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B.PHARMA BEST COLLEGE RANCHI

SNEHA KUMARI, B. PHARMA, ATTENDS ROOTS 2020

When Sneha Kumari decided to take admissions in Bachelor of Pharmacy this year, her father supported her decision. Even in her school, Sneha always had a special interest in subjects like Biology.

She would spend long hours studying about human anatomy and what causes disease.

Today, Sneha is student of Pharmacy at Jharkhand Rai University, Ranchi. She is excited to attend the Foundation Program called “Roots 2020” meant for all the new students who have joined various programs at the University this year.

BEST PHARMACY COLLEGE RANCHI JHARKHAND

“The introductory sessions are really helpful for me. I’m getting to know several Professors and faculties who will be a part of my journey for the next few years,” Sneha says.

She goes on to add that “I encourage all the new students to participate the 20 days Orientation/Foundation Program, so that we students can know what to expect from the University, and what are our duties while we pursue our program at JRU. And of course, make new friends.”

Sneha says, “All those who are yet to complete their admissions process need to quickly do so and attend the remaining “Roots 2020” sessions.”

“I look forward to seeing all the new students,” she laughs, “because apart from academics, the sessions will include different club activities from JRU’s Cultural Club, Sports Club and Science Club.”

Sneha is excited to participate in all these activities.

Poly House

विश्वस्तरीय हाईड्रो फोनिक्स में प्रशिक्षण और सर्टिफिकेट के साथ बीएससी इन एग्रीकल्चर की डिग्री

बीएससी एग्रीकल्चर (ऑनर्स) 4 वर्षीय डिग्री पाठ्यक्रम के लिए झारखण्ड राय विश्व विद्यालय,राँची एक विश्वसनीय नाम है । यहाँ कृषि स्नातक की पढ़ाई करने वाले छात्रों को मिलता है विश्व स्तरीय हाइड्रो फोनिक्स तकनीक में प्रशिक्षण और प्रमाणपत्र के साथ 4वर्षीय बीएससी एग्रीकल्चर ऑनर्स की डिग्री। झारखंड राय विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित हाइड्रो फोनिक्स पोली हाउस उत्तर भारत का एकलौता, उन्नत पोली हाउस है। यह पूरी तरह ऑटोमेटिक तकनीक से संचालित है जिसमें बिना मिट्टी के पानी और सूर्य की रोशनी की सहायता से पौधों का नैसर्गिक वृद्धि कराया जाता है।

विश्वविद्यालय के नामकुम स्थित स्थायी कैंपस में 20 एकड़ भूमि पर कृषि कार्य किया जाता है जिसमें छात्रों की सीधी भागीदारी होती है । कैंपस में औषधीय पौधों के साथ फूलों की खेती कों बढ़ावा दिया जाता है। सीनियर फेकल्टी के नेतृत्व में फार्म मैनेजर के द्वारा नियमित छात्रों को पेड़- पौधों और फसलों में होने वाले बदलावों से अवगत कराने का कार्य किया जाता है।

झारखण्ड राय विश्वविद्यालय में सैधांतिक समझ के साथ साथ प्रैक्टिकल एडुकेशन पर ज्यादा जोर दिया जाता है। पढाई के 4 वर्षों के दौरान छात्रों कों मेंटरशीप प्रोग्राम से जोड़ कर इन्डस्ट्रीयल टूर, रूरल एग्रीकल्चर एक्सटेंशन वर्क एक्सपीरिएंस, एडुकेशनल टूर, फार्म विजिट, सेमिनार, वर्कशॉप, गेस्ट लेक्चर, ऑफ लाइन और ऑनलाइन शिक्षा, लाइफ स्किल ट्रेनिंग देकर इंडस्ट्री रेडी बनाया जाता है । सफलतापूर्वक पढाई पुरी करने पर यूनिवर्सिटीप्लेसमेंट सेल इन्हें नौकरी प्राप्त करने में भी सहायता प्रदान करता है।यूनिवर्सिटी ने स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए कैम्पस में इनोवेशन सेल और लैब भी स्थापित किया है।यूनिवर्सिटी के कई छात्र कृषि क्षेत्र में खुद का उद्यम स्थापित करके अपने और दूसरों की आजीविका का प्रबंध कर रहे हैं।

