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Mind-QuiZZard

Mine Quizzard 2021- Let the Best Minds Win

Mining is a war between unpredictable forces of nature and the human mind. It requires sensible and timely action to prevent loss of life and property. ‘Mine Quizzard 2021’ is a step in this direction wherein a Mega Quiz competition is organised annually to judge the competency of our aspiring mining professionals.

The weekend saw a battle of great mining minds when more than 600 students representing more than 40 universities and colleges spread across various states like Andhra Pradesh, Telengana, Bihar, West Bengal, Orissa, Chhattisgarh, Rajasthan and Maharashtra took part.

At the end of a one hour long tough contest, five students emerged winners as they scored Full marks out of which three are proud students from Jharkhand Rai University while the other two Ashish Sharma and Prashant Karna are from B.I.T. Sindri, Dhanbad. Congratulations to all!

Here are the Proud Winners from JRU:

Sumit Kumar - JRU Student
Sumit Kumar Sinha- B.Tech IV Semester

Chandan Kumar-B.Tech IV Sem
Chandan Kumar- B.Tech IV Semester

Shubham Kr
Shubham Kumar – Diploma in Mining- IV Semester

The quiz was largely based on the pattern of competitive examinations as per Directorate General of Mines Safety (DGMS). The questions focused on different areas of mining like Mine legislation, Mining Machinery, Ventilation, Mining Geology, Rock Mechanics and Surface Mining etc.

Congratulating the winners Piyush Ranjan, Registrar- Jharkhand Rai University said, “This is an annual initiative from The Department of Mining, the objective behind organising this quiz competition is to get our students accustomed with the competitive exam pattern and time frame for attempting every question. It gives them a glimpse of what really happens during the actual test” preparing them to be ready for the finals”. He also acknowledged the efforts of our BCA VI semester student Faizal Raza who built the complete online framework for conducting this mega quiz smoothly.

JRU Campus ambassador for GES 2021 by IIT Kharagpur and an active member of Institute Innovation Cell (IIC) Faisal said, “I have built a group of young enthusiasts dedicated towards the upliftment of our youth community. We create IT solutions by developing such events virtually so that students can explore their full potential, Boost their self-confidence and realize the importance of their dreams”.

The university provided e-certificate to all who secured above 80% in the competition.

Virtual Hiring

VIRTUAL CAMPUS RECRUITMENT BY JRU CMC CELL DURING COVID TIMES

Adversities and tough situations lead to innovative solutions. With the pandemic creating massive impact across the world, the hiring industry is no exception. Virtual hiring and remote working have become the new normal with technology playing a significant role.

At Jharkhand Rai University, the Career Management Cell (Training & Placement) has adapted itself to the changing reality. Interestingly, some of our recent campus recruitment drives were 100% virtual.

Sharing more information about this, Piyali Das from JRU CMC cell says, “Since last year, hiring trends have been transforming in response the new normal. Keeping this in view, we constantly help in preparing our students accordingly.”

Though the placement process is organized remotely, a clear procedure is followed at every step. Piyali says, “Recruitment opportunities are shared regularly with relevant departments and mentor groups. Students can share their nominations via mail and all candidates are briefed and prepared before their online interview.”

In the final interview round, we are also present along with the recruiting company’s HR & other officials. That boosts the confidence of our students as we guide them throughout the process. It is heartening to see that our students are not losing their morale and going virtual for their learning as well as job interviews” she adds.

Recently, Sonu Kumar Das, B. Tech Mechanical Engineering student, got placed as Apprentice Trainee along with 14 other students in Masu Brakes Limited, a leading automobile manufacturing company in Haryana.

“I am happy to start my career in automobile sector. The entire recruitment process was very smooth. I would say that the virtual hiring has been a boon in these times as it has opened a wide range of choices before us beyond our state and region. I am thankful to our faculties and the placement cell for handholding us during this journey”.

Career Management Cell (T &P) of Jharkhand Rai University is committed to provide all possible assistance to the students in every situation. The CMC Cell optimises their relationship by organising virtual sessions with the industry experts to prepare and groom the students to the best of their capabilities.

