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Webinar Civil

Expert Talk: “Indian Steel Industry – A Perspective & Indigenous Stride in Capacity Build-up”

Speaker: Mr. Sidhartha Chakravarty
Advisor to M/s NMDC Limited Hyderabad a NavaRatna PSU &
Ex- Executive Director (Technical Services) in MECON, Ranchi.

Date: September 20, 2020 / Time: 5.00 pm

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Organized by Department of Mechanical Engineering

hindi-diwas

दिल के भरे रिवाल्वर में बेचैनी जोर मारती है

हिंदी दिवस की बधाई। हिंदी माथे की बिंदी। नई वाली हिंदी। मातृभाषा पर्व के आचमन की बेला आ गयी है। दिन – सप्ताह और माह निकल जायेंगे और अगले बरस हम फिर जुटेंगे हिंदी दिवस को मनाने । ये वाला कुछ खास है क्योंकि डिजिटल है। शोर भी ज्यादा होगा। दिखेगा भी ज्यादा और फैलाया भी जायेगा। दिखाई देने का सुख से हिंदी को क्यों वंचित किया जाय हां दिखने और महसूस होने में बड़ा फर्क है। “अंतर्मन का अहसास, मातृ भाषा के साथ। इस बार हिंदी (नई वाली) दिवस डिजिटल एहसास के साथ। जिसे आप संजो का रख सकते है अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए।” जिंगल मारक है बंधू और गोली की तरह असर कर सकती है नई पीढ़ी पर। असर हो न हो तब भी चलेगा लेकिन किताबें न हो “इ हमका मंजूर नाहीं है “।

किसी अकादमिक अध्यापक कमरे और सरकारी खरीद का हिस्सा बनने से कहीं ज्यादा जरुरी है एक अच्छी किताब का बिस्तर के सिरहाने पर रखा होना। उन लोगों तक पहुँच पाना जिनमें भाषा साँस लेती है और धड़कती है। जिंदगी को थोड़ा बदलने, खिड़कियों को थोड़ा खोलने और दुनिया को थोड़ा बेहतर बनाने के लिए किताबों का होना जरुरी है।

शायद इससे समाज को थोड़ा विस्तार मिल सके जो जरुरी है और जरुरत भी। हमारे और आपके लिए। हमारे आने वाले कल के लिए। अपनी ही संतानो को बताने की जद्दोजद बेहद दुखदायी है की किताबों का पास होना क्या सुख देता है। नई पीढ़ी को कौन और कैसे समझाए की जनसंचार का स्पंदन क्या होता है।

नागरिक जीवन का आरंभ बेशक नई कविता में देखने को मिलता है। लेकिन एक उद्योगिक जीवन की प्रतिछवि भी साथ साथ बनती चली जाती है। विविधताओं से भरा भारतीय जन जीवन की अंतरकथा यहीं तो प्रगट होती है। “जिंदगी बुरादा तो बारूद बनेगी ही ” कविता तभी तो जन्म लेगी। जीवन ही तो कविता का सबसे मार्मिक अंश है। इसे आत्मसंघर्ष से अर्जित किया जाता है। आत्मसंघर्ष से विमुख कविता और जीवन को बयाँ करना कठिन होता है।

कविता केवल बाहर नहीं आंकती बल्कि भीतर भी निरंतर चलती रहती है। एक शांत नदी की तरह जिसके ऊपरी तल पर फैले बालू के महीन कण सूर्य किरणों से चमकते हो और पथिक को आकर्षित करते हो। यह मृग मरीचिका तो नहीं हो सकता क्योंकि सरस्वती (नदी )की तरह निरंजना की धारा भी हजारों वर्षों से अविरल बह रही है। इतिहास और भूगोल कम है लेकिन मन की पड़ताल ज्यादा है।

आम की अमराइयों से, पर्वत और तराई से गुजरते हुए किसे काफिले का ठहर जाना क्या होता है यह कोई चरवाहा खूब समझता है जिसकी भेड़े अभी भी हरी पत्तियों की तलाश में मैदानों और चट्टानों के नुकीले सिरों पर ढूंढती रही है कुछ हरी पत्तियाँ। और काफिले के आ जाने से जो बेअदबी और बेकरारी का जो शोर होता है वह उनसे उनका हक़ छीन लेता है जो उनका था या होने वाला था अगले ही पल।

PUBG

ऑन लाइन गेमिंग बाजार में भारत का फौजी

चीनी ऐप्स पर डिजिटल वार करते हुए इस बार भारत सरकार ने कुल 118 ऐप्स को बैन कर दिया है । भारत के डिजिटल स्ट्राइक पार्ट 3 का सबसे बड़ा शिकार पाबजी गेम को माना जा रहा है जिसने बहुत तेजी से भारतीय किशोर वर्ग को अपना दीवाना बना दिया था। आये दिन पाबजी को लेकर आत्महत्या और अपराध से जुडी खबरें सुनने को मिलती रहती थी। अभिभावकों की यह एक आम शिकायत थी की बच्चे इसके कारण पढ़ाई में मन नहीं लगा पाते है। अब पबजी के जवाब में भारत की एक कंपनी ने ऑनलाइन गेम लांच किया है। इसका फीचर्स भी काफी हद तक पबजी जैसा ही होगा. इस गेमिंग एप का नाम Fearless and United Guards FAU: G है। बताया जा रहा है की इसे अक्टूबर महीने के अंत तक लांच किया जायेगा। फौजी की तमाम फीचर्स की जानकारी नहीं मिल सकी है। हालांकि, कहा गया है की गेम का पहला लेवल गलवान वैली की घटना से जुड़ा है । 15 जून की रात पूर्वी लद्दाख की गलवान वैली में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हो गई थी। कंपनी को उम्मीद है कि लांचिंग के बाद तकरीबन 20 करोड़ मोबाइल यूजर्स फौजी को इस्टॉल करेंगे। यह ऑनलाइन गेम मेक इन इंडिया के तहत बनाया जा रहा है और भारतीय सेना को समर्पित है। कंपनी का कहना है कि इससे होने वाली कमाई का 20 फीसदी हिस्सा भारतीय सेना के शहीद जवानों की फैमिली को दिया जायेगा । बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार की कंपनी इस मुहिम का समर्थन कर रहे हैं. अक्षय कुमार ने इसे लेकर ट्वीट भी किया था।

