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बीबीए एडमिशन 2022 : सीखें स्मार्ट बिजनेस / एंटरप्रेन्योर स्किल

स्मार्ट, स्किल्ड बिजनेस / एंटरप्रेन्योर बनना चाहते है और बीबीए कोर्स के लिए अपने शहर रांची में बीबीए कोर्स (BBA admission 2022) के लिए किसी अच्छे कॉलेज की तलाश में है। जहां मिले इंडस्ट्री ओरिएंटेड करिकुलम, पढ़ाई का बेहतर माहौल ,एक्सपेरिएंस्ड फैकल्टी मेंबर्स की देख रेख में बिजनेस और इंटरप्रेनरशिप आईडिया पर काम करने का मौका। कोर्स पूरा होने पर मिलती हो जॉब की पूरी गारंटी।

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी, रांची मैनेजमेंट की पढ़ाई के लिए एक विश्वसनीय नाम है जिसे यूजीसी और नैक जैसी मान्यताप्राप्त संस्थाओं ने मान्यता प्रदान की है। बिहार, झारखण्ड, उड़ीसा और पश्चिम बंगाल राज्य में यह एकलौता निजी विश्वविद्यालय है जिसे इन संस्थाओं ने मान्यता प्रदान किया है। इसे भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय से संचालित नेशनल इंस्टीटूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क, एसोसिएशन ऑफ़ इंडियन यूनिवर्सिटीज और एसोसिएशन ऑफ़ कॉमन वेल्थ यूनिवर्सिटीज से भी मान्यता मिला हुआ है।

इंडस्ट्री फ्रेंडली और अपडेटेड करिकुलम, एक्सपेरिएंस्ड फैकल्टी मेंबर, स्किल बेस्ड एजुकेशन, लैंगवेज लैब सुविधा के साथ रेगुलर मोड पर होने वाले एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटी इसे अन्य संस्थानों से अलग खड़ा करते है। स्टूडेंट सेंट्रिक कैंपस आपकी इंक्वायरी से एडमीशन तक के सफ़र को आसान बना देता है । आप अपने मोबाईल फ़ोन के जरिये ही ऑनलाइन काउन्सलिंग कर कोर्स का सेलेक्शन कर सकते है ,फॉर्म भर सकते है । 5 आसान किस्तों में फी जमा करना,लोन की सुविधा के साथ मेरिट स्कॉलरशिप की सुविधा आपको सिंगल विंडों सिस्टम के जरिये प्राप्त होती है।

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बीबीए कोर्स एक पॉपुलर बैचलर डिग्री कोर्स है। इसका पूरा नाम बैचलर ऑफ़ बिज़नेस एडमिनिस्ट्रेशन” है। 12 वीं की एग्जाम देने वाले है या पास आउट है और एडमिशन (BBA admission 2022) को लेकर कंफ्यूज है तो बीबीए एक बेस्ट ऑप्शन है। बेहिचक इस पर अपनी मुहर लगाएं। 3 साल के इस ग्रेजुएशन प्रोग्राम के दौरान 6 सेमेस्टर होंगे। इस दौरान आप बिजनेस स्किल, कम्युनिकेशन, मैनेजेरियल, स्टार्टअप बिल्डर, एन्टेर्प्रेनॉर, डिसीजन मेकिंग स्किल सीखते है ।इसके साथ नए आइडियाज पर रियल टाइम प्रोजेक्ट पर काम करते हुए खुद को टैलेंट आर्टिस्ट के तौर पर तैयार करते है।

अगर आपकी पसंद मैनेजमेंट हो और बीबीए कोर्स करने का मन बना लिया है तो इस कोर्स और मैनेजमेंट फील्ड से जुडी पूरी जानकारी होनी जरुरी है। बीबीए कोर्स बीबीएस और बीएमएस (बैचलर ऑफ़ बिज़नस स्टडी और बैचलर ऑफ़ मैनेजमेंट स्टडी) नाम से भी जाना जाता है। बीबीए कोर्स में एडमिशन लेने के लिए 50 प्रतिशत अंको के साथ 12 वीं पास होना जरुरी है। किसी भी स्ट्रीम के स्टूडेंट्स यह कोर्स कर सकते है।
कोर्सेज के अलग अलग नाम और कॉलेजों की भीड़ में आपकी पसंद और सबसे बेहतर ऑप्शन का चयन करना बेहद जरुरी है क्योकि इसी डिसीजन पर आपका भविष्य निर्भर करता है।

