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बीकॉम टैक्सेशन क्यों करें? कैसे बनाएं करियर

B.Com Taxation एक व्यावसायिक पाठ्यक्रम है। कॉमर्स, लॉ और मैनेजमेंट बैकग्राउंड के वैसे छात्र जो सीए, सीएस, आईसीडब्ल्यूए लेने के इच्छुक है उनके लिए यह पाठ्यक्रम एक मजबूत आधार प्रदान करता है। साथ ही, छात्रों को कर (टैक्स) परामर्श के क्षेत्र में विभिन्न पदों के लिए तैयार करता है। बी.कॉम टैक्सेशन प्रबंधकीय कौशल और मुख्य योग्यता प्रदान करते हुए स्नातकों को व्यवसाय जगत में करियर की एक विस्तृत श्रृंखला के लिए तैयार करता है। इस का उद्देश्य स्नातक स्तर के छात्रों को क्रमिक और प्रभावी तरीके से कराधान प्रणाली ( टैक्स सिस्टम) और वित्तीय सिद्धांतों( फाइनैंशल इंस्ट्रूमेंट) का समग्र ज्ञान प्रदान करना है। यह विशेष कार्यक्रम वित्तीय प्रबंधन, कर नियमों और रणनीतिक वित्तीय योजना की जटिलताओं में उत्कृष्टता प्राप्त करने का लक्ष्य रखने वाले व्यक्तियों के लिए तैयार किया गया है।

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बी.कॉम टैक्सेशन कोर्स क्या है?
बी.कॉम (टैक्सेशन) का पूरा नाम बैचलर ऑफ कॉमर्स इन टैक्सेशन होता है। यह 3 वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम है। किसी भी स्ट्रीम से 12 वीं पास छात्र इस कोर्स को कर सकता है। इसे पूरा करने के बाद लेखा परीक्षक, आयकर अधिकारी, लागत लेखाकार, कर सलाहकार, बजट विश्लेषक, वित्त प्रबंधक, सहायक लेखाकार आदि पदों पर कार्य करने का अवसर मिलता है ।
बीकॉम टैक्सेशन के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए क्लिक करें: https://www.jru.edu.in/programs/bcom-taxation/
बीकॉम टैक्सेशन में क्या पढ़ना होता है?

बीकॉम टैक्सेशन पाठ्यक्रम वित्त, अर्थ, विधि और प्रबंधन का मिला जुला पाठ्यक्रम है। इसके मुख्य विषयों में शामिल हैं:

  • खाता लेनदेन
  • लेखा पुस्तकें
  • व्यावसायिक आंकड़े
  • पूंजी आय – व्ययक
  • केंद्रीय और बिक्री कर
  • कस्टम कानून प्रक्रियाएं
  • कर्मचारी प्रबंधन
  • कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम
  • व्यावहारिक अर्थशास्त्र
  • सूची प्रबंधन
  • ई-कॉमर्स सेवा कर प्रबंधन
  • आय वितरण
  • पेरोल प्रबंधन
  • अनुसंधान और रिपोर्ट प्रस्तुति

हर साल 1 लाख छात्र क्यों करते है बीबीए जाने :
https://www.jru.edu.in/programs/faculty-of-commerce-management/bba/

बीकॉम टैक्सेशन करने के क्या फायदे है?
देश की आर्थिक तरक्की के लिए टैक्सेशन बहुत जरूरी है और अगर कोई भी टैक्सेशन में अपना करियर बनाना चाहता है तो उसके लिए बीकॉम टैक्सेशन बेहतर ऑप्शन है। एक रिपोर्ट के मुताबिक नई जीएसटी कर व्यवस्था ने 1.3 मिलियन विशेषज्ञों की मांग पैदा की है। यह कर विशेषज्ञों की लगातार बढ़ती आवश्यकता को इंगित करता है। गहन कर ज्ञान और मजबूत विश्लेषणात्मक कौशल वाले स्नातकों की इस क्षेत्र में उच्च मांग है।

