Tag Archives: JHARKHAND RAI UNIVERSITY RANCHI

Expert Talk ” Issue and Challenges in International financial Accounting”

Speakers :
Mr. Michael Wagner, Vice President, Miles Education Private Limited, Hyderabad
Mr. Nitish Kashyap, Marketing and Strategic Consultant, Bengaluru

Saturday, Sep 26, 2020 | Time :3:00 pm | 50 minutes | (UTC+08:00) Kuala Lumpur, Singapore
Meeting number: 170 612 6026
Password: BWp8eyd6dJ8 (29783936 from video systems)

Webex Meeting Link :
https://meetingsapac39.webex.com/meetingsapac39/j.php?MTID=me3eb3dd96b819d357df687c9b43cef74

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Organized by Department of Management, Jharkhand Rai University, Ranchi

Expert Talk Mechanical

Expert Talk: “TAKE CHARGE OF YOUR CAREER AND GRAB A DREAM JOB”

Speaker : Dr. J. Jessy Christin

Vice President – HR & Operations
CONVATE – International Recruitment Firm, Bengaluru

Date: September 26, 2020 / Time: 11.30 am – 1.00 pm

Meeting Platform: WebEx Meet

Meeting number: 170 289 5030
Password: E2rhfwHnk87

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Organized by Department of Mechanical Engineering, Jharkhand Rai University, Ranchi

National Education Policy 2020 : Features and Prospects

Speaker: Dr. Dipak Kumar Bose

Associate Professor, Department of Agriculture
Sam Higginbottom University of Agriculture Technology and Sciences (SHUATS), Naini, Prayagraj

Time: 09:00 – 10:00 Am
Date: 25 Sept 2020

Participants: All Students

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Organized by NSS Cell, Jharkhand Rai University, Ranchi

Pharmacy Day updated

Panel discussion on Transforming Global Health: Interdisciplinary Challenges, Perspectives and Strategies

In the occasion of Pharmacist day at 25 September, 2020

Panelists:
1) Dr. Nitesh Kumar
Director, Paras HEC Hospital, Ranchi

2) Dr. Randheer Gupta
Member, Jharkhand State Pharmacy Council

3) Mr. Sachinandan Basak
Product Development Owner, Baxter Innovation and Business Solution, Bengaluru

Moderator:
Mr. Hemendra Mishra, HOD, Dept. of Pharmaceutical Sciences, Jharkhand Rai University, Ranchi

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Organized by Department of Pharmacy, Jharkhand Rai University, Ranchi

International E-Conference

झारखण्ड राय विश्वविद्यालय में दो दिवसीय इंटरनेशनल ई- कॉन्फ्रेंस का आयोजन

झारखण्ड राय विश्वविद्यालय, रांची में शनिवार को दो दिवसीय इंटरनेशनल ई- कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। “मल्टी डिसिप्लनरी एप्रोच फॉर सस्टनेबल डेवेलपमवेंट”(ICMASD 2020) विषय पर आयोजित अंतराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के पहले दिन उद्घाटन सत्र का प्रारंभ दीप प्रज्वलित कर सरस्वती वंदना के साथ किया गया। इस अवसर पर इ स्मारिका का विमोचन भी किया गया। स्वागत भाषण देते हुए झारखण्ड राय विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. सविता सेंगर ने उद्घाटन सत्र में उपस्थित अतिथियों का स्वागत किया। डॉ. सेंगर ने अपने संबोधन में कॉन्फ्रेंस के विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा की “तकनीक एक सतत विकास प्रक्रिया है। आज पूरा विश्व कोरोना वाइरस से जूझ रहा है। इस समय तकनीक एक ऐसे प्लेटफॉर्म की तरह सामने आया है जिसने सभी सेक्टरों में काम करने वालों को रास्ता दिखाया है। तकनीक के बदले प्रयोग ने ठोस नवाचार और समावेशी विकास के विकास में महती भूमिका निभाई है। डॉ. सेंगर ने कहा की सतत विकास एक प्रक्रिया है जो निरन्तर चलता है । सतत विकास से हमारा अभिप्राय ऐसे विकास से है, जो हमारी भावी पीढ़ियों की अपनी जरूरतें पूरी करने की योग्यता को प्रभावित किए बिना वर्तमान समय की आवश्यकताएं पूरी करे। संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रस्तावित सस्टेनेबल डेवलपमेंट’ संकल्प को, जिसे सतत विकास लक्ष्यों के नाम से भी जाना जाता है। इसका उद्देश्य का उद्देश्य सबके लिए समान, न्यायसंगत, सुरक्षित, शांतिपूर्ण, समृद्ध और रहने योग्य विश्व का निर्माण करना और विकास के तीनों पहलुओं, अर्थात सामाजिक समावेश, आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण को व्यापक रूप से समाविष्ट करना है।

