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Online Shopping and One Star Review

ऑनलाइन शॉपिंग : वन स्टार रीव्यू का गोलमाल

हम और आप जैसे कितने ही लोग जब ऑनलाइन शॉपिंग करते है तो एक नजर प्रोडक्ट के रीव्यू की तरफ भी डालते है। इससे हम मन लेते है या कहे मन को बहला लेते है की जो प्रोडक्ट हमने ख़रीदा है वो उसके बारे में लोगों की राय अच्छी है। सीधा बोले तो अच्छा रीव्यू मतलब अच्छा सामान और ख़राब रीव्यू मतलब ख़राब सामान। लेकिन ये रीव्यू फर्जी हो सकते है या जानबूझकर आपको भ्रमित करने के लिए दलए गए है यह सुनकर आपके मन में धोखा खाने जैसे विचार आ सकते है। बहुत सारे लोग इस खेल को अब समझ गए है और इसे नजरअंदाज करते हुए प्रोडक्ट को ठोक बजाकर खरीददारी करते है। लेकिन एक नया चलन आया है नेगेटिव रीव्यू। इसे बोलचाल की भाषा में वन स्टार रीव्यू भी कहा जाता है। दरसल यह किया जाता है अपने प्रतिस्पर्धी कंपनियों को नुकसान पहुंचाने और बिक्री को कम करने के लिए।

वन स्टार रीव्यू :
अमेजन हो या फ्लिपकार्ट या फिर कोई भी शॉपिंग वेबसाइट्स जहां से हम खरीदारी करते हैं। सामान खरीदने से पहले हम अक्सर उस प्रोडक्ट के रिव्यू को पढ़ते हैं। उसके बाद रिव्यू के आधार पर हम यह तय करते हैं कि उस सामान को खरीदना है या नहीं। प्रतिद्वंद्वियों को नुकसान पहुंचाने के लिए इंडिपेंडेंस सेलर द्वारा बेवसाइट पर वन स्टार रिव्यू (संतोषजनक नहीं होना) दिया जाता है।

फर्जी फीडबैक :
फीड बैक या प्रतिपुष्टि का अर्थ है आपके किसी भी प्रकार के कार्य पर राय व्यक्त करना। बाजार भी इससे अछूता नहीं है। मार्केट और प्रोडक्ट के बीच अन्योनाश्रय संबंध है और इसी बंधन में बंधा है जिसने इसे बनाया है यानि कंपनी। यानि नकारात्मक फीड बैक से तीनो प्रभावित होंगे। मांग और आपूर्ति के नियम को यह प्रभावित करता है।

उदाहरण स्वरुप : किसी प्रोडक्ट को अगर 1 स्टार रेटिंग मिलती है तो इससे निपटने के लिए उसे 20 फाइव स्टार रीव्यू चाहिए होंगे। लेकिन यह इतना सीधा उत्तर नहीं है जिसे कोई भी कंपनी या प्रोडक्ट किसी की मदद से हासिल कर ले। यह हजारों की संख्या में होते है और लगभग हर प्रोडक्ट इससे प्रभावित होता है।

बाजार में स्टार्ट अप के साथ उतरने को तैयार खिलाडियों के लिए तो यह बेहद खतरनाक साबित होगा अगर उनके बारे में यह पहली राय ही नकारात्मक हो। इंडिपेंडेंट सेलर दुनिया भर में फैले हुए है जो अरबों रूपए की कमाई साल भर में करते है।

अगर डिलीवरी में देरी, सामान में खराबी की वजह से नेगेटिव रीव्यू मिलता है तो ऑनलाइन सेलिंग कंपनियां तुरंत उन्हें अपने प्लेटफॉर्म से हटा देती है। कुछ बड़ी कंपनियां अपने प्लेटफॉर्म पर बिकने वाले प्रोडक्ट को लेकर सेंसेटिव होती है और अपने नाम पर किसी प्रकार के दाग को मिटने के लिए तत्पर रहती है इसके लिए वो नेगेटिव फीडबैक देने वाले के साथ किसी भी प्रकार का कोम्प्रोमाईज़ करने को तैयार रहती है। कंपनियों ने इसके लिए कड़े नियम बनाये है। लेकिन तमाम क़ानूनी प्रावधानों के बाबजूद चूहे और बिल्ली के खेल में इसे रोक पाना मुश्किल टास्क है ।

world suicide prevention

नेवर गिव अप : यू कैन फ़्लाई

आज सुबह गूगल कैलेंडर में (10 सितंबर पर ) लिखी पंक्ति “नेवर गिव अप यू कैन फ्लाई ” ने मेरा ध्यान खिंचा। आज का दिन वर्ल्ड सुसाईड प्रिवेंशन डे के तौर पर मनाया जाता है। हार नहीं मानना और हमेशा संघर्ष रत रहना जीवन है। जीवन के इस मूल भाव को नहीं समझने वाले ही आत्महत्या जैसे कायराना कार्य की तरफ सोचते है।

