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Poly House

विश्वस्तरीय हाईड्रो फोनिक्स में प्रशिक्षण और सर्टिफिकेट के साथ बीएससी इन एग्रीकल्चर की डिग्री

बीएससी एग्रीकल्चर (ऑनर्स) 4 वर्षीय डिग्री पाठ्यक्रम के लिए झारखण्ड राय विश्व विद्यालय,राँची एक विश्वसनीय नाम है । यहाँ कृषि स्नातक की पढ़ाई करने वाले छात्रों को मिलता है विश्व स्तरीय हाइड्रो फोनिक्स तकनीक में प्रशिक्षण और प्रमाणपत्र के साथ 4वर्षीय बीएससी एग्रीकल्चर ऑनर्स की डिग्री। झारखंड राय विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित हाइड्रो फोनिक्स पोली हाउस उत्तर भारत का एकलौता, उन्नत पोली हाउस है। यह पूरी तरह ऑटोमेटिक तकनीक से संचालित है जिसमें बिना मिट्टी के पानी और सूर्य की रोशनी की सहायता से पौधों का नैसर्गिक वृद्धि कराया जाता है।

विश्वविद्यालय के नामकुम स्थित स्थायी कैंपस में 20 एकड़ भूमि पर कृषि कार्य किया जाता है जिसमें छात्रों की सीधी भागीदारी होती है । कैंपस में औषधीय पौधों के साथ फूलों की खेती कों बढ़ावा दिया जाता है। सीनियर फेकल्टी के नेतृत्व में फार्म मैनेजर के द्वारा नियमित छात्रों को पेड़- पौधों और फसलों में होने वाले बदलावों से अवगत कराने का कार्य किया जाता है।

झारखण्ड राय विश्वविद्यालय में सैधांतिक समझ के साथ साथ प्रैक्टिकल एडुकेशन पर ज्यादा जोर दिया जाता है। पढाई के 4 वर्षों के दौरान छात्रों कों मेंटरशीप प्रोग्राम से जोड़ कर इन्डस्ट्रीयल टूर, रूरल एग्रीकल्चर एक्सटेंशन वर्क एक्सपीरिएंस, एडुकेशनल टूर, फार्म विजिट, सेमिनार, वर्कशॉप, गेस्ट लेक्चर, ऑफ लाइन और ऑनलाइन शिक्षा, लाइफ स्किल ट्रेनिंग देकर इंडस्ट्री रेडी बनाया जाता है । सफलतापूर्वक पढाई पुरी करने पर यूनिवर्सिटीप्लेसमेंट सेल इन्हें नौकरी प्राप्त करने में भी सहायता प्रदान करता है।यूनिवर्सिटी ने स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए कैम्पस में इनोवेशन सेल और लैब भी स्थापित किया है।यूनिवर्सिटी के कई छात्र कृषि क्षेत्र में खुद का उद्यम स्थापित करके अपने और दूसरों की आजीविका का प्रबंध कर रहे हैं।

ABC of artificial intelligence

आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की ABCD

बच्चों को A फॉर एप्पल और B फॉर बॉय सिखाने के दिन पुराने पड़ चुके है। आज बच्चे A फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, B फॉर बिग डेटा, R फॉर रोबोटिक्स और M फॉर मशीन लर्निंग जैसे शब्दों से परिचित है । यह सब उनके सिलेबस का हिस्सा है। मशीनों ने दुनिया को बदल कर रख दिया है इस कारण बच्चों की दुनिया बदली है इससे कोई भी अछूता नहीं रह सकता है।

आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की ABCD :

A : आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस
इंसानों ने तकनीक का इजाद किया। लेकिन बुद्धिमान मशीनों से इंसान को पीछे छोड़ दिया है।

B: बायस
मशीनें भेद भाव कर सकती है यह सुन कर विश्वास नहीं होता लेकिन यह भेदभाव कई अर्थों में सामने आया है जो मानव को सोचने पर मजबूर करता है। मशीनों में जो डेटा फीड होता है वह एल्गोरिदम की बुनियाद पर काम करता है। बनाने वालों ने इनके साथ भी भेदभाव किया। मर्दों और औरतों के बीच भेद भाव और गोरे और काले रंग वालों के बीच भेद भाव करना बड़ी समस्या बनकर उभरा है।

C: चैटबॉट
मशीनें इंसानों की तरह बातें करती हैं ।यह संभव हो पाता है नैचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग और नैचुरल लैंग्वेज जेनरेशन भाषा के जरिये।। इसे ही चैटबॉट मशीनें कहते हैं।

D : डिज़ाइन
डिज़ाइनिंग एक चुनौती भरा और समयसाध्य कार्य है। आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस ने इस काम को ज़्यादा तेज़ी और बेहतर तरीक़े से करना शुरू किया है। बड़ी कंपनियाँ तो नए डिज़ाइन और पार्ट्स बनाने के लिए आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस का ही इस्तेमाल कर रही हैं।

E: इमरजेंसी
आपात स्थिति से निपटने और चेतावनी देने में इसकी भूमिका प्रमुख है। ये मशीनें न्यूज़ रिपोर्ट का आकलन करके ये बता सकेंगी की किस इलाक़े में तनाव पैदा होने वाला है।

F: फ़ुटबॉल
खेल के मैदान में आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमालकरने का प्रयास जारी है। इसके ज़रिए यह आकलन संभव हो सकेगा कि कौन सा ख़िलाड़ी खेल के मैदान में कौन सा अगला दांव चलने वाला है।

G: जेनेरेटिव एडवर्सरियल नेटवर्क
पिक्चर के साथ किये जाने वाले छेड़छाड़ को लेकर अक्सर शिकायत मिलती रहती है। आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की मदद से इसे रोका जा सकता है।जेनेरेटिव एडवरसरियल नेटवर्क के ज़रिए नई तस्वीरें बनाई जा सकेगी ।

H: हैलुसिनेशन
इंसानी दिमाग अक्सर मतिभ्रम या ग़लतफ़हमी के शिकार होता है। मशीनें भी इससे अछूती नहीं है। मशीनों की यह गलती बड़ी दुर्घटनाओं को आमंत्रित करती है। एआई के सहयोग से इन्हें रोका जा सकता है।

I: इमैजिनेशन
कल्पना मनुष्य का स्वाभाविक गुण है। कल्पना का सहारा लेकर किसी भी कार्य को मूर्त रूप देने का प्रयास किया जाता है। किसी भी चीज़ को देखने का मशीन का नज़रिया इंसान से अलग होता है वो कई मायनों में हम से बेहतर भी। फाइन आर्ट्स के सेक्टर में मशीनों का सहयोग हैरान करने वाला साबित होगा।

