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JSSC: झारखंड में 11 हजार पदों पर होगी नियुक्ति

प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर । राज्य में 12 नियुक्ति परीक्षाओं के लिए झारखंड सरकार जल्द झारखंड कर्मचारी चयन आयोग को अधियाचना भेजने वाली है। कार्मिक विभाग ने संशोधित नियमावली तैयार कर ली है, जिसे जल्द ही जारी किया जायेगा। इसके बाद राज्य के अलग-अलग विभागों में 11 हजार पदों पर नियुक्तियों का मार्ग प्रशस्त हो जायेगा।

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राज्य सरकार द्वारा JSSC स्नातक स्तरीय परीक्षा संचालन नियमावली में बदलाव के बाद विभागीय स्तर पर बनायी गयी नियमावली से झारखंड से मैट्रिक-इंटर की परीक्षा पास होने की अनिवार्यता समाप्त कर दी गयी है और अब जिस विभाग से जुड़ी नियुक्ति को हाईकोर्ट के आदेश के बाद रद्द कर दिया गया था, उसके लिए फिर से अधियाचना भेजी जायेगी। इन परीक्षाओं में शामिल होने के लिए जिन कैंडिडेट ने पूर्व में आवेदन जमा किया था, उन्हें फिर से परीक्षा शुल्क जमा नहीं करना होगा. इस को लेकर दिशा-निर्देश जारी किया जायेगा।

MBA के बाद सरकारी क्षेत्र की नियुक्तियों में मिलेगा अवसर:

https://www.jru.edu.in/programs/faculty-of-commerce-management/mba/

शिक्षा विभाग द्वारा प्लस टू विद्यालय में 3120 व 690 प्रयोगशाला सहायक की नियुक्ति, एवं प्राथमिक व मध्य विद्यालय में सहायक आचार्य के 50 हजार पद सृजित किये गये हैं तथा इन पदों पर दो चरण में नियुक्ति करने की तैयारी है। इसके अलावा झारखंड नगरपालिका सेवा संवर्ग प्रतियोगिता परीक्षा के जरिये 914 पद,तकनीकी/विशिष्ट योग्यताधारी स्नातक स्तरीय संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा से 594 पद,झारखंड इंटरमीडिएट स्तर संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा से 991 पद, झारखंड सचिवालय आशुलिपिक सेवा संवर्ग प्रतियोगिता परीक्षा से 452 पद,झारखंड मैट्रिक स्तरीय संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा से 455 पद,झारखंड औद्योगिक प्रशिक्षण अधिकारी प्रतियोगिता परीक्षा से 737 पद, झारखंड डिप्लोमा स्तर संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा से 176 पद, झारखंड सामान्य स्नातक योग्यताधारी संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा से 956 पद

झारखंड नगरपालिका सेवा संवर्ग परीक्षा में कृषि स्नातकों को मिलेगा मौका:

https://www.jru.edu.in/programs/department-of-agriculture-2/b-sc-hons-agriculture/

झारखंड डिप्लोमा स्तरीय संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के द्वारा 1285 पद,झारखंड उत्पाद सिपाही प्रतियोगिता परीक्षा से 583 पद,झारखंड नगरपालिका सेवा संवर्ग प्रतियोगिता परीक्षा से 914 पद, तकनीकी/विशिष्ट योग्यताधारी स्नातक स्तरीय संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा से 594 पद, झारखंड इंटरमीडिएट स्तर संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा से 991 पद, झारखंड सचिवालय आशुलिपिक सेवा संवर्ग प्रतियोगिता परीक्षा से 452 पदों पर नियुक्ति करने का निर्णय लिया गया है। जिन अभ्यर्थियों का आवेदन जमा हैं, उनसे नहीं शुल्क नहीं लिया जायेगा।इस संबंध में उचित दिशा-निर्देश जारी किया जायेगा।