मोबाइल गेम का बाजार :
पबजी (Player Unknown’s Battlegrounds) दुनिया भर में मोबाइल पर खेला जानेवाला एक पॉपुलर गेम है । भारत में भी इसके काफ़ी दीवाने हैं । एक जापानी थ्रिलर फ़िल्म ‘बैटल रोयाल’ से प्रभावित होकर बनाया गया यह गेम जिसे दक्षिण कोरिया की वीडियो गेम कंपनी ब्लूहोल कंपनी ने बनाया लेकिन चीन की कंपनी टेनसेंट कुछ बदलाव के साथ इसका मोबाइल वर्जन नए नाम से बाज़ार में लेकर आई और छा गयी। दुनिया में पबजी खेलने वालों में से लगभग 25 फ़ीसद भारत में हैं। जबकि चीन में महज़ 17 फ़ीसद यूज़र्स और अमरीका में 6 फ़ीसद यूज़र्स हैं ।

दुनिया भर में गेमिंग का बाज़ार 16.9 अरब डॉलर का है इसमें चीन की हिस्सेदारी 4.2 अरब डॉलर के साथ सबसे आगे है। दूसरे नंबर पर अमरीका, तीसरे नंबर पर जापान और फिर ब्रिटेन और दक्षिण कोरिया का नंबर आता है।

भारत में अब भी इसका बाजार एक अरब डॉलर से भी कम का है. लेकिन बाक़ी देशों के लिए उभरता हुआ बाज़ार ज़रूर है।भारत में सिर्फ़ पबजी की बात करें तो इस गेम के 175 मिलियन डाउनलोड्स हैं, जिसमें से एक्टिव यूज़र 75 मिलियन के आसपास हैं। चीन से ज़्यादा लोग भारत में पबजी खेलते हैं लेकिन कमाई की बात करें तो वो भारत से बहुत कम होती है ऐसा इसलिए क्योंकि पैसा ख़र्च कर गेम खेलने वालों की तादाद भारत में कम है।

भविष्य में ‘गेमिंग हब’ के तौर पर भारत को देखा जा रहा है अगर किसी कंपनी को भारत के बाज़ार से बाहर निकलना पड़ेगा, तो उस पर असर उसके यूज़र बेस पर ज़रूर पड़ेगा।

यूज़र बेस की बात करें तो भारत में 14 साल से लेकर 24 साल के बच्चे और युवा ऑनलाइन गेम को सबसे ज़्यादा खेलते हैं लेकिन पैसा ख़र्च करने की बात करें तो 25 से 35 साल वाले ऑनलाइन गेमिंग पर ख़र्च ज़्यादा करते हैं ।

गेमिंग से कमाई :

ऑनलाइन गेमिंग में कई तरह से कमाई होती है।

गेमिंग से पैसा कमाने का एक मॉडल है फ्रीमियम का – यानी पहले फ्री में दो और बाद में किश्तों में ख़र्च करने को कहो दूसरा मॉडल है – मर्चन्डाइज़ बना कर।

गेम से प्रभावित होकर अक्सर उन चीज़ों की ख़रीद बच्चों में ख़ास कर बढ़ जाती है, जैसे गेम से जुड़े कैरेक्टर, टी-शर्ट, कप प्लेट, कपड़ों का क्रेज़ इससे भी कंपनियाँ कमाई करती हैं । कमाई का तीसरा रास्ता है : विज्ञापन और फिल्मों का निर्माण ।कई बार फ़िल्मों पर आधारित गेम्स आते हैं फ़िल्म की लोकप्रियता गेम्स के प्रचार प्रसार में मदद करती है और कभी गेम्स की लोकप्रियता फ़िल्मों के प्रचार प्रसार में मदद करती है। जो लोग इस गेम को प्रोफ़ेशनल तरीक़े से खेलते हैं उनको सरकार के इस क़दम से नुक़सान पहुँच सकता है. कई गेम्स खेलने वाले यूट्यूब पर भी बहुत पापुलर हैं इस तरह के गेम्स ऑर्गेनाइज़ करने वालों को भी काफ़ी नुक़सान होगा ।लेकिन टिकटॉक पर बैन के बाद पबजी बैन की चर्चा शुरू हो गई थी. ऐसे में बहुत लोगों ने पहले ही दूसरे गेम्स पर शिफ्ट करना शुरू कर दिया था।

दूसरा विकल्प क्या है ?