J: जाम
ट्रैफ़िक जाम से निपटने के लिए AI का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है। आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस इसके इस्तेमाल से पता लगाया जा सकता है कि कहाँ जाम लग सकता है और उसे कंट्रोल कैसे किया जा सकता है।

K: निटिंग
फैशन और टेक्सटाइल इंडस्ट्री भी AI से अछूती नहीं है। कढ़ाई बुनाई के कामों में भी इसका बखूबी इस्तेमाल किया जा रहा है। स्काईनिट की मदद से बुनाई के ऐसे पैटर्न तैयार किए गए हैं, जो अपने आप में अद्भुत हैं।

L : लैंग्वेज
भाषा संचार का सर्वोत्तम साधन है। अंग्रेजी भाषा के वैश्विक पहचान के पीछे व्यापक स्वीकार्यता शामिल है। अक़्लमंद मशीनों की अपनी ज़बान होती है । मशीनी भाषा ने कंप्यूटर को एक अलग पहचान दिलायी।

M : मशीन लर्निंग
मशीन को एक छोटी सी चीज़ सिखाने के लिए ढेर सारा डेटा फीड करना पड़ता है। आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस वाली मशीनों की डिज़ाइनिंग ऐसी हैं कि वो इंसान की तरह जानकारियां इकट्ठा करें।

O: ओरेकल
इंसान की नज़र से तेज़ काम मशीनें करती हैं। आर्टिफ़िशयल इंटेलिजेंस की मदद से आंखों की बीमारियां और कैंसर जैसी बीमारियों के लक्षण उसके पनपने के पहले ही भांप लिए जाते हैं। अल्ज़ाइमर जैसी बीमारी की भविष्यवाणी संभव हो पाया है।

P: पुलिसिंग
चोर पुलिस के खेल में अपराधी अक्सर सबूतों और पहचान के आभाव में बरी हो जाते है। दुनिया भर में अपराधियों को पकड़ने के लिए आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की मदद ली जा रही है। अपराधियों के चेहरे के किसी हिस्से की पहचान कर उन्हें पकड़ने का प्रयोग किया जा रहा है। न्याय प्रक्रिया को सरल बनाने बेहतर बनाने में भी इसका बेहतर इस्तेमाल हो रहा है।

Q: क्वेक
भूकंप प्राकृतिक आपदा है जिसकी भविष्यवाणी असंभव है। अब ऐसी मशीनें बनाई जा रही हैं जो भूकंप के बाद आने वाले झटकों की जगह बता सकती हैं । इससे बड़े पैमाने पर होने वाले नुकसान को रोका जा सकता है।

R: रैप
विदेशों में संगीत की दुनिया में अजीब चलन है। गानों के बीच में तेज़ गति से डायलॉग बोले जाते हैं। इसे सरल भाषा में रैप कहते हैं। रैप इतनी तेज़ी से बोला जाता है कि इसके बोल आसानी से पकड़ में नहीं आते लेकिन आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस से इस काम को आसान बनाने की कोशिश की जा रही है।

S: स्मार्ट होम
जो देश तकनीकी रूप से ज़्यादा एडवांस हैं, वहां घर के बहुत से काम मशीन की मदद से होते है। आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की मदद से उन मशीन को ऑन-ऑफ़ किया जा सकता है, जिनके इस्तेमाल की ज़रूरत नहीं है। बिजली की खपत को रोकने में यह कारगर उपाय है।

T: टुरिंग टेस्ट
आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस का दायरा मापने के लिए टुरिंग टेस्ट सबसे विश्वसनीय माना जाता है. इस टेस्ट के मुताबिक़ मशीन की क़ाबिलियत की बुनियाद है कि वो किस हद तक बातों के ज़रिए इंसान को बेवकूफ़ बना सकती हैं.

V: वाइनयार्ड
यूरोप और अमरीका में किसानों की मदद के लिए आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल किया जा रहा है। अंगूर की खेती में इसका ख़ूब इस्तेमाल हो रहा है। आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस का दायरा मापने के लिए टुरिंग टेस्ट सबसे विश्वसनीय माना जाता है. इस टेस्ट के मुताबिक़ मशीन की क़ाबिलियत की बुनियाद है कि वो किस हद तक बातों के ज़रिए इंसान को बेवकूफ़ बना सकती हैं ।

W: वाइल्डलाइफ
जंगलों में भारी मात्रा में क़ीमती संपदा मौजूद है, जिसकी बड़े पैमाने पर चोरी और तस्करी होती है। दुर्लभ जाति के जानवरों का शिकार भी ख़ूब होता है। हालांकि इस पर नज़र रखने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल काफ़ी समय से हो रहा है ।

X: एक्स-रेटेड
इंसान की जिस्मानी ज़रूरतें पूरा करने में भी मशीनें अहम किरदार निभा रही हैं और सेक्स इंडस्ट्री में इनका बड़ा रोल है। आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल से अब इस पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है।

Y: यमी
अगर रसोई में खाना बनाने का मन ना हो तो इसके लिए भी अब आपके पास विकल्प हैं। आप आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के ज़रिए खाना बना सकते हैं। बुद्धिमान मशीनें आपके दिए गए कमांड के अनुसार आपके पसंद का खाना बनाकर तैयार कर देगीं।

Z : यानी ज़ू
सर्दी के मौसम में चिड़ियाघरों में सेंसर वाले हीटर लगाए जाते हैं जो जानवर के शरीर की ज़रूरत के मुताबिक़ उसके लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर देते हैं।

Webinar Civil

Expert Talk: “Indian Steel Industry – A Perspective & Indigenous Stride in Capacity Build-up”

Speaker: Mr. Sidhartha Chakravarty
Advisor to M/s NMDC Limited Hyderabad a NavaRatna PSU &
Ex- Executive Director (Technical Services) in MECON, Ranchi.