एक ऐसा ही उदहारण है मुंबई में रहने वाले 21 साल के यश अवधेश गांधी । ज़िंदगी की मुश्किल चुनौतियों का सामना करते हुए यश ने मैनेजमेंट की प्रवेश परीक्षा कैट में 92.5 अंक लाकर न केवल अपने माता पिता का नाम रोशन किया बल्कि कई युवाओं के लिए मिसाल बन गए। इनका एडमिशन आईआईएम लखनऊ में हुआ है जहां पहुंचना बहुतेरे छात्रों का सपना होता है। यश की कहानी इसलिए प्रेरणादायक है क्योंकि वे सेरेब्रल पॉल्सी और डिस्लेक्सिया जैसी बेहद गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं. लड़खड़ा कर चल पाते हैं लेकिन हौसले को लेकर उनके क़दम नहीं लड़खड़ाए।

मुश्किलों के बाद भी यश ने की तैयारी की और उन्हें लिखित परीक्षा देने के लिए एक राइटर की ज़रूरत होती है, वह ख़ुद अपना पेपर नहीं लिख सकते।

सेरेब्रल पॉल्सी और डिस्लेक्सिया ऐसी स्थिति को कहते हैं जिसमें शरीर की ज़रूरी मांसपेशियां कमज़ोर हो जाती हैं।यश ने अगर हार मानकर अपनी जिन्दी को गुड़ बॉय बोल दिया होता तो वह एक मिशाल नहीं बन पाते ।

फिल्म अभिनेता सुशांत सिंह की मौत ने फिर से यह सवाल खड़ा कर दिया है की सफलता का पैमाना क्या है ? संघर्ष और असफलता का रास्ता क्या इस ओर जाता है ?

हमारे सामने कितने ही उदाहरण है जिन्होंने जीवन के सुरवती वर्षों में लगातार असफलता ही प्राप्त किया लेकिन हार नहीं मानी अपने हाथों से अपनी सफलता की लकीर खींची।

आत्महत्या शब्द जीवन से पलायन का डरावना सत्य है जो दिल को दहलाता है, डराता है, खौफ पैदा करता है, दर्द देता है। इसका दंश वे झेलते हैं जिनका कोई अपना आत्महत्या कर चला जाता है। कितने ही युवा संघर्ष से घबरा कर आतमहतया की तरफ मुड़ जाते है क्या यह समाधान है ?

भारतीय मानस पहले इतना कमजोर कभी नहीं था जितना अब दिखाई पड़ रहा है। कम सुविधा व सीमित संसाधन में भी संतोष और सुख से रहने का गुण इस देश की संस्कृति में रचा-बसा है ।

TEACHERS DAY

झारखण्ड राय विश्वविद्यालय में शिक्षक दिवस का आयोजन कुलपति डॉ. सविता सेंगर ने कहा नई शिक्षा नीति में लाइफ स्किल महत्वपूर्ण विषय

5 सितंबर शिक्षक दिवस के अवसर पर झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी, रांची में ऑनलाइन शिक्षक दिवस समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर किया गया।

सर्वप्रथम यूनिवर्सिटी की कुलपति डॉ. सविता सेंगर ने शिक्षक दिवस की महत्ता और आयोजन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा की ” जीवन में सफल होने के लिए शिक्षा सबसे ज्यादा जरुरी है। शिक्षक देश के भविष्य और युवाओं के जीवन को बनाने और उसे आकार देने के लिये सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कोविड 19 और लॉक डाउन की चर्चा करते हुए डॉ सेंगर ने कहा ” कोरोना वाइरस और लॉक डाउन के परिस्थित एक चुनौती पूर्ण स्थिति थी जिसे लेकर सभी चिंतित थे। किस प्रकार समय पर कोर्स पूरा होगा, अकादमिक कैलेंडर और एक्टिविटी को किस प्रकार पूरा किया जायेगा। यह सभी सवाल शिक्षक, अभिभावक और छात्रों के मन में चल रहा था । लेकिन प्रत्येक चुनौती में अवसर भी छुपा रहता है और इस कठिन चुनौती को पूरा करने में टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टॉफ का भरपूर सहयोग प्राप्त हुआ। फैकल्टी मेंबर्स ने बिना एक दिन की हानी किये पुरे ऐकडेमिक कैलेंडर को सफलतापूर्वक पूरा किया और इसमें तकनीक का बेहतर इस्तेमाल शामिल है। डॉ सेंगर ने अपने संबोधन के दौरान कहा की “यूनिवर्सिटी ने अपने पाठ्यक्रम में लाइफ स्किल महत्वपूर्ण विषय मानते हुए स्थान दिया है। यह स्टूडेंट्स को तकनिकी और व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करने में कारगर साबित हुआ है।“

नई शिक्षा नीति 2000 की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया की ” इसके जरिये उच्च शिक्षा में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। नई शिक्षा नीति उच्च शिक्षण संस्थानों और गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा प्राप्त करने के इक्छुक छात्रों को लाभांवित करेगा। “

यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रार डॉ. पीयूष रंजन ने अपने संबोधन में ” विश्वविद्यालय के सभी शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारियों को शिक्षक दिवस की शुभकामनायें दी। उन्होंने कहा की यह ऐकडेमिक वर्ष एक चुनौती की तरह था जिसमें फैकल्टी मेम्बर्स को एक नए प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हुए अकादमिक सत्र को पूरा करना था। मुझे बेहद ख़ुशी है की किसी भी शैक्षणिक दिवस के नुकसान के बिना इसे पूरा किया गया और इसमें शिक्षकों का योगदान अतुलनीय है। विश्वविद्यालय ने चुनौती को अवसर में बदलते हुए अपना ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भी स्थापित किया है जिसके जरिये नियमित पढ़ाई जारी है।“ ड़ॉ. रंजन ने इस अवसर पर विश्वविद्यालय द्वारा प्रतिवर्ष शिक्षक दिवस के अवसर पर दिए जाने वाले पुरस्कारों की घोषणा की। इस वर्ष यूनिवर्सिटी के बेस्ट डिपार्टमेंट का अवार्ड डिपार्टमेंट ऑफ़ माइनिंग इंजीनियरिंग को दिया गया। फैकल्टी ऑफ़ द ईयर का अवार्ड कंप्यूटर साइंस डिपार्टमेंट के प्रो. कुमार अमरेंद्र को और मेंटर ऑफ़ द ईयर का अवार्ड माइनिंग इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के प्रो सुमीत किशोर को प्राप्त हुआ। ओवरऑल इंस्टीटूशनल डेवलपमेंट एक्टिविटीज के लिए प्रो. रश्मि ने दूसरी बार यह पुरस्कार प्राप्त किया। इस अवसर पर वैसे सभी शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारियों को भी प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया जिन्होंने पिछले पांच वर्षों से विश्वविद्यालय में अपनी निर्बाध सेवा देने का कार्य किया है। सम्मान समारोह के समापन के बाद छात्र -छात्राओं के द्वारा गीत, संगीत,नृत्य कविता प्रस्तुति का कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम के आयोजन में कल्चरल क्लब के स्टूडेंट्स और मेंबर्स की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम का संचालन छात्रा अंशिका, स्वाति और फैजल ने किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन प्रो. अनुराधा शर्मा के द्वारा किया गया।

OUTREACH PROGRAM

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी को आईआईआरएस-इसरो आउटरीच नेटवर्क सेंटर के तौर पर मान्यता

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ रिमोट सेंसिंग (आईआईआरएस) और इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गेनाईजेशन (इसरो) द्वारा संचालित आउटरीच प्रोग्राम के तहत झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी, रांची को आईआईआरएस नेटवर्क सेंटर के तौर पर मान्यता प्राप्त हुई है। आईआईआरएस और इसरो द्वारा संयुक्त रूप से चलाये जा रहे ऑनलाइन डिस्टेंस लर्निंग प्रोग्राम में झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी रांची के बीटेक कंप्यूटर साइंस के स्टूडेंट शशिकांत प्रसाद और फैकल्टी मेंबर प्रोफेसर कुमार अमरेंद्र ने “सैटेलाइट फोटोग्राममेट्री एंड इट्स एप्लीकेशन” विषय पर संचालित 1 सप्ताह के ई लर्निंग कोर्स को सफलतापूर्वक पूरा करते हुए प्रमाणपत्र प्राप्त किया है। इसरो से प्राप्त प्रमाणपत्र में विश्वविद्यालय को आईआईआरएस आउटरीच नेटवर्क सेंटर के तौर पर मान्यता दिया है। विश्वविद्यालय के डिपार्टमेंट ऑफ़ कंप्यूटर साइंस एंड इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी की कोर्स कोर्डिनेटर प्रो. अनुराधा शर्मा को इसका नोडल अधिकारी भी बनाया गया है। उन्हें इस के लिए प्रमाणपत्र भी प्राप्त हुआ है।

विश्वविद्यालय के नोडल सेंटर बनने और सफलतापूर्वक प्रमाणपत्र प्राप्त करने पर यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रार ड़ॉ पियूष रंजन ने कंप्यूटर साइंस डिपार्टमेंट एवं प्रमाणपत्र प्राप्त करने वाले स्टूडेंट और फैकल्टी मेंबर की सफलता पर हर्ष व्यक्त किया है। डॉ. रंजन ने विश्वविद्यालय को आईआईआरएस आउटरीच नेटवर्क सेंटर के तौर पर मान्यता दिए जाने पर भी ख़ुशी जाहिर किया। “उन्होंने कहा की वर्तमान समय में ऑनलाइन शिक्षा ने दूरियों की बादयता को समाप्त कर दिया है। ई प्लेटफॉर्म के उपयोग से सभी को मुक्त और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलना बेहद सरल होगया है। अपने दायित्वों को समझे हुए विश्वविद्यालय द्वारा भी इस ओर कार्य किया जा रहा है।“

इस विषय की जानकारी विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी प्रशांत जयवर्धन ने दी।

Mining Engineering

झारखण्ड ही नहीं सीमावर्ती राज्यों के स्टूडेंट्स की भी पहली पसंद बना झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी रांची – माइनिंग इंजीनियरिंग करने के लिए आते है बिहार, बंगाल और ओडिशा के छात्र

