Industry visit to MIMEC IT Tech Park organized by the Department CS&IT of Jharkhand Rai University, Ranchi
Few glimpses of the expert talk on “Role of Finance in achieving sustainable development goals” organized by the Department of Management, Jharkhand Rai University
रिम्स रांची और झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी के संयुक्त तत्वावधान में सेमिनार ” सिस्टेमेटिक इंटरप्रिटेशन ऑफ़ एक्स रे फॉर फिजिकल थेरेपिस्ट ” का आयोजन रिम्स ऑडिटोरियम में किया गया। इस अवसर पर व्याख्यान देने के लिए डॉ. अमर सुरेश (सीनियर फिजिओथेरेपिस्ट, पं दीनदयाल उपाध्याय नेशनल इंस्टिट्यूट फॉर पर्सन विथ फिजिकल डीसब्लिटीज़) उपस्थित थे।
सेमिनार का उद्घाटन झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी के कुलसचिव डॉ. पीयूष रंजन, रिम्स के डॉ. अमर सुरेश और डॉ. के. संध्या ने दीप प्रज्वलित कर किया। सेमिनार के उद्घाटन सत्र को सम्बोधित करते हुए डॉ. अमर सुरेश ने प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि “भौतिक चिकित्सक एक्स-रे के जरिये टूटी हुई हड्डियों या ऑस्टियोपोरोसिस और गठिया की तीव्रता की समीक्षा करते हैं। आपके एक्स-रे परिणाम आपके चिकित्सक को आपके ऊतकों की वर्तमान स्थिति निर्धारित करने और आपके शरीर की बेहतर समझ विकसित करने में मदद कर सकते हैं। इसके अलावा, चिकित्सक असामान्यताओं की जांच करने के लिए रोगियों के साथ पहले नैदानिक परीक्षण करते हैं।
बैचलर इन फिजियोथेरेपी: डॉक्टर बनकर प्रैक्टिस करने का सुनहरा अवसर
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इसके उपरांत डॉ. के. संध्या ने भौतिक चिकित्सा और फिजिकल थेरेपिस्ट पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि फिजिओथेरेपी में मरीज के शरीर में किन कारणों से वह समस्या हुई है और उसके प्रभाव क्या है पहले इसका पता लगाया जाता है। इस बात का पता लगाने में एक्स रे रिपोर्ट बहुत महत्वपूर्ण है। डायग्नोस्टिक इमेजिंग डॉक्टरों की सहायता के लिए जानी जाती है, वे समस्या का निर्धारण करते हैं और अपने रोगियों के लिए उपचार प्रक्रिया का निर्णय लेते हैं।
फिजियोथेरेपी: संभावनाओं से भरी चिकित्सा पद्धति
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झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी के कुलसचिव डॉ. पियूष रंजन ने आपने सम्बोधन के दौरान रिम्स रांची के फिजिओथेरेपी विभाग और विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ़ फिजिओथेरेपी के संयुक्त प्रयास से आयोजित सेमिनार के आयोजन के लिए दोनों ही विभागों की सराहना की। उन्होंने कहा की इस प्रकार के विषयों पर सेमिनार और कार्यशाला का आयोजन छात्रों के व्यावहारिक प्रशिक्षण और ज्ञान वर्धन के लिए आवशयक शर्त है।

सेमिनार के मुख्य वक्ता डॉ.एएमआर सुरेश ने सेमिनार के प्रशिक्षण सत्र के दौरान विद्यार्थियों को विस्तार पूर्वक फिजिओथेरेपी विषय और एक्स रे रिपोर्ट की आवश्यकता और महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस क्षेत्र में होने वाले बदलावों की भी चर्चा की।