Date: September 20, 2020 / Time: 5.00 pm

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Meeting Platform: WebexMeet

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Organized by Department of Mechanical Engineering

OUTREACH PROGRAM

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी को आईआईआरएस-इसरो आउटरीच नेटवर्क सेंटर के तौर पर मान्यता

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ रिमोट सेंसिंग (आईआईआरएस) और इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गेनाईजेशन (इसरो) द्वारा संचालित आउटरीच प्रोग्राम के तहत झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी, रांची को आईआईआरएस नेटवर्क सेंटर के तौर पर मान्यता प्राप्त हुई है। आईआईआरएस और इसरो द्वारा संयुक्त रूप से चलाये जा रहे ऑनलाइन डिस्टेंस लर्निंग प्रोग्राम में झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी रांची के बीटेक कंप्यूटर साइंस के स्टूडेंट शशिकांत प्रसाद और फैकल्टी मेंबर प्रोफेसर कुमार अमरेंद्र ने “सैटेलाइट फोटोग्राममेट्री एंड इट्स एप्लीकेशन” विषय पर संचालित 1 सप्ताह के ई लर्निंग कोर्स को सफलतापूर्वक पूरा करते हुए प्रमाणपत्र प्राप्त किया है। इसरो से प्राप्त प्रमाणपत्र में विश्वविद्यालय को आईआईआरएस आउटरीच नेटवर्क सेंटर के तौर पर मान्यता दिया है। विश्वविद्यालय के डिपार्टमेंट ऑफ़ कंप्यूटर साइंस एंड इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी की कोर्स कोर्डिनेटर प्रो. अनुराधा शर्मा को इसका नोडल अधिकारी भी बनाया गया है। उन्हें इस के लिए प्रमाणपत्र भी प्राप्त हुआ है।

विश्वविद्यालय के नोडल सेंटर बनने और सफलतापूर्वक प्रमाणपत्र प्राप्त करने पर यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रार ड़ॉ पियूष रंजन ने कंप्यूटर साइंस डिपार्टमेंट एवं प्रमाणपत्र प्राप्त करने वाले स्टूडेंट और फैकल्टी मेंबर की सफलता पर हर्ष व्यक्त किया है। डॉ. रंजन ने विश्वविद्यालय को आईआईआरएस आउटरीच नेटवर्क सेंटर के तौर पर मान्यता दिए जाने पर भी ख़ुशी जाहिर किया। “उन्होंने कहा की वर्तमान समय में ऑनलाइन शिक्षा ने दूरियों की बादयता को समाप्त कर दिया है। ई प्लेटफॉर्म के उपयोग से सभी को मुक्त और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलना बेहद सरल होगया है। अपने दायित्वों को समझे हुए विश्वविद्यालय द्वारा भी इस ओर कार्य किया जा रहा है।“

इस विषय की जानकारी विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी प्रशांत जयवर्धन ने दी।

बीबीए इन लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट: बने सप्लाई के एक्सपर्ट

Q. लॉजिस्टिक्स किसे कहते है। इस शब्द की उत्पति कैसे हुई ?
Ans. लॉजिस्टिक्स शब्द की उत्पत्ति सेना में हुई थी। लॉजिस्टिक्स शब्द का उपयोग सैनिकों को उपकरण और आपूर्ति प्राप्त करने की प्रक्रिया के लिए किया जाता था। 1950 के दशक तक, जब व्यवसायों के लिए शिपिंग सामग्री की जटिलता बढ़ गई थी, तब तक यह ‘रसद’ व्यावसायिक कार्यों के लिए संदर्भित नहीं था। अब, रसद एक उद्योग है और किसी भी व्यवसाय मॉडल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है; यह किसी व्यवसाय में माल के प्रवाह और भंडारण का नियंत्रण है।अर्थात ग्राहकों को माल परिवहन की आर्थिक गतिविधि या कहें सैनिकों के लिए रसद समार्गी अभियान, उपकरण और आवास की व्यवस्था करने का विज्ञान।

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Q. लॉजिस्टिक्स में होता क्या है ?
Ans. लॉजिस्टिक्स एक कंपनी या प्रोडक्ट डिलीवरी से जुड़े भीतर की गतिविधियों को करता है। इसमें ओपनिंग प्रोडक्शन से फाइनल डिलीवरी तक शामिल है। दूसरी भाषा में कहें तो लॉजिस्टिक्स प्रोडूसर को संतुस्ट करती है की उसके द्वारा मंगाया गया सामान काम समय और उचित खर्चे में उसके पास पहुंचेगा। लॉजिस्टिक्स प्रबंधन प्रक्रिया कच्चे माल के संचय से शुरू होती है जो गंतव्य तक माल पहुंचाने के अंतिम चरण में होती है। ग्राहकों की जरूरतों और उद्योग मानकों का पालन करके, रसद प्रबंधन प्रक्रिया की रणनीति, योजना और कार्यान्वयन की सुविधा प्रदान करता है।

Q. लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन मैनेजमेंट कैसे अलग हैं?
Ans. लॉजिस्टिक्स का तात्पर्य किसी कंपनी के भीतर के कार्यों से है। जैसे : डिस्ट्रीब्यूटर को कच्चे माल की खरीद और डिलीवरी। पैकेजिंग , शिपमेंट। परिवहन इत्यादि। जबकि सप्लाई चेन मैनेजमेंट में बाहरी संगठनों का नेटवर्क है जिसमें वेंडर, ट्रंसपोटशन प्रोवाइडर, वेयरहाउस प्रोवाइडर, कॉल सेंटर और प्रोडक्ट डिलीवरी देने वाले वाले कार्य एक साथ किये जाते है।

Q. लॉजिस्टिक्स क्यों महत्वपूर्ण है ?
Ans. छोटे वयवसाय और ग्राहकों की जरुरत को पूरा करने के लिए। उत्पाद अगर समय पर ग्राहक तक नहीं पहुंचा तो व्यापार विफल हो जायेगा। लॉजिस्टिक्स में कुशलता के साथ कच्चे माल खरीदना उपयोग किये जाने तक स्टोर करके रखना और अधिक समय तक लाभदायक बनाकर रखना होता है।

Q.बीबीए इन लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट कोर्स क्या है ?
Ans. बीबीए इन लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट 3 वर्षीय कोर्स है जिसे उद्योग जगत की आवशयकता को ध्यान में रखते हुए संचालित किया जा रहा है। यह कोर्स उनकी जरूरतों को पूरा करते हुए स्किल्ड फोर्स उपलब्ध करता है। बीबीए इन लॉजिस्टिक पाठ्यक्रम के दौरान स्टूडेंट्स को लॉजिस्टिक्स इंडस्ट्री में कार्य करने के लिए पूरी तरह तैयार किया जाता है जिनमें स्किल और ऐटिट्यूड, लाइफ स्किल, क्लास रूम लर्निंग, इंटर्नशिप के साथ 18 महीने का इंडस्ट्री एक्सपीरिएंस/ ऑन जॉब ट्रेनिंग, स्कॉलरशिप और प्लेसमेंट शामिल है।

