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झारखंड राय यूनिवर्सिटी के 5 विद्यार्थियों का एमसीएल में चयन

झारखंड राय यूनिवर्सिटी के 5 विद्यार्थियों का चयन महानदी कोल् लिमिटेड (MCL) में हुआ है। यूनिवर्सिटी के माइनिंग इंजीनियरिंग विभाग से बीटेक माइनिंग इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले यह छात्र 2019-2023 बैच के है। एमसीएल में चयनित छात्रों का नाम इस प्रकार है अभय सिंह, चन्दन कुमार, आमिर सोहैल, सुमित सिन्हा और आदित्य यादव।

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छात्रों के चयन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए यूनिवर्सिटी के कुल सचिव डॉ. पियूष रंजन ने कहा कि ” चयनित हुए छात्रों की मैं उज्जवल भविष्य की कामना करता हूं। विश्वविद्यालय में माइनिंग इंजीनियरिंग के दो कोर्स (डिप्लोमा और बीटेक मनिंग इंजीनियरिंग) सफलतापूर्वक संचालित किये जा रहे है। पिछले कुछ वर्षों में विभाग से निकले छात्रों का कोल् इंडिया के अनुसांगिक इकाइयों में चयन हुआ है। पिछले कुछ वर्षों में माइनिंग इंजीनियरिंग विषय कि पढ़ाई को लेकर लड़कियों में भी रुझान देखा जा रहा है। आने वाले समय में यह संख्या और ज्यादा बढ़ेगी।“

बीटेक माइनिंग इंजीनियरिंग कर संवारें अपना भविष्य :

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माइनिंग इंजीनियरिंग विभाग के समन्वयक प्रो.सुमित किशोर ने जानकारी देते हुए बताया की चयनित छात्र एमसीएल से जुड़े प्रोजेक्ट में कार्य करेंगे। उन्होंने जानकारी देते हुए कहा कि विभाग के डिप्लोमा इंजीनियरिंग के एक छात्र वरिसकर मुंडा का चयन भी सीसीएल में हुआ है।

पीडीपीटी ट्रेनिंग से कोल इंडिया में मिलेगी ओवरमैन की नौकरी :

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गैर कोकिंग खानों के प्रबंधन के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी कोल माइन्स अथॉरिटी लिमिटेड का गठन किया गया था। महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड 1992 में साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड से अलग होकर कार्य करना प्रारंभ किया। इसका मुख्यालय सम्बलपुर ओडिशा में है। सरकार ने एमसीएल को मिनीरत्न का दर्जा दिया हुआ है। एमसीएल की सहयक कंपनियों में महानदी बेसिन पावर लिमिटेड, एमजे कोल् लिमिटेड, महानदी कोल् रेलवे लिमिटेड और एमएनएच शक्ति लिमिटेड शामिल हैं।

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सीबीएसई:10वीं-12वीं मूल्यांकन योजना को नया रूप। परीक्षा में ज्यादा होंगे एमसीक्यू प्रश्न

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की दसवीं व बारहवीं की परीक्षा में अब अधिक योग्यता आधारित अधिक बहुविकल्पीय (एमसीक्यू) प्रश्न पूछे जाएंगे। वहीं, लघु व दीर्घ प्रश्नों के पूर्णांक कम होंगे। बोर्ड ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति की सिफारिशों के आधार पर यह बदलाव किए हैं।

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केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने पिछले दिनों नेशनल कॅरिकुलम फ्रेमवर्क (NCF) का प्री-ड्राफ्ट जारी किया था जिसमें 12वीं की बोर्ड परीक्षा को दो टर्म में लेने का प्रस्ताव है।10वीं-12वीं के नतीजों में पिछली कक्षाओं के अंक जोड़ने की सिफारिश भी की गई है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को ध्यान में रखकर तैयार इस फ्रेमवर्क में साइंस, कॉमर्स और आर्ट्स के विभाजन को भी खत्म करने का प्रस्ताव है।

B.Sc Agriculture as a career choice?

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इसरो के पूर्व चेयरमैन के कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता वाली समिति ने मसौदा जारी कर सभी हितधारकों के सुझाव मांगे हैं। शिक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा, यह एनसीएफएसई का पूर्व मसौदा है, जिसपर अभी नेशनल स्टीयरिंग कमेटी में कई दौर का विचार विमर्श बाकी है। अलग-अलग क्षेत्रों के साझेदारों के सुझाव एनएससी को विभिन्न बदलावों और दृष्टिकोणों के बारे में समालोचनात्मक रूप से विचार करने में मदद करेंगे।

Mining Engineering: Courses, institutes and job roles

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इधर सीबीएसई ने सत्र 2023-24 के लिए मूल्यांकन योजना को नया रूप दिया है। नई व्यवस्था अगले साल से नौवीं-दसवीं व 11वीं-12वीं की परीक्षाओं पर लागू होगी।10वीं में योग्यता आधारित बहुविकल्पीय प्रश्नों का वेटेज 50 फीसदी और बारहवीं में 40 फीसदी होगा। दसवीं में लघु और दीर्घ उत्तर प्रकार के प्रश्नों का वेटेज 30 प्रतिशत होगा।

