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स्प्रिंकलर सिंचाई में पानी की खपत हो कम और किसानों को मिले भरपूर फसल

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी, रांची के द्वारा उन्नत कृषि को बढ़ावा देने के लिए कई कार्य किये जा रहे है इनमें शामिल है स्प्रिंकलर सिंचाई तकनीक के जरिये किया जाने वाला कृषि कार्य। इस तकनीक से कैसे खेती करते हुए ज्यादा फसल प्राप्त करें इसका लाभ आस-पास रहने वाले किसानो को भी मिल रहा है। उन्नत कृषि को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय द्वारा ड्रिप एरिगेशन, मल्चिंग, पोली हाउस, स्प्रिंकलर सिंचाई का प्रचार प्रसार भी किया है।

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किसानों को उन्नत फसल और तकनीक की जानकारी प्रदान करने में यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ़ एग्रीकल्चर साइंस के अनुभवी शिक्षकों का लाभ भी किसानों को मिलता रहता है। झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी नामकुम कैंपस में बेहत उन्नत तकनीक का हाइड्रोफोनिक्स लैब भी स्थापित है जहाँ स्टूडेंट्स को प्रशिक्षण पूरा करने पर प्रमाणपत्र भी उपलब्ध करवाया जाता है।

स्प्रिंकलर सिंचाई तकनीक ड्रिप सिंचाई की तरह ही बूंद बूंद सिंचाई तकनीक है।इसे बौछारी सिंचाई भी कहा जाता है। इसमें पानी पौधों के जड़ों में नहीं जाकर वर्षा के फुहारों की तरह गिरता है। यह सिंचाई करने का आधुनिक तरीका है। इसमें छिद्र वाली नालियों से जल का प्रवाह किया जाता है और फिर फुहारों की तरह पानी की बूंदें पौधों पर गिरती है। इसमें मुख्य तत्व मोटर पंप, पाइप फ़िल्टर ,पाइप की मुख्य नली, बौछार करने वाली पाइप की नली और पानी फेखने वाला फुहारा है। इनकी सहायता से ही स्प्रिंकलर कार्य करता है।

स्प्रिंकलर का पानी छिड़कने वाला नॉजील हमेशा घूमता रहता है जिससे आस -पास के पौधों पर पानी की फुहार पड़ती रहती है। स्प्रिंकलर सेट को एक जगह से दूसरी जगह आसानी से ले जाया जा सकता है। इसका मतलब है इसे एक खेत से दूसरे खेत में आसानी से शिफ्ट कर सकते है और सिंचाई के काम को कर सकते है।

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बौछार सिंचाई प्रणाली के मुख्य घटक :

बौछारी सिंचाई पद्धती मे मुख्य भाग पम्प, मुख्य नली, बगल कि नली, पानी उठाने वाली नली एंव पानी छिडकाव वाला फुहारा होता है |
बौछार सिंचाई प्रणाली कि क्रिया विधि :

बौछारी सिंचाई में नली में पानी दबाव के साथ पम्प द्वारा भेजा जाता है जिससे फसल पर फुहारा द्वारा छिडकाव होता है | मुख्य नली बगल कि नलियों से जुडी होती है | बगल कि नालियों में पानी उठाने वाली नली जुडी होती है |

पानी उठाने वाली नली जिसे राइजर पाइप कहते है इसकी लम्बाई फसल कि लम्बाई पर निर्भर करती है | क्योंकी फसल कि उंचाई जितनी रहती है राइजर पाइप उससे ह्मेशा उंचा रखना पड़ता है | इसे सामान्यत: फसल कि अधिकतम लम्बाई के बराबर होना चाहिए | पानी छिडकाव वाले हेड घुमने वाले होते है जिन्हें पानी उठाने वाले पाइप से लगा दिया जाता है |पानी छिडकने वाले यंत्र भूमि के पुरे क्षेत्रफल पर अर्थात फसल के उपर पानी छिडकते है | दबाव के कारण पानी काफी दूर तक छिडका जाता है जिससे सिंचाई होती है |

    स्प्रिंकलर सिंचाई की विशेषताएँ :

