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Mining Symposium

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी में “प्रॉस्पेक्ट ऑफ़ अंडरग्राउंड कोल् माइनिंग इन इंडिया” विषय पर सिम्पोजियम का आयोजन।

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ़ माइनिंग इंजीनियरिंग के द्वारा सोमवार को ” प्रॉस्पेक्ट ऑफ़ अंडरग्राउंड कोल् माइनिंग इन इंडिया विषय पर ऑन लाइन सिम्पोजियम का आयोजन किया। इस अवसर पर व्याख्यान देने के लिए आईआईटी आईएसएम धनबाद में प्रोफेसर और कैरियर डेवलपमेंट सेल के चैयरमैन डॉ सतीश कुमार सिन्हा और झारखण्ड स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के उपाध्यक्ष एवं सीसीएल में डायरेक्टर फाइनेंस के तकनिकी सचिव संजय कुमार सिंह उपस्थित थे।

इस अवसर पर विभाग के फैकल्टी मेंबर और विभिन्न कॉलेज और यूनिवर्सिटी से 250 से ज्यादा स्डेंट्स ऑनलाइन जुड़े हुए थे।
प्रो. सतीश सिन्हा ने अपने संबोधन के दौरान अंडरग्राउंड माइनिंग से जुड़े कई तरीको का जिक्र किया जो बेहद सफल और प्रयोग में लाये जाते है। उन्होंने इस दौरान स्टूडेंट्स को अंडरग्राउंड माइनिंग से जुड़े कई कार्यों से भी अवगत कराया। इसके अलावा माइन एनवायरनमेंट, मिनरल कन्जर्वेशन और वर्क कल्चर के बारे में भी विस्तार से बताया।

इस दौरान स्टूडेंट्स ने दोनों वक्ताओं से प्रश्न पूछे जिनमें कार्य के तरीके, अनुभव और माइनिंग सेक्टर से जुड़े अवसरों से जुड़े सवाल थे। कार्यक्रम के सफल आयोजन में प्रो. रश्मि की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस अवसर पर माइनिंग डिपार्टमेंट के कोर्डिनेटर प्रो. सुमीत किशोर भी उपस्थित थे।

DIPLOMA IN MINING RANCHI JHARKHAND

SHADAB AHMAD, DIPLOMA IN MINING ENGINEERING

शदाब अहमद वॉलीबाल स्टेट लेवेल खिलाडी और डिप्लोमा माईनिंग इंजीनियरिंग स्टुडेंट

 

शदाब अहमद वॉलीबाल स्टेट लेवेल खिलाडी है और वर्तमान में झारखंड राय यूनिवर्सिटी, राँची से डिप्लोमा इन माईनिंग इंजीनियरिंग कि पढ़ाई कर रहें है.

राँची के कांके प्रखंड के रहने वाले शदाब को बचपन से घूमना और वॉलीबाल खेलना पसंद रहा है.  

वॉलीबाल और माईनिंग इंजीनियरिंग कि पढ़ाई को लेकर पूछे गए सवाल को लेकर उनका कहना है “ खेलों से जुड़ने के दौरान मुझे घूमने का मौका भी मिला और मैंने जिला से लेकर राज्य स्तर तक की प्रतियोगिताओं और कैम्पों में बेहतर परिणाम दिया है. स्कूल लेवल पर इंटर स्कूल प्रतियोगिता में और कॉलेज लेवल पर नेशनल स्पोटर्स में शामिल होकर बेहतर प्रदर्शन किया है.

माईनिंग इंजीनियरिंग विषय चयन करने को लेकर उनका कहना था “ यह कार्य रोमांच और जोखिम का मिश्रण है लेकिन यहाँ कार्य करने के दौरान नई जगहों को देखने का अनुभव मुझे इस विषय कि तरफ आकर्षित किया.

माईनिंग की पढ़ाई का मन बनाने के बाद मैंने उन संस्थानों कि खोज शुरू कि जहाँ पढ़ाई के साथ मेरे वॉलीबाल खेल को भी आगे ले जाने का अवसर मिल सके.

यूनिवर्सिटी में आयोजित होने वाले स्पोर्ट्सएक्टिविटी और स्पोर्ट्स क्लब के कार्यों ने मुझे काफी प्रभावित किया और फिर मैंने यहाँ एडमिशन लेने का निर्णय लिया. ऐसा मुझे लगता है झारखंड राय यूनिवर्सिटी में मेरे दोनों ही सपने पुरें होंगे.

