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“जनजातीय समृद्ध विरासत एवं बुद्धिमता को वैश्विक पहचान देते हुए आदिवासी महिलाओं को उद्यमिता से जोड़ने के लिए कौंसिल प्रतिबद्ध “- ड़ॉ. सेंगर ।

विमेंस इंडियन चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (विकी), ट्राइबल वेलफेयर एंड इंटरप्रेन्योरशिप कॉउन्सिल देश की आदिवासी महिलाओं को उद्यमिता और नवाचार से जुड़े कार्यो के लिए प्रेरित करने एवं उनके सामाजिक- आर्थिक विकास के लिए प्रतिबद्ध है। विकी की स्थापना ऑल लेडीज लीग (ALL) और वीमेन इकनोमिक फोरम (WEF ) की तर्ज पर हुआ है। इसके वैश्विक दायरे और संपर्क का लाभ महिलाओं मिलता रहा है। संस्था ने अपने प्रयासों से महिलाओं को व्यापार और बाजार से जुड़े कार्यो को करने के लिए प्रेरित किया है, आत्मनिर्भर बनने, स्वयं निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने एवं उद्यमिता और नवाचार से जुड़े कार्यों को करने के लिए प्रोत्साहित किया है।

विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आयोजित कौंसिल की बैठक में देश भर की आदिवासी महिलाओं को एक मंच प्रदान करने और उनके उद्यमिता और नवाचार से जुड़े मौलिक विचारों को मंच प्रदान करने के लिए ” आईडिया पिचिंग कांटेस्ट” के आयोजन पर सहमति बनी। कौंसिल की नेशनल प्रेसीडेंट ड़ॉ. सविता सेंगर (वाइस चांसलर झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी,रांची ) ने बैठक के बाद जानकारी देते बताया की ” कौंसिल की सभी सदस्य उद्यमिता और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए संकल्पित है और इस क्षेत्र में कार्य करते हुए जनजातीय संस्कृति में छिपे नवाचार को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए कार्य कर रही है। इस आयोजन का उद्देश्य जनजातीय समाज के समृद्ध विरासत, उपरचात्मक कार्यों और बुद्धिमता को पहचान देते हुए आदिवासी महिलाओं में छिपे उद्यम और नवाचार को पहचान दिलाना है। ” ड़ॉ. सेंगर ने ट्राइबल वेलफेयर एंड इंटरप्रेन्योरशिप कॉउन्सिल की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया की ” कौंसिल, विकी के सेंटर फॉर एक्सीलेंस की तर्ज पर कार्य करते हुए देश की आदिवासी महिलाओं के सतत आजीविका संवर्धन और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए कार्य करता है। विकी के अखिल भारतीय संपर्क के जरिये कौंसिल आदिवासी महिलाओं को जोड़ने का कार्य करती है। इनके सामाजिक आर्थिक विकास के लिए समय- समय पर परामर्श , प्रशिक्षण भी दिया करती है। उत्पादों का मानदंड और प्रमाणीकरण निर्धारित करने एवं वैश्विक स्तर के उत्पाद के तौर पर पहचान दिलाने में मदद करती है। कौंसिल के प्रमुख कार्यों में जनजातीय समाज के प्राचीन ज्ञान और बुद्धिमत्ता को बनाये रखते हुए उत्तम कोटि केउद्यम, नवाचार,रचनात्मकता,उद्यमिता को बढ़ावा देना है।“ विकी और कौंसिल के संयुक्त प्रयास आईडिया पिचिंग कांटेस्ट को झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी, रांची में संचालित इंस्टीटूशन इनोवेशन कौंसिल (आईआईसी ) के सहयोग से आयोजित किया जायेगा। कौंसिल की बैठक में कामाक्षी रमण एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर एचआरडी, सेल, मालविका शर्मा , सोशल एंटरप्रेन्योर और एक्टिविस्ट, साँची कुमारी, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर छोटानागपुर सांस्कृतिक संघ , प्रवीण माला हेम्ब्रम, चीफ जनरल मैनेजर (पर्सनल एंड एडमिनिस्ट्रेशन )सेल, हरमीत सेहरा, हेड सीएसआर,वेदांता राजस्थान, अरुणा तिर्की ,सोशल एंटरप्रेन्योर एंड फाउंडर डायरेक्टर आजम एम्बा लिमिटेड उपस्थित थी।