Applauding the efforts of the CMC cell, JRU Registrar Dr. Piyush Ranjan adds, “The aim is to mentor students by helping them choose their career wisely. Our effort is to give proper knowledge, skill and aptitude to cater to the changing dynamics of the manpower requirements. We believe that that progress should not stop and hence our CMC cell

has taken our placement support activities like Group Discussions, Mock Interviews, Personality Development and Expert Guest Sessions to a virtual platform. This has bridged the gap between the budding professionals and their prospective employers. We wish our resilient students a bright future”.

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झारखंड राय यूनिवर्सिटी की वर्चुअल लाइब्रेरी सुविधा से विद्यार्थी हो रहे लाभान्वित

एजुकेशन के ऑनलाइन ट्रेंड दौर में वर्चुअल लाइब्रेरी स्टूडेंटस के कॉन्सेप्ट को बेहतर बनाने में मददगार साबित हो रही हैं। ऑनलाइन क्लासेज के साथ स्टूडेंट्स अपनी नॉलेज को ई-लाइब्रेरी के सहारे अपग्रेड कर रहे हैं।

कोरोना की दूसरी लहर ने एक बार फिर से ऑनलाइन शिक्षा के महत्व को उजागर किया है।रांची स्थित झारखंड राय यूनिवर्सिटी ने ऑनलाइन शिक्षा के महत्व को पहचानते हुए स्टूडेंट्स के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म moodle (मॉड्यूलर ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड डायनेमिक लर्निंग) प्लेटफॉर्म का उपयोग सफलतापूर्वक प्रारंभ जारी रखा है।

ऑनलाइन शिक्षा की कड़ी में एक अहम कदम है वर्चुअल लाइब्रेरी।यह स्टूडेंटस के कॉन्सेप्ट बेहतर करने में मददगार साबित हो रही हैं। स्टूडेंट्स अपनी नॉलेज को ई-लाइब्रेरी के सहारे अपग्रेड कर रहे हैं।

गौरतलब है कि एमएचआरडी ने हाल ही में इस तरह के प्रयास शुरू किए हैं जो कि स्टूडेंट्स के लिए खासे उपयोगी सिद्ध हो रहे हैं। वर्चुअल लाइब्रेरी एक प्रकार की डिजीटल लाइब्रेरी है जो इंफॉर्मेशन को पोर्टल प्रदान करती है। इसमें इंटरनेट पर ई-रिसोर्सिंग साइट्स से आवश्यक जानकारी देख सकते हैं। इसमें एन्फिलिबेट सूचना केन्द्र महत्वपूर्ण साइट्स ई-पीजी पाठशाला, शोधगंगा, विद्वान, शोधसिंधु आदि का कलेक्शन करता है। इसके अलावा स्वयं प्रभा जैसा वीडियो चैनल लगातार कार्य कर रहा है।

झारखंड राय यूनिवर्सिटी, रांची के पुस्तकालय में 54 हजार से ज्यादा पुस्तकें है। पुस्तकालय में KOHA(कोहा) जैसा नवीनतम सॉफ्टवेयर उपयोग में लाया जाता है जिसकी मदद से स्टूडेंट्स सारी सूचना और सुविधा का लाभ अपने मोबाइल फ़ोन के जरिये प्राप्त करते है। पुस्तकालय से प्राप्त होने वाली ई सुविधाओं में ई बुक, ई जर्नल, ई डेटा बेस, ई पत्रिका, ई प्रोजेक्ट रिपोर्ट, ई थीसिस ,ई डेजरटेसन,ई हाउस जर्नल शामिल है।

झारखंड राय यूनिवर्सिटी के पुस्तकालय प्रभारी रॉबिन कुमार के अनुसार ” विश्वविद्यालय का पुस्तकालय जितना ऑफलाइन मोड में समृद्ध है उतना ही ऑनलाईन सेवा तत्परता के साथ प्रदान करता है। वर्तमान में Delnet (डेलनेट )और NDL(एनडीएल) सॉफ्टवेयर की सुविधा विद्यार्थियों और शोध छात्रों को उपलब्ध कराई जा रही है। समसामयिक विषय संबंधी जानकारी के लिए नियमित तौर पर देश की प्रमुख पत्र पत्रिकाओं की ई -प्रति सभी को ईमेल और व्हाट्सएप के जरिये भेजी जा रही है”।

निः संदेह विद्यार्थियों के लिए वर्चुअल लाइब्रेरी सुविधा ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक साबित होगी।।