BEST BTECH MINING COLLEGE UNIVERSITY RANCHI JHARKHAND

MEET PRIYANKA, THE FIRST GIRL TO STUDY B.TECH MINING AT JRU

Priyanka is a trend setter. When most of her schoolmates have taken admissions in conventional courses, she has decided to pursue B.Tech Mining Engineering at Jharkhand Rai University.

“Why not do something different? Why do the done things?,” Priyanka says.

With passion and dedication in her heart, this girl from Banares is all set to chase her success.

If you ask what made her choose this field, Priyanka says she has always been fascinated by stories about the mines. She finds them mysterious. As if the mines are waiting to be explored.

She is happy to be chasing her dreams. Her father, who also works in the coal and mining sector has been a great inspiration for her always.

Her father, Priyanka says knows that working in underground mines can be challenging. And that is what he expects her daughter to do – to succeed in something that is tough.

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सरहदों पर लड़कियां तैनात तो खदानों में क्यों नहीं: प्रियंका कुमारी

माईनिंग इंडस्ट्री कों हमेशा से पुरुषों के वर्चस्व वाला सेक्टर समझा जाता रहा है यह विडंबना ही कही जायेगी कि महिला सशक्तीकरण के तमाम दावों के बीच आज भी माईनिंग सेक्टर में महिलाओं कि उपस्थिति नगण्य ही है. इस के पीछे सबसे बड़ा कारण रहा है माईनिंग कि पढ़ाई कों लेकर सरकारी और आम जनमानस कि अवधारणा. सरकार ने भी पिछले वर्ष तक इस कि पढ़ाई करने के लिये इक्छुक लड़कियों के नामांकन पर रोक लगा रखी थी क्योंकि कानून आड़े आता था.

माईनिंग कानूनों के अंतर्गत यह प्रतिबंधित किया गया था कि महिलाओं का माईन्स के अंदर काम करना सुरकक्षित नहीं माना जा सकता. इसका कानून का सीधा प्रभाव इसकी पढ़ाई करने और इस फिएल्ड में आने वाली लड़कियों पर पड़ा कि जब माईनिंग इंडस्ट्री में डाईरेक्ट इंट्री ही नहीं हो सकती तो इसकी पढ़ाई कौन करेगा. माईन्स एक्ट 1952 सेक्सन 46 (1)B अबतक कायम था.

इस वर्ष से सरकार ने इसमें संशोधन करते हुए इस फिल्ड कों महिलाओं के लिए ओपन कर दिया है जिसका सकारात्मक असर इस विषय कि पढ़ाई कराने वाले संस्थानों और विभागों में दिखयी पद रहा है. यहाँ नामांकन लेने वाली कतार में पहली बार लड़कियां भी दिखाई दे रही है . ऐसा ही अनुभव प्रियंका कुमारी ने हमारे साथ साझा किया जब उन्हें हमारे संवाददाता ने राँची के झारखण्ड राय युनिवर्सिटी में मीनिंग इंजीनियरिंग विभाग में फॉर्म खरीदते हुए देखा .

पुछने पर प्रियंका ने बताया कि “ में मूलतः बनारस कि रहने वाली हूँ और मैंने बीटेक इन माईनिंग इंजीनियरिंग करने का मन बनाया है और इसलिए यहाँ एडमिशन लेने आई हूँ. माईनिंग इंडस्ट्री में आने और निजी जीवन के बारे में पुछने पर बताते हुए प्रियंका ने बताया कि “ मेरे पिताजी इसी फिल्ड से जुड़े है और वह टाटा माईन्स वेस्ट बोकारो में कार्यरत है जिसके कारण मेरे मन में बचपन से ही इस के प्रति एक अलग आकर्षण है मेरा बड़ा भाई भी डिप्लोमा माईनिंग इंजिनियरिंग कि पढ़ाई कर रहा है, उसने ही जानकारी दी कि इस वर्ष से लड़कियों कों माईनिंग इंजिनियरिंग में एडमिशन लेने की अनुमति मिल गयी है.

मेरे लिये यह खुशी का पल था और मैंने राँची में इसकी पढ़ाई करवाने वाली संस्थाओं कि ऑनलाइन खोज शुरू किया. कोरोना और लॉक डाउन के कारण मोबाइल फोन ही सहारा बना और खोजबीन के दौरान नजर रुकी राँची के झारखण्ड राय युनिवर्सिटी पर जहाँ पढ़ाई के साथ साथ प्रायोगिक शिक्षा पर दिया गया जोर और एक्स्ट्रा एक्टिविटी ने मुझे आकर्षित किया .