बीबीए करने के बाद प्राइवेट सेक्टर में जॉब के अवसर बहुत ज्यादा हैं और ये कंपनियां मैनेजमेंट प्रोफेशनल्स को काफी अच्छे सैलरी पैकेज देती हैं। प्राइवेट सेक्टर की बात करें तो बीबीए के बाद मैनजमेंट, फाइनेंस, इंश्योरेंस, आईटी, मैनुफैक्चरिंग, हॉस्पिटैलिटी एडवरटाइजिंग, एविएशन,बैंकिंग, कंसल्टेंसी, डिजिटल मार्केटिंग और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में जॉब मिल सकती है। गवर्नमेंट सेक्टर में ऑप्शन की बात है तो बैंकिंग सेक्टर के अलावा एकाउंटेंसी और फाइनेंशियल इंस्टिट्यूट में बीबीए ग्रेजुएट्स के लिए जॉब ऑप्शन हमेशा रहता है।

प्रॉस्पेक्ट्स ऑफ कोल् एंड मेटल माइनिंग इन झारखंड” विषय पर वेबिनार का आयोजन

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी, रांची के डिपार्टमेंट ऑफ़ माइनिंग इंजीनियरिंग और इंस्टीटूशनस इनोवेशन कॉउन्सिल के संयुक्त तत्वावधान में वेबिनार का आयोजन किया गया । ” प्रॉस्पेक्ट ऑफ़ कोल एंड मेटल माइनिंग इन झारखण्ड ” विषय पर आयोजित वेबिनार में मुख्य वक्ता के तौर पर सीसीएल के सीएमडी पी.एम.प्रसाद, महानदी कोलफील्ड लिमिटेड के पूर्व सीएमडी ए.एन. सहाय और एचइसी के पूर्व सीएमडी अभिजीत घोष शामिल हुए। वेबिनार का विधिवत शुरुवात दीप प्रज्वलीत कर सरस्वती वंदना के साथ किया गया।


वेबिनार को सर्वप्रथम एमसीएल ( महानदी कोल् लिमिटेड) के पूर्व अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक ( सीएमडी) ए. एन सहाय ने सम्बोधित किया उन्होंने अपने सम्बोधन में कहा की ” इंजीनियरिंग का सबसे महत्वपूर्ण ब्रांच माइनिंग इंजीनियरिंग है। मेरे 45 वर्ष के अनुभव के आधार पर मैं कह सकता हूँ कि आने वाले समय में भी इस क्षेत्र की भूमिका इसी प्रकार बनी रहेगी। झारखण्ड में कोल् माइनिंग की चर्चा करते हुए उन्होंने विस्तार पूर्वक बताया की ‘ भारत में विश्व का 4.7 प्रतिशत कोयला उत्पादन होता है। वर्तमान में भारत लगभग 72.9 करोड़ टन कोयले का उत्पादन कर रहा है। हालांकि, वास्तविकता यही है कि घरेलू उत्पादन देश में कोयले की घरेलू जरूरतों को पूरा करने में सक्षम नहीं है। भारत ने बीते साल 24.7 करोड़ टन कोयले का आयात किया था और इस पर 1.58 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा खर्च हुई थी। भारत दुनिया का दूसरा बड़ा कोयला उत्पादक है और कोयला भंडार के मामले में 5वां बड़ा देश है। ये भंडार 100 साल या उससे ज्यादा वक्त तक बने रह सकते हैं। कोयला उत्पादन में भारत का विश्व में तीसरा स्थान है और भारत के तीन शीर्ष कोयला उत्पादक राज्यों में झारखण्ड का स्थान पहला है।“

विद्यार्थियों को दिए अपने सन्देश में उन्होंनेकहा कि ” इस क्षेत्र में शुरुवाती 10 वर्ष संघर्ष के होते है और इन्हीं वर्षों में आप जितना सीखना चाहते है सीखें । माइनिंग रोजगार प्रदान करने वाला एक बड़ा क्षेत्र है जिसमें आने वाले भविष्य में भी बेहतर संभावनाएं हैं।सही प्रशिक्षण और गुणवत्तापूर्ण प्रमाणनन कोल् इंडस्ट्री की जरुरत और अनिवार्यता है। अच्छे अवसर को प्राप्त करने के लिए मान्यता प्राप्त प्रमाणपत्र बेहद सहयोगी है।“


सीसीएल के सीएमडी पी एम. प्रसाद ने संबोधन के दौरान प्रतिभागियों को बताया की ” भारत सरकार का लक्ष्य देश के उभरते हुए क्षेत्रों में आर्थिक विकास में तेजी लाना है। चूंकि, ये राज्य संसाधनों के लिहाज से संपन्न हैं, इसलिए इन राज्यों के विकास में इन संसाधनों का उपयोग करना काफी अहम है। मंत्रालय पारिस्थितिकीय रूप से अनुकूल, सतत तथा लागत सापेक्ष तरीके से अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों की मांग को पूरा करने के लिए कोयला उपलब्ध करने को प्रतिबद्ध है।