Systematic Interpretation of X Ray for Physical Therapist

रिम्स रांची और झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी के संयुक्त तत्वावधान में सेमिनार का आयोजन

रिम्स रांची और झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी के संयुक्त तत्वावधान में सेमिनार ” सिस्टेमेटिक इंटरप्रिटेशन ऑफ़ एक्स रे फॉर फिजिकल थेरेपिस्ट ” का आयोजन रिम्स ऑडिटोरियम में किया गया। इस अवसर पर व्याख्यान देने के लिए डॉ. अमर सुरेश (सीनियर फिजिओथेरेपिस्ट, पं दीनदयाल उपाध्याय नेशनल इंस्टिट्यूट फॉर पर्सन विथ फिजिकल डीसब्लिटीज़) उपस्थित थे।

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सेमिनार का उद्घाटन झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी के कुलसचिव डॉ. पीयूष रंजन, रिम्स के डॉ. अमर सुरेश और डॉ. के. संध्या ने दीप प्रज्वलित कर किया। सेमिनार के उद्घाटन सत्र को सम्बोधित करते हुए डॉ. अमर सुरेश ने प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि “भौतिक चिकित्सक एक्स-रे के जरिये टूटी हुई हड्डियों या ऑस्टियोपोरोसिस और गठिया की तीव्रता की समीक्षा करते हैं। आपके एक्स-रे परिणाम आपके चिकित्सक को आपके ऊतकों की वर्तमान स्थिति निर्धारित करने और आपके शरीर की बेहतर समझ विकसित करने में मदद कर सकते हैं। इसके अलावा, चिकित्सक असामान्यताओं की जांच करने के लिए रोगियों के साथ पहले नैदानिक परीक्षण करते हैं।

बैचलर इन फिजियोथेरेपी: डॉक्टर बनकर प्रैक्टिस करने का सुनहरा अवसर
https://www.jru.edu.in/blog-post/bpt-essential-marker-of-the-quality-of-healthcare-service/

इसके उपरांत डॉ. के. संध्या ने भौतिक चिकित्सा और फिजिकल थेरेपिस्ट पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि फिजिओथेरेपी में मरीज के शरीर में किन कारणों से वह समस्या हुई है और उसके प्रभाव क्या है पहले इसका पता लगाया जाता है। इस बात का पता लगाने में एक्स रे रिपोर्ट बहुत महत्वपूर्ण है। डायग्नोस्टिक इमेजिंग डॉक्टरों की सहायता के लिए जानी जाती है, वे समस्या का निर्धारण करते हैं और अपने रोगियों के लिए उपचार प्रक्रिया का निर्णय लेते हैं।

फिजियोथेरेपी: संभावनाओं से भरी चिकित्सा पद्धति
https://www.jru.edu.in/physiotherapy-lab/

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी के कुलसचिव डॉ. पियूष रंजन ने आपने सम्बोधन के दौरान रिम्स रांची के फिजिओथेरेपी विभाग और विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ़ फिजिओथेरेपी के संयुक्त प्रयास से आयोजित सेमिनार के आयोजन के लिए दोनों ही विभागों की सराहना की। उन्होंने कहा की इस प्रकार के विषयों पर सेमिनार और कार्यशाला का आयोजन छात्रों के व्यावहारिक प्रशिक्षण और ज्ञान वर्धन के लिए आवशयक शर्त है।

सेमिनार के मुख्य वक्ता डॉ.एएमआर सुरेश ने सेमिनार के प्रशिक्षण सत्र के दौरान विद्यार्थियों को विस्तार पूर्वक फिजिओथेरेपी विषय और एक्स रे रिपोर्ट की आवश्यकता और महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस क्षेत्र में होने वाले बदलावों की भी चर्चा की।

