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CSIT Promotional blog

झारखण्ड राय विश्वविद्यालय से बीसीए और एमसीए करते हुए लाइव प्रोजेक्ट से जुड़ने का सुनहरा अवसर प्राप्त करें

बीसीए और एमसीए की पढ़ाई करते हुए लाइव प्रोजेक्ट पर काम करने का अनुभव प्राप्त करना आजकल इंडस्ट्री ट्रेंड बन चूका है। एक तरफ विद्यार्थियों को नियमित पढ़ाई के दौरान कोडिंग, आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और पायथन जैसे नवीनतम सॉफ्टवेयर का ज्ञान क्लासरूम क्लासरूम लर्निंग से प्राप्त होता है । जबकि लाइव प्रोजेक्ट में शामिल होकर टेस्टिंग, डेवलपिंग, डी बगिंग और कोडिंग मेथड कम समय में पूरा करने का हुनर इंडस्ट्री फ्रेंडली होने में सहायक है। झारखण्ड राय विश्वविद्यालय, रांची का डिपार्टमेंट ऑफ़ कंप्यूटर साइंस एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी अपने छात्रों को इंडस्ट्री रेडी कोर्से, बेहतरीन ऐकडेमिक और लाइफ स्किल्स सपोर्ट, इंटर्नशिप, हैकेथॉन, वर्कशॉप, सेमिनार, इंडस्ट्रियल विजिट के साथ आईटी फील्ड के एक्सपर्ट के साथ रूबरू होने और उनके लाइव सेशन में शामिल होने का मौका प्रदान करता है। डिपार्टमेंट का उद्देश्य है सही मार्गदर्शन के साथ विद्यार्थियों को आईटी फील्ड की नवीनतम तकनिकी जानकारियों से लैस करते हुए इनोवेशन और स्टार्टअप्स के लिए प्रेरित करना । इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गेनाईजेशन(ISRO) ने अपने ऑनलाइन पाठ्यक्रमों के लिए यूनिवर्सिटी को आईआईआरएस आउटरीच सेंटर के तौर पर मान्यता प्रदान किया है।

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CSIT Promotional blog (4)

डिपार्टमेंट ऑफ़ कंप्यूटर साइंस एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मुख्यतः दो पाठ्यक्रम संचालित करता है। मास्टर ऑफ़ कंप्यूटर एप्लीकेशन (एमसीए) और बैचलर ऑफ़ कंप्यूटर एप्लीकेशन (बीसीए)। दोनों ही कोर्स पूरी तरह रेगुलर, प्रैक्टिकल बेस्ड और रोजगारपरक है। बीसीए 3 वर्षीय पाठ्यक्रम है जिसके लिए योग्तया 12 वीं और एमसीए के लिए बीसीए की डिग्री अनिवार्य है। डिपार्टमेंट के बीसीए और एमसीए छात्र गूगल इंडिया द्वारा चलाये जाने वाले इंटर्नशिप कार्यक्रम में शामिल है। कोविड के दौरान स्वास्थ्य सुविधाओं में बेहतरी और मरीजों की सुविधा के लिए यहाँ के स्टूडेंट्स ने ऑनलाइन ओपीडी व्यवस्था COVID OPD एप्लीकेशन निर्माण किया है। यहाँ के एमसीए स्टूडेंट्स ने मिलकर अपनी एक कंपनी “आईटी सोल्युशन कंपनी” का निर्माण किया है। यह सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय से निबंधित है। विश्वविद्यालय के प्लेसमेंट सेल के सहयोग से डिपार्टमेंट ऑफ़ सीएस एंड आईटी के स्टूडेंट (बीटेक कंप्यूटर साइंस) अंकित सिंह ने कैंपस ड्राइव के दौरान जारो टॉपस्कॉलर्स लिमिटेड में जॉब प्राप्त किया है। हैकेथॉन जैसे प्रतियोगिताओं में स्टूडेंट्स ने हमेशा बेहतर परिणाम दिया है। अगर आप की इच्छा बीसीए और एमसीए करने के बाद कंप्यूटर और सूचना तकनीक के क्षेत्र में कैरियर बनाने की है।आईटी इंडस्ट्री और स्टार्टअप्स से जुड़ने की है तो झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी, रांची देता है आपको सीखने, खुद को गढ़ने और करियर को नई उचाईयों पर ले जाने का अवसर ।

Idea-Pitching

What’s Your BIG IDEA Contest

The weekend at JRU saw an innovative, entrepreneurial & passionate exchange among students across India’s leading academic institutions. The subject of the brainstorming centered on a very pertinent & grossly neglected issue of Tribal Empowerment. What could be better than the youth of today to come out with their BIG Innovative Ideas in the finale of “Idea Pitching Contest” organised by Institution Innovation Council, Jharkhand Rai University in association with Tribal Welfare & Entrepreneurship Council, Women’s Indian Chamber of Commerce & Industry (WICCI). The virtual event saw an enthusiastic participation of 15 shortlisted teams who presented their BIG ideas among a panel of esteemed jury & Industry experts.