देश के करीब सौ विश्वविद्यालयों के अंडर ग्रेजुएट कोर्स में छात्रों को नए शैक्षणिक सत्र में भी दाखिला संयुक्त विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा (CUET) के जरिए मिलेगा। इनमें सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों के साथ निजी और राज्यों के विश्वविद्यालय शामिल होंगे। परीक्षा का आयोजन 21 से 31 मई तक होगा। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने एप्लीकेशन विंडो ओपन करने के साथ परीक्षा की तारीखें भी जारी कर दी है। कोई भी छात्र 12 मार्च तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेगा।
बिजनेस और स्टार्टअप को बनाना है करियर तो करें बीबीए :
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परीक्षा शहर की घोषणा 30 अप्रैल को की प्रवेश प्रक्रिया जुलाई तक पूरी कर ली जाएगी। एक अगस्त से नया शैक्षणिक सत्र शुरू होगा।उम्मीदवारों की संख्या और विषय विकल्पों के आधार पर परीक्षा कई दिनों में तीन पालियों में आयोजित की जाएगी।
यूजीसी चेयरमैन एम जगदीश कुमार ने सीयूइटी (UG) 2023 पर दिए गए अपने ट्वीट संदेश में कहा है ” पिछली बार की खामियों को पहचान उस स्तर पर जरूर काम किया गया है, ताकि छात्रों के बीच किसी तरह की अफरा-तफरी की स्थिति पैदा न हो। इसके तहत परीक्षा की अवधि को छोटा किया गया है, जो 21 मई से 31 मई के बीच आयोजित होगी। “
बीएससी एग्रीकल्चर के बाद नौकरी और रोजगार के अवसर
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सीयूइटी (यूजी) -2023 परीक्षा 13 भाषाओं में होगी। सीयूईटी के लिए एक हजार से अधिक टेस्ट सेंटर बनाए जाएंगे। सीयूइटी 2023 का सिलेबस 12वीं एनसीईआरटी पाठ्यक्रम के अनुरूप होगा। परीक्षा का पैटर्न भी पुरानी ही होगा। जिसमें कुल तीन खंड होंगे। पहला खंड दो हिस्सों में होगा, इसके पहले हिस्से में छात्रों को 13 भारतीय भाषाओं में से किसी एक भाषा का टेस्ट देना होगा, जबकि दूसरे खंड में छात्रों को 20 अन्य भाषाओं के विकल्प मिलेंगे। वह उनमें से भी किसी भाषा को चुन सकते है। जबकि दूसरा खंड में 27 विषयों का ग्रुप होगा। वहीं तीसरे खंड में जनरल टेस्ट होगा। इस दौरान छात्र इन तीनों खंडों में से अधिकतम दस विषयों को चुन सकेगा। यूजीसी ने छात्रों को किसी तरह की दिक्कत से बचाने के लिए सीयूईटी यूजी-2023 के लिए फोन नंबर और ई-मेल भी जारी किया है।
हमारे देश मे वकील बनने के लिए एलएलएम कोर्स सबसे ज्यादा पॉपुलर है। इस कोर्स को करने के बाद एडवोकेट बनने की राह आसान हो जाती है। यह इंटरनेशनल करियर के साथ हाई सैलरी की नौकरी दिलाने में सहायक है। एलएलएम का फुलफॉर्म मास्टर ऑफ़ लेजिस्लेटिव लॉ होता है। यह स्नातकोत्तर डिग्री कोर्स है। मास्टर्स ऑफ लॉ दो वर्षीय पाठ्यक्रम है। मास्टर्स की यह डिग्री आपको कई सारे क्षेत्रों में विशेषज्ञता देने का काम करती है। इसके साथ विशेष फील्ड में इंसेंटिव रिसर्च के जरिए विस्तृत जानकारी देने में मदद भी करता है।
LLM की डिग्री क्यों है जरूरी?
लॉ कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद आप प्रोग्रेसिव करियर बनाने के बारे में सोच रहे हैं, तो ये डिग्री आपके लिए बेहतर शुरुआत बन सकती है, क्योंकि एलएलएम कई सारे क्षेत्रों में स्पेशलाइजेशन प्रदान करती है, जैसे अंतरराष्ट्रीय कानून, कॉर्पोरेट कानून, श्रम कानून, मानवाधिकार के साथ और भी बहुत कुछ। एलएलएम की डिग्री पूरा करने के बाद आपके पास नौकरी के लिए कई सारे बेहतरीन अवसर होंगे। जो आपको बेहतरीन सैलरी हाईक भी देंगे, जोकि साधारण लॉ की बैचलर डिग्री से कहीं ज्यादा होगी।
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LLM कोर्स करने के लिए योग्यता:
LLM कोर्स की फीस क्या है?