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एनइपी 2020 : वॉट टू थिंक नहीं हाऊ टू थिंक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हायर एजुकेशन पर हुए कॉन्क्लेव में नई शिक्षा नीति पर कहा है कि अब वॉट टू थिंक नहीं बल्कि हाऊ टू थिंक पर फोकस किया जा रहा है।सरकार ने 30 जुलाई को नई शिक्षा नीति घोषित की थी। इसमें स्कूलों के एडमिनिस्ट्रेशन को लेकर बड़े बदलाव किए गए हैं। ऑनलाइन एजुकेशन को बढ़ावा दिया जाएगा। पढ़ाई के पैटर्न में 10 साल के अंदर धीरे-धीरे बदलाव किए जाएंगे।

https://www.jru.edu.in/blog-post/new-education-policy-2020-approved-after-34-years/

प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन की 10 बातें :

  1. बदलाव के लिए पॉलिटिकल विल जरूरी:
    मोदी ने शिक्षा नीति बनाने वाले एक्सपर्ट से कहा कि यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि इतना बड़ा रिफॉर्म जमीन पर कैसे उतारा जाएगा। इस चैलेंज को देखते हुए व्यवस्थाओं को बनाने में जहां कहीं कुछ सुधार की जरूरत है, वह हम सभी को मिलकर करना है। आप सभी राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने में सीधे तौर पर जुड़े हैं। इसलिए आप सब की भूमिका बहुत अहम है।
  2. नेशनल वैल्यूज के साथ लक्ष्य :
    हर देश अपनी शिक्षा व्यवस्था को नेशनल वैल्यूज के साथ जोड़ते हुए और नेशनल गोल्स के अनुसार रिफॉर्म्स करते हुए आगे बढ़ता है, ताकि देश का एजुकेशन सिस्टम वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों का फ्यूचर तैयार कर सके। भारत की पॉलिसी का आधार भी यही सोच है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 21वीं सदी के भारत की फाउंडेशन तैयार करने वाली है।
  3. नई नीति में स्किल्स पर फोकस:
    21वीं सदी के भारत में हमारे युवाओं को जो स्किल्स चाहिए, राष्ट्रीय शिक्षा नीति में इस पर विशेष फोकस है। भारत को ताकतवर बनाने के लिए, विकास की नई ऊंचाई पर पहुंचाने के लिए इस एजुकेशन पॉलिसी में खास जोर दिया गया है। भारत का स्टूडेंट चाहे वो नर्सरी में हो या फिर कॉलेज में, तेजी से बदलते हुए समय और जरूरतों के हिसाब से पढ़ेगा तो नेशन बिल्डिंग में कंस्ट्रक्टिव भूमिका निभा पाएगा।
  4. https://www.jru.edu.in/blog-post/first-green-house-research-center-in-jharkhand-state-located/