CUET-2023-Exam

सीयूइटी (यूजी) -2023: परीक्षा का आयोजन 21 से 31 मई तक

देश के करीब सौ विश्वविद्यालयों के अंडर ग्रेजुएट कोर्स में छात्रों को नए शैक्षणिक सत्र में भी दाखिला संयुक्त विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा (CUET) के जरिए मिलेगा। इनमें सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों के साथ निजी और राज्यों के विश्वविद्यालय शामिल होंगे। परीक्षा का आयोजन 21 से 31 मई तक होगा। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने एप्लीकेशन विंडो ओपन करने के साथ परीक्षा की तारीखें भी जारी कर दी है। कोई भी छात्र 12 मार्च तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेगा।

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बिजनेस और स्टार्टअप को बनाना है करियर तो करें बीबीए :
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परीक्षा शहर की घोषणा 30 अप्रैल को की प्रवेश प्रक्रिया जुलाई तक पूरी कर ली जाएगी। एक अगस्त से नया शैक्षणिक सत्र शुरू होगा।उम्मीदवारों की संख्या और विषय विकल्पों के आधार पर परीक्षा कई दिनों में तीन पालियों में आयोजित की जाएगी।

यूजीसी चेयरमैन एम जगदीश कुमार ने सीयूइटी (UG) 2023 पर दिए गए अपने ट्वीट संदेश में कहा है ” पिछली बार की खामियों को पहचान उस स्तर पर जरूर काम किया गया है, ताकि छात्रों के बीच किसी तरह की अफरा-तफरी की स्थिति पैदा न हो। इसके तहत परीक्षा की अवधि को छोटा किया गया है, जो 21 मई से 31 मई के बीच आयोजित होगी। “

बीएससी एग्रीकल्चर के बाद नौकरी और रोजगार के अवसर
https://www.jru.edu.in/blog-post/jobs-b-sc-agriculture/

सीयूइटी (यूजी) -2023 परीक्षा 13 भाषाओं में होगी। सीयूईटी के लिए एक हजार से अधिक टेस्ट सेंटर बनाए जाएंगे। सीयूइटी 2023 का सिलेबस 12वीं एनसीईआरटी पाठ्यक्रम के अनुरूप होगा। परीक्षा का पैटर्न भी पुरानी ही होगा। जिसमें कुल तीन खंड होंगे। पहला खंड दो हिस्सों में होगा, इसके पहले हिस्से में छात्रों को 13 भारतीय भाषाओं में से किसी एक भाषा का टेस्ट देना होगा, जबकि दूसरे खंड में छात्रों को 20 अन्य भाषाओं के विकल्प मिलेंगे। वह उनमें से भी किसी भाषा को चुन सकते है। जबकि दूसरा खंड में 27 विषयों का ग्रुप होगा। वहीं तीसरे खंड में जनरल टेस्ट होगा। इस दौरान छात्र इन तीनों खंडों में से अधिकतम दस विषयों को चुन सकेगा। यूजीसी ने छात्रों को किसी तरह की दिक्कत से बचाने के लिए सीयूईटी यूजी-2023 के लिए फोन नंबर और ई-मेल भी जारी किया है।

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LLB के बाद LLM करना क्यों जरूरी है?

हमारे देश मे वकील बनने के लिए एलएलएम कोर्स सबसे ज्यादा पॉपुलर है। इस कोर्स को करने के बाद एडवोकेट बनने की राह आसान हो जाती है। यह इंटरनेशनल करियर के साथ हाई सैलरी की नौकरी दिलाने में सहायक है। एलएलएम का फुलफॉर्म मास्टर ऑफ़ लेजिस्लेटिव लॉ होता है। यह स्नातकोत्तर डिग्री कोर्स है। मास्टर्स ऑफ लॉ दो वर्षीय पाठ्यक्रम है। मास्टर्स की यह डिग्री आपको कई सारे क्षेत्रों में विशेषज्ञता देने का काम करती है। इसके साथ विशेष फील्ड में इंसेंटिव रिसर्च के जरिए विस्तृत जानकारी देने में मदद भी करता है।

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LLM की डिग्री क्यों है जरूरी?