जो भी छात्र मास्टर ऑफ लॉ का कोर्स करना चाहते हैं, उनके मन में सबसे पहला प्रश्न यही होता है कि इस कोर्स की फी क्या होगी तो में आपको बता दें कि हर एक कॉलेज में फीस अलग – अलग हो सकती है। यहाँ आपके लिए झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी, रांची www.jru.edu.in में संचालित 2 वर्षीय एलएलएम कोर्स के फी से सम्बंधित जानकारी दी जा रही है जो 30 हजार रूपए प्रति सेमेस्टर है। अनुभवी शिक्षक और मूट कोर्ट की सुविधा के साथ विधि विषय की हजारों किताबें भी विश्वविद्यालय के पुस्तकालय में उपलब्ध हैं।
LLM करने के फायदे:
LLM के बाद जॉब:
पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर दोनों क्षेत्रों में रोजगार के अवसर हैं। अधिकांश पोस्ट पोस्ट ग्रेजुएट वकील के तौर पर प्रैक्टिस करना पसंद करते हैं। केंद्र / राज्य सरकार की नौकरियां भी वकीलों के लिए खुली है। इसके अलावा विभिन्न न्यायालयों में सहायक लोक अभियोजक, लोक अभियोजक के रूप में अपनी सेवाएं दे सकते है।

ACADEMIC YEAR 2022-2023
ACADEMIC YEAR 2021-2022
ACADEMIC YEAR 2020-2021
ACADEMIC YEAR 2019-2020
ACADEMIC YEAR 2018-2019
ACADEMIC YEAR 2017-2018
भारत की माइनिंग इंडस्ट्री 7 लाख से अधिक लोगों को रोज़गार मुहैया करवाती है । देश के जीडीपी में माइनिंग इंडस्ट्री का कुल योगदान लगभग 2.5 फीसदी है । अगर आप भी माइनिंग इंजीनियर बनने का सपना रखते है तो यह एक बेहतरीन कोर्स है। डिप्लोमा कोर्स(डिप्लोमा इन माइनिंग इंजीनियरिंग) 3 वर्षीय पाठ्यक्रम है। प्राइमरी लेवल इंट्री के लिए बेस्ट ऑप्शन है । इसे करने के बाद माइनिंग ओवरमैन, माइनिंग सरदार जैसे पद पर कार्य कर सकते है।
डिप्लोमा इन माइनिंग इंजीनियरिंग :
माइनिंग इंजीनियरिंग करने वाले विद्यार्थियों की पहली पसंद डिप्लोमा माइनिंग इंजीनियरिंग है। तीन साल के इस कोर्स में दो बार वोकेशनल ट्रेनिंग होती है। डिप्लोमा कोर्स और ट्रेनिंग को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद माइनिंग सेक्टर के एंट्री लेवल पर निकलने वाले आवेदन आप भरने की अर्हता रखते है।
डिप्लोमा माइनिंग इंजीनियरिंग से जुडी जानकारी
बीटेक माइनिंग इंजीनियरिंग:
बीटेक माइनिंग इंजीनियरिंग 4 वर्षीय पाठ्यक्रम है जिसे पूरा करने के बाद आप जूनियर इंजीनियर के तौर पर माइनिंग इंडस्ट्री ज्वाइन कर सकते है और मेहनत और लगन के साथ काम करते हुए कुछ ही वर्षों में उच्चतम वेतनमान प्राप्त कर सकते है।
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PDPT ट्रेनिंग: पीडीपीटी का पूरा नाम पोस्ट डिप्लोमा प्रैक्टिकल ट्रेनिंग है। डिप्लोमा कोर्स करने के बाद विद्यार्थियों को 1 साल का अंडरग्राउंड ट्रेनिंग करना पड़ता है, इसी प्रशिक्षण को पीडीपीटी ट्रेनिंग कहा जाता है। इस प्रशिक्षण के दौरान ट्रेनिंग में शामिल विद्यार्थियों को छात्रवृति भी मिलती है।
पीडीपीटी ट्रेनिंग का संचालन बोर्ड ऑफ़ प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (BOPT) करता है। डिप्लोमा माइनिंग इंजीनियरिंग करने वाले विद्यार्थियों को पीडीपीटी ट्रेनिंग के अलावा गैस टेस्टिंग, लैम्प हैंडलिंग और फर्स्ट ऐड सर्टिफिकेट की परीक्षा भी पास करनी होती है। इन सभी कार्यों का संचालन अधिकार डायरेक्टर जनरल ऑफ़ माइंस सेफ्टी (DGMS) के द्वारा किया जाता है। इसका मुख्यालय धनबाद (झारखंड) में है और इसका नेतृत्व खान सुरक्षा महानिदेशक करते हैं।