  5. इनोवेटिव थिंकिंग पर जोर:
    बीते कई साल से हमारे एजुकेशन सिस्टम में बदलाव नहीं हुए, जिससे समाज में क्यूरोसिटी और इमेजिनेशन की वैल्यू को प्रमोट करने के बजाय भेड़ चाल को बढ़ावा मिलने लगा था। जब तक शिक्षा में पैशन और परपज ऑफ एजुकेशन नहीं हो, तब तक हमारे युवाओं में क्रिटिकल और इनोवेटिव थिंकिंग डेवलप कैसे हो सकती है?
  6. होलिस्टिक अप्रोच की जरूरत :
    बीते कई साल से हमारे एजुकेशन सिस्टम में बदलाव नहीं हुए, उच्च शिक्षा हमारे जीवन को सद्भाव में लाती है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति का बड़ा लक्ष्य इसी से जुड़ा है। इसके लिए टुकड़ों में सोचने की बजाय होलिस्टिक अप्रोच की जरूरत है।शुरुआती दिनों में सबसे बड़े सवाल यही थे कि हमारी शिक्षा व्यवस्था युवाओं को क्यूरोसिटी और कमिटमेंट के लिए मोटिवेट करती है या नहीं? दूसरा सवाल था कि क्या शिक्षा व्यवस्था युवाओं को एम्पावर करती है? देश में एक एम्पावर सोसाइटी बनाने में मदद करती है? पॉलिसी बनाते समय इन सवालों पर गंभीरता से काम हुआ।
  7. 10+2 से आगे निकले :
    एक नई विश्व व्यवस्था खड़ी हो रही है। एक नया स्टैंडर्ड भी तय हो रहा है। इसके हिसाब से भारत का एजुकेशन सिस्टम खुद में बदलाव करे, ये भी किया जाना बहुत जरूरी था। स्कूल करिकुलम के 10+2 से आगे बढ़ना इसी दिशा में एक कदम है। हमें अपने स्टूडेंट्स को ग्लोबल सिटीजन भी बनाना है, साथ ही ध्यान रखना है कि वे जड़ों से भी जुड़े रहें। घर की बोली और स्कूल में पढ़ाई की भाषा एक होने से सीखने की गति बेहतर होगी।
  8. https://www.jru.edu.in/blog-post/jharkhand-rai-university-ke-11-diploma-students-ka-chayan/

  9. हाउ टू थिंक पर जोर :
    अभी तक की व्यवस्था में वॉट यू थिंक पर फोकस रहा है, जबकि नई नीति में हाऊ टू थिंक पर जोर दिया जा रहा है। हर तरह की जानकारी आपके मोबाइल पर है, लेकिन जरूरी ये है कि क्या जानकारी अहम है। नई नीति में इस बात पर ध्यान रखा गया है। ढेर सारी किताबों की जरूरत को खत्म करने पर जोर दिया गया है। इन्क्वायरी, डिस्कवरी, डिस्कशन और एनालिसिस पर जोर दिया जा रहा है। इससे बच्चों में सीखने की ललक बढ़ेगी। हर छात्र को यह मौका मिलना ही चाहिए कि वह अपने पैशन को फॉलो करे।
  10. रीस्किल-अपस्किल से प्रोफेशन बदल सकेंगे :
    अक्सर ऐसा होता है कि कोई कोर्स करने के बाद स्टूडेंट जॉब के लिए जाता है तो पता चलता है कि जो पढ़ा वो जॉब की जरूरतों को पूरा नहीं करता। इन जरूरतों का ख्याल रखते हुए मल्टीपल एंट्री-एग्जिट का ऑप्शन दिया गया है। स्टूडेंट वापस अपने कोर्स से जुड़कर जॉब की जरूरत के हिसाब से पढ़ाई कर सकता है।
    कोई कोर्स बीच में छोड़कर दूसरे में एडमिशन लेना चाहे तो यह भी संभव है। हायर एजुकेशन को स्ट्रीम से मुक्त कर देना, मल्टीपल एंट्री और एग्जिट के पीछे लंबी दूरी की सोच के साथ हम आगे आए हैं। उस युग की तरफ बढ़ रहे हैं, जहां कोई व्यक्ति जीवनभर किसी एक प्रोफेशन में नहीं टिका रहेगा। इसके लिए उसे लगातार खुद को रीस्किल और अपस्किल करते रहना होगा।
  11. रिसर्च और एजुकेशन का गैप होगा खत्म :
    कोडिंग पर फोकस हो या फिर रिसर्च पर ज्यादा जोर, ये सिर्फ एजुकेशन सिस्टम ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की अप्रोच को बदलने का जरिया बन सकता है। वर्चुअल लैब जैसे कंसेप्ट लाखों साथियों के पास बेहतर शिक्षा को ले जाने वाला है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति रिसर्च और एजुकेशन के गैप को खत्म करने में भी अहम भूमिका निभाने वाली है। आज इनोवेशन और एडेप्शन की जो वैल्यू हम समाज में निर्मित करना चाहते हैं वो हमारे देश के इंस्टीट्यूशंस से शुरू होने जा रही है।
  12. टीचर सीखेंगे तो देश बढ़ेगा :
    भारत का टैलेंट भारत में ही रहकर आने वाली पीढ़ियों का विकास करे, इस पर जोर दिया गया है। टीचर्स ट्रेनिंग पर बहुत फोकस है। आई बिलीव वेन ए टीचर लर्न, ए नेशन लीड। राष्ट्रीय शिक्षा नीति सिर्फ एक सर्कुलर नहीं है, इसके लिए मन बनाना होगा। भारत के वर्तमान और भविष्य को बनाने के लिए यह एक महायज्ञ है। 21वीं सदी में मिला बहुत बड़ा अवसर है।
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34 साल बाद नई शिक्षा नीति 2020 को मंजूरी