खनिज संपदा हमारे जीवन का मुख्य आधार है। खनिज संपदा को निकालने का काम प्रशिक्षित लोगों के नेतृत्व में किया जाता है, जिन लोगों को माइनिंग इंजीनियर कहते हैं। खनिज संपदा को निकालने के कार्य को खनन (माइनिंग) इंजीनियरिंग कहते हैं। बिहार, झारखंड, उड़ीसा, मध्य प्रदेश व पश्चिम बंगाल जैसे राज्य में खनिज पदार्थ भारी मात्रा में हैं। इसको देखते हुए देश में माइनिंग इंजीनियर्स की डिमांड काफी तेजी के साथ बढ़ती जा रही है।झारखण्ड के सीमावर्ती राज्यों में इस विषय की पढ़ाई को लेकर काफी क्रेज देखा गया जाता है क्योकि इस सेक्टर में आज भी जॉब काफी संख्या में निकलते है। माइनिंग इंजीनियरिंग में कैरियर बनाने के लिए किसी मान्यताप्राप्त विद्यालय से साइंस स्ट्रीम में 12 वीं कक्षा पास करना अनिवार्य है। इसके बाद बीटेक और एमटेक जैसे कोर्स भी है। डिप्लोमा इन माइनिंग इंजीनियरिंग इस फील्ड का एक लोकप्रिय कोर्स है जिसमे 10 वीं पास स्टूडेंट भी एडमिशन लेकर अपना भविष्य उज्जवल बना सकता है। माईन मशीन ऑपरेटर ,माइनिंग सरदार जैसे कई जॉब है जो डिप्लोमा लेवल की योग्यता मांगते है।

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झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी, रांची का डिपार्टमेंट ऑफ़ माइनिंग इंजीनियरिंग अपने अद्यतन पाठ्यक्रम, अनुभवी फैकल्टी मेंबर्स और पढ़ाई साथ अतिरिक्त गतिविधियों चलते अपनी विसिष्ट पहचान रखता है। राज्य के चुनिंदा विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में ही ममिनिंग इंजीनियरिंग की पढ़ाई होती है। इस कारण राज्य के बाहर के स्टूडेंट्स पढ़ने के लिए झारखण्ड आते है। अगर सरकारी संस्थानों बात करें तो आईआईटी धनबाद, बीआईटी सिंदरी, सीआईएमएफआर धनबाद और गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक निरसा धनबाद के अलावा अन्य नाम नजर नहीं आता है। ये सभी संस्थान कोयला नगरी धनबाद के आसपास स्थित है। राजधानी रांची, जमशेदपुर और राज्य के अन्य जिलों में इस प्रकार का कोई सरकारी संस्थान नहीं है। निजी सस्थानों में झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी, रांची पिछले कई वर्षों से जाना पहचाना नाम जिसने अपने एजुकेशनल एनवायरनमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण अपनी अलग पहचान बनायीं है। यूनिवर्सिटी का डिपार्टमेंट ऑफ़ माइनिंग इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट जिसमे डिप्लोमा इन माइनिंग इंजीनियरिंग और बीटेक इन माइनिंग इंजीनियरिंग की नियमित पढ़ाई होती है सभी विभागों में अपना विसिष्ट स्थान रखता है। रांची शहर में स्थित होने से अन्य राज्यों से पढ़ाई करने आने वाले स्टूडेंट्स की पहली पसंद भी है। सीसीएल, मेकॉन, सीएमपीडीआई, एचईसी, सेल जैसे बड़े संस्थानों मुख्यालय रांची में होने के कारण माइनिंग के स्टूडेंट्स को इसका लाभ भी मिलता है। माइनिंग इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के अनुभवी फैकल्टी मेंबर्स स्टूडेंट्स को इस सेक्टर में बेहतर करने के लिए तैयार करते है।

यहाँ से माइनिंग इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले स्टूडेंट्स को इंडस्ट्री सेंट्रिक सिलेबस के साथ इस फील्ड के अनुभवी लोगों का मार्गदर्शन समय समय पर मिलता रहता है। इसके अलावा प्रैक्टिकल एजुकेशन की जरुरत को पूरा करने के लिए इंडस्ट्री विजिट,इंटर्नशिप,वर्कशॉप,गेस्ट लेक्चर, माइंस विजिट भी नियमित तौर पर करवाई जाती है।

    यूनिवर्सिटी द्वारा उपलब्ध करवाई जा रही सुविधाओं में :

  1. 100 प्रतिशत पीडीपीटी ( पोस्ट डिप्लोमा प्रैक्टिकल ) ट्रेनिंग। यह ट्रेनिंग संपन्न होती है सीसीएल,एसीएल और बीसीसीएल जैसे नामी संस्थानों में।
  2. कोर्स के दौरान व्यावहारिक (वोकेशनल ) प्रशिक्षण की वयवस्था।
  3. पढ़ाई के दौरान औद्यौगिक भ्रमण (इंडस्ट्रियल विजिट)की सुविधा जिनमें सीएमपीडीआई, सीआईएमएफआर, जीएसआई जैसे संस्थान शामिल है ।
  4. गैस टेस्टिंग एग्जामिनेशन में लैंप हैंडलिंग सर्टिफिकेट प्राप्त करने में सहयोग।
  5. ओवरमैन एग्जामिनेशन पास करने के लिए कैंपस में फ्री प्रतियोगिता परीक्षा तैयारी की सुविधा।
  6. डायरेक्टर जेनेरल ऑफ़ माइंस सेफ्टी (डीजीएमएस ) द्वारा दी जाने वाली योग्यता जाँच प्रमाणपत्र को प्राप्त करने में सहयोग।
  7. बोर्ड ऑफ़ प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (बीओपीटी ) कोलकाता द्वारा मान्यता प्राप्त।
  8. योग्य और अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन।
  9. मॉडर्न माइनिंग लेबोरेटरी की सुविधा शामिल है।