विषय प्रवेश करते हुए झारखण्ड राय विश्वविद्यालय के एडवाइजर और एचइसी के पूर्व सीएमडी प्रो. अभिजीत घोष ने कहा की ” कोरोना महामारी ने पुरे विश्व को प्रभावित किया है। परिस्थितिकी तंत्र और पर्यावरण में देखे जा रहे बदलाव यह संकेत देते है की प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन कर हमने इसे कितना नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने झरिया में लगी आग का जिक्र करते हुए कहा की यह संवेदन हीनता का उदाहरण है अबतक इसे बुझाया नहीं जा सका है। प्रो. घोष ने जानकारी देते हुए बताया की कॉन्फ्रेंस के पहले दिन 100 शोध पत्रों में से चयनित 72 शोध पत्रों को पढ़ा जायेगा। इस कॉन्फ्रेंस में देश के 14 राज्यों के अलावा अमेरिका, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और तजाकिस्तान से आये शोध पत्रों को शामिल किया गया है।“

मुख्य अतिथि डॉ. सुनील कुमार वर्णवाल (आईएएस) प्रिंसिपल सेक्रेटरी झारखण्ड सरकार ने अपने संबोधन में बताया की ” सतत विकास लक्ष्यों का उद्देश्य सबके लिए समान, न्यायसंगत, सुरक्षित, शांतिपूर्ण, समृद्ध और रहने योग्य विश्व का निर्माण करना और विकास के तीनों पहलुओं, अर्थात सामाजिक समावेश, आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण को व्यापक रूप से समाविष्ट करना है। सतत विकास के लक्ष्य एक दूसरे से जुड़े हुए है। विश्व आज कोरोना जैसी आपदा से जूझ रहा है। इस आपदा ने मनुष्य को जीवन के महत्व से परिचित कराया है। मनुष्य को प्रकृति, पर्यावरण और जीवन का महत्व समझाया है। डॉ. वर्णवाल ने जोर देते हुए कहा की ” तकनीक के कारण इस मुश्किल दौर में भी हम एक दूसरे से जुड़े हुए है। तकनीक एक समस्या भी बन सकती है जरुरत है समाज को इस समस्या से बचाने की। इंटरनेशनल कांफ्रेंस का विषय वर्तमान परिस्थिति को देखते हुए एक सराहनीय पहल है। यहाँ प्रस्तुत होने वाले शोध पत्र सबका मार्गदर्शन करेंगे।

विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. पियूष रंजन ने उद्घाटन सत्र के समापन अवसर पर सभी अतिथियों का धन्यवाद देते हुए कहा की ” दो दिनों तक चलने वाले इस अंतराष्ट्रीय कांफ्रेंस के जरिये सतत विकास, नवाचार,सतत विकास लक्ष्य से जुड़े अंतः विषय चर्चा और शोध पत्रों का प्रस्तुतीकरण किया जायेगा। उन्होंने देश विदेश से जुड़े अतिथियों, शोधार्थियों, के साथ विश्वविद्यालय के फैकल्टी मेंबर और तकनिकी सहायता प्रदान करने वाली टीम के सदस्यों को भी धन्यवाद दिया। डॉ. रंजन ने दो दिवसीय इंटरनेशनल ई कॉन्फ्रेंस के सफल आयोजन के लिए समन्वयक डॉ. श्रद्धा प्रसाद और सह- समन्वयक डॉ. सुमित कुमार पांडेय का भी धन्यवाद किया ।

Artificial intelligence

आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस

कंप्यूटर का अविष्कार मानव इतिहास का युगांतरकारी अध्याय है इस अविष्कार के साथ ही मनुष्य ने अपने काम मशीनों से करवाने का चलन शुरू किया था । कृत्रिम बुद्धि शब्द का इस्तेमाल तब से ही चलना में आया। इसे ही आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के नाम से सभी पहचानते है।