The event kick-started with the teams highlighting the tribal community that comprises of 8.6% of Indian population and continues to be marginalized due to illiteracy, poor health, unemployment, migration and other social issues prevalent among them. We try to give you a sneak preview of the ideas discussed at the event.

The team from IMS Ranchi represented by Snaya Vohra presented her big idea in using tribal art to create unique & customised mobile covers for a thriving youth market.

As Technology continues to rule the way we consume across categories, many innovations were driven by the same. Team from JRU, Ranchi talked of “Van Bhandar” wherein tribal women with their inherent knowledge and skills of forest products can reach to a global market directly.

Taking a cue from our Honorable Prime Minister’s “Aatmanirbhar Bharat”mission, the team from MVJ College of Engineering, Bangalore, presented “Connect Tech”- software developed indigenously by them connecting the tribal community to the ecosystem of retailers, distributors, exporters and advisors.

Moving over to Traditional handicrafts of the tribes of India which are generally prepared out of resources available in their immediate ecology, where they inhabit has a major potential. Recognizing this opportunity, the team from B.M.S College of Engineering, Bengaluru presented a concept of “Live Tribal Museum” giving an opportunity for the visitors to experience the rich cultural heritage of Indian tribes.

“Riding to the Future” was the focus of the innovation presented by the duo from XISS College who came up with the usage of bamboo in creating a lightweight & durable bamboo cycle which is affordable, provides employment opportunity and is highly sustainable.

The tribal life revolves around farming which is somewhat not fully explored in the state of Jharkhand leading to huge wastage due to lack of processing and storage facilities. Seeing the potential, the team from JRU, came up with an interesting concept of “Chopper’s Board” wherein they propose to sell ready to cook cut vegetables customised for creating dishes.

As the health industry is undergoing a massive impact due to the pandemic, the impact was also felt as innovative concepts to market and promote medicinal and wellness products from the forests to reach the modern consumer were presented by the teams.

While the efforts of each team were truly appreciated by the jury, they had to choose the best from the lot, which they did.

Our heartiest congratulations to the winners of the contest- which goes to the team of Ekta Kumari & Baibhavi Pramanik from Jharkhand Rai University whose winning idea was as unique as their product aptly called “Keeda Jadi”- a unique kind of mushroom grown in forests and extremely high-valued for its rare medicinal qualities. Their winning idea is to grow this locally empowering the tribal community and market it as a miracle health product worldwide.

The Runners up award went to the team of Tahsin Afroz & Ashutosh Narayan who impressed the judges with “We Care- an eco-friendly Oral Care Start-up”. With the worldwide focus on plastic ban, it is the usage of sustainable products – that is the need of the hour. Leveraging the vast tribal knowledge of forest products the idea aims to create and market a range of eco-friendly oral care products.

Our note of gratitude to the eminent panel of judges comprising of Harpreet Singh Ahluwalia, Avijit Ghosh, Sanjay S.,Kamakshi Raman, ED-HRD SAIL and Prof. Savita Sengar, VC Jharkhand Rai University who showed the way to the budding entrepreneurs with their valuable suggestions and advise.

#bigidea #entrepreneurs #tribalsofIndia #womenempowerment # Aatmanirbhar Bharat #marketing #technology #healthcare #agroreforms #Indianhandicraft #tribalart #tribalwelfare #IndianYouth #Jharkhand #Ranchi Colleges

ekta diwas

राष्ट्रीय एकता दिवस पर झारखण्ड राय विश्वविद्यालय में शपथ ग्रहण समारोह

राष्ट्रीय एकता दिवस 31 ऑक्टूबर के अवसर पर झारखण्ड राय विश्वविद्यालय, रांची में ऑनलाइन शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर विश्वविद्यालय के सभी विभागों में बारी- बारी से ऑनलाइन शपथ लिया गया। इस आयोजन में छात्रों के साथ विभाग के फैकल्टी एवं विश्वविद्यालय के अधिकारीयों ने भी शपथ लिया। देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती अवसर पर हर वर्ष 31 ऑक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया जाता है।

इस अवसर पर झारखण्ड राय विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. पियूष रंजन ने कार्यक्रम में शामिल छात्रों को ऑनलाइन संबोधित करते हुए कहा की ” सरदार पटेल एक अनुशासन प्रिय व्यक्ति थे जिन्होंने देश को एक जुट करने का कार्य किया। उनका अनुशासन हम सब के लिए अनुकरणीय है। देश के अखंडता और राष्ट्रीय एकता को बनाये रखने में उनके योगदान के कारण ही उन्हें लौह पुरुष की संज्ञा दी गयी। हमें उनके बताये मार्ग पर चलने का प्रयत्न करना चाहिए।“