  • यह कोर्स विश्लेषणात्मक और प्रबंधकीय क्षमताओं से लैस होने , वित्त और कराधान पर ध्यान देने के साथ वाणिज्य के सभी प्रासंगिक क्षेत्रों में कौशल विकसित करने का मौका देता है।
  • इसे करने के बाद रोजगार कर विशेषज्ञ, कर सलाहकार, कर वकील विशेषज्ञ, कर नीति विश्लेषक, कर सलाहकार, लेखा सहायक, लागत लेखाकार, ऑडिटिंग क्लर्क, आदि पदों पर कार्य कर सकते हैं ।
  • डेलॉइट, अर्न्स्ट एंड यंग, जे. पी मॉर्गन चेज़ एंड कंपनी, एचडीएफसी बैंक प्राइवेट लिमिटेड, आदि बी.कॉम टैक्सेशन स्नातकों की प्रमुख भर्तीकर्ता हैं।

बीकॉम टैक्सेशन के बाद जॉब के अवसर :

  • चार्टेड अकाउंटेंट (CA)
  • इंस्टिट्यूट और कॉस्ट एंड वर्कस अकाउंटेंट इन इंडिया (ICWA)
  • कंपनी सेक्रेटरी (CS)
  • सर्टिफाइड मैनेजमेंट अकाउंटेंट(CMA)
  • एसोसिएशन ऑफ़ चार्टेड सर्टिफाइड अकाउंटेंट (ACCA)
  • सर्टिफाइड पब्लिक अकाउंटेंट (CPA)
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एमएसएमइ टूल रूम और झारखंड राय विश्वविद्यालय ने संयुक्त रूप से किया आई पी आर पर कार्यशाला का आयोजन

झारखंड गवर्नमेंट टूल रूम रांची एवं झारखंड राय विश्वविद्यालय रांची के सहयोग से शुक्रवार को “आई पी आर पेटेंट एंड प्रोसेस इन्वॉल्वड इन करंट प्रोस्पेक्टिव ऑन एकेडमिक एंड रिसर्च” विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यशाला में स्वागत संबोधन करते हुए एम एस एम इ टूल रूम रांची के प्राचार्य एम के गुप्ता ने केंद्र सरकार के एम एस एम इ मंत्रालय और टूल रूम रांची के द्वारा बौद्धिक संपदा अधिकार और कौशल विकास को लेकर किए जा रहे कार्यों की चर्चा करते हुए कहा कि ” टूल रूम रांची में 15 से ज्यादा प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे है। आईपीआर को बढ़ावा देने के लिए समय समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते है।

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प्राचार्य गुप्ता ने कहा कि टूल रूम रांची के जरिए अब तक 3 इनोवेटिव आइडिया को 15 लाख रुपए की राशि उपलब्ध कराई गई है। भारत सरकार के कई अन्य योजनाएं जिनमें एम एस एम ई बिजनेस स्कीम, अटल इनोवेशन लैब और झारखंड स्टार्टअप शामिल है के जरिए स्टार्टअप और इनोवेशन को बढ़ावा देने का कार्य किया जा रहा है

झारखंड राय विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सविता सेंगर ने अपने विशेष संबोधन के दौरान भारतीय ज्ञान परंपरा, इंडिजिनस हेरिटेज और बौद्धिक अधिकार संपदा पर विस्तार पूर्वक चर्चा करते हुए कहा कि ” विचार का आना और विचार को बौद्धिक अधिकार संपदा में बदलना दो अलग अलग बातें है। विचार भी एक संपदा है इसका अधिकार आइडिया देने वाले के पास होना चाहिए।
प्रो. सेंगर ने कहा की नवीन विचारों का प्रभाव समाज और सामाजिक दायित्वों से भी जुड़ा हुआ है। आई पी आर और पेटेंट को लेकर हमारे समाज में बहुत जागरूकता नहीं रही है लेकिन अब इसके प्रति और इससे जुड़े कानूनी पहलू के प्रति लोगों में समझ बढ़ी है।

कार्यशाल के आयोजन पर उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों में , शिक्षकों में और नवीन विचार पर काम करने वाले लोगों में जन जागरूकता लाने में सफल साबित होंगे।