झारखण्ड राय युनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डॉ. प्रो. पीयूष रंजन ने इस फैसले पर खुशी जताते हुए कहा कि “विभाग कि पहली गर्ल्स स्टुडेंट होने के कारण प्रियंका कुमारी एक बेहद खास स्थान रखती है. माईनिंग कि पढ़ाई में इंटरेस्ट रखने वाली लड़कियों के द्वारा यहाँ नामांकन वर्ष के दौरान पूछताछ कि जाती थी कईयों ने तो माना करने के बाद भी फॉर्म ख़रीदा. यहाँ फैसला बेहद सुखद अहसास देने वाला है और यक़ीनन इससे इस फिल्ड महिलाओं कि उपस्थिथि बढ़ेगी और कार्यों में गुणवत्ता भी. झारखण्ड जैसे राज्य में माईनिंग सेक्टर सबसे ज्यादा अवसर प्रदान करने वाला है “

प्रियंका कुमारी ने बीटेक माईनिंग इंजिनियरिंग में एडमिशन लेकर अपनी पढ़ाई सुरुकर दी है और इसे सफलतापूर्वक पूरा करके जॉब करना चाहती है. झारखण्ड राय युनिवर्सिटी के माईनिंग इंजिनियरिंग विभाग के समन्वयक प्रो. सुमीत किशोर से बात करने पर उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि “ इस वर्ष से फिमेल कैंडिडेट्स के एडमिशन लेने पर लगी रोक को हटाने से लड़कियों में काफी उत्साह देखा जा रहा है हमारे विभाग के लिये भी यह पहला अवसर है जब गर्ल्स स्टुडेंट का नाम अटेंडेंस लिस्ट में देखा जा रहा है. आने वाले वर्षों में यह और ज्यादा लोकप्रिय होने वाला है क्योंकि यहाँ अवसर कि कमी नहीं है.

Mining Engineering

झारखण्ड ही नहीं सीमावर्ती राज्यों के स्टूडेंट्स की भी पहली पसंद बना झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी रांची – माइनिंग इंजीनियरिंग करने के लिए आते है बिहार, बंगाल और ओडिशा के छात्र

खनिज संपदा हमारे जीवन का मुख्य आधार है। खनिज संपदा को निकालने का काम प्रशिक्षित लोगों के नेतृत्व में किया जाता है, जिन लोगों को माइनिंग इंजीनियर कहते हैं। खनिज संपदा को निकालने के कार्य को खनन (माइनिंग) इंजीनियरिंग कहते हैं। बिहार, झारखंड, उड़ीसा, मध्य प्रदेश व पश्चिम बंगाल जैसे राज्य में खनिज पदार्थ भारी मात्रा में हैं। इसको देखते हुए देश में माइनिंग इंजीनियर्स की डिमांड काफी तेजी के साथ बढ़ती जा रही है।झारखण्ड के सीमावर्ती राज्यों में इस विषय की पढ़ाई को लेकर काफी क्रेज देखा गया जाता है क्योकि इस सेक्टर में आज भी जॉब काफी संख्या में निकलते है। माइनिंग इंजीनियरिंग में कैरियर बनाने के लिए किसी मान्यताप्राप्त विद्यालय से साइंस स्ट्रीम में 12 वीं कक्षा पास करना अनिवार्य है। इसके बाद बीटेक और एमटेक जैसे कोर्स भी है। डिप्लोमा इन माइनिंग इंजीनियरिंग इस फील्ड का एक लोकप्रिय कोर्स है जिसमे 10 वीं पास स्टूडेंट भी एडमिशन लेकर अपना भविष्य उज्जवल बना सकता है। माईन मशीन ऑपरेटर ,माइनिंग सरदार जैसे कई जॉब है जो डिप्लोमा लेवल की योग्यता मांगते है।

