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काव्य उत्सव हिंदी दिवस पखवाड़ा झारखण्ड राय विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित ओंनलाइन्न काव्य पाठ प्रतियोगिता

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काव्य पाठ के विषय :
राष्ट्रीय भावना राष्ट्रीय भावना देश प्रेम प्रकृति चित्रण भाई चारा वैश्विक गतिविधियां हिंदी प्रेम

    काव्य पाठ प्रतियोगिता के नियम:

  • प्रतियोगी को महाविद्यालय या विश्वविद्यालय का छात्र होना चाहिए।
  • प्रतियोगी अपने किसी प्रिय कवि या लेखक की कविता का पाठ कर सकता है।
  • प्रतियोगी अपनी स्वरचित कविता का पाठ भी कर सकता है।
  • कविता पाठ हिंदी भाषा में किया जायेगा।
  • प्रत्येक प्रतियोगी को ५ मिनट का समय मिलेगा ।
Expert Talk Mechanical

Expert Talk: “TAKE CHARGE OF YOUR CAREER AND GRAB A DREAM JOB”

Speaker : Dr. J. Jessy Christin

Vice President – HR & Operations
CONVATE – International Recruitment Firm, Bengaluru

Date: September 26, 2020 / Time: 11.30 am – 1.00 pm

Meeting Platform: WebEx Meet

Meeting number: 170 289 5030
Password: E2rhfwHnk87

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Organized by Department of Mechanical Engineering, Jharkhand Rai University, Ranchi

National Education Policy 2020 : Features and Prospects

Speaker: Dr. Dipak Kumar Bose

Associate Professor, Department of Agriculture
Sam Higginbottom University of Agriculture Technology and Sciences (SHUATS), Naini, Prayagraj

Time: 09:00 – 10:00 Am
Date: 25 Sept 2020

Participants: All Students

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Organized by NSS Cell, Jharkhand Rai University, Ranchi

Pharmacy Day updated

Panel discussion on Transforming Global Health: Interdisciplinary Challenges, Perspectives and Strategies

In the occasion of Pharmacist day at 25 September, 2020

Panelists:
1) Dr. Nitesh Kumar
Director, Paras HEC Hospital, Ranchi

2) Dr. Randheer Gupta
Member, Jharkhand State Pharmacy Council

3) Mr. Sachinandan Basak
Product Development Owner, Baxter Innovation and Business Solution, Bengaluru

Moderator:
Mr. Hemendra Mishra, HOD, Dept. of Pharmaceutical Sciences, Jharkhand Rai University, Ranchi

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Organized by Department of Pharmacy, Jharkhand Rai University, Ranchi

International E-Conference

झारखण्ड राय विश्वविद्यालय में दो दिवसीय इंटरनेशनल ई- कॉन्फ्रेंस का आयोजन

झारखण्ड राय विश्वविद्यालय, रांची में शनिवार को दो दिवसीय इंटरनेशनल ई- कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। “मल्टी डिसिप्लनरी एप्रोच फॉर सस्टनेबल डेवेलपमवेंट”(ICMASD 2020) विषय पर आयोजित अंतराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के पहले दिन उद्घाटन सत्र का प्रारंभ दीप प्रज्वलित कर सरस्वती वंदना के साथ किया गया। इस अवसर पर इ स्मारिका का विमोचन भी किया गया। स्वागत भाषण देते हुए झारखण्ड राय विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. सविता सेंगर ने उद्घाटन सत्र में उपस्थित अतिथियों का स्वागत किया। डॉ. सेंगर ने अपने संबोधन में कॉन्फ्रेंस के विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा की “तकनीक एक सतत विकास प्रक्रिया है। आज पूरा विश्व कोरोना वाइरस से जूझ रहा है। इस समय तकनीक एक ऐसे प्लेटफॉर्म की तरह सामने आया है जिसने सभी सेक्टरों में काम करने वालों को रास्ता दिखाया है। तकनीक के बदले प्रयोग ने ठोस नवाचार और समावेशी विकास के विकास में महती भूमिका निभाई है। डॉ. सेंगर ने कहा की सतत विकास एक प्रक्रिया है जो निरन्तर चलता है । सतत विकास से हमारा अभिप्राय ऐसे विकास से है, जो हमारी भावी पीढ़ियों की अपनी जरूरतें पूरी करने की योग्यता को प्रभावित किए बिना वर्तमान समय की आवश्यकताएं पूरी करे। संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रस्तावित सस्टेनेबल डेवलपमेंट’ संकल्प को, जिसे सतत विकास लक्ष्यों के नाम से भी जाना जाता है। इसका उद्देश्य का उद्देश्य सबके लिए समान, न्यायसंगत, सुरक्षित, शांतिपूर्ण, समृद्ध और रहने योग्य विश्व का निर्माण करना और विकास के तीनों पहलुओं, अर्थात सामाजिक समावेश, आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण को व्यापक रूप से समाविष्ट करना है।