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एनएसएस इकाईयों को तनाव प्रबंधन कोषांग गठित करने का निर्देश

कोविड महामारी के बढ़ते प्रभावों को देखते हुए राष्ट्रीय सेवा योजना के सभी कार्यक्रम पदाधिकारियों की ऑन लाइन बैठक सोमवार अपराह्न 3 बजे आयोजित हुई । बैठक में क्षेत्रीय निदेशक पीयूष परांजपे और राज्य समन्वय प्रभारी झारखंड डॉ. ब्रजेश कुमार के अलावा राज्य भर के एनएसएस कार्यक्रम पदाधिकारी उपस्थित थे।डॉ. ब्रजेश की पहल पर आयोजित बैठक में कोरोना के बढ़ते संक्रमण को कम करने एवं विद्यार्थियों के मानसिक समस्या निदान के लिए तनाव प्रबंधन कोषांग के गठन को लेकर मुख्य चर्चा की गई।

बैठक को संबोधित करते हुए एनएसएस के क्षेत्रीय निदेशक पीयूष परांजपे ने कहा कि” स्ट्रेस मैनेजमनेट सेल का गठन सभी कॉलेज और विश्वविद्यालय एनएसएस इकाईयों के द्वारा 30 अप्रैल तक किया जाय। इसमें आठ से ग्यारह लोगों को शामिल किया जाय जिनमें मनोविज्ञान और चिकित्सा विज्ञान संकाय के छात्र एवं शिक्षकों को भी शामिल किया जाय। यह कोषांग विद्यार्थियों के सभी मानसिक और शैक्षणिक समस्या निदान में सहायक साबित होगा। क्षेत्रीय निदेशक(बिहार/झारखंड) ने सोशल मीडिया का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करते हुए जन जागरूकता से जुड़े कार्यक्रम आयोजित करने को कहा। विद्यार्थियों के मानसिक तनाव को दूर करने के लिए ऑनलाइन कार्यक्रमों के आयोजन पर भी उनके द्वारा बल दिया गया। उन्होंने बताया कि एनएसएस की महत्वपूर्ण और बेहतरीन गतिविधियों को एनएसएस इंडिया सोशल मीडिया पेज पर स्थान भी दिया जाएगा।”

राज्य समन्वय प्रभारी डॉ. ब्रजेश कुमार ने बैठक के दौरान जानकारी देते हुए बताया कि “झारखंड राय विश्वविद्यालय द्वारा कोरोना संक्रमण काल में आयुर्वेदिक इम्यूनिटी बूस्टर टैबलेट्स का निः शुल्क वितरण एक सराहनीय कार्य है। उन्होंने राज्य भर से बैठक में शामिल होने वाले कार्यक्रम पदाधिकारियों को क्वाथ इम्युनिटी टैबलेट्स के लिए विश्वविद्यालय से संपर्क करने का निर्देश भी दिया। डॉ. ब्रजेश ने कहा कि तनाव प्रबंधन कोषांग सहित अन्य ऑनलाइन गतिविधियों में शामिल होने वाले स्वयंसेवकों को प्रमाणपत्र भी दिया जाएगा। उन्होंने “न डरना है न घबराना है मिलकर कोरोना को हराना है” संदेश के प्रचार प्रसार पर भी जोर दिया।

बैठक के दौरान राज्य भर के कार्यक्रम पदाधिकारियों ने अपने कॉलेज एवं विश्वविद्यालय में संचालित गतिविधियों के साथ अपने निजी सुझाव भी दिए ।

झारखंड राय विश्वविद्यालय की ओर से एनएसए कार्यक्रम पदाधिकारी प्रो.रघुवंश और डॉ. प्रशांत जयवर्धन ने विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व किया। प्रो. रघुवंश सिंह ने बैठक के दसूरण अपनी बात रखते हुए कहा कि ” विश्वविद्यालय में पूर्व से ही छात्रों से जुड़ी मानसिक समस्या निदान के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया है। विश्वविद्यालय अपने ऑफिसियल वेबसाइट और सोशल मीडिया पेज के जरिये निरंतर प्रचार प्रसार का कार्य करने में लगा हुआ है।

बैठक में राज्य भर के सरकारी एवं निजी विश्वविद्यालयों के कार्यक्रम समन्वयक उपस्थित थे।