बीबीए इन लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट: बने सप्लाई के एक्सपर्ट

Q. लॉजिस्टिक्स किसे कहते है। इस शब्द की उत्पति कैसे हुई ?
Ans. लॉजिस्टिक्स शब्द की उत्पत्ति सेना में हुई थी। लॉजिस्टिक्स शब्द का उपयोग सैनिकों को उपकरण और आपूर्ति प्राप्त करने की प्रक्रिया के लिए किया जाता था। 1950 के दशक तक, जब व्यवसायों के लिए शिपिंग सामग्री की जटिलता बढ़ गई थी, तब तक यह ‘रसद’ व्यावसायिक कार्यों के लिए संदर्भित नहीं था। अब, रसद एक उद्योग है और किसी भी व्यवसाय मॉडल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है; यह किसी व्यवसाय में माल के प्रवाह और भंडारण का नियंत्रण है।अर्थात ग्राहकों को माल परिवहन की आर्थिक गतिविधि या कहें सैनिकों के लिए रसद समार्गी अभियान, उपकरण और आवास की व्यवस्था करने का विज्ञान।

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Q. लॉजिस्टिक्स में होता क्या है ?
Ans. लॉजिस्टिक्स एक कंपनी या प्रोडक्ट डिलीवरी से जुड़े भीतर की गतिविधियों को करता है। इसमें ओपनिंग प्रोडक्शन से फाइनल डिलीवरी तक शामिल है। दूसरी भाषा में कहें तो लॉजिस्टिक्स प्रोडूसर को संतुस्ट करती है की उसके द्वारा मंगाया गया सामान काम समय और उचित खर्चे में उसके पास पहुंचेगा। लॉजिस्टिक्स प्रबंधन प्रक्रिया कच्चे माल के संचय से शुरू होती है जो गंतव्य तक माल पहुंचाने के अंतिम चरण में होती है। ग्राहकों की जरूरतों और उद्योग मानकों का पालन करके, रसद प्रबंधन प्रक्रिया की रणनीति, योजना और कार्यान्वयन की सुविधा प्रदान करता है।

Q. लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन मैनेजमेंट कैसे अलग हैं?
Ans. लॉजिस्टिक्स का तात्पर्य किसी कंपनी के भीतर के कार्यों से है। जैसे : डिस्ट्रीब्यूटर को कच्चे माल की खरीद और डिलीवरी। पैकेजिंग , शिपमेंट। परिवहन इत्यादि। जबकि सप्लाई चेन मैनेजमेंट में बाहरी संगठनों का नेटवर्क है जिसमें वेंडर, ट्रंसपोटशन प्रोवाइडर, वेयरहाउस प्रोवाइडर, कॉल सेंटर और प्रोडक्ट डिलीवरी देने वाले वाले कार्य एक साथ किये जाते है।

Q. लॉजिस्टिक्स क्यों महत्वपूर्ण है ?
Ans. छोटे वयवसाय और ग्राहकों की जरुरत को पूरा करने के लिए। उत्पाद अगर समय पर ग्राहक तक नहीं पहुंचा तो व्यापार विफल हो जायेगा। लॉजिस्टिक्स में कुशलता के साथ कच्चे माल खरीदना उपयोग किये जाने तक स्टोर करके रखना और अधिक समय तक लाभदायक बनाकर रखना होता है।

Q.बीबीए इन लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट कोर्स क्या है ?
Ans. बीबीए इन लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट 3 वर्षीय कोर्स है जिसे उद्योग जगत की आवशयकता को ध्यान में रखते हुए संचालित किया जा रहा है। यह कोर्स उनकी जरूरतों को पूरा करते हुए स्किल्ड फोर्स उपलब्ध करता है। बीबीए इन लॉजिस्टिक पाठ्यक्रम के दौरान स्टूडेंट्स को लॉजिस्टिक्स इंडस्ट्री में कार्य करने के लिए पूरी तरह तैयार किया जाता है जिनमें स्किल और ऐटिट्यूड, लाइफ स्किल, क्लास रूम लर्निंग, इंटर्नशिप के साथ 18 महीने का इंडस्ट्री एक्सपीरिएंस/ ऑन जॉब ट्रेनिंग, स्कॉलरशिप और प्लेसमेंट शामिल है।

Q. लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट क्यों इम्पोर्टेन्ट है ?
Ans. लॉजिस्टिक का क्षेत्र काफी विस्तृत है। वेयर हाउसिंग सिस्टम, डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम भी इसके हिस्से हैं। यहां काम करने वाले प्रोफेशनल को इन सारे कार्यों की जानकारी होनी चाहिए। इसके अलावा लेबर मैनेजमेंट, कस्टमर को-ऑर्डिनेशन, पर्चेजिंग जैसे क्षेत्र भी लॉजिस्टिक के अंतर्गत आते हैं। लॉजिस्टिक मैनेजमेंट किसी भी कारोबार, संगठन या व्यक्ति विशेष के लिए आवश्यक सामग्री या कच्चे माल की आपूर्ति करता है । कोई भी उत्पाद या सेवा या कच्चे माल की मांग और आपूर्ति में संतुलन बना रहे यह देखना और उपभोक्ता की संतुष्टि भी देखना उसका काम होता है। माल की सही डिलीवरी उसे सुनिश्चित करना होता है। उदाहरण के लिए भारत के आम, चीन के इलेक्ट्रिक सामान, इटली के ऑलिव ऑयल, अमेरिकन चॉकलेट, अरब के खजूर, जर्मनी की कारें या फिर अलग-अलग जगहों के स्पेशल आइटम्स अगर आज सरलता से हमारे स्टोर्स में उपलब्ध हैं तो इसके पीछे सबसे अहम रोल लॉजिस्टिक का ही होता है।

