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झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी के माइनिंग इंजीनियरिंग स्टूडेंट दीपक सिंह ड्रीम बिग सीजन वन फोटोशूट में चयनित

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी, डिपार्टमेंट ऑफ़ माइनिंग इंजीनियरिंग के सेमेस्टर चार के स्टूडेंट दीपक किशोर सिंह का चयन “ड्रीम बिग सीजन वन फोटोशूट” के लिए किया गया है। आसनसोल के रहने वाले दीपक डिप्लोमा माइनिंग इंजीनियरिंग की पढ़ाई बीआईटी नागपुर से पूरी की है और बीटेक माइनिंग इंजीनियरिंग के लिए उनकी पसंद झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी रांची थी। अपनी सफलता को लॉक डाउन और कोरोना पैंडेमिक से जोड़ते हुए इन्होंने बताया ” उस दौरान मैं भी सभी स्टूडेंट्स की तरह ऑनलाइन अच्छे कॉलेज में एडमिशन सर्च कर रहा था और खली समय में नेट सर्फिंग किया करता था। इस दौरान मैंने एक ब्लॉग बनाया और कुछ लिखने के साथ वीडियो ब्लॉगिंग की शुरुवात अपने गृह नगर आसनसोल से किया। इसका नाम ‘फैसनेबल आसनसोल’ रखा था। सोशल मीडिया सर्च के दौरान मुझे प्रिंस नरूला के द्वारा लॉक डाउन के दौरान आयोजित होने वाले टैलेंट हंट कार्यक्रम की जानकारी मिली। प्रिंस नरूला एक जाने माने मॉडल और एमटीवी रोडीज़ 12 के विजेता रह चुके हैं। उन्होंने कई टीवी धारावाहिकों में भी काम किया है जिनमे रियलिटी शो बिग बॉस खासा चर्चित रहा। बिग बॉस 9 को उन्होंने जीता भी है। बस यही मुझे आकर्षित करने के लिए काफी था और मैंने फिर इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेने का फैसला किया। ”

दीपक के अनुसार प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए मैंने अपना फोटो और एक शार्ट वीडियो प्रोफाइल बनाकर भेजा। प्रतियोगिता में 40 बेहतरीन चेहरों का चयन किया गया जिनका पोर्टफोलियो शूट प्रिंस नरूला के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।

ड्रीम बिग सीजन एक में चयनित होने के बाद दीपक के पास मॉडलिंग से जुड़े तीन ऑफर भी है जिस पर वह काम चल रहा है। दीपक ने अपने हॉबी और अकादमिक करियर पर बात करते हुए बताया की ” मुझे क्रिकेट खेलना पसंद है और मैंने डिप्लोमा की पढ़ाई के दौरान अपने यूनिवर्सिटी को रिप्रजेंट भी किया। बीटेक की पढ़ाई पूरी करने के बाद मैं माइनिंग इंजीनियरिंग में ही एमटेक करना चाहता हूँ। आने वाले समय में मुझे रणविजय सांगा के साथ काम करने का मौका मिलने वाला है जो मुझे इस फील्ड में एक नई पहचान दिलाने में मददगार साबित होगा।“

विभाग के छात्र दीपक की सफलता पर विभाग समन्वयक प्रो. सुमित किशोर सहित अन्य शिक्षकों ने हर्ष वयक्त किया है।

यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार प्रो. (डॉ) पियूष रंजन ने दीपक सिंह के उज्वल भविष्य की कामना करते हुए पढ़ाई के साथ मॉडलिंग को करियर के तौर पर अपनाने पर हर्ष जताया है। उन्होंने अपने संदेश में माइनिंग इंजीनियरिंग विभाग के शिक्षकों का भी धन्यवाद किया है।

BEST ENGINERING COLLEGE RANCHI 3

FROM JRU, RANCHI TO SWEDISH COMPANY EPIROC – SUCCESS STORY OF SUBHADRA

Subhadra Mahato’s own career journey mirrors her recent success – to pursue a profession in engineering with a deep sense of passion and courage. She recently got selected as a Service Engineer during pool campus placement activity by a Swedish company Epiroc Mining India Limited, Pune. She has been offered a package of Rs 5 lakhs.

“Professor and mentors from my department have always helped me,” Subhadra says. She is a B.Tech Electrical student from Jharkhand Rai University, Ranchi.

BEST ENGINEERING COLLEGE RANCHI 1“No matter what I do, I always look towards the learning outcome of every activity. It does not matter whether I win or not. For me the learning opportunity I get at every step is more important in life.”

The interview at Epiroc Mining was a great experience for Subhadra who humbly says that besides her efforts, ‘blessing from mentors, my parents and elders helped me in my success.’

BEST ENGINEERING COLLEGE RANCHI

Before starting her journey at Jharkhand Rai University, she had clear career goals, i.e, to be an engineer. “School is the best time to define and redefine what we want to be in our career. One must follow their curiosities and make bold choices.”

In school Subhadra was always an active student. She participated in everything – starting from martial arts, to anchoring annual events, to learning archery. With a passion to learn and win, she won many prizes in different competitions.BEST ENGINEERING COLLEGE RANCHI 1“I eagerly look forward to my first job. I’m ready for this journey,” she says.

Everyone plays to win. But what makes Subhadra different is that she always plays to ‘learn’. This difference in perception is what fills her with clarity and confidence.

