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झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी में मेडिकल राइटिंग ऐज ए कैरियर इन फार्मेसी पर वेबिनार का आयोजन

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी डिपार्टमेंट ऑफ़ फार्मासूटिकल्स के द्वारा “मेडिकल राइटिंग ऐज ए कैरियर इन फार्मेसी” विषय पर एक दिवसीय वेबिनार का आयोजन शनिवार को किया गया। इस अवसर पर ऑनलाइन व्याख्यान देने के लिए एपीसीइआर अहमदाबाद में सीनियर मेडिकल राइटर डॉ. दीपिका उपस्थित थी।

उन्होनें ने वेबिनार को संबोधित करते हुए कहा की ” चिकित्सा लेखन विशेष लेखकों द्वारा वैज्ञानिक दस्तावेजों का निर्माण है। मेडिकल लेखक आमतौर पर वैज्ञानिकों, डॉक्टरों और अन्य विषय विशेषज्ञों के साथ मिलकर काम करता है ताकि प्रभावी दस्तावेज तैयार किए जा सकें जो अनुसंधान परिणामों और उत्पाद के उपयोग को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें।

मेडिकल राइटिंग के प्रकार :

डॉ. दीपिका ने मेडिकल राइटिंग के प्रकारों पर प्रकाश डालते हुए उन बताया की इसे मुख्य रूप से दो प्रकारों में बांट सकते है

  • एजुकेशनल मेडिकल राइटिंग
  • रेगुलर लीटरचर राइटिंग ।

एजुकेशनल राइटिंग में जर्नल, एजुकेशनल मैटर्स,मार्केटिंग लिटेरेचर, पब्लिकेशन, प्रेस शामिल है जबकि रेगुलर राइटिंग में शोध सामग्री, नियम परिनियम एवं अन्य साहित्य सामग्री का समावेश होता है।

मेडिकल राइटिंग शैली :
एक अच्छा मेडिकल राइटर बनने के लिए चिकित्सा क्षेत्र का ज्ञान, शब्दावलियों की जानकारी और लेखन शैली का ज्ञान आवश्यक शर्त है। राइटिंग स्कील्स को दो भागों में विभाजित किया जाता है डोमेन नॉलेज स्किल्स और जेनेरल नॉलेज स्किल्स।

मेडिकल राइटर कैसे बने :

  • प्रोजेक्ट की सही जानकारी और लेखन उद्देश्य की पहचान ।
  • टारगेट ऑडियंस को समझते हुए एक स्तर का लेखन।
  • लेखन विषय का सम्पूर्ण ज्ञान।
  • चिंतन करने की छमता और ज्ञान और नए विचार का समावेश।
  • वैज्ञानिक सटीकता ।
  • विषय विस्तार के दौरान सावधानी।
  • स्पष्ट शब्दावली चयन।
  • कार्य में शामिल व्यक्तिओं के साध सही संचार और समनवय।
  • समय प्रबंधन का ज्ञान एवं समय सीमा के अनादर कार्य पूर्ण करने का भाव।

कैरियर विकल्प :

  • फार्मासूटिकल्स और बायोटेक्नोलॉजी कम्पनियाँ ।
  • अनुबंध आधारित कार्य ।
  • मेडिकल कम्युनिकेशन एजेंसी।
  • इसके अलावा फ्रीलांसर के तौर पर मेडिकल राइटिंग का कार्य करने वालों के लिए भी कई अवसर उपलब्ध है जिनमें मेडिकल के अलग अलग क्षेत्र में विशेषज्ञ के तौर पर लेखन कार्य शामिल है ।

मेडिकल राइटिंग पेशा अपनाने के लाभ :

  • घर से काम करने या किसी भी जगह से कार्य करने की आजादी।
  • सही और सटीक कार्य करने पर ज्यादा अवसर और कार्य।
  • आर्थिक लाभ ।
  • दूसरों को इस क्षेत्र में जोड़ने और प्रशिक्षित करने का अवसर।
  • वेबिनार के समापन पर स्टूडेंट्स के सवालों का जवाब भी डॉ. दीपिका द्वारा दिया गया। वेबिनार आयोजन में डिपार्टमेंट ऑफ़ फार्मासूटिकल्स के प्रो. हेमेंद्र और प्रो. प्रियंका का योगदान रहा। कार्यक्रम का संचालन प्रो. कोमल कृति ने किया।

ड्रिप सिंचाई खेती से पानी की बचत के साथ किसानों को सब्सिडी का लाभ और मुनाफा ज्यादा

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी रांची के डिपार्टमेंट ऑफ़ एग्रीकल्चर साइंस द्वारा किसानों को उन्नत कृषि के लाभों से अवगत कराने के लिए प्रशिक्षण, जनजागरण और किसान गोष्ठी आयोजित की जाती है। कृषि में तकनीक और लाभदायक फसलों को अपनाने के लिए प्रेरित किया जाता है। झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी ने नामकुम कैंपस में विश्व स्तरीय हाइड्रो फोनिक्स लैब स्थापित है। इसके साथ ड्रिप एरिगेशन, मल्चिंग, पोली हाउस, स्प्रिंकलर सिंचाई और अल्ट्रा डेंसिटी तकनीक से कृषि कार्य किया जाता है।

ड्रिप सिंचाई की जानकारी देने और उसके लाभों से अवगत करता आलेख किसानों के जनहित में जारी:

एग्रीकल्चर एक्सपर्ट का मानना है की परंपरागत खेती के तरीकों में भू गर्भ जल का 85 प्रतिशत बर्बाद हो जाता है। एक क्विंटल धान पैदा करने में ढाई लाख लीटर पानी खर्च होता है। किसान टपक सिंचाई पद्धति को अपनाकर पानी की बर्बादी रोक सकता है। टपक सिंचाई को बूंद बूंद सिंचाई या ड्रिप सिंचाई के नाम से भी जाना जाता है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में किसानों से एक सीधे संवाद में किसानों को खेती की लागत घटाकर उत्पादन बढ़ाने के टिप्स देते हुए कहा था कि सूक्ष्म सिंचाई पद्धति से खेती की लागत घटाकर उत्पादन बढ़ाते हुए फसलों में ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है। पानी की कमी से जूझते किसानों की कृषि लागत घटाने के लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत ड्रिप और स्प्रिंकलर विधि से सिंचाई को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे पानी की तो बचत होती ही है, सिंचाई का खर्च कम हो जाता है और किसान का लाभ भी बढ़ जाता है।

    ड्रिप सिंचाई में उपयोगी उपकरण :

  • मोटर पंप – पानी की आपूर्ति के लिए
  • फ़िल्टर यूनिट – पानी को छानने में उपयोगी
  • फ्रटीगेशन यूनिट – पानी में खाद मिलाने की वयवस्था
  • प्रेशर गेज – पानी के दाब को मापने का यंत्र

खेत में टपक विधि का इस्तेमाल करने के लिए पौधों की दूरी निर्धारित होना आवश्यक है। ऊपर से लगे पाइप में सुराख के जरिए पानी की बूंद बराबर पौधों पर गिरती रहती है। इसके लिए खेत में एक बड़ी टंकी लगाई जाती है, जबकि फव्वारा विधि में मोटर से पानी सप्लाई के जरिए पौधों को फुहारें दी जाती हैं। टपक विधि में प्रति हेक्टेयर 1.15 लाख रुपये लागत आती है। इसमें सरकार की ओर से 90 फीसदी तक अनुदान मिलता है।

    टपक सिंचाई के लाभ :

  1. टपक सिंचाई में जल उपयोग दक्षता 95 प्रतिशत तक होती है जबकि पारम्परिक सिंचाई प्रणाली में जल उपयोग दक्षता लगभग 50 प्रतिशत तक ही होती है।
  2. इस सिंचाई विधि में जल के साथ-साथ उर्वरकों को अनावश्यक बर्बादी से रोका जा सकता है।
  3. टपक विधि से सिंचित फसल की तीव्र वृद्धि होती है फलस्वरूप फसल शीघ्र परिपक्व होती है।
  4. खर-पतवार नियंत्रण में अत्यन्त ही सहायक होती है क्योंकि सीमित सतह नमी के कारण खर-पतवार कम उगते हैं।
  5. टपक सिंचाई विधि अच्छी फसल विकास हेतु आदर्श मृदा नमी स्तर प्रदान करती है।
  6. इस सिंचाई विधि में कीटनाशकों एवं कवक नाशकों के धुलने की संभावना कम होती है।
  7. लवणीय जल को इस सिंचाई विधि से सिंचाई हेतु उपयोग में लाया जा सकता है।
  8. इस सिंचाई विधि में फसलों की पैदावार 150 प्रतिशत तक बढ़ जाती है।
  9. पारम्परिक सिंचाई की तुलना में टपक सिंचाई में 70 प्रतिशत तक जल की बचत की जा सकती है।
  10. इस सिंचाई विधि के माध्यम से लवणीय, बलुई एवं पहाड़ी भूमियों को भी सफलतापूर्वक खेती के काम में लाया जा सकता है।
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  12. टपक सिंचाई में मृदा अपरदन की संभावना नहीं के बराबर होती है, जिससे मृदा संरक्षण को बढ़ावा मिलता है।
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  14. ड्रिप सिंचाई खेती करने पर किसानों को सब्सिडी मिलती है। सब्सिडी दर अलग अलग राज्यों में अलग अलग है।
Webinar on impact and strategies for the education sector during COVID-19

इंपैक्ट एंड स्टैट्जीज़ फॉर द एजुकेशन सेक्टर ड्यूरिंग कोविड -19 पैंडेमिक पर वेबिनार का आयोजन

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी और डोरंडा कॉलेज रांची के सयुंक्त तत्वावधान में “इंपैक्ट एंड स्टैट्जीज़ फॉर द एजुकेशन सेक्टर ड्यूरिंग कोविड -19 पैंडेमिक ” पर वेबिनार का आयोजन किया गया। इसे बिनोबा भावे विश्वविद्यालय, हज़ारीबाग़ के पूर्व कुलपति प्रो. डॉ. रमेश शरण और अमेज़ॉन वेब सर्विसेज एकडेमी के साउथ एशिया हेड लोकेश मेहरा ने संबोधित किया ।

वेबिनार का शुभारंभ सरस्वती वंदना के साथ किया गया। अमेजॉन के लोकेश मेहरा ने सर्वप्रथम विषय प्रवेश करते हुए माजूदा दौर में एजुकेशन सेक्टर की चुनौतियाँ अवसर, विकास और तकीनीकी छमता को रेखांकित करते हुए अपनी बात रखी। उन्होंने पुरातन शिक्षा वयवस्था और कोविड के बाद हुए बदलाओं पर विस्तार से अपनी बात रखते हुए बताया की ” बेहतर भविष्य को हासिल करने के लिए एजुकेशन फील्ड से जुड़े लोगों ने आगे आकर इस विषम परिस्थिति में भी बेहतर कार्य किया है।