फेसबुक ने 2017 में अपने एक रिसर्च प्रोग्राम को अचानक बंद कर दिया गया जो आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस पर शोध से संबंधित था। मीडिया रिपोटों के जरिये जो जानकारी सामने आयी वह बेहद हैरान करने वाली थी। शोध कार्यक्रम इसलिए बंद करना पड़ा क्योंकि डिज़ाइन किए गए चैटबॉट्स ने अंग्रेज़ी के बजाय एक अलग ही भाषा ईज़ाद कर ली जिसे इंसान नहीं समझ सकते थे। । इस घटना को लेकर विज्ञान जगत में काफी बहस हुई। इस के बाद दुनिया के कई बड़े वैज्ञानिकों ने यह माना की भविष्य में मानव को मशीनों से चुनौतियों का सामना करना होगा। इस के बाद से ही दुनिया भर में वैज्ञानिक अक़्लमंद मशीनें तैयार करने में लगे हुए है जो मानवता की रक्षा कर सकें। कोरोना वायरस ने दुनिया को जितना प्रभावित करना था किया लेकिन अब पूरी दुनिया की नजर इसके वैक्सीन की खोज पर टिकी है। कोरोना वायरस कोविड-19 की वैक्सीन खोजने की रेस में रूस ने स्पुतनिक 5 नामक टीके को अविष्कार करने का दावा किया है। भारत समेत दुनिया के कई देश भी इसी काम में जुटे हैं। वैज्ञानिक, शोधकर्ता और दवा बनाने वाले साथ मिल कर इस चुनौती को कम से कम समय में पूरी करने की कोशिश में लगे हैं। इस चुनौती से निपटने में सबसे बड़ा सहायक साबित हुआ है आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग।

पहले के दौर में कोई नई वैक्सीन या दवा बनने में सालों का वक्त लगता था। लेकिन एआई और मशीन लर्निंग के इस्तेमाल से इस काम को सालों की बजाय अब कुछ दिनों में ही पूरा कर लिया जाता है।

आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस:
ग्रीक मिथकों में ‘मैकेनिकल मैन की अवधारणा से संबंधित कहानियाँ मिलती हैं अर्थात् एक ऐसा व्यक्ति जो हमारे किसी व्यवहार की नकल करता है। प्रारंभिक यूरोपीय कंप्यूटरों को ‘लॉजिकल मशीन ‘ कहकर बुलाया जाता था। तकनीक के बढ़ते प्रयोग और तेज गति से काम करने करने के विचार को समृत वर्क में बदलने के लिए ऐसी मशीनों के बारे में सोचा गया जो इंसानों के निर्देश को समझना, चेहरे की पहचान, ख़ुद से गाड़ियां चलाना , किसी गेम को जीतने के लिए खेलना, घरेलु काम करना बेहतर और समझदारी के साथ कर सके। यही कहलाया एआई या आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस। इसका हमारे जीवन में कितना दखल है इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते है की होटल में रोबोट, कार का ड्राइवर, हॉस्पिटल में सर्जरी करने वाले, ट्रैफिक कण्ट्रोल करने वाले सभी रोबोट्स ही है। इतना ही नहीं नयी दवाएं तैयार करना, नये केमिकल तैयार करना, निर्देश देना, मार्ग बताना, माइनिंग करने और यहाँ तक की एयर ट्रैफिक कंट्रोल के लिए आर्टिफ़िशियल दिमाग का इस्तेमाल किया जाता है। नीति आयोग ने इसके महत्व को देखते हुए आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग के मुद्दे पर बहस और विचार करने के लिए ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए राष्ट्रीय नीति’ पत्र बनाया था। भारत सरकार ने राष्ट्रीय “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पोर्टल” लॉन्च किया है, जिसका नाम एआई डॉट गॉव डॉट इन (ai.gov.in) है।