Expert Talk ” Issue and Challenges in International financial Accounting”

Speakers :
Mr. Michael Wagner, Vice President, Miles Education Private Limited, Hyderabad
Mr. Nitish Kashyap, Marketing and Strategic Consultant, Bengaluru

Saturday, Sep 26, 2020 | Time :3:00 pm | 50 minutes | (UTC+08:00) Kuala Lumpur, Singapore
Meeting number: 170 612 6026
Password: BWp8eyd6dJ8 (29783936 from video systems)

Webex Meeting Link :
https://meetingsapac39.webex.com/meetingsapac39/j.php?MTID=me3eb3dd96b819d357df687c9b43cef74

Join by video system
Dial 1706126026@meetingsapac39.webex.com
You can also dial 210.4.202.4 and enter your meeting number.

Organized by Department of Management, Jharkhand Rai University, Ranchi

काव्य उत्सव हिंदी दिवस पखवाड़ा झारखण्ड राय विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित ओंनलाइन्न काव्य पाठ प्रतियोगिता

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काव्य पाठ के विषय :
राष्ट्रीय भावना राष्ट्रीय भावना देश प्रेम प्रकृति चित्रण भाई चारा वैश्विक गतिविधियां हिंदी प्रेम

    काव्य पाठ प्रतियोगिता के नियम:

  • प्रतियोगी को महाविद्यालय या विश्वविद्यालय का छात्र होना चाहिए।
  • प्रतियोगी अपने किसी प्रिय कवि या लेखक की कविता का पाठ कर सकता है।
  • प्रतियोगी अपनी स्वरचित कविता का पाठ भी कर सकता है।
  • कविता पाठ हिंदी भाषा में किया जायेगा।
  • प्रत्येक प्रतियोगी को ५ मिनट का समय मिलेगा ।
Expert Talk Mechanical

Expert Talk: “TAKE CHARGE OF YOUR CAREER AND GRAB A DREAM JOB”

Speaker : Dr. J. Jessy Christin

Vice President – HR & Operations
CONVATE – International Recruitment Firm, Bengaluru

Date: September 26, 2020 / Time: 11.30 am – 1.00 pm

Meeting Platform: WebEx Meet

Meeting number: 170 289 5030
Password: E2rhfwHnk87

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Join by video system
Dial 1702895030@jharkhandruniversity.webex.com

You can also dial 210.4.202.4 and enter your meeting number.

WhatsApp Group

Organized by Department of Mechanical Engineering, Jharkhand Rai University, Ranchi

National Education Policy 2020 : Features and Prospects

Speaker: Dr. Dipak Kumar Bose

Associate Professor, Department of Agriculture
Sam Higginbottom University of Agriculture Technology and Sciences (SHUATS), Naini, Prayagraj

Time: 09:00 – 10:00 Am
Date: 25 Sept 2020

Participants: All Students

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Organized by NSS Cell, Jharkhand Rai University, Ranchi

Pharmacy Day updated

Panel discussion on Transforming Global Health: Interdisciplinary Challenges, Perspectives and Strategies

In the occasion of Pharmacist day at 25 September, 2020

Panelists:
1) Dr. Nitesh Kumar
Director, Paras HEC Hospital, Ranchi

2) Dr. Randheer Gupta
Member, Jharkhand State Pharmacy Council

3) Mr. Sachinandan Basak
Product Development Owner, Baxter Innovation and Business Solution, Bengaluru

Moderator:
Mr. Hemendra Mishra, HOD, Dept. of Pharmaceutical Sciences, Jharkhand Rai University, Ranchi

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Organized by Department of Pharmacy, Jharkhand Rai University, Ranchi