भारत में अभी ऑनलाइन गेम्स बनाने का बहुत बड़ा चलन नहीं है। भारतीय डेवलपर्स इसमें अभी काफ़ी पीछे हैं. उनको उम्मीद है कि बैन के बाद इसमें कई कंपनियाँ अब हाथ आज़माएंगी, क्योंकि अब तक उन्हें पबजी की लोकप्रियता से ख़तरा ज़्यादा था।

भारत में हर तरह के मोबाइल और ऑनलाइन गेम खेलने और देखने वालों की संख्या लगभग 30 करोड़ है, जो लॉकडाउन के समय से लगातार बढ़ती जा रही है। कुछ भारतीय गेम्स भी हैं जो यहाँ के लोगों में पापुलर है जैसे बबल शूटर, मिनीजॉय लाइट, गार्डन स्केप, कैंडी क्रश।

बाजार पर पकड़ और कमाई की बात करने तो अभी भी भारत की पकड़ वैश्विक नहीं मानी जाएगी। चीन के बढ़ते दबदबे को कम करने करने के लिए बैन करने के अलावा बड़े खिलाडियों को इस बाजार पर पकड़ बनानी होगी। भतार की बड़ी आबादी युवाओं की है जिसे बदलाव की आदत है और वह किसी एक गेम के भरोसे रुका नहीं रह सकता।

एक भारतीय कंपनी ने अभिनेता अक्षय कुमार के साथ मिलकर ‘पबजी जैसा’ मोबाइल गेम बाज़ार में लाने की घोषणा की है जिसका मक़सद स्पष्ट रूप से बाज़ार में बनी उस ख़ास जगह को भरना है, जो नामी चीनी मोबाइल ऐप पबजी पर प्रतिबंध लगने से बनी है.

बेंगलुरु स्थित एन-कोर गेम्स नामक कंपनी ने इस मोबाइल गेम को तैयार किया है जिसे सीधे तौर पर पबजी का प्रतिद्वंद्वी माना जा रहा है.
कंपनी ने इस गेम को ‘फ़ौजी’ (FAU:G) नाम दिया है जो अक्तूबर अंत तक बाज़ार में होगा.

कंपनी के सह-संस्थापक विशाल गोंडल ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बातचीत में कहा कि “फ़ियरलेस एंड यूनाइटेड गार्ड्स इस गेम का पूरा नाम है. इस गेम पर कई महीने से काम चल रहा था. हमने इस गेम के पहले लेवल को गलवान घाटी पर आधारित रखा है.”

गलवान घाटी में ही चीन और भारत के सैनिकों के बीच जून में पहली बार टकराव हुआ था जिसमें कम से कम 20 भारतीय जवान मारे गये थे. तभी से वास्तविक नियंत्रण रेखा को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव जारी है.

Online Shopping and One Star Review

ऑनलाइन शॉपिंग : वन स्टार रीव्यू का गोलमाल

हम और आप जैसे कितने ही लोग जब ऑनलाइन शॉपिंग करते है तो एक नजर प्रोडक्ट के रीव्यू की तरफ भी डालते है। इससे हम मन लेते है या कहे मन को बहला लेते है की जो प्रोडक्ट हमने ख़रीदा है वो उसके बारे में लोगों की राय अच्छी है। सीधा बोले तो अच्छा रीव्यू मतलब अच्छा सामान और ख़राब रीव्यू मतलब ख़राब सामान। लेकिन ये रीव्यू फर्जी हो सकते है या जानबूझकर आपको भ्रमित करने के लिए दलए गए है यह सुनकर आपके मन में धोखा खाने जैसे विचार आ सकते है। बहुत सारे लोग इस खेल को अब समझ गए है और इसे नजरअंदाज करते हुए प्रोडक्ट को ठोक बजाकर खरीददारी करते है। लेकिन एक नया चलन आया है नेगेटिव रीव्यू। इसे बोलचाल की भाषा में वन स्टार रीव्यू भी कहा जाता है। दरसल यह किया जाता है अपने प्रतिस्पर्धी कंपनियों को नुकसान पहुंचाने और बिक्री को कम करने के लिए।

वन स्टार रीव्यू :
अमेजन हो या फ्लिपकार्ट या फिर कोई भी शॉपिंग वेबसाइट्स जहां से हम खरीदारी करते हैं। सामान खरीदने से पहले हम अक्सर उस प्रोडक्ट के रिव्यू को पढ़ते हैं। उसके बाद रिव्यू के आधार पर हम यह तय करते हैं कि उस सामान को खरीदना है या नहीं। प्रतिद्वंद्वियों को नुकसान पहुंचाने के लिए इंडिपेंडेंस सेलर द्वारा बेवसाइट पर वन स्टार रिव्यू (संतोषजनक नहीं होना) दिया जाता है।

फर्जी फीडबैक :
फीड बैक या प्रतिपुष्टि का अर्थ है आपके किसी भी प्रकार के कार्य पर राय व्यक्त करना। बाजार भी इससे अछूता नहीं है। मार्केट और प्रोडक्ट के बीच अन्योनाश्रय संबंध है और इसी बंधन में बंधा है जिसने इसे बनाया है यानि कंपनी। यानि नकारात्मक फीड बैक से तीनो प्रभावित होंगे। मांग और आपूर्ति के नियम को यह प्रभावित करता है।

उदाहरण स्वरुप : किसी प्रोडक्ट को अगर 1 स्टार रेटिंग मिलती है तो इससे निपटने के लिए उसे 20 फाइव स्टार रीव्यू चाहिए होंगे। लेकिन यह इतना सीधा उत्तर नहीं है जिसे कोई भी कंपनी या प्रोडक्ट किसी की मदद से हासिल कर ले। यह हजारों की संख्या में होते है और लगभग हर प्रोडक्ट इससे प्रभावित होता है।