This University wishes her best of luck for the excellent career journey she is about to take.

dipotsav

झारखण्ड राय विश्वविद्यालय में दीपोत्सव 2020 का आयोजन

झारखण्ड राय विश्वविद्यालय, रांची के सांस्कृतिक कल्ब द्वारा दीपावली के पवन पर्व पर दीपोत्सव का आयोजन किया। इस वर्ष ऑनलाइन आयोजित सांस्कृतिक प्रतियोगिता दीपोत्सव में मुख्य रूप से दो प्रतियोगिया का आयोजन किया गया जिनमें रंगोली मेकिंग और वीडियो मेकिंग शामिल रहें। रंगोली मेकिंग प्रतियोगिता का थीम ” हाउ डु यू सी द वर्ल्ड डियूरिंग कोविड 19” जबकि वीडियो मेकिंग प्रतियोगिता का थीम “दिवाली” था।

Rangoli

रंगोली मेकिंग प्रतियोगिता में बीबीए प्रथम सेमस्टर की छात्रा जेनिफर कुजूर को विजेता जबकि बीएससी एग्रीकल्चर सेमेस्टर तृतीय की छात्रा प्रीति परायी को उपविजेता घोषित किया गया। वहीँ दिवाली वीडियो मेकिंग प्रतियोगिता में बीसीए प्रथम सेमेस्टर के छात्र ओम कुमार विजेता वहीँ बीएससी एग्रीकल्चर की छात्रा वर्षा रानी को द्वितीय पुरस्कार प्राप्त हुआ।
दीपोत्सव प्रतियोगिता के सफल आयोजन में सांस्कृतिक क्लब की समन्वयक प्रो. अनुराधा शर्मा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

ABC of artificial intelligence

आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की ABCD

बच्चों को A फॉर एप्पल और B फॉर बॉय सिखाने के दिन पुराने पड़ चुके है। आज बच्चे A फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, B फॉर बिग डेटा, R फॉर रोबोटिक्स और M फॉर मशीन लर्निंग जैसे शब्दों से परिचित है । यह सब उनके सिलेबस का हिस्सा है। मशीनों ने दुनिया को बदल कर रख दिया है इस कारण बच्चों की दुनिया बदली है इससे कोई भी अछूता नहीं रह सकता है।

आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की ABCD :

A : आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस
इंसानों ने तकनीक का इजाद किया। लेकिन बुद्धिमान मशीनों से इंसान को पीछे छोड़ दिया है।

B: बायस
मशीनें भेद भाव कर सकती है यह सुन कर विश्वास नहीं होता लेकिन यह भेदभाव कई अर्थों में सामने आया है जो मानव को सोचने पर मजबूर करता है। मशीनों में जो डेटा फीड होता है वह एल्गोरिदम की बुनियाद पर काम करता है। बनाने वालों ने इनके साथ भी भेदभाव किया। मर्दों और औरतों के बीच भेद भाव और गोरे और काले रंग वालों के बीच भेद भाव करना बड़ी समस्या बनकर उभरा है।

C: चैटबॉट
मशीनें इंसानों की तरह बातें करती हैं ।यह संभव हो पाता है नैचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग और नैचुरल लैंग्वेज जेनरेशन भाषा के जरिये।। इसे ही चैटबॉट मशीनें कहते हैं।

D : डिज़ाइन
डिज़ाइनिंग एक चुनौती भरा और समयसाध्य कार्य है। आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस ने इस काम को ज़्यादा तेज़ी और बेहतर तरीक़े से करना शुरू किया है। बड़ी कंपनियाँ तो नए डिज़ाइन और पार्ट्स बनाने के लिए आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस का ही इस्तेमाल कर रही हैं।

E: इमरजेंसी
आपात स्थिति से निपटने और चेतावनी देने में इसकी भूमिका प्रमुख है। ये मशीनें न्यूज़ रिपोर्ट का आकलन करके ये बता सकेंगी की किस इलाक़े में तनाव पैदा होने वाला है।

F: फ़ुटबॉल
खेल के मैदान में आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमालकरने का प्रयास जारी है। इसके ज़रिए यह आकलन संभव हो सकेगा कि कौन सा ख़िलाड़ी खेल के मैदान में कौन सा अगला दांव चलने वाला है।

G: जेनेरेटिव एडवर्सरियल नेटवर्क
पिक्चर के साथ किये जाने वाले छेड़छाड़ को लेकर अक्सर शिकायत मिलती रहती है। आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की मदद से इसे रोका जा सकता है।जेनेरेटिव एडवरसरियल नेटवर्क के ज़रिए नई तस्वीरें बनाई जा सकेगी ।

H: हैलुसिनेशन
इंसानी दिमाग अक्सर मतिभ्रम या ग़लतफ़हमी के शिकार होता है। मशीनें भी इससे अछूती नहीं है। मशीनों की यह गलती बड़ी दुर्घटनाओं को आमंत्रित करती है। एआई के सहयोग से इन्हें रोका जा सकता है।

I: इमैजिनेशन
कल्पना मनुष्य का स्वाभाविक गुण है। कल्पना का सहारा लेकर किसी भी कार्य को मूर्त रूप देने का प्रयास किया जाता है। किसी भी चीज़ को देखने का मशीन का नज़रिया इंसान से अलग होता है वो कई मायनों में हम से बेहतर भी। फाइन आर्ट्स के सेक्टर में मशीनों का सहयोग हैरान करने वाला साबित होगा।