वस्तुनिष्ठ प्रश्नों का वेटेज 20% होगा। बारहवीं कक्षा में वस्तुनिष्ठ प्रश्न 20% वेटेज के साथ अनिवार्य रूप से एमसीक्यू में होंगे। 12वीं में लघु उत्तरीय व दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों का वेटेज 40% होगा। बोर्ड ने 2023-24 की परीक्षाओं के लिए सैंपल पेपर और प्रत्येक विषय के प्रश्न पत्रों के डिजाइन को जारी किया है।

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जेईई-मेन का एडमिट कार्ड जारी: 6 अप्रैल से शुरू होगी परीक्षा

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी द्वारा आयोजित की जा रही देश की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई-मेन (अप्रैल) के एडमिट कार्ड जारी गए हैं। जेईई मेन 2023 परीक्षा का आयोजन 6 से 12 अप्रैल, 2023 तक होना है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस साल के जेईई मेन्स सेशन टू में करीब 9.4 लाख कैंडिडेट्स भाग ले रहे हैं। अप्रैल सेशन के लिए भारत में 315 परीक्षा शहर एवं विदेशों में 15 शहरों में परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं।

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परीक्षा की तारीख:
परीक्षा की तारीखें 6, 8, 10, 11, 12, 13 और 15 अप्रैल, 2023 हैं। NTA के आधिकारिक नोटिस में है कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी द्वारा जेईई मेन्स 2023 सत्र 2 का आयोजन पूरे देश के विभिन्न शहरों में स्थित विभिन्न केंद्रों और भारत के बाहर 24 शहरों में 6, 8, 10, 11, 12, 13 और 15 अप्रैल 2023 को कर रही है।

बीटेक इन कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग
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दो शिफ्ट में होगी जेईई मेन्स की परीक्षा:
एनटीए जेईई मेन 2023 सत्र 2 परीक्षा दो पालियों में आयोजित की जाएगी। जेईई मेन 2023 शिफ्ट 1 का समय सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक है जबकि शिफ्ट 2 का समय दोपहर 3 से शाम 6 बजे है।

माइनिंग इंजीनियरिंग : बेहतर भविष्य और जॉब की गारंटी
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    JEE Main एग्जाम सिटी इंटीमेशन स्लिप ऐसे करें डाउनलोड:

  • ऑफिशियल वेबसाइट https://jeemain.nta.nic.in/ पर जाएं।
  • होमपेज पर दिए गए जेईई मेन 2023 एग्जाम सिटी स्लिप लिंक पर क्लिक करें।
  • जेईई मेन क्रेडेंशियल्स का उपयोग करके लॉग इन करें।
  • एग्जाम सिटी इंटीमेशन स्लिप डाउनलोड करें।
  • इसका एक प्रिंटआउट लेकर सेव करके रख लें।
    JEE Main सेशन 2 के लिए के लिए टिप्स:

  • पहले 5 मिनट में पूरे प्रश्न पत्र को सावधानीपूर्वक पढ़ ले ताकि पेपर के लेवल का पता चल सके।
  • छात्र उन महत्वपूर्ण विषयों की सवाल ज्यादा हल करें जो जेईई मेन परीक्षा में अक्सर पूछे जाते रहे
    हैं।
  • छात्रों को इस समय किसी भी विषय को रटने के बजाय सामग्री को दोहराने पर ध्यान देना चाहिए।
  • छात्र भौतिकी, रसायन विज्ञान और गणित में इन तीन विषयों की के टॉपिक को अधिक दोहराएं।
  • रिवीजन करते समय छात्रों को ध्यान केंद्रित रखना चाहिए और सकारात्मक दृष्टिकोण रखना चाहिए।
  • यदि आपको पेपर कठिन लगता है तो घबराएं नहीं और अपने धैर्य के साथ दिमाग से आंसर याद
    करने की कोशिश करें।
  • इसके अलावा अभी घर पर जब भी पढ़ने बैठे तो इस बात का खास ध्यान रखें कि आप अपनी सभी
    टेंशन को दूर कर पढ़ाई करें।
  • फोकस होकर पढ़ेगें तो बेहतर परिणाम आएंगे।
  • परीक्षा के लिए हर विषय महत्वपूर्ण है, ऐसे में छात्रों को सलाह दी जाती है कि एक ऐसा शेड्यूल
    बनाएं जिसमें सभी टॉपिक्स को बराबर समय मिल सके।
  • अगर लगातार बैठ कर सिर्फ पढ़ते रहेंगे और ब्रेक नहीं लेंगे तो बोरियत हो जाएगी और पढ़ने में आपका मन नहीं लगेगा। यह जरूरी है कि पढ़ाई के दौरान समय- समय पर ब्रेक लेते रहें।
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झारखण्ड गवर्नमेंट टूल रूम एवं झारखण्ड राय विश्वविद्यालय ने किया एमओयू

झारखण्ड गवर्नमेंट टूल रूम, रांची एवं झारखण्ड राय विश्वविद्यालय ने कौशल आधारित प्रशिक्षण, शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए एमओयू किया गया है। इस अवसर पर झारखंड गवर्नमेंट टूल रूम रांची के प्राचार्य महेश कुमार गुप्ता और झारखंड राय विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. पियूष रंजन ने एक दूसरे के साथ एमओयू के दस्तावेज साझा किया।

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झारखण्ड गवर्नमेंट टूल रूम केंद सरकार के सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) की केंद्रीय सहायता से स्थापित किया गया है। इसे राज्य सरकार की भी मान्यता है। गवर्नमेंट टूल रूम केंद्र के पास अलग-अलग प्रशिक्षण और उत्पादन विभाग है, जो नवीनतम मशीन टूल्स की व्यापक रेंज से सुसज्जित हैं।

बीटेक इन कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग में क्या है खास ?