विषय प्रवेश करते हुए झारखण्ड राय विश्वविद्यालय के एडवाइजर और एचइसी के पूर्व सीएमडी प्रो. अभिजीत घोष ने कहा की ” कोरोना महामारी ने पुरे विश्व को प्रभावित किया है। परिस्थितिकी तंत्र और पर्यावरण में देखे जा रहे बदलाव यह संकेत देते है की प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन कर हमने इसे कितना नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने झरिया में लगी आग का जिक्र करते हुए कहा की यह संवेदन हीनता का उदाहरण है अबतक इसे बुझाया नहीं जा सका है। प्रो. घोष ने जानकारी देते हुए बताया की कॉन्फ्रेंस के पहले दिन 100 शोध पत्रों में से चयनित 72 शोध पत्रों को पढ़ा जायेगा। इस कॉन्फ्रेंस में देश के 14 राज्यों के अलावा अमेरिका, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और तजाकिस्तान से आये शोध पत्रों को शामिल किया गया है।“

मुख्य अतिथि डॉ. सुनील कुमार वर्णवाल (आईएएस) प्रिंसिपल सेक्रेटरी झारखण्ड सरकार ने अपने संबोधन में बताया की ” सतत विकास लक्ष्यों का उद्देश्य सबके लिए समान, न्यायसंगत, सुरक्षित, शांतिपूर्ण, समृद्ध और रहने योग्य विश्व का निर्माण करना और विकास के तीनों पहलुओं, अर्थात सामाजिक समावेश, आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण को व्यापक रूप से समाविष्ट करना है। सतत विकास के लक्ष्य एक दूसरे से जुड़े हुए है। विश्व आज कोरोना जैसी आपदा से जूझ रहा है। इस आपदा ने मनुष्य को जीवन के महत्व से परिचित कराया है। मनुष्य को प्रकृति, पर्यावरण और जीवन का महत्व समझाया है। डॉ. वर्णवाल ने जोर देते हुए कहा की ” तकनीक के कारण इस मुश्किल दौर में भी हम एक दूसरे से जुड़े हुए है। तकनीक एक समस्या भी बन सकती है जरुरत है समाज को इस समस्या से बचाने की। इंटरनेशनल कांफ्रेंस का विषय वर्तमान परिस्थिति को देखते हुए एक सराहनीय पहल है। यहाँ प्रस्तुत होने वाले शोध पत्र सबका मार्गदर्शन करेंगे।

विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. पियूष रंजन ने उद्घाटन सत्र के समापन अवसर पर सभी अतिथियों का धन्यवाद देते हुए कहा की ” दो दिनों तक चलने वाले इस अंतराष्ट्रीय कांफ्रेंस के जरिये सतत विकास, नवाचार,सतत विकास लक्ष्य से जुड़े अंतः विषय चर्चा और शोध पत्रों का प्रस्तुतीकरण किया जायेगा। उन्होंने देश विदेश से जुड़े अतिथियों, शोधार्थियों, के साथ विश्वविद्यालय के फैकल्टी मेंबर और तकनिकी सहायता प्रदान करने वाली टीम के सदस्यों को भी धन्यवाद दिया। डॉ. रंजन ने दो दिवसीय इंटरनेशनल ई कॉन्फ्रेंस के सफल आयोजन के लिए समन्वयक डॉ. श्रद्धा प्रसाद और सह- समन्वयक डॉ. सुमित कुमार पांडेय का भी धन्यवाद किया ।

ABC of artificial intelligence

आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की ABCD

बच्चों को A फॉर एप्पल और B फॉर बॉय सिखाने के दिन पुराने पड़ चुके है। आज बच्चे A फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, B फॉर बिग डेटा, R फॉर रोबोटिक्स और M फॉर मशीन लर्निंग जैसे शब्दों से परिचित है । यह सब उनके सिलेबस का हिस्सा है। मशीनों ने दुनिया को बदल कर रख दिया है इस कारण बच्चों की दुनिया बदली है इससे कोई भी अछूता नहीं रह सकता है।

आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की ABCD :

A : आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस
इंसानों ने तकनीक का इजाद किया। लेकिन बुद्धिमान मशीनों से इंसान को पीछे छोड़ दिया है।

B: बायस
मशीनें भेद भाव कर सकती है यह सुन कर विश्वास नहीं होता लेकिन यह भेदभाव कई अर्थों में सामने आया है जो मानव को सोचने पर मजबूर करता है। मशीनों में जो डेटा फीड होता है वह एल्गोरिदम की बुनियाद पर काम करता है। बनाने वालों ने इनके साथ भी भेदभाव किया। मर्दों और औरतों के बीच भेद भाव और गोरे और काले रंग वालों के बीच भेद भाव करना बड़ी समस्या बनकर उभरा है।

C: चैटबॉट
मशीनें इंसानों की तरह बातें करती हैं ।यह संभव हो पाता है नैचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग और नैचुरल लैंग्वेज जेनरेशन भाषा के जरिये।। इसे ही चैटबॉट मशीनें कहते हैं।

D : डिज़ाइन
डिज़ाइनिंग एक चुनौती भरा और समयसाध्य कार्य है। आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस ने इस काम को ज़्यादा तेज़ी और बेहतर तरीक़े से करना शुरू किया है। बड़ी कंपनियाँ तो नए डिज़ाइन और पार्ट्स बनाने के लिए आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस का ही इस्तेमाल कर रही हैं।

E: इमरजेंसी
आपात स्थिति से निपटने और चेतावनी देने में इसकी भूमिका प्रमुख है। ये मशीनें न्यूज़ रिपोर्ट का आकलन करके ये बता सकेंगी की किस इलाक़े में तनाव पैदा होने वाला है।

F: फ़ुटबॉल
खेल के मैदान में आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमालकरने का प्रयास जारी है। इसके ज़रिए यह आकलन संभव हो सकेगा कि कौन सा ख़िलाड़ी खेल के मैदान में कौन सा अगला दांव चलने वाला है।

G: जेनेरेटिव एडवर्सरियल नेटवर्क
पिक्चर के साथ किये जाने वाले छेड़छाड़ को लेकर अक्सर शिकायत मिलती रहती है। आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की मदद से इसे रोका जा सकता है।जेनेरेटिव एडवरसरियल नेटवर्क के ज़रिए नई तस्वीरें बनाई जा सकेगी ।

H: हैलुसिनेशन
इंसानी दिमाग अक्सर मतिभ्रम या ग़लतफ़हमी के शिकार होता है। मशीनें भी इससे अछूती नहीं है। मशीनों की यह गलती बड़ी दुर्घटनाओं को आमंत्रित करती है। एआई के सहयोग से इन्हें रोका जा सकता है।

I: इमैजिनेशन
कल्पना मनुष्य का स्वाभाविक गुण है। कल्पना का सहारा लेकर किसी भी कार्य को मूर्त रूप देने का प्रयास किया जाता है। किसी भी चीज़ को देखने का मशीन का नज़रिया इंसान से अलग होता है वो कई मायनों में हम से बेहतर भी। फाइन आर्ट्स के सेक्टर में मशीनों का सहयोग हैरान करने वाला साबित होगा।

J: जाम
ट्रैफ़िक जाम से निपटने के लिए AI का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है। आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस इसके इस्तेमाल से पता लगाया जा सकता है कि कहाँ जाम लग सकता है और उसे कंट्रोल कैसे किया जा सकता है।

K: निटिंग
फैशन और टेक्सटाइल इंडस्ट्री भी AI से अछूती नहीं है। कढ़ाई बुनाई के कामों में भी इसका बखूबी इस्तेमाल किया जा रहा है। स्काईनिट की मदद से बुनाई के ऐसे पैटर्न तैयार किए गए हैं, जो अपने आप में अद्भुत हैं।

L : लैंग्वेज
भाषा संचार का सर्वोत्तम साधन है। अंग्रेजी भाषा के वैश्विक पहचान के पीछे व्यापक स्वीकार्यता शामिल है। अक़्लमंद मशीनों की अपनी ज़बान होती है । मशीनी भाषा ने कंप्यूटर को एक अलग पहचान दिलायी।

M : मशीन लर्निंग
मशीन को एक छोटी सी चीज़ सिखाने के लिए ढेर सारा डेटा फीड करना पड़ता है। आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस वाली मशीनों की डिज़ाइनिंग ऐसी हैं कि वो इंसान की तरह जानकारियां इकट्ठा करें।