J: जाम
ट्रैफ़िक जाम से निपटने के लिए AI का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है। आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस इसके इस्तेमाल से पता लगाया जा सकता है कि कहाँ जाम लग सकता है और उसे कंट्रोल कैसे किया जा सकता है।

K: निटिंग
फैशन और टेक्सटाइल इंडस्ट्री भी AI से अछूती नहीं है। कढ़ाई बुनाई के कामों में भी इसका बखूबी इस्तेमाल किया जा रहा है। स्काईनिट की मदद से बुनाई के ऐसे पैटर्न तैयार किए गए हैं, जो अपने आप में अद्भुत हैं।

L : लैंग्वेज
भाषा संचार का सर्वोत्तम साधन है। अंग्रेजी भाषा के वैश्विक पहचान के पीछे व्यापक स्वीकार्यता शामिल है। अक़्लमंद मशीनों की अपनी ज़बान होती है । मशीनी भाषा ने कंप्यूटर को एक अलग पहचान दिलायी।

M : मशीन लर्निंग
मशीन को एक छोटी सी चीज़ सिखाने के लिए ढेर सारा डेटा फीड करना पड़ता है। आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस वाली मशीनों की डिज़ाइनिंग ऐसी हैं कि वो इंसान की तरह जानकारियां इकट्ठा करें।

O: ओरेकल
इंसान की नज़र से तेज़ काम मशीनें करती हैं। आर्टिफ़िशयल इंटेलिजेंस की मदद से आंखों की बीमारियां और कैंसर जैसी बीमारियों के लक्षण उसके पनपने के पहले ही भांप लिए जाते हैं। अल्ज़ाइमर जैसी बीमारी की भविष्यवाणी संभव हो पाया है।

P: पुलिसिंग
चोर पुलिस के खेल में अपराधी अक्सर सबूतों और पहचान के आभाव में बरी हो जाते है। दुनिया भर में अपराधियों को पकड़ने के लिए आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की मदद ली जा रही है। अपराधियों के चेहरे के किसी हिस्से की पहचान कर उन्हें पकड़ने का प्रयोग किया जा रहा है। न्याय प्रक्रिया को सरल बनाने बेहतर बनाने में भी इसका बेहतर इस्तेमाल हो रहा है।

Q: क्वेक
भूकंप प्राकृतिक आपदा है जिसकी भविष्यवाणी असंभव है। अब ऐसी मशीनें बनाई जा रही हैं जो भूकंप के बाद आने वाले झटकों की जगह बता सकती हैं । इससे बड़े पैमाने पर होने वाले नुकसान को रोका जा सकता है।

R: रैप
विदेशों में संगीत की दुनिया में अजीब चलन है। गानों के बीच में तेज़ गति से डायलॉग बोले जाते हैं। इसे सरल भाषा में रैप कहते हैं। रैप इतनी तेज़ी से बोला जाता है कि इसके बोल आसानी से पकड़ में नहीं आते लेकिन आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस से इस काम को आसान बनाने की कोशिश की जा रही है।

S: स्मार्ट होम
जो देश तकनीकी रूप से ज़्यादा एडवांस हैं, वहां घर के बहुत से काम मशीन की मदद से होते है। आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की मदद से उन मशीन को ऑन-ऑफ़ किया जा सकता है, जिनके इस्तेमाल की ज़रूरत नहीं है। बिजली की खपत को रोकने में यह कारगर उपाय है।

T: टुरिंग टेस्ट
आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस का दायरा मापने के लिए टुरिंग टेस्ट सबसे विश्वसनीय माना जाता है. इस टेस्ट के मुताबिक़ मशीन की क़ाबिलियत की बुनियाद है कि वो किस हद तक बातों के ज़रिए इंसान को बेवकूफ़ बना सकती हैं.

V: वाइनयार्ड
यूरोप और अमरीका में किसानों की मदद के लिए आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल किया जा रहा है। अंगूर की खेती में इसका ख़ूब इस्तेमाल हो रहा है। आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस का दायरा मापने के लिए टुरिंग टेस्ट सबसे विश्वसनीय माना जाता है. इस टेस्ट के मुताबिक़ मशीन की क़ाबिलियत की बुनियाद है कि वो किस हद तक बातों के ज़रिए इंसान को बेवकूफ़ बना सकती हैं ।

W: वाइल्डलाइफ
जंगलों में भारी मात्रा में क़ीमती संपदा मौजूद है, जिसकी बड़े पैमाने पर चोरी और तस्करी होती है। दुर्लभ जाति के जानवरों का शिकार भी ख़ूब होता है। हालांकि इस पर नज़र रखने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल काफ़ी समय से हो रहा है ।

X: एक्स-रेटेड
इंसान की जिस्मानी ज़रूरतें पूरा करने में भी मशीनें अहम किरदार निभा रही हैं और सेक्स इंडस्ट्री में इनका बड़ा रोल है। आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल से अब इस पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है।

Y: यमी
अगर रसोई में खाना बनाने का मन ना हो तो इसके लिए भी अब आपके पास विकल्प हैं। आप आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के ज़रिए खाना बना सकते हैं। बुद्धिमान मशीनें आपके दिए गए कमांड के अनुसार आपके पसंद का खाना बनाकर तैयार कर देगीं।