  • सिंचाई के दौरान मजदूरों पर होने वाले खर्च में कमी।
  • इस तकनीक की मदद से पानी के साथ -साथ समय की बचत होती है।
  • आवश्यकता के अनुसार फसल को पानी एक या दो दिन छोड़ कर दिया जाता है।
  • इस तकनीक का उपयोग उबर खाबर जमीन और कम पानी उपलब्धता वाली भूमि में किया जाता है।
  • यह सिंचाई तकनीक आसान और बेहद कम खर्च में उपलब्ध है।
  • इस तकनीक की मदद से काम पानी में ज्यादा भूमि पर सिंचाई की जा सकती है।
  • इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है की पानी की फुहारें पौधों की पत्तियों पर पड़ती है जिनसे पत्ते साफ़ रहते है और उन्हें अपना भोजन बनाने में आसानी होती है। इस कारण से पौधों का विकास भी होता है।
  • छिटकावा विधि से बोई गयी फसलों में यह तकनीक बेहतर मानी जाती है।
  • स्प्रिंकलर सिंचाई (Sprinkler Irrigation) के लाभ :
  • सतही सिंचाई मे पानी खेत तक पहुँचने मे 15-20 प्रतिशत तक अनुपयोगी रहता है |
  • सिंचाई में एकसा पानी नही पहुँचता जबकी बौछारी सिंचाई से संचित क्षेत्रफल 1.52 गुना बढ जाता है अर्थात इस विधि से सिंचाई करने पर 25-50 प्रतिशत तक पानी की सीधे बचत होती है |
  • जब पानी वर्षा कि भांती छिडकाया जाता है तो भूमि पर जल भराव नही होता है जीससे मिट्टी कि पानी सोखने कि दर कि अपेक्षा छिडकाव कम होने से पानी के बहने से हानी नही होती है |
  • जिन जगहों पर भूमि ऊची-नीची रहती है वहाँ पर सतही सिंचाई संभव नहीं हो पाती उन जगहों पर बौछारी सिंचाई वरदान साबित होती है |
  • बौछारी सिंचाई बलुई मिट्टी एव अधिक ढाल वाली तथा उची-नीची जगहों के लिए उपयुक्त विधि है | इन जगहो पर सतही विधि से सिंचाई नही कि जा सकती है |
  • इस विधि से सिंचाई करने पर मिट्टी में नमी का उपयुक्त स्तर बना रहता है जिसके कारण फसल कि वृद्धी उपज और गुणवत्ता अच्छी रहती है |
  • इस विधि मे सिंचाई के पानी के साथ घुलनशील उर्वरक, कीटनाशी तथा जीवनाशी या खरपतवारनाशी दवाओं का भी प्रयोग आसानी से किया जा सकता है|
  • पाला पड़ने से पहले बौछारी सिंचाई पद्धती से सिंचाई करने पर तापक्रम बढ जाने से फसल को पाले से नुकसान नही होता है |
  • पानी कि कमी, सीमित पानी कि उपलब्धता वाले क्षेत्रो मे दुगुना से तीन गुना क्षेत्रफल सतही सिंचाई कि अपेक्षा किया जा सकता है|
    स्प्रिंकलर सिंचाई का रखरखाव एवं सावधानियाँ :

  • सिंचाई के प्रयोग के समय एवं प्रयोग के बाद परीक्षण कर लेना चाहिए और कुछ मुख्य सावधानियाँ रखने से स्प्रिंकलर सेट अच्छी तरह चलता है |
  • प्रयोग होने वाला सिंचाई जल स्वच्छ तथा बालू एवं अत्यधिक मात्रा घुलनशील तत्वो से युक्त नही होना चाहीए |
  • उर्वरको, फफुंदी / खरपतवारनाशी आदी दवाओं के प्रयोग के पश्चात सम्पूर्ण प्रणाली को स्वच्छ पानी से सफाई कर लेना चाहीए |
  • प्लास्टिक वाशरो को आवश्यकतानुसार निरीक्षण करते रहना चाहिए और बदलते रहना चाहीए |
  • रबर सील को साफ रखना चाहीए तथा प्रयोग के बाद अन्य फिटिंग भागों को अलग कर साफ करने के उपरान्त शुष्क स्थान पर भण्डारीत करना चाहीए |
Webinar on impact and strategies for the education sector during COVID-19

इंपैक्ट एंड स्टैट्जीज़ फॉर द एजुकेशन सेक्टर ड्यूरिंग कोविड -19 पैंडेमिक पर वेबिनार का आयोजन

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी और डोरंडा कॉलेज रांची के सयुंक्त तत्वावधान में “इंपैक्ट एंड स्टैट्जीज़ फॉर द एजुकेशन सेक्टर ड्यूरिंग कोविड -19 पैंडेमिक ” पर वेबिनार का आयोजन किया गया। इसे बिनोबा भावे विश्वविद्यालय, हज़ारीबाग़ के पूर्व कुलपति प्रो. डॉ. रमेश शरण और अमेज़ॉन वेब सर्विसेज एकडेमी के साउथ एशिया हेड लोकेश मेहरा ने संबोधित किया ।

वेबिनार का शुभारंभ सरस्वती वंदना के साथ किया गया। अमेजॉन के लोकेश मेहरा ने सर्वप्रथम विषय प्रवेश करते हुए माजूदा दौर में एजुकेशन सेक्टर की चुनौतियाँ अवसर, विकास और तकीनीकी छमता को रेखांकित करते हुए अपनी बात रखी। उन्होंने पुरातन शिक्षा वयवस्था और कोविड के बाद हुए बदलाओं पर विस्तार से अपनी बात रखते हुए बताया की ” बेहतर भविष्य को हासिल करने के लिए एजुकेशन फील्ड से जुड़े लोगों ने आगे आकर इस विषम परिस्थिति में भी बेहतर कार्य किया है।