नई शिक्षा नीति-2020 को कैबिनेट की मंज़ूरी मिल गई है। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक और सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने प्रेस वार्ता कर इसकी जानकारी दी ।

इससे पहले 1986 में शिक्षा नीति लागू की गई थी. 1992 में इस नीति में कुछ संशोधन किए गए थे. यानी 34 साल बाद देश में एक नई शिक्षा नीति लागू की जा रही है।

पूर्व इसरो प्रमुख के कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में विशेषज्ञों की एक समिति ने इसका मसौदा तैयार किया था, प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने इसे मंज़ूरी दी।

https://www.jru.edu.in/blog-post/eleven-students-placed-during-lockdown-in-a-leading-company/

नई शिक्षा नीति 2020 की मुख्य बातें :

  • मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदल कर शिक्षा मंत्रालय कर दिया गया है ।
  • नई शिक्षा का लक्ष्य 2030 तक 3-18 आयु वर्ग के प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करता है।
  • छठी क्लास से वोकेशनल कोर्स शुरू किए जाएंगे। इसके लिए इसके इच्छुक छात्रों को छठी क्लास के बाद से ही इंटर्नशिप करवाई जाएगी ।इसके अलावा म्यूज़िक और आर्ट्स को बढ़ावा दिया जाएगा।इन्हें पाठयक्रम में लागू किया जाएगा।
  • उच्च शिक्षा के लिए एक सिंगल रेगुलेटर रहेगा (लॉ और मेडिकल एजुकेशन को छोड़कर)। यानी अब यूजीसी और एआईसीटीई समाप्त कर दिए जाएंगे और पूरे उच्च शिक्षा के लिए एक नेशनल हायर एजुकेशन रेगुलेटरी अथॉरिटी का गठन किया जाएगा।
  • https://www.jru.edu.in/blog-post/job-required-after-12th-job-guarantee-in-these-courses/

  • पहली बार मल्टीपल एंट्री और एग्ज़िट सिस्टम लागू किया गया है। इसे इस तरह समझ सकते हैं:- आज की व्यवस्था में अगर चार साल इंजीनियरिंग पढ़ने या छह सेमेस्टर पढ़ने के बाद किसी कारणवश आगे नहीं पढ़ पाते हैं तो आपके पास कोई उपाय नहीं होता, लेकिन मल्टीपल एंट्री और एग्ज़िट सिस्टम में एक साल के बाद सर्टिफ़िकेट, दो साल के बाद डिप्लोमा और तीन-चार साल के बाद डिग्री मिल जाएगी. इससे उन छात्रों को बहुत फ़ायदा होगा जिनकी पढ़ाई बीच में किसी वजह से छूट जाती है।
  • उच्च शिक्षा में कई बदलाव किए गए हैं. जो छात्र रिसर्च करना चाहते हैं उनके लिए चार साल का डिग्री प्रोग्राम होगा। जो लोग नौकरी में जाना चाहते हैं वो तीन साल का ही डिग्री प्रोग्राम करेंगे. लेकिन जो रिसर्च में जाना चाहते हैं वो एक साल के एमए (MA) के साथ चार साल के डिग्री प्रोग्राम के बाद सीधे पीएचडी (Ph.D) कर सकते हैं। उन्हें एमफ़िल (M.Phil) की ज़रूरत नहीं होगी।
  • शोध करने के लिए नेशनल रिसर्च फ़ाउंडेशन (एनआरएफ़) की स्थापना की जाएगी. एनआरएफ़ का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालयों के माध्यम से शोध की संस्कृति को सक्षम बनाना होगा. एनआरएफ़ स्वतंत्र रूप से सरकार द्वारा, एक बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स द्वारा शासित होगा।
  • https://www.jru.edu.in/blog-post/which-industry-is-hiring-engineers/