Z : यानी ज़ू
सर्दी के मौसम में चिड़ियाघरों में सेंसर वाले हीटर लगाए जाते हैं जो जानवर के शरीर की ज़रूरत के मुताबिक़ उसके लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर देते हैं।

Artificial intelligence

आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस

कंप्यूटर का अविष्कार मानव इतिहास का युगांतरकारी अध्याय है इस अविष्कार के साथ ही मनुष्य ने अपने काम मशीनों से करवाने का चलन शुरू किया था । कृत्रिम बुद्धि शब्द का इस्तेमाल तब से ही चलना में आया। इसे ही आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के नाम से सभी पहचानते है।

फेसबुक ने 2017 में अपने एक रिसर्च प्रोग्राम को अचानक बंद कर दिया गया जो आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस पर शोध से संबंधित था। मीडिया रिपोटों के जरिये जो जानकारी सामने आयी वह बेहद हैरान करने वाली थी। शोध कार्यक्रम इसलिए बंद करना पड़ा क्योंकि डिज़ाइन किए गए चैटबॉट्स ने अंग्रेज़ी के बजाय एक अलग ही भाषा ईज़ाद कर ली जिसे इंसान नहीं समझ सकते थे। । इस घटना को लेकर विज्ञान जगत में काफी बहस हुई। इस के बाद दुनिया के कई बड़े वैज्ञानिकों ने यह माना की भविष्य में मानव को मशीनों से चुनौतियों का सामना करना होगा। इस के बाद से ही दुनिया भर में वैज्ञानिक अक़्लमंद मशीनें तैयार करने में लगे हुए है जो मानवता की रक्षा कर सकें। कोरोना वायरस ने दुनिया को जितना प्रभावित करना था किया लेकिन अब पूरी दुनिया की नजर इसके वैक्सीन की खोज पर टिकी है। कोरोना वायरस कोविड-19 की वैक्सीन खोजने की रेस में रूस ने स्पुतनिक 5 नामक टीके को अविष्कार करने का दावा किया है। भारत समेत दुनिया के कई देश भी इसी काम में जुटे हैं। वैज्ञानिक, शोधकर्ता और दवा बनाने वाले साथ मिल कर इस चुनौती को कम से कम समय में पूरी करने की कोशिश में लगे हैं। इस चुनौती से निपटने में सबसे बड़ा सहायक साबित हुआ है आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग।

पहले के दौर में कोई नई वैक्सीन या दवा बनने में सालों का वक्त लगता था। लेकिन एआई और मशीन लर्निंग के इस्तेमाल से इस काम को सालों की बजाय अब कुछ दिनों में ही पूरा कर लिया जाता है।

आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस:
ग्रीक मिथकों में ‘मैकेनिकल मैन की अवधारणा से संबंधित कहानियाँ मिलती हैं अर्थात् एक ऐसा व्यक्ति जो हमारे किसी व्यवहार की नकल करता है। प्रारंभिक यूरोपीय कंप्यूटरों को ‘लॉजिकल मशीन ‘ कहकर बुलाया जाता था। तकनीक के बढ़ते प्रयोग और तेज गति से काम करने करने के विचार को समृत वर्क में बदलने के लिए ऐसी मशीनों के बारे में सोचा गया जो इंसानों के निर्देश को समझना, चेहरे की पहचान, ख़ुद से गाड़ियां चलाना , किसी गेम को जीतने के लिए खेलना, घरेलु काम करना बेहतर और समझदारी के साथ कर सके। यही कहलाया एआई या आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस। इसका हमारे जीवन में कितना दखल है इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते है की होटल में रोबोट, कार का ड्राइवर, हॉस्पिटल में सर्जरी करने वाले, ट्रैफिक कण्ट्रोल करने वाले सभी रोबोट्स ही है। इतना ही नहीं नयी दवाएं तैयार करना, नये केमिकल तैयार करना, निर्देश देना, मार्ग बताना, माइनिंग करने और यहाँ तक की एयर ट्रैफिक कंट्रोल के लिए आर्टिफ़िशियल दिमाग का इस्तेमाल किया जाता है। नीति आयोग ने इसके महत्व को देखते हुए आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग के मुद्दे पर बहस और विचार करने के लिए ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए राष्ट्रीय नीति’ पत्र बनाया था। भारत सरकार ने राष्ट्रीय “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पोर्टल” लॉन्च किया है, जिसका नाम एआई डॉट गॉव डॉट इन (ai.gov.in) है।

भारत अपनी अर्थव्यवस्था को डिज़िटल अर्थव्यवस्था बनाने के साथ-साथ सरकारी काम-काज को AI से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। रोबोटिक्स, वर्चुअल रियल्टी, बिग डेटा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग को फिफ्थ इंडस्ट्रियल रिवोल्युशन कहा जा रहा है इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग इंटरनेट ऑफ थिंग्स, 3-डी प्रिंटिंग और ब्लॉक चेन शामिल हैं ।

Webinar Civil

Expert Talk: “Indian Steel Industry – A Perspective & Indigenous Stride in Capacity Build-up”

Speaker: Mr. Sidhartha Chakravarty
Advisor to M/s NMDC Limited Hyderabad a NavaRatna PSU &
Ex- Executive Director (Technical Services) in MECON, Ranchi.

