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डिप्लोमा माइनिंग इंजीनियरिंग : पीडीपीटी ट्रेनिंग से कोल इंडिया में ओवरमैन की नौकरी पाना होगा आसान

भारत की माइनिंग इंडस्ट्री 7 लाख से अधिक लोगों को रोज़गार मुहैया करवाती है । देश के जीडीपी में माइनिंग इंडस्ट्री का कुल योगदान लगभग 2.5 फीसदी है । अगर आप भी माइनिंग इंजीनियर बनने का सपना रखते है तो यह एक बेहतरीन कोर्स है। डिप्लोमा कोर्स(डिप्लोमा इन माइनिंग इंजीनियरिंग) 3 वर्षीय पाठ्यक्रम है। प्राइमरी लेवल इंट्री के लिए बेस्ट ऑप्शन है । इसे करने के बाद माइनिंग ओवरमैन, माइनिंग सरदार जैसे पद पर कार्य कर सकते है।

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डिप्लोमा इन माइनिंग इंजीनियरिंग :
माइनिंग इंजीनियरिंग करने वाले विद्यार्थियों की पहली पसंद डिप्लोमा माइनिंग इंजीनियरिंग है। तीन साल के इस कोर्स में दो बार वोकेशनल ट्रेनिंग होती है। डिप्लोमा कोर्स और ट्रेनिंग को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद माइनिंग सेक्टर के एंट्री लेवल पर निकलने वाले आवेदन आप भरने की अर्हता रखते है।

डिप्लोमा माइनिंग इंजीनियरिंग से जुडी जानकारी

बीटेक माइनिंग इंजीनियरिंग:
बीटेक माइनिंग इंजीनियरिंग 4 वर्षीय पाठ्यक्रम है जिसे पूरा करने के बाद आप जूनियर इंजीनियर के तौर पर माइनिंग इंडस्ट्री ज्वाइन कर सकते है और मेहनत और लगन के साथ काम करते हुए कुछ ही वर्षों में उच्चतम वेतनमान प्राप्त कर सकते है।

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PDPT ट्रेनिंग: पीडीपीटी का पूरा नाम पोस्ट डिप्लोमा प्रैक्टिकल ट्रेनिंग है। डिप्लोमा कोर्स करने के बाद विद्यार्थियों को 1 साल का अंडरग्राउंड ट्रेनिंग करना पड़ता है, इसी प्रशिक्षण को पीडीपीटी ट्रेनिंग कहा जाता है। इस प्रशिक्षण के दौरान ट्रेनिंग में शामिल विद्यार्थियों को छात्रवृति भी मिलती है।

पीडीपीटी ट्रेनिंग का संचालन बोर्ड ऑफ़ प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (BOPT) करता है। डिप्लोमा माइनिंग इंजीनियरिंग करने वाले विद्यार्थियों को पीडीपीटी ट्रेनिंग के अलावा गैस टेस्टिंग, लैम्प हैंडलिंग और फर्स्ट ऐड सर्टिफिकेट की परीक्षा भी पास करनी होती है। इन सभी कार्यों का संचालन अधिकार डायरेक्टर जनरल ऑफ़ माइंस सेफ्टी (DGMS) के द्वारा किया जाता है। इसका मुख्यालय धनबाद (झारखंड) में है और इसका नेतृत्व खान सुरक्षा महानिदेशक करते हैं।

इन सभी सर्टिफिकेट को प्राप्त करने के बाद डिप्लोमा सर्टिफिकेट के साथ इसे डीजीएमएस धनबाद के कार्यालय में जमा करना होता है। आवेदन और प्रमाणपत्र जमा करने के बाद ओवरमैन का सर्टिफिकेट प्राप्त होता है। इसे प्राप्त करने के बाद आप पूरी तरह से ओवरमैन कहलाने लगते है और जूनियर ओवरमैन, माइनिंग सरदार के पद पर नौकरी के लिए आवेदन कर सकते है। प्रति वर्ष कोल् इंडिया की आनुषंगिक इकाइयां CCL, BCCL, ECL, NCL, WCL, MCL ओवरमैन पदों नियुक्ति प्रकाशित करता है।

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झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी: विभिन्न संकायों के 7 शिक्षकों ने प्राप्त किया पेटेंट