तकनीक ने नए अवसर भी पैदा किये है वर्चुअल एजुकेशन ने इस दौर में बड़े बदलाव किये है जिनसे सभी को दो चार होना पड़ा है। तमाम चुनौतियों के साथ नए अवसर भी सामने आये है। कोविड- 19 के कारण कई बड़ी कंपनियों को बंद होना पड़ा है। तकनिकी प्रसार के साथ तालमेल बिठाने में कई समस्यायें भी देखने को मिली रहती है। लेकिन सोशल मीडिया के जरिये इसको समझने में सहायता भी मिली है। आज का दौर सोशल मीडिया, बिग डेटा, मोबाइल फ़ोन और क्लाउड कंप्यूटिंग का दौर है। बदलाओं की बात करे तो जॉब पोजीशन ही नहीं बल्कि माइंड सेट भी बदलते देखे गए है।

प्रो डॉ रमेश शरण ने अपने संबोधन के दौरान डिजिटल एजुकेशन सिस्टम को रेखांकित करते हुए कहा की ” डिजिटल एजुकेशन की सबसे बड़ी दिक्कत इसके इस्तेमाल में आने वाली तकनिकी बाधाएँ है जिनसे दो चार होना पड़ता है। उन्होंने कहा की आज भी डिजिटल एजुकेशन सबके लिए संभव नहीं हो पाया है। ग्रामीण इलाकों में आज भी सुविधाजनक तरीके से इसका इस्तेमाल नियमित तौर पर नहीं हो पता है। खासकर स्कूली शिक्षा में अभी भी काफी काम किया जाना बाकि है। प्रो शरण ने डिजिटल एजुकेशन के भविष्य की चर्चा करते हुए कहा की इसमें काफी संभावना है और आगे जाकर यही मिश्रित शिक्षा व्यवस्था कार्य करेगी। उन्होंने स्टूडेंट्स से तकनिकी रूप से सक्षम होने के लिए भी कहा। भविष्य की शिक्षा तकनीक आधारित होगी।“

वेबिनार के दौरान प्रश्न उत्तर सत्र का भी आयोजन किया गया जिसमें स्टूडेंट्स के सवालों का जवाब दिया गया।

वेबिनार के समापन पर झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार प्रो. डॉ. पियूष रंजन ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा की वक्ताओं ने अपना कीमती समय निकाल कर बहुमूल्य राय से सबको अवगत कराया इसके लिए उनका धन्यवाद। उन्होंने कहा की सफलता किसी की मुहताज नहीं होती यह आप दोनों ने साबित किया है। डॉ. पियूष ने पुनः वेबिनार को सफल बनाने में शामिल फैकल्टी और टेक्निकल टीम के सदस्यों एवं वेबिनार के आयोजन में शामिल प्रो. रश्मि और डोरंडा कॉलेज की प्रो. नीलू कुमारी को का धन्यवाद किया।

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट क्लब आगामी 19 दिसंबर को बिज़ -प्लान 2020 का करेगा आयोजन

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी, के मैनेजमेंट क्लब द्वारा बिज़ -प्लान 2020 का आयोजन आगामी 19 दिसंबर को किया जाना है। बिज प्लान डिपार्टमेंट ऑफ़ मैनेजमेंट स्टडी द्वारा संचालित मैनेजमेंट क्लब द्वारा प्रति वर्ष आयोजित होने वाला कार्यक्रम है। इसमें राज्य भर से मैनेजमेंट के स्टूडेंट्स शामिल होते है और अपने बिजनेस प्लान को प्रस्तुत करते है। इस वर्ष इसमें इनोवेटिव आईडिया के प्रस्तुतीकरण पर जोर दिया गया है।

बिज प्लान में शामिल होने वाली टीमों के प्रतिभागी ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट का स्टूडेंट्स होना चाहिए। एक टीम में चार से ज्यादा सदस्य नहीं होने चाहिए। एक कॉलेज से एक ही टीम को प्रतियोगिता में शामिल किया जायेगा। एक प्रतियोगी एक से ज्यादा टीम में शामिल नहीं हो सकता है।

टीम के एक सदस्य को टीम लीडर के तौर पर अपना निबंधन कराना आवश्यक है। टीमों को अपने बिजनेस प्लान की जानकारी एमएस पॉवर पॉइंट में प्रस्तुत करनी होगी। एक टीम किसी एक विषय पर ही अपनी प्रस्तुति देगी। बिजनेस प्लान की प्रस्तुति में कवर पेज, इंडेक्स, समरी, मार्किट एनलाइसिस, ऑपरचुनिटी, एक्सिक्यूशन, फाइनेंसियल प्लान और कन्क्लूजन को शामिल करना होगा।