कुलपति सेंगर ने झारखंड के अगरिया जनजाति का उदाहरण देते हुए कहा कि इनके द्वारा बनाया गया ढलवा लोहा में जंक नहीं लगता है। यह एक प्रकार का युगांतर कारी कार्य है । लेकिन इसके बारे में कितनों को पता है। जिस प्रकार स्टील का अविष्कार एक बड़े बदलाव का वाहक बन गया उसी प्रकार लोहे के साथ इस जनजातीय समाज का प्रयोग भी एक अनोखा प्रयास है हमें इसकी सराहना करनी चाहिए। एन आई टी जमशेदपुर के द्वारा इस पर शोध कार्य किया जा रहा है।

उन्होंने जियो टैग का भी प्रश्न उठाते हुए कहा की देश के दो प्रदेशों में एक मिठाई को लेकर उठा विवाद भी आई पी आर और पहचान के प्रति हमारी अनदेखी को दर्शाता है।

झारखंड राय विश्विद्यालय के कुल सचिव डॉ. पीयूष रंजन ने कार्यशाला के आयोजन और औचित्य पर प्रकाश डालते हुए कहा की बौद्धिक विचार का संरक्षण आवश्यक है। एक अशिक्षित भी अपनी जमीन और ऐसे साधनों का संरक्षण और उससे जुड़े कागजातों के प्रति सचेत रहता है तो बौद्धिक समाज को भी अपने विचारों, बौद्धिक संपदा के संरक्षण के प्रति सचेत होने की आवश्यकता है।

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कुल सचिव ने कहा की भारत में प्रचुर मात्रा में बौद्धिक विचार और ज्ञान से भरे एकेडमिक और गैर एकेडमिक क्षेत्र से जुड़े लोग बेहतर कार्य कर रहे है लेकिन जानकारी और जागरूकता के अभाव में संपदा संरक्षण के प्रति उदासीनता है। उन्होंने कहा कि पीछे एक दशक में एक बड़ा परिवर्तन देखने को मिला है। आंकड़ों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा की इस वर्ष देश में 40हजार से ज्यादा पेटेंट पंजीकृत हुए है। इस परिवर्तन का कारण डोमेस्टिक पेटेंट का शामिल होना है। पहली बार देश में पेटेंट के मामले में देशी और घरेलू पेटेंट को प्राथमिकता देने का कार्य किया गया जिसके परिणामस्वरूप पेटेंट की संख्या में वृद्धि हुई है। यह एक स्वागत योग्य कदम है। इस प्रकार के कदम प्रधानमंत्री मोदी के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में भी सहायक साबित होंगे।

डॉ. पीयूष रंजन के आगे कहा कि जैसे जैसे देश में शोध,अन्वेषण और आई पी आर का दायरा बढ़ता है देश भी प्रगति करता है। देश की अर्थव्यवस्था में भी सुधार आता जाता है। आज भारत विश्व की पांच बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है ।

उन्होंने चीन का उदाहरण देते हुए कहा की याद देश आज विश्व की दूसरी बड़ी अर्थव्यवस्था है। लेकिन वर्ष 2003में चीन की अर्थव्यवस्था विश्व में 13वें नंबर की अर्थव्यवस्था थी। लेकिन 10 वर्षों में चीन के अंदर जो हम बड़ा बदलाव देख रहे हैं उसके पीछे एक मुख्य कारण इनोवेशन और पेटेंट है।

एक वर्ष के अंदर वहां 4 लाख से ज्यादा पेटेंट दर्ज किए गए हैं। वहीं 4.4मिलियन ट्रेडमार्क भी पंजीकृत किए गए है।

भारत में पेटेंट को लेकर बात करते हुए उन्होंने कहा की क्षेत्रीय स्तर पर भी हमारे देश में पेटेंट को लेकर विविधता है अधिकांश पेटेंट महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के राज्यों में होते आए है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी इस विषय पर गंभीर पहल देखने को मिल रही है।

तकनीकी सत्र को संबोधित करते हुए एन यू एस आर एल रांची की डॉ. श्वेता और प्रो. शांतनु ब्रज चौबे ने विस्तार पूर्वक सभी प्रतिभागियों को बौद्धिक संपदा अधिकार, उसके प्रकार, निबंधन की प्रक्रिया, केंद्र सरकार के द्वारा दिए जाने वाले सहयोग, विधिक नियमों और अन्य जानकारियों से अवगत कराने का कार्य किया।

कार्यक्रम के समापन पर टूल रूम रांची के वरीय प्रशासनिक अधिकारी आशुतोष मिश्रा ने धन्यवाद ज्ञापन किया।।