बौद्धिक संपदा (आईपी) दिमाग की रचनाओं से संबंधित है, जैसे आविष्कार, साहित्यिक और कलात्मक कार्य, डिजाइन और व्यापार में उपयोग किए जाने वाले प्रतीक, नाम और चित्र आदि। मौलिकता और रचनात्मकता की रक्षा और संरक्षण के लिए किया जाने वाले कार्य पेटेंट कहलाता है। पेटेंट एक शब्द है जिसका उपयोग भौतिक आविष्कारों और बौद्धिक संपदा दोनों पर लागू होता है। एक पेटेंट किसी उत्पाद को बनाने और बेचने का अधिकार नहीं देता है; बल्कि यह दूसरों को अपने स्वयं के मौद्रिक लाभ के लिए एक आइटम या अपनी खुद की बौद्धिक संपदा के एक टुकड़े के उत्पादन पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार देता है।

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी https://www.jru.edu.in/ ने अकादमिक क्षेत्र में शोध और अन्वेषण के साथ बौद्धिक संपदा अधिकार को बढ़ावा देते हुए अपने शिक्षकों के मौलिक कार्यों को पेटेंट करवाने और इसके प्रचार प्रसार को बढ़ावा दिया है। विश्वविद्यालय के 7 शिक्षकों ने अभी तक अपने कार्यों का पेटेंट करवाया है और अन्य सहयोगियों के प्रेरणाश्रोत साबित हुए हैं।

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  • डॉ. अमृता मजूमदार: डॉ. अमृता झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ़ कॉमर्स एंड मैनेजमेंट में प्रोफसर है और वर्तमान में डिप्युटी रजिस्ट्रार के पद पर अपना योगदान दे रही है। उन्होंने “ए सिस्टम फॉर प्रोवाइडिंग एन इंटरफ़ेस फॉर एन इफेक्टिव कम्युनिकेशन इन इम्प्रोविंग एम्प्लॉय मोरल ” और “एन इम्पैक्ट ऑफ़ ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट (एच आर एम ) ऑन एम्प्लॉय परफॉर्मेंस” विषय पर अपना अविष्कार निबंधित कराया है।
  • डॉ. श्रद्धा प्रसाद: झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी की डिप्युटी रजिस्ट्रार (ऐकडेमिक ) और साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. श्रद्धा प्रसाद ने बायो टेक्नोलॉजी में ” कंटीन्यूअस हेल्थ मॉनिटरिंग एंड कंडीशनिंग ऑफ़ अपरूटेड ट्री ड्यू टू साइक्लोन व्हेन रेप्लांटेशन” विषय पर पेटेंट प्राप्त किया है।
  • प्रो.कुमार अमरेंद्र: विश्वविद्यालय के डिपार्टमेंट ऑफ़ कंप्यूटर साइंस एंड इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी में कार्यरत प्रो. अमरेन्द ने दो पेटेंट अपने नाम किया है। उन्होंने “सीवी बेस्ड एक्सीडेंट अवॉयडेंस सिस्टम थ्रू वीडियो सर्विलांस यूजिंग डीप लर्निंग अल्गोरिथम” पर पेटेंट प्राप्त किया है।
  • प्रो. अनुराधा शर्मा: डिपार्टमेंट ऑफ़ कंप्यूटर साइंस एंड इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी की कोर्डिनेटर प्रो. अनुराधा ने प्रो. अमरेंद्र के साथ इस पर संयुक्त रूप से पेटेंट प्राप्त किया है जो ” आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस एंड आयोटी बेस्ड इंटेलिजेंस ऑटोमेशन (होम)यूजिंग वाई -फाई एंड एंड्रॉएड एप्लीकेशन” पर है।
  • प्रो. सृजानी दासगुप्ता: डिपार्टमेंट ऑफ़ फार्मेसी में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत प्रो. दासगुप्ता ने “आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस सिस्टम एम्बेडेड विथ प्लूरालिटी सेंसर्स मॉनिटरिंग एंड फॉर प्रिडिक्शन एंड डिटेक्शन ऑफ़ हार्ट डिजीज ” पर पेटेंट प्राप्त किया है।
  • सौरभ ख्वास: डिपार्टमेंट ऑफ़ फार्मासूटिकल्स साइंस में लेक्चरर के पद पर अपना योगदान दे रहे सौरभ ख्वास ने ” इवैल्यूएशन ऑफ़ ए रीकंस्टीट्युएबल ड्राई सस्पेंशन टू इम्प्रूव द डिसॉलूशन ऑफ़ पूवर्ली वाटर सॉल्यूबल सेलेकॉसिब ” पर अपना पेटेंट प्राप्त किया है।
  • जय चंद्रा: डिपार्टमेंट ऑफ़ फार्मासूटिकल्स साइंस में लेक्चरर के पद पर अपना योगदान दे रहे जय चंद्रा ने इवैल्यूएशन ऑफ़ ए रीकंस्टीट्युएबल ड्राई सस्पेंशन टू इम्प्रूव द डिसॉलूशन ऑफ़ पूवर्ली वाटर सॉल्यूबल सेलेकॉसिब ” पर अपना पेटेंट प्राप्त किया है।