लॉ कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद आप प्रोग्रेसिव करियर बनाने के बारे में सोच रहे हैं, तो ये डिग्री आपके लिए बेहतर शुरुआत बन सकती है, क्योंकि एलएलएम कई सारे क्षेत्रों में स्पेशलाइजेशन प्रदान करती है, जैसे अंतरराष्ट्रीय कानून, कॉर्पोरेट कानून, श्रम कानून, मानवाधिकार के साथ और भी बहुत कुछ। एलएलएम की डिग्री पूरा करने के बाद आपके पास नौकरी के लिए कई सारे बेहतरीन अवसर होंगे। जो आपको बेहतरीन सैलरी हाईक भी देंगे, जोकि साधारण लॉ की बैचलर डिग्री से कहीं ज्यादा होगी।

LLM कोर्स के बाद मिलने वाली जॉब प्रोफाइल्स – Click Here

LLM कोर्स करने के लिए योग्यता:

  • सबसे पहले 12वीं पास होना अनिवार्य है।
  • इसके उपरांत ग्रेजुएशन करने के बाद 3 साल का एलएलबी का कोर्स करना होगा।
  • अगर आप ग्रेजुएशन नहीं करना चाहते हैं तो आप 12th के बाद तुरंत इंटीग्रेटेड एलएलबी कोर्स कर सकते हैं जो कि 5 साल का होता है।
  • इंटीग्रेटेड एलएलबी अथवा एलएलबी में आपको कम से कम 50% मार्क्स से उत्तीर्ण होना अनिवार्य है।

LLM कोर्स की फीस क्या है?

Click to know LLM Fee Structure 2024

जो भी छात्र मास्टर ऑफ लॉ का कोर्स करना चाहते हैं, उनके मन में सबसे पहला प्रश्न यही होता है कि इस कोर्स की फी क्या होगी तो में आपको बता दें कि हर एक कॉलेज में फीस अलग – अलग हो सकती है। यहाँ आपके लिए झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी, रांची www.jru.edu.in में संचालित 2 वर्षीय एलएलएम कोर्स के फी से सम्बंधित जानकारी दी जा रही है जो 30 हजार रूपए प्रति सेमेस्टर है। अनुभवी शिक्षक और मूट कोर्ट की सुविधा के साथ विधि विषय की हजारों किताबें भी विश्वविद्यालय के पुस्तकालय में उपलब्ध हैं।

LLM करने के फायदे:

  • LLM करने के बाद विधि नियमों की समाज बढ़ती है और लॉ से जुड़े विविध विषयों में एक्सपर्ट हो जाते है।
  • LLM करने के बाद आप पोस्ट ग्रेजुएट कहलाते है।
  • LLM की डिग्री कानून के एक विशेष क्षेत्र में अनुसंधान के माध्यम से विशेष ज्ञान लेने में सक्षम बनाती है।
  • LLM की डिग्री लेने के बाद आपकी प्रैक्टिकल नॉलेज बहुत ज्यादा हो जाता है।
  • LLM करने के बाद आप प्रैक्टिस करने के अलावा विशेष कानूनी सलाहकार के तौर पर अपनी सेवाएं दे सकते हैं।

LLM के बाद जॉब:

पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर दोनों क्षेत्रों में रोजगार के अवसर हैं। अधिकांश पोस्ट पोस्ट ग्रेजुएट वकील के तौर पर प्रैक्टिस करना पसंद करते हैं। केंद्र / राज्य सरकार की नौकरियां भी वकीलों के लिए खुली है। इसके अलावा विभिन्न न्यायालयों में सहायक लोक अभियोजक, लोक अभियोजक के रूप में अपनी सेवाएं दे सकते है।

10 reasons to pursue a career in Law at JRU Ranchi – 

  • Law course at JRU Ranchi is approved by Bar Council of India
  • We undertake one to one Mentorship Program
  • We emphasize on Case Law Technique
  • 20+ weeks of Legal Internship
  • Students will get access to 24×7 Digital Library
  • Language Lab facility for students
  • Learning beyond Classroom is our hallmark
  • Moot Court Competition to simulate court room.
  • Legal Aid Clinic