टीमों का चयन उनके द्वारा प्रस्तुत विचारों में नवीनता मौलिकता , विचार की व्यापकता, बाजार और स्थिरता और बाजार सरलता को देखते हुए किया जायेगा।

प्रतियोगिता से जुड़े किसी भी नियम और जानकारी के लिए मैनेजमेंट क्लब के सदस्यों से संपर्क किया जा सकता है।

Mining Symposium

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी में “प्रॉस्पेक्ट ऑफ़ अंडरग्राउंड कोल् माइनिंग इन इंडिया” विषय पर सिम्पोजियम का आयोजन।

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ़ माइनिंग इंजीनियरिंग के द्वारा सोमवार को ” प्रॉस्पेक्ट ऑफ़ अंडरग्राउंड कोल् माइनिंग इन इंडिया विषय पर ऑन लाइन सिम्पोजियम का आयोजन किया। इस अवसर पर व्याख्यान देने के लिए आईआईटी आईएसएम धनबाद में प्रोफेसर और कैरियर डेवलपमेंट सेल के चैयरमैन डॉ सतीश कुमार सिन्हा और झारखण्ड स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के उपाध्यक्ष एवं सीसीएल में डायरेक्टर फाइनेंस के तकनिकी सचिव संजय कुमार सिंह उपस्थित थे।

इस अवसर पर विभाग के फैकल्टी मेंबर और विभिन्न कॉलेज और यूनिवर्सिटी से 250 से ज्यादा स्डेंट्स ऑनलाइन जुड़े हुए थे।
प्रो. सतीश सिन्हा ने अपने संबोधन के दौरान अंडरग्राउंड माइनिंग से जुड़े कई तरीको का जिक्र किया जो बेहद सफल और प्रयोग में लाये जाते है। उन्होंने इस दौरान स्टूडेंट्स को अंडरग्राउंड माइनिंग से जुड़े कई कार्यों से भी अवगत कराया। इसके अलावा माइन एनवायरनमेंट, मिनरल कन्जर्वेशन और वर्क कल्चर के बारे में भी विस्तार से बताया।

इस दौरान स्टूडेंट्स ने दोनों वक्ताओं से प्रश्न पूछे जिनमें कार्य के तरीके, अनुभव और माइनिंग सेक्टर से जुड़े अवसरों से जुड़े सवाल थे। कार्यक्रम के सफल आयोजन में प्रो. रश्मि की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस अवसर पर माइनिंग डिपार्टमेंट के कोर्डिनेटर प्रो. सुमीत किशोर भी उपस्थित थे।

Webinar on IMPACT AND STRATEGIES FOR THE EDUCATION SECTOR DURING COVID -19 PANDEMIC

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Date : 14 Dec, 2020
Time : 11:00 am onwards

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SPEAKERS :

Prof. (Dr.) Ramesh Sharan
Dean, Faculty of Social Sciences, Ranchi University Former Vice Chancellor – Vinoba Bhave University

Mr. Lokesh Mehra
Head – South Asia, Amazon Web Services Academy

Convenor : Dr. Neelu Kumari
Assistant Professor, Deptt. of Economics Doranda College, Ranchi Mobile No : 9470193857

Convenor : Prof. Rashmi
Assistant Professor, Deptt. of Life Skills Jharkhand Rai University, Ranchi Mobile No : 9431579389

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झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी में एक दिवसीय नेशनल इ- कॉन्फ्रेंस का आयोजन

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी में आयोजित एक दिवसीय नेशनल इ- कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा की “आदिवासी दौलत के भरोसे नहीं विश्वास के भरोसे जीता है। आजादी के लंबे समय के बाद भी कई क्षेत्र अछूते रह गए। नीतिगत रूप से देश के बारे में समाज के बारे में कई कार्य अधूरे है। हमें अपने देखने का नजरिया बदलने की जरुरत है। जनजातीय कार्य मंत्रालय का गठन ही आजादी के इतने वर्षो बाद किया गया। सबसे जरुरी है भरोसा कायम करना और किये जा रहे कार्यों को आगे बढ़ाना। जनजातीय समाज के मूल बहुत सिद्धांतों के प्रति समाज बढ़ाने की आवश्यकता पर भी उन्होंने बल दिया। “ झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी, रांची, ट्राइबल वेलफेयर एंड एंटरप्रेनरशीप कौंसिल, विकी के द्वारा किये जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा की इस नेशनल कांफ्रेंस के समुद्र मंथन से कई नविन और सार्थक बातें सामने आएंगी जिनको साथ लेकर कार्य किया जायेगा।