इन सभी सर्टिफिकेट को प्राप्त करने के बाद डिप्लोमा सर्टिफिकेट के साथ इसे डीजीएमएस धनबाद के कार्यालय में जमा करना होता है। आवेदन और प्रमाणपत्र जमा करने के बाद ओवरमैन का सर्टिफिकेट प्राप्त होता है। इसे प्राप्त करने के बाद आप पूरी तरह से ओवरमैन कहलाने लगते है और जूनियर ओवरमैन, माइनिंग सरदार के पद पर नौकरी के लिए आवेदन कर सकते है। प्रति वर्ष कोल् इंडिया की आनुषंगिक इकाइयां CCL, BCCL, ECL, NCL, WCL, MCL ओवरमैन पदों नियुक्ति प्रकाशित करता है।
झारखंड एकेडेमिक काउंसिल (JAC) द्वारा ली जानेवाली मैट्रिक, इंटर की परीक्षा-2023 मार्च में होगी। होली के बाद तीसरे सप्ताह में परीक्षा शुरू हो सकती है, जबकि प्रायोगिक (प्रैक्टिकल) परीक्षा 20 फरवरी के बाद शुरू हो सकती है। प्रैक्टिकल के साथ आंतरिक मूल्यांकन की प्रक्रिया भी फरवरी में पूरी कर ली जायेगी। दोनों परीक्षा एक टर्म में होगी। परीक्षा का प्रोग्राम जनवरी में जारी किया जायेगा। मैट्रिक, इंटर की कॉपियों का मूल्यांकन अप्रैल में शुरू होगा, जबकि मई के अंतिम सप्ताह से 10 जून के बीच रिजल्ट जारी होने की संभावना है। JAC द्वारा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी गयी है। परीक्षा केंद्र निर्धारण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। जिला स्तर से परीक्षा केंद्र निर्धारण की प्रक्रिया पूरी कर रिपोर्ट जैक को भेज दी गयी है।
मैट्रिक, इंटर परीक्षा 2023 :जल्द जारी होगा मॉडल सेट प्रश्नपत्र :
मैट्रिक, इंटर परीक्षा 2023 का मॉडल सेट प्रश्नपत्र तैयार कर लिया गया है। जैक की वेबसाइट पर मॉडल सेट प्रश्नपत्र इस सप्ताह जारी कर देने की उम्मीद है। मैट्रिक इंटर की परीक्षा एक टर्म में ली जायेगी। परीक्षा ओएमआर शीट व उत्तरपुस्तिका दोनों पर होगी। परीक्षा में 40 अंक के प्रश्न बहुवैकल्पिक होंगे जबकि 40 अंक के अति लघु उत्तरीय, लघु उत्तरीय, दीर्घ उत्तरीय सभी प्रकार के प्रश्न पूछे जायेंगे।
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मैट्रिक, इंटर परीक्षा 2023: विलंब शुल्क के साथ 10 दिसंबर तक जमा होंगे फॉर्म :
30 नवंबर तक बिना विलंब शुल्क के परीक्षा फॉर्म जमा कर सकेंगे। जिला शिक्षा पदाधिकारी छह दिसंबर तक परीक्षा फॉर्म को सत्यापित कर सकेंगे। विलंब शुल्क के साथ फॉर्म एक से 10 दिसंबर तक जमा होगा।
जिला शिक्षा पदाधिकारी 12 दिसंबर तक फॉर्म सत्यापित कर सकेंगे। मैट्रिक और इंटरमीडिएट की परीक्षा मार्च में होगी।
CBSE (सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन) जल्द ही 10वीं और 12वीं के थ्योरी एग्जाम के लिए डेटशीट जारी कर देगा। डेटशीट जारी होने के बाद छात्र सीबीएसई के ऑफिशियल वेबसाइट पर विजिट कर डाउनलोड कर पाएंगे। आपको जानकारी दें कि कक्षा 10 और कक्षा 12 के फाइनल थ्योरी परीक्षा फरवरी माह के मध्य से शुरू होगी। बोर्ड ने यह कंफर्म कर दिया है कि प्रैक्टिकल परीक्षा 1 जनवरी 2023 से शुरू हो जाएगी।
12 वीं के बाद करें बीबीए: स्मार्ट बिजनेस और एंटरप्रेन्योर स्किल के साथ जॉब की गारंटी :
महत्वपूर्ण तारीख :
1- CBSE कक्षा 10,12 प्रैक्टिकल परीक्षा 2023- 1 जनवरी 2023
2- CBSE कक्षा 10,12 थ्योरी परीक्षा 2023- 15 फरवरी 2023
ऐसे करें डेटशीट डाउनलोड :
स्टेप 1- डेटशीट डाउनलोड करने के लिए सबसे पहले सीबीएसई की ऑफिशियल
वेबसाइट पर जाएं।
स्टेप 2- दूसरे चरण में वेबसाइट के होम पेज पर उपलब्ध सीबीएसई डेट शीट
क्लास 10,12 के लिंक पर क्लिक करें।
स्टेप 3– लिंक पर क्लिक करने के बाद स्क्रीन पर एक नई पीडीएफ फाइल खुलेगी
जहां उम्मीदवार परीक्षा तिथियों की जांच कर सकते हैं।
स्टेप 4– अंत में इसे डाउनलोड कर रख लें और भविष्य के इस्तेमाल के लिए एक
प्रिंट आउट भी रख लें।