Covid -19 की दूसरी लहर को हराना है: जागरूक बनें, लक्षण पहचाने और तुरंत करवा लें जाँच

देश में कोरोना की दूसरी लहर थमने का नाम नहीं ले रही है। रोजाना नए मामलों की संख्या बढ़ रही है। सोमवार को एक्टिव मामलों की संख्या 12 लाख के पार हो गई। कई राज्यों ने कोरोना को बढ़ने से रोकने के लिए पाबंदियां लगाई हैं। केंद्र और राज्य सरकार हालात से निपटने के लिए नई रणनीति बना रही हैं। कई राज्यों ने आंशिक प्रतिबंध और नाइट कर्फ्यू का सहारा लिया है, तो कई जगह पर टेस्टिंग और ट्रेसिंग पर जोर दिया जा रहा है। ऐसे में कोरोना की दूसरी लहर को लेकर कई गंभीर सवाल लोगों के मन में हैं।

  • कैसे भारत में आई कोरोना वायरस की दूसरी लहर?
    कोरोना के नए स्ट्रेन की खोज और लोगों द्वारा बरती जा रही लापरवाही ने देश में इस महामारी के प्रसार को बढ़ाने का काम किया है. स्वास्थ मंत्रालय के अनुसार, नया वायरस काफी तेजी से फैल रहा है और इस लिहाज से अगले चार सप्ताह काफी महत्वपूर्ण हैं.
  • क्यों तेजी से बढ़ रहे हैं मामले?
    लोगों की लापरवाही, प्रशासन की ढील और नए वायरस का उभरना कोरोना फैलने की प्रमुख वजहें हैं. डॉक्टर लगातार संक्रमण फैलने के रुझानों की बात करते रहे हैं। इनकी अनदेखी करना महंगा पड़ रहा है ।
  • क्या तेज है कोरोना की रफ्तार?
    देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर में मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. लोगों के अस्पताल में भर्ती होने की दर तेजी से बढ़ी है. गुजरात जैसे राज्यों में कोरोना की दूसरी लहर सबसे अधिक तबाही मचा रही है, जो दर्शाता है कि यह पहली लहर से काफी अधिक खतरनाक है।
  • क्या हैं नए संक्रमण के लक्षण?
    कोरोना वायरस के नए संक्रमण के लक्षण पुराने से अधिक गंभीर हैं। पुराने लक्ष्ण जैसे खांसी, बुखार, गले में तकलीफ के साथ नया वायरस अन्य लक्षण भी लेकर आया है । अस्पतालों में भर्ती हो रहे मरीजों के पड़ताल से इसकी जानकारी मिली है। नए लक्षण में वायरल बुखार के साथ पेट में दर्द, उल्टी व दस्त, घबराहट, सर्दी-जुकाम आदि शामिल हैं। कई मरीजों को बदन में दर्द, गैस, भूख न लगना, मांसपेशियों में अकड़न जैसी शिकायतें भी हैं। हालांकि, अब भी ऐसे मरीजों की तादाद कम नहीं हैं, जिनमें कोई लक्ष्ण नजर नहीं आ रहे हैं।
  • संक्रमण क्या तेजी से फैल रहा है?
    नया संक्रमण कोरोना के ज्यादातर मामलों में अब भी न के बराबर या काफी हल्के लक्ष्ण नजर आ रहे हैं. मगर समय के साथ-साथ वायरस ने अपना रूप बदल लिया है। यह अधिक घातक हो गया है। जिन लोगों को पहले से ही कोई बीमारी है, उन पर इसका कहर अधिक है। इसलिए अधिक लोगों को हॉस्पिटल में भर्ती करवाना पड़ रहा है।
  • गैस को न करें नजरअंदाज कोरोना वायरस के नए मामलों में पेट में एसिडिटी या गैस की शिकायत काफी आम है. शुरुआत में इसे गंभीरता से नहीं लिया जा रहा था, मगर अब डॉक्टर इस बात को लेकर काफी चिंतित है. कई डॉक्टर्स का मानना है कि अपच, डायरिया, पेट में दर्द और उल्टी आदि के चलते मरीजों में गैस की शिकायतें बढ़ रही हैं। इसके अलावा नया वायरस अहम अंगों को भी क्षतिग्रस्त कर रहा है। ऐसे में अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है।
  • किन चीज़ो का पालन करके आप अपने आप को सुरक्षित रख सकते है ?