O: ओरेकल
इंसान की नज़र से तेज़ काम मशीनें करती हैं। आर्टिफ़िशयल इंटेलिजेंस की मदद से आंखों की बीमारियां और कैंसर जैसी बीमारियों के लक्षण उसके पनपने के पहले ही भांप लिए जाते हैं। अल्ज़ाइमर जैसी बीमारी की भविष्यवाणी संभव हो पाया है।

P: पुलिसिंग
चोर पुलिस के खेल में अपराधी अक्सर सबूतों और पहचान के आभाव में बरी हो जाते है। दुनिया भर में अपराधियों को पकड़ने के लिए आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की मदद ली जा रही है। अपराधियों के चेहरे के किसी हिस्से की पहचान कर उन्हें पकड़ने का प्रयोग किया जा रहा है। न्याय प्रक्रिया को सरल बनाने बेहतर बनाने में भी इसका बेहतर इस्तेमाल हो रहा है।

Q: क्वेक
भूकंप प्राकृतिक आपदा है जिसकी भविष्यवाणी असंभव है। अब ऐसी मशीनें बनाई जा रही हैं जो भूकंप के बाद आने वाले झटकों की जगह बता सकती हैं । इससे बड़े पैमाने पर होने वाले नुकसान को रोका जा सकता है।

R: रैप
विदेशों में संगीत की दुनिया में अजीब चलन है। गानों के बीच में तेज़ गति से डायलॉग बोले जाते हैं। इसे सरल भाषा में रैप कहते हैं। रैप इतनी तेज़ी से बोला जाता है कि इसके बोल आसानी से पकड़ में नहीं आते लेकिन आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस से इस काम को आसान बनाने की कोशिश की जा रही है।

S: स्मार्ट होम
जो देश तकनीकी रूप से ज़्यादा एडवांस हैं, वहां घर के बहुत से काम मशीन की मदद से होते है। आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की मदद से उन मशीन को ऑन-ऑफ़ किया जा सकता है, जिनके इस्तेमाल की ज़रूरत नहीं है। बिजली की खपत को रोकने में यह कारगर उपाय है।

T: टुरिंग टेस्ट
आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस का दायरा मापने के लिए टुरिंग टेस्ट सबसे विश्वसनीय माना जाता है. इस टेस्ट के मुताबिक़ मशीन की क़ाबिलियत की बुनियाद है कि वो किस हद तक बातों के ज़रिए इंसान को बेवकूफ़ बना सकती हैं.

V: वाइनयार्ड
यूरोप और अमरीका में किसानों की मदद के लिए आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल किया जा रहा है। अंगूर की खेती में इसका ख़ूब इस्तेमाल हो रहा है। आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस का दायरा मापने के लिए टुरिंग टेस्ट सबसे विश्वसनीय माना जाता है. इस टेस्ट के मुताबिक़ मशीन की क़ाबिलियत की बुनियाद है कि वो किस हद तक बातों के ज़रिए इंसान को बेवकूफ़ बना सकती हैं ।

W: वाइल्डलाइफ
जंगलों में भारी मात्रा में क़ीमती संपदा मौजूद है, जिसकी बड़े पैमाने पर चोरी और तस्करी होती है। दुर्लभ जाति के जानवरों का शिकार भी ख़ूब होता है। हालांकि इस पर नज़र रखने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल काफ़ी समय से हो रहा है ।

X: एक्स-रेटेड
इंसान की जिस्मानी ज़रूरतें पूरा करने में भी मशीनें अहम किरदार निभा रही हैं और सेक्स इंडस्ट्री में इनका बड़ा रोल है। आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल से अब इस पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है।

Y: यमी
अगर रसोई में खाना बनाने का मन ना हो तो इसके लिए भी अब आपके पास विकल्प हैं। आप आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के ज़रिए खाना बना सकते हैं। बुद्धिमान मशीनें आपके दिए गए कमांड के अनुसार आपके पसंद का खाना बनाकर तैयार कर देगीं।

Z : यानी ज़ू
सर्दी के मौसम में चिड़ियाघरों में सेंसर वाले हीटर लगाए जाते हैं जो जानवर के शरीर की ज़रूरत के मुताबिक़ उसके लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर देते हैं।

Artificial intelligence

आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस

कंप्यूटर का अविष्कार मानव इतिहास का युगांतरकारी अध्याय है इस अविष्कार के साथ ही मनुष्य ने अपने काम मशीनों से करवाने का चलन शुरू किया था । कृत्रिम बुद्धि शब्द का इस्तेमाल तब से ही चलना में आया। इसे ही आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के नाम से सभी पहचानते है।