पिछले कुछ वर्षों में पेटेंट को लेकर देश में संवेदनशीलता बढ़ी है। इसके लिए सरकारी स्तर भी काफी प्रचार प्रसार किया गया है। पेटेंट की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया अपनायी गयी है और विधिक दिक्कतों को न्यूनतम करने का कार्य किया गया है। भारत सरकार के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अंतगत कार्यरत संस्था

इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी इंडिया इस प्रकार के कार्यों के लिए दायित्व निभाता है। भारतीय पेटेंट कार्यालय से मान्यता प्राप्त पेटेंट एजेंट पेटेंट प्राप्त करने में सहायता करते है और एक निश्चित शुल्क अदा कर पेटेंट प्राप्त किया जा सकता है।

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सीबीएसई:10वीं, 12वीं के प्रैक्टिकल शुरू, बोर्ड ने जारी की गाइडलाइन

CBSE ने आज से 10वीं और 12वीं के प्रैक्टिकल एग्जाम और इंटरनल असेसमेंट लेना शुरू कर दिया है। बोर्ड द्वारा जारी कार्यक्रम के मुताबिक कक्षा 10 और कक्षा 12 की प्रायोगिक परीक्षाएं सम्बन्धित स्कूलों द्वारा ही 14 जनवरी तक आयोजित की जाएंगी। इस बीच, सीबीएसई ने प्रायोगिक परीक्षाओं और अन्य के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनका पालन करना सभी स्टूडेंट्स के लिए अनिवार्य होगा।

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CBSE के द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है, 'सभी छात्रों को सूचित किया जाए कि उन्हें बताए गए शेड्यूल के दौरान ही प्रैक्टिकल परीक्षाओं के लिए उपस्थित होना होगा। किसी भी कारण से परीक्षा के दिन अनुपस्थित रहने वाले छात्रों की परीक्षा तय तारीखों के भीतर फिर से शेड्यूल की जाएगी।

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बोर्ड के अनुसार सत्र 2022-2023 की प्रायोगिक परीक्षा में यदि कोई छात्र अनुपस्थित रहता है तो उसे ऑनलाइन सिस्टम से अनुपस्थित चिन्हित किया जाएगा. हालांकि, यदि किसी कारण से परीक्षा के दिन छात्र की अनुपस्थिति के कारण प्रायोगिक परीक्षा अलग समय पर आयोजित की जानी है, तो उन्हें अनुपस्थित के बजाय पुनः निर्धारित के रूप में चिह्नित किया जाएगा ।

CBSE बोर्ड प्रैक्टिकल एग्जाम में इन गाइडलाइंस को फॉलो करना जरूरी :

  • सीबीएसई बोर्ड द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, प्रायोगिक परीक्षाओं, प्रोजक्ट व इंटर्नल एसेसमेंट में सम्मिलित होने जा रहे स्टूडेंट्स को स्कूल कैंपस के अंदर कोरोना वायरस से सम्बन्धित नियमों का पालन करना होगा।
  • स्कूलों द्वारा 15-15 स्टूडेंट्स के बैच में प्रैक्टिकल आयोजित किए जाएंगे।
  • प्रैक्टिकल एग्जाम को अलग-अलग बैच में कई सेशन में आयोजित किया जाएगा।
  • प्रैक्टिकल के दौरान ‘अनफेयर मींस’ यानि नकल, आदि में पकड़े जाने या किसी दूसरे स्टूडेंट्स को परेशान करने की स्थिति में कार्रवाई की जाएगी।
  • सीबीएसई बोर्ड ने स्कूलों को प्रैक्टिकल एग्जाम में सम्मिलित हो रहे स्टूडेंट्स के मार्क्स को 2 जनवरी से 14 फरवरी के बीच आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड करने और मार्क्स डिस्क्लोज न करने के निर्देश दिए हैं।
  • छात्रों को मार्क्स के लिए परेशान नहीं होना चाहिए क्योंकि उनके मार्कशीट में इनकी डिटेल दी जाएगी।
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जेईई मेन 2023: अधिसूचना जारी, आवेदन प्रक्रिया शुरू