भारत अपनी अर्थव्यवस्था को डिज़िटल अर्थव्यवस्था बनाने के साथ-साथ सरकारी काम-काज को AI से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। रोबोटिक्स, वर्चुअल रियल्टी, बिग डेटा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग को फिफ्थ इंडस्ट्रियल रिवोल्युशन कहा जा रहा है इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग इंटरनेट ऑफ थिंग्स, 3-डी प्रिंटिंग और ब्लॉक चेन शामिल हैं ।

hindi-diwas

दिल के भरे रिवाल्वर में बेचैनी जोर मारती है

हिंदी दिवस की बधाई। हिंदी माथे की बिंदी। नई वाली हिंदी। मातृभाषा पर्व के आचमन की बेला आ गयी है। दिन – सप्ताह और माह निकल जायेंगे और अगले बरस हम फिर जुटेंगे हिंदी दिवस को मनाने । ये वाला कुछ खास है क्योंकि डिजिटल है। शोर भी ज्यादा होगा। दिखेगा भी ज्यादा और फैलाया भी जायेगा। दिखाई देने का सुख से हिंदी को क्यों वंचित किया जाय हां दिखने और महसूस होने में बड़ा फर्क है। “अंतर्मन का अहसास, मातृ भाषा के साथ। इस बार हिंदी (नई वाली) दिवस डिजिटल एहसास के साथ। जिसे आप संजो का रख सकते है अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए।” जिंगल मारक है बंधू और गोली की तरह असर कर सकती है नई पीढ़ी पर। असर हो न हो तब भी चलेगा लेकिन किताबें न हो “इ हमका मंजूर नाहीं है “।

किसी अकादमिक अध्यापक कमरे और सरकारी खरीद का हिस्सा बनने से कहीं ज्यादा जरुरी है एक अच्छी किताब का बिस्तर के सिरहाने पर रखा होना। उन लोगों तक पहुँच पाना जिनमें भाषा साँस लेती है और धड़कती है। जिंदगी को थोड़ा बदलने, खिड़कियों को थोड़ा खोलने और दुनिया को थोड़ा बेहतर बनाने के लिए किताबों का होना जरुरी है।

शायद इससे समाज को थोड़ा विस्तार मिल सके जो जरुरी है और जरुरत भी। हमारे और आपके लिए। हमारे आने वाले कल के लिए। अपनी ही संतानो को बताने की जद्दोजद बेहद दुखदायी है की किताबों का पास होना क्या सुख देता है। नई पीढ़ी को कौन और कैसे समझाए की जनसंचार का स्पंदन क्या होता है।

नागरिक जीवन का आरंभ बेशक नई कविता में देखने को मिलता है। लेकिन एक उद्योगिक जीवन की प्रतिछवि भी साथ साथ बनती चली जाती है। विविधताओं से भरा भारतीय जन जीवन की अंतरकथा यहीं तो प्रगट होती है। “जिंदगी बुरादा तो बारूद बनेगी ही ” कविता तभी तो जन्म लेगी। जीवन ही तो कविता का सबसे मार्मिक अंश है। इसे आत्मसंघर्ष से अर्जित किया जाता है। आत्मसंघर्ष से विमुख कविता और जीवन को बयाँ करना कठिन होता है।

कविता केवल बाहर नहीं आंकती बल्कि भीतर भी निरंतर चलती रहती है। एक शांत नदी की तरह जिसके ऊपरी तल पर फैले बालू के महीन कण सूर्य किरणों से चमकते हो और पथिक को आकर्षित करते हो। यह मृग मरीचिका तो नहीं हो सकता क्योंकि सरस्वती (नदी )की तरह निरंजना की धारा भी हजारों वर्षों से अविरल बह रही है। इतिहास और भूगोल कम है लेकिन मन की पड़ताल ज्यादा है।

आम की अमराइयों से, पर्वत और तराई से गुजरते हुए किसे काफिले का ठहर जाना क्या होता है यह कोई चरवाहा खूब समझता है जिसकी भेड़े अभी भी हरी पत्तियों की तलाश में मैदानों और चट्टानों के नुकीले सिरों पर ढूंढती रही है कुछ हरी पत्तियाँ। और काफिले के आ जाने से जो बेअदबी और बेकरारी का जो शोर होता है वह उनसे उनका हक़ छीन लेता है जो उनका था या होने वाला था अगले ही पल।

TEACHERS DAY

झारखण्ड राय विश्वविद्यालय में शिक्षक दिवस का आयोजन कुलपति डॉ. सविता सेंगर ने कहा नई शिक्षा नीति में लाइफ स्किल महत्वपूर्ण विषय

5 सितंबर शिक्षक दिवस के अवसर पर झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी, रांची में ऑनलाइन शिक्षक दिवस समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर किया गया।