तकनीक ने नए अवसर भी पैदा किये है वर्चुअल एजुकेशन ने इस दौर में बड़े बदलाव किये है जिनसे सभी को दो चार होना पड़ा है। तमाम चुनौतियों के साथ नए अवसर भी सामने आये है। कोविड- 19 के कारण कई बड़ी कंपनियों को बंद होना पड़ा है। तकनिकी प्रसार के साथ तालमेल बिठाने में कई समस्यायें भी देखने को मिली रहती है। लेकिन सोशल मीडिया के जरिये इसको समझने में सहायता भी मिली है। आज का दौर सोशल मीडिया, बिग डेटा, मोबाइल फ़ोन और क्लाउड कंप्यूटिंग का दौर है। बदलाओं की बात करे तो जॉब पोजीशन ही नहीं बल्कि माइंड सेट भी बदलते देखे गए है।

प्रो डॉ रमेश शरण ने अपने संबोधन के दौरान डिजिटल एजुकेशन सिस्टम को रेखांकित करते हुए कहा की ” डिजिटल एजुकेशन की सबसे बड़ी दिक्कत इसके इस्तेमाल में आने वाली तकनिकी बाधाएँ है जिनसे दो चार होना पड़ता है। उन्होंने कहा की आज भी डिजिटल एजुकेशन सबके लिए संभव नहीं हो पाया है। ग्रामीण इलाकों में आज भी सुविधाजनक तरीके से इसका इस्तेमाल नियमित तौर पर नहीं हो पता है। खासकर स्कूली शिक्षा में अभी भी काफी काम किया जाना बाकि है। प्रो शरण ने डिजिटल एजुकेशन के भविष्य की चर्चा करते हुए कहा की इसमें काफी संभावना है और आगे जाकर यही मिश्रित शिक्षा व्यवस्था कार्य करेगी। उन्होंने स्टूडेंट्स से तकनिकी रूप से सक्षम होने के लिए भी कहा। भविष्य की शिक्षा तकनीक आधारित होगी।“

वेबिनार के दौरान प्रश्न उत्तर सत्र का भी आयोजन किया गया जिसमें स्टूडेंट्स के सवालों का जवाब दिया गया।

वेबिनार के समापन पर झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार प्रो. डॉ. पियूष रंजन ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा की वक्ताओं ने अपना कीमती समय निकाल कर बहुमूल्य राय से सबको अवगत कराया इसके लिए उनका धन्यवाद। उन्होंने कहा की सफलता किसी की मुहताज नहीं होती यह आप दोनों ने साबित किया है। डॉ. पियूष ने पुनः वेबिनार को सफल बनाने में शामिल फैकल्टी और टेक्निकल टीम के सदस्यों एवं वेबिनार के आयोजन में शामिल प्रो. रश्मि और डोरंडा कॉलेज की प्रो. नीलू कुमारी को का धन्यवाद किया।

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट क्लब आगामी 19 दिसंबर को बिज़ -प्लान 2020 का करेगा आयोजन

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी, के मैनेजमेंट क्लब द्वारा बिज़ -प्लान 2020 का आयोजन आगामी 19 दिसंबर को किया जाना है। बिज प्लान डिपार्टमेंट ऑफ़ मैनेजमेंट स्टडी द्वारा संचालित मैनेजमेंट क्लब द्वारा प्रति वर्ष आयोजित होने वाला कार्यक्रम है। इसमें राज्य भर से मैनेजमेंट के स्टूडेंट्स शामिल होते है और अपने बिजनेस प्लान को प्रस्तुत करते है। इस वर्ष इसमें इनोवेटिव आईडिया के प्रस्तुतीकरण पर जोर दिया गया है।

बिज प्लान में शामिल होने वाली टीमों के प्रतिभागी ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट का स्टूडेंट्स होना चाहिए। एक टीम में चार से ज्यादा सदस्य नहीं होने चाहिए। एक कॉलेज से एक ही टीम को प्रतियोगिता में शामिल किया जायेगा। एक प्रतियोगी एक से ज्यादा टीम में शामिल नहीं हो सकता है।

टीम के एक सदस्य को टीम लीडर के तौर पर अपना निबंधन कराना आवश्यक है। टीमों को अपने बिजनेस प्लान की जानकारी एमएस पॉवर पॉइंट में प्रस्तुत करनी होगी। एक टीम किसी एक विषय पर ही अपनी प्रस्तुति देगी। बिजनेस प्लान की प्रस्तुति में कवर पेज, इंडेक्स, समरी, मार्किट एनलाइसिस, ऑपरचुनिटी, एक्सिक्यूशन, फाइनेंसियल प्लान और कन्क्लूजन को शामिल करना होगा।

टीमों का चयन उनके द्वारा प्रस्तुत विचारों में नवीनता मौलिकता , विचार की व्यापकता, बाजार और स्थिरता और बाजार सरलता को देखते हुए किया जायेगा।

प्रतियोगिता से जुड़े किसी भी नियम और जानकारी के लिए मैनेजमेंट क्लब के सदस्यों से संपर्क किया जा सकता है।

Webinar on IMPACT AND STRATEGIES FOR THE EDUCATION SECTOR DURING COVID -19 PANDEMIC

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Date : 14 Dec, 2020
Time : 11:00 am onwards