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने अगले साल होने वाले जेईई मेंस (JEE-Main 2023) काशेड्यूल जारी कर दिया है। जेईई मेन 2023 की परीक्षा दो सत्रों में आयोजित की जाएगी।पहला सत्र जनवरी 2023 में और दूसरा सत्र अप्रैल 2023 में आयोजित किया जाएगा। इन परीक्षाओं में मिली मेरिट रैंक के आधार पर देश के नामचीन इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन मिल सकेगा। इस साल भी केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से संयुक्त प्रवेश परीक्षा के आयोजन की जिम्मेदारी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को सौंपी गई है।

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ऑनलाइन आवेदन 15 दिसंबर से 12 जनवरी तक:
एनटीए ने अधिसूचना जारी कर बताया कि पहले सत्र की परीक्षा जनवरी 2023 में होगी। इसके लिए कैंडिडेट्स केवल ऑनलाइन आवेदन 15 दिसंबर, 2022 से 12 जनवरी 2023 तक कर सकते हैं। किसी अन्य मोड में आवेदन पत्र स्वीकार नहीं किए जाएंगे। आवेदन शुल्क (क्रेडिट/डेबिट कार्ड/नेट-बैंकिंग/यूपीआई के माध्यम से) जमा करने की अंतिम तिथि: 12 जनवरी, 2023 को रात 11:50 बजे तक रखी गई है। इंजीनियरिंग दाखिलों के लिए देश की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षा में शामिल होने के इच्छुक छात्र एनटीए जेईई मेन की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं।

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13 भाषाओं में होगी जेईई मेन परीक्षा :
जेईई मेन- 2023 की परीक्षा को 13 भाषाओं में आयोजित किया जाएगा। जनवरी के दूसरे सप्ताह में छात्रों को परीक्षा केंद्र से संबंधित शहरों की जानकारी दे दी जाएगी। वहीं जनवरी के तीसरे सप्ताह में छात्र अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकेंगे।

जेईई मेंस की परीक्षा 25 जनवरी ,27 जनवरी , 28 जनवरी, 29 जनवरी, 30 और 31 जनवरी को आयोजित की जाएंगी।

JEE Main 2023:
जेईई मेन में दो पेपर होंगे, मुख्य संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई मेन) में दो पेपर शामिल होते हैं। पेपर 1 (बीई/बीटेक) है। एनआईटी, आईआईआईटी और अन्य केंद्रीय वित्तपोषित तकनीकी संस्थान (सीएफटीआई), वित्तपोषित/ मान्यता प्राप्त संस्थान/ विश्वविद्यालय में अंडर ग्रेजुएट इंजीनियरिंग प्रोग्राम (बीई/बीटेक) में प्रवेश के लिए आयोजित किया जाता है। वहीं, पेपर 2 के जरिए बी-आर्क और बी-प्लानिंग पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयोजित किया जाता है। इसके अलावा जेईई मेन, जेईई एडवांस्ड के लिए पात्रता परीक्षा भी है, जो कि आईआईटी में प्रवेश के लिए आयोजित की जाती है।

JEE मुख्य परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तिथियां:

  • ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरने की प्रक्रिया : 15 दिसंबर, 2022 से 12 जनवरी, 2023 को सुबह नौ बजे तक
  • आवेदन शुल्क (क्रेडिट/डेबिट कार्ड/नेट-बैंकिंग/यूपीआई के माध्यम से) जमा करने की अंतिम तिथि : 12 जनवरी, 2023 को रात 11:50 बजे तक
  • परीक्षा केंद्र शहरों की घोषणा : जनवरी 2023 के दूसरे सप्ताह में
  • एनटीए की वेबसाइट पर एडमिट कार्ड डाउनलोड के लिए उपलब्धता : जनवरी 2023 का तीसरा सप्ताह
  • जेईई मेन परीक्षा के पहले सत्र की तिथियां : जनवरी,24, 25, 27, 28, 29, 30 एवं 31