कार्यक्रम के दौरान सभी विभागों के विभागाध्यक्ष, विभाग शिक्षक और विश्वविद्यालय कर्मी उपस्थित थे।

facilitation

झारखण्ड राय विश्वविद्यालय को रक्त दान के लिए सर्वाधिक प्रेरित करने का अवार्ड

झारखण्ड राय विश्वविद्यालय, रांची को ब्लड बैंक रिम्स, रांची द्वारा वर्ष 2019 में लोगों को रक्त दान के लिए सर्वाधिक प्रेरित करने के लिए पुरस्कृत किया गया है। विश्वविद्यालय द्वारा अपने परिसर में नियमित रक्त दान शिविर आयोजित करके सर्वाधिक मात्रा में ब्लड यूनिट भी जमा किया गया है। ब्लड बैंक रिम्स रांची द्वारा पिछले दिनों आयोजित वार्षिक सम्म्मान समारोह के दौरान स्वैक्षिक रक्त दान शिविर आयोजित करने और रक्त दान के लिए लोगों को प्रेरित करने वाली संस्थानों और व्यक्तयों को सम्मानित किया गया।

रिम्स ऑडिटोरियम में आयोजित वार्षिक समारोह के दौरान राज्य के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता, स्वास्थ्य सचिव नितिन मदन कुलकर्णी, रिम्स रांची की निदेशक मंजू गाड़ी, सीआरपीएफ के पुलिस महानिरीक्षक डॉ. महेश्वर दयाल, सीआईएसफ के पुलिस महानिरीक्षक अनिल कुमार सिंह , पुलिस महानिरीक्षक जगुआर साकेत कुमार सिंह, झारखण्ड एड्स कण्ट्रोल सोसाइटी के प्रोजेक्ट डायरेक्टर राजीव रंजन, रिम्स रांची के चिकित्सा पुलिस महानिरीक्षक डॉ. डी. के. सिन्हा, ब्लड बैंक रिम्स रांची की डॉ. सुषमा कुमारी एवं आयोजन के सदस्य उपस्थित थे।

विश्वविद्यालय में वर्ष भर आयोजित होने वाले रक्त दान शिविर के आयोजन और छात्र छात्राओं को रक्त दान की उपयोगिता और जीवन रक्षा में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका से अवगत करने का कार्य डिपार्टमेंट ऑफ लाइफ स्किल्स की प्रो. रश्मि राज के द्वारा किया जाता है। इनके व्यक्तिगत प्रयासों से छात्रों और कर्मचारियों को आकस्मिक जरूरत के समय ब्लड भी उपलब्ध करवाया जाता रहा है। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व करते हुए प्रो. रश्मि ने पुरस्कार ग्रहण किया।

विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ पियूष रंजन ने विश्वविद्यालय को प्राप्त इस सम्मान के प्रति आभार व्यक्त करते हुए ब्लड डोनेशन के लिए लोगों को प्रेरित करने और एक वर्ष में सर्वाधिक यूनिट ब्लड जमा करने में शामिल सभी कर्मियों और छात्रों के अथक प्रयास को इसका श्रेय दिया। उन्होंने प्रो रश्मि के व्यक्तिगत प्रयासों की भी सराहना की जिनके अथक प्रयासों से समय समय पर कार्यक्रमों का आयोजन होता रहा है। डॉ. रंजन ने ब्लड बैंक रिम्स रांची के कार्यों की भी सराहना की है।

Idea-Pitching

आईडिया पिचिंग कांटेस्ट में झारखण्ड राय विश्वविद्यालय की टीम को प्रथम और संत जेवियर्स कॉलेज, रांची को दूसरा स्थान

झारखण्ड राय विश्वविद्यालय के आईइसी कौंसिल, ट्राईबल वेलफेयर एंड इंटरप्रेनरशीप काउंसिल और विकी के सहयोग से आयोजित आईडिया पिचिंग कांटेस्ट में देश भर से प्राप्त हुई प्रविष्टियाँ ।