बाजार में स्टार्ट अप के साथ उतरने को तैयार खिलाडियों के लिए तो यह बेहद खतरनाक साबित होगा अगर उनके बारे में यह पहली राय ही नकारात्मक हो। इंडिपेंडेंट सेलर दुनिया भर में फैले हुए है जो अरबों रूपए की कमाई साल भर में करते है।

अगर डिलीवरी में देरी, सामान में खराबी की वजह से नेगेटिव रीव्यू मिलता है तो ऑनलाइन सेलिंग कंपनियां तुरंत उन्हें अपने प्लेटफॉर्म से हटा देती है। कुछ बड़ी कंपनियां अपने प्लेटफॉर्म पर बिकने वाले प्रोडक्ट को लेकर सेंसेटिव होती है और अपने नाम पर किसी प्रकार के दाग को मिटने के लिए तत्पर रहती है इसके लिए वो नेगेटिव फीडबैक देने वाले के साथ किसी भी प्रकार का कोम्प्रोमाईज़ करने को तैयार रहती है। कंपनियों ने इसके लिए कड़े नियम बनाये है। लेकिन तमाम क़ानूनी प्रावधानों के बाबजूद चूहे और बिल्ली के खेल में इसे रोक पाना मुश्किल टास्क है ।

world suicide prevention

नेवर गिव अप : यू कैन फ़्लाई

आज सुबह गूगल कैलेंडर में (10 सितंबर पर ) लिखी पंक्ति “नेवर गिव अप यू कैन फ्लाई ” ने मेरा ध्यान खिंचा। आज का दिन वर्ल्ड सुसाईड प्रिवेंशन डे के तौर पर मनाया जाता है। हार नहीं मानना और हमेशा संघर्ष रत रहना जीवन है। जीवन के इस मूल भाव को नहीं समझने वाले ही आत्महत्या जैसे कायराना कार्य की तरफ सोचते है।

एक ऐसा ही उदहारण है मुंबई में रहने वाले 21 साल के यश अवधेश गांधी । ज़िंदगी की मुश्किल चुनौतियों का सामना करते हुए यश ने मैनेजमेंट की प्रवेश परीक्षा कैट में 92.5 अंक लाकर न केवल अपने माता पिता का नाम रोशन किया बल्कि कई युवाओं के लिए मिसाल बन गए। इनका एडमिशन आईआईएम लखनऊ में हुआ है जहां पहुंचना बहुतेरे छात्रों का सपना होता है। यश की कहानी इसलिए प्रेरणादायक है क्योंकि वे सेरेब्रल पॉल्सी और डिस्लेक्सिया जैसी बेहद गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं. लड़खड़ा कर चल पाते हैं लेकिन हौसले को लेकर उनके क़दम नहीं लड़खड़ाए।

मुश्किलों के बाद भी यश ने की तैयारी की और उन्हें लिखित परीक्षा देने के लिए एक राइटर की ज़रूरत होती है, वह ख़ुद अपना पेपर नहीं लिख सकते।

सेरेब्रल पॉल्सी और डिस्लेक्सिया ऐसी स्थिति को कहते हैं जिसमें शरीर की ज़रूरी मांसपेशियां कमज़ोर हो जाती हैं।यश ने अगर हार मानकर अपनी जिन्दी को गुड़ बॉय बोल दिया होता तो वह एक मिशाल नहीं बन पाते ।

फिल्म अभिनेता सुशांत सिंह की मौत ने फिर से यह सवाल खड़ा कर दिया है की सफलता का पैमाना क्या है ? संघर्ष और असफलता का रास्ता क्या इस ओर जाता है ?

हमारे सामने कितने ही उदाहरण है जिन्होंने जीवन के सुरवती वर्षों में लगातार असफलता ही प्राप्त किया लेकिन हार नहीं मानी अपने हाथों से अपनी सफलता की लकीर खींची।

आत्महत्या शब्द जीवन से पलायन का डरावना सत्य है जो दिल को दहलाता है, डराता है, खौफ पैदा करता है, दर्द देता है। इसका दंश वे झेलते हैं जिनका कोई अपना आत्महत्या कर चला जाता है। कितने ही युवा संघर्ष से घबरा कर आतमहतया की तरफ मुड़ जाते है क्या यह समाधान है ?

भारतीय मानस पहले इतना कमजोर कभी नहीं था जितना अब दिखाई पड़ रहा है। कम सुविधा व सीमित संसाधन में भी संतोष और सुख से रहने का गुण इस देश की संस्कृति में रचा-बसा है ।

TEACHERS DAY

झारखण्ड राय विश्वविद्यालय में शिक्षक दिवस का आयोजन कुलपति डॉ. सविता सेंगर ने कहा नई शिक्षा नीति में लाइफ स्किल महत्वपूर्ण विषय

5 सितंबर शिक्षक दिवस के अवसर पर झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी, रांची में ऑनलाइन शिक्षक दिवस समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर किया गया।