Q. लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट क्यों इम्पोर्टेन्ट है ?
Ans. लॉजिस्टिक का क्षेत्र काफी विस्तृत है। वेयर हाउसिंग सिस्टम, डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम भी इसके हिस्से हैं। यहां काम करने वाले प्रोफेशनल को इन सारे कार्यों की जानकारी होनी चाहिए। इसके अलावा लेबर मैनेजमेंट, कस्टमर को-ऑर्डिनेशन, पर्चेजिंग जैसे क्षेत्र भी लॉजिस्टिक के अंतर्गत आते हैं। लॉजिस्टिक मैनेजमेंट किसी भी कारोबार, संगठन या व्यक्ति विशेष के लिए आवश्यक सामग्री या कच्चे माल की आपूर्ति करता है । कोई भी उत्पाद या सेवा या कच्चे माल की मांग और आपूर्ति में संतुलन बना रहे यह देखना और उपभोक्ता की संतुष्टि भी देखना उसका काम होता है। माल की सही डिलीवरी उसे सुनिश्चित करना होता है। उदाहरण के लिए भारत के आम, चीन के इलेक्ट्रिक सामान, इटली के ऑलिव ऑयल, अमेरिकन चॉकलेट, अरब के खजूर, जर्मनी की कारें या फिर अलग-अलग जगहों के स्पेशल आइटम्स अगर आज सरलता से हमारे स्टोर्स में उपलब्ध हैं तो इसके पीछे सबसे अहम रोल लॉजिस्टिक का ही होता है।

Q. बीबीए इन लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट क्यों करें ?
Ans. ई-कॉमर्स कंपनियों के बढ़ते कारोबार के चलते लॉजिस्टिक्स में कॅरियर के नए-नए ऑप्शन सामने आ रहे हैं। विगत कुछ वर्षों में ई-कॉमर्स कंपनियां भरपूर बिजनेस कर रही हैं। इस बिजनेस में लॉजिस्टिक कंपनियों की भूमिका नजरअंदाज नहीं की जा सकती। जबसे इंटरनेट के संसार में ई-कॉमर्स कंपनियों ने लोगों के बीच पैठ बनाई है, कई अन्य क्षेत्र भी रोजगार के लिए खुल गए हैं। इनमें लॉजिस्टिक और डिलीवरी का क्षेत्र सबसे अहम है। भारत की विशाल आबादी और ई-कॉमर्स कंपनियों के तेज विकास के कारण यह क्षेत्र तीव्र विकास कर रहा है। अभी भारत में लॉजिस्टिक इंडस्ट्री 130 अरब से ज्यादा की आंकी गई है। इसमें ग्रोथ भी जबर्दस्त है। कोई भी व्यक्ति, जो कम्युनिकेशन स्किल और मेहनत करने में यकीन रखता है, थोड़े प्रयासों से इस क्षेत्र में रोजगार हासिल कर सकता है। एक कस्बाई इलाके से लेकर दुनिया भर के मेटेपॉलिटन शहरों में भी काम के अवसर हैं। देश-विदेश में इसके प्रोफेशनल्स की डिमांड है।

एक लॉजिस्टिक मैनेजर की सैलरी कंपनी के आकार पर काफी निर्भर करती है। शुरुआत में 10 से 15 हजार सैलरी आसानी से मिल जाती है। कुछ अनुभव के बाद ही 20 से 50 हजार सैलरी हो जाती है, जो आगे चलकर एक लाख प्रतिमाह तक हो सकती है।

Q. कहाँ से करें यह कोर्स ?
Ans. झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी, रांची ने लॉजिस्टिक्स सेक्टर स्किल कौंसिल(एलएसएससी) से एमओयू करते हुए 3 वर्षीय बीबीए इन लॉजिस्टिक्स पाठ्यक्रम शुरू किया है। यह पाठ्क्रम पूर्णकालिक रोजगारपरक कार्यक्रम है जिसे केंद्रीय उच्च शिक्षा मंत्रालय (एमएचआरडी) और कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) के मार्गदर्शन में चलाया जा रहा है। यह पाठ्यक्रम उद्योग जगत की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए उसकी जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रारंभ किया गया है।

    हाई लाइट्स ऑफ़ द कोर्स

  • सरकार के उच्च शिक्षा मंत्रालय और कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय द्वारा संचालित।
  • इंडस्ट्रियल सेक्टर की जरूरतों को पूरा करने वाला।
  • स्किल्ड और इंडस्ट्री रेडी बनाने में मददगार ।
  • लाइफ स्किल्स और पर्सनालिटी डेवलपमेंट ।
  • पढ़ाई के दौरान 18 महीने का औद्योगिक प्रशिक्षण।
  • प्रत्येक प्रशिक्षण समाप्त होने पर सरकार द्वारा प्रमाणपत्र।
  • औद्योगिक प्रशिक्षण के कार्य अनुभव को मान्यता।
  • औद्योगिक प्रशिक्षण के दौरान 9000-15000 छात्रवृति सुविधा।
  • ग्रामीण छात्रों के लिए रोजगार प्राप्त करने का सुनहरा अवसर।
  • लॉजिस्टिक्स सेक्टर स्किल कौंसिल द्वारा नौकरी की सुविधा।
  • स्टार्टअप्स और इंटरप्रेन्योर बनने का अवसर।
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एनइपी 2020 : वॉट टू थिंक नहीं हाऊ टू थिंक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हायर एजुकेशन पर हुए कॉन्क्लेव में नई शिक्षा नीति पर कहा है कि अब वॉट टू थिंक नहीं बल्कि हाऊ टू थिंक पर फोकस किया जा रहा है।सरकार ने 30 जुलाई को नई शिक्षा नीति घोषित की थी। इसमें स्कूलों के एडमिनिस्ट्रेशन को लेकर बड़े बदलाव किए गए हैं। ऑनलाइन एजुकेशन को बढ़ावा दिया जाएगा। पढ़ाई के पैटर्न में 10 साल के अंदर धीरे-धीरे बदलाव किए जाएंगे।

https://www.jru.edu.in/blog-post/new-education-policy-2020-approved-after-34-years/

प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन की 10 बातें :