Date: September 20, 2020 / Time: 5.00 pm

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Organized by Department of Mechanical Engineering

OUTREACH PROGRAM

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी को आईआईआरएस-इसरो आउटरीच नेटवर्क सेंटर के तौर पर मान्यता

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ रिमोट सेंसिंग (आईआईआरएस) और इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गेनाईजेशन (इसरो) द्वारा संचालित आउटरीच प्रोग्राम के तहत झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी, रांची को आईआईआरएस नेटवर्क सेंटर के तौर पर मान्यता प्राप्त हुई है। आईआईआरएस और इसरो द्वारा संयुक्त रूप से चलाये जा रहे ऑनलाइन डिस्टेंस लर्निंग प्रोग्राम में झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी रांची के बीटेक कंप्यूटर साइंस के स्टूडेंट शशिकांत प्रसाद और फैकल्टी मेंबर प्रोफेसर कुमार अमरेंद्र ने “सैटेलाइट फोटोग्राममेट्री एंड इट्स एप्लीकेशन” विषय पर संचालित 1 सप्ताह के ई लर्निंग कोर्स को सफलतापूर्वक पूरा करते हुए प्रमाणपत्र प्राप्त किया है। इसरो से प्राप्त प्रमाणपत्र में विश्वविद्यालय को आईआईआरएस आउटरीच नेटवर्क सेंटर के तौर पर मान्यता दिया है। विश्वविद्यालय के डिपार्टमेंट ऑफ़ कंप्यूटर साइंस एंड इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी की कोर्स कोर्डिनेटर प्रो. अनुराधा शर्मा को इसका नोडल अधिकारी भी बनाया गया है। उन्हें इस के लिए प्रमाणपत्र भी प्राप्त हुआ है।

विश्वविद्यालय के नोडल सेंटर बनने और सफलतापूर्वक प्रमाणपत्र प्राप्त करने पर यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रार ड़ॉ पियूष रंजन ने कंप्यूटर साइंस डिपार्टमेंट एवं प्रमाणपत्र प्राप्त करने वाले स्टूडेंट और फैकल्टी मेंबर की सफलता पर हर्ष व्यक्त किया है। डॉ. रंजन ने विश्वविद्यालय को आईआईआरएस आउटरीच नेटवर्क सेंटर के तौर पर मान्यता दिए जाने पर भी ख़ुशी जाहिर किया। “उन्होंने कहा की वर्तमान समय में ऑनलाइन शिक्षा ने दूरियों की बादयता को समाप्त कर दिया है। ई प्लेटफॉर्म के उपयोग से सभी को मुक्त और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलना बेहद सरल होगया है। अपने दायित्वों को समझे हुए विश्वविद्यालय द्वारा भी इस ओर कार्य किया जा रहा है।“

इस विषय की जानकारी विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी प्रशांत जयवर्धन ने दी।

Mining Engineering

झारखण्ड ही नहीं सीमावर्ती राज्यों के स्टूडेंट्स की भी पहली पसंद बना झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी रांची – माइनिंग इंजीनियरिंग करने के लिए आते है बिहार, बंगाल और ओडिशा के छात्र

खनिज संपदा हमारे जीवन का मुख्य आधार है। खनिज संपदा को निकालने का काम प्रशिक्षित लोगों के नेतृत्व में किया जाता है, जिन लोगों को माइनिंग इंजीनियर कहते हैं। खनिज संपदा को निकालने के कार्य को खनन (माइनिंग) इंजीनियरिंग कहते हैं। बिहार, झारखंड, उड़ीसा, मध्य प्रदेश व पश्चिम बंगाल जैसे राज्य में खनिज पदार्थ भारी मात्रा में हैं। इसको देखते हुए देश में माइनिंग इंजीनियर्स की डिमांड काफी तेजी के साथ बढ़ती जा रही है।झारखण्ड के सीमावर्ती राज्यों में इस विषय की पढ़ाई को लेकर काफी क्रेज देखा गया जाता है क्योकि इस सेक्टर में आज भी जॉब काफी संख्या में निकलते है। माइनिंग इंजीनियरिंग में कैरियर बनाने के लिए किसी मान्यताप्राप्त विद्यालय से साइंस स्ट्रीम में 12 वीं कक्षा पास करना अनिवार्य है। इसके बाद बीटेक और एमटेक जैसे कोर्स भी है। डिप्लोमा इन माइनिंग इंजीनियरिंग इस फील्ड का एक लोकप्रिय कोर्स है जिसमे 10 वीं पास स्टूडेंट भी एडमिशन लेकर अपना भविष्य उज्जवल बना सकता है। माईन मशीन ऑपरेटर ,माइनिंग सरदार जैसे कई जॉब है जो डिप्लोमा लेवल की योग्यता मांगते है।