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SPEAKERS :

Prof. (Dr.) Ramesh Sharan
Dean, Faculty of Social Sciences, Ranchi University Former Vice Chancellor – Vinoba Bhave University

Mr. Lokesh Mehra
Head – South Asia, Amazon Web Services Academy

Convenor : Dr. Neelu Kumari
Assistant Professor, Deptt. of Economics Doranda College, Ranchi Mobile No : 9470193857

Convenor : Prof. Rashmi
Assistant Professor, Deptt. of Life Skills Jharkhand Rai University, Ranchi Mobile No : 9431579389

CSIT Promotional blog

झारखण्ड राय विश्वविद्यालय से बीसीए और एमसीए करते हुए लाइव प्रोजेक्ट से जुड़ने का सुनहरा अवसर प्राप्त करें

बीसीए और एमसीए की पढ़ाई करते हुए लाइव प्रोजेक्ट पर काम करने का अनुभव प्राप्त करना आजकल इंडस्ट्री ट्रेंड बन चूका है। एक तरफ विद्यार्थियों को नियमित पढ़ाई के दौरान कोडिंग, आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और पायथन जैसे नवीनतम सॉफ्टवेयर का ज्ञान क्लासरूम क्लासरूम लर्निंग से प्राप्त होता है । जबकि लाइव प्रोजेक्ट में शामिल होकर टेस्टिंग, डेवलपिंग, डी बगिंग और कोडिंग मेथड कम समय में पूरा करने का हुनर इंडस्ट्री फ्रेंडली होने में सहायक है। झारखण्ड राय विश्वविद्यालय, रांची का डिपार्टमेंट ऑफ़ कंप्यूटर साइंस एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी अपने छात्रों को इंडस्ट्री रेडी कोर्से, बेहतरीन ऐकडेमिक और लाइफ स्किल्स सपोर्ट, इंटर्नशिप, हैकेथॉन, वर्कशॉप, सेमिनार, इंडस्ट्रियल विजिट के साथ आईटी फील्ड के एक्सपर्ट के साथ रूबरू होने और उनके लाइव सेशन में शामिल होने का मौका प्रदान करता है। डिपार्टमेंट का उद्देश्य है सही मार्गदर्शन के साथ विद्यार्थियों को आईटी फील्ड की नवीनतम तकनिकी जानकारियों से लैस करते हुए इनोवेशन और स्टार्टअप्स के लिए प्रेरित करना । इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गेनाईजेशन(ISRO) ने अपने ऑनलाइन पाठ्यक्रमों के लिए यूनिवर्सिटी को आईआईआरएस आउटरीच सेंटर के तौर पर मान्यता प्रदान किया है।

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CSIT Promotional blog (4)

डिपार्टमेंट ऑफ़ कंप्यूटर साइंस एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मुख्यतः दो पाठ्यक्रम संचालित करता है। मास्टर ऑफ़ कंप्यूटर एप्लीकेशन (एमसीए) और बैचलर ऑफ़ कंप्यूटर एप्लीकेशन (बीसीए)। दोनों ही कोर्स पूरी तरह रेगुलर, प्रैक्टिकल बेस्ड और रोजगारपरक है। बीसीए 3 वर्षीय पाठ्यक्रम है जिसके लिए योग्तया 12 वीं और एमसीए के लिए बीसीए की डिग्री अनिवार्य है। डिपार्टमेंट के बीसीए और एमसीए छात्र गूगल इंडिया द्वारा चलाये जाने वाले इंटर्नशिप कार्यक्रम में शामिल है। कोविड के दौरान स्वास्थ्य सुविधाओं में बेहतरी और मरीजों की सुविधा के लिए यहाँ के स्टूडेंट्स ने ऑनलाइन ओपीडी व्यवस्था COVID OPD एप्लीकेशन निर्माण किया है। यहाँ के एमसीए स्टूडेंट्स ने मिलकर अपनी एक कंपनी “आईटी सोल्युशन कंपनी” का निर्माण किया है। यह सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय से निबंधित है। विश्वविद्यालय के प्लेसमेंट सेल के सहयोग से डिपार्टमेंट ऑफ़ सीएस एंड आईटी के स्टूडेंट (बीटेक कंप्यूटर साइंस) अंकित सिंह ने कैंपस ड्राइव के दौरान जारो टॉपस्कॉलर्स लिमिटेड में जॉब प्राप्त किया है। हैकेथॉन जैसे प्रतियोगिताओं में स्टूडेंट्स ने हमेशा बेहतर परिणाम दिया है। अगर आप की इच्छा बीसीए और एमसीए करने के बाद कंप्यूटर और सूचना तकनीक के क्षेत्र में कैरियर बनाने की है।आईटी इंडस्ट्री और स्टार्टअप्स से जुड़ने की है तो झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी, रांची देता है आपको सीखने, खुद को गढ़ने और करियर को नई उचाईयों पर ले जाने का अवसर ।

facilitation

झारखण्ड राय विश्वविद्यालय को रक्त दान के लिए सर्वाधिक प्रेरित करने का अवार्ड

झारखण्ड राय विश्वविद्यालय, रांची को ब्लड बैंक रिम्स, रांची द्वारा वर्ष 2019 में लोगों को रक्त दान के लिए सर्वाधिक प्रेरित करने के लिए पुरस्कृत किया गया है। विश्वविद्यालय द्वारा अपने परिसर में नियमित रक्त दान शिविर आयोजित करके सर्वाधिक मात्रा में ब्लड यूनिट भी जमा किया गया है। ब्लड बैंक रिम्स रांची द्वारा पिछले दिनों आयोजित वार्षिक सम्म्मान समारोह के दौरान स्वैक्षिक रक्त दान शिविर आयोजित करने और रक्त दान के लिए लोगों को प्रेरित करने वाली संस्थानों और व्यक्तयों को सम्मानित किया गया।