International E-Conference

झारखण्ड राय विश्वविद्यालय में दो दिवसीय इंटरनेशनल ई- कॉन्फ्रेंस का आयोजन

झारखण्ड राय विश्वविद्यालय, रांची में शनिवार को दो दिवसीय इंटरनेशनल ई- कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। “मल्टी डिसिप्लनरी एप्रोच फॉर सस्टनेबल डेवेलपमवेंट”(ICMASD 2020) विषय पर आयोजित अंतराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के पहले दिन उद्घाटन सत्र का प्रारंभ दीप प्रज्वलित कर सरस्वती वंदना के साथ किया गया। इस अवसर पर इ स्मारिका का विमोचन भी किया गया। स्वागत भाषण देते हुए झारखण्ड राय विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. सविता सेंगर ने उद्घाटन सत्र में उपस्थित अतिथियों का स्वागत किया। डॉ. सेंगर ने अपने संबोधन में कॉन्फ्रेंस के विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा की “तकनीक एक सतत विकास प्रक्रिया है। आज पूरा विश्व कोरोना वाइरस से जूझ रहा है। इस समय तकनीक एक ऐसे प्लेटफॉर्म की तरह सामने आया है जिसने सभी सेक्टरों में काम करने वालों को रास्ता दिखाया है। तकनीक के बदले प्रयोग ने ठोस नवाचार और समावेशी विकास के विकास में महती भूमिका निभाई है। डॉ. सेंगर ने कहा की सतत विकास एक प्रक्रिया है जो निरन्तर चलता है । सतत विकास से हमारा अभिप्राय ऐसे विकास से है, जो हमारी भावी पीढ़ियों की अपनी जरूरतें पूरी करने की योग्यता को प्रभावित किए बिना वर्तमान समय की आवश्यकताएं पूरी करे। संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रस्तावित सस्टेनेबल डेवलपमेंट’ संकल्प को, जिसे सतत विकास लक्ष्यों के नाम से भी जाना जाता है। इसका उद्देश्य का उद्देश्य सबके लिए समान, न्यायसंगत, सुरक्षित, शांतिपूर्ण, समृद्ध और रहने योग्य विश्व का निर्माण करना और विकास के तीनों पहलुओं, अर्थात सामाजिक समावेश, आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण को व्यापक रूप से समाविष्ट करना है।

विषय प्रवेश करते हुए झारखण्ड राय विश्वविद्यालय के एडवाइजर और एचइसी के पूर्व सीएमडी प्रो. अभिजीत घोष ने कहा की ” कोरोना महामारी ने पुरे विश्व को प्रभावित किया है। परिस्थितिकी तंत्र और पर्यावरण में देखे जा रहे बदलाव यह संकेत देते है की प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन कर हमने इसे कितना नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने झरिया में लगी आग का जिक्र करते हुए कहा की यह संवेदन हीनता का उदाहरण है अबतक इसे बुझाया नहीं जा सका है। प्रो. घोष ने जानकारी देते हुए बताया की कॉन्फ्रेंस के पहले दिन 100 शोध पत्रों में से चयनित 72 शोध पत्रों को पढ़ा जायेगा। इस कॉन्फ्रेंस में देश के 14 राज्यों के अलावा अमेरिका, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और तजाकिस्तान से आये शोध पत्रों को शामिल किया गया है।“