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झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी, रांची का डिपार्टमेंट ऑफ़ माइनिंग इंजीनियरिंग अपने अद्यतन पाठ्यक्रम, अनुभवी फैकल्टी मेंबर्स और पढ़ाई साथ अतिरिक्त गतिविधियों चलते अपनी विसिष्ट पहचान रखता है। राज्य के चुनिंदा विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में ही ममिनिंग इंजीनियरिंग की पढ़ाई होती है। इस कारण राज्य के बाहर के स्टूडेंट्स पढ़ने के लिए झारखण्ड आते है। अगर सरकारी संस्थानों बात करें तो आईआईटी धनबाद, बीआईटी सिंदरी, सीआईएमएफआर धनबाद और गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक निरसा धनबाद के अलावा अन्य नाम नजर नहीं आता है। ये सभी संस्थान कोयला नगरी धनबाद के आसपास स्थित है। राजधानी रांची, जमशेदपुर और राज्य के अन्य जिलों में इस प्रकार का कोई सरकारी संस्थान नहीं है। निजी सस्थानों में झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी, रांची पिछले कई वर्षों से जाना पहचाना नाम जिसने अपने एजुकेशनल एनवायरनमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण अपनी अलग पहचान बनायीं है। यूनिवर्सिटी का डिपार्टमेंट ऑफ़ माइनिंग इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट जिसमे डिप्लोमा इन माइनिंग इंजीनियरिंग और बीटेक इन माइनिंग इंजीनियरिंग की नियमित पढ़ाई होती है सभी विभागों में अपना विसिष्ट स्थान रखता है। रांची शहर में स्थित होने से अन्य राज्यों से पढ़ाई करने आने वाले स्टूडेंट्स की पहली पसंद भी है। सीसीएल, मेकॉन, सीएमपीडीआई, एचईसी, सेल जैसे बड़े संस्थानों मुख्यालय रांची में होने के कारण माइनिंग के स्टूडेंट्स को इसका लाभ भी मिलता है। माइनिंग इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के अनुभवी फैकल्टी मेंबर्स स्टूडेंट्स को इस सेक्टर में बेहतर करने के लिए तैयार करते है।

यहाँ से माइनिंग इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले स्टूडेंट्स को इंडस्ट्री सेंट्रिक सिलेबस के साथ इस फील्ड के अनुभवी लोगों का मार्गदर्शन समय समय पर मिलता रहता है। इसके अलावा प्रैक्टिकल एजुकेशन की जरुरत को पूरा करने के लिए इंडस्ट्री विजिट,इंटर्नशिप,वर्कशॉप,गेस्ट लेक्चर, माइंस विजिट भी नियमित तौर पर करवाई जाती है।

    यूनिवर्सिटी द्वारा उपलब्ध करवाई जा रही सुविधाओं में :

  1. 100 प्रतिशत पीडीपीटी ( पोस्ट डिप्लोमा प्रैक्टिकल ) ट्रेनिंग। यह ट्रेनिंग संपन्न होती है सीसीएल,एसीएल और बीसीसीएल जैसे नामी संस्थानों में।
  2. कोर्स के दौरान व्यावहारिक (वोकेशनल ) प्रशिक्षण की वयवस्था।
  3. पढ़ाई के दौरान औद्यौगिक भ्रमण (इंडस्ट्रियल विजिट)की सुविधा जिनमें सीएमपीडीआई, सीआईएमएफआर, जीएसआई जैसे संस्थान शामिल है ।
  4. गैस टेस्टिंग एग्जामिनेशन में लैंप हैंडलिंग सर्टिफिकेट प्राप्त करने में सहयोग।
  5. ओवरमैन एग्जामिनेशन पास करने के लिए कैंपस में फ्री प्रतियोगिता परीक्षा तैयारी की सुविधा।
  6. डायरेक्टर जेनेरल ऑफ़ माइंस सेफ्टी (डीजीएमएस ) द्वारा दी जाने वाली योग्यता जाँच प्रमाणपत्र को प्राप्त करने में सहयोग।
  7. बोर्ड ऑफ़ प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (बीओपीटी ) कोलकाता द्वारा मान्यता प्राप्त।
  8. योग्य और अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन।
  9. मॉडर्न माइनिंग लेबोरेटरी की सुविधा शामिल है।
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माइनिंग इंजीनियरिंग : रोजगार की गारंटी

खनिज संपदा हमारे जीवन का मुख्य आधार है। खनिज संपदा को निकालने का काम प्रशिक्षित लोगों के नेतृत्व में किया जाता है, जिन लोगों को माइनिंग इंजीनियर कहते हैं। खनिज संपदा को निकालने के कार्य को खनन (माइनिंग) इंजीनियरिंग कहते हैं।
भारत में खनिज संपदा का बहुत भंडार है। बिहार, झारखंड, उड़ीसा, मध्य प्रदेश व पश्चिम बंगाल जैसे राज्य में खनिज पदार्थ भारी मात्रा में हैं। खनिज संपदा देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसको देखते हुए देश में माइनिंग इंजीनियर्स की डिमांड काफी तेजी के साथ बढ़ती जा रही है। खनन इंजीनियरिंग में धरती के खनिज पदार्थों का पता लगाना और उनकी खुदाई कर बाहर निकालना होता है। खनन इंजीनियरिंग में प्रमुख रूप से उत्खनन, कच्चे खनिज पदार्थों का टेस्ट करना होता है।