  • उच्च शिक्षा संस्थानों को फ़ीस चार्ज करने के मामले में और पारदर्शिता लानी होगी।
  • ई-पाठ्यक्रम क्षेत्रीय भाषाओं में विकसित किए जाएंगे. वर्चुअल लैब विकसित की जा रही है और एक राष्ट्रीय शैक्षिक टेक्नोलॉजी फ़ोरम (NETF) बनाया जा रहा है।
  • उच्च शिक्षा में 2035 तक 50 फ़ीसद GER (Gross Enrolment Ratio) पहुंचाने का लक्ष्य है।
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12 वीं के बाद चाहिए जॉब: इन कोर्सेज में है जॉब की गारंटी

बारहवीं के रिजल्ट जारी हो चुके हैं। जैक बोर्ड, सीबीएसई, आईसीएसई बोर्ड द्वारा आयोजित होने वाली परीक्षाओं के परिणाम घोषित हो चुके हैं। बारहवीं के बाद छात्रों के मन में सबसे बड़ा सवाल ये खड़ा होता है कि आगे वो किस क्षेत्र में अपना करियर बनाएं। भीड़ से अलग दिखने वाले कोर्सेज ही सफलता की गारंटी है जरुरी नहीं। पारंपरिक कोर्सेज आज भी लोकप्रिय और रोजगारपरक बने हुए है।एक नजर वैसे कोर्सेज पर जो बारहवीं के बाद आप कर सकते है जिनसे व्यक्तित्व तो निखरेगा ही, साथ ही अच्छे पैसे भी कमा सकते हैं।

https://www.jru.edu.in/blog-post/which-industry-is-hiring-engineers/

पारंपरिक कोर्स :

  • मास्टर ऑफ़ बिज़नेस एडमिनिस्ट्रेशन (एमबीए )
  • बैचलर ऑफ़ बिज़नेस एडमिनिस्ट्रेशन (बीबीए )
  • मास्टर ऑफ़ कंप्यूटर एप्लीकेशन (एमसीए )
  • बैचलर ऑफ़ कंप्यूटर एप्लीकेशन (बीसीए )
  • बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीटेक )
  • डिप्लोमा इन इंजीनियरिंग ( डीई )

https://www.jru.edu.in/blog-post/mining-engineer-bankar-sawaren-apna-bhavishya/

आज कल का ट्रेंड :
12 वीं के बाद रोजगार देने वाले कोर्स की बात करें तो आज भी एग्रीकल्चर और फार्मेसी अपना क्रेज बनाये हुए है। ये दोनों ही कोर्स मार्केट में अपनी मजबूत उपस्थिति रखते है और स्टूडेंट्स को आकर्षितकरते है।

  • डिप्लोमा इन फार्मेसी ( डी. फार्म )
  • बैचलर ऑफ़ फार्मेसी ( बी. फार्म )
  • बैचलर और साइंस इन एग्रीकल्चर (बीएससी एग्रीकल्चर )

https://www.jru.edu.in/blog-post/bba-logistics-ranchi-college/

जरा हटके कोर्स :

  • माइनिंग इंजीनियरिंग
  • डिप्लोमा इन माइनिंग इंजीनियरिंग
  • बीटेक इन माइनिंग इंजीनियरिंग