रिम्स ऑडिटोरियम में आयोजित वार्षिक समारोह के दौरान राज्य के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता, स्वास्थ्य सचिव नितिन मदन कुलकर्णी, रिम्स रांची की निदेशक मंजू गाड़ी, सीआरपीएफ के पुलिस महानिरीक्षक डॉ. महेश्वर दयाल, सीआईएसफ के पुलिस महानिरीक्षक अनिल कुमार सिंह , पुलिस महानिरीक्षक जगुआर साकेत कुमार सिंह, झारखण्ड एड्स कण्ट्रोल सोसाइटी के प्रोजेक्ट डायरेक्टर राजीव रंजन, रिम्स रांची के चिकित्सा पुलिस महानिरीक्षक डॉ. डी. के. सिन्हा, ब्लड बैंक रिम्स रांची की डॉ. सुषमा कुमारी एवं आयोजन के सदस्य उपस्थित थे।

विश्वविद्यालय में वर्ष भर आयोजित होने वाले रक्त दान शिविर के आयोजन और छात्र छात्राओं को रक्त दान की उपयोगिता और जीवन रक्षा में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका से अवगत करने का कार्य डिपार्टमेंट ऑफ लाइफ स्किल्स की प्रो. रश्मि राज के द्वारा किया जाता है। इनके व्यक्तिगत प्रयासों से छात्रों और कर्मचारियों को आकस्मिक जरूरत के समय ब्लड भी उपलब्ध करवाया जाता रहा है। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व करते हुए प्रो. रश्मि ने पुरस्कार ग्रहण किया।

विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ पियूष रंजन ने विश्वविद्यालय को प्राप्त इस सम्मान के प्रति आभार व्यक्त करते हुए ब्लड डोनेशन के लिए लोगों को प्रेरित करने और एक वर्ष में सर्वाधिक यूनिट ब्लड जमा करने में शामिल सभी कर्मियों और छात्रों के अथक प्रयास को इसका श्रेय दिया। उन्होंने प्रो रश्मि के व्यक्तिगत प्रयासों की भी सराहना की जिनके अथक प्रयासों से समय समय पर कार्यक्रमों का आयोजन होता रहा है। डॉ. रंजन ने ब्लड बैंक रिम्स रांची के कार्यों की भी सराहना की है।

Agriculture at JRU

बीएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई के लिए सीमावर्ती राज्य बिहार, बंगाल और ओडिशा के छात्रों को आकर्षित करता झारखण्ड राय विश्वविद्यालय, राँची ।

झारखण्ड राय विश्वविद्यालय, राँची द्वारा संचालित कृषि स्नातक प्रतिष्ठा पाठ्यक्रम(बीएससी इन एग्रीकल्चर ऑनर्स) रोजगारपरक और उद्यमिता से जुड़ा पाठ्यक्रम है। कृषि शिक्षा के प्रति युवाओं रुझान बढ़ा है । इसके पीछे इसमें छिपी भरपूर संभावनाएं है। रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम होने के साथ साथ इस पाठ्यक्रम की मुख्य विशेषता उद्यमिता और स्वरोजगार के लिये भरपूर अवसर सामने आये है। झारखण्ड राय विश्वविद्यालय, राँची द्वारा संचालित कृषि स्नातक प्रतिष्ठा पाठ्यक्रम 4 वर्षीय पाठ्यक्रम है जिसमें झारखण्ड के अलावा बिहार, बंगाल और उडीसा जैसे सीमावर्ती राज्यों के छात्र भी आकार पढ़ाई करते है। सीमावर्ती राज्यों से पढ़ाई करने आने का मुख्य कारण यहाँ कि गुणवत्तापूर्ण और व्यावहारिक तकनिकी शिक्षा पर जोर है। नियमित कक्षा, सेमेस्टर सिस्टम, समय पर परीक्षा और परिणाम का प्रकाशन बाहरी छात्रों कों आकृष्ट करता है।

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विश्वविद्यालय के राँची, नामकुम प्रखंड में स्थायी कैम्पस संचालित है जहाँ 20 एकड़ के भू-भाग पर छात्रों के लिये कृषि कि सैधांतिक पढ़ाई के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण कि व्यवस्था कि गयी है । गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रति संकल्पित विश्वविद्यालय के डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर में अनुभवी शिक्षक पदस्थापित है जिनका इस क्षेत्र में लंबा अनुभव विद्यार्थियों के लिये लाभदायक साबित होता रहा है। विभाग के सभी शिक्षक कृषि विषय में डॉक्टरेट कि डिग्री प्राप्त किये हुए है जो राज्य में संचालित अन्य किसी विश्वविद्यालय या कॉलेज में यदा कदा ही देखने को मिलती है।बीएससी इन एग्रीकल्चर (ऑनर्स) पाठ्यक्रम भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के पांचवीं डीन रिपोर्ट कि अनुसंशाओं के अनुसार तैयार कि गयी है ।