सर्वप्रथम यूनिवर्सिटी की कुलपति डॉ. सविता सेंगर ने शिक्षक दिवस की महत्ता और आयोजन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा की ” जीवन में सफल होने के लिए शिक्षा सबसे ज्यादा जरुरी है। शिक्षक देश के भविष्य और युवाओं के जीवन को बनाने और उसे आकार देने के लिये सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कोविड 19 और लॉक डाउन की चर्चा करते हुए डॉ सेंगर ने कहा ” कोरोना वाइरस और लॉक डाउन के परिस्थित एक चुनौती पूर्ण स्थिति थी जिसे लेकर सभी चिंतित थे। किस प्रकार समय पर कोर्स पूरा होगा, अकादमिक कैलेंडर और एक्टिविटी को किस प्रकार पूरा किया जायेगा। यह सभी सवाल शिक्षक, अभिभावक और छात्रों के मन में चल रहा था । लेकिन प्रत्येक चुनौती में अवसर भी छुपा रहता है और इस कठिन चुनौती को पूरा करने में टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टॉफ का भरपूर सहयोग प्राप्त हुआ। फैकल्टी मेंबर्स ने बिना एक दिन की हानी किये पुरे ऐकडेमिक कैलेंडर को सफलतापूर्वक पूरा किया और इसमें तकनीक का बेहतर इस्तेमाल शामिल है। डॉ सेंगर ने अपने संबोधन के दौरान कहा की “यूनिवर्सिटी ने अपने पाठ्यक्रम में लाइफ स्किल महत्वपूर्ण विषय मानते हुए स्थान दिया है। यह स्टूडेंट्स को तकनिकी और व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करने में कारगर साबित हुआ है।“

नई शिक्षा नीति 2000 की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया की ” इसके जरिये उच्च शिक्षा में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। नई शिक्षा नीति उच्च शिक्षण संस्थानों और गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा प्राप्त करने के इक्छुक छात्रों को लाभांवित करेगा। “

यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रार डॉ. पीयूष रंजन ने अपने संबोधन में ” विश्वविद्यालय के सभी शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारियों को शिक्षक दिवस की शुभकामनायें दी। उन्होंने कहा की यह ऐकडेमिक वर्ष एक चुनौती की तरह था जिसमें फैकल्टी मेम्बर्स को एक नए प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हुए अकादमिक सत्र को पूरा करना था। मुझे बेहद ख़ुशी है की किसी भी शैक्षणिक दिवस के नुकसान के बिना इसे पूरा किया गया और इसमें शिक्षकों का योगदान अतुलनीय है। विश्वविद्यालय ने चुनौती को अवसर में बदलते हुए अपना ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भी स्थापित किया है जिसके जरिये नियमित पढ़ाई जारी है।“ ड़ॉ. रंजन ने इस अवसर पर विश्वविद्यालय द्वारा प्रतिवर्ष शिक्षक दिवस के अवसर पर दिए जाने वाले पुरस्कारों की घोषणा की। इस वर्ष यूनिवर्सिटी के बेस्ट डिपार्टमेंट का अवार्ड डिपार्टमेंट ऑफ़ माइनिंग इंजीनियरिंग को दिया गया। फैकल्टी ऑफ़ द ईयर का अवार्ड कंप्यूटर साइंस डिपार्टमेंट के प्रो. कुमार अमरेंद्र को और मेंटर ऑफ़ द ईयर का अवार्ड माइनिंग इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के प्रो सुमीत किशोर को प्राप्त हुआ। ओवरऑल इंस्टीटूशनल डेवलपमेंट एक्टिविटीज के लिए प्रो. रश्मि ने दूसरी बार यह पुरस्कार प्राप्त किया। इस अवसर पर वैसे सभी शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारियों को भी प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया जिन्होंने पिछले पांच वर्षों से विश्वविद्यालय में अपनी निर्बाध सेवा देने का कार्य किया है। सम्मान समारोह के समापन के बाद छात्र -छात्राओं के द्वारा गीत, संगीत,नृत्य कविता प्रस्तुति का कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम के आयोजन में कल्चरल क्लब के स्टूडेंट्स और मेंबर्स की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम का संचालन छात्रा अंशिका, स्वाति और फैजल ने किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन प्रो. अनुराधा शर्मा के द्वारा किया गया।

OUTREACH PROGRAM

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी को आईआईआरएस-इसरो आउटरीच नेटवर्क सेंटर के तौर पर मान्यता

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ रिमोट सेंसिंग (आईआईआरएस) और इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गेनाईजेशन (इसरो) द्वारा संचालित आउटरीच प्रोग्राम के तहत झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी, रांची को आईआईआरएस नेटवर्क सेंटर के तौर पर मान्यता प्राप्त हुई है। आईआईआरएस और इसरो द्वारा संयुक्त रूप से चलाये जा रहे ऑनलाइन डिस्टेंस लर्निंग प्रोग्राम में झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी रांची के बीटेक कंप्यूटर साइंस के स्टूडेंट शशिकांत प्रसाद और फैकल्टी मेंबर प्रोफेसर कुमार अमरेंद्र ने “सैटेलाइट फोटोग्राममेट्री एंड इट्स एप्लीकेशन” विषय पर संचालित 1 सप्ताह के ई लर्निंग कोर्स को सफलतापूर्वक पूरा करते हुए प्रमाणपत्र प्राप्त किया है। इसरो से प्राप्त प्रमाणपत्र में विश्वविद्यालय को आईआईआरएस आउटरीच नेटवर्क सेंटर के तौर पर मान्यता दिया है। विश्वविद्यालय के डिपार्टमेंट ऑफ़ कंप्यूटर साइंस एंड इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी की कोर्स कोर्डिनेटर प्रो. अनुराधा शर्मा को इसका नोडल अधिकारी भी बनाया गया है। उन्हें इस के लिए प्रमाणपत्र भी प्राप्त हुआ है।