झारखण्ड राय विश्वविद्यालय और ट्राईबल वेलफेयर एंड इंटरप्रेनरशीप काउंसिल, विमेंस चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री (WICCI) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ऑनलाइन आईडिया पिचिंग कांटेस्ट में अंतिम चयनित 15 नवीन विचारो का जूरी के सामने प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता में देश भर से एकल और ग्रुप में कुल 60 प्रविष्टियाँ प्राप्त हुई थी जिनमें से 15 को प्रदर्शन के लिये चयनित किया गया था। इस अवसर पर ऑब्जर्वर के तौर पर झारखण्ड राय विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. सविता सेंगर, स्टील ऑथोरिटी इंडिया लिमिटेड (सेल) की कार्यकारी अध्यक्ष(एचआरडी) मीनाक्षी रमण और जूरी सदस्य के तौर पर एचइसी के पूर्व चैयरमैन और मैनेजिंग डाईरेक्टर प्रो. अभिजीत घोष, प्रसिद्द प्रबंधन सलाहकार और रणनीतिकार संजय सेंगर, एक्सआईएसएस के इंटरप्रेनरशीप डेवेलोपमेंट प्रोग्राम के विभागध्यक्ष प्रो. हरप्रीत सिंह अहलुवालिया उपस्थित थे। आईडिया पिचिंग के बाद जूरी मेंबर ने सवाल जवाब सत्र के दौरान इन विचारों की सफलता और उनके फलीभूत होने से जुड़े सवाल भी प्रतिभागियों से किये. आखिर में विजेताओं के नाम का ऐलान किया गया जिसमें कीड़ा जड़ी मशरूम उत्पादन और बिक्री से जुड़े विचार को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ। यह विचार झारखंड राय विश्वविद्यालय की छात्रा एकता कुमारी और वैभवी कुमारी ने प्रदर्शित किया गया । दूसरा पुरस्कार इको फ्रेंडली ओरल केयर स्टार्टअप को दिया गया जिसे संत जेवियर्स कॉलेज राँची के तशीनअफरोज और आशुतोष नारायण सिंह ने प्रस्तुत किया ।

idea pitching contest

विमेंस इंडियन चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (विकी), ट्राइबल वेलफेयर एंड इंटरप्रेन्योरशिप कौंसिल देश की आदिवासी महिलाओं को उद्यमिता और नवाचार से जुड़े कार्यो के लिए प्रेरित करने एवं उनके सामाजिक- आर्थिक विकास के लिए प्रतिबद्ध है। विकी की स्थापना ऑल लेडीज लीग (ALL) और वीमेन इकनोमिक फोरम (WEF) की तर्ज पर हुआ है। इसके वैश्विक दायरे और संपर्क का लाभ महिलाओं मिलता रहा है। संस्था ने अपने प्रयासों से महिलाओं को व्यापार और बाजार से जुड़े कार्यो को करने के लिए प्रेरित किया है, आत्मनिर्भर बनने, स्वयं निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने एवं उद्यमिता और नवाचार से जुड़े कार्यों को करने के लिए प्रोत्साहित किया है।

ट्राइबल वेलफेयर एंड इंटरप्रेन्योरशिप कौंसिल, विकी के सेंटर फॉर एक्सीलेंस की तर्ज पर कार्य करते हुए देश की आदिवासी महिलाओं के सतत आजीविका संवर्धन और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए कार्य करता है। विकी के अखिल भारतीय संपर्क के जरिये कौंसिल आदिवासी महिलाओं को जोड़ने का कार्य करती है। इनके सामाजिक आर्थिक विकास के लिए समय- समय पर परामर्श , प्रशिक्षण भी दिया करती है। उत्पादों का मानदंड और प्रमाणीकरण निर्धारित करने एवं वैश्विक स्तर के उत्पाद के तौर पर पहचान दिलाने में मदद करती है। कौंसिल के प्रमुख कार्यों में जनजातीय समाज के प्राचीन ज्ञान और बुद्धिमत्ता को बनाये रखते हुए उत्तम कोटि केउद्यम, नवाचार,रचनात्मकता,उद्यमिता को बढ़ावा देना है।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. प्रो. पीयूष रंजन ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा की “आईडिया पिचिंग कांटेस्ट में देश भर के युवाओं कि द्वारा प्रस्तुत उद्यमिता से जुड़े नवीन विचार और कार्य प्रणाली का प्रदर्शन देखना एक उत्साहवर्धक और रोमांचक अनुभव रहा। इस प्रतियोगिता का उद्देश्य नये विचारों कों मंच प्रदान करना और उनके उद्यमी विचारों को सफल होने में सहयोग करना है डॉ. रंजन ने प्रथम पुरस्कार के लिये विश्वविद्यालय कि छात्रा एकता कुमारी और वैभवी कुमारी कि भी प्रशंसा करते हुए कहा कि वर्ष 2019 में विश्वविद्यालय में इंस्टिटयूसन इनोवेशन काउंसिल कि स्थापना कि गयी जिसका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों कों स्टार्टअप से जुड़े अवसरों से अवगत कराना था। उन्होंने कार्यक्रम के सफल संचलान और ऑनलाइन आईडिया पिचिंग कांटेस्ट कों सफल बनाने में मुख्य भूमिका निभाने के लिये लाइफ स्किल डिपार्टमेंट की प्रो. रश्मि राज के कार्यों कि प्रशंसा किया। डॉ. पीयूष रंजन ने जानकारी देते हुए बताया कि 5 दिसंबर को विश्वविद्यालय द्वारा राष्ट्रीय इ-कांफ्रेंस का आयोजन किया जाना है जिसका उद्देश्य आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत जनजातीय महिलाओं कों उद्यमिता और कौशल विकास के प्रति जागरूक करना है। “आईडिया पिचिंग कांटेस्ट के सफल आयोजन में विश्वविद्यालय में स्थापित इंस्टीटूशन इनोवेशन कौंसिल का भी सहयोग मिला। कौंसिल के कन्वेनर प्रो. अमरेंद्र की आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका थी।