Q. बीबीए इन लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट क्यों करें ?
Ans. ई-कॉमर्स कंपनियों के बढ़ते कारोबार के चलते लॉजिस्टिक्स में कॅरियर के नए-नए ऑप्शन सामने आ रहे हैं। विगत कुछ वर्षों में ई-कॉमर्स कंपनियां भरपूर बिजनेस कर रही हैं। इस बिजनेस में लॉजिस्टिक कंपनियों की भूमिका नजरअंदाज नहीं की जा सकती। जबसे इंटरनेट के संसार में ई-कॉमर्स कंपनियों ने लोगों के बीच पैठ बनाई है, कई अन्य क्षेत्र भी रोजगार के लिए खुल गए हैं। इनमें लॉजिस्टिक और डिलीवरी का क्षेत्र सबसे अहम है। भारत की विशाल आबादी और ई-कॉमर्स कंपनियों के तेज विकास के कारण यह क्षेत्र तीव्र विकास कर रहा है। अभी भारत में लॉजिस्टिक इंडस्ट्री 130 अरब से ज्यादा की आंकी गई है। इसमें ग्रोथ भी जबर्दस्त है। कोई भी व्यक्ति, जो कम्युनिकेशन स्किल और मेहनत करने में यकीन रखता है, थोड़े प्रयासों से इस क्षेत्र में रोजगार हासिल कर सकता है। एक कस्बाई इलाके से लेकर दुनिया भर के मेटेपॉलिटन शहरों में भी काम के अवसर हैं। देश-विदेश में इसके प्रोफेशनल्स की डिमांड है।

एक लॉजिस्टिक मैनेजर की सैलरी कंपनी के आकार पर काफी निर्भर करती है। शुरुआत में 10 से 15 हजार सैलरी आसानी से मिल जाती है। कुछ अनुभव के बाद ही 20 से 50 हजार सैलरी हो जाती है, जो आगे चलकर एक लाख प्रतिमाह तक हो सकती है।

Q. कहाँ से करें यह कोर्स ?
Ans. झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी, रांची ने लॉजिस्टिक्स सेक्टर स्किल कौंसिल(एलएसएससी) से एमओयू करते हुए 3 वर्षीय बीबीए इन लॉजिस्टिक्स पाठ्यक्रम शुरू किया है। यह पाठ्क्रम पूर्णकालिक रोजगारपरक कार्यक्रम है जिसे केंद्रीय उच्च शिक्षा मंत्रालय (एमएचआरडी) और कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) के मार्गदर्शन में चलाया जा रहा है। यह पाठ्यक्रम उद्योग जगत की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए उसकी जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रारंभ किया गया है।

    हाई लाइट्स ऑफ़ द कोर्स

  • सरकार के उच्च शिक्षा मंत्रालय और कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय द्वारा संचालित।
  • इंडस्ट्रियल सेक्टर की जरूरतों को पूरा करने वाला।
  • स्किल्ड और इंडस्ट्री रेडी बनाने में मददगार ।
  • लाइफ स्किल्स और पर्सनालिटी डेवलपमेंट ।
  • पढ़ाई के दौरान 18 महीने का औद्योगिक प्रशिक्षण।
  • प्रत्येक प्रशिक्षण समाप्त होने पर सरकार द्वारा प्रमाणपत्र।
  • औद्योगिक प्रशिक्षण के कार्य अनुभव को मान्यता।
  • औद्योगिक प्रशिक्षण के दौरान 9000-15000 छात्रवृति सुविधा।
  • ग्रामीण छात्रों के लिए रोजगार प्राप्त करने का सुनहरा अवसर।
  • लॉजिस्टिक्स सेक्टर स्किल कौंसिल द्वारा नौकरी की सुविधा।
  • स्टार्टअप्स और इंटरप्रेन्योर बनने का अवसर।
Idea-Pitching-IIC-02

Call for Proposals for Idea Pitching Contest

Theme: To Promote Entrepreneurship Amongst Tribal Women of Nation

  • Choose any of the area mentioned below : –
    • Tribal Healing
    • Forest Products
    • Tribal Art and Craft
    • Tribal traditional Process or Indigenous Practises
  • Background of any new idea you want to propose or the solution to the existing problem you want to suggest (1000 words)
  • State its Objectives (Only 2-3 focused objective that can be observed, measured or clearly assessable):
  • Describe the Methodology (1000 words):
    (Describe how your idea or plan will leverage livelihood/economic opportunities and solve societal challenges in a sustainable way. Support with defined steps/relevant process details, e.g., flow chart, model, survey procedures, – as applicable to achieve the stated objectives)
  • Suggest a viable solution to make the proposed idea scalable
  • Submit your Big Idea Via the link below: –

Register Now Link

    Rules:

  • Students all across India can register for the Idea Pitching individually or in teams.
  • There can be no more than 4 members in a team (1 Female and 1 Tribal representation is mandatory in team)
  • Selected ideas on the criteria mentioned below will be asked to give presentation for 15-20 minutes (max 10 power point slides) defining a specific solution to a local problem in front of the Jury. The date and time of presentation which will be informed to the selected participants.
  • The idea must be original.
  • No team/contestant can take part in more than one category.
  • Few Selected ideas will be incubated by the University and mentored by WICCI- Tribal Welfare and Entrepreneurship council.
  • Jury reserves the right of admittance for all contestants and can eliminate contestants without disclosing any reason.
    Selection Criteria
    The new ideas or the solution to the problems identified by the participants will be judged on the following criteria:

    1. Quality of the proposal: 25%

    2. Has any research into the idea been done?
    3. How complete is the idea?
    1. Impact: 25%

    2. Does it solve a problem that exists?
    3. What is the potential market? How many people could it potentially benefit? Is the plan scalable?
    4. Is it in line with the pitching theme and the objective of promoting sustainable livelihood and self-reliance amongst Tribal Women.
    1. Innovation: 25%

    2. Is this a new solution to the problem or completely new idea? Does a similar product/solution exist? Does it have any unique features to distinguish it?
    3. Is there a new approach to an old solution (within the product) that already exists?
    1. Sustainability: 25%

    2. Is there a long-term vision for the idea and product?
    3. Is there a team behind this idea?
    4. How will this drive forwards after the start, until completion?
    5. Is there a possibility for funding of the project? Has this been identified and clearly described?

For more details contact:
Kumar Amrendra
Convener, Jharkhand Rai University, Ranchi
Contact: 7368000411

Rashmi Raj
Convener, WICCI
Contact: 7903881604 / 9431579389

Idea-Pitching-IIC-02

आईडिया पिचिंग प्रतियोगिता के प्रस्ताव के लिए आवेदन प्रारूप

थीम : देश की आदिवासी महिलाओं में उद्यमिता को बढ़ावा।

    दिए गए विषयों में से किसी एक का चुनाव करें।

  • आदिवासी चिकित्सा
  • वन उत्पाद
  • आदिवासी कला और शिल्प
  • जनजातीय पारंपरिक प्रक्रिया और स्वदेशी प्रथाएँ।
  • किसी भी नए विचार की पृष्ठ्भूमि जिसे आप प्रस्तावित करना चाहें या मौजूदा समस्या का समाधान उपलब्ध करना चाहें ( 1000 शब्दों में )
  • उद्देश्यों का परिचय : ( 2 या 3 महत्वपूर्ण उद्देश्यों का परिचय दें जिन्हें स्पष्ट रूम में मापा या मूल्यांकित करने योग्य हो)
  • कार्यप्रणाली का विवरण ( 1000 शब्द में ):
    (आपके दिए गए विचार किस प्रकार आजीविका /आर्थिक विकास सामाजिक चुनौतियों को बदलने में लाभ दायक साबित हो सकते है। निम्नलिखित प्रक्रिया एवं विवरण में प्रस्तुत करें जैसे :फ्लो चार्ट,मॉडल, सर्वे प्रक्रिया इत्यादि। जिनके माध्यम से उद्देश्यों को पूरा किया जा सके।)
  • प्रस्तावित विचार को मापने योग्य बनाने के लिए वयवहारिक समाधान का सुझाव दें।
  • अपने मौलिक विचार को निचे दिए गए लिंक के जरिये भेजें।

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    नियम :

  • देश भर के स्टूडेंट्स आईडिया पिचिंग कांटेस्ट में निबंधित होकर एकल या टीम के तौर पर भाग ले सकते है।
  • एक टीम में 4 से अधिक सदस्य नहीं हो सकते हैं (टीम में 1 महिला और 1 आदिवासी प्रतिनिधित्व अनिवार्य है)
  • मानदंडों के आधार पर चयनित विचारों को 15-20 मिनट का मौका ( अधिकतम स्लाइड में ) प्रतुतीकरण के लिए दिया जायेगा। स्थानीय समस्या का विसिष्ट समाधान प्रतियोगिया के जजों के समक्ष करना होगा। चयनित प्रतिभागियों को प्रतुतीकरण से जुड़ी जानकारी (समय और तारीख़ ) की जानकारी समय पर दे दी जाएगी।
  • विचार मौलिक होने चाहिए।
  • प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाली टीम या प्रतिभागी एक से ज्यादा वर्ग में हिस्सा नहीं ले सकते है।
  • चुनिंदा मौलिक विचारों को यूनिवर्सिटी और विक्की – ट्राईबल वेलफेयर एंड इंटरप्रेनरशिप कौंसिल द्वारा संरक्षित कर आगे बढ़ाया जायेगा।
  • जूरी सभी प्रतियोगियों के प्रवेश का अधिकार सुरक्षित रखता है और किसी भी कारण का खुलासा किए बिना प्रतियोगियों को समाप्त कर सकता है।

चयन प्रक्रिया :
नए विचारों या प्रतिभागियों द्वारा पहचानी गई समस्याओं के समाधान को निम्न मानदंडों पर आंका जाएगा:

1. प्रस्ताव की गुणवत्ता: (25 % )

  1. क्या विचार में कोई शोध किया गया है?
  2. विचार पूर्ण कैसे हुआ है ?