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी में शनिवार को “एमपॉवरिंग ट्राइबल वीमेन : इंटरप्रेनॉरशिप एंड स्किल डेवलपमेंट अ वे टुवर्ड्स आत्मनिर्भर भारत ” पर नेशनल इ- कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया । कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ “शुभम करोति कल्याणम” के सश्वर पाठ के साथ दीप प्रज्वलित कर किया गया। विषय प्रवेश करते हुए झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी की कुलपति और ट्राइबल वेलफेयर एंड एंटरप्रेनरशीप कौंसिल, विकी की नेशनल प्रेसिडेंट प्रो. डॉ. सविता सेंगर ने नेशनल इ कॉन्फ्रेंस के आयोजन पर प्रकाश डालते हुए कहा की ” यह झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी, रांची, ट्राइबल वेलफेयर एंड एंटरप्रेनरशीप कौंसिल, विकी का संयुक्त प्रयास है। हमारा उद्देश्य जनजातीय और ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने, उन्हें प्रशिक्षित करने और उनके हुनर को वैश्विक पहचान देने की है।

डॉ सेंगर ने कहा की महिलायें आज भी विषमता की शिकार है। जनजातीय महिलायें कठिन श्रम करने के बाद भी आर्थिक रूप से संपन्न नहीं बन पायी है। विकी इस दिशा में लगातार कार्य कर रहा है। सतत विकास और उद्यमिता को बढ़ाव देना इसके प्रमुख कार्यों में शमिल है। इसी कड़ी में आईडिया पिचिंग कांटेस्ट का आयोजन किया गया था जो एक सफल प्रयास रहा इसके जरिये युवा महिला उद्यमियों को अपने मौलिक विचारों को प्रदर्शित करने का मंच मिला और नविन विचारों को पुरस्कृत भी किया गया। उन्होंने भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के सार्थक प्रयत्नों की भी प्रशंसा की जिनके जरिये कार्य किये जा रहे है।

डॉ सेंगर ने बताया की ट्राइबल वेलफेयर एंड एंटरप्रेनरशीप कौंसिल, विकी के सहयोग से ट्राइबल टैलेंट पूल बिजनेस बेंचर्स “बायो आयुर्वेदा ” की स्थापना की गयी है जो जनजातीय उत्पादों को वैश्विक मंच प्रदान करने का कार्य कर रहा है। इसमें प्रशिक्षण, उत्पाद संग्रह और उत्पादन को बाजार उपलब्ध करने का कार्य किया जाता है। उन्होंने बताया की यह सेंटर फॉर एक्सीलेंस के तौर पर कार्य कर रहा है। उन्होंने आशा व्यक्त करते हुए कहा की कॉन्फ्रेंस के माध्यम से नए रोड मैप मिलेंगे जिससे प्रयासों को गति मिलेगी।

कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए वीमेंस इंडियन चैंबर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की फाउंडर प्रेसिडेंट और झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी की चांसलर डॉ हरबीन अरोड़ा ने अपने प्रेरणा दायी संबोधन के दौरान “समता और ममता के समन्वय पर जोर देते हुए कहा की महिलाओं को मौका देने की जरुरत है जो उन्हें कई कारणों से मिल नहीं पता है। सफलता सबका अधिकार है। आत्मनिर्भर भारत अभियान की सोच भी इसी प्रकार की है जिसमें सशक्त और कौशल आधारित भारत की कल्पना है। दुनिया को भारत का टैलेंट दिखे और वी कैन डु इट का सन्देश सबके पास जाये। डॉ अरोड़ा ने इ प्लेटफॉर्म सी -इकॉनमी की भी चर्चा की जिसमें महिला उद्यमियों को आर्थिक रूप से सशक्त करने के लिए कार्य किया जाता है।“

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी के एडवाइजर और एचइसी के पूर्व सीएमडी प्रो. अभिजीत घोष ने अपने संबोधन में नेशनल इ – कांफ्रेंस की चर्चा करते हुए कहा की इसमें देश के कई राज्यों से 76 से ज्यादा शोध पत्र आये है जिनमें से 42 का चयन किया गया है। कॉन्फ्रेंस में 4 आमंत्रित व्याख्यान, 4 तकनिकी व्याख्यान और 2 सामानांतर सत्र का आयोजन किया जायेगा।

उद्घाटन सत्र के समापन के पश्चात झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार प्रो. डॉ. पियूष रंजन ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए सभी अतिथियों, वक्ताओं, शिक्षाविदों , शोध छात्रों का स्वागत और अभिनंदन किया। उन्होंने विशेष रूप से केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा और झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी की चांसलर डॉ हरबीन अरोड़ा को धन्यवाद दिया जिन्होंने उपस्थित होकर कांफ्रेंस का मान बढ़ाया और शोधार्थियों को प्रोत्साहित किया। डॉ. रंजन ने पुनः सभी विश्वविद्यालय कर्मियों को धन्यवाद दिया जिनके द्वारा इसे सफल बनाने में सहयोग दिया गया।

TOP TEN Career Opportunities in the field of Agriculture Sciences

Agriculture is as old as human civilization. The Indian economy is heavily dependent on Agriculture as it contributes to 16.5% of India’s gross domestic product (GDP) and employs the largest (43%) of the Indian workforce. Over the years, India has undergone a quantum shift from basic farming to more efficient, sustainable, and productive farming.