10 वीं उत्तीर्ण छात्र डिप्लोमा में ले सकते है नामांकन

  • पोस्ट डिप्लोमा प्रैक्टिकल ट्रेनिंग ( पीडीपीटी) इन माइनिंग।
  • पोस्ट ग्रेजुएट प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (पीजीपीटी ) इन माइनिंग।
  • ओवरमैन सर्टिफिकेट ऑफ़ कॉम्पिटेंसी।
  • औद्योगिक प्रशिक्षण के दौरान 9000 तक छात्रवृति सुविधा।
  • इंटर्नशिप / ट्रेनिंग ( सीसीएल, एनसीएल, एचसीएल , इसीएल,बीसीसीएल, सेल टाटा स्टील)

बीबीए इन लॉजिस्टिक्स | हाई लाइट्स ऑफ़ द कोर्स :

  • सरकार के उच्च शिक्षा मंत्रालय और कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय द्वारा संचालित।
  • इंडस्ट्रियल सेक्टर की जरूरतों को पूरा करने वाला।
  • स्किल्ड और इंडस्ट्री रेडी बनाने में मददगार ।
  • लाइफ स्किल्स और पर्सनालिटी डेवलपमेंट ।
  • पढ़ाई के दौरान 18 महीने का औद्योगिक प्रशिक्षण।
  • प्रत्येक प्रशिक्षण समाप्त होने पर सरकार द्वारा प्रमाणपत्र।
  • औद्योगिक प्रशिक्षण के कार्य अनुभव को मान्यता।
  • औद्योगिक प्रशिक्षण के दौरान 9000-15000 छात्रवृति सुविधा।
  • ग्रामीण छात्रों के लिए रोजगार प्राप्त करने का सुनहरा अवसर।
  • लॉजिस्टिक्स सेक्टर स्किल कौंसिल द्वारा नौकरी की सुविधा।
  • स्टार्टअप्स और इंटरप्रेन्योर बनने का अवसर।
STUDENTS PLACMENTS DIPLOMA IN ENGINEERING RANCHI 1

ELEVEN STUDENTS PLACED DURING LOCKDOWN IN A LEADING COMPANY

Getting a job during the lockdown is a difficult task. But the Placement Team at Jharkhand Rai University continues to network with various industries to help students in their final placements.

Recently, eleven students from Diploma in Engineering got exciting job opportunities in Marelli Motherson Automotive Lighting India Pvt. Ltd.. The company is a joint Venture between SAMIL and Marelli Motherson Holding S.p.A, Italy. The company has plants in Manesar and Pune in India. Students will be trained during the initial few months at the Pune plant.

The University is proud of these students. We wish them all the best for their future prospects.

STUDENTS PLACMENTS DIPLOMA IN ENGINEERING RANCHI 1

STUDENTS PLACMENTS DIPLOMA IN ENGINEERING RANCHI 1

STUDENTS PLACMENTS DIPLOMA IN ENGINEERING RANCHI 1
STUDENTS PLACMENTS DIPLOMA IN ENGINEERING RANCHI 1

BEST DIPLOMA ENGINEERING COLLEGE RANCHI

Placement at JRU

झारखंड राय यूनिवर्सिटी के 11 डिप्लोमा स्टूडेंट्स का चयन

झारखंड राय यूनिवर्सिटी, रांची के 11 स्टूडेंट्स का चयन मरेली मदर संस ऑटोमेटिव लाइटिंग इंडिया कंपनी के लिए हुआ है। मरेली मदरसंस ऑटोमेटिव सेक्टर की लीडिंग कंपनी है । यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ मेकेनिकल इंजीनियरिंग और डिपार्टमेंट ऑफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के डिप्लोमा पास स्टूडेंट्स का चयन विभिन्न पदों के लिए कंपनी द्वारा किया गया है। कोरोना काल और लॉक डाउन को देखते हुए कैम्पस प्लेसमेंट का आयोजन टेलीफोनिक इंटरव्यू के जरिये किया गया जिसमें 12 स्टूडेंट्स शामिल हुए और फाइनल राउंड के बाद 11 का चयन किया गया।