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यह संस्थान टूल एंड डाई निर्माताओं के लिए उद्योग आधारित दीर्घकालिक प्रशिक्षण प्रदान करने , ज्ञान और कौशल को उन्नत करने के लिए अल्पावधि और दीर्घ अवधी का प्रशिक्षण देता है । कुशल श्रमिकों,औजार निर्माताओं,मशीन मैन आदि के लिए आवश्यकता आधारित तकनीकी प्रशिक्षण के लिए मध्यम अवधि का पाठ्यक्रम देने के अलावा उद्योग आधारित निरीक्षण, गुणवत्ता नियंत्रण और रखरखाव के लिए भी केंद्र प्रशिक्षण प्रदान करता है।

माइनिंग इंजीनियरिंग कोर्स में जॉब की गारंटी

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एमओयू के मौके पर विचार साझा करते हुए विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. पियूष रंजन ने बताया कि “गवर्नमेंट टूल रूम और झारखंड राय विश्वविद्यालय के बीच एमओयू कौशल आधारित प्रशिक्षण, शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए किया गया है। इस लाभ विद्यार्थियों के साथ अप्रशिक्षित युवाओं और अपना खुद का उद्यम प्रारंभ करने वालों को मिलेगा।“

एमओयू के अवसर पर गवर्नमेंट टूल रूम रांची के प्रशासनिक अधिकारी आशुतोष मिश्रा, आशीष कृष्णन एवं झारखण्ड राय विश्वविद्यालय की डीन (कॉमर्स एंड मैनेजमेंट) डॉ. हरमीत कौर, डॉ. श्रद्धा प्रसाद और प्रो. रश्मि उपस्थित थी।

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डिप्लोमा माइनिंग इंजीनियरिंग : पीडीपीटी ट्रेनिंग से कोल इंडिया में ओवरमैन की नौकरी पाना होगा आसान

भारत की माइनिंग इंडस्ट्री 7 लाख से अधिक लोगों को रोज़गार मुहैया करवाती है । देश के जीडीपी में माइनिंग इंडस्ट्री का कुल योगदान लगभग 2.5 फीसदी है । अगर आप भी माइनिंग इंजीनियर बनने का सपना रखते है तो यह एक बेहतरीन कोर्स है। डिप्लोमा कोर्स(डिप्लोमा इन माइनिंग इंजीनियरिंग) 3 वर्षीय पाठ्यक्रम है। प्राइमरी लेवल इंट्री के लिए बेस्ट ऑप्शन है । इसे करने के बाद माइनिंग ओवरमैन, माइनिंग सरदार जैसे पद पर कार्य कर सकते है।

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डिप्लोमा इन माइनिंग इंजीनियरिंग :
माइनिंग इंजीनियरिंग करने वाले विद्यार्थियों की पहली पसंद डिप्लोमा माइनिंग इंजीनियरिंग है। तीन साल के इस कोर्स में दो बार वोकेशनल ट्रेनिंग होती है। डिप्लोमा कोर्स और ट्रेनिंग को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद माइनिंग सेक्टर के एंट्री लेवल पर निकलने वाले आवेदन आप भरने की अर्हता रखते है।

डिप्लोमा माइनिंग इंजीनियरिंग से जुडी जानकारी : https://www.jru.edu.in/programs/diploma-mining-engineering/

बीटेक माइनिंग इंजीनियरिंग:
बीटेक माइनिंग इंजीनियरिंग 4 वर्षीय पाठ्यक्रम है जिसे पूरा करने के बाद आप जूनियर इंजीनियर के तौर पर माइनिंग इंडस्ट्री ज्वाइन कर सकते है और मेहनत और लगन के साथ काम करते हुए कुछ ही वर्षों में उच्चतम वेतनमान प्राप्त कर सकते है।

बीटेक माइनिंग इंजीनियरिंग कर संवारें अपना भविष्य:

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PDPT ट्रेनिंग: पीडीपीटी का पूरा नाम पोस्ट डिप्लोमा प्रैक्टिकल ट्रेनिंग है। डिप्लोमा कोर्स करने के बाद विद्यार्थियों को 1 साल का अंडरग्राउंड ट्रेनिंग करना पड़ता है, इसी प्रशिक्षण को पीडीपीटी ट्रेनिंग कहा जाता है। इस प्रशिक्षण के दौरान ट्रेनिंग में शामिल विद्यार्थियों को छात्रवृति भी मिलती है।

पीडीपीटी ट्रेनिंग का संचालन बोर्ड ऑफ़ प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (BOPT) करता है। डिप्लोमा माइनिंग इंजीनियरिंग करने वाले विद्यार्थियों को पीडीपीटी ट्रेनिंग के अलावा गैस टेस्टिंग, लैम्प हैंडलिंग और फर्स्ट ऐड सर्टिफिकेट की परीक्षा भी पास करनी होती है। इन सभी कार्यों का संचालन अधिकार डायरेक्टर जनरल ऑफ़ माइंस सेफ्टी (DGMS) के द्वारा किया जाता है। इसका मुख्यालय धनबाद (झारखंड) में है और इसका नेतृत्व खान सुरक्षा महानिदेशक करते हैं।