हालांकि, आज तक कोई भी वैक्सीन या दवाई नहीं बन सकी है कोरोना वायरस के इलाज के लिए | WHO और CDC के अनुसार निम्नलिखित चीज़ो का पालन करके इन्फेक्शन की रिस्क को कम किया जा सकता है –

  • अपने हाथों को कुछ समय के अंतर नियमित साफ करें। साबुन और पानी का उपयोग करें, या अल्कोहॉल आधारित सैनीटाइज़र से हाथ रगड़ें।
  • खांसने या छींकने पर अपनी नाक और मुंह को अपनी मुड़ी हुई कोहनी या एक टिश्यू से ढक लें।
  • COVID-19 से पीडित लोग से या खांसी या छींकने वाले किसी से भी सुरक्षित दूरी बनाए रखें।
  • अपनी आँखें, नाक या मुंह को बार बार न छुएं।
  • यदि आप अस्वस्थ महसूस करते हैं तो घर पर रहें। अपने बर्तन, गिलास और बीएड किसी से शेयर ना करे
  • यदि आपको बुखार, खांसी और सांस लेने में कठिनाई होती है, तो इलाज कराएं।
  • ज़्यादा इस्तेमाल करने वाले जगहों को नियमित तरीके से डिसइंफेक्टेंट से साफ़ करते रहे |
  • अगर आप बीमार है, तोह पब्लिक जगहों से दूर रहे जैसे कि स्कूल, ऑफिस आदि।
  • अपने स्थानीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के निर्देशों का पालन करें।

डॉक्टर से संपर्क कब करना हैं?
कोविड – 19 के संक्रमण गंभीर होने से मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम और सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम संक्रमण हो सकता है । COVID-19 के लक्षण होने पर बहार निकलने का सलाह नहीं देतें यहाँ तक की मेडिकल क्लिनिक या अस्पताल भी ना जाएं। यह वायरस को फैलने से बचाने में मदद करता है। यदि आपके परिवार के किसी सदस्य में संक्रमण के लक्षण दिखने पर डॉक्टर से संपर्क करे। यदि आपके परिवार के किसी सदस्य में संक्रमण के लक्षण दिखने पर नज़दीकी डॉक्टर से फ़ोन पर संपर्क करे, या राज्य के हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करें।

mechanical Quiz 2021-02-02

Mechanical QUIZZARD

Date: 20 March, 2021
Time: 11.00 am – 12.00 pm

Objective: To get students accustomed with competitive exam pattern.
Students will learn the time management by attempting the questions within the given time frame.

General Rules :

  1. All questions to be from mechanical domain only.
  2. The Quiz consists of 60 questions.
  3. Duration of Ouiz is 30 minutes.
  4. To participate in the quiz registration is must.
  5. Time limit to answer each question is 30 sec.

e-Certificate will be provided to all participants.

Registration link for Quiz:
https://forms.gle/ZMpaZqDHCYqwQQ8Z9

Organized by Department of Mechanical Engineering, Jharkhand Rai University, Ranchi

kwath distribution at Pandra from Jharkhand Rai University

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी एनएसएस सेल के सहयोग से साप्ताहिक हाट बाजारों में क्वाथ टैबलेट्स का निःशुल्क वितरण

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी, रांची के राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस सेल ) के जरिये स्थानीय स्तर पर स्वाथ्य एवं रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ावा देने के लिए क्वाथ (इम्युनिटी बूस्टर) टैबलेट्स का वितरण किया जा रहा है। इस अभियान तहत ग्रामीण बाजारों,किसानों, मजदूरों के बीच निः शुल्क रोग प्रतिरोधक छमता बढ़ाने में सहयोगी क्वाथ टैबलेट्स का वितरण किया गया है। राष्ट्रीय सेवा योजना एवं विश्वविद्यालय के एक्सटेंशन एंड आउटरीच प्रोग्राम के तहत संचालित यह कार्यक्रम रांची जिले के कई प्रखंडों, प्रखंड कार्यालयों एवं सप्ताहिक हाट बाजारों में चलाया जा रहा है। इसमें अब तक नामकुम प्रखंड के रामपुर बाजार, पलांडू, नामकुम प्रखंड सह अंचल कार्यालय, नामकुम बाजार में सफलतापूर्वक संचालित किया गया है। इसके अलावा रातू प्रखंड के दलादली साप्ताहिक हाट एवं कांके प्रखंड के कांके बाजार और कांके प्रखंड कार्यालय में क्वाथ (इम्युनिटी बूस्टर) टैबलेट्स का सफलतापूर्वक निः वितरण किया गया है।