फेसबुक ने 2017 में अपने एक रिसर्च प्रोग्राम को अचानक बंद कर दिया गया जो आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस पर शोध से संबंधित था। मीडिया रिपोटों के जरिये जो जानकारी सामने आयी वह बेहद हैरान करने वाली थी। शोध कार्यक्रम इसलिए बंद करना पड़ा क्योंकि डिज़ाइन किए गए चैटबॉट्स ने अंग्रेज़ी के बजाय एक अलग ही भाषा ईज़ाद कर ली जिसे इंसान नहीं समझ सकते थे। । इस घटना को लेकर विज्ञान जगत में काफी बहस हुई। इस के बाद दुनिया के कई बड़े वैज्ञानिकों ने यह माना की भविष्य में मानव को मशीनों से चुनौतियों का सामना करना होगा। इस के बाद से ही दुनिया भर में वैज्ञानिक अक़्लमंद मशीनें तैयार करने में लगे हुए है जो मानवता की रक्षा कर सकें। कोरोना वायरस ने दुनिया को जितना प्रभावित करना था किया लेकिन अब पूरी दुनिया की नजर इसके वैक्सीन की खोज पर टिकी है। कोरोना वायरस कोविड-19 की वैक्सीन खोजने की रेस में रूस ने स्पुतनिक 5 नामक टीके को अविष्कार करने का दावा किया है। भारत समेत दुनिया के कई देश भी इसी काम में जुटे हैं। वैज्ञानिक, शोधकर्ता और दवा बनाने वाले साथ मिल कर इस चुनौती को कम से कम समय में पूरी करने की कोशिश में लगे हैं। इस चुनौती से निपटने में सबसे बड़ा सहायक साबित हुआ है आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग।

पहले के दौर में कोई नई वैक्सीन या दवा बनने में सालों का वक्त लगता था। लेकिन एआई और मशीन लर्निंग के इस्तेमाल से इस काम को सालों की बजाय अब कुछ दिनों में ही पूरा कर लिया जाता है।

आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस:
ग्रीक मिथकों में ‘मैकेनिकल मैन की अवधारणा से संबंधित कहानियाँ मिलती हैं अर्थात् एक ऐसा व्यक्ति जो हमारे किसी व्यवहार की नकल करता है। प्रारंभिक यूरोपीय कंप्यूटरों को ‘लॉजिकल मशीन ‘ कहकर बुलाया जाता था। तकनीक के बढ़ते प्रयोग और तेज गति से काम करने करने के विचार को समृत वर्क में बदलने के लिए ऐसी मशीनों के बारे में सोचा गया जो इंसानों के निर्देश को समझना, चेहरे की पहचान, ख़ुद से गाड़ियां चलाना , किसी गेम को जीतने के लिए खेलना, घरेलु काम करना बेहतर और समझदारी के साथ कर सके। यही कहलाया एआई या आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस। इसका हमारे जीवन में कितना दखल है इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते है की होटल में रोबोट, कार का ड्राइवर, हॉस्पिटल में सर्जरी करने वाले, ट्रैफिक कण्ट्रोल करने वाले सभी रोबोट्स ही है। इतना ही नहीं नयी दवाएं तैयार करना, नये केमिकल तैयार करना, निर्देश देना, मार्ग बताना, माइनिंग करने और यहाँ तक की एयर ट्रैफिक कंट्रोल के लिए आर्टिफ़िशियल दिमाग का इस्तेमाल किया जाता है। नीति आयोग ने इसके महत्व को देखते हुए आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग के मुद्दे पर बहस और विचार करने के लिए ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए राष्ट्रीय नीति’ पत्र बनाया था। भारत सरकार ने राष्ट्रीय “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पोर्टल” लॉन्च किया है, जिसका नाम एआई डॉट गॉव डॉट इन (ai.gov.in) है।

भारत अपनी अर्थव्यवस्था को डिज़िटल अर्थव्यवस्था बनाने के साथ-साथ सरकारी काम-काज को AI से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। रोबोटिक्स, वर्चुअल रियल्टी, बिग डेटा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग को फिफ्थ इंडस्ट्रियल रिवोल्युशन कहा जा रहा है इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग इंटरनेट ऑफ थिंग्स, 3-डी प्रिंटिंग और ब्लॉक चेन शामिल हैं ।

Webinar Civil

Expert Talk: “Indian Steel Industry – A Perspective & Indigenous Stride in Capacity Build-up”

Speaker: Mr. Sidhartha Chakravarty
Advisor to M/s NMDC Limited Hyderabad a NavaRatna PSU &
Ex- Executive Director (Technical Services) in MECON, Ranchi.