मुख्य अतिथि डॉ. सुनील कुमार वर्णवाल (आईएएस) प्रिंसिपल सेक्रेटरी झारखण्ड सरकार ने अपने संबोधन में बताया की ” सतत विकास लक्ष्यों का उद्देश्य सबके लिए समान, न्यायसंगत, सुरक्षित, शांतिपूर्ण, समृद्ध और रहने योग्य विश्व का निर्माण करना और विकास के तीनों पहलुओं, अर्थात सामाजिक समावेश, आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण को व्यापक रूप से समाविष्ट करना है। सतत विकास के लक्ष्य एक दूसरे से जुड़े हुए है। विश्व आज कोरोना जैसी आपदा से जूझ रहा है। इस आपदा ने मनुष्य को जीवन के महत्व से परिचित कराया है। मनुष्य को प्रकृति, पर्यावरण और जीवन का महत्व समझाया है। डॉ. वर्णवाल ने जोर देते हुए कहा की ” तकनीक के कारण इस मुश्किल दौर में भी हम एक दूसरे से जुड़े हुए है। तकनीक एक समस्या भी बन सकती है जरुरत है समाज को इस समस्या से बचाने की। इंटरनेशनल कांफ्रेंस का विषय वर्तमान परिस्थिति को देखते हुए एक सराहनीय पहल है। यहाँ प्रस्तुत होने वाले शोध पत्र सबका मार्गदर्शन करेंगे।

विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. पियूष रंजन ने उद्घाटन सत्र के समापन अवसर पर सभी अतिथियों का धन्यवाद देते हुए कहा की ” दो दिनों तक चलने वाले इस अंतराष्ट्रीय कांफ्रेंस के जरिये सतत विकास, नवाचार,सतत विकास लक्ष्य से जुड़े अंतः विषय चर्चा और शोध पत्रों का प्रस्तुतीकरण किया जायेगा। उन्होंने देश विदेश से जुड़े अतिथियों, शोधार्थियों, के साथ विश्वविद्यालय के फैकल्टी मेंबर और तकनिकी सहायता प्रदान करने वाली टीम के सदस्यों को भी धन्यवाद दिया। डॉ. रंजन ने दो दिवसीय इंटरनेशनल ई कॉन्फ्रेंस के सफल आयोजन के लिए समन्वयक डॉ. श्रद्धा प्रसाद और सह- समन्वयक डॉ. सुमित कुमार पांडेय का भी धन्यवाद किया ।

ABC of artificial intelligence

आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की ABCD

बच्चों को A फॉर एप्पल और B फॉर बॉय सिखाने के दिन पुराने पड़ चुके है। आज बच्चे A फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, B फॉर बिग डेटा, R फॉर रोबोटिक्स और M फॉर मशीन लर्निंग जैसे शब्दों से परिचित है । यह सब उनके सिलेबस का हिस्सा है। मशीनों ने दुनिया को बदल कर रख दिया है इस कारण बच्चों की दुनिया बदली है इससे कोई भी अछूता नहीं रह सकता है।

आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की ABCD :

A : आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस
इंसानों ने तकनीक का इजाद किया। लेकिन बुद्धिमान मशीनों से इंसान को पीछे छोड़ दिया है।

B: बायस
मशीनें भेद भाव कर सकती है यह सुन कर विश्वास नहीं होता लेकिन यह भेदभाव कई अर्थों में सामने आया है जो मानव को सोचने पर मजबूर करता है। मशीनों में जो डेटा फीड होता है वह एल्गोरिदम की बुनियाद पर काम करता है। बनाने वालों ने इनके साथ भी भेदभाव किया। मर्दों और औरतों के बीच भेद भाव और गोरे और काले रंग वालों के बीच भेद भाव करना बड़ी समस्या बनकर उभरा है।

C: चैटबॉट
मशीनें इंसानों की तरह बातें करती हैं ।यह संभव हो पाता है नैचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग और नैचुरल लैंग्वेज जेनरेशन भाषा के जरिये।। इसे ही चैटबॉट मशीनें कहते हैं।

D : डिज़ाइन
डिज़ाइनिंग एक चुनौती भरा और समयसाध्य कार्य है। आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस ने इस काम को ज़्यादा तेज़ी और बेहतर तरीक़े से करना शुरू किया है। बड़ी कंपनियाँ तो नए डिज़ाइन और पार्ट्स बनाने के लिए आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस का ही इस्तेमाल कर रही हैं।

E: इमरजेंसी
आपात स्थिति से निपटने और चेतावनी देने में इसकी भूमिका प्रमुख है। ये मशीनें न्यूज़ रिपोर्ट का आकलन करके ये बता सकेंगी की किस इलाक़े में तनाव पैदा होने वाला है।