Agriculture at JRU

बीएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई के लिए सीमावर्ती राज्य बिहार, बंगाल और ओडिशा के छात्रों को आकर्षित करता झारखण्ड राय विश्वविद्यालय, राँची ।

झारखण्ड राय विश्वविद्यालय, राँची द्वारा संचालित कृषि स्नातक प्रतिष्ठा पाठ्यक्रम(बीएससी इन एग्रीकल्चर ऑनर्स) रोजगारपरक और उद्यमिता से जुड़ा पाठ्यक्रम है। कृषि शिक्षा के प्रति युवाओं रुझान बढ़ा है । इसके पीछे इसमें छिपी भरपूर संभावनाएं है। रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम होने के साथ साथ इस पाठ्यक्रम की मुख्य विशेषता उद्यमिता और स्वरोजगार के लिये भरपूर अवसर सामने आये है। झारखण्ड राय विश्वविद्यालय, राँची द्वारा संचालित कृषि स्नातक प्रतिष्ठा पाठ्यक्रम 4 वर्षीय पाठ्यक्रम है जिसमें झारखण्ड के अलावा बिहार, बंगाल और उडीसा जैसे सीमावर्ती राज्यों के छात्र भी आकार पढ़ाई करते है। सीमावर्ती राज्यों से पढ़ाई करने आने का मुख्य कारण यहाँ कि गुणवत्तापूर्ण और व्यावहारिक तकनिकी शिक्षा पर जोर है। नियमित कक्षा, सेमेस्टर सिस्टम, समय पर परीक्षा और परिणाम का प्रकाशन बाहरी छात्रों कों आकृष्ट करता है।

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विश्वविद्यालय के राँची, नामकुम प्रखंड में स्थायी कैम्पस संचालित है जहाँ 20 एकड़ के भू-भाग पर छात्रों के लिये कृषि कि सैधांतिक पढ़ाई के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण कि व्यवस्था कि गयी है । गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रति संकल्पित विश्वविद्यालय के डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर में अनुभवी शिक्षक पदस्थापित है जिनका इस क्षेत्र में लंबा अनुभव विद्यार्थियों के लिये लाभदायक साबित होता रहा है। विभाग के सभी शिक्षक कृषि विषय में डॉक्टरेट कि डिग्री प्राप्त किये हुए है जो राज्य में संचालित अन्य किसी विश्वविद्यालय या कॉलेज में यदा कदा ही देखने को मिलती है।बीएससी इन एग्रीकल्चर (ऑनर्स) पाठ्यक्रम भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के पांचवीं डीन रिपोर्ट कि अनुसंशाओं के अनुसार तैयार कि गयी है ।

सिलेबस में मूल विषय कृषि- वानिकी के साथ लाइफ स्किल और सामाजिक शिक्षा का समावेश किया गया है। विश्वविद्यालय कैम्पस में छात्रों को कृषि की व्यावहारिक जानकारी के तहत 6 महीने के एक्सपेरिमेंटल लीर्निंग प्रोग्राम(ELP) और 6 महीने का रूरल एग्रीकल्चर वर्क एक्सपेरिएंस रावे प्रोग्राम के तहत कार्य करना पडता है यह पुरी तरह आवासीय तकनिकी प्रशिक्षण कार्यक्रम है जिसमें कैम्पस में प्राप्त किये गए व्यवहारिक शिक्षा को गाँव में रहते हुए किसानों के साथ खेतों में जाकर करना होता है। रावे और इएलपी कार्यक्रम दो तरफ़ा संचार प्रक्रिया है जिसमें किसान और विद्यार्थी सामुहिक कृषि कार्य करते हुए एक दुसरे कों सैधांतिक और व्यवहारिक जानकारी से अवगत कराते है ।

विद्यार्थियों कों 4 वर्ष के पाठ्यक्रम दौरान सैधांतिक और व्यावहारिक प्रशिक्षण और ज्ञान के साथ विभाग द्वारा कृषि बाजार और उपज से जुड़ी समस्याओं से भी अवगत कराने का कार्य किया जाता है। पढ़ाई के दौरान प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद विद्यार्थी विभाग द्वारा आवंटित भूमि पर अपनी पसंद के कृषि कार्य करते है और फिर उसकी बाजार व्यवस्था और बिक्री से जुड़ी समस्याओं का अध्ययन करते हुए फसल से प्राप्त आय और समस्याओं से अवगत भी कराते है ।