उत्पादकता, सुरक्षा, गुणवत्ता और पारिस्थितिकी में सुधार लाने के उद्देश्य से अत्याधुनिक एवं स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकियों को अपनाकर सरकारी कंपनियों के साथ-साथ केप्टिव खनन कार्य के माध्यम से उत्पादन में बढ़ोतरी हमारा लक्ष्य है।

झारखण्ड में सीसीएल के कार्यों की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया की “ नार्थ कर्णपुरा में और नए माईन्स खोले जाने है। धनबाद का मुनीडीह कोल् माईन्स को आज भी एक बेहतर माईन्स माना जाता है। इसके अलावा आने वाले समय में चतरा कथारा, गिरिडीह जैसे जिलों में में भी संभावनाएं छुपी हुये है।“

पी.एम. प्रसाद ने कोल क्षेत्रों में विकास के लिए दिए जाने वाले डिस्ट्रिक रूरल फण्ड की चर्चा करते हुए बताया की इसके जरिये ग्रामीण विकास के कार्यों को गति प्रदान किया जा रहा है।

अक्षय ऊर्जा और भविष्य में कोयला उत्पादन और प्रबंधन पर विचार देते हुए उन्होंने कहा की सोलर एनर्जी को बढ़ावा देने और कोयले के विकल्प के तौर पर इसे खड़ा करने की कोशिशें की जा रही है लेकिन अभी भी 2070 तक कोयले का भंडार देश के औद्योगिक जरूरतों को पूरा करने में सहायक रहेगा।

जमींन अधिग्रहण करने और वन भूमि कानूनों के कारण झारखण्ड में नई परियोजनाओं को प्रारंभ करने में देर हो रही है कही कहीं रेलवे सुविधा का नहीं होना भी बाधक बन रहा है।

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एचइसी के एक्स सीएमडी प्रो. अभिजीत घोष ने अपने अभिभाषण की शुरुवात झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी को गणतंत्र दिवस समारोह में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा आमंत्रित किये जाने से करते हुए कहा की यूनिवर्सिटी का चयन प्राइमिनिस्टर बॉक्स में बैठने के लिए किया गया है जिसमे यूनिवर्सिटी का प्रतिनिधित्व यहाँ के दो मेधावी छात्र करेंगे। देश के 50 यूनिवर्सिटी में झारखण्ड से दो यूनिवर्सिटी का चयन किया गया है। झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी के अलावा आईएसएम धनबाद को यह मौका मिला है।

प्रो. घोष ने मेटल माइनिंग पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा की “भारत सरकार द्वारा किए गए पारदर्शी उपायों के साथ कोयला खदानों की वाणिज्यिक नीलामी से देश में कोयले की मांग और आपूर्ति में अंतर को पाटने का उपयुक्त समय आ गया है। इससे न सिर्फ पिछड़े क्षेत्रों में रोजगार के व्यापक अवसर उपलब्ध होंगे, बल्कि प्रति वर्ष 20,000 करोड़ रुपये से 30,000 करोड़ रुपये तक की विदेशी मुद्रा की भी बचत होगी।“
उन्होंने केंद्र सर्कार के पहल की चर्चा करते हुए बताया कि ‘सरकार द्वारा नियुक्त एक उच्च स्तरीय समिति (एचएलसी) ने पारदर्शिता को बनाए रखते हुए कोयला क्षेत्र को उदार बना दिया है। कारोबारी सुगमता सुनिश्चित करने, अतिरिक्त प्रावधानों को खत्म करने और आवंटन में लचीलापन लाने के उद्देश्य से खनिज कानून अधिनियम, 2020 के माध्यम से सीएमएसपी अधिनियम और एमएमडीआर अधिनियम के उपयुक्त प्रावधानों में संशोधन किया गया है। कानून में बदलाव के अलावा, 2020 में नीलामी की प्रक्रिया और क्रियाविधि को सरल बना दिया गया है। कोयला खदानों की नीलामी में राजस्व साझेदारी व्यवस्था की पेशकश के साथ एक अन्य बड़ा बदलाव किया गया, जिससे नीलामी को ज्यादा बाजार अनुकूल बना दिया गया है। नई व्यावसायिक खनन व्यवस्था में कोयले के गैसीकरण को प्रोत्साहन दिया गया है। 2020 में पहली किस्त में 38 ब्लॉकों के साथ व्यावसायिक खनन के लिए कोयला ब्लॉकों की नीलामी की शुरुआत की गई है।

उन्होंने माइनिंग क्षेत्र में झाखंड का महत्व बताते हुए कहा की नोवामुंडी माईन्स आज भी एक आदर्श उदहारण है और माइनिंग के छात्रों के लिए सिखने की उत्तम जगह है। सौ साल पुराना यह माईन्स पर्यावरण संरक्षण का उदाहरण है।