Date: September 20, 2020 / Time: 5.00 pm

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hindi-diwas

दिल के भरे रिवाल्वर में बेचैनी जोर मारती है

हिंदी दिवस की बधाई। हिंदी माथे की बिंदी। नई वाली हिंदी। मातृभाषा पर्व के आचमन की बेला आ गयी है। दिन – सप्ताह और माह निकल जायेंगे और अगले बरस हम फिर जुटेंगे हिंदी दिवस को मनाने । ये वाला कुछ खास है क्योंकि डिजिटल है। शोर भी ज्यादा होगा। दिखेगा भी ज्यादा और फैलाया भी जायेगा। दिखाई देने का सुख से हिंदी को क्यों वंचित किया जाय हां दिखने और महसूस होने में बड़ा फर्क है। “अंतर्मन का अहसास, मातृ भाषा के साथ। इस बार हिंदी (नई वाली) दिवस डिजिटल एहसास के साथ। जिसे आप संजो का रख सकते है अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए।” जिंगल मारक है बंधू और गोली की तरह असर कर सकती है नई पीढ़ी पर। असर हो न हो तब भी चलेगा लेकिन किताबें न हो “इ हमका मंजूर नाहीं है “।

किसी अकादमिक अध्यापक कमरे और सरकारी खरीद का हिस्सा बनने से कहीं ज्यादा जरुरी है एक अच्छी किताब का बिस्तर के सिरहाने पर रखा होना। उन लोगों तक पहुँच पाना जिनमें भाषा साँस लेती है और धड़कती है। जिंदगी को थोड़ा बदलने, खिड़कियों को थोड़ा खोलने और दुनिया को थोड़ा बेहतर बनाने के लिए किताबों का होना जरुरी है।

शायद इससे समाज को थोड़ा विस्तार मिल सके जो जरुरी है और जरुरत भी। हमारे और आपके लिए। हमारे आने वाले कल के लिए। अपनी ही संतानो को बताने की जद्दोजद बेहद दुखदायी है की किताबों का पास होना क्या सुख देता है। नई पीढ़ी को कौन और कैसे समझाए की जनसंचार का स्पंदन क्या होता है।

नागरिक जीवन का आरंभ बेशक नई कविता में देखने को मिलता है। लेकिन एक उद्योगिक जीवन की प्रतिछवि भी साथ साथ बनती चली जाती है। विविधताओं से भरा भारतीय जन जीवन की अंतरकथा यहीं तो प्रगट होती है। “जिंदगी बुरादा तो बारूद बनेगी ही ” कविता तभी तो जन्म लेगी। जीवन ही तो कविता का सबसे मार्मिक अंश है। इसे आत्मसंघर्ष से अर्जित किया जाता है। आत्मसंघर्ष से विमुख कविता और जीवन को बयाँ करना कठिन होता है।

कविता केवल बाहर नहीं आंकती बल्कि भीतर भी निरंतर चलती रहती है। एक शांत नदी की तरह जिसके ऊपरी तल पर फैले बालू के महीन कण सूर्य किरणों से चमकते हो और पथिक को आकर्षित करते हो। यह मृग मरीचिका तो नहीं हो सकता क्योंकि सरस्वती (नदी )की तरह निरंजना की धारा भी हजारों वर्षों से अविरल बह रही है। इतिहास और भूगोल कम है लेकिन मन की पड़ताल ज्यादा है।

आम की अमराइयों से, पर्वत और तराई से गुजरते हुए किसे काफिले का ठहर जाना क्या होता है यह कोई चरवाहा खूब समझता है जिसकी भेड़े अभी भी हरी पत्तियों की तलाश में मैदानों और चट्टानों के नुकीले सिरों पर ढूंढती रही है कुछ हरी पत्तियाँ। और काफिले के आ जाने से जो बेअदबी और बेकरारी का जो शोर होता है वह उनसे उनका हक़ छीन लेता है जो उनका था या होने वाला था अगले ही पल।