 

पीसीआई का निर्देश: फार्मासिस्ट बनने के लिए एग्जिट एग्जाम पास करना जरुरी

डिप्लोमा इन फार्मेसी उत्तीर्ण विद्यार्थियों को अब फार्मासिस्ट बनने के लिए एग्जिट एग्जाम पास करना जरुरी होगा। इस परीक्षा को पास करने के बाद ही उनका रजिस्ट्रेशन झारखण्ड फार्मेसी कौंसिल में हो पायेगा। फार्मेसी कौंसिल ऑफ़ इंडिया ने सभी राज्यों के फार्मेसी कौंसिल / रजिस्ट्रेशन ट्रिब्यूनल को इससे सम्बंधित दिशा निर्देश जारी कर दिया है।

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फार्मेसी कौंसिल ऑफ़ इंडिया के रजिस्ट्रार सह सचिव अनिल मित्तल के कार्यालय से जारी सर्कुलर में कहा गया है कि पीसीआई ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की मंजूरी के बाद डिप्लोमा इन फार्मेसी एग्जिट एग्जामिनेशन रेगुलेशन 2022 को अधिसूचित कर दिया है। पीसीआई की कार्यकारिणी की बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि सत्र 2022- 23 से डिप्लोमा इन फार्मेसी के विद्यार्थियों के लिए एग्जिट एग्जामिनेशन को लागु किया जायेगा।

फार्मासिस्ट बनने के लिए करें डी. फार्म :
https://www.jru.edu.in/programs/department-of-pharmacy/diploma-in-pharmacy/

एग्जिट एग्जामिनेशन अभी डिप्लोमा इन फार्मेसी करने वाले विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य किया गया है। बी. फार्म करने वाले विद्यार्थियों के लिए इस परीक्षा को अनिवार्य नहीं बनाया गया है।

Click for Fee Structure

क्या है एग्जिट परीक्षा:

फार्मेसी कौंसिल ऑफ़ इंडिया ने डिप्लोमा फार्मेसी करने वाले विद्यार्थियों को फार्मासिस्ट बनने से पहले एक परीक्षा पास करने की अनिवार्यता लागु की है। इसे लिए कौंसिल ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की मंजूरी के बाद डिप्लोमा इन फार्मेसी एग्जिट एग्जामिनेशन रेगुलेशन 2022 को लागु किया है। इसके अनुसार सत्र 2022- 23 से डिप्लोमा इन फार्मेसी करने वाले विद्यार्थियों को पहले एग्जिट एग्जामिनेशन पास करना होगा फिर फार्मासिस्ट के लिए राज्य के सम्बंधित कौंसिल में निबंधन होगा।

फार्मेसी की पढ़ाई में प्रयोगशाला का महत्त्व:
https://www.jru.edu.in/pharmacy-lab/

परीक्षा का पैटर्न:

यह परीक्षा तीन घंटों की होगी जिसकी भाषा अंग्रेजी होगी। परीक्षा में तीन प्रश्न पत्र होंगे। हर प्रश्न पत्र में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक लाने वाले उत्तीर्ण घोषित किये जायेंगे। सफल अभ्यर्थी को पात्रता का प्रमाण पत्र जारी किया जायेगा। इसके बाद वह फार्मासिस्ट के रूप में अपना निबंधन करा सकेंगे।

सीबीएसई बोर्ड परीक्षा: 10 वीं और 12 वीं का एडमिट कार्ड हुआ जारी

15 फ़रवरी से प्रारम्भ होने वाली सीबीएसई की 10 वीं और 12 वीं की बोर्ड परीक्षा का एडमिट कार्ड जारी कर दिया गया है। बोर्ड ने परीक्षा से सम्बंधित गाईडलाईन भी जारी किया है। गाईडलाईन के अनुसार छात्रों को समय का खास कयास रखने को कहा गया है। छात्रों को 10 बजे के बाद परीक्षा केंद्र में प्रवेश की अनुमति नहीं मिलेगी। बोर्ड ने विद्यालयों को सीबीएसई की ऑफिशियल वेबसाइट से ये एडमिट कार्ड डाउनलोड करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा विद्यार्थियों को बोर्ड द्वारा जारी किये गए निर्देशों की जानकारी से भी अवगत करने को कहा है।

