बोनस अंकों के रूप में दिया जाएगा।
  • एनसीसी ‘B’ सर्टिफिकेट धारकों को परीक्षा के अधिकतम अंकों का 3% बोनस अंकों के रूप में दिया जाएगा।
  • एनसीसी ‘A’ सर्टिफिकेट प्राप्त करने वालों को परीक्षा के अधिकतम अंकों का 2% बोनस अंकों के रूप में दिया जाएगा।

ऑनलाइन एक्सिबिशन ऑफ माइन आर्ट 2020 की झलकियां।

सीएपीएफ भर्ती में एनसीसी ‘ए’ प्रमाण पत्र धारकों को बोनस अंक देने की ये योजना उप निरीक्षक और कांस्टेबल (जीडी) के पदों के लिए आगामी सीधी भर्ती परीक्षा में लागू होगी। भारत सरकार सभी राज्य सरकारों से अपने संबंधित पुलिस बलों के लिए सीधी भर्ती परीक्षा में समान प्रावधान करने का भी आग्रह करेगी ताकि एनसीसी प्रमाणपत्र धारकों को उनके साथ जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके । केंद्रीय गृहमंत्री ने इस बारे में कहा कि ये निर्णय न केवल युवाओं को एनसीसी में शामिल होने के लिए प्रेरित करेगा, बल्कि सीएपीएफ को प्रशिक्षित और अनुशासित युवाओं की उपलब्धता भी सुनिश्चित करेगा ।

भारत को क्यों कहा जाता था विश्व गुरु ? एजुकेशन सेक्टर में कैसे बनेगें हम लोकल, वोकल- ग्लोबल ।

राष्ट्रीय कैडेट कोर का परिचय:

एनसीसी एक त्रिकोणीय सेवा संगठन है जिसमें सेना के तीनों विंग शामिल है- थल सेना नौसेना और वायु सेना। संगठन का आदर्श वाक्य ‘एकता और अनुशासन’ है, जिसके पालन से यह युवाओं को अनुशासित और देशभक्त नागरिकों के रूप में तैयार करता है। इसका गठन राष्ट्रीय कैडेट कोर अधिनियम, 1948 के तहत किया गया था. गृह मंत्रालय, भारत सरकार ने युवाओं को एनसीसी में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करने और देश की भलाई के लिए समर्पित तरीके से काम करने के लिए कई कदम उठाए हैं. सशस्त्र बलों के अधिकारियों की सेवा करके कैडेटों को एनसीसी में बुनियादी सैन्य और हथियार प्रशिक्षण दिया जाता है. उनकी प्रवीणता और निपुणता का समय-समय पर परीक्षण किया जाता है, जिसके बाद ही उन्हें प्रमाणपत्र से सम्मानित किया जाता है ।

इंडस्ट्री रेडी कोर्स – बीबीए इन लॉजिस्टिक : स्टार्टअप्स और उद्यमिता का अवसर।

एनसीसी सर्टिफिकेट:

एनसीसी में प्रथम स्तर से उत्तीर्ण होने पर कैडेट को ‘A’ प्रमाणपत्र से सम्मानित किया जाता है. वहीं दूसरे स्तर को उत्तीर्ण करने पर ‘B’ प्रमाणपत्र प्रदान किया जाता है. केवल वे कैडेट जिनके पास ‘बी’ प्रमाण पत्र है, वे ‘सी’ प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए पात्र होते है।

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी, रांची की ऑफिसियल वेबसाइट www.jru.edu.in के अलावा ब्लॉग के जरिये जानकारी प्राप्त करने के लिए लॉग इन करें https://www.jru.edu.in/my-campus-life/

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माइनिंग इंजीनियर बनकर सवारें अपना भविष्य

आज के युग में खनन और माइनिंग इंजीनियर (Mining Engineer) की मांग हर क्षेत्र में देखने को मिलती है क्योकि आजकल देश में ईंधन की खपत लगातार बढ़ रही है।

माइन (Mine) मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है – अंडर ग्राउंड माइन (Underground mine) और ओपेन-पिट माइन (Open-Pit Mine)

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अंडरग्राउंड माइन (Underground Mine) में ही खनिज (Mineral) मिलते हैं, जिन्हें माइनिंग के द्वारा निकाला जाता है. अंडरग्राउंड माइन के माध्यम से सोने और कोयले को निकाला जाता है, इसके अलावा ओपन पिट माइनिंग (Open pit Mining) द्वारा आयरन (Iron) ओर लाइमस्टोन (limestone), मैग्नीज (Manganese) आदि को निकाला जाता है।