सिलेबस में मूल विषय कृषि- वानिकी के साथ लाइफ स्किल और सामाजिक शिक्षा का समावेश किया गया है। विश्वविद्यालय कैम्पस में छात्रों को कृषि की व्यावहारिक जानकारी के तहत 6 महीने के एक्सपेरिमेंटल लीर्निंग प्रोग्राम(ELP) और 6 महीने का रूरल एग्रीकल्चर वर्क एक्सपेरिएंस रावे प्रोग्राम के तहत कार्य करना पडता है यह पुरी तरह आवासीय तकनिकी प्रशिक्षण कार्यक्रम है जिसमें कैम्पस में प्राप्त किये गए व्यवहारिक शिक्षा को गाँव में रहते हुए किसानों के साथ खेतों में जाकर करना होता है। रावे और इएलपी कार्यक्रम दो तरफ़ा संचार प्रक्रिया है जिसमें किसान और विद्यार्थी सामुहिक कृषि कार्य करते हुए एक दुसरे कों सैधांतिक और व्यवहारिक जानकारी से अवगत कराते है ।

विद्यार्थियों कों 4 वर्ष के पाठ्यक्रम दौरान सैधांतिक और व्यावहारिक प्रशिक्षण और ज्ञान के साथ विभाग द्वारा कृषि बाजार और उपज से जुड़ी समस्याओं से भी अवगत कराने का कार्य किया जाता है। पढ़ाई के दौरान प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद विद्यार्थी विभाग द्वारा आवंटित भूमि पर अपनी पसंद के कृषि कार्य करते है और फिर उसकी बाजार व्यवस्था और बिक्री से जुड़ी समस्याओं का अध्ययन करते हुए फसल से प्राप्त आय और समस्याओं से अवगत भी कराते है ।

झारखण्ड राय विश्वविद्यालय के नामकुम कैम्पस में विश्वस्तरीय हाईड्रोफोनिक्स तकनीक से सुसज्जित लैब स्थापित है जिसमें छात्रों को जल कृषि तकनीक कि जानकारी, प्रशिक्षण और प्रमाणपत्र भी उपलब्ध कराया जाता है।

पाठ्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) और निगमित सामाजिक दायित्व (CSR) के तहत भी कार्य करने होते है । विश्वविद्यालय के कृषि विभाग से प्रति वर्ष एनएसएस में शामिल विद्यार्थियों में से 3 छात्र और 3 छात्रों का चयन पूर्व गणतंत्र दिवस परेड कैम्प के लिये चयन होता रहा है। कृषि विभाग के विद्यार्थिओं का वर्ष में दो बार अन्य प्रदेशों में एडुकेशनल टूर का आयोजन किया जाता है जिसमें वे देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों, कृषि अनुसंधान केन्द्रों और शोध संस्थानों का भ्रमण करते है और उसपर अपनी रिपोर्ट जमा करते है।

विश्वविद्यालय अपने एकेडमिक कार्यक्रमों के तहत सभी विभागों में नियमित अतिथि व्याख्यान, सेमिनार, वर्कशॉप, इन्डस्ट्री विजिट और विषय से जुड़ी बड़ी हस्तिओं से छात्रों का परिचय कार्यक्रम का आयोजन करता रहता है। विश्वविद्यालय में आयोजित वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता कृषि खेल और वार्षिक सांस्कृतिक कार्यक्रम गूंज और तरंग के जरिये विद्यार्थी भारतीय कृषि परंपरा से सभी को अवगत कराने का कार्य करते है ।

पढ़ाई शुरू करने के बाद विद्यार्थियों को रोजगार से जोड़ने के लिये कैम्पस प्लेसमेंट कि व्यवस्था भी है विश्वविद्यालय का अपना प्लेसमेंट सेल है जो उन्हें जॉब दिलाने का कार्य करता है। पिछले वर्ष विभाग में 17 प्रतिष्ठित कंपनियों ने आकर छात्रों का चयन किया. इनमें कोरोमंडल इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड, यूपीए, सारदा, पान सिड शामिल है। यहाँ से स्नातक शिक्षा प्राप्त किये छात्र देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहें है और राज्य के साथ विश्वविद्यालय का नाम आगे ले जाने का काम कर रहें है।

Poly House

विश्वस्तरीय हाईड्रो फोनिक्स में प्रशिक्षण और सर्टिफिकेट के साथ बीएससी इन एग्रीकल्चर की डिग्री

बीएससी एग्रीकल्चर (ऑनर्स) 4 वर्षीय डिग्री पाठ्यक्रम के लिए झारखण्ड राय विश्व विद्यालय,राँची एक विश्वसनीय नाम है । यहाँ कृषि स्नातक की पढ़ाई करने वाले छात्रों को मिलता है विश्व स्तरीय हाइड्रो फोनिक्स तकनीक में प्रशिक्षण और प्रमाणपत्र के साथ 4वर्षीय बीएससी एग्रीकल्चर ऑनर्स की डिग्री। झारखंड राय विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित हाइड्रो फोनिक्स पोली हाउस उत्तर भारत का एकलौता, उन्नत पोली हाउस है। यह पूरी तरह ऑटोमेटिक तकनीक से संचालित है जिसमें बिना मिट्टी के पानी और सूर्य की रोशनी की सहायता से पौधों का नैसर्गिक वृद्धि कराया जाता है।