माइनिंग या खनन इंजीनियरिंग में कैरियर बनाने के लिए सबसे पहले उम्मीदवार का किसी मान्यताप्राप्त विद्यालय से साइंस स्ट्रीम में 12 वीं कक्षा पास करना अनिवार्य है. इसके बाद उम्मीदवार माइनिंग से बीटेक (B.Tech), बीई (B.E) और बीएससी (BSC) कोर्स कर सकते है.

माइनिंग कोर्स के अन्तर्गत उम्मीदवार को ड्रिलिंग (Drilling), ब्लास्टिंग (Blasting), माइन कॉस्ट इंजीनियरिंग (Mine Cost Engineering), अयस्क रिजर्व विश्लेषण (Ore Reserve Analysis), ऑपरेशन विश्लेषण (Operation Analysis), माइन वेंटीलेशन (Main ventilation), माइन प्लानिंग (Mine Planning), माइन सेफ्टी (Mine Safety), रॉक मैकेनिक्स (Rock Mechanics), कम्प्यूटर एप्लीकेशन (Computer Applications), इंडस्ट्रियल मैनेजमेंट (Industrial Management) से सम्बंधित जानकारी दी जाती है।

मुख्य रूप से इस कोर्स के तहत उम्मीदवार को खनिज पदार्थों की संभावनाओं (Prospects) का पता लगाना, उनके नमूने एकत्रित करना (To collect their samples), भूमिगत (Underground) तथा भूतल खदानों का विस्तार (Surface mines expand) और विकास करना, खनिजों को परिष्कृत करना (To refine minerals) आदि के बारे में जानकारी प्रदान की जाती है।

माइनिंग इंजीनियरिंग में पढ़ाई के बाद कैंडिडेट्स के पास सरकारी और निजी सेक्टरों में रोजगार के अवसर हैं। टाटा आयरन एंड स्टील, रिलायंस पेट्रोलियम, इंडियन ऑयल, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया, यूरेनियम कॉपोरेशन ऑफ इंडिया, सरकारी खनन निगम, हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड, नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन, इंडियन ब्यूरो ऑफ माइंस लिमिटेड, माइनिंग रिसर्च सेंटर, इंडियन एक्सप्लोसिव लिमिटेड, इंडियन डेटोनेटर्स लिमिटेड में करियर शुरू कर सकते हैं।

    झारखण्ड में माइनिंग इंजीनियरिंग के टॉप संस्थान :

  • आटीआईटी धनबाद
  • बीआईटी सिंदरी
  • सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ़ माइनिंग एंड फ्यूल रिसर्च धनबाद गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक, निरसा, धनबाद
  • झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी, रांची
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माइनिंग इंजीनियर बनकर सवारें अपना भविष्य

आज के युग में खनन और माइनिंग इंजीनियर (Mining Engineer) की मांग हर क्षेत्र में देखने को मिलती है क्योकि आजकल देश में ईंधन की खपत लगातार बढ़ रही है।

माइन (Mine) मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है – अंडर ग्राउंड माइन (Underground mine) और ओपेन-पिट माइन (Open-Pit Mine)

अंडरग्राउंड माइन (Underground Mine) में ही खनिज (Mineral) मिलते हैं, जिन्हें माइनिंग के द्वारा निकाला जाता है. अंडरग्राउंड माइन के माध्यम से सोने और कोयले को निकाला जाता है, इसके अलावा ओपन पिट माइनिंग (Open pit Mining) द्वारा आयरन (Iron) ओर लाइमस्टोन (limestone), मैग्नीज (Manganese) आदि को निकाला जाता है।