PUBG

ऑन लाइन गेमिंग बाजार में भारत का फौजी

चीनी ऐप्स पर डिजिटल वार करते हुए इस बार भारत सरकार ने कुल 118 ऐप्स को बैन कर दिया है । भारत के डिजिटल स्ट्राइक पार्ट 3 का सबसे बड़ा शिकार पाबजी गेम को माना जा रहा है जिसने बहुत तेजी से भारतीय किशोर वर्ग को अपना दीवाना बना दिया था। आये दिन पाबजी को लेकर आत्महत्या और अपराध से जुडी खबरें सुनने को मिलती रहती थी। अभिभावकों की यह एक आम शिकायत थी की बच्चे इसके कारण पढ़ाई में मन नहीं लगा पाते है। अब पबजी के जवाब में भारत की एक कंपनी ने ऑनलाइन गेम लांच किया है। इसका फीचर्स भी काफी हद तक पबजी जैसा ही होगा. इस गेमिंग एप का नाम Fearless and United Guards FAU: G है। बताया जा रहा है की इसे अक्टूबर महीने के अंत तक लांच किया जायेगा। फौजी की तमाम फीचर्स की जानकारी नहीं मिल सकी है। हालांकि, कहा गया है की गेम का पहला लेवल गलवान वैली की घटना से जुड़ा है । 15 जून की रात पूर्वी लद्दाख की गलवान वैली में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हो गई थी। कंपनी को उम्मीद है कि लांचिंग के बाद तकरीबन 20 करोड़ मोबाइल यूजर्स फौजी को इस्टॉल करेंगे। यह ऑनलाइन गेम मेक इन इंडिया के तहत बनाया जा रहा है और भारतीय सेना को समर्पित है। कंपनी का कहना है कि इससे होने वाली कमाई का 20 फीसदी हिस्सा भारतीय सेना के शहीद जवानों की फैमिली को दिया जायेगा । बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार की कंपनी इस मुहिम का समर्थन कर रहे हैं. अक्षय कुमार ने इसे लेकर ट्वीट भी किया था।

मोबाइल गेम का बाजार :
पबजी (Player Unknown’s Battlegrounds) दुनिया भर में मोबाइल पर खेला जानेवाला एक पॉपुलर गेम है । भारत में भी इसके काफ़ी दीवाने हैं । एक जापानी थ्रिलर फ़िल्म ‘बैटल रोयाल’ से प्रभावित होकर बनाया गया यह गेम जिसे दक्षिण कोरिया की वीडियो गेम कंपनी ब्लूहोल कंपनी ने बनाया लेकिन चीन की कंपनी टेनसेंट कुछ बदलाव के साथ इसका मोबाइल वर्जन नए नाम से बाज़ार में लेकर आई और छा गयी। दुनिया में पबजी खेलने वालों में से लगभग 25 फ़ीसद भारत में हैं। जबकि चीन में महज़ 17 फ़ीसद यूज़र्स और अमरीका में 6 फ़ीसद यूज़र्स हैं ।

दुनिया भर में गेमिंग का बाज़ार 16.9 अरब डॉलर का है इसमें चीन की हिस्सेदारी 4.2 अरब डॉलर के साथ सबसे आगे है। दूसरे नंबर पर अमरीका, तीसरे नंबर पर जापान और फिर ब्रिटेन और दक्षिण कोरिया का नंबर आता है।

भारत में अब भी इसका बाजार एक अरब डॉलर से भी कम का है. लेकिन बाक़ी देशों के लिए उभरता हुआ बाज़ार ज़रूर है।भारत में सिर्फ़ पबजी की बात करें तो इस गेम के 175 मिलियन डाउनलोड्स हैं, जिसमें से एक्टिव यूज़र 75 मिलियन के आसपास हैं। चीन से ज़्यादा लोग भारत में पबजी खेलते हैं लेकिन कमाई की बात करें तो वो भारत से बहुत कम होती है ऐसा इसलिए क्योंकि पैसा ख़र्च कर गेम खेलने वालों की तादाद भारत में कम है।

भविष्य में ‘गेमिंग हब’ के तौर पर भारत को देखा जा रहा है अगर किसी कंपनी को भारत के बाज़ार से बाहर निकलना पड़ेगा, तो उस पर असर उसके यूज़र बेस पर ज़रूर पड़ेगा।

यूज़र बेस की बात करें तो भारत में 14 साल से लेकर 24 साल के बच्चे और युवा ऑनलाइन गेम को सबसे ज़्यादा खेलते हैं लेकिन पैसा ख़र्च करने की बात करें तो 25 से 35 साल वाले ऑनलाइन गेमिंग पर ख़र्च ज़्यादा करते हैं ।

गेमिंग से कमाई :