माइनिंग या खनन इंजीनियरिंग में कैरियर बनाने के लिए सबसे पहले उम्मीदवार का किसी मान्यताप्राप्त विद्यालय से साइंस स्ट्रीम में 12 वीं कक्षा पास करना अनिवार्य है। इसके बाद उम्मीदवार माइनिंग से डिप्लोमा(Diploma) बीटेक (B.Tech), बीई (B.E) और बीएससी (BSC) कोर्स कर सकते है। माइनिंग कोर्स के अन्तर्गत उम्मीदवार को ड्रिलिंग (Drilling), ब्लास्टिंग (Blasting), माइन कॉस्ट इंजीनियरिंग (Mine Cost Engineering), अयस्क रिजर्व विश्लेषण (Ore Reserve Analysis), ऑपरेशन विश्लेषण (Operation Analysis), माइन वेंटीलेशन (Main ventilation), माइन प्लानिंग (Mine Planning), माइन सेफ्टी (Mine Safety), रॉक मैकेनिक्स (Rock Mechanics), कम्प्यूटर एप्लीकेशन (Computer Applications), इंडस्ट्रियल मैनेजमेंट (Industrial Management) से सम्बंधित जानकारी दी जाती है।

पॉपुलर कोर्स

  1. डिप्लोमा इन माइनिंग इंजीनियरिंग
  2. बीटेक इन माइनिंग इंजीनियरिंग।

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** माइनिंग इंजीनियरिंग करने वाले स्टूडेंट्स डिप्लोमा इन माइनिंग इंजीनियरिंग और बीटेक इन माइनिंग इंजीनियरिंग कोर्स को बेहद पसंद करते है। ये दोनों कोर्सेज में रोजगार के अवसर सालों भर मौजूद रहते है। बड़ी कंपनियां जैसे सीसीएल, बीसीसीएल,हिंडाल्को अपने यहाँ इंटर्न के अलावा मांइनिंग सरदार और अन्य पदों पर जॉब्स के लिए नियुक्तियां करती रहती है।

मुख्य रूप से इस कोर्स के तहत उम्मीदवार को खनिज पदार्थों की संभावनाओं का पता लगाना, उनके नमूने एकत्रित करना भूमिगत तथा भूतल खदानों का विस्तार और विकास करना, खनिजों को परिष्कृत करना आदि के बारे में जानकारी प्रदान की जाती है।

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अवसर:

माइनिंग इंजीनियरिंग क्षेत्र मे रोजगार के अपार अवसर उपलब्ध है।एक माइनिंग इंजीनियर स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (Steel Authority of India Limited), कोल इंडिया लिमिटेड (Cole India Limited), आईबीपी लिमिटेड (IBP Ltd), आईपीसीएल (IPCL), नेवली लिग्नाइट कॉरपोरेशन (Nevali Lignite Corporation), यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (Uranium Corporation of India) में रोजगार पा सकते है।

** झारखंड में माइनिंग इंजीनियरिंग के टॉप 3 इंस्टिट्यूट

  • इंडियन स्कूल ऑफ माइंस, धनबाद
  • बिरसा इंस्टीटूट ऑफ टेक्नोलॉजी,झरिया, धनबाद
  • झारखंड राय यूनिवर्सिटी, रांची।

माइनिंग इंजीनियरिंग करने के बाद कौन – कौन सी कंपनियां देती हैं नौकरियां ?

माइनिंग इंजीनियरिंग के बाद कोल इंडिया लिमिटेड, टाटा स्टील, रियो टिनटो, वाइजैग स्टील, मोनेट इस्पात, वेदांता, एचजेडएल, एचसीएल, इलेक्ट्रोस्टील, द इंडियन ब्यूरो ऑफ माइनिंग, जियॉलजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, आईपीसीएल, नालको, अडानी माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियां नौकरिया प्रदान कराती है।

सैलरी:

माइनिंग इंजीनियरिंग कोर्स पूरा करने के बाद कैंडिडेट्स शुरुआत में 4 से 5 लाख रुपये सालाना कमा सकते हैं। आप जैसे-जैसे इस फील्ड में पुराने होते जाएंगे वैसे-वैसे इनकम भी बढ़ती जाएगी। इसी के साथ अगर आप रिसर्च कर रहे हैं तो ये इनकम और भी ज्यादा हो सकती है।

माइनिंग इंजीनियर बनने के लिए होने चाहिए ये स्किल्स :-

  • माइंस/खानों में काम करने के प्रति रुझान
  • मेहनत और मशक्कत करने में कोई परेशानी नहीं
  • लीडरशिप और श्रमिकों से काम करवाने की क्षमता
  • खदान की चुनौतीपूर्ण स्थितियों में किसी भी जोखिम का सामना करने का आत्मविश्वास
  • माइनिंग की तकनीकी और वैज्ञानिक अपडेटेड जानकारी
  • मैथ्स और फिजिक्स जैसे विषयों में दिलचस्पी
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री बूट योर वर्किंग मेमोरी