  1. बदलाव के लिए पॉलिटिकल विल जरूरी:
    मोदी ने शिक्षा नीति बनाने वाले एक्सपर्ट से कहा कि यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि इतना बड़ा रिफॉर्म जमीन पर कैसे उतारा जाएगा। इस चैलेंज को देखते हुए व्यवस्थाओं को बनाने में जहां कहीं कुछ सुधार की जरूरत है, वह हम सभी को मिलकर करना है। आप सभी राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने में सीधे तौर पर जुड़े हैं। इसलिए आप सब की भूमिका बहुत अहम है।
  2. नेशनल वैल्यूज के साथ लक्ष्य :
    हर देश अपनी शिक्षा व्यवस्था को नेशनल वैल्यूज के साथ जोड़ते हुए और नेशनल गोल्स के अनुसार रिफॉर्म्स करते हुए आगे बढ़ता है, ताकि देश का एजुकेशन सिस्टम वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों का फ्यूचर तैयार कर सके। भारत की पॉलिसी का आधार भी यही सोच है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 21वीं सदी के भारत की फाउंडेशन तैयार करने वाली है।
  3. नई नीति में स्किल्स पर फोकस:
    21वीं सदी के भारत में हमारे युवाओं को जो स्किल्स चाहिए, राष्ट्रीय शिक्षा नीति में इस पर विशेष फोकस है। भारत को ताकतवर बनाने के लिए, विकास की नई ऊंचाई पर पहुंचाने के लिए इस एजुकेशन पॉलिसी में खास जोर दिया गया है। भारत का स्टूडेंट चाहे वो नर्सरी में हो या फिर कॉलेज में, तेजी से बदलते हुए समय और जरूरतों के हिसाब से पढ़ेगा तो नेशन बिल्डिंग में कंस्ट्रक्टिव भूमिका निभा पाएगा।
  4. https://www.jru.edu.in/blog-post/first-green-house-research-center-in-jharkhand-state-located/

  5. इनोवेटिव थिंकिंग पर जोर:
    बीते कई साल से हमारे एजुकेशन सिस्टम में बदलाव नहीं हुए, जिससे समाज में क्यूरोसिटी और इमेजिनेशन की वैल्यू को प्रमोट करने के बजाय भेड़ चाल को बढ़ावा मिलने लगा था। जब तक शिक्षा में पैशन और परपज ऑफ एजुकेशन नहीं हो, तब तक हमारे युवाओं में क्रिटिकल और इनोवेटिव थिंकिंग डेवलप कैसे हो सकती है?
  6. होलिस्टिक अप्रोच की जरूरत :
    बीते कई साल से हमारे एजुकेशन सिस्टम में बदलाव नहीं हुए, उच्च शिक्षा हमारे जीवन को सद्भाव में लाती है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति का बड़ा लक्ष्य इसी से जुड़ा है। इसके लिए टुकड़ों में सोचने की बजाय होलिस्टिक अप्रोच की जरूरत है।शुरुआती दिनों में सबसे बड़े सवाल यही थे कि हमारी शिक्षा व्यवस्था युवाओं को क्यूरोसिटी और कमिटमेंट के लिए मोटिवेट करती है या नहीं? दूसरा सवाल था कि क्या शिक्षा व्यवस्था युवाओं को एम्पावर करती है? देश में एक एम्पावर सोसाइटी बनाने में मदद करती है? पॉलिसी बनाते समय इन सवालों पर गंभीरता से काम हुआ।
  7. 10+2 से आगे निकले :
    एक नई विश्व व्यवस्था खड़ी हो रही है। एक नया स्टैंडर्ड भी तय हो रहा है। इसके हिसाब से भारत का एजुकेशन सिस्टम खुद में बदलाव करे, ये भी किया जाना बहुत जरूरी था। स्कूल करिकुलम के 10+2 से आगे बढ़ना इसी दिशा में एक कदम है। हमें अपने स्टूडेंट्स को ग्लोबल सिटीजन भी बनाना है, साथ ही ध्यान रखना है कि वे जड़ों से भी जुड़े रहें। घर की बोली और स्कूल में पढ़ाई की भाषा एक होने से सीखने की गति बेहतर होगी।
  8. https://www.jru.edu.in/blog-post/jharkhand-rai-university-ke-11-diploma-students-ka-chayan/

  9. हाउ टू थिंक पर जोर :
    अभी तक की व्यवस्था में वॉट यू थिंक पर फोकस रहा है, जबकि नई नीति में हाऊ टू थिंक पर जोर दिया जा रहा है। हर तरह की जानकारी आपके मोबाइल पर है, लेकिन जरूरी ये है कि क्या जानकारी अहम है। नई नीति में इस बात पर ध्यान रखा गया है। ढेर सारी किताबों की जरूरत को खत्म करने पर जोर दिया गया है। इन्क्वायरी, डिस्कवरी, डिस्कशन और एनालिसिस पर जोर दिया जा रहा है। इससे बच्चों में सीखने की ललक बढ़ेगी। हर छात्र को यह मौका मिलना ही चाहिए कि वह अपने पैशन को फॉलो करे।
  10. रीस्किल-अपस्किल से प्रोफेशन बदल सकेंगे :
    अक्सर ऐसा होता है कि कोई कोर्स करने के बाद स्टूडेंट जॉब के लिए जाता है तो पता चलता है कि जो पढ़ा वो जॉब की जरूरतों को पूरा नहीं करता। इन जरूरतों का ख्याल रखते हुए मल्टीपल एंट्री-एग्जिट का ऑप्शन दिया गया है। स्टूडेंट वापस अपने कोर्स से जुड़कर जॉब की जरूरत के हिसाब से पढ़ाई कर सकता है।
    कोई कोर्स बीच में छोड़कर दूसरे में एडमिशन लेना चाहे तो यह भी संभव है। हायर एजुकेशन को स्ट्रीम से मुक्त कर देना, मल्टीपल एंट्री और एग्जिट के पीछे लंबी दूरी की सोच के साथ हम आगे आए हैं। उस युग की तरफ बढ़ रहे हैं, जहां कोई व्यक्ति जीवनभर किसी एक प्रोफेशन में नहीं टिका रहेगा। इसके लिए उसे लगातार खुद को रीस्किल और अपस्किल करते रहना होगा।
  11. रिसर्च और एजुकेशन का गैप होगा खत्म :
    कोडिंग पर फोकस हो या फिर रिसर्च पर ज्यादा जोर, ये सिर्फ एजुकेशन सिस्टम ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की अप्रोच को बदलने का जरिया बन सकता है। वर्चुअल लैब जैसे कंसेप्ट लाखों साथियों के पास बेहतर शिक्षा को ले जाने वाला है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति रिसर्च और एजुकेशन के गैप को खत्म करने में भी अहम भूमिका निभाने वाली है। आज इनोवेशन और एडेप्शन की जो वैल्यू हम समाज में निर्मित करना चाहते हैं वो हमारे देश के इंस्टीट्यूशंस से शुरू होने जा रही है।
  12. टीचर सीखेंगे तो देश बढ़ेगा :
    भारत का टैलेंट भारत में ही रहकर आने वाली पीढ़ियों का विकास करे, इस पर जोर दिया गया है। टीचर्स ट्रेनिंग पर बहुत फोकस है। आई बिलीव वेन ए टीचर लर्न, ए नेशन लीड। राष्ट्रीय शिक्षा नीति सिर्फ एक सर्कुलर नहीं है, इसके लिए मन बनाना होगा। भारत के वर्तमान और भविष्य को बनाने के लिए यह एक महायज्ञ है। 21वीं सदी में मिला बहुत बड़ा अवसर है।
education system