विश्वविद्यालय के नोडल सेंटर बनने और सफलतापूर्वक प्रमाणपत्र प्राप्त करने पर यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रार ड़ॉ पियूष रंजन ने कंप्यूटर साइंस डिपार्टमेंट एवं प्रमाणपत्र प्राप्त करने वाले स्टूडेंट और फैकल्टी मेंबर की सफलता पर हर्ष व्यक्त किया है। डॉ. रंजन ने विश्वविद्यालय को आईआईआरएस आउटरीच नेटवर्क सेंटर के तौर पर मान्यता दिए जाने पर भी ख़ुशी जाहिर किया। “उन्होंने कहा की वर्तमान समय में ऑनलाइन शिक्षा ने दूरियों की बादयता को समाप्त कर दिया है। ई प्लेटफॉर्म के उपयोग से सभी को मुक्त और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलना बेहद सरल होगया है। अपने दायित्वों को समझे हुए विश्वविद्यालय द्वारा भी इस ओर कार्य किया जा रहा है।“

इस विषय की जानकारी विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी प्रशांत जयवर्धन ने दी।

Mining Engineering

झारखण्ड ही नहीं सीमावर्ती राज्यों के स्टूडेंट्स की भी पहली पसंद बना झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी रांची – माइनिंग इंजीनियरिंग करने के लिए आते है बिहार, बंगाल और ओडिशा के छात्र

खनिज संपदा हमारे जीवन का मुख्य आधार है। खनिज संपदा को निकालने का काम प्रशिक्षित लोगों के नेतृत्व में किया जाता है, जिन लोगों को माइनिंग इंजीनियर कहते हैं। खनिज संपदा को निकालने के कार्य को खनन (माइनिंग) इंजीनियरिंग कहते हैं। बिहार, झारखंड, उड़ीसा, मध्य प्रदेश व पश्चिम बंगाल जैसे राज्य में खनिज पदार्थ भारी मात्रा में हैं। इसको देखते हुए देश में माइनिंग इंजीनियर्स की डिमांड काफी तेजी के साथ बढ़ती जा रही है।झारखण्ड के सीमावर्ती राज्यों में इस विषय की पढ़ाई को लेकर काफी क्रेज देखा गया जाता है क्योकि इस सेक्टर में आज भी जॉब काफी संख्या में निकलते है। माइनिंग इंजीनियरिंग में कैरियर बनाने के लिए किसी मान्यताप्राप्त विद्यालय से साइंस स्ट्रीम में 12 वीं कक्षा पास करना अनिवार्य है। इसके बाद बीटेक और एमटेक जैसे कोर्स भी है। डिप्लोमा इन माइनिंग इंजीनियरिंग इस फील्ड का एक लोकप्रिय कोर्स है जिसमे 10 वीं पास स्टूडेंट भी एडमिशन लेकर अपना भविष्य उज्जवल बना सकता है। माईन मशीन ऑपरेटर ,माइनिंग सरदार जैसे कई जॉब है जो डिप्लोमा लेवल की योग्यता मांगते है।

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झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी, रांची का डिपार्टमेंट ऑफ़ माइनिंग इंजीनियरिंग अपने अद्यतन पाठ्यक्रम, अनुभवी फैकल्टी मेंबर्स और पढ़ाई साथ अतिरिक्त गतिविधियों चलते अपनी विसिष्ट पहचान रखता है। राज्य के चुनिंदा विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में ही ममिनिंग इंजीनियरिंग की पढ़ाई होती है। इस कारण राज्य के बाहर के स्टूडेंट्स पढ़ने के लिए झारखण्ड आते है। अगर सरकारी संस्थानों बात करें तो आईआईटी धनबाद, बीआईटी सिंदरी, सीआईएमएफआर धनबाद और गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक निरसा धनबाद के अलावा अन्य नाम नजर नहीं आता है। ये सभी संस्थान कोयला नगरी धनबाद के आसपास स्थित है। राजधानी रांची, जमशेदपुर और राज्य के अन्य जिलों में इस प्रकार का कोई सरकारी संस्थान नहीं है। निजी सस्थानों में झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी, रांची पिछले कई वर्षों से जाना पहचाना नाम जिसने अपने एजुकेशनल एनवायरनमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण अपनी अलग पहचान बनायीं है। यूनिवर्सिटी का डिपार्टमेंट ऑफ़ माइनिंग इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट जिसमे डिप्लोमा इन माइनिंग इंजीनियरिंग और बीटेक इन माइनिंग इंजीनियरिंग की नियमित पढ़ाई होती है सभी विभागों में अपना विसिष्ट स्थान रखता है। रांची शहर में स्थित होने से अन्य राज्यों से पढ़ाई करने आने वाले स्टूडेंट्स की पहली पसंद भी है। सीसीएल, मेकॉन, सीएमपीडीआई, एचईसी, सेल जैसे बड़े संस्थानों मुख्यालय रांची में होने के कारण माइनिंग के स्टूडेंट्स को इसका लाभ भी मिलता है। माइनिंग इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के अनुभवी फैकल्टी मेंबर्स स्टूडेंट्स को इस सेक्टर में बेहतर करने के लिए तैयार करते है।

यहाँ से माइनिंग इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले स्टूडेंट्स को इंडस्ट्री सेंट्रिक सिलेबस के साथ इस फील्ड के अनुभवी लोगों का मार्गदर्शन समय समय पर मिलता रहता है। इसके अलावा प्रैक्टिकल एजुकेशन की जरुरत को पूरा करने के लिए इंडस्ट्री विजिट,इंटर्नशिप,वर्कशॉप,गेस्ट लेक्चर, माइंस विजिट भी नियमित तौर पर करवाई जाती है।

    यूनिवर्सिटी द्वारा उपलब्ध करवाई जा रही सुविधाओं में :