जैक बोर्ड 2023: मैट्रिक और इंटरमीडिएट की परीक्षा 14 मार्च से हो सकती है शुरू

राज्य में मैट्रिक और इंटरमीडिएट की परीक्षा होली के बाद 14 मार्च से शुरू हो सकती है। झारखण्ड ऐकडेमिक कौंसिल ने परीक्षा को लेकर तैयारी पूरी कर ली है। परीक्षा से जुड़े कार्यक्रम सम्बन्धी जानकारी 15 जनवरी तक जारी किये जा सकते है। सरकार ने पूर्व में ही यह निदेश जारी किया है कि परीक्षा मार्च महीने में आयोजित किया जाना है। राज्य सरकार के निर्देशानुसार परीक्षा मार्च महीने के दूसरे सप्ताह से प्रारम्भ हो सकती है।

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मार्च महीने में ही जेईई मेंस के दूसरे चरण की परीक्षा भी आयोजित होनी है। इसे देखते हुए इंटरमीडिएट साइंस की परीक्षा 6 अप्रैल से पहले समाप्त करने की तैयारी जैक द्वारा कि जा रही है। मैट्रिक और इंटरमीडिएट की प्रायोगिक परीक्षा और आतंरिक मूल्यांकन कार्य फ़रवरी महीने में शुरू होना है। इस वर्ष परीक्षा पुरे पाठ्यक्रम के आधार पर आयोजित होगी।

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परीक्षाओएमआर शीट और पुस्तिका दोनों पर ली जाएगी। परीक्षा एक ही चरण में आयोजित की जाएगी। इसधर जिलों में बनाये जाने वाले परीक्षा केन्दों से सम्बंधित प्रक्रिया भी पूरी कर ली गयी है। मैट्रिक और इंटरमीडिएट परीक्षा के फॉर्म भरने की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में है।

JAC Exam 2023

झारखंड में कब होगी मैट्रिक-इंटर की परीक्षा, जानें पूरा शेड्यूल

झारखंड एकेडेमिक काउंसिल (JAC) द्वारा ली जानेवाली मैट्रिक, इंटर की परीक्षा-2023 मार्च में होगी। होली के बाद तीसरे सप्ताह में परीक्षा शुरू हो सकती है, जबकि प्रायोगिक (प्रैक्टिकल) परीक्षा 20 फरवरी के बाद शुरू हो सकती है। प्रैक्टिकल के साथ आंतरिक मूल्यांकन की प्रक्रिया भी फरवरी में पूरी कर ली जायेगी। दोनों परीक्षा एक टर्म में होगी। परीक्षा का प्रोग्राम जनवरी में जारी किया जायेगा। मैट्रिक, इंटर की कॉपियों का मूल्यांकन अप्रैल में शुरू होगा, जबकि मई के अंतिम सप्ताह से 10 जून के बीच रिजल्ट जारी होने की संभावना है। JAC द्वारा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी गयी है। परीक्षा केंद्र निर्धारण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। जिला स्तर से परीक्षा केंद्र निर्धारण की प्रक्रिया पूरी कर रिपोर्ट जैक को भेज दी गयी है।

मैट्रिक, इंटर परीक्षा 2023 :जल्द जारी होगा मॉडल सेट प्रश्नपत्र :
मैट्रिक, इंटर परीक्षा 2023 का मॉडल सेट प्रश्नपत्र तैयार कर लिया गया है। जैक की वेबसाइट पर मॉडल सेट प्रश्नपत्र इस सप्ताह जारी कर देने की उम्मीद है। मैट्रिक इंटर की परीक्षा एक टर्म में ली जायेगी। परीक्षा ओएमआर शीट व उत्तरपुस्तिका दोनों पर होगी। परीक्षा में 40 अंक के प्रश्न बहुवैकल्पिक होंगे जबकि 40 अंक के अति लघु उत्तरीय, लघु उत्तरीय, दीर्घ उत्तरीय सभी प्रकार के प्रश्न पूछे जायेंगे।

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मैट्रिक, इंटर परीक्षा 2023: विलंब शुल्क के साथ 10 दिसंबर तक जमा होंगे फॉर्म :
30 नवंबर तक बिना विलंब शुल्क के परीक्षा फॉर्म जमा कर सकेंगे। जिला शिक्षा पदाधिकारी छह दिसंबर तक परीक्षा फॉर्म को सत्यापित कर सकेंगे। विलंब शुल्क के साथ फॉर्म एक से 10 दिसंबर तक जमा होगा।
जिला शिक्षा पदाधिकारी 12 दिसंबर तक फॉर्म सत्यापित कर सकेंगे। मैट्रिक और इंटरमीडिएट की परीक्षा मार्च में होगी।