इन सभी सर्टिफिकेट को प्राप्त करने के बाद डिप्लोमा सर्टिफिकेट के साथ इसे डीजीएमएस धनबाद के कार्यालय में जमा करना होता है। आवेदन और प्रमाणपत्र जमा करने के बाद ओवरमैन का सर्टिफिकेट प्राप्त होता है। इसे प्राप्त करने के बाद आप पूरी तरह से ओवरमैन कहलाने लगते है और जूनियर ओवरमैन, माइनिंग सरदार के पद पर नौकरी के लिए आवेदन कर सकते है। प्रति वर्ष कोल् इंडिया की आनुषंगिक इकाइयां CCL, BCCL, ECL, NCL, WCL, MCL ओवरमैन पदों नियुक्ति प्रकाशित करता है।

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झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी में सिम्पोजियम और माइन विज़ार्ड का आयोजन

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी Jharkhand Rai University (JRU), Ranchi के डिपार्टमेंट ऑफ़ माइनिंग इंजीनियरिंग Department of Mining Engineering – Jharkhand Rai University (JRU), Ranchi में “स्कोप एंड कैरियर ऑफ़ माइनिंग इंजीनियर्स इन इंडस्ट्री” विषय पर सिम्पोजियम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य वक्ता तौर पर एचईसी के पूर्व सीएमडी प्रो. अभिजीत घोष एवं सीएमपीडीआईएल के पूर्व जेनेरल मैनेजर देबाशीष बसु उपस्थित थे।

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झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी की कुलपति प्रो. सविता सेंगर एवं रजिस्ट्रार डॉ. पियूष रंजन ने संयुक्त रूप से अतिथियों को पौधा एवं मोमेंटो देकर सम्मानित किया।

सम्मान समारोह के उपरांत सर्वप्रथम विषय प्रवेश करते हुए प्रो. अभिजीत घोष ने माइनिंग इंजीनियरिंग एवं माइनिंग और कोल् के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा की ” यह इंजीनियरिंग का एक ओल्डेस्ट फॉर्म है जो ऐसी टेक्नोलॉजी और टेक्निक से डील करता है जो पृथ्वी में मौजूद मिनिरल की पहचान करने के साथ उसे एक्सपेक्ट करने में मददगार है। यह ऐसा एसेसियल फील्ड है जो देश की इकॉनमी में डायरेक्ट कंट्रीब्यूट करता है। एक माइनिंग इंजीनियर धरती से मिनिरल निकलने के लिए तो होता ही है साथ ही माइनिंग के डेवलपर प्रोसेस इन्स्योर करना भी उसकी ड्यूटी में शामिल है।” B. Tech Mining Engineering – Jharkhand Rai University, Ranchi (jru.edu.in)

सिम्पोजियम के दूसरे वक्ता सीएमपीडीआईएल के पूर्व जेनेरल मैनेजर देबाशीष बसु ने अपने व्याख्यान के दौरान माइनिंग इंजीनियरिंग की पढ़ाई, तकनिकी कौशल विकास, प्रशिक्षण और रोजगार के अवसरों पर विस्तार पूर्वक अपनी बातें रखी। उन्होंने विद्यार्थियों के साथ अपना निजी अनुभव साझा करते हुए बताया की माइनिंग इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों को पढ़ाई पूरी करने के बाद पांच वर्ष तक कड़े परिश्रम करने के लिए तैयार रहना चाहिए। इस दौरान प्रतिदिन कुछ नया सिखने की कोशिश करना जीवन में बेहद मददगार साबित होता है। Diploma in Mining Engineering – Jharkhand Rai University, Ranchi (jru.edu.in) उन्होंने कहा कि देश में माइनिंग इंजीनियर्स की डिमांड काफी तेजी के साथ बढ़ती जा रही है। झारखण्ड के विद्यार्थियों के लिए सीसीएल, मेकॉन, सीएमपीडीआई, एचईसी, सेल जैसे बड़े उद्यमों का राज्य में होने का सबसे बड़ा फ़ायद छात्रों को मिलने वाला एक्सपोज़र है। https://www.jru.edu.in/blog-post/which-industry-is-hiring-engineers/

सिम्पोजियम के उपरांत विभाग द्वारा माइन कार्निवल का आयोजन किया गया । यूनिवर्सिटी के सेमिनार हाल में आयोजित प्रदर्शनी में माइनिंग विषय से जुड़े चित्रों की प्रदर्शनी लगायी गयी एवं कई मॉडलों का प्रदर्शन भी किया गया। प्रदर्शित मॉडलों में एंट्रेंस कोल माइन, चौक शील्ड सपोर्ट, एरियल रोपवे, बोड एंड पिलर वर्किंग मॉडल, शील्ड सपोर्ट, अंडरग्राउंड वर्किंग जैसे मॉडल प्रदर्शित किये गए। https://www.jru.edu.in/blog-post/mining-engineer-bankar-sawaren-apna-bhavishya/ जूरी द्वारा प्रथम पुरस्कार एरियल रोपवे, द्वितीय पुरस्कार बोड एंड पिलर वर्किंग मॉडल , तृतीय पुरस्कार शील्ड सपोर्ट और जूरी का विशेष पुरस्कार अंडरग्राउंड वर्किंग मॉडल को दिया गया। सभी विजेता टीमों को मोमेंटो और प्रमाणपत्र प्रदान किया गया।