F: फ़ुटबॉल
खेल के मैदान में आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमालकरने का प्रयास जारी है। इसके ज़रिए यह आकलन संभव हो सकेगा कि कौन सा ख़िलाड़ी खेल के मैदान में कौन सा अगला दांव चलने वाला है।

G: जेनेरेटिव एडवर्सरियल नेटवर्क
पिक्चर के साथ किये जाने वाले छेड़छाड़ को लेकर अक्सर शिकायत मिलती रहती है। आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की मदद से इसे रोका जा सकता है।जेनेरेटिव एडवरसरियल नेटवर्क के ज़रिए नई तस्वीरें बनाई जा सकेगी ।

H: हैलुसिनेशन
इंसानी दिमाग अक्सर मतिभ्रम या ग़लतफ़हमी के शिकार होता है। मशीनें भी इससे अछूती नहीं है। मशीनों की यह गलती बड़ी दुर्घटनाओं को आमंत्रित करती है। एआई के सहयोग से इन्हें रोका जा सकता है।

I: इमैजिनेशन
कल्पना मनुष्य का स्वाभाविक गुण है। कल्पना का सहारा लेकर किसी भी कार्य को मूर्त रूप देने का प्रयास किया जाता है। किसी भी चीज़ को देखने का मशीन का नज़रिया इंसान से अलग होता है वो कई मायनों में हम से बेहतर भी। फाइन आर्ट्स के सेक्टर में मशीनों का सहयोग हैरान करने वाला साबित होगा।

J: जाम
ट्रैफ़िक जाम से निपटने के लिए AI का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है। आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस इसके इस्तेमाल से पता लगाया जा सकता है कि कहाँ जाम लग सकता है और उसे कंट्रोल कैसे किया जा सकता है।

K: निटिंग
फैशन और टेक्सटाइल इंडस्ट्री भी AI से अछूती नहीं है। कढ़ाई बुनाई के कामों में भी इसका बखूबी इस्तेमाल किया जा रहा है। स्काईनिट की मदद से बुनाई के ऐसे पैटर्न तैयार किए गए हैं, जो अपने आप में अद्भुत हैं।

L : लैंग्वेज
भाषा संचार का सर्वोत्तम साधन है। अंग्रेजी भाषा के वैश्विक पहचान के पीछे व्यापक स्वीकार्यता शामिल है। अक़्लमंद मशीनों की अपनी ज़बान होती है । मशीनी भाषा ने कंप्यूटर को एक अलग पहचान दिलायी।

M : मशीन लर्निंग
मशीन को एक छोटी सी चीज़ सिखाने के लिए ढेर सारा डेटा फीड करना पड़ता है। आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस वाली मशीनों की डिज़ाइनिंग ऐसी हैं कि वो इंसान की तरह जानकारियां इकट्ठा करें।

O: ओरेकल
इंसान की नज़र से तेज़ काम मशीनें करती हैं। आर्टिफ़िशयल इंटेलिजेंस की मदद से आंखों की बीमारियां और कैंसर जैसी बीमारियों के लक्षण उसके पनपने के पहले ही भांप लिए जाते हैं। अल्ज़ाइमर जैसी बीमारी की भविष्यवाणी संभव हो पाया है।

P: पुलिसिंग
चोर पुलिस के खेल में अपराधी अक्सर सबूतों और पहचान के आभाव में बरी हो जाते है। दुनिया भर में अपराधियों को पकड़ने के लिए आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की मदद ली जा रही है। अपराधियों के चेहरे के किसी हिस्से की पहचान कर उन्हें पकड़ने का प्रयोग किया जा रहा है। न्याय प्रक्रिया को सरल बनाने बेहतर बनाने में भी इसका बेहतर इस्तेमाल हो रहा है।