सर्वप्रथम यूनिवर्सिटी की कुलपति डॉ. सविता सेंगर ने शिक्षक दिवस की महत्ता और आयोजन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा की ” जीवन में सफल होने के लिए शिक्षा सबसे ज्यादा जरुरी है। शिक्षक देश के भविष्य और युवाओं के जीवन को बनाने और उसे आकार देने के लिये सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कोविड 19 और लॉक डाउन की चर्चा करते हुए डॉ सेंगर ने कहा ” कोरोना वाइरस और लॉक डाउन के परिस्थित एक चुनौती पूर्ण स्थिति थी जिसे लेकर सभी चिंतित थे। किस प्रकार समय पर कोर्स पूरा होगा, अकादमिक कैलेंडर और एक्टिविटी को किस प्रकार पूरा किया जायेगा। यह सभी सवाल शिक्षक, अभिभावक और छात्रों के मन में चल रहा था । लेकिन प्रत्येक चुनौती में अवसर भी छुपा रहता है और इस कठिन चुनौती को पूरा करने में टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टॉफ का भरपूर सहयोग प्राप्त हुआ। फैकल्टी मेंबर्स ने बिना एक दिन की हानी किये पुरे ऐकडेमिक कैलेंडर को सफलतापूर्वक पूरा किया और इसमें तकनीक का बेहतर इस्तेमाल शामिल है। डॉ सेंगर ने अपने संबोधन के दौरान कहा की “यूनिवर्सिटी ने अपने पाठ्यक्रम में लाइफ स्किल महत्वपूर्ण विषय मानते हुए स्थान दिया है। यह स्टूडेंट्स को तकनिकी और व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करने में कारगर साबित हुआ है।“

नई शिक्षा नीति 2000 की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया की ” इसके जरिये उच्च शिक्षा में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। नई शिक्षा नीति उच्च शिक्षण संस्थानों और गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा प्राप्त करने के इक्छुक छात्रों को लाभांवित करेगा। “

यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रार डॉ. पीयूष रंजन ने अपने संबोधन में ” विश्वविद्यालय के सभी शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारियों को शिक्षक दिवस की शुभकामनायें दी। उन्होंने कहा की यह ऐकडेमिक वर्ष एक चुनौती की तरह था जिसमें फैकल्टी मेम्बर्स को एक नए प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हुए अकादमिक सत्र को पूरा करना था। मुझे बेहद ख़ुशी है की किसी भी शैक्षणिक दिवस के नुकसान के बिना इसे पूरा किया गया और इसमें शिक्षकों का योगदान अतुलनीय है। विश्वविद्यालय ने चुनौती को अवसर में बदलते हुए अपना ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भी स्थापित किया है जिसके जरिये नियमित पढ़ाई जारी है।“ ड़ॉ. रंजन ने इस अवसर पर विश्वविद्यालय द्वारा प्रतिवर्ष शिक्षक दिवस के अवसर पर दिए जाने वाले पुरस्कारों की घोषणा की। इस वर्ष यूनिवर्सिटी के बेस्ट डिपार्टमेंट का अवार्ड डिपार्टमेंट ऑफ़ माइनिंग इंजीनियरिंग को दिया गया। फैकल्टी ऑफ़ द ईयर का अवार्ड कंप्यूटर साइंस डिपार्टमेंट के प्रो. कुमार अमरेंद्र को और मेंटर ऑफ़ द ईयर का अवार्ड माइनिंग इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के प्रो सुमीत किशोर को प्राप्त हुआ। ओवरऑल इंस्टीटूशनल डेवलपमेंट एक्टिविटीज के लिए प्रो. रश्मि ने दूसरी बार यह पुरस्कार प्राप्त किया। इस अवसर पर वैसे सभी शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारियों को भी प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया जिन्होंने पिछले पांच वर्षों से विश्वविद्यालय में अपनी निर्बाध सेवा देने का कार्य किया है। सम्मान समारोह के समापन के बाद छात्र -छात्राओं के द्वारा गीत, संगीत,नृत्य कविता प्रस्तुति का कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम के आयोजन में कल्चरल क्लब के स्टूडेंट्स और मेंबर्स की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम का संचालन छात्रा अंशिका, स्वाति और फैजल ने किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन प्रो. अनुराधा शर्मा के द्वारा किया गया।