2. प्रभाव: (25 %)

  1. क्या यह मौजूद किसी समस्या का हल है?
  2. संभावित बाजार क्या है? संभावित रूप से कितने लोगों को इसका लाभ मिल सकता है? क्या योजना मापनीय है?
  3. क्या यह दिए गए (पिचिंग) विषय और आदिवासी महिलाओं के बीच स्थायी आजीविका और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य के अनुरूप है।

3. नवोन्मेष : ( 25 %)

  1. क्या यह समस्या का एक नया समाधान है या पूरी तरह से नया विचार है? क्या एक समान उत्पाद / समाधान मौजूद है? क्या इसे भेद करने के लिए कोई अनोखी विशेषताएं हैं?
  2. क्या एक पुराने समाधान (उत्पाद के भीतर) के लिए एक नया दृष्टिकोण है जो पहले से मौजूद है?

4. स्थिरता : ( 25 %)

  1. क्या यह विचार और उत्पाद के लिए दीर्घकालिक दृष्टि है?
  2. क्या इस विचार के पीछे कोई टीम है?
  3. यह ड्राइव शुरू होने के बाद, पूर्ण होने तक कैसे चलेगी?
  4. क्या परियोजना के वित्तपोषण के लिए कोई संभावना है? क्या इसकी पहचान और स्पष्ट रूप से वर्णन किया गया है?

For more details contact:
Kumar Amrendra
Convener, Jharkhand Rai University, Ranchi
Contact: 7368000411

Rashmi Raj
Convener, WICCI
Contact: 7903881604 / 9431579389

mining engineering

माइनिंग इंजीनियरिंग : रोजगार की गारंटी

खनिज संपदा हमारे जीवन का मुख्य आधार है। खनिज संपदा को निकालने का काम प्रशिक्षित लोगों के नेतृत्व में किया जाता है, जिन लोगों को माइनिंग इंजीनियर कहते हैं। खनिज संपदा को निकालने के कार्य को खनन (माइनिंग) इंजीनियरिंग कहते हैं।

भारत में खनिज संपदा का बहुत भंडार है। बिहार, झारखंड, उड़ीसा, मध्य प्रदेश व पश्चिम बंगाल जैसे राज्य में खनिज पदार्थ भारी मात्रा में हैं। खनिज संपदा देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसको देखते हुए देश में माइनिंग इंजीनियर्स की डिमांड काफी तेजी के साथ बढ़ती जा रही है। खनन इंजीनियरिंग में धरती के खनिज पदार्थों का पता लगाना और उनकी खुदाई कर बाहर निकालना होता है। खनन इंजीनियरिंग में प्रमुख रूप से उत्खनन, कच्चे खनिज पदार्थों का टेस्ट करना होता है।

माइनिंग या खनन इंजीनियरिंग में कैरियर बनाने के लिए सबसे पहले उम्मीदवार का किसी मान्यताप्राप्त विद्यालय से साइंस स्ट्रीम में 12 वीं कक्षा पास करना अनिवार्य है. इसके बाद उम्मीदवार माइनिंग से बीटेक (B. Tech), बीई (B.E) और बीएससी (BSC) कोर्स कर सकते है.

माइनिंग कोर्स के अन्तर्गत उम्मीदवार को ड्रिलिंग (Drilling), ब्लास्टिंग (Blasting), माइन कॉस्ट इंजीनियरिंग (Mine Cost Engineering), अयस्क रिजर्व विश्लेषण (Ore Reserve Analysis), ऑपरेशन विश्लेषण (Operation Analysis), माइन वेंटीलेशन (Main ventilation), माइन प्लानिंग (Mine Planning), माइन सेफ्टी (Mine Safety), रॉक मैकेनिक्स (Rock Mechanics), कम्प्यूटर एप्लीकेशन (Computer Applications), इंडस्ट्रियल मैनेजमेंट (Industrial Management) से सम्बंधित जानकारी दी जाती है।

मुख्य रूप से इस कोर्स के तहत उम्मीदवार को खनिज पदार्थों की संभावनाओं (Prospects) का पता लगाना, उनके नमूने एकत्रित करना (To collect their samples), भूमिगत (Underground) तथा भूतल खदानों का विस्तार (Surface mines expand) और विकास करना, खनिजों को परिष्कृत करना (To refine minerals) आदि के बारे में जानकारी प्रदान की जाती है।

माइनिंग इंजीनियरिंग में पढ़ाई के बाद कैंडिडेट्स के पास सरकारी और निजी सेक्टरों में रोजगार के अवसर हैं। टाटा आयरन एंड स्टील, रिलायंस पेट्रोलियम, इंडियन ऑयल, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया, यूरेनियम कॉपोरेशन ऑफ इंडिया, सरकारी खनन निगम, हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड, नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन, इंडियन ब्यूरो ऑफ माइंस लिमिटेड, माइनिंग रिसर्च सेंटर, इंडियन एक्सप्लोसिव लिमिटेड, इंडियन डेटोनेटर्स लिमिटेड में करियर शुरू कर सकते हैं।

    झारखण्ड में माइनिंग इंजीनियरिंग के टॉप संस्थान :

  • आटीआईटी धनबाद
  • बीआईटी सिंदरी
  • सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ़ माइनिंग एंड फ्यूल रिसर्च धनबाद गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक, निरसा, धनबाद
  • झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी, रांची