Q: क्वेक
भूकंप प्राकृतिक आपदा है जिसकी भविष्यवाणी असंभव है। अब ऐसी मशीनें बनाई जा रही हैं जो भूकंप के बाद आने वाले झटकों की जगह बता सकती हैं । इससे बड़े पैमाने पर होने वाले नुकसान को रोका जा सकता है।

R: रैप
विदेशों में संगीत की दुनिया में अजीब चलन है। गानों के बीच में तेज़ गति से डायलॉग बोले जाते हैं। इसे सरल भाषा में रैप कहते हैं। रैप इतनी तेज़ी से बोला जाता है कि इसके बोल आसानी से पकड़ में नहीं आते लेकिन आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस से इस काम को आसान बनाने की कोशिश की जा रही है।

S: स्मार्ट होम
जो देश तकनीकी रूप से ज़्यादा एडवांस हैं, वहां घर के बहुत से काम मशीन की मदद से होते है। आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की मदद से उन मशीन को ऑन-ऑफ़ किया जा सकता है, जिनके इस्तेमाल की ज़रूरत नहीं है। बिजली की खपत को रोकने में यह कारगर उपाय है।

T: टुरिंग टेस्ट
आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस का दायरा मापने के लिए टुरिंग टेस्ट सबसे विश्वसनीय माना जाता है. इस टेस्ट के मुताबिक़ मशीन की क़ाबिलियत की बुनियाद है कि वो किस हद तक बातों के ज़रिए इंसान को बेवकूफ़ बना सकती हैं.

V: वाइनयार्ड
यूरोप और अमरीका में किसानों की मदद के लिए आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल किया जा रहा है। अंगूर की खेती में इसका ख़ूब इस्तेमाल हो रहा है। आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस का दायरा मापने के लिए टुरिंग टेस्ट सबसे विश्वसनीय माना जाता है. इस टेस्ट के मुताबिक़ मशीन की क़ाबिलियत की बुनियाद है कि वो किस हद तक बातों के ज़रिए इंसान को बेवकूफ़ बना सकती हैं ।

W: वाइल्डलाइफ
जंगलों में भारी मात्रा में क़ीमती संपदा मौजूद है, जिसकी बड़े पैमाने पर चोरी और तस्करी होती है। दुर्लभ जाति के जानवरों का शिकार भी ख़ूब होता है। हालांकि इस पर नज़र रखने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल काफ़ी समय से हो रहा है ।

X: एक्स-रेटेड
इंसान की जिस्मानी ज़रूरतें पूरा करने में भी मशीनें अहम किरदार निभा रही हैं और सेक्स इंडस्ट्री में इनका बड़ा रोल है। आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल से अब इस पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है।

Y: यमी
अगर रसोई में खाना बनाने का मन ना हो तो इसके लिए भी अब आपके पास विकल्प हैं। आप आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के ज़रिए खाना बना सकते हैं। बुद्धिमान मशीनें आपके दिए गए कमांड के अनुसार आपके पसंद का खाना बनाकर तैयार कर देगीं।

Z : यानी ज़ू
सर्दी के मौसम में चिड़ियाघरों में सेंसर वाले हीटर लगाए जाते हैं जो जानवर के शरीर की ज़रूरत के मुताबिक़ उसके लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर देते हैं।

Artificial intelligence

आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस

कंप्यूटर का अविष्कार मानव इतिहास का युगांतरकारी अध्याय है इस अविष्कार के साथ ही मनुष्य ने अपने काम मशीनों से करवाने का चलन शुरू किया था । कृत्रिम बुद्धि शब्द का इस्तेमाल तब से ही चलना में आया। इसे ही आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के नाम से सभी पहचानते है।