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डॉ. पियूष रंजन ने धन्यवाद् ज्ञापन करते हुए कहा की विश्वविद्यालय ने विद्यार्थियों के व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिए इंडस्ट्रियल टूर, एक्सपोज़र विजिट, एक्सपर्ट टॉक, गेस्ट लेक्चर को पाठ्क्रम का अनिवार्य अंग बनाया है। विश्वविद्यालय ने माइनिंग इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों का गैस टेस्टिंग एग्जामिनेशन और लैंप हैंडलिंग सर्टिफिकेट एवं पीडीपीटी ट्रेनिंग में सौ प्रतिशत सफलता का रिकॉर्ड स्थापित किया है। उन्होंने उपस्थित अतिथियों का सिम्पोजियम में उपस्थित होकर माइनिंग के क्षेत्र में अवसरों पर अपने विचार साझा करने के लिए धन्यवाद किया। https://www.jru.edu.in/blog-post/mining-engineering-admission-2022/ कार्यक्रम को सफल बनाने में माइनिंग इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के समन्वयक प्रो. सुमीत किशोर,व्याख्याता मृत्युंजय कुमार,व्याख्याता सूरज देव सिंह, व्याख्याता उमेश कुमार मिस्त्री की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

माइनिंग इंजीनियरिंग : बेहतर भविष्य और जॉब की गारंटी

झारखंड की पहचान प्राकृतिक सौंदर्य के साथ प्रचुर खनिज संपदा से भी है। खनिज संपदा और खनन का महत्व इससे ही स्पष्ट होता है की भारत सरकार के उद्यम और मिनीरत्न कंपनियों सीसीएल, बीसीसीएल, मेकॉन, सीएमपीडीआई का मुख्यालय रांची में स्थित हैं।

खनिज देश के विकास में मेरुदंड है और इसे निकालने के लिए कुशल कारीगर और इंजीनियर चाहिए। राज्य में आईआईटी धनबाद और बीआईटी सिंदरी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान भी स्थापित हैं। इन प्रतिष्ठित संस्थाओं में एक नाम झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी, रांची भी है। मान्यता प्राप्त निजी संस्थानों की बात करें तो बेहद कम समय में अपनी विशिष्ट पहचान के कारण यहाँ बिहार, बंगाल, ओडिशा ,तेलंगाना जैसे राज्यों के मेधावी विद्यार्थी माइनिंग इंजीनियरिंग की पढ़ाई करते है । इंडस्ट्री की मांग को ध्यान में रखते हुए नवीनतम पाठ्यक्रम, अनुभवी शिक्षकों और छात्र केंद्रित गतिविधियों ने इसे अलग पहचान दिलाई है। (MINING ENGINEERING ADMISSION FORM 2022)

राज्य में माइनिंग इंजीनियरिंग की पढ़ाई कुछ चुनिंदा संस्थानों में होती है सरकारी संस्थानों में आईआईटी धनबाद, बीआईटी सिंदरी, सीआईएमएफआर धनबाद और गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक निरसा के अलावा छात्रों की पहली पसंद झारखंड राय यूनिवर्सिटी है।

राजधानी रांची में स्थित होने के कारण राज्य के अन्य जिलों से छात्र यहाँ पढ़ने आते हैं क्योंकि धनबाद के अलावा अन्य किसी जिले में माइनिंग की पढ़ाई नहीं होती है। यूनिवर्सिटी का डिपार्टमेंट ऑफ़ माइनिंग इंजीनियरिंग दो कोर्स का संचालन करता है। दोनों ही रेगुलर कोर्स है ।

यहाँ से माइनिंग इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले स्टूडेंट्स को इंडस्ट्री सेंट्रिक सिलेबस के साथ इस फील्ड के अनुभवी लोगों का मार्गदर्शन समय समय पर मिलता रहता है। इसके अलावा प्रैक्टिकल एजुकेशन की जरुरत को पूरा करने के लिए इंडस्ट्री विजिट,इंटर्नशिप,वर्कशॉप,गेस्ट लेक्चर, माइंस विजिट भी नियमित तौर पर करवाई जाती है।

सीसीएल, मेकॉन, सीएमपीडीआई, एचईसी, सेल जैसे बड़े उद्यमों का मुख्यालय रांची में होने के कारण छात्रों को एक्सपोजर के साथ अवसर भी मिलता है। अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन उन्हें इस क्षेत्र में और बेहतर करने के लिए प्रेरित करता है।

अगर आप भी माइनिंग इंजीनियर बनने का सपना रखते है तो यह एक बेहतरीन कोर्स है जिसमें शामिल होकर आप देश और विदेश ने नामी गिरामी कंपनियों में अपनी सेवा दे सकते है। माइनिंग इंजीनियर में डिप्लोमा कोर्स 3 वर्षीय पाठ्यक्रम है। प्राइमरी लेवल इंट्री के लिए बेस्ट ऑप्शन है जिसे करने के बाद आप माइनिंग सरदार जैसे पद पर कार्य कर सकते है। बीटेक इंजीनियरिंग 4 वर्षीय पाठ्यक्रम है जिसे पूरा करने के बाद आप जूनियर इंजीनियर के तौर पर माइनिंग इंडस्ट्री ज्वाइन कर सकते है और मेहनत और लगन के साथ काम करते हुए कुछ ही वर्षों में उच्चतम वेतनमान प्राप्त करसकते है। Mining Engineering 2022