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झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी, रांची का डिपार्टमेंट ऑफ़ माइनिंग इंजीनियरिंग अपने अद्यतन पाठ्यक्रम, अनुभवी फैकल्टी मेंबर्स और पढ़ाई साथ अतिरिक्त गतिविधियों चलते अपनी विसिष्ट पहचान रखता है। राज्य के चुनिंदा विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में ही ममिनिंग इंजीनियरिंग की पढ़ाई होती है। इस कारण राज्य के बाहर के स्टूडेंट्स पढ़ने के लिए झारखण्ड आते है। अगर सरकारी संस्थानों बात करें तो आईआईटी धनबाद, बीआईटी सिंदरी, सीआईएमएफआर धनबाद और गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक निरसा धनबाद के अलावा अन्य नाम नजर नहीं आता है। ये सभी संस्थान कोयला नगरी धनबाद के आसपास स्थित है। राजधानी रांची, जमशेदपुर और राज्य के अन्य जिलों में इस प्रकार का कोई सरकारी संस्थान नहीं है। निजी सस्थानों में झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी, रांची पिछले कई वर्षों से जाना पहचाना नाम जिसने अपने एजुकेशनल एनवायरनमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण अपनी अलग पहचान बनायीं है। यूनिवर्सिटी का डिपार्टमेंट ऑफ़ माइनिंग इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट जिसमे डिप्लोमा इन माइनिंग इंजीनियरिंग और बीटेक इन माइनिंग इंजीनियरिंग की नियमित पढ़ाई होती है सभी विभागों में अपना विसिष्ट स्थान रखता है। रांची शहर में स्थित होने से अन्य राज्यों से पढ़ाई करने आने वाले स्टूडेंट्स की पहली पसंद भी है। सीसीएल, मेकॉन, सीएमपीडीआई, एचईसी, सेल जैसे बड़े संस्थानों मुख्यालय रांची में होने के कारण माइनिंग के स्टूडेंट्स को इसका लाभ भी मिलता है। माइनिंग इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के अनुभवी फैकल्टी मेंबर्स स्टूडेंट्स को इस सेक्टर में बेहतर करने के लिए तैयार करते है।

यहाँ से माइनिंग इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले स्टूडेंट्स को इंडस्ट्री सेंट्रिक सिलेबस के साथ इस फील्ड के अनुभवी लोगों का मार्गदर्शन समय समय पर मिलता रहता है। इसके अलावा प्रैक्टिकल एजुकेशन की जरुरत को पूरा करने के लिए इंडस्ट्री विजिट,इंटर्नशिप,वर्कशॉप,गेस्ट लेक्चर, माइंस विजिट भी नियमित तौर पर करवाई जाती है।

    यूनिवर्सिटी द्वारा उपलब्ध करवाई जा रही सुविधाओं में :

  1. 100 प्रतिशत पीडीपीटी ( पोस्ट डिप्लोमा प्रैक्टिकल ) ट्रेनिंग। यह ट्रेनिंग संपन्न होती है सीसीएल,एसीएल और बीसीसीएल जैसे नामी संस्थानों में।
  2. कोर्स के दौरान व्यावहारिक (वोकेशनल ) प्रशिक्षण की वयवस्था।
  3. पढ़ाई के दौरान औद्यौगिक भ्रमण (इंडस्ट्रियल विजिट)की सुविधा जिनमें सीएमपीडीआई, सीआईएमएफआर, जीएसआई जैसे संस्थान शामिल है ।
  4. गैस टेस्टिंग एग्जामिनेशन में लैंप हैंडलिंग सर्टिफिकेट प्राप्त करने में सहयोग।
  5. ओवरमैन एग्जामिनेशन पास करने के लिए कैंपस में फ्री प्रतियोगिता परीक्षा तैयारी की सुविधा।
  6. डायरेक्टर जेनेरल ऑफ़ माइंस सेफ्टी (डीजीएमएस ) द्वारा दी जाने वाली योग्यता जाँच प्रमाणपत्र को प्राप्त करने में सहयोग।
  7. बोर्ड ऑफ़ प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (बीओपीटी ) कोलकाता द्वारा मान्यता प्राप्त।
  8. योग्य और अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन।
  9. मॉडर्न माइनिंग लेबोरेटरी की सुविधा शामिल है।
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माइनिंग इंजीनियरिंग : रोजगार की गारंटी

खनिज संपदा हमारे जीवन का मुख्य आधार है। खनिज संपदा को निकालने का काम प्रशिक्षित लोगों के नेतृत्व में किया जाता है, जिन लोगों को माइनिंग इंजीनियर कहते हैं। खनिज संपदा को निकालने के कार्य को खनन (माइनिंग) इंजीनियरिंग कहते हैं।
भारत में खनिज संपदा का बहुत भंडार है। बिहार, झारखंड, उड़ीसा, मध्य प्रदेश व पश्चिम बंगाल जैसे राज्य में खनिज पदार्थ भारी मात्रा में हैं। खनिज संपदा देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसको देखते हुए देश में माइनिंग इंजीनियर्स की डिमांड काफी तेजी के साथ बढ़ती जा रही है। खनन इंजीनियरिंग में धरती के खनिज पदार्थों का पता लगाना और उनकी खुदाई कर बाहर निकालना होता है। खनन इंजीनियरिंग में प्रमुख रूप से उत्खनन, कच्चे खनिज पदार्थों का टेस्ट करना होता है।

माइनिंग या खनन इंजीनियरिंग में कैरियर बनाने के लिए सबसे पहले उम्मीदवार का किसी मान्यताप्राप्त विद्यालय से साइंस स्ट्रीम में 12 वीं कक्षा पास करना अनिवार्य है. इसके बाद उम्मीदवार माइनिंग से बीटेक (B.Tech), बीई (B.E) और बीएससी (BSC) कोर्स कर सकते है.

