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बीटेक इन कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग : हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर का लिंग्विस्टिक

इन दिनों बीटेक इन कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग (CSE) भारत में इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स और यंग इंजीनियर्स के बीच सबसे लोकप्रिय कोर्सेज में से एक है। इसमें कंप्यूटर प्रोग्रामिंग और नेटवर्किंग के बेसिक एलिमेंट्स के बारे में अध्ययन किया जाता है। कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग करने वाले स्टूडेंट्स को हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के संबंध में इनफॉर्मेशन सिस्टम की डिजाइनिंग, इम्प्लीमेंटेशन और मैनेजमेंट के बारे में भी पढ़ाया जाता है। उन्हें कम्प्यूटेशन और कम्प्यूटेशनल सिस्टम्स के डिज़ाइन की थ्योरी के बारे में भी पढ़ाया जाता है। कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग का संबंध इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, मैथमेटिक्स और लिंग्विस्टिक्स से भी है।

कंप्यूटर इंजीनियरिंग को हम एक गठजोड़ कह सकते है। यह गठजोड़ कंप्यूटर साइंस और इलेक्ट्रिकल साइंस के साथ हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर नॉलेज को एक साथ जोड़ते हुए कंप्यूटिंग टाइप्स पर काम करता है।

वो यह देख पाते है की कैसे माइक्रोप्रोसेसर काम करता है। कैसे उनका डिजाईन किया जाता है और कैसे डेटा ट्रांसफर होता है, कैसे सॉफ्टवेयर लिखा जाता है और किस तरह कम्पाईल्ड किया जाता है। आसान शब्दों में कहें तो एक कंप्यूटर इंजीनियर जिम्मेदार होता है सॉफ्टवेयर को रन करने के उन तमाम कार्यों के लिए जिसका इजाद कंप्यूटर साइंटिस्ट करते है।

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी, रांची में बीटेक इन कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग में दाखिले के लिए आवेदन आमंत्रित किये जा रहे है। चार वर्षों के इस नियमित पाठ्यक्रम में नामांकन लेने के लिए विज्ञान विषयों के साथ 12 वीं पास छात्र आवेदन कर सकते है। बीटेक कंप्यूटर साइंस (इंजीनियरिंग) की पढ़ाई में आप अपने स्पेशलाइजेशन के तौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साईबर सिक्यूरिटी, सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, वेब एंड मोबाईल एप्लीकेशन विषय का चयन कर सकते है।

पढ़ाई के दौरान आप इंजीनियरिंग नॉलेज,प्रॉब्लम एनालिसिस, डिजाइन एंड डेवलपमेंट ऑफ़ सलूशन, काम्प्लेक्स प्रॉब्लम सलूशन, मॉडर्न टूल यूजेज,इंजीनियरिंग सोसायटी, एन्वॉयरन्मेंट और सस्टेनब्लिटी, कम्युनिकेशन, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट एंड फाइनेंस के साथ सीखते है लाइफ लॉन्ग लर्निंग का यादगार पाठ।

पढ़ाई के बाद अपने फील्ड में सफल होने के लिए चाहिए प्रोफेशन स्किल्स, प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल्स और इंटरप्रेन्योर स्किल्स और यह सब आप को सिखाते है कंप्यूटर साइंस इंडस्ट्री से जुड़े प्रोफेशनल।

कंप्यूटर साइंस इंजीनियर बनने के लिए होने चाहिए ये स्किल्स :

  1. टीम वर्क एबिलिटी
  2. प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल्स डेटर्मिनेशन,
  3. लॉजिकल एंड सिस्टेमेटिक माइंड सेट
  4. पेसेंस।

इस कोर्स को करने के बाद करियर ऑप्शन्स के तौर पर टीचिंग के अलावा कंप्यूटर प्रोग्रामर, सिस्टम डिज़ाइनर, सॉफ्टवेयर इंजीनियर, सॉफ्टवेयर डेवलपर, सॉफ्टवेयर टेस्टर, मोबाइल ऐप डेवलपर, आईटी एडमिनिस्ट्रेटर, ई-कॉमर्स स्पेशलिस्ट, डाटा वेयरहाउस एनालिस्ट के पद देश की प्रतिष्ठित कंपनियों में प्राप्त कर सकते है।

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एआईसीटीई ने एमसीए पाठ्यक्रम में किया बदलाव : अब दो वर्ष में करें एमसीए

मास्टर ऑफ़ कंप्यूटर एप्लीकेशन (एमसीए )कोर्स अब तीन साल की जगह दो साल का होगा। ऑल इंडिया कौंसिल ऑफ़ टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) ने मंगलवार को इसकी घोषणा करते हुए कहा की एमसीए कोर्स सत्र 2020-21 से 3 वर्ष की जगह 2 साल का ही होगा। एआईसीटीई ने सभी हाईयर एजुकेशनल इंस्टीटूशन्स से कहा है की वे अपने यहां कोर्स की अवधी में बदलाव संबंधी जरुरी संशोधन कर लें।