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी द्वारा स्टूडेंट को बेहतर माइनिंग इंजीनियर के तौर पर तैयार होने के लिए निम्नलिखित सुविधाएं दी जाती हैं :-

  • 100 प्रतिशत पीडीपीटी (पोस्ट डिप्लोमा प्रैक्टिकल ) ट्रेनिंग। यह ट्रेनिंग संपन्न होती है सीसीएल,एसीएल और बीसीसीएल जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में।
  • कोर्स के दौरान व्यावहारिक (वोकेशनल ) प्रशिक्षण की सुविधा।
  • पढ़ाई के दौरान इंडस्ट्रियल विजिट की सुविधा जिनमें सीएमपीडीआई, सीआईएमएफआर, जीएसआई जैसे संस्थान शामिल है ।
  • गैस टेस्टिंग एग्जामिनेशन और लैंप हैंडलिंग सर्टिफिकेट प्राप्त करने में सहयोग।
  • ओवरमैन एग्जामिनेशन पास करने के लिए कैंपस में फ्री प्रतियोगिता परीक्षा तैयारी की सुविधा।
  • डायरेक्टर जेनेरल ऑफ़ माइंस सेफ्टी (डीजीएमएस ) द्वारा दी जाने वाली योग्यता जाँच प्रमाणपत्र को प्राप्त करने में सहयोग।
  • बोर्ड ऑफ़ प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (बीओपीटी ) कोलकाता द्वारा मान्यता प्राप्त।
  • योग्य और अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन।
  • इन हाउस मॉडर्न माइनिंग लेबोरेटरी की सुविधा ।
  • बीटेक माइनिंग इंजीनियरिंग कर रहे स्टूडेंट्स को गेट परीक्षा की निः शुल्क तैयारी है।

प्रॉस्पेक्ट्स ऑफ कोल् एंड मेटल माइनिंग इन झारखंड” विषय पर वेबिनार का आयोजन

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी, रांची के डिपार्टमेंट ऑफ़ माइनिंग इंजीनियरिंग और इंस्टीटूशनस इनोवेशन कॉउन्सिल के संयुक्त तत्वावधान में वेबिनार का आयोजन किया गया । ” प्रॉस्पेक्ट ऑफ़ कोल एंड मेटल माइनिंग इन झारखण्ड ” विषय पर आयोजित वेबिनार में मुख्य वक्ता के तौर पर सीसीएल के सीएमडी पी.एम.प्रसाद, महानदी कोलफील्ड लिमिटेड के पूर्व सीएमडी ए.एन. सहाय और एचइसी के पूर्व सीएमडी अभिजीत घोष शामिल हुए। वेबिनार का विधिवत शुरुवात दीप प्रज्वलीत कर सरस्वती वंदना के साथ किया गया।


वेबिनार को सर्वप्रथम एमसीएल ( महानदी कोल् लिमिटेड) के पूर्व अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक ( सीएमडी) ए. एन सहाय ने सम्बोधित किया उन्होंने अपने सम्बोधन में कहा की ” इंजीनियरिंग का सबसे महत्वपूर्ण ब्रांच माइनिंग इंजीनियरिंग है। मेरे 45 वर्ष के अनुभव के आधार पर मैं कह सकता हूँ कि आने वाले समय में भी इस क्षेत्र की भूमिका इसी प्रकार बनी रहेगी। झारखण्ड में कोल् माइनिंग की चर्चा करते हुए उन्होंने विस्तार पूर्वक बताया की ‘ भारत में विश्व का 4.7 प्रतिशत कोयला उत्पादन होता है। वर्तमान में भारत लगभग 72.9 करोड़ टन कोयले का उत्पादन कर रहा है। हालांकि, वास्तविकता यही है कि घरेलू उत्पादन देश में कोयले की घरेलू जरूरतों को पूरा करने में सक्षम नहीं है। भारत ने बीते साल 24.7 करोड़ टन कोयले का आयात किया था और इस पर 1.58 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा खर्च हुई थी। भारत दुनिया का दूसरा बड़ा कोयला उत्पादक है और कोयला भंडार के मामले में 5वां बड़ा देश है। ये भंडार 100 साल या उससे ज्यादा वक्त तक बने रह सकते हैं। कोयला उत्पादन में भारत का विश्व में तीसरा स्थान है और भारत के तीन शीर्ष कोयला उत्पादक राज्यों में झारखण्ड का स्थान पहला है।“

विद्यार्थियों को दिए अपने सन्देश में उन्होंनेकहा कि ” इस क्षेत्र में शुरुवाती 10 वर्ष संघर्ष के होते है और इन्हीं वर्षों में आप जितना सीखना चाहते है सीखें । माइनिंग रोजगार प्रदान करने वाला एक बड़ा क्षेत्र है जिसमें आने वाले भविष्य में भी बेहतर संभावनाएं हैं।सही प्रशिक्षण और गुणवत्तापूर्ण प्रमाणनन कोल् इंडस्ट्री की जरुरत और अनिवार्यता है। अच्छे अवसर को प्राप्त करने के लिए मान्यता प्राप्त प्रमाणपत्र बेहद सहयोगी है।“