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More importantly, with the growing population and rise in urban and rural income there is a huge demand for food, making it critical to have a modern system of agricultural education that can produce highly skilled and competent manpower to address the challenging tasks of catering to the industry requirements.

Some interesting facts about Indian agricultural Industry:

  • India has 20 agri-climatic regions and presence of all 15 major climates, encouraging cultivation of variety of different crops across the world
  • India possesses 46 of the 60 soil types in the world.
  • India has the 10th largest arable land resource in the world
  • India is one of the largest producers of vegetables, fruits and flowers in the world
  • India is the largest producer of milk, second-largest of sugar & leading producer of coconut and spices. The spice market in India is valued at INR 40,000 crore (USD 5.87 billion) annually
  • Organic food is the next big thing and India ranks first in number of organic farmers and ninth in terms of area under organic farming
  • In 2019, India was the 9th largest exporter of agricultural products and the total value of exported agricultural products stood at $ 37.4 billion.
  • India’s agriculture technology can grow to $24.1 billion in 5 years
  • The current market size of agri-tech, including AI-based agri innovation start-ups in India, is nearly worth $ 204mn.
  • 2018 saw an inflow of over $1 bn in startups in India in agriculture

What a career in Agriculture can offer

Backed by Government initiatives like “Aatmanirbhar Bharat” & “Make in India” along with growing private sector investment, the overall scenario of agriculture as an industry has undergone a huge change in the past decade. As a result, agricultural education in India has also transformed & become responsive to the growing and changing needs of the society in general and aspirations of the farming community in particular. Let us discuss the exciting emerging career opportunities for aspirants in this field.

Here are the TOP TEN Career opportunities in the field of agriculture Sciences:

Agricultural engineering: There is a growing demand for agriculture engineers in India in both Govt. & private sector. Agricultural engineering is the branch of engineering that applies engineering science disciplines and technology practices to the efficient production and processing of food, feed, fiber and fuels. Agriculture Students can become agriculture engineer, agriculture inspector, agriculture specialist, farm manager, agronomist etc.
Top Employers: ICAR, FCI, ITC, Nestle, NABARD, Amul, CSIR, and Mother Dairy etc.

Food Processing: The Indian food retail market is expected to reach INR 61 lakh crore (US$ 894.98 billion) by 2020. The Indian food processing industry accounts for 32 per cent of the country’s total food market, one of the largest industries in India and is ranked fifth in terms of production, consumption, export and expected growth. There are various opportunities like Food Technologist, Research Scientist, Engineers and Bio-chemists etc. which can be explored.
Top Employers: Parle Agro, ITC Foods, Britannia, LT Foods, KRBL, Venky’s India, MTR Foods etc.

Horticulture: The field of horticulture holds ample scope both nationally and internationally. Horticulturists can find jobs in institutes of horticulture, in plantations, vegetable farms as well as fruit groves. Advancement in horticultural technology, increasing product demands and a growing export industry makes this a lucrative career option. Horticulture jobs include positions like project manager, landscape designer, horticulturist, pomologist, agriculture inspector, floriculturist, irrigation manager etc.
Top Employers: Adama India, Mcleod Russel India Ltd, Jain Irrigation Systems Ltd, Goodricke Group Ltd etc.

Forestry: As we all know that forest is a very important part of an ecosystem. Therefore, management of forest is required and is done by the foresters (forest professionals).The career opportunities are available in both public as well as in private sector. The public sector jobs includes work in zoological parks, wildlife ranges, Forest Dept., National Parks & sanctuaries etc.
Top Employers: Indian Council of Forestry Research and Education (ICFRE) and its affiliated institutes, AECOM India, IIFM etc.

Dairy Farming: India is the largest milk producer and the second largest milk products producer in the world leading to a plethora of career opportunities in dairy farming in the country.
Employment opportunities exist in both government and private sectors. The National Dairy Development Board (NDDB) is a key PSU in the field, however, with almost every state aping Amul’s ‘cooperative’ success, employment opportunities have increased manifold for technologists and managers, both in production and marketing. Entry of multinational giants like Nestle, Cadburys, Britannia, Kellogg’s, Heritage Foods, KFC, HUL, etc. has given a further boost to job opportunities.
Top Employers: Amul, Mother Dairy, Heritage Foods, Cadburys, KSE, Parag Foods etc.