कार्यशाला को सफल बनाने में झारखण्ड राय विश्विद्यालय की डीन मैनेजमेंट डॉ. हरमीत कौर एवं विधि संकाय की डॉ. खालिदा रहमान की विशेष भूमिका रही।

कार्यशाला में बड़ी संख्या में छात्र छात्राएं और शिक्षक शामिल हुए।।

झारखंड राय विश्वविद्यालय के कृषि संकाय के विद्यार्थियों ने किया एग्रोटेक किसान मेला 2024 का भ्रमण

“कृषि नवाचारों द्वारा पोषण, आय तथा रोजगार संवर्धन” पर आधारित एग्रोटेक किसान मेला 2024 का आयोजन बिरसा कृषि विश्वविद्यालय रांची में 2 से 4 मार्च के बीच आयोजित किया गया। मेले का उद्देश्य कृषि नवाचारों,युवा उद्यमियों को उन्नत कृषि, पशुपालन, वानिकी, डेयरी, जैव प्रौद्योगिकी, कृषि यंत्रीकरण, खाद्य प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्द्धन को बढ़ावा देना था।

कृषि नवाचारों द्वारा पोषण, आय तथा रोजगार संवर्द्धन को ध्यान में रखते हुए झारखण्ड राय विश्वविद्यालय के कृषि संकाय के 32 विद्यार्थियों के दल ने विभागीय शिक्षकों के मार्गदर्शन में एग्रोटेक किसान मेला 2024 का भ्रमण किया। इस दौरान विद्यार्थियों ने मेले में लगाए गए 125 से ज्यादा स्टॉलों का भ्रमण किया। मेले में राज्य के 24 जिलों से किसान शामिल हुए थे।

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इस दौरान विद्यार्थियों ने बिरसा कृषि विश्वविद्यालय की विभिन्न इकाइयों, राज्य में स्थित आईसीएआर के संस्थानों, बीज एवं उर्वरकों के विक्रेताओं, बैंक एवं वित्तीय संस्थानों, स्वयंसेवी संगठनों, टाटा ग्रुप के रांची कैंसर संस्थान, नर्सरी प्रतिष्ठानों, कृषि परामर्श सेवा केंद्र के बारे में जानकारी भी प्राप्त किया।

खेती-बाड़ी की पढ़ाई से भी मिल सकती हैं लाखों की नौकरी, स्टार्टअप का भी है मौका।
https://www.jru.edu.in/programs/department-of-agriculture-2/b-sc-hons-agriculture/

मेला का उद्घाटन केंद्रीय कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री अर्जुन मुंडा ने 2 मार्च को किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने झारखंड को पूरा सम्मान देने के लिए विकसित भारत संकल्प यात्रा की शुरुआत बिरसा भगवान की जन्मस्थली और उलिहातू से की तथा जंगल, पहाड़, पठार में रहनेवाले देश के 75 प्रिमिटिव ट्राइब्स के संरक्षण के लिए 24000 करोड़ रु की योजना जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान की शुरुआत झारखंड से की। पूर्वी भारत और झारखंड में कृषि विकास के लिए कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी। झारखंड के सभी 32 हजार गांवों के लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड बने, इसमें बिरसा कृषि विश्वविद्यालय को अग्रणी भूमिका निभानी है।

किसान मेला के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए झारखंड के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने कहा है कि कृषि यानी खेती-किसानी ही सभी संस्कृति की जननी है और बिना कृषि के किसी भी संस्कृति की कल्पना नहीं की जा सकती है। भारत सरकार द्वारा हरित क्रांति के जनक डॉ एम.एस स्वामीनाथन और पूर्व प्रधानमंत्री, किसान नेता चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न प्रदान करने का जिक्र करते हुए राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी ने कृषि वैज्ञानिकों और किसानों का सम्मान बढ़ाया है।

बीएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई और ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव का महत्त्व
https://www.jru.edu.in/dedicated-agriculture-land/