सीसीएल के सीएमडी पी एम. प्रसाद ने संबोधन के दौरान प्रतिभागियों को बताया की ” भारत सरकार का लक्ष्य देश के उभरते हुए क्षेत्रों में आर्थिक विकास में तेजी लाना है। चूंकि, ये राज्य संसाधनों के लिहाज से संपन्न हैं, इसलिए इन राज्यों के विकास में इन संसाधनों का उपयोग करना काफी अहम है। मंत्रालय पारिस्थितिकीय रूप से अनुकूल, सतत तथा लागत सापेक्ष तरीके से अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों की मांग को पूरा करने के लिए कोयला उपलब्ध करने को प्रतिबद्ध है।

उत्पादकता, सुरक्षा, गुणवत्ता और पारिस्थितिकी में सुधार लाने के उद्देश्य से अत्याधुनिक एवं स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकियों को अपनाकर सरकारी कंपनियों के साथ-साथ केप्टिव खनन कार्य के माध्यम से उत्पादन में बढ़ोतरी हमारा लक्ष्य है।

झारखण्ड में सीसीएल के कार्यों की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया की “ नार्थ कर्णपुरा में और नए माईन्स खोले जाने है। धनबाद का मुनीडीह कोल् माईन्स को आज भी एक बेहतर माईन्स माना जाता है। इसके अलावा आने वाले समय में चतरा कथारा, गिरिडीह जैसे जिलों में में भी संभावनाएं छुपी हुये है।“

पी.एम. प्रसाद ने कोल क्षेत्रों में विकास के लिए दिए जाने वाले डिस्ट्रिक रूरल फण्ड की चर्चा करते हुए बताया की इसके जरिये ग्रामीण विकास के कार्यों को गति प्रदान किया जा रहा है।

अक्षय ऊर्जा और भविष्य में कोयला उत्पादन और प्रबंधन पर विचार देते हुए उन्होंने कहा की सोलर एनर्जी को बढ़ावा देने और कोयले के विकल्प के तौर पर इसे खड़ा करने की कोशिशें की जा रही है लेकिन अभी भी 2070 तक कोयले का भंडार देश के औद्योगिक जरूरतों को पूरा करने में सहायक रहेगा।

जमींन अधिग्रहण करने और वन भूमि कानूनों के कारण झारखण्ड में नई परियोजनाओं को प्रारंभ करने में देर हो रही है कही कहीं रेलवे सुविधा का नहीं होना भी बाधक बन रहा है।

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एचइसी के एक्स सीएमडी प्रो. अभिजीत घोष ने अपने अभिभाषण की शुरुवात झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी को गणतंत्र दिवस समारोह में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा आमंत्रित किये जाने से करते हुए कहा की यूनिवर्सिटी का चयन प्राइमिनिस्टर बॉक्स में बैठने के लिए किया गया है जिसमे यूनिवर्सिटी का प्रतिनिधित्व यहाँ के दो मेधावी छात्र करेंगे। देश के 50 यूनिवर्सिटी में झारखण्ड से दो यूनिवर्सिटी का चयन किया गया है। झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी के अलावा आईएसएम धनबाद को यह मौका मिला है।

प्रो. घोष ने मेटल माइनिंग पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा की “भारत सरकार द्वारा किए गए पारदर्शी उपायों के साथ कोयला खदानों की वाणिज्यिक नीलामी से देश में कोयले की मांग और आपूर्ति में अंतर को पाटने का उपयुक्त समय आ गया है। इससे न सिर्फ पिछड़े क्षेत्रों में रोजगार के व्यापक अवसर उपलब्ध होंगे, बल्कि प्रति वर्ष 20,000 करोड़ रुपये से 30,000 करोड़ रुपये तक की विदेशी मुद्रा की भी बचत होगी।“
उन्होंने केंद्र सर्कार के पहल की चर्चा करते हुए बताया कि ‘सरकार द्वारा नियुक्त एक उच्च स्तरीय समिति (एचएलसी) ने पारदर्शिता को बनाए रखते हुए कोयला क्षेत्र को उदार बना दिया है। कारोबारी सुगमता सुनिश्चित करने, अतिरिक्त प्रावधानों को खत्म करने और आवंटन में लचीलापन लाने के उद्देश्य से खनिज कानून अधिनियम, 2020 के माध्यम से सीएमएसपी अधिनियम और एमएमडीआर अधिनियम के उपयुक्त प्रावधानों में संशोधन किया गया है। कानून में बदलाव के अलावा, 2020 में नीलामी की प्रक्रिया और क्रियाविधि को सरल बना दिया गया है। कोयला खदानों की नीलामी में राजस्व साझेदारी व्यवस्था की पेशकश के साथ एक अन्य बड़ा बदलाव किया गया, जिससे नीलामी को ज्यादा बाजार अनुकूल बना दिया गया है। नई व्यावसायिक खनन व्यवस्था में कोयले के गैसीकरण को प्रोत्साहन दिया गया है। 2020 में पहली किस्त में 38 ब्लॉकों के साथ व्यावसायिक खनन के लिए कोयला ब्लॉकों की नीलामी की शुरुआत की गई है।