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सीबीएसई की अधिसूचना में कहा गया है कि इस वर्ष एडमिट कार्ड पर विद्यार्थी के नाम के अलावा उसमें रोल नंबर, जन्म तिथि, परीक्षा का नाम, परीक्षार्थी के माता पिता का नाम, परीक्षा केंद्र, दिव्यांग कैटेगरी, एडमिट कार्ड आईडी और परीक्षा के विषय भी शामिल रहेंगे। एग्जामिनेशन हॉल में 10.15 बजे प्रश्नपत्र दिया जायेगा। 15 मिनट प्रश्नपत्र पढ़ने के लिए मिलेगा। परीक्षा का आयोजन 10.30 से 1.30 तक आयोजित होगी।

12 वीं के बाद कॉर्पोरेट सेक्टर में बीबीए बनाएं करियर:
https://www.jru.edu.in/programs/faculty-of-commerce-management/bba/

विद्यार्थियों को परीक्षा केंद्र पर यूनिफॉर्म के साथ अपना विद्यालय आईडी कार्ड भी साथ लाना होगा। बोर्ड की गाइडलाइन में परीक्षार्थी को परीक्षा से पूर्व एक बार परीक्षा केंद्र की पहचान करने और मौसम और ट्रैफिक इत्यादि कारणों की पहचान करने को भी कहा गया है जिससे उन्हें परीक्षा के दिन कोई परेशानी नहीं हो।

कानून के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए बीए एलएलबी कोर्स चुनें:
https://www.jru.edu.in/programs/department-of-law/ba-llb/

परीक्षा केंद्र पर कोई भी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स ले जाने की मनाही है। परीक्षार्थी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रही फर्जी ख़बरों पर भी ध्यान न दें।

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झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी के आईआईसी सेल को मिला 3.5 स्टार रैंकिंग

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूशन इनोवेशन कौंसिल को वर्ष भर शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार के निर्देशों के अनुसार कार्यक्रम आयोजित करने, नवाचार और उद्यम (स्टार्टअप) आधारित कार्यों से जुड़ी गतिविधियों को करने के लिए वर्ष 2021-22 के लिए 3.5 स्टार रैंकिंग प्रदान की गयी है।आईआईसी सेल ने स्टार रैंकिंग के साथ 79.88 का स्कोर प्राप्त किया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय का इनोवेशन सेल देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में एआईसिटीइ के माध्यम से नवाचार और स्टार्टअप की संस्कृति को व्यवस्थित रूप से बढ़ावा देने के लिए इनोवेशन कौंसिल को स्थापित किया है। कौंसिल की मुख्य भूमिका बड़ी संख्या में संकाय सदस्य, छात्रों और कर्मचारियों को नवाचार और उद्यमिता से संबंधित गतिविधियों में संलग्न करना है। यह कार्यक्रम उच्च शिक्षण संस्थानों में मौजूदा चुनौतियों/मुद्दों सामयिक और अनियोजित नवाचार को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है।

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी आईआईसी के बारे में जानकारी के लिए क्लिक करें:
https://www.jru.edu.in/iic/

झारखंड राय विश्वविद्यालय, रांची में स्थापित नवाचार परिषद ,इंस्टीट्यूशन इनोवेशन कौंसिल (IIC) विद्यार्थियों को नए विचारों के साथ काम करने और इन विचारों को प्रोटोटाइप में बदलने के लिए प्रोत्साहित करने, प्रेरित करने और विचारों को पोषण करने में सहायता करता है।