वेबिनार के समापन पर यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार प्रो. डॉ. पियूष रंजन ने धन्यवाद् ज्ञापन करते हुए कहा की “माइनिंग इंडस्ट्री के तीन बड़े आईकॉन का एक मंच पर आकर विद्यार्थियों संबोधित करना विभाग के साथ विश्वविद्यालय के लिए भी एक नया अनुभव है। इसका सीधा लाभ माइनिंग इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों को मिलेगा जो क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहते है। विषय की प्रासंगिकता को देखते हुए 11 राज्यों से विद्यार्थी शामिल हुए।“ उन्होंने पुनः सभी अतिथियों और वेबिनार के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले लोगों का धन्यवाद किया।

ग्रेजुएशन के बाद एलएलबी कर सवारें भविष्य

LLB का फुल फॉर्म Bachelor of Laws होता है। अगर कोई व्यक्ति कानून की पढ़ाई करने में इच्छुक है तो उन्हें LLB करना चाहिए। इसके अंदर आपको कानून की असली परिभाषा बताई जाती है जिसे पढ़ने के बाद आप वकील जैसे प्रोफेशन में जा सकते है। एलएलबी करने के बाद आप सरकारी वकील बन सकते हो और सेंट्रल, स्टेट या लोकल अथॉरिटीज के लिए काम कर सकते है। आप लोगो को उनकी कानूनी समस्या का समाधान बता सकते हो जिन्हें कानून की जानकारी नहीं होती।

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जब आप इसकी पढ़ाई पूरी कर लेते है तब आप एक फ्रेशेर होते हो आपके पास अनुभव की कमी होती है इसलिए शुरुवात में आपको किसी लीगल फार्म या एडवोकेट के अंदर काम करना पड़ता है और चीजो को समझना होता है। भारत जैसे अत्यधिक आबादी वाले देश में वकील की काफी डिमांड है लेकिन अफ़सोस की बात है बहुत ही कम वकील ऐसे होते है जिन्हें इस प्रोफेशन की समझ होती है।

एलएलबी तीन साल का एक बैचलर डिग्री कोर्स है, जो कि ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद किया जाता है। भारत के कई प्रसिद्ध लॉ कॉलेजों में एलएलबी कोर्स की पेशकश बार कौंसिल ऑफ़ इंडिया (BCI) द्वारा अनिवार्य दिशा निर्देशों के अनुसार की जाती है। बीसीआई भारत में कानूनी शिक्षा और कानूनी पेशे को नियंत्रित करता है। इसी के चलते हर साल कई सारे छात्र लॉ की पढ़ाई शुरू करते है और बहुत से छात्र अपनी मेहनत और सही मार्गदर्शन के कारण एक अच्छा वकील बन पाते है।

आप भी एलएलबी के क्षेत्र में अपना करियर बना सकते है। बस आपको सही मार्गदर्शन और मेहनत करने की जरुरत है। अगर आप समाज की सेवा करना चाहते है तो यह कोर्स आपके लिए एक अच्छा विकल्प है। वकील बनने पर हमें सम्मान भी मिलता है और हम किसी निर्दोष के पक्ष में लड़कर उसे भी बचा सकते है।

एलएलबी का कोर्स 3 सालों का होता है और इस लॉ प्रोग्राम को इस प्रकार बनाया गया है कि इसमें पूरे कोर्स को 6 सेमेस्टर में बांट दिया गया है। किसी भी उम्मीदवार को एलएलबी की डिग्री तभी दी जाती है जब वह 6 सेमेस्टर यानी कि 3 सालों के कोर्स को सफलता के साथ पूरा कर लेता है।

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जब कोई उम्मीदवार एलएलबी का कोर्स करता है चाहे वह किसी भी कॉलेज से करें उसे अपना थ्योरी क्लास , मूट कोर्ट्स, इंटर्नशिप और ट्यूटोरियल वर्क, प्रैक्टिकल ट्रेनिंग प्रोग्राम में हिस्सा लेना जरूरी होता है।

    एलएलबी कोर्स के फायदे :

  1. एलएलबी का कोर्स करने के बाद आप एक कानून अच्छे जानकार हो जाते हैं, और उस क्षेत्र में एक्सपर्ट बन जाते हैं।
  2. बैचलर ऑफ लॉ का कोर्स करने के बाद आप ग्रेजुएट इस कहलाते हैं।
  3. यह एक प्रकार की वकालत गुरुचरण डिग्री है, और इस डिग्री को करने के बाद आप वकील बन सकते हैं।
  4. एलएलबी का कोर्स करने के बाद आप किसी भी प्रकार का केस लड़ सकते हैं।