विश्वविद्यालय के नामकुम स्थित स्थायी कैंपस में 20 एकड़ भूमि पर कृषि कार्य किया जाता है जिसमें छात्रों की सीधी भागीदारी होती है । कैंपस में औषधीय पौधों के साथ फूलों की खेती कों बढ़ावा दिया जाता है। सीनियर फेकल्टी के नेतृत्व में फार्म मैनेजर के द्वारा नियमित छात्रों को पेड़- पौधों और फसलों में होने वाले बदलावों से अवगत कराने का कार्य किया जाता है।

झारखण्ड राय विश्वविद्यालय में सैधांतिक समझ के साथ साथ प्रैक्टिकल एडुकेशन पर ज्यादा जोर दिया जाता है। पढाई के 4 वर्षों के दौरान छात्रों कों मेंटरशीप प्रोग्राम से जोड़ कर इन्डस्ट्रीयल टूर, रूरल एग्रीकल्चर एक्सटेंशन वर्क एक्सपीरिएंस, एडुकेशनल टूर, फार्म विजिट, सेमिनार, वर्कशॉप, गेस्ट लेक्चर, ऑफ लाइन और ऑनलाइन शिक्षा, लाइफ स्किल ट्रेनिंग देकर इंडस्ट्री रेडी बनाया जाता है । सफलतापूर्वक पढाई पुरी करने पर यूनिवर्सिटीप्लेसमेंट सेल इन्हें नौकरी प्राप्त करने में भी सहायता प्रदान करता है।यूनिवर्सिटी ने स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए कैम्पस में इनोवेशन सेल और लैब भी स्थापित किया है।यूनिवर्सिटी के कई छात्र कृषि क्षेत्र में खुद का उद्यम स्थापित करके अपने और दूसरों की आजीविका का प्रबंध कर रहे हैं।

ABC of artificial intelligence

आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की ABCD

बच्चों को A फॉर एप्पल और B फॉर बॉय सिखाने के दिन पुराने पड़ चुके है। आज बच्चे A फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, B फॉर बिग डेटा, R फॉर रोबोटिक्स और M फॉर मशीन लर्निंग जैसे शब्दों से परिचित है । यह सब उनके सिलेबस का हिस्सा है। मशीनों ने दुनिया को बदल कर रख दिया है इस कारण बच्चों की दुनिया बदली है इससे कोई भी अछूता नहीं रह सकता है।

आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की ABCD :

A : आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस
इंसानों ने तकनीक का इजाद किया। लेकिन बुद्धिमान मशीनों से इंसान को पीछे छोड़ दिया है।

B: बायस
मशीनें भेद भाव कर सकती है यह सुन कर विश्वास नहीं होता लेकिन यह भेदभाव कई अर्थों में सामने आया है जो मानव को सोचने पर मजबूर करता है। मशीनों में जो डेटा फीड होता है वह एल्गोरिदम की बुनियाद पर काम करता है। बनाने वालों ने इनके साथ भी भेदभाव किया। मर्दों और औरतों के बीच भेद भाव और गोरे और काले रंग वालों के बीच भेद भाव करना बड़ी समस्या बनकर उभरा है।

C: चैटबॉट
मशीनें इंसानों की तरह बातें करती हैं ।यह संभव हो पाता है नैचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग और नैचुरल लैंग्वेज जेनरेशन भाषा के जरिये।। इसे ही चैटबॉट मशीनें कहते हैं।

D : डिज़ाइन
डिज़ाइनिंग एक चुनौती भरा और समयसाध्य कार्य है। आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस ने इस काम को ज़्यादा तेज़ी और बेहतर तरीक़े से करना शुरू किया है। बड़ी कंपनियाँ तो नए डिज़ाइन और पार्ट्स बनाने के लिए आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस का ही इस्तेमाल कर रही हैं।

E: इमरजेंसी
आपात स्थिति से निपटने और चेतावनी देने में इसकी भूमिका प्रमुख है। ये मशीनें न्यूज़ रिपोर्ट का आकलन करके ये बता सकेंगी की किस इलाक़े में तनाव पैदा होने वाला है।

F: फ़ुटबॉल
खेल के मैदान में आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमालकरने का प्रयास जारी है। इसके ज़रिए यह आकलन संभव हो सकेगा कि कौन सा ख़िलाड़ी खेल के मैदान में कौन सा अगला दांव चलने वाला है।

G: जेनेरेटिव एडवर्सरियल नेटवर्क
पिक्चर के साथ किये जाने वाले छेड़छाड़ को लेकर अक्सर शिकायत मिलती रहती है। आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की मदद से इसे रोका जा सकता है।जेनेरेटिव एडवरसरियल नेटवर्क के ज़रिए नई तस्वीरें बनाई जा सकेगी ।

H: हैलुसिनेशन
इंसानी दिमाग अक्सर मतिभ्रम या ग़लतफ़हमी के शिकार होता है। मशीनें भी इससे अछूती नहीं है। मशीनों की यह गलती बड़ी दुर्घटनाओं को आमंत्रित करती है। एआई के सहयोग से इन्हें रोका जा सकता है।

I: इमैजिनेशन
कल्पना मनुष्य का स्वाभाविक गुण है। कल्पना का सहारा लेकर किसी भी कार्य को मूर्त रूप देने का प्रयास किया जाता है। किसी भी चीज़ को देखने का मशीन का नज़रिया इंसान से अलग होता है वो कई मायनों में हम से बेहतर भी। फाइन आर्ट्स के सेक्टर में मशीनों का सहयोग हैरान करने वाला साबित होगा।