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी आईआईसी सेल को सोशल मीडिया पर फॉलो करें:
https://www.facebook.com/JRU-Innovation-Cell-112831420185862

आईआईसी स्थापना का मुख्य उद्देश्य:

  • एक जीवंत स्थानीय नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र बनाना।
  • उच्च संस्थानों में स्टार्ट-अप सपोर्टिंग मैकेनिज्म स्थापित करना।
  • नवाचार उपलब्धियों के साथ संस्थान अटल रैंकिंग के लिए खुद को तैयार करें।
  • विचारों की खोज और नए विचारों के स्थापना के लिए कार्य पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित
    करना।
  • छात्रों में बेहतर संज्ञानात्मक क्षमता का विकास करना।

आईआईसी सेल के मुख्य कार्य:

  • केंद्र द्वारा निर्धारित विभिन्न नवाचारों, आईपीआर और उद्यमिता संबंधित गतिविधियों को
    समय से संचालित करना।
  • नवाचारों की पहचान और उन्हें पुरस्कृत करते हुए सफलता की कहानियों को साझा करना ।
  • उद्यमियों, निवेशकों, पेशेवरों के साथ समय-समय पर कार्यशालाओं/सेमिनार/बातचीत का
    आयोजन करना। नवप्रवर्तन के लिए कार्य कर रहे छात्रों के लिए एक सलाहकार पूल बनाना ।
  • साथी उच्च शिक्षण संस्थानों और राष्ट्रीय उद्यमिता विकास संगठनों के साथ नेटवर्क निर्माण
    करना ।
  • विभिन्न संस्थान द्वारा किए गए अभिनव परियोजनाओं को उजागर करने के लिए संस्थान
    का नवाचार पोर्टल स्थापित करना।
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झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी: विभिन्न संकायों के 7 शिक्षकों ने प्राप्त किया पेटेंट

बौद्धिक संपदा (आईपी) दिमाग की रचनाओं से संबंधित है, जैसे आविष्कार, साहित्यिक और कलात्मक कार्य, डिजाइन और व्यापार में उपयोग किए जाने वाले प्रतीक, नाम और चित्र आदि। मौलिकता और रचनात्मकता की रक्षा और संरक्षण के लिए किया जाने वाले कार्य पेटेंट कहलाता है। पेटेंट एक शब्द है जिसका उपयोग भौतिक आविष्कारों और बौद्धिक संपदा दोनों पर लागू होता है। एक पेटेंट किसी उत्पाद को बनाने और बेचने का अधिकार नहीं देता है; बल्कि यह दूसरों को अपने स्वयं के मौद्रिक लाभ के लिए एक आइटम या अपनी खुद की बौद्धिक संपदा के एक टुकड़े के उत्पादन पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार देता है।

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी https://www.jru.edu.in/ ने अकादमिक क्षेत्र में शोध और अन्वेषण के साथ बौद्धिक संपदा अधिकार को बढ़ावा देते हुए अपने शिक्षकों के मौलिक कार्यों को पेटेंट करवाने और इसके प्रचार प्रसार को बढ़ावा दिया है। विश्वविद्यालय के 7 शिक्षकों ने अभी तक अपने कार्यों का पेटेंट करवाया है और अन्य सहयोगियों के प्रेरणाश्रोत साबित हुए हैं।