ऑनलाइन गेमिंग में कई तरह से कमाई होती है।

गेमिंग से पैसा कमाने का एक मॉडल है फ्रीमियम का – यानी पहले फ्री में दो और बाद में किश्तों में ख़र्च करने को कहो दूसरा मॉडल है – मर्चन्डाइज़ बना कर।

गेम से प्रभावित होकर अक्सर उन चीज़ों की ख़रीद बच्चों में ख़ास कर बढ़ जाती है, जैसे गेम से जुड़े कैरेक्टर, टी-शर्ट, कप प्लेट, कपड़ों का क्रेज़ इससे भी कंपनियाँ कमाई करती हैं । कमाई का तीसरा रास्ता है : विज्ञापन और फिल्मों का निर्माण ।कई बार फ़िल्मों पर आधारित गेम्स आते हैं फ़िल्म की लोकप्रियता गेम्स के प्रचार प्रसार में मदद करती है और कभी गेम्स की लोकप्रियता फ़िल्मों के प्रचार प्रसार में मदद करती है। जो लोग इस गेम को प्रोफ़ेशनल तरीक़े से खेलते हैं उनको सरकार के इस क़दम से नुक़सान पहुँच सकता है. कई गेम्स खेलने वाले यूट्यूब पर भी बहुत पापुलर हैं इस तरह के गेम्स ऑर्गेनाइज़ करने वालों को भी काफ़ी नुक़सान होगा ।लेकिन टिकटॉक पर बैन के बाद पबजी बैन की चर्चा शुरू हो गई थी. ऐसे में बहुत लोगों ने पहले ही दूसरे गेम्स पर शिफ्ट करना शुरू कर दिया था।

दूसरा विकल्प क्या है ?

भारत में अभी ऑनलाइन गेम्स बनाने का बहुत बड़ा चलन नहीं है। भारतीय डेवलपर्स इसमें अभी काफ़ी पीछे हैं. उनको उम्मीद है कि बैन के बाद इसमें कई कंपनियाँ अब हाथ आज़माएंगी, क्योंकि अब तक उन्हें पबजी की लोकप्रियता से ख़तरा ज़्यादा था।

भारत में हर तरह के मोबाइल और ऑनलाइन गेम खेलने और देखने वालों की संख्या लगभग 30 करोड़ है, जो लॉकडाउन के समय से लगातार बढ़ती जा रही है। कुछ भारतीय गेम्स भी हैं जो यहाँ के लोगों में पापुलर है जैसे बबल शूटर, मिनीजॉय लाइट, गार्डन स्केप, कैंडी क्रश।

बाजार पर पकड़ और कमाई की बात करने तो अभी भी भारत की पकड़ वैश्विक नहीं मानी जाएगी। चीन के बढ़ते दबदबे को कम करने करने के लिए बैन करने के अलावा बड़े खिलाडियों को इस बाजार पर पकड़ बनानी होगी। भतार की बड़ी आबादी युवाओं की है जिसे बदलाव की आदत है और वह किसी एक गेम के भरोसे रुका नहीं रह सकता।

एक भारतीय कंपनी ने अभिनेता अक्षय कुमार के साथ मिलकर ‘पबजी जैसा’ मोबाइल गेम बाज़ार में लाने की घोषणा की है जिसका मक़सद स्पष्ट रूप से बाज़ार में बनी उस ख़ास जगह को भरना है, जो नामी चीनी मोबाइल ऐप पबजी पर प्रतिबंध लगने से बनी है.

बेंगलुरु स्थित एन-कोर गेम्स नामक कंपनी ने इस मोबाइल गेम को तैयार किया है जिसे सीधे तौर पर पबजी का प्रतिद्वंद्वी माना जा रहा है.
कंपनी ने इस गेम को ‘फ़ौजी’ (FAU:G) नाम दिया है जो अक्तूबर अंत तक बाज़ार में होगा.

कंपनी के सह-संस्थापक विशाल गोंडल ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बातचीत में कहा कि “फ़ियरलेस एंड यूनाइटेड गार्ड्स इस गेम का पूरा नाम है. इस गेम पर कई महीने से काम चल रहा था. हमने इस गेम के पहले लेवल को गलवान घाटी पर आधारित रखा है.”

गलवान घाटी में ही चीन और भारत के सैनिकों के बीच जून में पहली बार टकराव हुआ था जिसमें कम से कम 20 भारतीय जवान मारे गये थे. तभी से वास्तविक नियंत्रण रेखा को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव जारी है.