आपने अकसर यह महसूस किया होगा की किसी काम के लिए आप कमरे में जाते है और फिर रुक जाते है, आप भ्रमित हो जाते है और यह आप कुछ समझ नहीं पाते आप कमरे में आये क्यों थे? आप यह भूल जाती है की आप रसोई में क्यों गयी थी? आप फोन साल करने के लिए उठाते है लेकिन काल किसे करने है इसे लेकर आप सोचने लगते है आप नाम या नंबर रिकॉल नहीं कर पाते है। ईमेल लिखने में ज्यादा समय लगना, थोड़ी देर काम करते ही ध्यान भांग हो जाना, शॉपिंग लिस्ट बनाने में ज्यादा समय लगना और आपके पीछे चलने वाले की शक्ल याद नहीं रख पाना यह सब होता है आपके “वर्किंग मेमोरी” में गड़बड़ी की वजह से। वर्किंग मेमोरी आने वाली सूचनाओं को ग्रहण करने इसे एक विचार का रूप देने और फिर उसे चेहरा देकर उसे तब तक बनाये रखता है जब तक उसकी हमें जरुरत होती है। वर्किंग मेमोरी और किसी काम को करने का ध्यान रखना एक दूसरे से जुड़े हुए है। काम करते समय हमलोग अपने निर्देश और वयवहार पर फोकस करते है। दूसरे शब्दों में कहें तो वर्किंग मेमोरी रियल टाइम में काम करने की काबिलियत है। इंसानी दिमाग को यही ताकवतर बनता है। लेकिन चिंता, काम का प्रेशर, नकारात्मक सोच, बेचैनी और फोकस की कमी से काबिलियत पर असर पड़ता है।

हम इस एंजायटी और तनाव को कभी गंभीरता से नहीं लेते है। यह कितना लम्बा चलेगा यह आप को भी नहीं पता है। विश्व में इसपर कई शोध कार्य चल रहे है।शोध की माने तो वर्किंग मेमोरी और बेचैनी के बिच एक नकारात्मक रिश्ता है। बेचैनी जितनी ज्यादा होगी वर्किंग मेमोरी का परफॉर्मेंस उतना ज्यादा घटता जायेगा। वर्किंग मेमोरी पर अप्रकाशित शोध के अनुसार कोविड 19 का असर वर्किंग मेमोरी पर पड़ा है इससे इंकार नहीं किया जा सकता। आपका अच्छी नींद नहीं ले पाना भी एक प्रमुख कारण के तौर पर सामने आया है।

वर्किंग मेमोरी को बूस्ट करने के लिए मेमोरी एक्सरसाइज और ब्रेन गेम्स की सहायता ली जा सकती है। लेकिन ये बहुत मददगार साबित नहीं हुए है। एन-बैक टास्क एक्ससरसाइज ने जरूर अच्छे परिणाम दिए है। यह एक कंसंट्रेशन गेम है जिसमें मैचिंग कोड्स के जोड़ें खोजने पड़ते है।

एक प्रयास यह भी हो सकता है की आप सकरात्मक हो और यह सोचे की चीजें उतनी बुरी नहीं है जितना आप सोचते है। उस विचार को सिमित करें जो आपको सोचने पर मजबूर करती है। आप अपने प्रतिदिन के ख़बरों की खपत को काम कर सकते है। अपने आप से कहें विपरीत परिस्थितियों में जूझना इसमें कोई बुराई नहीं है। यह भी याद रखने की जरुरत है की हम सब एक महामारी के दौर में जीने की जद्दोज़हत के बिच खड़े है।

PM MODI LOCAL VOCAL GLOBAL

LOCAL, VOCAL, GLOBAL – THE RISING INDIA

लोकल, वोकल- ग्लोबल : झारखंड राय यूनिवर्सिटी।
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भारत को कभी विश्वगुरु कहा जाता था’, यह वाक्य आपने कई बार सुना होगा लेकिन क्या आपने इस विषय पर चिंतन करने की कोशिश की आखिर भारत को विश्वगुरु क्यों कहा जाता था?