उन्होंने माइनिंग क्षेत्र में झाखंड का महत्व बताते हुए कहा की नोवामुंडी माईन्स आज भी एक आदर्श उदहारण है और माइनिंग के छात्रों के लिए सिखने की उत्तम जगह है। सौ साल पुराना यह माईन्स पर्यावरण संरक्षण का उदाहरण है।


वेबिनार के समापन पर यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार प्रो. डॉ. पियूष रंजन ने धन्यवाद् ज्ञापन करते हुए कहा की “माइनिंग इंडस्ट्री के तीन बड़े आईकॉन का एक मंच पर आकर विद्यार्थियों संबोधित करना विभाग के साथ विश्वविद्यालय के लिए भी एक नया अनुभव है। इसका सीधा लाभ माइनिंग इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों को मिलेगा जो क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहते है। विषय की प्रासंगिकता को देखते हुए 11 राज्यों से विद्यार्थी शामिल हुए।“ उन्होंने पुनः सभी अतिथियों और वेबिनार के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले लोगों का धन्यवाद किया।

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झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी में “प्रॉस्पेक्ट ऑफ़ अंडरग्राउंड कोल् माइनिंग इन इंडिया” विषय पर सिम्पोजियम का आयोजन।

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ़ माइनिंग इंजीनियरिंग के द्वारा सोमवार को ” प्रॉस्पेक्ट ऑफ़ अंडरग्राउंड कोल् माइनिंग इन इंडिया विषय पर ऑन लाइन सिम्पोजियम का आयोजन किया। इस अवसर पर व्याख्यान देने के लिए आईआईटी आईएसएम धनबाद में प्रोफेसर और कैरियर डेवलपमेंट सेल के चैयरमैन डॉ सतीश कुमार सिन्हा और झारखण्ड स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के उपाध्यक्ष एवं सीसीएल में डायरेक्टर फाइनेंस के तकनिकी सचिव संजय कुमार सिंह उपस्थित थे।

इस अवसर पर विभाग के फैकल्टी मेंबर और विभिन्न कॉलेज और यूनिवर्सिटी से 250 से ज्यादा स्डेंट्स ऑनलाइन जुड़े हुए थे।
प्रो. सतीश सिन्हा ने अपने संबोधन के दौरान अंडरग्राउंड माइनिंग से जुड़े कई तरीको का जिक्र किया जो बेहद सफल और प्रयोग में लाये जाते है। उन्होंने इस दौरान स्टूडेंट्स को अंडरग्राउंड माइनिंग से जुड़े कई कार्यों से भी अवगत कराया। इसके अलावा माइन एनवायरनमेंट, मिनरल कन्जर्वेशन और वर्क कल्चर के बारे में भी विस्तार से बताया।

इस दौरान स्टूडेंट्स ने दोनों वक्ताओं से प्रश्न पूछे जिनमें कार्य के तरीके, अनुभव और माइनिंग सेक्टर से जुड़े अवसरों से जुड़े सवाल थे। कार्यक्रम के सफल आयोजन में प्रो. रश्मि की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस अवसर पर माइनिंग डिपार्टमेंट के कोर्डिनेटर प्रो. सुमीत किशोर भी उपस्थित थे।

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शदाब अहमद वॉलीबाल स्टेट लेवेल खिलाडी और डिप्लोमा माईनिंग इंजीनियरिंग स्टुडेंट

 

शदाब अहमद वॉलीबाल स्टेट लेवेल खिलाडी है और वर्तमान में झारखंड राय यूनिवर्सिटी, राँची से डिप्लोमा इन माईनिंग इंजीनियरिंग कि पढ़ाई कर रहें है.

राँची के कांके प्रखंड के रहने वाले शदाब को बचपन से घूमना और वॉलीबाल खेलना पसंद रहा है.  

वॉलीबाल और माईनिंग इंजीनियरिंग कि पढ़ाई को लेकर पूछे गए सवाल को लेकर उनका कहना है “ खेलों से जुड़ने के दौरान मुझे घूमने का मौका भी मिला और मैंने जिला से लेकर राज्य स्तर तक की प्रतियोगिताओं और कैम्पों में बेहतर परिणाम दिया है. स्कूल लेवल पर इंटर स्कूल प्रतियोगिता में और कॉलेज लेवल पर नेशनल स्पोटर्स में शामिल होकर बेहतर प्रदर्शन किया है.

माईनिंग इंजीनियरिंग विषय चयन करने को लेकर उनका कहना था “ यह कार्य रोमांच और जोखिम का मिश्रण है लेकिन यहाँ कार्य करने के दौरान नई जगहों को देखने का अनुभव मुझे इस विषय कि तरफ आकर्षित किया.

माईनिंग की पढ़ाई का मन बनाने के बाद मैंने उन संस्थानों कि खोज शुरू कि जहाँ पढ़ाई के साथ मेरे वॉलीबाल खेल को भी आगे ले जाने का अवसर मिल सके.

यूनिवर्सिटी में आयोजित होने वाले स्पोर्ट्सएक्टिविटी और स्पोर्ट्स क्लब के कार्यों ने मुझे काफी प्रभावित किया और फिर मैंने यहाँ एडमिशन लेने का निर्णय लिया. ऐसा मुझे लगता है झारखंड राय यूनिवर्सिटी में मेरे दोनों ही सपने पुरें होंगे.