सीबीएसई कक्षा 10वीं-12वीं की बोर्ड परीक्षाओं पर बड़ा अपडेट, जानें कब जारी होगी डेट शीट

CBSE (सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन) जल्द ही 10वीं और 12वीं के थ्योरी एग्जाम के लिए डेटशीट जारी कर देगा। डेटशीट जारी होने के बाद छात्र सीबीएसई के ऑफिशियल वेबसाइट पर विजिट कर डाउनलोड कर पाएंगे। आपको जानकारी दें कि कक्षा 10 और कक्षा 12 के फाइनल थ्योरी परीक्षा फरवरी माह के मध्य से शुरू होगी। बोर्ड ने यह कंफर्म कर दिया है कि प्रैक्टिकल परीक्षा 1 जनवरी 2023 से शुरू हो जाएगी।

12 वीं के बाद करें बीबीए: स्मार्ट बिजनेस और एंटरप्रेन्योर स्किल के साथ जॉब की गारंटी :

महत्वपूर्ण तारीख :
1- CBSE कक्षा 10,12 प्रैक्टिकल परीक्षा 2023- 1 जनवरी 2023
2- CBSE कक्षा 10,12 थ्योरी परीक्षा 2023- 15 फरवरी 2023
ऐसे करें डेटशीट डाउनलोड :
स्टेप 1- डेटशीट डाउनलोड करने के लिए सबसे पहले सीबीएसई की ऑफिशियल
वेबसाइट पर जाएं।
स्टेप 2- दूसरे चरण में वेबसाइट के होम पेज पर उपलब्ध सीबीएसई डेट शीट
क्लास 10,12 के लिंक पर क्लिक करें।

स्टेप 3– लिंक पर क्लिक करने के बाद स्क्रीन पर एक नई पीडीएफ फाइल खुलेगी
जहां उम्मीदवार परीक्षा तिथियों की जांच कर सकते हैं।

स्टेप 4– अंत में इसे डाउनलोड कर रख लें और भविष्य के इस्तेमाल के लिए एक
प्रिंट आउट भी रख लें।

केवीएस भर्ती 2022: आवेदन करने की अंतिम तिथि 26 दिसंबर

केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) ने 13 हजार 404 पदों पर वैकेंसी निकाली हैं, इनमें टीचिंग, नॉन-टीचिंग, सेक्शन ऑफिसर, प्रिंसिपल, वाइस-प्रिंसिपल, फाइनेंस ऑफिसर, ट्रेंड ग्रेजुएट टीचर, पोस्ट ग्रेजुएट टीचर के पदों पर भर्ती की जाएगी। KVS भर्ती 2022 के पदों पर आवेदन करने के लिए 40 साल की उम्र तक के उम्मीदवार अप्लाई कर सकते हैं, ऑनलाइन आवेदन करने के लिए ऑफिशियल वेबसाइट https://kvsangathan.nic.in/ पर जाकर 26 दिसंबर तक अप्लाई कर सकते है।

KVS भर्ती 2022 आवेदन शुल्क:
KVS भर्ती प्रक्रिया 2022 के लिए सामान्य, ओबीसी और EWS वर्ग के उम्मीदवारों को 1000 रुपए का आवेदन शुल्क जमा करना होगा । आवेदन शुल्क का भुगतान ऑनलाइन कर सकते हैं।

KVS भर्ती प्रक्रिया 2022 आयु सीमा:
KVS भर्ती प्रक्रिया 2022 में प्रत्येक पद के लिए अलग-अलग आयु सीमा तय की गई है । साथ ही कुछ वर्गों के लिए आयु सीमा में छूट भी दी गई है।

KVS भर्ती प्रक्रिया एप्लीकेशन फीस:
KVS भर्ती प्रक्रिया 2022 में सामान्य वर्ग, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस: 1000 रुपये
एससी, एसटी और दिव्यांग : कोई शुल्क नहीं

KVS भर्ती 2022: ऑनलाइन आवेदन कैसे करें:

  1. KVS की ऑफिशियल वेबसाइट https://kvsangathan.nic.in/ पर जाकर उम्मीदवार रजिस्ट्रेशन करें।
  2. KVS टीचिंग एंड नॉन-टीचिंग 2022 वैकेंसी लिंक पर क्लिक करें।
  3. KVS रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी करें। इसके तहत फोटोग्राफ, सिग्नेचर और डाक्यूमेंट्स अपलोड करें।
  4. KVS ऑनलाइन आवेदन शुल्क का भुगतान करें।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति एवं क्रियान्वयन विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन।

शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, रांची एवं झारखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ,रांची के संयुक्त तत्वावधान में “राष्ट्रीय शिक्षा नीति एवं क्रियान्वयन ” विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए राज्यपाल रमेश बैस ने सभी विश्वविद्यालयों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रावधानों को गंभीरता पूर्वक लागू करने का निर्देश दिया है। राज्यपाल ने कहा की शिक्षा का शाब्दिक अर्थ सीखना और सिखाना है। उन्होंने विश्वविद्यालयों को स्थानीय भाषा या हिंदी को बढ़ावा देने पर जोर देने को कहा।

Admission Open 2022-JRU

संबोधन पूर्व महामहिम राज्यपाल, विशेष अतिथि डॉ.अतुल कोठारी, ट्रिपल आईटी के निदेशक प्रो. विष्णु प्रिये जेयूटी के कुलपति प्रो. विजय कुमार पांडे, झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी की कुलपति डॉ. सविता सेंगर, प्रो.विजय कुमार सिंह ने दीप प्रज्वलित कर संगोष्ठी का उद्घाटन किया।

https://www.youtube.com/shorts/WYRAIQumj0Q?feature=share

Press Coverage NEP Seminar

संगोष्ठी के उपरांत राज्यपाल सह कुलाधिपति ने कुलपतियों के साथ बैठक कर एनईपी की कार्यान्वयन की दिशा में हो रही प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने कहा एनईपी के प्रावधानों के क्रियान्वयन में यदि कोई कठिनाई होती है तो बिना संकोच उनसे संपर्क करें।

शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अतुल भाई कोठारी ने संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि स्वतंत्र भारत की यह पहली भारत केंद्रित शिक्षा नीति है। अब हमें यह विचार त्याग देने चाहिए कि अंग्रेजी के बिना शिक्षा का कोई महत्व नहीं है। उन्होंने कहा की एनईपी भारत केंद्रित शिक्षा नीति है जो देश की प्रकृति, परिवेश और संस्कृति को दिशा देगी।

संगोष्ठी स्थल पर विभिन्न विश्विद्यालयों के द्वारा स्टॉल भी लगाया गया था जिसमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति से जुड़े कार्यों का प्रदर्शन किया गया था। महामहिम राज्यपाल ने निरीक्षण के दौरान झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी https://www.jru.edu.in/ के स्टॉल पर शिक्षा, सामुदायिक विकास और सामाजिक भागीदारी के अंतर्गत किये जा रहे कार्यों का जायजा लेते हुए विद्यार्थियों के द्वारा किये गए कार्यों की सराहना की।


Low cost cold storage by students of B.Sc Agriculture at Jharkhand Rai University

संगोष्ठी के दूसरे सत्र में ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन से जुड़े किये गए कार्यों और विभिन्न विश्वविद्यालयों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर किये जा रहे उत्कृष्ट कार्यों पर सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और प्रतिनिधियों के द्वारा पीपीटी प्रस्तुति दी गयी।

संगोष्ठी का संचालन झारखंड राय यूनिवर्सिटी के कुलसचिव डॉ. पीयूष रंजन ने किया।

केंचुआ पालन व्यवसाय से हर महीने करें 25 से 30 हजार रुपए की कमाई

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी से बीएससी एग्रीकल्चर की पढाई कर रहे विशाल कुमार ने अपनी पहचान खुद गढ़ी है । उनके गाँव वाले उन्हें कृषि उद्यमी के तौर पर पहचानने लगे है। बिहार के गया के टेकारी गांव के रहने वाले विशाल फ़िलहाल रांची में रहकर पढाई करते है। बीएससी एग्रीकल्चर फाइनल ईयर के इस स्टूडेंट ने केंचुआ खाद (वर्मी कंपोस्ट) का प्रशिक्षण लेने के बाद उद्यमशील बनकर कार्य करने का फैसला लिया।