माइनिंग या खनन इंजीनियरिंग में कैरियर बनाने के लिए सबसे पहले उम्मीदवार का किसी मान्यताप्राप्त विद्यालय से साइंस स्ट्रीम में 12 वीं कक्षा पास करना अनिवार्य है। इसके बाद उम्मीदवार माइनिंग से डिप्लोमा(Diploma) बीटेक (B.Tech), बीई (B.E) और बीएससी (BSC) कोर्स कर सकते है। माइनिंग कोर्स के अन्तर्गत उम्मीदवार को ड्रिलिंग (Drilling), ब्लास्टिंग (Blasting), माइन कॉस्ट इंजीनियरिंग (Mine Cost Engineering), अयस्क रिजर्व विश्लेषण (Ore Reserve Analysis), ऑपरेशन विश्लेषण (Operation Analysis), माइन वेंटीलेशन (Main ventilation), माइन प्लानिंग (Mine Planning), माइन सेफ्टी (Mine Safety), रॉक मैकेनिक्स (Rock Mechanics), कम्प्यूटर एप्लीकेशन (Computer Applications), इंडस्ट्रियल मैनेजमेंट (Industrial Management) से सम्बंधित जानकारी दी जाती है।

पॉपुलर कोर्स

  1. डिप्लोमा इन माइनिंग इंजीनियरिंग
  2. बीटेक इन माइनिंग इंजीनियरिंग।

** माइनिंग इंजीनियरिंग करने वाले स्टूडेंट्स डिप्लोमा इन माइनिंग इंजीनियरिंग और बीटेक इन माइनिंग इंजीनियरिंग कोर्स को बेहद पसंद करते है। ये दोनों कोर्सेज में रोजगार के अवसर सालों भर मौजूद रहते है। बड़ी कंपनियां जैसे सीसीएल, बीसीसीएल,हिंडाल्को अपने यहाँ इंटर्न के अलावा मांइनिंग सरदार और अन्य पदों पर जॉब्स के लिए नियुक्तियां करती रहती है।

मुख्य रूप से इस कोर्स के तहत उम्मीदवार को खनिज पदार्थों की संभावनाओं का पता लगाना, उनके नमूने एकत्रित करना भूमिगत तथा भूतल खदानों का विस्तार और विकास करना, खनिजों को परिष्कृत करना आदि के बारे में जानकारी प्रदान की जाती है।

अवसर:

माइनिंग इंजीनियरिंग क्षेत्र मे रोजगार के अपार अवसर उपलब्ध है।एक माइनिंग इंजीनियर स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (Steel Authority of India Limited), कोल इंडिया लिमिटेड (Cole India Limited), आईबीपी लिमिटेड (IBP Ltd), आईपीसीएल (IPCL), नेवली लिग्नाइट कॉरपोरेशन (Nevali Lignite Corporation), यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (Uranium Corporation of India) में रोजगार पा सकते है।

** झारखंड में माइनिंग इंजीनियरिंग के टॉप 3 इंस्टिट्यूट

  • इंडियन स्कूल ऑफ माइंस, धनबाद
  • बिरसा इंस्टीटूट ऑफ टेक्नोलॉजी,झरिया, धनबाद
  • झारखंड राय यूनिवर्सिटी, रांची।

माइनिंग इंजीनियरिंग करने के बाद कौन – कौन सी कंपनियां देती हैं नौकरियां ?

माइनिंग इंजीनियरिंग के बाद कोल इंडिया लिमिटेड, टाटा स्टील, रियो टिनटो, वाइजैग स्टील, मोनेट इस्पात, वेदांता, एचजेडएल, एचसीएल, इलेक्ट्रोस्टील, द इंडियन ब्यूरो ऑफ माइनिंग, जियॉलजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, आईपीसीएल, नालको, अडानी माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियां नौकरिया प्रदान कराती है।

सैलरी:

माइनिंग इंजीनियरिंग कोर्स पूरा करने के बाद कैंडिडेट्स शुरुआत में 4 से 5 लाख रुपये सालाना कमा सकते हैं। आप जैसे-जैसे इस फील्ड में पुराने होते जाएंगे वैसे-वैसे इनकम भी बढ़ती जाएगी। इसी के साथ अगर आप रिसर्च कर रहे हैं तो ये इनकम और भी ज्यादा हो सकती है।

माइनिंग इंजीनियर बनने के लिए होने चाहिए ये स्किल्स :-

  • माइंस/खानों में काम करने के प्रति रुझान
  • मेहनत और मशक्कत करने में कोई परेशानी नहीं
  • लीडरशिप और श्रमिकों से काम करवाने की क्षमता
  • खदान की चुनौतीपूर्ण स्थितियों में किसी भी जोखिम का सामना करने का आत्मविश्वास
  • माइनिंग की तकनीकी और वैज्ञानिक अपडेटेड जानकारी
  • मैथ्स और फिजिक्स जैसे विषयों में दिलचस्पी