चयनित होने वाले स्टूडेंट्स में प्रद्युम्न कुमार, दीपू कुमार, दीपक कुमार, राजीव सिन्हा, अपूर्व सिन्हा, लक्श्चमी मिंज, राजकुमार गोप, रोहित उरांव,अरबाज़ खान, अनीश शर्मा और सुमित कुमार का नाम शामिल है।

यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डॉ. पीयूष रंजन ने 11 स्टूडेंट्स के एक ही कंपनी में चयनित होने पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा की “यूनिवर्सिटी का कैरियर मैनेजमेंट सेल स्टूडेंट्स को बेहतर अवसर देने के किये कार्य कर रहा है। इसी कड़ी में डिप्लोमा के स्टूडेंट्स का चयन हुआ है। चयनित स्टूडेंट्स को उनके बेहतर जीवन और नई शुरुवात के लिए उन्होंने पुनः अपनी शुभकामनाएं दी। “

झारखंड राय यूनिवर्सिटी, कमड़े के करियर मैनेजमेंट सेल ने ऑनलाइन प्लेसमेंट दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यूनिवर्सिटी के प्लेसमेंट सेल के प्लेसमेंट अधिकारी प्याली दास, प्रो. गौरव, प्रो. राजीव नयन ने भी स्टूडेंट्स के फाइनल चयन के बाद अपनी शुभकामनाएं दी।

कैंपस चयन के संबंध में जानकारी मीडिया प्रभारी डॉ. प्रशांत जयवर्द्धन ने उपलब्ध कराई।।

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WHICH INDUSTRY IS HIRING ENGINEERS?

MINING INDUSTRY IS THE FUTURE FOR ALL ENGINEERS

Good news for those who want to study B.Tech or Diploma in Mining. Mining industry is the future for you. Because, tremendous growth in this sector is creating new jobs. There are several careers related to mining. Jobs in mining offer the opportunity for world travel, good income and the opportunity to make a difference.

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DID YOU KNOW?

  • India is home to 1,531 operating mines and produces 95 minerals
  • The country is the 2nd largest producer of coal.
  • India is the 2nd largest crude steel producer in the world
  • Coal production grew at CAGR 4.6% over FY14-FY19 (to 730.35 MT)
  • Coal’s share in India’s primary energy consumption is expected to be 48% in 2040.
  • India’s steel consumption has risen 7.5% Y-o-Y
  • 100% FDI is now allowed through automatic route in the steel and mining sectors
  • 100% FDI for coal and lignite under automatic route

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WHAT DO THESE NUMBERS TELL YOU?

For B.Tech or Diploma Mining students, this sector offers plenty of job opportunities. It offers career growth. In future, students with a degree in Mining Engineering will be hired by this growing industry.

WHY YOU SHOULD STUDY B.TECH MINING IN JHARKHAND?

  1. Jharkahnd has 40% of nation’s mineral reserves
  2. Provides a solid base for mining and mineral industries
  3. Jharkhand has variety of minerals in abundance
  4. Jharkhand is the sole producer of Coking Coal, Uranium and Pyrite.
  5. It ranks first in India in the production of Coal, Mica, Kyanite and Copper.

MINING CAPITAL OF INDIA – JHARKHAND

Abundant minerals in Jharkhand has led to setting up of a numerous industries in the State including – Iron & Steel, Cement, Coke Ovens, Washeries, Refractories, Alumina, Sponge Iron, Ceramic, Graphite processing, Granite cutting and polishing, etc.

DIPLOMA MINING BTECH MINING COLLEGE RANCHI JHARKHAND 2020

The State Industrial Policy has identified Mineral based Industries as a thrust area. Hence, creating plenty of jobs in this sector.