  1. 100 प्रतिशत पीडीपीटी ( पोस्ट डिप्लोमा प्रैक्टिकल ) ट्रेनिंग। यह ट्रेनिंग संपन्न होती है सीसीएल,एसीएल और बीसीसीएल जैसे नामी संस्थानों में।
  2. कोर्स के दौरान व्यावहारिक (वोकेशनल ) प्रशिक्षण की वयवस्था।
  3. पढ़ाई के दौरान औद्यौगिक भ्रमण (इंडस्ट्रियल विजिट)की सुविधा जिनमें सीएमपीडीआई, सीआईएमएफआर, जीएसआई जैसे संस्थान शामिल है ।
  4. गैस टेस्टिंग एग्जामिनेशन में लैंप हैंडलिंग सर्टिफिकेट प्राप्त करने में सहयोग।
  5. ओवरमैन एग्जामिनेशन पास करने के लिए कैंपस में फ्री प्रतियोगिता परीक्षा तैयारी की सुविधा।
  6. डायरेक्टर जेनेरल ऑफ़ माइंस सेफ्टी (डीजीएमएस ) द्वारा दी जाने वाली योग्यता जाँच प्रमाणपत्र को प्राप्त करने में सहयोग।
  7. बोर्ड ऑफ़ प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (बीओपीटी ) कोलकाता द्वारा मान्यता प्राप्त।
  8. योग्य और अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन।
  9. मॉडर्न माइनिंग लेबोरेटरी की सुविधा शामिल है।

बीबीए इन लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट: बने सप्लाई के एक्सपर्ट

Q. लॉजिस्टिक्स किसे कहते है। इस शब्द की उत्पति कैसे हुई ?
Ans. लॉजिस्टिक्स शब्द की उत्पत्ति सेना में हुई थी। लॉजिस्टिक्स शब्द का उपयोग सैनिकों को उपकरण और आपूर्ति प्राप्त करने की प्रक्रिया के लिए किया जाता था। 1950 के दशक तक, जब व्यवसायों के लिए शिपिंग सामग्री की जटिलता बढ़ गई थी, तब तक यह ‘रसद’ व्यावसायिक कार्यों के लिए संदर्भित नहीं था। अब, रसद एक उद्योग है और किसी भी व्यवसाय मॉडल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है; यह किसी व्यवसाय में माल के प्रवाह और भंडारण का नियंत्रण है।अर्थात ग्राहकों को माल परिवहन की आर्थिक गतिविधि या कहें सैनिकों के लिए रसद समार्गी अभियान, उपकरण और आवास की व्यवस्था करने का विज्ञान।

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Q. लॉजिस्टिक्स में होता क्या है ?
Ans. लॉजिस्टिक्स एक कंपनी या प्रोडक्ट डिलीवरी से जुड़े भीतर की गतिविधियों को करता है। इसमें ओपनिंग प्रोडक्शन से फाइनल डिलीवरी तक शामिल है। दूसरी भाषा में कहें तो लॉजिस्टिक्स प्रोडूसर को संतुस्ट करती है की उसके द्वारा मंगाया गया सामान काम समय और उचित खर्चे में उसके पास पहुंचेगा। लॉजिस्टिक्स प्रबंधन प्रक्रिया कच्चे माल के संचय से शुरू होती है जो गंतव्य तक माल पहुंचाने के अंतिम चरण में होती है। ग्राहकों की जरूरतों और उद्योग मानकों का पालन करके, रसद प्रबंधन प्रक्रिया की रणनीति, योजना और कार्यान्वयन की सुविधा प्रदान करता है।

Q. लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन मैनेजमेंट कैसे अलग हैं?
Ans. लॉजिस्टिक्स का तात्पर्य किसी कंपनी के भीतर के कार्यों से है। जैसे : डिस्ट्रीब्यूटर को कच्चे माल की खरीद और डिलीवरी। पैकेजिंग , शिपमेंट। परिवहन इत्यादि। जबकि सप्लाई चेन मैनेजमेंट में बाहरी संगठनों का नेटवर्क है जिसमें वेंडर, ट्रंसपोटशन प्रोवाइडर, वेयरहाउस प्रोवाइडर, कॉल सेंटर और प्रोडक्ट डिलीवरी देने वाले वाले कार्य एक साथ किये जाते है।

Q. लॉजिस्टिक्स क्यों महत्वपूर्ण है ?
Ans. छोटे वयवसाय और ग्राहकों की जरुरत को पूरा करने के लिए। उत्पाद अगर समय पर ग्राहक तक नहीं पहुंचा तो व्यापार विफल हो जायेगा। लॉजिस्टिक्स में कुशलता के साथ कच्चे माल खरीदना उपयोग किये जाने तक स्टोर करके रखना और अधिक समय तक लाभदायक बनाकर रखना होता है।

Q.बीबीए इन लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट कोर्स क्या है ?
Ans. बीबीए इन लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट 3 वर्षीय कोर्स है जिसे उद्योग जगत की आवशयकता को ध्यान में रखते हुए संचालित किया जा रहा है। यह कोर्स उनकी जरूरतों को पूरा करते हुए स्किल्ड फोर्स उपलब्ध करता है। बीबीए इन लॉजिस्टिक पाठ्यक्रम के दौरान स्टूडेंट्स को लॉजिस्टिक्स इंडस्ट्री में कार्य करने के लिए पूरी तरह तैयार किया जाता है जिनमें स्किल और ऐटिट्यूड, लाइफ स्किल, क्लास रूम लर्निंग, इंटर्नशिप के साथ 18 महीने का इंडस्ट्री एक्सपीरिएंस/ ऑन जॉब ट्रेनिंग, स्कॉलरशिप और प्लेसमेंट शामिल है।