झारखण्ड राय विश्वविद्यालय के नामकुम कैम्पस में विश्वस्तरीय हाईड्रोफोनिक्स तकनीक से सुसज्जित लैब स्थापित है जिसमें छात्रों को जल कृषि तकनीक कि जानकारी, प्रशिक्षण और प्रमाणपत्र भी उपलब्ध कराया जाता है।

पाठ्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) और निगमित सामाजिक दायित्व (CSR) के तहत भी कार्य करने होते है । विश्वविद्यालय के कृषि विभाग से प्रति वर्ष एनएसएस में शामिल विद्यार्थियों में से 3 छात्र और 3 छात्रों का चयन पूर्व गणतंत्र दिवस परेड कैम्प के लिये चयन होता रहा है। कृषि विभाग के विद्यार्थिओं का वर्ष में दो बार अन्य प्रदेशों में एडुकेशनल टूर का आयोजन किया जाता है जिसमें वे देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों, कृषि अनुसंधान केन्द्रों और शोध संस्थानों का भ्रमण करते है और उसपर अपनी रिपोर्ट जमा करते है।

विश्वविद्यालय अपने एकेडमिक कार्यक्रमों के तहत सभी विभागों में नियमित अतिथि व्याख्यान, सेमिनार, वर्कशॉप, इन्डस्ट्री विजिट और विषय से जुड़ी बड़ी हस्तिओं से छात्रों का परिचय कार्यक्रम का आयोजन करता रहता है। विश्वविद्यालय में आयोजित वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता कृषि खेल और वार्षिक सांस्कृतिक कार्यक्रम गूंज और तरंग के जरिये विद्यार्थी भारतीय कृषि परंपरा से सभी को अवगत कराने का कार्य करते है ।

पढ़ाई शुरू करने के बाद विद्यार्थियों को रोजगार से जोड़ने के लिये कैम्पस प्लेसमेंट कि व्यवस्था भी है विश्वविद्यालय का अपना प्लेसमेंट सेल है जो उन्हें जॉब दिलाने का कार्य करता है। पिछले वर्ष विभाग में 17 प्रतिष्ठित कंपनियों ने आकर छात्रों का चयन किया. इनमें कोरोमंडल इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड, यूपीए, सारदा, पान सिड शामिल है। यहाँ से स्नातक शिक्षा प्राप्त किये छात्र देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहें है और राज्य के साथ विश्वविद्यालय का नाम आगे ले जाने का काम कर रहें है।

DIPLOMA IN MINING RANCHI JHARKHAND

SHADAB AHMAD, DIPLOMA IN MINING ENGINEERING

शदाब अहमद वॉलीबाल स्टेट लेवेल खिलाडी और डिप्लोमा माईनिंग इंजीनियरिंग स्टुडेंट

 

शदाब अहमद वॉलीबाल स्टेट लेवेल खिलाडी है और वर्तमान में झारखंड राय यूनिवर्सिटी, राँची से डिप्लोमा इन माईनिंग इंजीनियरिंग कि पढ़ाई कर रहें है.

राँची के कांके प्रखंड के रहने वाले शदाब को बचपन से घूमना और वॉलीबाल खेलना पसंद रहा है.  

वॉलीबाल और माईनिंग इंजीनियरिंग कि पढ़ाई को लेकर पूछे गए सवाल को लेकर उनका कहना है “ खेलों से जुड़ने के दौरान मुझे घूमने का मौका भी मिला और मैंने जिला से लेकर राज्य स्तर तक की प्रतियोगिताओं और कैम्पों में बेहतर परिणाम दिया है. स्कूल लेवल पर इंटर स्कूल प्रतियोगिता में और कॉलेज लेवल पर नेशनल स्पोटर्स में शामिल होकर बेहतर प्रदर्शन किया है.

माईनिंग इंजीनियरिंग विषय चयन करने को लेकर उनका कहना था “ यह कार्य रोमांच और जोखिम का मिश्रण है लेकिन यहाँ कार्य करने के दौरान नई जगहों को देखने का अनुभव मुझे इस विषय कि तरफ आकर्षित किया.

माईनिंग की पढ़ाई का मन बनाने के बाद मैंने उन संस्थानों कि खोज शुरू कि जहाँ पढ़ाई के साथ मेरे वॉलीबाल खेल को भी आगे ले जाने का अवसर मिल सके.

यूनिवर्सिटी में आयोजित होने वाले स्पोर्ट्सएक्टिविटी और स्पोर्ट्स क्लब के कार्यों ने मुझे काफी प्रभावित किया और फिर मैंने यहाँ एडमिशन लेने का निर्णय लिया. ऐसा मुझे लगता है झारखंड राय यूनिवर्सिटी में मेरे दोनों ही सपने पुरें होंगे.