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    कैरियर ऑप्शन :
    एल.एल.बी के अध्ययन के बाद आप इन कैरियर ऑप्शन का का चयन कर सकते हैं :

  • कनिष्ठ न्यायिक सहायक
  • सहायक न्यायालय सचिव
  • सहायक अभियोजन
  • क्लर्क
  • अन्य लॉ संबंधित पद
  • उप विधिक प्रबंधक
  • कानूनी सलाहकार
  • बोर्ड में विधिक अधिकारी
  • वरिष्ठ विधि अधिकारी
  • लीगल जनरल मैनेजर
  • लीगल एडवाइजर
  • लीगल चीफ जनरल मैनेजर
  • वरिष्ठ कानूनी अधिकारी
  • लीगल अफसर
  • सपथ आयुक्त
  • फौजदारी अधिवक्ता
  • सिविल अधिवक्ता
  • पारिवारिक अधिवक्ता
  • बीमा अधिवक्ता
  • बैंक अधिवक्ता
  • लॉ डिपार्टमेंट
  • ऑफिस क्लर्क
  • लेक्चरर
  • क्लेम मैनेजर

लॉ कोर्स से जुड़े सवाल और उनके जवाब

सवाल: एलएलबी क्या है?
जवाब: LLB एक बैचलर डिग्री प्रोग्राम है।यह कोर्स वकालत से संबधित है। एलएलबी का फूल फॉर्म बैचलर ऑफ़ लॉ होता है।

सवाल: एलएलबी के लिए जरुरी न्यूनतम योग्यता क्या है?
जवाब: LLB के लिए विधार्थी के पास न्यूनतम स्नातक पास की योग्यता जरुरी है।

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सवाल: LLB की फुल फॉर्म क्या होती है?
जवाब: LLB की फुल फॉर्म बैचलर ऑफ लॉ होती है।

सवाल: LLB का कोर्स कितने साल का होता है?
जवाब: LLB का कोर्स 3 साल का होता है ।

सवाल: LLB और BA LLB कोर्स में क्या अंतर है ?
जवाब: दो प्रकार के लॉ कोर्स प्रचलन में है।5 साल का बीए एलएलबी और 3 वर्ष का एलएलबी। 12वीं पास बीए एलएलबी कर सकते है और स्नातक उत्तीर्ण के लिए एलएलबी बेस्ट ऑप्शन है।

सवाल: BA LLB की पढ़ाई करने के लिए 12th में कम से कम 50% मार्क्स होना अनिवार्य है?
जवाब: BA LLB की पढ़ाई करने के लिए 12th में कम से कम 50% मार्क्स होना अनिवार्य है।

सवाल: मैंने 12th कॉमर्स किया है क्या मैं BA LLB का कोर्स कर सकता हूं?
जवाब: जी हां, अगर आपने 12th में कॉमर्स किया है तो भी आप BA LLB का कोर्स कर सकते हैं।

सवाल: क्या 12th साइंस करने के बाद BALLB का कोर्स कर सकते हैं?
जवाब: जी हां अगर आपने 12th में साइंस लेकर पढ़ाई की है तो भी आप इस कोर्स को कर सकते हैं.

सवाल: लॉ का कोर्स करने के बाद किस तरह की नौकरी कर सकते हैं?
जवाब: एलएलबी का कोर्स कर लेने के बाद इनमें से किसी भी प्रकार के कैरियर को ऑप्शन चुन सकते है।

  • Advocate
  • Public Prosecutor
  • Legal Advisor
  • Legal Manager
  • Teacher or Lecturer
  • Legal Services Chief
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सवाल: क्या एलएलबी कोर्स ज्वाइन करने के लिए एंट्रेंस एग्जाम लिखना पड़ता है?
जवाब: जी हां एलएलबी का कोर्स करने के लिए 12वीं पास कर लेने के बाद में आपको CLAT एग्जाम लिखकर इस में पास होना पड़ता है । लेकिन देश के कई विश्वविद्यालय अपना खुद का एंट्रेंस एग्जाम लेते है या मार्क्स के आधार पर भी एडमिशन लिया करते है।
सवाल: लॉ के कोर्स में कौन- कौन से सब्जेक्ट होते हैं?
जवाब: निम्नलिखित सब्जेक्ट होते हैं :-

  • Criminal Law
  • Cyber Law
  • Banking Law
  • Corporate Law
  • Tex Law
  • Family Law
  • Patent Attorney

सवाल: वकील बनने के लिए कितनी उम्र होनी चाहिए?
जवाब: बीसीआई (BCI) के नियमों के मुताबिक पांच वर्षीय पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए अधिकतम आयु 20 वर्ष और तीन वर्षीय एलएलबी पाठ्यक्रम (LLBCourse) में प्रवेश के लिए अधिकतम आयु सीमा 30 वर्ष निर्धारित की गई है।

DON’T STUDY LAW

I am a LLB student. But when I decided to take admissions in Law course after graduation, my father said – “Don’t study law”. He said, “Only if you have a long-time passion for and interest in law, then study law. Otherwise, don’t.”