34 साल बाद नई शिक्षा नीति 2020 को मंजूरी

नई शिक्षा नीति-2020 को कैबिनेट की मंज़ूरी मिल गई है। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक और सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने प्रेस वार्ता कर इसकी जानकारी दी ।

इससे पहले 1986 में शिक्षा नीति लागू की गई थी. 1992 में इस नीति में कुछ संशोधन किए गए थे. यानी 34 साल बाद देश में एक नई शिक्षा नीति लागू की जा रही है।

पूर्व इसरो प्रमुख के कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में विशेषज्ञों की एक समिति ने इसका मसौदा तैयार किया था, प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने इसे मंज़ूरी दी।

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नई शिक्षा नीति 2020 की मुख्य बातें :

  • मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदल कर शिक्षा मंत्रालय कर दिया गया है ।
  • नई शिक्षा का लक्ष्य 2030 तक 3-18 आयु वर्ग के प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करता है।
  • छठी क्लास से वोकेशनल कोर्स शुरू किए जाएंगे। इसके लिए इसके इच्छुक छात्रों को छठी क्लास के बाद से ही इंटर्नशिप करवाई जाएगी ।इसके अलावा म्यूज़िक और आर्ट्स को बढ़ावा दिया जाएगा।इन्हें पाठयक्रम में लागू किया जाएगा।
  • उच्च शिक्षा के लिए एक सिंगल रेगुलेटर रहेगा (लॉ और मेडिकल एजुकेशन को छोड़कर)। यानी अब यूजीसी और एआईसीटीई समाप्त कर दिए जाएंगे और पूरे उच्च शिक्षा के लिए एक नेशनल हायर एजुकेशन रेगुलेटरी अथॉरिटी का गठन किया जाएगा।
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  • पहली बार मल्टीपल एंट्री और एग्ज़िट सिस्टम लागू किया गया है। इसे इस तरह समझ सकते हैं:- आज की व्यवस्था में अगर चार साल इंजीनियरिंग पढ़ने या छह सेमेस्टर पढ़ने के बाद किसी कारणवश आगे नहीं पढ़ पाते हैं तो आपके पास कोई उपाय नहीं होता, लेकिन मल्टीपल एंट्री और एग्ज़िट सिस्टम में एक साल के बाद सर्टिफ़िकेट, दो साल के बाद डिप्लोमा और तीन-चार साल के बाद डिग्री मिल जाएगी. इससे उन छात्रों को बहुत फ़ायदा होगा जिनकी पढ़ाई बीच में किसी वजह से छूट जाती है।
  • उच्च शिक्षा में कई बदलाव किए गए हैं. जो छात्र रिसर्च करना चाहते हैं उनके लिए चार साल का डिग्री प्रोग्राम होगा। जो लोग नौकरी में जाना चाहते हैं वो तीन साल का ही डिग्री प्रोग्राम करेंगे. लेकिन जो रिसर्च में जाना चाहते हैं वो एक साल के एमए (MA) के साथ चार साल के डिग्री प्रोग्राम के बाद सीधे पीएचडी (Ph.D) कर सकते हैं। उन्हें एमफ़िल (M.Phil) की ज़रूरत नहीं होगी।
  • शोध करने के लिए नेशनल रिसर्च फ़ाउंडेशन (एनआरएफ़) की स्थापना की जाएगी. एनआरएफ़ का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालयों के माध्यम से शोध की संस्कृति को सक्षम बनाना होगा. एनआरएफ़ स्वतंत्र रूप से सरकार द्वारा, एक बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स द्वारा शासित होगा।
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  • उच्च शिक्षा संस्थानों को फ़ीस चार्ज करने के मामले में और पारदर्शिता लानी होगी।
  • ई-पाठ्यक्रम क्षेत्रीय भाषाओं में विकसित किए जाएंगे. वर्चुअल लैब विकसित की जा रही है और एक राष्ट्रीय शैक्षिक टेक्नोलॉजी फ़ोरम (NETF) बनाया जा रहा है।
  • उच्च शिक्षा में 2035 तक 50 फ़ीसद GER (Gross Enrolment Ratio) पहुंचाने का लक्ष्य है।
Job-Interview

12 वीं के बाद चाहिए जॉब: इन कोर्सेज में है जॉब की गारंटी

बारहवीं के रिजल्ट जारी हो चुके हैं। जैक बोर्ड, सीबीएसई, आईसीएसई बोर्ड द्वारा आयोजित होने वाली परीक्षाओं के परिणाम घोषित हो चुके हैं। बारहवीं के बाद छात्रों के मन में सबसे बड़ा सवाल ये खड़ा होता है कि आगे वो किस क्षेत्र में अपना करियर बनाएं। भीड़ से अलग दिखने वाले कोर्सेज ही सफलता की गारंटी है जरुरी नहीं। पारंपरिक कोर्सेज आज भी लोकप्रिय और रोजगारपरक बने हुए है।एक नजर वैसे कोर्सेज पर जो बारहवीं के बाद आप कर सकते है जिनसे व्यक्तित्व तो निखरेगा ही, साथ ही अच्छे पैसे भी कमा सकते हैं।

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पारंपरिक कोर्स :

  • मास्टर ऑफ़ बिज़नेस एडमिनिस्ट्रेशन (एमबीए )
  • बैचलर ऑफ़ बिज़नेस एडमिनिस्ट्रेशन (बीबीए )
  • मास्टर ऑफ़ कंप्यूटर एप्लीकेशन (एमसीए )
  • बैचलर ऑफ़ कंप्यूटर एप्लीकेशन (बीसीए )
  • बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीटेक )
  • डिप्लोमा इन इंजीनियरिंग ( डीई )