विश्वभर के विद्यार्थी शिक्षा के लिए भारत की ओर क्यों देखते थे? लेकिन आज बढ़िया शिक्षा की बात आते ही देश के लोग अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, जर्मनी इत्यादि देशों की ओर जाने लगे है, छोटे शहरों के स्टूडेंट्स दिल्ली, मुंबई, बैंगलोर और कोलकाता जाते है।

यह ट्रेंड कोई नया नहीं है बड़े शहरों के प्रति मोह और उसकी चकाचौंध ज्यादा आकर्षित करती है जबकि अवसर और इंस्टिट्यूशन छोटे शहरों में भी है।

उच्च शिक्षा की बात करें तो झारखंड की राजधानी वर्षो से अपने संस्थानों के कारण चर्चित रहा है। पिछले कुछ वर्षों से निजी संस्थानों ने झारखंड के प्रति अपना आकर्षक दिखाया है।

वोकेशनल और टेक्निकल कोर्स के साथ मजबूत उपस्थिति दर्ज करने में झारखंड राय यूनिवर्सिटी, रांची अग्रणी नाम है। पिछले 8 वर्षों के दौरान यूनिक पेडोगोजी, जॉब ओरिएंटेड वोकेशनल कोर्सेज, इंडस्ट्री इंटरफ़ेस और प्लेसमेंट सेल के जरिये झारखंड राय यूनिवर्सिटी, रांची ने लोकल- वोकल, ग्लोबल के कांसेप्ट को अपनाया है। यानी आपके अपने शहर में ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा औऱ बेहतरीन सुविधाओं से युक्त विश्वविद्यालय।

पीएम नरेन्द्र मोदी ने देश को संबोधित करते हुए अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और स्वदेशी को अपनाने पर जोर दिया ।उन्होंने एक लाइन में अपनी पूरी बात कह दी और वह लाइन थी ‘लोकल के लिए वोकल बनें’। “मोदी ने साफ कहा कि हमें अपने सामानों पर गर्व करना सीखना होगा, और उनकी जमकर तारीफ भी करना होगी।”
यानी लोकल पर वोकल हो जाइये और इसे ग्लोबल बनाइये।

Webinar JRU and YSM

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी में भारतीय अर्थव्यवस्था का पुनरुत्थान और कोविड 19 के बाद रोजगार के अवसर विषय पर वेबिनार का आयोजन

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी, रांची कमड़े कैंपस और योगदा सत्संग महाविद्यालय, रांची के संयुक्त तत्वाधान में “Resurgence of Indian Economy and Employment Opportunities Post Covid-19” विषय पर वेबिनार का आयोजन किया गया। वेबिनार सिस्को वेबेक्स और युट्यूब के जरिये आयोजित किया गया। विधिवत शुरुवात से पहले दीप प्रज्वलित कर सरस्वती वंदना की गयी। वेबिनार का संचालन झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी के कंप्यूटर लैब से प्रो. रश्मि ने किया। विषय प्रवेश करते हुए योगदा सत्संग महाविद्यालय के प्रिंसिपल सह अतिरिक्त सचिव ब्रिगेडियर डॉ. अनिल शर्मा ने कोविड 19 के बाद के भविष्य और एजुकेशन सेक्टर में आने वाले अवसरों से अवगत कराते हुए ऑनलाइन एजुकेशन की चुनौतियों और समाधान पर विचार व्यक्त किया।

वेबिनार के मुख्य वक्ता अरिजीत डे, निदेशक डीवाईएलवाईएस बिजनेस सर्विसेस ने सम्बोधन के दौरान भारत की अर्थव्यवस्था को समझाते हुए आने वाले अवसरों पर विस्तार से अवगत कराया। सत्र के दौरान सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने भारतीय अर्थवयवस्था और वर्तमान परिस्थियों पर पूछे गए सवालों का जवाब दिया। वेबिनार में 1700 से ज्यादा स्टूडेंट्स सम्मिलित हुए।

कार्यक्रम के अंत में झारखंड राय यूनिवर्सिटी, रांची के रजिस्ट्रार डॉ. पीयूष रंजन ने अपने धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होंने कहा की बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स, रिसर्च स्कॉलर, और फैकल्टी ने शामिल होकर वेबिनार को सफल बनाया इसके लिए सभी का विश्वविद्यालय परिवार की तरफ से धन्यवाद। उन्होंने योगदा सत्संग महाविद्यालय के प्रिंसिपल डॉ. अनिल शर्मा, व्याख्याता अरिजीत डे, प्रो. अनिर्बन विस्वास और आईटी टीम का भी धन्यवाद किया।

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एआईसीटीई ने एमसीए पाठ्यक्रम में किया बदलाव : अब दो वर्ष में करें एमसीए

मास्टर ऑफ़ कंप्यूटर एप्लीकेशन (एमसीए )कोर्स अब तीन साल की जगह दो साल का होगा। ऑल इंडिया कौंसिल ऑफ़ टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) ने मंगलवार को इसकी घोषणा करते हुए कहा की एमसीए कोर्स सत्र 2020-21 से 3 वर्ष की जगह 2 साल का ही होगा। एआईसीटीई ने सभी हाईयर एजुकेशनल इंस्टीटूशन्स से कहा है की वे अपने यहां कोर्स की अवधी में बदलाव संबंधी जरुरी संशोधन कर लें।