माइनिंग कोर्स के अन्तर्गत उम्मीदवार को ड्रिलिंग (Drilling), ब्लास्टिंग (Blasting), माइन कॉस्ट इंजीनियरिंग (Mine Cost Engineering), अयस्क रिजर्व विश्लेषण (Ore Reserve Analysis), ऑपरेशन विश्लेषण (Operation Analysis), माइन वेंटीलेशन (Main ventilation), माइन प्लानिंग (Mine Planning), माइन सेफ्टी (Mine Safety), रॉक मैकेनिक्स (Rock Mechanics), कम्प्यूटर एप्लीकेशन (Computer Applications), इंडस्ट्रियल मैनेजमेंट (Industrial Management) से सम्बंधित जानकारी दी जाती है।

मुख्य रूप से इस कोर्स के तहत उम्मीदवार को खनिज पदार्थों की संभावनाओं (Prospects) का पता लगाना, उनके नमूने एकत्रित करना (To collect their samples), भूमिगत (Underground) तथा भूतल खदानों का विस्तार (Surface mines expand) और विकास करना, खनिजों को परिष्कृत करना (To refine minerals) आदि के बारे में जानकारी प्रदान की जाती है।

माइनिंग इंजीनियरिंग में पढ़ाई के बाद कैंडिडेट्स के पास सरकारी और निजी सेक्टरों में रोजगार के अवसर हैं। टाटा आयरन एंड स्टील, रिलायंस पेट्रोलियम, इंडियन ऑयल, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया, यूरेनियम कॉपोरेशन ऑफ इंडिया, सरकारी खनन निगम, हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड, नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन, इंडियन ब्यूरो ऑफ माइंस लिमिटेड, माइनिंग रिसर्च सेंटर, इंडियन एक्सप्लोसिव लिमिटेड, इंडियन डेटोनेटर्स लिमिटेड में करियर शुरू कर सकते हैं।

    झारखण्ड में माइनिंग इंजीनियरिंग के टॉप संस्थान :

  • आटीआईटी धनबाद
  • बीआईटी सिंदरी
  • सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ़ माइनिंग एंड फ्यूल रिसर्च धनबाद गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक, निरसा, धनबाद
  • झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी, रांची
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एनइपी 2020 : वॉट टू थिंक नहीं हाऊ टू थिंक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हायर एजुकेशन पर हुए कॉन्क्लेव में नई शिक्षा नीति पर कहा है कि अब वॉट टू थिंक नहीं बल्कि हाऊ टू थिंक पर फोकस किया जा रहा है।सरकार ने 30 जुलाई को नई शिक्षा नीति घोषित की थी। इसमें स्कूलों के एडमिनिस्ट्रेशन को लेकर बड़े बदलाव किए गए हैं। ऑनलाइन एजुकेशन को बढ़ावा दिया जाएगा। पढ़ाई के पैटर्न में 10 साल के अंदर धीरे-धीरे बदलाव किए जाएंगे।

https://www.jru.edu.in/blog-post/new-education-policy-2020-approved-after-34-years/

प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन की 10 बातें :

  1. बदलाव के लिए पॉलिटिकल विल जरूरी:
    मोदी ने शिक्षा नीति बनाने वाले एक्सपर्ट से कहा कि यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि इतना बड़ा रिफॉर्म जमीन पर कैसे उतारा जाएगा। इस चैलेंज को देखते हुए व्यवस्थाओं को बनाने में जहां कहीं कुछ सुधार की जरूरत है, वह हम सभी को मिलकर करना है। आप सभी राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने में सीधे तौर पर जुड़े हैं। इसलिए आप सब की भूमिका बहुत अहम है।
  2. नेशनल वैल्यूज के साथ लक्ष्य :
    हर देश अपनी शिक्षा व्यवस्था को नेशनल वैल्यूज के साथ जोड़ते हुए और नेशनल गोल्स के अनुसार रिफॉर्म्स करते हुए आगे बढ़ता है, ताकि देश का एजुकेशन सिस्टम वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों का फ्यूचर तैयार कर सके। भारत की पॉलिसी का आधार भी यही सोच है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 21वीं सदी के भारत की फाउंडेशन तैयार करने वाली है।
  3. नई नीति में स्किल्स पर फोकस:
    21वीं सदी के भारत में हमारे युवाओं को जो स्किल्स चाहिए, राष्ट्रीय शिक्षा नीति में इस पर विशेष फोकस है। भारत को ताकतवर बनाने के लिए, विकास की नई ऊंचाई पर पहुंचाने के लिए इस एजुकेशन पॉलिसी में खास जोर दिया गया है। भारत का स्टूडेंट चाहे वो नर्सरी में हो या फिर कॉलेज में, तेजी से बदलते हुए समय और जरूरतों के हिसाब से पढ़ेगा तो नेशन बिल्डिंग में कंस्ट्रक्टिव भूमिका निभा पाएगा।
  4. https://www.jru.edu.in/blog-post/first-green-house-research-center-in-jharkhand-state-located/