राज्यपाल ने जेनेटिक बीमारियों और एनिमल ब्रीडिंग से संबंधित डॉ नंदनी कुमारी की दो पुस्तकों, पशुपालन से संबंधित डॉ सुशील प्रसाद की एक पुस्तक तथा बिरसा किसान दैनंदिनी का लोकार्पण किया। उन्होंने मेला में विभिन्न प्रदर्शनी के विजेताओं तथा राज्य के सात अलग अलग जिलों से आए 7 प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया। जिन प्रगतिशील किसानों को राज्यपाल ने सम्मानित किया, उसमें धनबाद के कमल महतो, गिरिडीह के प्रदुमन महतो, खूंटी के निलेश कुमार, सरायकेला खरसावां के सोमराय मार्डी, रांची के राजेश्वर महतो, सिमडेगा के चूड़ामणि यादव और पश्चिमी सिंहभूम के पानी लागुरी का नाम शामिल है। उद्यान प्रदर्शनी में फूलों के वर्ग में भारतीय विधिक माप विज्ञान संस्थान (आईआईएलएम), कांके को सर्वाधिक 06 तथा सब्जियों के वर्ग में होचर गांव (कांके) के रामकुमार साहू को सर्वाधिक 05 पुरस्कार प्राप्त हुए।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक ने कहा कि झारखंड बागवानी, पशु उत्पादन एवं मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में एक बड़े हब के रूप में उभर सकता है, इसके उत्पादों की मांग देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी होगी। इसके लिए आर्थिक सहयोग के साथ-साथ पॉलिसी सपोर्ट की भी आवश्यकता है। अगली हरित क्रांति में मिट्टी और जल स्तर में पंजाब-हरियाणा जैसा दुष्परिणाम नहीं आए, इस पहलू का पूरा ख्याल रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि आईसीएआर के सभी शोध संस्थानों और देश के सभी कृषि विश्वविद्यालयों को आपस में मिलकर वन आईसीएआर की अवधारणा के साथ काम करना है।

Pharma Anveshan 2024

झारखण्ड राय विश्वविद्यालय के फार्मेसी संकाय में फार्मा अन्वेषण 2024 का आयोजन

फार्मेसी के जनक कहे जाने वाले प्रोफेसर महादेव लाल श्रॉफ के जन्मदिवस पर झारखण्ड राय विश्वविद्यालय रांची के फार्मेसी संकाय के द्वारा “फार्मा अन्वेषण 2024” का आयोजन किया गया। प्रो. श्रॉफ के जन्म दिवस को राष्ट्रीय फार्मेसी शिक्षा नीति के रूप में भी मनाया जाता है। फार्मेसी कौंसिल ऑफ़ इंडिया, नई दिल्ली के निर्देश पर इस वर्ष यह दिवस ” तालमेल का लाभ उठाना: उद्योग-अकादमिक साझेदारी के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 का कार्यान्वयन” विषय पर आयोजित किया गया।

झारखंड राय विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. (डॉ.) सविता सेंगर ने प्रोफेसर श्रॉफ के जन्म दिवस पर आयोजित कार्यक्रम फार्मा अन्वेषण 2024 पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा की ” भारत में फार्मेसी के जनक कहे जाने वाले प्रो श्रॉफ का जन्मदिवस मनाना एवं नई पीढ़ी को उनके योगदान से परिचित करना एक सार्थक प्रयास है। यह दिवस राष्ट्रीय फार्मेसी शिक्षा नीति दिवस के तौर पर भी मनाया जाता है। विश्वविद्यालय के फार्मेसी संकाय को इस प्रकार के आयोजन के लिए शुभकामनाएं व्यक्त करती हूँ।“

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विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. पीयूष रंजन ने परिचर्चा के आयोजन पर बधाई देते हुए कहा कि “यह दिवस फार्मेसी के क्षेत्र में किये जा रहे कार्यों और फार्मासिस्ट का समाज के प्रति दायित्व के निर्वाहन के बारे में बताता है। नई पीढ़ी जो इस क्षेत्र से जुड़े हुए है उन्हें प्रोफेसर श्रॉफ के द्वारा फार्मेसी प्रोफेशन एवं प्रोफेशनल्स के लिए किये गए कार्यों से सीखलेते हुए समाज के लिए उदारहण प्रस्तुत करना चाहिए।“