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MEET PRIYANKA, THE FIRST GIRL TO STUDY B.TECH MINING AT JRU

Priyanka is a trend setter. When most of her schoolmates have taken admissions in conventional courses, she has decided to pursue B.Tech Mining Engineering at Jharkhand Rai University.

“Why not do something different? Why do the done things?,” Priyanka says.

With passion and dedication in her heart, this girl from Banares is all set to chase her success.

If you ask what made her choose this field, Priyanka says she has always been fascinated by stories about the mines. She finds them mysterious. As if the mines are waiting to be explored.

She is happy to be chasing her dreams. Her father, who also works in the coal and mining sector has been a great inspiration for her always.

Her father, Priyanka says knows that working in underground mines can be challenging. And that is what he expects her daughter to do – to succeed in something that is tough.

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सरहदों पर लड़कियां तैनात तो खदानों में क्यों नहीं: प्रियंका कुमारी

माईनिंग इंडस्ट्री कों हमेशा से पुरुषों के वर्चस्व वाला सेक्टर समझा जाता रहा है यह विडंबना ही कही जायेगी कि महिला सशक्तीकरण के तमाम दावों के बीच आज भी माईनिंग सेक्टर में महिलाओं कि उपस्थिति नगण्य ही है. इस के पीछे सबसे बड़ा कारण रहा है माईनिंग कि पढ़ाई कों लेकर सरकारी और आम जनमानस कि अवधारणा. सरकार ने भी पिछले वर्ष तक इस कि पढ़ाई करने के लिये इक्छुक लड़कियों के नामांकन पर रोक लगा रखी थी क्योंकि कानून आड़े आता था.

माईनिंग कानूनों के अंतर्गत यह प्रतिबंधित किया गया था कि महिलाओं का माईन्स के अंदर काम करना सुरकक्षित नहीं माना जा सकता. इसका कानून का सीधा प्रभाव इसकी पढ़ाई करने और इस फिएल्ड में आने वाली लड़कियों पर पड़ा कि जब माईनिंग इंडस्ट्री में डाईरेक्ट इंट्री ही नहीं हो सकती तो इसकी पढ़ाई कौन करेगा. माईन्स एक्ट 1952 सेक्सन 46 (1)B अबतक कायम था.

इस वर्ष से सरकार ने इसमें संशोधन करते हुए इस फिल्ड कों महिलाओं के लिए ओपन कर दिया है जिसका सकारात्मक असर इस विषय कि पढ़ाई कराने वाले संस्थानों और विभागों में दिखयी पद रहा है. यहाँ नामांकन लेने वाली कतार में पहली बार लड़कियां भी दिखाई दे रही है . ऐसा ही अनुभव प्रियंका कुमारी ने हमारे साथ साझा किया जब उन्हें हमारे संवाददाता ने राँची के झारखण्ड राय युनिवर्सिटी में मीनिंग इंजीनियरिंग विभाग में फॉर्म खरीदते हुए देखा .

पुछने पर प्रियंका ने बताया कि “ में मूलतः बनारस कि रहने वाली हूँ और मैंने बीटेक इन माईनिंग इंजीनियरिंग करने का मन बनाया है और इसलिए यहाँ एडमिशन लेने आई हूँ. माईनिंग इंडस्ट्री में आने और निजी जीवन के बारे में पुछने पर बताते हुए प्रियंका ने बताया कि “ मेरे पिताजी इसी फिल्ड से जुड़े है और वह टाटा माईन्स वेस्ट बोकारो में कार्यरत है जिसके कारण मेरे मन में बचपन से ही इस के प्रति एक अलग आकर्षण है मेरा बड़ा भाई भी डिप्लोमा माईनिंग इंजिनियरिंग कि पढ़ाई कर रहा है, उसने ही जानकारी दी कि इस वर्ष से लड़कियों कों माईनिंग इंजिनियरिंग में एडमिशन लेने की अनुमति मिल गयी है.

मेरे लिये यह खुशी का पल था और मैंने राँची में इसकी पढ़ाई करवाने वाली संस्थाओं कि ऑनलाइन खोज शुरू किया. कोरोना और लॉक डाउन के कारण मोबाइल फोन ही सहारा बना और खोजबीन के दौरान नजर रुकी राँची के झारखण्ड राय युनिवर्सिटी पर जहाँ पढ़ाई के साथ साथ प्रायोगिक शिक्षा पर दिया गया जोर और एक्स्ट्रा एक्टिविटी ने मुझे आकर्षित किया .