  5. इनोवेटिव थिंकिंग पर जोर:
    बीते कई साल से हमारे एजुकेशन सिस्टम में बदलाव नहीं हुए, जिससे समाज में क्यूरोसिटी और इमेजिनेशन की वैल्यू को प्रमोट करने के बजाय भेड़ चाल को बढ़ावा मिलने लगा था। जब तक शिक्षा में पैशन और परपज ऑफ एजुकेशन नहीं हो, तब तक हमारे युवाओं में क्रिटिकल और इनोवेटिव थिंकिंग डेवलप कैसे हो सकती है?
  6. होलिस्टिक अप्रोच की जरूरत :
    बीते कई साल से हमारे एजुकेशन सिस्टम में बदलाव नहीं हुए, उच्च शिक्षा हमारे जीवन को सद्भाव में लाती है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति का बड़ा लक्ष्य इसी से जुड़ा है। इसके लिए टुकड़ों में सोचने की बजाय होलिस्टिक अप्रोच की जरूरत है।शुरुआती दिनों में सबसे बड़े सवाल यही थे कि हमारी शिक्षा व्यवस्था युवाओं को क्यूरोसिटी और कमिटमेंट के लिए मोटिवेट करती है या नहीं? दूसरा सवाल था कि क्या शिक्षा व्यवस्था युवाओं को एम्पावर करती है? देश में एक एम्पावर सोसाइटी बनाने में मदद करती है? पॉलिसी बनाते समय इन सवालों पर गंभीरता से काम हुआ।
  7. 10+2 से आगे निकले :
    एक नई विश्व व्यवस्था खड़ी हो रही है। एक नया स्टैंडर्ड भी तय हो रहा है। इसके हिसाब से भारत का एजुकेशन सिस्टम खुद में बदलाव करे, ये भी किया जाना बहुत जरूरी था। स्कूल करिकुलम के 10+2 से आगे बढ़ना इसी दिशा में एक कदम है। हमें अपने स्टूडेंट्स को ग्लोबल सिटीजन भी बनाना है, साथ ही ध्यान रखना है कि वे जड़ों से भी जुड़े रहें। घर की बोली और स्कूल में पढ़ाई की भाषा एक होने से सीखने की गति बेहतर होगी।
  8. https://www.jru.edu.in/blog-post/jharkhand-rai-university-ke-11-diploma-students-ka-chayan/

  9. हाउ टू थिंक पर जोर :
    अभी तक की व्यवस्था में वॉट यू थिंक पर फोकस रहा है, जबकि नई नीति में हाऊ टू थिंक पर जोर दिया जा रहा है। हर तरह की जानकारी आपके मोबाइल पर है, लेकिन जरूरी ये है कि क्या जानकारी अहम है। नई नीति में इस बात पर ध्यान रखा गया है। ढेर सारी किताबों की जरूरत को खत्म करने पर जोर दिया गया है। इन्क्वायरी, डिस्कवरी, डिस्कशन और एनालिसिस पर जोर दिया जा रहा है। इससे बच्चों में सीखने की ललक बढ़ेगी। हर छात्र को यह मौका मिलना ही चाहिए कि वह अपने पैशन को फॉलो करे।
  10. रीस्किल-अपस्किल से प्रोफेशन बदल सकेंगे :
    अक्सर ऐसा होता है कि कोई कोर्स करने के बाद स्टूडेंट जॉब के लिए जाता है तो पता चलता है कि जो पढ़ा वो जॉब की जरूरतों को पूरा नहीं करता। इन जरूरतों का ख्याल रखते हुए मल्टीपल एंट्री-एग्जिट का ऑप्शन दिया गया है। स्टूडेंट वापस अपने कोर्स से जुड़कर जॉब की जरूरत के हिसाब से पढ़ाई कर सकता है।
    कोई कोर्स बीच में छोड़कर दूसरे में एडमिशन लेना चाहे तो यह भी संभव है। हायर एजुकेशन को स्ट्रीम से मुक्त कर देना, मल्टीपल एंट्री और एग्जिट के पीछे लंबी दूरी की सोच के साथ हम आगे आए हैं। उस युग की तरफ बढ़ रहे हैं, जहां कोई व्यक्ति जीवनभर किसी एक प्रोफेशन में नहीं टिका रहेगा। इसके लिए उसे लगातार खुद को रीस्किल और अपस्किल करते रहना होगा।
  11. रिसर्च और एजुकेशन का गैप होगा खत्म :
    कोडिंग पर फोकस हो या फिर रिसर्च पर ज्यादा जोर, ये सिर्फ एजुकेशन सिस्टम ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की अप्रोच को बदलने का जरिया बन सकता है। वर्चुअल लैब जैसे कंसेप्ट लाखों साथियों के पास बेहतर शिक्षा को ले जाने वाला है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति रिसर्च और एजुकेशन के गैप को खत्म करने में भी अहम भूमिका निभाने वाली है। आज इनोवेशन और एडेप्शन की जो वैल्यू हम समाज में निर्मित करना चाहते हैं वो हमारे देश के इंस्टीट्यूशंस से शुरू होने जा रही है।
  12. टीचर सीखेंगे तो देश बढ़ेगा :
    भारत का टैलेंट भारत में ही रहकर आने वाली पीढ़ियों का विकास करे, इस पर जोर दिया गया है। टीचर्स ट्रेनिंग पर बहुत फोकस है। आई बिलीव वेन ए टीचर लर्न, ए नेशन लीड। राष्ट्रीय शिक्षा नीति सिर्फ एक सर्कुलर नहीं है, इसके लिए मन बनाना होगा। भारत के वर्तमान और भविष्य को बनाने के लिए यह एक महायज्ञ है। 21वीं सदी में मिला बहुत बड़ा अवसर है।