J: जाम
ट्रैफ़िक जाम से निपटने के लिए AI का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है। आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस इसके इस्तेमाल से पता लगाया जा सकता है कि कहाँ जाम लग सकता है और उसे कंट्रोल कैसे किया जा सकता है।

K: निटिंग
फैशन और टेक्सटाइल इंडस्ट्री भी AI से अछूती नहीं है। कढ़ाई बुनाई के कामों में भी इसका बखूबी इस्तेमाल किया जा रहा है। स्काईनिट की मदद से बुनाई के ऐसे पैटर्न तैयार किए गए हैं, जो अपने आप में अद्भुत हैं।

L : लैंग्वेज
भाषा संचार का सर्वोत्तम साधन है। अंग्रेजी भाषा के वैश्विक पहचान के पीछे व्यापक स्वीकार्यता शामिल है। अक़्लमंद मशीनों की अपनी ज़बान होती है । मशीनी भाषा ने कंप्यूटर को एक अलग पहचान दिलायी।

M : मशीन लर्निंग
मशीन को एक छोटी सी चीज़ सिखाने के लिए ढेर सारा डेटा फीड करना पड़ता है। आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस वाली मशीनों की डिज़ाइनिंग ऐसी हैं कि वो इंसान की तरह जानकारियां इकट्ठा करें।

O: ओरेकल
इंसान की नज़र से तेज़ काम मशीनें करती हैं। आर्टिफ़िशयल इंटेलिजेंस की मदद से आंखों की बीमारियां और कैंसर जैसी बीमारियों के लक्षण उसके पनपने के पहले ही भांप लिए जाते हैं। अल्ज़ाइमर जैसी बीमारी की भविष्यवाणी संभव हो पाया है।

P: पुलिसिंग
चोर पुलिस के खेल में अपराधी अक्सर सबूतों और पहचान के आभाव में बरी हो जाते है। दुनिया भर में अपराधियों को पकड़ने के लिए आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की मदद ली जा रही है। अपराधियों के चेहरे के किसी हिस्से की पहचान कर उन्हें पकड़ने का प्रयोग किया जा रहा है। न्याय प्रक्रिया को सरल बनाने बेहतर बनाने में भी इसका बेहतर इस्तेमाल हो रहा है।

Q: क्वेक
भूकंप प्राकृतिक आपदा है जिसकी भविष्यवाणी असंभव है। अब ऐसी मशीनें बनाई जा रही हैं जो भूकंप के बाद आने वाले झटकों की जगह बता सकती हैं । इससे बड़े पैमाने पर होने वाले नुकसान को रोका जा सकता है।

R: रैप
विदेशों में संगीत की दुनिया में अजीब चलन है। गानों के बीच में तेज़ गति से डायलॉग बोले जाते हैं। इसे सरल भाषा में रैप कहते हैं। रैप इतनी तेज़ी से बोला जाता है कि इसके बोल आसानी से पकड़ में नहीं आते लेकिन आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस से इस काम को आसान बनाने की कोशिश की जा रही है।

S: स्मार्ट होम
जो देश तकनीकी रूप से ज़्यादा एडवांस हैं, वहां घर के बहुत से काम मशीन की मदद से होते है। आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की मदद से उन मशीन को ऑन-ऑफ़ किया जा सकता है, जिनके इस्तेमाल की ज़रूरत नहीं है। बिजली की खपत को रोकने में यह कारगर उपाय है।

T: टुरिंग टेस्ट
आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस का दायरा मापने के लिए टुरिंग टेस्ट सबसे विश्वसनीय माना जाता है. इस टेस्ट के मुताबिक़ मशीन की क़ाबिलियत की बुनियाद है कि वो किस हद तक बातों के ज़रिए इंसान को बेवकूफ़ बना सकती हैं.

V: वाइनयार्ड
यूरोप और अमरीका में किसानों की मदद के लिए आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल किया जा रहा है। अंगूर की खेती में इसका ख़ूब इस्तेमाल हो रहा है। आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस का दायरा मापने के लिए टुरिंग टेस्ट सबसे विश्वसनीय माना जाता है. इस टेस्ट के मुताबिक़ मशीन की क़ाबिलियत की बुनियाद है कि वो किस हद तक बातों के ज़रिए इंसान को बेवकूफ़ बना सकती हैं ।

W: वाइल्डलाइफ
जंगलों में भारी मात्रा में क़ीमती संपदा मौजूद है, जिसकी बड़े पैमाने पर चोरी और तस्करी होती है। दुर्लभ जाति के जानवरों का शिकार भी ख़ूब होता है। हालांकि इस पर नज़र रखने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल काफ़ी समय से हो रहा है ।

X: एक्स-रेटेड
इंसान की जिस्मानी ज़रूरतें पूरा करने में भी मशीनें अहम किरदार निभा रही हैं और सेक्स इंडस्ट्री में इनका बड़ा रोल है। आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल से अब इस पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है।

Y: यमी
अगर रसोई में खाना बनाने का मन ना हो तो इसके लिए भी अब आपके पास विकल्प हैं। आप आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के ज़रिए खाना बना सकते हैं। बुद्धिमान मशीनें आपके दिए गए कमांड के अनुसार आपके पसंद का खाना बनाकर तैयार कर देगीं।

Z : यानी ज़ू
सर्दी के मौसम में चिड़ियाघरों में सेंसर वाले हीटर लगाए जाते हैं जो जानवर के शरीर की ज़रूरत के मुताबिक़ उसके लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर देते हैं।