NCC exam

राज्य के पुलिस फोर्सेज परीक्षा में एनसीसी सर्टिफिकेट धारकों को मिलेगी वरीयता

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) में भारत के युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए एनसीसी सर्टिफिकेट धारकों को बोनस अंक देने का निर्णय लिया है. अब केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF), राज्य सशस्त्र बलों की परीक्षाओं में एनसीसी कैडेट को अलग से अंक दिए जाएंगे।

केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल में एनसीसी कैडेट होने का फायदा :

  • एनसीसी ‘C’ सर्टिफिकेट धारकों को परीक्षा के अधिकतम अंकों का 5% बोनस अंकों के रूप में दिया जाएगा।
  • एनसीसी ‘B’ सर्टिफिकेट धारकों को परीक्षा के अधिकतम अंकों का 3% बोनस अंकों के रूप में दिया जाएगा।
  • एनसीसी ‘A’ सर्टिफिकेट प्राप्त करने वालों को परीक्षा के अधिकतम अंकों का 2% बोनस अंकों के रूप में दिया जाएगा।

ऑनलाइन एक्सिबिशन ऑफ माइन आर्ट 2020 की झलकियां।

सीएपीएफ भर्ती में एनसीसी ‘ए’ प्रमाण पत्र धारकों को बोनस अंक देने की ये योजना उप निरीक्षक और कांस्टेबल (जीडी) के पदों के लिए आगामी सीधी भर्ती परीक्षा में लागू होगी। भारत सरकार सभी राज्य सरकारों से अपने संबंधित पुलिस बलों के लिए सीधी भर्ती परीक्षा में समान प्रावधान करने का भी आग्रह करेगी ताकि एनसीसी प्रमाणपत्र धारकों को उनके साथ जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके । केंद्रीय गृहमंत्री ने इस बारे में कहा कि ये निर्णय न केवल युवाओं को एनसीसी में शामिल होने के लिए प्रेरित करेगा, बल्कि सीएपीएफ को प्रशिक्षित और अनुशासित युवाओं की उपलब्धता भी सुनिश्चित करेगा ।

भारत को क्यों कहा जाता था विश्व गुरु ? एजुकेशन सेक्टर में कैसे बनेगें हम लोकल, वोकल- ग्लोबल ।

राष्ट्रीय कैडेट कोर का परिचय:

एनसीसी एक त्रिकोणीय सेवा संगठन है जिसमें सेना के तीनों विंग शामिल है- थल सेना नौसेना और वायु सेना। संगठन का आदर्श वाक्य ‘एकता और अनुशासन’ है, जिसके पालन से यह युवाओं को अनुशासित और देशभक्त नागरिकों के रूप में तैयार करता है। इसका गठन राष्ट्रीय कैडेट कोर अधिनियम, 1948 के तहत किया गया था. गृह मंत्रालय, भारत सरकार ने युवाओं को एनसीसी में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करने और देश की भलाई के लिए समर्पित तरीके से काम करने के लिए कई कदम उठाए हैं. सशस्त्र बलों के अधिकारियों की सेवा करके कैडेटों को एनसीसी में बुनियादी सैन्य और हथियार प्रशिक्षण दिया जाता है. उनकी प्रवीणता और निपुणता का समय-समय पर परीक्षण किया जाता है, जिसके बाद ही उन्हें प्रमाणपत्र से सम्मानित किया जाता है ।

इंडस्ट्री रेडी कोर्स – बीबीए इन लॉजिस्टिक : स्टार्टअप्स और उद्यमिता का अवसर।

एनसीसी सर्टिफिकेट:

एनसीसी में प्रथम स्तर से उत्तीर्ण होने पर कैडेट को ‘A’ प्रमाणपत्र से सम्मानित किया जाता है. वहीं दूसरे स्तर को उत्तीर्ण करने पर ‘B’ प्रमाणपत्र प्रदान किया जाता है. केवल वे कैडेट जिनके पास ‘बी’ प्रमाण पत्र है, वे ‘सी’ प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए पात्र होते है।

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी, रांची की ऑफिसियल वेबसाइट www.jru.edu.in के अलावा ब्लॉग के जरिये जानकारी प्राप्त करने के लिए लॉग इन करें https://www.jru.edu.in/my-campus-life/