Agriculture Strip-Admission Open 2024

विशाल बताते है ” साल 2021 में कृषि विज्ञान केंद्र, जहानाबाद में आयोजित चार दिवसीय केंचुआ खाद प्रशिक्षण में मुझे शामिल होने का मौका मिला । प्रशिक्षण के बाद केंद्र के वैज्ञानिकों ने मुझे इसके आर्थिक लाभ और बाजार के बारे में अवगत कराया। ट्रेनिंग पूरी करने के बाद मैं इसमें जुट गया । पहले मैंने 1 बेड (एक क्यारी) से काम शुरू किया और आज 26 बेड से वर्मी कंपोस्ट उत्पादन कर रहा हूँ। ”

https://www.jru.edu.in/dedicated-agriculture-land/

वर्मी कंपोस्ट एक उत्तम जैव उर्वरक है। इसे केंचुआ खाद भी कहा जाता है। यह खाद केंचुआ और गोबर की मदद से बनाई जाती है। इसे लगभग डेढ़ महीने में आसानी से तैयार किया जा सकता है। यह खाद वातावरण को प्रदूषित नहीं होने देती है। इस खाद में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। जो फसलों को तेजी से विकास में मदद करता है और मिट्टी को बेकार नहीं होने देता है। वर्मी कंपोस्ट बनाने की मुख्य तीन विधियां हैं – प्लास्टिक या टटिया विधि ,पिट विधि और बेड विधि।

खेतिहर किसानों के बीच बेड विधि ज्यादा लोकप्रिय है। इस विधि में कई बेड बनाकर वर्मी कंपोस्ट खाद तैयार की जाती है। शुरुआत में पहले बेड में ही केंचुए डालने की आवश्यकता होती है। एक बेड का खाद बन जाने के बाद केंचुए स्वतः ही दूसरे बेड में पहुंच जाते हैं। इसके बाद पहले बेड से वर्मी कम्पोस्ट अलग करके छानकर भंडारित कर लिया जाता है।

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काम शुरू किये हुए दो वर्ष हो चुके हैं और अब उनके पास केंचुआ खाद को खरीदने वाले 20 गांव के किसान है जो उनकी बनाई कंपनी “फेटिडा आर्गेनिक” से खाद खरीदते है।

केंचुआ खाद और इसके प्रयोग करने से मिट्टी को पहुँचने वाले लाभ से अवगत कराने में मुझे शुरुवाती दिनों में थोड़ी दिक्कत हुई लेकिन फिर मेरे द्वारा बनाये गए किसानों के विडियो क्लिप्स जिसमें किसानों ने इसके प्रयोग को लेकर अपनी सकारात्मक राय दी थी वह बेहद उपयोगी साबित हुई । इसके बाद मेरे पास खाद के आर्डर भी ज्यादा आने लगे और मैंने फेटिडा आर्गेनिक नाम से अपनी एक कंपनी भी बना ली ।

केंचुआ खाद उत्पादन में लागत और बिक्री के बारे में पूछने पर बोलते हुए विशाल कहते है “एक बेड तैयार करने में 2200 से 2300 रुपए की लागत आती है। और लाभ प्रति बेड 2000 रूपए हो जाता है।

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भविष्य से जुड़े गए सवालों पर जवाब देते हुए विशाल कहते है ” अगले कुछ महीनों में मेरी पढाई पूरी हो जायेगी फिर मैं पूरा ध्यान अपने स्टार्टअप पर दूंगा। केंचुआ खाद की बिक्री मुझे उत्साहित करती है अब मैंने अपना ध्यान पपीते की खेती की तरफ डाला है। रेड लेडी पपीते की नस्ल 786 के 400 पौधे मैंने खेतों में लगाया हैं । किसानों को साल भर नियमित आय प्राप्त हो इसके लिए एक मॉडल खेती तकनीक को तैयार करने पर काम कर रहा हूँ । मैं अपने स्टार्टअप , खाद की बिक्री और बाजार खोजने की जगह ज्यादा से ज्यादा किसानों तक पहुँच कर इसके बदलावों से अवगत करने का काम करता रहता हूँ। इससे मुझे नया बाजार भी मिलता है और किसानों के पास तकनीक और जानकारी भी पहुँचती है।जैविक खेती को बढ़ावा देना और मिट्टी संरक्षण मेरा लक्ष्य है”