Aquaculture: With its long coastline with rich biodiversity, India is the fourth largest producer of fish in the world offering great scope for Fisheries and aquaculture. Many career options exist in this field in both public and private sectors like Manager – aquaculture, Manager-fisheries, Culturist, consultant, technical staff etc.
Top Employers: BMR Group, Goldmarine Exports, Abad Fisheries, Avni Foods etc.

Poultry Farming: Growing demand for a low priced source of protein-rich nutrients, provided by eggs and chickens has led to a 20% annual growth to the Indian Poultry farming industry. Jobs from the sector can be taken up in various hatcheries, veterinary hospitals, pharmaceutical concerns, feed millers, and feed production companies.
Top Employers: Godrej Agrovet, Suguna Foods, Venkateshwara Hacheries etc.

Sericulture: The word ‘sericulture’ is derived from the Greek word ‘sericos’ which means ‘silk’ and the English word ‘culture’ meaning ‘rearing’. Sericulture refers to the conscious mass-scale rearing of silk producing organisms to obtain silk. India has the unique distinction of being the only country producing all the five kinds of Silk- Mulberry, Eri, Muga, Tropical Tasar and temperate (oak) Tasar. The job prospects comprise of sericulturist, serìculture Research, sericulture assistant, sericulture Inspector and supervisor etc.
Top Employers: State/District Khadi Boards, NABARD, Krishi Vigyan Kendra etc.

Research Science & Communication: You can pursue a career in research and communication as an agricultural researcher or a journalist. You can drive innovation for improving agricultural yields and sustainable production.
Top Employers: Indian Agriculture Research Institute, ICAR, Farmioc etc.

Agri-Entrepreneurs: According to a study by FICCI, agricultural start-ups are growing at 25 per cent Y-O-Y basis offering technological solutions for helping the Indian farm sector in keeping the food and farm supply. A large number of entrepreneurs in the country have turned entrepreneurs and have become quite successful.
Top Agri-Entrepreneurs: Agro Star, EM3 agri Services, Ninjacart, Crofarm, Farm Taaza, Cropln, Ugaao etc.

Pre Republic day parade

पूर्व गणतंत्र दिवस परेड चयन शिविर में झारखण्ड राय विश्वविद्यालय के स्वयंसेवक शामिल

भारत सरकार के युवा एवं खेल विभाग की इकाई राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस ) के स्वयंसेवक एवं स्वयंसेविका के लिए पूर्व गणतंत्र दिवस परेड चयन शिविर 2020 का आयोजन 7 नवंबर को किया गया। रांची विश्वविद्यालय के दीक्षांत मंडप में आयोजित शिविर में 3 विश्वविद्यालयों, 20 महाविद्यालयों से कुल 140 स्वयंसेवक शामिल हुए। झारखण्ड राय विश्वविद्यालय, रांची की एनएसएस इकाई से जुड़े 5 स्वयंसेवक भी शिविर में शामिल हुए ।

गणतंत्र दिवस पर दिल्ली के राजपथ में आयोजित होने वाले समारोह में शामिल होना हर विद्यार्थी का सपना होता है। इसके लिए राज्य स्तर पर चयन शिविर का आयोजन किया जाता है जिसमें देश भर के अलग अलग प्रांतों से सर्वश्रेष्ठ स्वयंसेवक एवं स्वयंसेविका का चयन किया जाता है। राज्य स्तर पर चयनित सर्वश्रेष्ठ स्वयंसेवक पुनः 6 राज्यों के लिए आयोजित पूर्व गणतंत्र दिवस परेड चयन शिविर में शामिल होते है। इसके उपरांत सर्वश्रेष्ठ स्वयंसेवकों का चयन राजपथ पर आयोजित परेड के लिए किया जाता है। पूर्व गणतंत्र दिवस परेड चयन शिविर में स्वयंसेवकों से दौड़, परेड, साक्षात्कार,सांस्कृतिक कार्यक्रम के जरिये सर्वश्रेष्ठ स्वयंसेवकों का चयन किया गया।

झारखण्ड राय विश्वविद्यालय के एनएसएस स्वयंसेवक प्रति वर्ष पूर्व गणतंत्र दिवस परेड चयन शिविर में शामिल होते रहे है। वर्ष 2019 में विश्वविद्यालय की बीएससी एग्रीकल्चर की छात्रा सतरूपा भट्टाचार्जी का अंतिम चयन पूर्व गणतंत्र दिवस परेड के लिए हुआ था। सेंट्रल जोन के लिए रांची निफ्ट में आयोजित विशेष कैम्प में सतरूपा का चयन हुआ था जिसमें 6 राज्यों के स्वयं सेवक उपस्थित थे।

रांची में आयोजित पूर्व गणतंत्र दिवस परेड चयन शिविर में रांची विश्वविद्यालय के डीएसडब्लू डॉ. पी के वर्मा, रांची विश्वविद्यालय के एनएसएस कार्यक्रम समन्वयक डॉ. ब्रजेश कुमार, झारखण्ड राय विश्वविद्यालय से डॉ अलोक कुमार, प्रो. रघुवंश सिंह सहित विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के कार्यक्रम अधिकारी उपस्थित थे।