My father was right. I have a passion for law. This year I have taken admissions at Department of Law, Jharkhand Rai university to pursue LLB.

But if you aren’t sure about Law study, here are a few good reasons why studying Law is an excellent career choice:

STUDY LAW TO MAKE A DIFFERENCE

Many reasons prompt students to choose Law course.  These include –

  • Being able to earn a good, secure living
  • It adds to your status as a traditional profession
  • After studying law, you acquire skills to make a difference in the world
  • Using law, you can ensure access to justice amongst marginalised communities
  • By studying law, you can contribute to the quality and security of people’s lives by ensuring they have their personal legal documentation in order
  • After acquiring a law degree, you can contribute to academic knowledge about how the law is developed, practiced, implemented and accessed by being in the field of education.

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LAW STUDY IS A COMBINATION OF THEORY AND PRATICE
All Law colleges make sure that students learn, understand and can argue legal theory and the theoretical underpinnings of the Law.

Some Law colleges (such as Dept. of Law, JRU, Ranchi) ensure that practical experience in Law is a core part of the Law programme – for example, running mock courts and moot competitions.  An important component of the JRU Law programme is to students do pro bono community service as part of their qualification.

APPLICATION OF LAW
Studying Law means learning about cases – actual examples of cases that have been argued and judged in a real court.  Real life cases are used to demonstrate various theoretical points and how theory is applied in practice. This approach helps to give an understanding of how the law gets applied in actual court situations.

GOOD LAW COLLEGES 

  • Good law colleges like Dept. of Law, JRU, Ranchi ensure that their law students develop a set of competences and skills. Here’s a few of the skills essential to a career in Law:
  • Critical analysis – being able to read, recognize, analyse and draw out a conclusion
  • Writing – being able to draft a clear written argument for cases
  • Research – ability to find relevant case law in support of a legal argument
  • Argument and presentation – the ability to clearly express and argue your point (this is often taught through moot competitions at law colleges).
  • Explaining ideas – it is necessary in Law that you are able to argue complex ideas in simple terms, so that other law professionals and your clients are able to understand you.

LAWYERS IN HIGH DEMAND
All of these skills are in high demand in other sectors, so moving industries or professional focus is relatively easy, adding to Law graduates’ mobility in terms of career, income potential and other decision factors in choosing your course of study.

The rigour of a Law school education, and the range of skills mentioned above ensures that law graduates are sought after across a range of endeavours. In other words, Law graduates enjoy excellent career prospects.

syan hajra

कोविड मरीजों के इलाज दौरान आया बीपीटी करने का विचार : शयन हाजरा

शयन हाजरा एक प्रोफेशनल डिप्लोमा होल्डर फिजिओथेरेपिस्ट है। पश्चिम बंगाल के मेदनीपुर जिले में अपनी प्रैक्टिस करते हुए उन्होंने कोविड 19 आपदा का दौर बेहद नजदीक से देखा है। कोविड मरीजों और ह्रदय के मरीजों को उपचार के लिए फिजिओथेरेपी करते समय उन्हें यह विचार आया की इस क्षेत्र में उच्च शिक्षा लेकर मरीजों का भला किया जा सकता है।

शयन के अनुसार ” कोविड के लॉक डाउन के कारण ज्यादा समय मुझे अपनी क्लिनिक और नर्सिंग होम में बिताना पड़ता था। नर्सिंग होम में ज्यादा पेसेंट कोविड पेसेंट होते थे। इसी दौरान मैंने फिजिओथेरेपी में उच्च शिक्षा लेने का मन बनाया और इंटरनेट की मदद से अच्छे कॉलेज को सर्च करने लगा। इस दौरान मुझे झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी, रांची का पता चला जो रांची शहर में है और मेरे गृह जिले के पास भी है। मैंने तुरंत फ़ोन लगाकर इस कोर्स और इसके फी स्ट्रक्चर की जानकारी प्राप्त किया। आज मैं बैचलर ऑफ़ फिजिओथेरेपी स्टूडेंट के रूप में इस यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहा हूँ। मेरा मानना है की इसके जरिये मुझे और ज्यादा इस फील्ड की जानकारी प्राप्त होगी और मुझे और ज्यादा लोगों की सेवा करने का मौका मिलेगा।“