https://www.jru.edu.in/educational-edge/faculty-patents/

  • डॉ. अमृता मजूमदार: डॉ. अमृता झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ़ कॉमर्स एंड मैनेजमेंट में प्रोफसर है और वर्तमान में डिप्युटी रजिस्ट्रार के पद पर अपना योगदान दे रही है। उन्होंने “ए सिस्टम फॉर प्रोवाइडिंग एन इंटरफ़ेस फॉर एन इफेक्टिव कम्युनिकेशन इन इम्प्रोविंग एम्प्लॉय मोरल ” और “एन इम्पैक्ट ऑफ़ ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट (एच आर एम ) ऑन एम्प्लॉय परफॉर्मेंस” विषय पर अपना अविष्कार निबंधित कराया है।
  • डॉ. श्रद्धा प्रसाद: झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी की डिप्युटी रजिस्ट्रार (ऐकडेमिक ) और साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. श्रद्धा प्रसाद ने बायो टेक्नोलॉजी में ” कंटीन्यूअस हेल्थ मॉनिटरिंग एंड कंडीशनिंग ऑफ़ अपरूटेड ट्री ड्यू टू साइक्लोन व्हेन रेप्लांटेशन” विषय पर पेटेंट प्राप्त किया है।
  • प्रो.कुमार अमरेंद्र: विश्वविद्यालय के डिपार्टमेंट ऑफ़ कंप्यूटर साइंस एंड इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी में कार्यरत प्रो. अमरेन्द ने दो पेटेंट अपने नाम किया है। उन्होंने “सीवी बेस्ड एक्सीडेंट अवॉयडेंस सिस्टम थ्रू वीडियो सर्विलांस यूजिंग डीप लर्निंग अल्गोरिथम” पर पेटेंट प्राप्त किया है।
  • प्रो. अनुराधा शर्मा: डिपार्टमेंट ऑफ़ कंप्यूटर साइंस एंड इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी की कोर्डिनेटर प्रो. अनुराधा ने प्रो. अमरेंद्र के साथ इस पर संयुक्त रूप से पेटेंट प्राप्त किया है जो ” आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस एंड आयोटी बेस्ड इंटेलिजेंस ऑटोमेशन (होम)यूजिंग वाई -फाई एंड एंड्रॉएड एप्लीकेशन” पर है।
  • प्रो. सृजानी दासगुप्ता: डिपार्टमेंट ऑफ़ फार्मेसी में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत प्रो. दासगुप्ता ने “आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस सिस्टम एम्बेडेड विथ प्लूरालिटी सेंसर्स मॉनिटरिंग एंड फॉर प्रिडिक्शन एंड डिटेक्शन ऑफ़ हार्ट डिजीज ” पर पेटेंट प्राप्त किया है।
  • सौरभ ख्वास: डिपार्टमेंट ऑफ़ फार्मासूटिकल्स साइंस में लेक्चरर के पद पर अपना योगदान दे रहे सौरभ ख्वास ने ” इवैल्यूएशन ऑफ़ ए रीकंस्टीट्युएबल ड्राई सस्पेंशन टू इम्प्रूव द डिसॉलूशन ऑफ़ पूवर्ली वाटर सॉल्यूबल सेलेकॉसिब ” पर अपना पेटेंट प्राप्त किया है।
  • जय चंद्रा: डिपार्टमेंट ऑफ़ फार्मासूटिकल्स साइंस में लेक्चरर के पद पर अपना योगदान दे रहे जय चंद्रा ने इवैल्यूएशन ऑफ़ ए रीकंस्टीट्युएबल ड्राई सस्पेंशन टू इम्प्रूव द डिसॉलूशन ऑफ़ पूवर्ली वाटर सॉल्यूबल सेलेकॉसिब ” पर अपना पेटेंट प्राप्त किया है।

पिछले कुछ वर्षों में पेटेंट को लेकर देश में संवेदनशीलता बढ़ी है। इसके लिए सरकारी स्तर भी काफी प्रचार प्रसार किया गया है। पेटेंट की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया अपनायी गयी है और विधिक दिक्कतों को न्यूनतम करने का कार्य किया गया है। भारत सरकार के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अंतगत कार्यरत संस्था

इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी इंडिया इस प्रकार के कार्यों के लिए दायित्व निभाता है। भारतीय पेटेंट कार्यालय से मान्यता प्राप्त पेटेंट एजेंट पेटेंट प्राप्त करने में सहायता करते है और एक निश्चित शुल्क अदा कर पेटेंट प्राप्त किया जा सकता है।