kwath distribution at Pandra from Jharkhand Rai University

इस अवसर पर एनएसएस के स्वयंसेवी छात्र एवं छात्राएं आस्था स्पृहा, काव्या सीधी कुजूर, तनु खलखो, अरविन्द कुमार, सन्नो रानी, लोकेश कुमार ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए अभियान को सफल बनाने में अपना योगदान दिया।

इस अवसर पर झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी रांची के डॉ. अशफाक आलम ( डीन एक्सटेंशन रिलेशन ) एवं प्रो. रघुवंश सिंह (यूनिवर्सिटी एनएसएस अधिकारी ) उपस्थित थे।

Whose Business Plan is the smartest of them All- The Biz Plan 20 competition

Innovation is the key to any successful business plan. The management club at Jharkhand Rai University organised Biz Plan 20 on 19th Dec, 2020 where 19 business plans vied for the top position from participating student teams of leading universities like Xavier University-Bhubneshwar, Central University of Jharkhand, XISS, St. Xavier’s College, Ranchi Women’s college, Duranda College as well as the teams from the host institution of Jharkhand Rai University.

It was a fun and engaging session, moderated well by convener of the club Prof. Rashmi & Co-convener Abhishek Pratap from JRU. An eminent jury of experts from industry and academia patiently went through the day-long session listening to the smartest business plans and cross-questioning them on their projects as well as execution plans. The jury members included Projwal Kumar David, a seasoned corporate professional along with Asst. Prof. Amrendra, Convener of Indian Innovation Council at Jharkhand Rai University.

After a careful evaluation of all the entries, Shivani Jha from School of HRM at Xavier University Bhubneshwar emerged as the winner in the competition. Her winning idea was “Canis Felis”- built around the concept of creating a whole world of comfort for your pet. Complete with a well-crafted plan for building the brand across consumer touch points- Shivani made her pitch very well impressing the jury with a fool-proof business plan.

The 1st runners up were Priyanka Ghosh, Nidhi Singh, Purvaa Ghosh & Priyansa Kumari from XISS, Ranchi & their smart business plan explored the local produce bamboo titled– “Jharokhaa” in a bid to replace plastic products thereby building a sustainable livelihood for local farmers and contributing to our environment.

FIRST RUNNER UP

In a rapidly changing digital environment, an online food delivery app capitalizing on “Mom’s Taste” was declared as the 2nd runners up. The team constituted of Riti Shalini Tiru & Meghali Deep Shikha from XISS, Ranchi.

SECOND RUNNER UP

In the end, it was heartening to see #YoungIndia putting their thinking caps and coming up with their smart biz plans for the fiercely competitive consumer market. Their thought processes were inspired with #makeinIndia, supporting #vocalforlocal in their winning ideas..

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी में मेडिकल राइटिंग ऐज ए कैरियर इन फार्मेसी पर वेबिनार का आयोजन

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी डिपार्टमेंट ऑफ़ फार्मासूटिकल्स के द्वारा “मेडिकल राइटिंग ऐज ए कैरियर इन फार्मेसी” विषय पर एक दिवसीय वेबिनार का आयोजन शनिवार को किया गया। इस अवसर पर ऑनलाइन व्याख्यान देने के लिए एपीसीइआर अहमदाबाद में सीनियर मेडिकल राइटर डॉ. दीपिका उपस्थित थी।

उन्होनें ने वेबिनार को संबोधित करते हुए कहा की ” चिकित्सा लेखन विशेष लेखकों द्वारा वैज्ञानिक दस्तावेजों का निर्माण है। मेडिकल लेखक आमतौर पर वैज्ञानिकों, डॉक्टरों और अन्य विषय विशेषज्ञों के साथ मिलकर काम करता है ताकि प्रभावी दस्तावेज तैयार किए जा सकें जो अनुसंधान परिणामों और उत्पाद के उपयोग को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें।