पेंटिंग और मैनेजमेंट की पढ़ाई दोनों है मेरी पहली पसंद : बीबीए स्टूडेंट अंजलि।

कला और प्रबंधन का अन्योन्याश्रय संबंध वर्तमान दौर में सफलता की गारंटी है। कुछ यही फ़लसफ़ा अंजलि के साथ भी जुड़ा है। पेंटिंग के क्षेत्र में कुछ करने की ललक और मैनेजमेंट की पढ़ाई कर बड़े पद की चाहत उन्हें झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी ले आयी। अंजलि बताती है ” अपने घर से नजदीक एक बेहतर कॉलेज की तलाश रांची आकर पूरी हुयी। मोबाइल पर मैनेजमेंट की पढ़ाई केलिए किसी अच्छे कॉलेज की तलाश करते हुए मुझे यूनिवर्सिटी के मैनेजमेंट डिपार्टमेंट की गतिविधियों के बारे में पता चला। इन बातों ने मुझे आकर्षित किया और मैंने यहाँ पढ़ने का मन बना लिया।“

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बीबीए में नामांकन लेने वाली अंजलि से जब यह पूछ गया की पेंटिंग को वह अपनी दिनचर्या में क्या स्थान रखता है तो उन्होंने बताया ” जब भी समय मिलता है तो मुझे चित्र बनाना अच्छा लगता है। मैंने कोई प्रशिक्षण तो नहीं प्राप्त किया है लेकिन स्कूल के समय से ही मुझे यह करना अच्छा लगता है और मैं यह नियमित करती रहती हूँ।“

अंजलि रामगढ़ जिले के भुरकुंडा की रहने वाली है। इनके पिता सीसीएल में कार्यरत है और खुद अंजलि भी अपनी पढ़ाई पूरी कर एक बड़ी कंपनी में कार्य करने का सपना रखती है। उन्हें ऐसा लगता है की बीबीए की पढ़ाई करने पर उनका यह सपना पूरा होगा।

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JAC 12वीं के संशोधित सिलेबस को मंजूरी। परीक्षा और मूल्यांकन में बदलाव

झारखंड सरकार ने 12वीं तक के संशोधित सिलेबस को मंजूरी दे दी है। सिलेबस में 40 फ़ीसदी की कटौती की गई है। इसके अलावा परीक्षा और मूल्यांकन में भी बदलाव किया गया है। प्लस टू स्कूल के सिलेबस में 40 फीसदी तक की कटौती की गई है। भाषा सब्जेक्ट में जहां चैप्टर बढ़ाये गए हैं वही गणित विज्ञान में चैप्टर हटाए गए हैं।

वेटेज ऑफ मार्क्स :
संशोधित पाठ्यक्रम के साथ विभाग मैट्रिक और इंटरमीडिएट के परीक्षार्थियों के लिए वेटेज ऑफ मार्क्स भी जारी करेगा। सीबीएसई की तर्ज पर वेटेज ऑफ मार्क्स जारी होगा। संशोधित सिलेबस में परीक्षार्थियों को पता चल सकेगा कि किस चैप्टर और टॉपिक से कितने नंबर के प्रश्न आएंगे। इससे मैट्रिक और इंटरमीडिएट की परीक्षा की तैयारी करने में परीक्षार्थियों को सहूलियत होगी।

वेटेज ऑफ मार्क्स ( इंटरमीडिएट) :-
हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, गणित, भौतिकी, रसायन शास्त्र, जीव विज्ञान, इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र, बिजनेस स्टडीज, अकाउंटेंसी, अंतरप्राइनियोरशिप और बिजनेस मैथमेटिक्स में प्रश्नों के प्रकार और अंक प्रणाली ।

  • ऑब्जेक्टिव या वेरी शॉर्ट आंसर : 40 प्रतिशत
  • वेरी शॉर्ट टाइप प्रश्न : 20 प्रतिशत
  • शॉर्ट आंसर : 20 प्रतिशत
  • लॉन्ग आंसर : 20 प्रतिशत

सिंगल फार्मूला विधि से गणित की परीक्षा :
संशोधित सिलेबस के आधार पर मैट्रिक और इंटरमीडिएट के परीक्षार्थी एक फार्मूले के आधार पर ही परीक्षा दे सकेंगे। परीक्षा में विलोपन विधि से प्रश्न पूछे जायेंगे। गणित में वैसे चैप्टर को हटाया गया है जिन्हें घर पर पढ़ना संभव नहीं है।

मॉडल पेपर होगा जारी :
मैट्रिक और इंटरमीडिएट के सिलेबस संशोधित होने के साथ ही मॉडल प्रश्न पत्र भी जारी होंगे। जैक की ओर से संशोधित सिलेबस के आधार पर मॉडल प्रश्न पत्र तैयार किया जायेगा । इसमें सभी संशोधित चैप्टर से प्रश्न पूछे जाएंगे।