झारखण्ड राय युनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डॉ. प्रो. पीयूष रंजन ने इस फैसले पर खुशी जताते हुए कहा कि “विभाग कि पहली गर्ल्स स्टुडेंट होने के कारण प्रियंका कुमारी एक बेहद खास स्थान रखती है. माईनिंग कि पढ़ाई में इंटरेस्ट रखने वाली लड़कियों के द्वारा यहाँ नामांकन वर्ष के दौरान पूछताछ कि जाती थी कईयों ने तो माना करने के बाद भी फॉर्म ख़रीदा. यहाँ फैसला बेहद सुखद अहसास देने वाला है और यक़ीनन इससे इस फिल्ड महिलाओं कि उपस्थिथि बढ़ेगी और कार्यों में गुणवत्ता भी. झारखण्ड जैसे राज्य में माईनिंग सेक्टर सबसे ज्यादा अवसर प्रदान करने वाला है “

प्रियंका कुमारी ने बीटेक माईनिंग इंजिनियरिंग में एडमिशन लेकर अपनी पढ़ाई सुरुकर दी है और इसे सफलतापूर्वक पूरा करके जॉब करना चाहती है. झारखण्ड राय युनिवर्सिटी के माईनिंग इंजिनियरिंग विभाग के समन्वयक प्रो. सुमीत किशोर से बात करने पर उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि “ इस वर्ष से फिमेल कैंडिडेट्स के एडमिशन लेने पर लगी रोक को हटाने से लड़कियों में काफी उत्साह देखा जा रहा है हमारे विभाग के लिये भी यह पहला अवसर है जब गर्ल्स स्टुडेंट का नाम अटेंडेंस लिस्ट में देखा जा रहा है. आने वाले वर्षों में यह और ज्यादा लोकप्रिय होने वाला है क्योंकि यहाँ अवसर कि कमी नहीं है.

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ANSHU BHARTI, B.Sc AGRICULTURE, FRESHER 2020 – 21

When Anshu Bharti completed her class 10th, she got 10 CGPA. It means, the student has got A1 in all the subjects. And A1 means, a score of more than 90% in all subjects. For her perfect score of above 90% in all the subjects, she received many prizes from her school.

Here’s more – Anshu is a gold medallist in Maths Olympiad and English Olympiad, both. She completed her Class 10th from Sacred Heart School, Telaiya and Class 12th from Grizzly Vidyalaya, Telaiya Dam, Koderma.

BEST BSC AGRICULTURE COLLEGE RANCHI JHARKHAND

At Jharkhand Rai University (Ranchi), she has joined B.Sc Agriculture, Batch – 2020.

“One of the best facilities for Agriculture study is available in JRU. Some of my friends recommended this University for agriculture study,” Anshu adds.

At Namkum Campus, Ranchi, the Jharkhand Rai University has a setup of 1600 sq. m. of fully automatic state-of-art greenhouse as agriculture research center. It is the first of its kind in the State. Moreover, this facility embraces the latest technology available internationally. The green house is completely automated with internal and external shading provision. Besides, it has different types of hydroponic systems with fully automated fertigation equipment and water filtration plant.

Anshu asserts that the demand for trained professionals in Agriculture sector is very high. Graduates have career prospects in both public and private sectors.

She encourages students to pursue Agriculture studies because the demand for agriculture inputs and allied services are increasing. The Indian food industry is poised for growth, and Anshu wants to contribute meaningfully to this sector by studying B.Sc Agriculture at Jharkhand Rai University, Ranchi.

A studious girl like Anshu is equally creative. Her hobby is dancing and singing.

“When I want to calm my mind, I sing. I love listening to soothing music whenever I have time,” she says.

“And dancing for me was helpful during this lockdown period. It is like a time for me to exercise and stay healthy.”

A girl of many talents, Anshu has also won an award at inter-school badminton competition.

She is happy to be a part of JRU family and is participating in ROOTS 2020, the orientation program organised for all the freshers.

BEST BCA COLLEGE IN RANCHI JHARKHAND

RAVINA, PURSUING BCA AT JHARKHAND RAI UNIVERSITY

Ravina wants to establish her career in the field of information technology and computer science. Her aim is to become a software engineer and work for a leading MNC.

That’s not all. Besides her interest in computer science and technology, Ravina practices martial art called ‘kickboxing’. She has won awards for kickboxing in her school. Dancing is another hobby she loves to follow.

BEST BCA COLLEGE IN RANCHI JHARKHAND

To support her career dreams, her parents encouraged her to join BCA at Jharkhand Rai University. Today, Ravina is a proud member of JRU family.

Ravina says, “I have been attending ROOTS 2020, the foundation program meant for all the new students. I feel confident that I made the right choice by joining JRU.”

In her words, “ROOTS initiates all the freshers into the JRU family. I have come to know many of our professor and mentors through this program.”

“I’m eager to participate in all the ROOTS sessions and also take part in the competitions organised by the JRU team,” says Ravina.