मेडिकल राइटिंग के प्रकार :

डॉ. दीपिका ने मेडिकल राइटिंग के प्रकारों पर प्रकाश डालते हुए उन बताया की इसे मुख्य रूप से दो प्रकारों में बांट सकते है

  • एजुकेशनल मेडिकल राइटिंग
  • रेगुलर लीटरचर राइटिंग ।

एजुकेशनल राइटिंग में जर्नल, एजुकेशनल मैटर्स,मार्केटिंग लिटेरेचर, पब्लिकेशन, प्रेस शामिल है जबकि रेगुलर राइटिंग में शोध सामग्री, नियम परिनियम एवं अन्य साहित्य सामग्री का समावेश होता है।

मेडिकल राइटिंग शैली :
एक अच्छा मेडिकल राइटर बनने के लिए चिकित्सा क्षेत्र का ज्ञान, शब्दावलियों की जानकारी और लेखन शैली का ज्ञान आवश्यक शर्त है। राइटिंग स्कील्स को दो भागों में विभाजित किया जाता है डोमेन नॉलेज स्किल्स और जेनेरल नॉलेज स्किल्स।

मेडिकल राइटर कैसे बने :

  • प्रोजेक्ट की सही जानकारी और लेखन उद्देश्य की पहचान ।
  • टारगेट ऑडियंस को समझते हुए एक स्तर का लेखन।
  • लेखन विषय का सम्पूर्ण ज्ञान।
  • चिंतन करने की छमता और ज्ञान और नए विचार का समावेश।
  • वैज्ञानिक सटीकता ।
  • विषय विस्तार के दौरान सावधानी।
  • स्पष्ट शब्दावली चयन।
  • कार्य में शामिल व्यक्तिओं के साध सही संचार और समनवय।
  • समय प्रबंधन का ज्ञान एवं समय सीमा के अनादर कार्य पूर्ण करने का भाव।

कैरियर विकल्प :

  • फार्मासूटिकल्स और बायोटेक्नोलॉजी कम्पनियाँ ।
  • अनुबंध आधारित कार्य ।
  • मेडिकल कम्युनिकेशन एजेंसी।
  • इसके अलावा फ्रीलांसर के तौर पर मेडिकल राइटिंग का कार्य करने वालों के लिए भी कई अवसर उपलब्ध है जिनमें मेडिकल के अलग अलग क्षेत्र में विशेषज्ञ के तौर पर लेखन कार्य शामिल है ।

मेडिकल राइटिंग पेशा अपनाने के लाभ :

  • घर से काम करने या किसी भी जगह से कार्य करने की आजादी।
  • सही और सटीक कार्य करने पर ज्यादा अवसर और कार्य।
  • आर्थिक लाभ ।
  • दूसरों को इस क्षेत्र में जोड़ने और प्रशिक्षित करने का अवसर।
  • वेबिनार के समापन पर स्टूडेंट्स के सवालों का जवाब भी डॉ. दीपिका द्वारा दिया गया। वेबिनार आयोजन में डिपार्टमेंट ऑफ़ फार्मासूटिकल्स के प्रो. हेमेंद्र और प्रो. प्रियंका का योगदान रहा। कार्यक्रम का संचालन प्रो. कोमल कृति ने किया।

ड्रिप सिंचाई खेती से पानी की बचत के साथ किसानों को सब्सिडी का लाभ और मुनाफा ज्यादा

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी रांची के डिपार्टमेंट ऑफ़ एग्रीकल्चर साइंस द्वारा किसानों को उन्नत कृषि के लाभों से अवगत कराने के लिए प्रशिक्षण, जनजागरण और किसान गोष्ठी आयोजित की जाती है। कृषि में तकनीक और लाभदायक फसलों को अपनाने के लिए प्रेरित किया जाता है। झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी ने नामकुम कैंपस में विश्व स्तरीय हाइड्रो फोनिक्स लैब स्थापित है। इसके साथ ड्रिप एरिगेशन, मल्चिंग, पोली हाउस, स्प्रिंकलर सिंचाई और अल्ट्रा डेंसिटी तकनीक से कृषि कार्य किया जाता है।