टेस्ट के जरिए होगी तैयारी :
सिलेबस संशोधित होने के बाद जैक के द्वारा जारी होने वाले मॉडल प्रश्नपत्र के आधार पर मैट्रिक और इंटरमीडिएट के छात्र -छात्राओं का टेस्ट लिया जा सकेगा। उन्हें उसे बना कर शिक्षकों को दिखाने के लिए कहां जाएगा, जो भी गलती होगी उसे पकड़ा जा सके।

वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में 20 फीसदी बढ़ोतरी :
इंटरमीडिएट की परीक्षा में वस्तुनिष्ठ प्रश्नों की संख्या 25 फ़ीसदी तक रहती है। इस आधार पर 2021 की इंटरमीडिएट में ऑब्जेक्टिव प्रश्न में 10 से 20 फ़ीसदी की बढ़ोत्तरी की गई है।

राज्य सरकार ने कोरोना महामारी की वजह से स्कूल नहीं खुलने और पढ़ाई बाधित होने के बाद 40 फ़ीसदी सिलेबस में कटौती की थी। इसी आधार पर मैट्रिक और इंटरमीडिएट की 2021 की परीक्षा पैटर्न में बदलाव करने का निर्णय लिया था। स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग ने स्पष्ट करते हुए कहा है कि “कोविड-19 की वजह से स्कूलों में क्लास नहीं चल रहे हैं। इससे क्लास में छात्रों की उपस्थिति नहीं है। ऐसे में स्कूलों को मैट्रिक की परीक्षा में इंटरनल एसेसमेंट में उपस्थिति के आधार पर अंक देने में कठिनाई होगी। 12 वीं की परीक्षा संभवतः 2022 के मई महीने में होगी।

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8 सितंबर : विश्व फिजियोथेरेपी दिवस

लोग समझते हैं कि दवा की गोली खा लेने से दर्द छू मंतर हो जाएगा। पर ऐसा होता नहीं है। कुछ देर की राहत के बाद फिर दवा पर निर्भरता की स्थिति बन जाती है, जोकि हमारे शरीर के लिए सही नहीं है। दरअसल हमारे शरीर की क्षमता में ही शरीर का इलाज छुपा है। इसे फिजियोथेरेपी पद्धति ने पहचाना और लोगों का इलाज बिना दवा-गोली के होना शुरू हुआ। हर वर्ष 8 सितम्बर को पूरे विश्व में ‘वर्ल्ड फिजियोथेरेपी डे’ मनाया जाता है। इस वर्ष इसका थीम है “क्रोनिक पेन “।

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी रांची में बैचलर ऑफ़ फिजियोथेरेपी का कोर्स संचिलत है। इसकी अवधी 4 वर्ष होती है और कोई विज्ञान विषयों के साथ 12 वीं पास विद्यार्थी इसमें नामांकन ले सकता है।

स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में फिजियोथेरेपी चिकित्सा की अपनी अलग पहचान है। मौजूदा समय में अधिकांश लोग फिजियोथेरेपी की ओर रुख कर रहे हैं, क्योंकि यह न केवल कम खर्चीला होता है, बल्कि इसके दुष्प्रभाव भी नहीं है।

फीजिओथेरेपी मेडिकल साइंस की ऐसी प्रणाली है, जिसकी सहायता से जटिल रोगों का इलाज आसानी से किया जाता है। हालांकि, भारत में बहुत कम ही लोग इसके प्रति जागरूक हैं, जिस वजह से वो इसका लाभ कम ही उठा पाते हैं। फीजिओथेरेपी के जरिए ऑस्टिओअर्थराइटिस, स्पाइनल इंजरी जैसी जटिल बीमारियों का इलाज संभव है। इसका कोई साइड एफेक्ट भी नहीं होता है।

फिजियोथेरेपी यानी शरीर की मांसपेशियों, जोड़ों, हडि्डयों-नसों के दर्द या तकलीफ वाले हिस्से की वैज्ञानिक तरीके से आधुनिक मशीनों, एक्सरसाइज, मोबिलाइजेशन ,टेपिंग , के माध्यम से मरीज को आराम पहुंचाना। हालांकि अधिकतर लोग मानते हैं कि केवल योगा और कुछ कसरतें ही फिजियोथैरेपी होती हैं लेकिन ऎसा नहीं है। फिजियोथैरेपी में विशेषज्ञ कई तरह के व्यायाम और नई तकनीक वाली मशीनों की मदद से इलाज करते हैं।

फिजियोथेरेपी के कुछ फायदे :

  • ये आपको चोट से बचने में मददगार साबित होता है ।
  • सदमा या घाव से उबरे में मदद करता है ।
  • स्ट्रोक और पैरालिसिस से ठीक करने में मददगार है।
  • आयु संबंधी मेडिकल समस्या होने पर बेहतर प्रबंधन में फायदेमंद है।