फेसबुक ने 2017 में अपने एक रिसर्च प्रोग्राम को अचानक बंद कर दिया गया जो आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस पर शोध से संबंधित था। मीडिया रिपोटों के जरिये जो जानकारी सामने आयी वह बेहद हैरान करने वाली थी। शोध कार्यक्रम इसलिए बंद करना पड़ा क्योंकि डिज़ाइन किए गए चैटबॉट्स ने अंग्रेज़ी के बजाय एक अलग ही भाषा ईज़ाद कर ली जिसे इंसान नहीं समझ सकते थे। । इस घटना को लेकर विज्ञान जगत में काफी बहस हुई। इस के बाद दुनिया के कई बड़े वैज्ञानिकों ने यह माना की भविष्य में मानव को मशीनों से चुनौतियों का सामना करना होगा। इस के बाद से ही दुनिया भर में वैज्ञानिक अक़्लमंद मशीनें तैयार करने में लगे हुए है जो मानवता की रक्षा कर सकें। कोरोना वायरस ने दुनिया को जितना प्रभावित करना था किया लेकिन अब पूरी दुनिया की नजर इसके वैक्सीन की खोज पर टिकी है। कोरोना वायरस कोविड-19 की वैक्सीन खोजने की रेस में रूस ने स्पुतनिक 5 नामक टीके को अविष्कार करने का दावा किया है। भारत समेत दुनिया के कई देश भी इसी काम में जुटे हैं। वैज्ञानिक, शोधकर्ता और दवा बनाने वाले साथ मिल कर इस चुनौती को कम से कम समय में पूरी करने की कोशिश में लगे हैं। इस चुनौती से निपटने में सबसे बड़ा सहायक साबित हुआ है आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग।

पहले के दौर में कोई नई वैक्सीन या दवा बनने में सालों का वक्त लगता था। लेकिन एआई और मशीन लर्निंग के इस्तेमाल से इस काम को सालों की बजाय अब कुछ दिनों में ही पूरा कर लिया जाता है।

आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस:
ग्रीक मिथकों में ‘मैकेनिकल मैन की अवधारणा से संबंधित कहानियाँ मिलती हैं अर्थात् एक ऐसा व्यक्ति जो हमारे किसी व्यवहार की नकल करता है। प्रारंभिक यूरोपीय कंप्यूटरों को ‘लॉजिकल मशीन ‘ कहकर बुलाया जाता था। तकनीक के बढ़ते प्रयोग और तेज गति से काम करने करने के विचार को समृत वर्क में बदलने के लिए ऐसी मशीनों के बारे में सोचा गया जो इंसानों के निर्देश को समझना, चेहरे की पहचान, ख़ुद से गाड़ियां चलाना , किसी गेम को जीतने के लिए खेलना, घरेलु काम करना बेहतर और समझदारी के साथ कर सके। यही कहलाया एआई या आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस। इसका हमारे जीवन में कितना दखल है इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते है की होटल में रोबोट, कार का ड्राइवर, हॉस्पिटल में सर्जरी करने वाले, ट्रैफिक कण्ट्रोल करने वाले सभी रोबोट्स ही है। इतना ही नहीं नयी दवाएं तैयार करना, नये केमिकल तैयार करना, निर्देश देना, मार्ग बताना, माइनिंग करने और यहाँ तक की एयर ट्रैफिक कंट्रोल के लिए आर्टिफ़िशियल दिमाग का इस्तेमाल किया जाता है। नीति आयोग ने इसके महत्व को देखते हुए आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग के मुद्दे पर बहस और विचार करने के लिए ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए राष्ट्रीय नीति’ पत्र बनाया था। भारत सरकार ने राष्ट्रीय “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पोर्टल” लॉन्च किया है, जिसका नाम एआई डॉट गॉव डॉट इन (ai.gov.in) है।

भारत अपनी अर्थव्यवस्था को डिज़िटल अर्थव्यवस्था बनाने के साथ-साथ सरकारी काम-काज को AI से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। रोबोटिक्स, वर्चुअल रियल्टी, बिग डेटा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग को फिफ्थ इंडस्ट्रियल रिवोल्युशन कहा जा रहा है इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग इंटरनेट ऑफ थिंग्स, 3-डी प्रिंटिंग और ब्लॉक चेन शामिल हैं ।