Q. लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट क्यों इम्पोर्टेन्ट है ?
Ans. लॉजिस्टिक का क्षेत्र काफी विस्तृत है। वेयर हाउसिंग सिस्टम, डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम भी इसके हिस्से हैं। यहां काम करने वाले प्रोफेशनल को इन सारे कार्यों की जानकारी होनी चाहिए। इसके अलावा लेबर मैनेजमेंट, कस्टमर को-ऑर्डिनेशन, पर्चेजिंग जैसे क्षेत्र भी लॉजिस्टिक के अंतर्गत आते हैं। लॉजिस्टिक मैनेजमेंट किसी भी कारोबार, संगठन या व्यक्ति विशेष के लिए आवश्यक सामग्री या कच्चे माल की आपूर्ति करता है । कोई भी उत्पाद या सेवा या कच्चे माल की मांग और आपूर्ति में संतुलन बना रहे यह देखना और उपभोक्ता की संतुष्टि भी देखना उसका काम होता है। माल की सही डिलीवरी उसे सुनिश्चित करना होता है। उदाहरण के लिए भारत के आम, चीन के इलेक्ट्रिक सामान, इटली के ऑलिव ऑयल, अमेरिकन चॉकलेट, अरब के खजूर, जर्मनी की कारें या फिर अलग-अलग जगहों के स्पेशल आइटम्स अगर आज सरलता से हमारे स्टोर्स में उपलब्ध हैं तो इसके पीछे सबसे अहम रोल लॉजिस्टिक का ही होता है।

Q. बीबीए इन लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट क्यों करें ?
Ans. ई-कॉमर्स कंपनियों के बढ़ते कारोबार के चलते लॉजिस्टिक्स में कॅरियर के नए-नए ऑप्शन सामने आ रहे हैं। विगत कुछ वर्षों में ई-कॉमर्स कंपनियां भरपूर बिजनेस कर रही हैं। इस बिजनेस में लॉजिस्टिक कंपनियों की भूमिका नजरअंदाज नहीं की जा सकती। जबसे इंटरनेट के संसार में ई-कॉमर्स कंपनियों ने लोगों के बीच पैठ बनाई है, कई अन्य क्षेत्र भी रोजगार के लिए खुल गए हैं। इनमें लॉजिस्टिक और डिलीवरी का क्षेत्र सबसे अहम है। भारत की विशाल आबादी और ई-कॉमर्स कंपनियों के तेज विकास के कारण यह क्षेत्र तीव्र विकास कर रहा है। अभी भारत में लॉजिस्टिक इंडस्ट्री 130 अरब से ज्यादा की आंकी गई है। इसमें ग्रोथ भी जबर्दस्त है। कोई भी व्यक्ति, जो कम्युनिकेशन स्किल और मेहनत करने में यकीन रखता है, थोड़े प्रयासों से इस क्षेत्र में रोजगार हासिल कर सकता है। एक कस्बाई इलाके से लेकर दुनिया भर के मेटेपॉलिटन शहरों में भी काम के अवसर हैं। देश-विदेश में इसके प्रोफेशनल्स की डिमांड है।

एक लॉजिस्टिक मैनेजर की सैलरी कंपनी के आकार पर काफी निर्भर करती है। शुरुआत में 10 से 15 हजार सैलरी आसानी से मिल जाती है। कुछ अनुभव के बाद ही 20 से 50 हजार सैलरी हो जाती है, जो आगे चलकर एक लाख प्रतिमाह तक हो सकती है।

Q. कहाँ से करें यह कोर्स ?
Ans. झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी, रांची ने लॉजिस्टिक्स सेक्टर स्किल कौंसिल(एलएसएससी) से एमओयू करते हुए 3 वर्षीय बीबीए इन लॉजिस्टिक्स पाठ्यक्रम शुरू किया है। यह पाठ्क्रम पूर्णकालिक रोजगारपरक कार्यक्रम है जिसे केंद्रीय उच्च शिक्षा मंत्रालय (एमएचआरडी) और कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) के मार्गदर्शन में चलाया जा रहा है। यह पाठ्यक्रम उद्योग जगत की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए उसकी जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रारंभ किया गया है।

    हाई लाइट्स ऑफ़ द कोर्स

  • सरकार के उच्च शिक्षा मंत्रालय और कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय द्वारा संचालित।
  • इंडस्ट्रियल सेक्टर की जरूरतों को पूरा करने वाला।
  • स्किल्ड और इंडस्ट्री रेडी बनाने में मददगार ।
  • लाइफ स्किल्स और पर्सनालिटी डेवलपमेंट ।
  • पढ़ाई के दौरान 18 महीने का औद्योगिक प्रशिक्षण।
  • प्रत्येक प्रशिक्षण समाप्त होने पर सरकार द्वारा प्रमाणपत्र।
  • औद्योगिक प्रशिक्षण के कार्य अनुभव को मान्यता।
  • औद्योगिक प्रशिक्षण के दौरान 9000-15000 छात्रवृति सुविधा।
  • ग्रामीण छात्रों के लिए रोजगार प्राप्त करने का सुनहरा अवसर।
  • लॉजिस्टिक्स सेक्टर स्किल कौंसिल द्वारा नौकरी की सुविधा।
  • स्टार्टअप्स और इंटरप्रेन्योर बनने का अवसर।