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आज कल का ट्रेंड :
12 वीं के बाद रोजगार देने वाले कोर्स की बात करें तो आज भी एग्रीकल्चर और फार्मेसी अपना क्रेज बनाये हुए है। ये दोनों ही कोर्स मार्केट में अपनी मजबूत उपस्थिति रखते है और स्टूडेंट्स को आकर्षितकरते है।

  • डिप्लोमा इन फार्मेसी ( डी. फार्म )
  • बैचलर ऑफ़ फार्मेसी ( बी. फार्म )
  • बैचलर और साइंस इन एग्रीकल्चर (बीएससी एग्रीकल्चर )

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जरा हटके कोर्स :

  • माइनिंग इंजीनियरिंग
  • डिप्लोमा इन माइनिंग इंजीनियरिंग
  • बीटेक इन माइनिंग इंजीनियरिंग

10 वीं उत्तीर्ण छात्र डिप्लोमा में ले सकते है नामांकन

  • पोस्ट डिप्लोमा प्रैक्टिकल ट्रेनिंग ( पीडीपीटी) इन माइनिंग।
  • पोस्ट ग्रेजुएट प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (पीजीपीटी ) इन माइनिंग।
  • ओवरमैन सर्टिफिकेट ऑफ़ कॉम्पिटेंसी।
  • औद्योगिक प्रशिक्षण के दौरान 9000 तक छात्रवृति सुविधा।
  • इंटर्नशिप / ट्रेनिंग ( सीसीएल, एनसीएल, एचसीएल , इसीएल,बीसीसीएल, सेल टाटा स्टील)

बीबीए इन लॉजिस्टिक्स | हाई लाइट्स ऑफ़ द कोर्स :

  • सरकार के उच्च शिक्षा मंत्रालय और कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय द्वारा संचालित।
  • इंडस्ट्रियल सेक्टर की जरूरतों को पूरा करने वाला।
  • स्किल्ड और इंडस्ट्री रेडी बनाने में मददगार ।
  • लाइफ स्किल्स और पर्सनालिटी डेवलपमेंट ।
  • पढ़ाई के दौरान 18 महीने का औद्योगिक प्रशिक्षण।
  • प्रत्येक प्रशिक्षण समाप्त होने पर सरकार द्वारा प्रमाणपत्र।
  • औद्योगिक प्रशिक्षण के कार्य अनुभव को मान्यता।
  • औद्योगिक प्रशिक्षण के दौरान 9000-15000 छात्रवृति सुविधा।
  • ग्रामीण छात्रों के लिए रोजगार प्राप्त करने का सुनहरा अवसर।
  • लॉजिस्टिक्स सेक्टर स्किल कौंसिल द्वारा नौकरी की सुविधा।
  • स्टार्टअप्स और इंटरप्रेन्योर बनने का अवसर।
NCC exam

राज्य के पुलिस फोर्सेज परीक्षा में एनसीसी सर्टिफिकेट धारकों को मिलेगी वरीयता

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) में भारत के युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए एनसीसी सर्टिफिकेट धारकों को बोनस अंक देने का निर्णय लिया है. अब केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF), राज्य सशस्त्र बलों की परीक्षाओं में एनसीसी कैडेट को अलग से अंक दिए जाएंगे।

केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल में एनसीसी कैडेट होने का फायदा :

  • एनसीसी ‘C’ सर्टिफिकेट धारकों को परीक्षा के अधिकतम अंकों का 5% बोनस अंकों के रूप में दिया जाएगा।
  • एनसीसी ‘B’ सर्टिफिकेट धारकों को परीक्षा के अधिकतम अंकों का 3% बोनस अंकों के रूप में दिया जाएगा।
  • एनसीसी ‘A’ सर्टिफिकेट प्राप्त करने वालों को परीक्षा के अधिकतम अंकों का 2% बोनस अंकों के रूप में दिया जाएगा।

ऑनलाइन एक्सिबिशन ऑफ माइन आर्ट 2020 की झलकियां।

सीएपीएफ भर्ती में एनसीसी ‘ए’ प्रमाण पत्र धारकों को बोनस अंक देने की ये योजना उप निरीक्षक और कांस्टेबल (जीडी) के पदों के लिए आगामी सीधी भर्ती परीक्षा में लागू होगी। भारत सरकार सभी राज्य सरकारों से अपने संबंधित पुलिस बलों के लिए सीधी भर्ती परीक्षा में समान प्रावधान करने का भी आग्रह करेगी ताकि एनसीसी प्रमाणपत्र धारकों को उनके साथ जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके । केंद्रीय गृहमंत्री ने इस बारे में कहा कि ये निर्णय न केवल युवाओं को एनसीसी में शामिल होने के लिए प्रेरित करेगा, बल्कि सीएपीएफ को प्रशिक्षित और अनुशासित युवाओं की उपलब्धता भी सुनिश्चित करेगा ।

भारत को क्यों कहा जाता था विश्व गुरु ? एजुकेशन सेक्टर में कैसे बनेगें हम लोकल, वोकल- ग्लोबल ।

राष्ट्रीय कैडेट कोर का परिचय:

एनसीसी एक त्रिकोणीय सेवा संगठन है जिसमें सेना के तीनों विंग शामिल है- थल सेना नौसेना और वायु सेना। संगठन का आदर्श वाक्य ‘एकता और अनुशासन’ है, जिसके पालन से यह युवाओं को अनुशासित और देशभक्त नागरिकों के रूप में तैयार करता है। इसका गठन राष्ट्रीय कैडेट कोर अधिनियम, 1948 के तहत किया गया था. गृह मंत्रालय, भारत सरकार ने युवाओं को एनसीसी में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करने और देश की भलाई के लिए समर्पित तरीके से काम करने के लिए कई कदम उठाए हैं. सशस्त्र बलों के अधिकारियों की सेवा करके कैडेटों को एनसीसी में बुनियादी सैन्य और हथियार प्रशिक्षण दिया जाता है. उनकी प्रवीणता और निपुणता का समय-समय पर परीक्षण किया जाता है, जिसके बाद ही उन्हें प्रमाणपत्र से सम्मानित किया जाता है ।

इंडस्ट्री रेडी कोर्स – बीबीए इन लॉजिस्टिक : स्टार्टअप्स और उद्यमिता का अवसर।

एनसीसी सर्टिफिकेट:

एनसीसी में प्रथम स्तर से उत्तीर्ण होने पर कैडेट को ‘A’ प्रमाणपत्र से सम्मानित किया जाता है. वहीं दूसरे स्तर को उत्तीर्ण करने पर ‘B’ प्रमाणपत्र प्रदान किया जाता है. केवल वे कैडेट जिनके पास ‘बी’ प्रमाण पत्र है, वे ‘सी’ प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए पात्र होते है।

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी, रांची की ऑफिसियल वेबसाइट www.jru.edu.in के अलावा ब्लॉग के जरिये जानकारी प्राप्त करने के लिए लॉग इन करें https://www.jru.edu.in/my-campus-life/

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माइनिंग इंजीनियर बनकर सवारें अपना भविष्य

आज के युग में खनन और माइनिंग इंजीनियर (Mining Engineer) की मांग हर क्षेत्र में देखने को मिलती है क्योकि आजकल देश में ईंधन की खपत लगातार बढ़ रही है।

माइन (Mine) मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है – अंडर ग्राउंड माइन (Underground mine) और ओपेन-पिट माइन (Open-Pit Mine)

अंडरग्राउंड माइन (Underground Mine) में ही खनिज (Mineral) मिलते हैं, जिन्हें माइनिंग के द्वारा निकाला जाता है. अंडरग्राउंड माइन के माध्यम से सोने और कोयले को निकाला जाता है, इसके अलावा ओपन पिट माइनिंग (Open pit Mining) द्वारा आयरन (Iron) ओर लाइमस्टोन (limestone), मैग्नीज (Manganese) आदि को निकाला जाता है।

माइनिंग या खनन इंजीनियरिंग में कैरियर बनाने के लिए सबसे पहले उम्मीदवार का किसी मान्यताप्राप्त विद्यालय से साइंस स्ट्रीम में 12 वीं कक्षा पास करना अनिवार्य है। इसके बाद उम्मीदवार माइनिंग से डिप्लोमा(Diploma) बीटेक (B.Tech), बीई (B.E) और बीएससी (BSC) कोर्स कर सकते है। माइनिंग कोर्स के अन्तर्गत उम्मीदवार को ड्रिलिंग (Drilling), ब्लास्टिंग (Blasting), माइन कॉस्ट इंजीनियरिंग (Mine Cost Engineering), अयस्क रिजर्व विश्लेषण (Ore Reserve Analysis), ऑपरेशन विश्लेषण (Operation Analysis), माइन वेंटीलेशन (Main ventilation), माइन प्लानिंग (Mine Planning), माइन सेफ्टी (Mine Safety), रॉक मैकेनिक्स (Rock Mechanics), कम्प्यूटर एप्लीकेशन (Computer Applications), इंडस्ट्रियल मैनेजमेंट (Industrial Management) से सम्बंधित जानकारी दी जाती है।

पॉपुलर कोर्स

  1. डिप्लोमा इन माइनिंग इंजीनियरिंग
  2. बीटेक इन माइनिंग इंजीनियरिंग।

** माइनिंग इंजीनियरिंग करने वाले स्टूडेंट्स डिप्लोमा इन माइनिंग इंजीनियरिंग और बीटेक इन माइनिंग इंजीनियरिंग कोर्स को बेहद पसंद करते है। ये दोनों कोर्सेज में रोजगार के अवसर सालों भर मौजूद रहते है। बड़ी कंपनियां जैसे सीसीएल, बीसीसीएल,हिंडाल्को अपने यहाँ इंटर्न के अलावा मांइनिंग सरदार और अन्य पदों पर जॉब्स के लिए नियुक्तियां करती रहती है।

मुख्य रूप से इस कोर्स के तहत उम्मीदवार को खनिज पदार्थों की संभावनाओं का पता लगाना, उनके नमूने एकत्रित करना भूमिगत तथा भूतल खदानों का विस्तार और विकास करना, खनिजों को परिष्कृत करना आदि के बारे में जानकारी प्रदान की जाती है।

अवसर:

माइनिंग इंजीनियरिंग क्षेत्र मे रोजगार के अपार अवसर उपलब्ध है।एक माइनिंग इंजीनियर स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (Steel Authority of India Limited), कोल इंडिया लिमिटेड (Cole India Limited), आईबीपी लिमिटेड (IBP Ltd), आईपीसीएल (IPCL), नेवली लिग्नाइट कॉरपोरेशन (Nevali Lignite Corporation), यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (Uranium Corporation of India) में रोजगार पा सकते है।

** झारखंड में माइनिंग इंजीनियरिंग के टॉप 3 इंस्टिट्यूट

  • इंडियन स्कूल ऑफ माइंस, धनबाद
  • बिरसा इंस्टीटूट ऑफ टेक्नोलॉजी,झरिया, धनबाद
  • झारखंड राय यूनिवर्सिटी, रांची।

माइनिंग इंजीनियरिंग करने के बाद कौन – कौन सी कंपनियां देती हैं नौकरियां ?

माइनिंग इंजीनियरिंग के बाद कोल इंडिया लिमिटेड, टाटा स्टील, रियो टिनटो, वाइजैग स्टील, मोनेट इस्पात, वेदांता, एचजेडएल, एचसीएल, इलेक्ट्रोस्टील, द इंडियन ब्यूरो ऑफ माइनिंग, जियॉलजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, आईपीसीएल, नालको, अडानी माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियां नौकरिया प्रदान कराती है।

सैलरी:

माइनिंग इंजीनियरिंग कोर्स पूरा करने के बाद कैंडिडेट्स शुरुआत में 4 से 5 लाख रुपये सालाना कमा सकते हैं। आप जैसे-जैसे इस फील्ड में पुराने होते जाएंगे वैसे-वैसे इनकम भी बढ़ती जाएगी। इसी के साथ अगर आप रिसर्च कर रहे हैं तो ये इनकम और भी ज्यादा हो सकती है।

माइनिंग इंजीनियर बनने के लिए होने चाहिए ये स्किल्स :-

  • माइंस/खानों में काम करने के प्रति रुझान
  • मेहनत और मशक्कत करने में कोई परेशानी नहीं
  • लीडरशिप और श्रमिकों से काम करवाने की क्षमता
  • खदान की चुनौतीपूर्ण स्थितियों में किसी भी जोखिम का सामना करने का आत्मविश्वास
  • माइनिंग की तकनीकी और वैज्ञानिक अपडेटेड जानकारी
  • मैथ्स और फिजिक्स जैसे विषयों में दिलचस्पी