B.Sc Agri. STRIP

ड्रिप सिंचाई की जानकारी देने और उसके लाभों से अवगत करता आलेख किसानों के जनहित में जारी:

एग्रीकल्चर एक्सपर्ट का मानना है की परंपरागत खेती के तरीकों में भू गर्भ जल का 85 प्रतिशत बर्बाद हो जाता है। एक क्विंटल धान पैदा करने में ढाई लाख लीटर पानी खर्च होता है। किसान टपक सिंचाई पद्धति को अपनाकर पानी की बर्बादी रोक सकता है। टपक सिंचाई को बूंद बूंद सिंचाई या ड्रिप सिंचाई के नाम से भी जाना जाता है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में किसानों से एक सीधे संवाद में किसानों को खेती की लागत घटाकर उत्पादन बढ़ाने के टिप्स देते हुए कहा था कि सूक्ष्म सिंचाई पद्धति से खेती की लागत घटाकर उत्पादन बढ़ाते हुए फसलों में ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है। पानी की कमी से जूझते किसानों की कृषि लागत घटाने के लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत ड्रिप और स्प्रिंकलर विधि से सिंचाई को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे पानी की तो बचत होती ही है, सिंचाई का खर्च कम हो जाता है और किसान का लाभ भी बढ़ जाता है।

    ड्रिप सिंचाई में उपयोगी उपकरण :

  • मोटर पंप – पानी की आपूर्ति के लिए
  • फ़िल्टर यूनिट – पानी को छानने में उपयोगी
  • फ्रटीगेशन यूनिट – पानी में खाद मिलाने की वयवस्था
  • प्रेशर गेज – पानी के दाब को मापने का यंत्र

खेत में टपक विधि का इस्तेमाल करने के लिए पौधों की दूरी निर्धारित होना आवश्यक है। ऊपर से लगे पाइप में सुराख के जरिए पानी की बूंद बराबर पौधों पर गिरती रहती है। इसके लिए खेत में एक बड़ी टंकी लगाई जाती है, जबकि फव्वारा विधि में मोटर से पानी सप्लाई के जरिए पौधों को फुहारें दी जाती हैं। टपक विधि में प्रति हेक्टेयर 1.15 लाख रुपये लागत आती है। इसमें सरकार की ओर से 90 फीसदी तक अनुदान मिलता है।

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    टपक सिंचाई के लाभ :

  1. टपक सिंचाई में जल उपयोग दक्षता 95 प्रतिशत तक होती है जबकि पारम्परिक सिंचाई प्रणाली में जल उपयोग दक्षता लगभग 50 प्रतिशत तक ही होती है।
  2. इस सिंचाई विधि में जल के साथ-साथ उर्वरकों को अनावश्यक बर्बादी से रोका जा सकता है।
  3. टपक विधि से सिंचित फसल की तीव्र वृद्धि होती है फलस्वरूप फसल शीघ्र परिपक्व होती है।
  4. खर-पतवार नियंत्रण में अत्यन्त ही सहायक होती है क्योंकि सीमित सतह नमी के कारण खर-पतवार कम उगते हैं।
  5. टपक सिंचाई विधि अच्छी फसल विकास हेतु आदर्श मृदा नमी स्तर प्रदान करती है।
  6. इस सिंचाई विधि में कीटनाशकों एवं कवक नाशकों के धुलने की संभावना कम होती है।
  7. लवणीय जल को इस सिंचाई विधि से सिंचाई हेतु उपयोग में लाया जा सकता है।
  8. इस सिंचाई विधि में फसलों की पैदावार 150 प्रतिशत तक बढ़ जाती है।
  9. पारम्परिक सिंचाई की तुलना में टपक सिंचाई में 70 प्रतिशत तक जल की बचत की जा सकती है।
  10. इस सिंचाई विधि के माध्यम से लवणीय, बलुई एवं पहाड़ी भूमियों को भी सफलतापूर्वक खेती के काम में लाया जा सकता है।
  11. 11.

  12. टपक सिंचाई में मृदा अपरदन की संभावना नहीं के बराबर होती है, जिससे मृदा संरक्षण को बढ़ावा मिलता है।
  13. 12.

  14. ड्रिप सिंचाई खेती करने पर किसानों को सब्सिडी मिलती है। सब्सिडी दर अलग अलग राज्यों में अलग अलग है।