IEC 2020

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के इनोवेशन सेल ने झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी को प्रदान किया टू स्टार रेटिंग

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी, रांची के इंस्टीटूशन इनोवेशन कौंसिल ( आईआईसी ) को भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा स्थापित इनोवेशन सेल ने वर्ष 2019-2020 के दौरान वर्ष भर नवोन्मेष और स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए प्रतिष्ठित टू स्टार रेटिंग का प्रमाणपत्र प्रदान किया है। शिक्षा मंत्रालय के इनोवेशन सेल के प्रमाणपत्र में यूनिवर्सिटी के द्वारा वर्ष भर किये गए कार्यों और इनोवेशन से जुड़े प्रयासों को प्रोत्साहित करने एवं समय- समय पर आयोजित कार्यक्रमों की सराहना की गयी है।

IIC

भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा स्थापित इनोवेशन सेल की स्थापना नवाचार की संस्कृति को पूरे देश में सभी उच्च शिक्षा संस्थानों में व्यवस्थित रूप से बढ़ावा देने के लिए स्थापित किया गया है। इसके मुख्य कार्यों में आईडिया जेनेरेशन,प्री इन्क्यूबेशन,इन्क्यूबेशन और इन्क्यूबेटर को सफल स्टार्टअप्स मेंबदलने के लिए प्रेरित करने का कार्य करता है। इसके अलावा उच्च शिक्षा संस्थानों में पढ़ने वाले युवाओं की सकारात्मक ऊर्जा को नए विचार गढ़ने और उनपर अमल करते हुए स्टार्टअप्स के अलावा उद्यमशील उद्यम स्थापित करने के लिए कार्य करता है।

IEC2

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी द्वारा वर्ष 2019 में स्टार्टअप्स से जुड़े कार्यों को व्यवस्थित रूप से संचालित और संचारित करने के लिए इंस्टीटूशन इनोवेशन कौंसिल की स्थापना की गयी थी। इसकी स्थापना के मुख्य उद्देश्यों में युवाओं को साहस भरते हुए प्रेरित करना, नए विचारों के साथ कार्य करते हुए मूल विचारों के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। स्थानीय स्तर पर इनोवेशन इको सिस्टम की स्थापना करना, स्टार्टअप्स मैकेनिज़्म का निर्माण, संज्ञानात्मक योग्यता का विकास करना भी इसके मुख्य कार्य है।

इंस्टीटूशन इनोवेशन कौंसिल ने उद्यम और नवाचार को बढ़ावा देने, इंटेलेक्टुअल प्रॉपर्टी राइट्स की जानकारी देने के अलावा वर्कशॉप, सेमिनार , स्टार्टअप्स से जुड़े सफल नवाचार और सफल उद्यमशील उद्यम से जुड़े लोगों से परिचय, निवेशको से मुलाकात , हैकेथोन, आईडिया कम्पटीशन, आईडिया पिचिंग कांटेस्ट जैसे प्रतियोगिता का आयोजन भी करता है।

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झारखण्ड राय विश्वविद्यालय में दीपोत्सव 2020 का आयोजन

झारखण्ड राय विश्वविद्यालय, रांची के सांस्कृतिक कल्ब द्वारा दीपावली के पवन पर्व पर दीपोत्सव का आयोजन किया। इस वर्ष ऑनलाइन आयोजित सांस्कृतिक प्रतियोगिता दीपोत्सव में मुख्य रूप से दो प्रतियोगिया का आयोजन किया गया जिनमें रंगोली मेकिंग और वीडियो मेकिंग शामिल रहें। रंगोली मेकिंग प्रतियोगिता का थीम ” हाउ डु यू सी द वर्ल्ड डियूरिंग कोविड 19” जबकि वीडियो मेकिंग प्रतियोगिता का थीम “दिवाली” था।

Rangoli

रंगोली मेकिंग प्रतियोगिता में बीबीए प्रथम सेमस्टर की छात्रा जेनिफर कुजूर को विजेता जबकि बीएससी एग्रीकल्चर सेमेस्टर तृतीय की छात्रा प्रीति परायी को उपविजेता घोषित किया गया। वहीँ दिवाली वीडियो मेकिंग प्रतियोगिता में बीसीए प्रथम सेमेस्टर के छात्र ओम कुमार विजेता वहीँ बीएससी एग्रीकल्चर की छात्रा वर्षा रानी को द्वितीय पुरस्कार प्राप्त हुआ।
दीपोत्सव प्रतियोगिता के सफल आयोजन में सांस्कृतिक क्लब की समन्वयक प्रो. अनुराधा शर्मा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।