भारत में फार्मेसी शिक्षा के जनक:
फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया, (PCI) ने प्रोफेसर महादेव लाल श्रॉफ की जयंती को राष्ट्रीय फार्मेसी शिक्षा दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत की थी। भारत में फार्मेसी शिक्षा की स्थापना में प्रो. लाल की बड़ी भूमिका थी। उनके योगदान की याद और सम्मान में प्रतिवर्ष 6 मार्च को राष्ट्रीय फार्मेसी शिक्षा दिवस मनाया जाता है। प्रो. श्रॉफ इस देश में काम करने वाले सभी फार्मासिस्टों के लिए उनकी शाखाओं और कर्तव्यों की विविधता के बावजूद आज भी एक आदर्श बने हुए हैं। उन्होंने भारत में फार्मेसी शिक्षा के निर्माण में महान भूमिका निभाई, उन्होंने फार्मेसी पेशे के अन्य पहलुओं के विकास में भी अपना योगदान दिया। महादेव लाल श्रॉफ का जन्म बिहार के दरभंगा शहर में 6 मार्च 1902 को हुआ था। 25 अगस्त 1971 को उनका निधन हुआ ।

बैचलर ऑफ फार्मेसी डिग्री हासिल करने के लाभ:
https://www.jru.edu.in/programs/department-of-pharmacy/bachelor-in-pharmacy-b-pharm/

फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया:
फार्मेसी कौंसिल ऑफ़ इंडिया, नई दिल्ली भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन एक वैधानिक संस्था है। फार्मेसी अधिनियम, 1948 के तहत इसका गठन देश में फार्मेसी शिक्षा और पेशेवरों को विनियमित करने के लिए किया गया था। इसका गठन फार्मेसी अधिनियम की धारा (3) के तहत 9 अगस्त 1949 को किया गया जिसका मुख्य उद्देश्य फार्मेसी अधिनियम के तहत फार्मेसी शिक्षा को रेगुलेट करना, फार्मासिस्टों का पंजीकरण, फार्मासिस्टों के प्रैक्टिस पर नजर रखना है।

फार्मासिस्ट भी शुरू कर सकेंगे अब अपना खुद का क्लिनिक
https://www.jru.edu.in/programs/department-of-pharmacy/diploma-in-pharmacy/

भारत में फार्मेसी शिक्षा:
भारत में फार्मेसी शिक्षा का इतिहास काफी पुराना है। जब देश ब्रिटिश साम्राज्य के अधीन था, उसी समय से इस प्रकार के पाठ्यक्रम की मांग उठ रही थी। भारत में फार्मेसी शिक्षा का बीज सबसे पहले 1860 में मेडिकल कॉलेज, मद्रास की ओर तैयार किया गया था। बैचलर, डिप्लोमा या अस्पताल सहायता के लिए अर्हता प्राप्त छात्रों को फार्मेसी की कार्य कुशलता प्रदान करने के लिए फार्मेसी कक्षाएं आरंभ की गयी। जुलाई 1937 में प्रो. श्रॉफ के अथक प्रयासों से फार्मास्युटिकल केमिस्ट्री और फार्माकोग्नॉसी को बीएससी डिग्री के रूप में पेश किया गया। वर्तमान में फार्मेसी को सार्थक परिणामों वाले एक सुस्थापित पाठ्यक्रम के रूप में पहचाना जाता है।

परिचर्चा कार्यक्रम को संबोधित करते हुए फार्मेसी संकाय के प्रो. (डॉ.) रणधीर कुमार गुप्ता ने उद्योग जगत और अकादमी के सहयोग पर विस्तार पूर्वक चर्चा करते हुए अपनी बातें रखी। उद्योग जगत से आये श्री प्रिय बता बोई, डॉ. सुमित पांडेय ने भी विद्यार्थियों के समक्ष अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए दिवस की महत्ता पर प्रकाश डाला। धन्यवाद ज्ञापन फार्मेसी संकाय के विभागाध्यक्ष डॉ. सैयद मो. अब्दुल्लाह ने किया।

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झारखंड राय यूनिवर्सिटी की एलएलबी छात्रा को सीएस परीक्षा में देश में 5वां रैंक

झारखंड राय विश्वविद्यालय, रांची से एल एल बी (LLB) कर रही जैस्मिन ने सीएस की परीक्षा में देश भर में पांचवा रैंक हासिल कर विश्वविद्यालय और शहर का नाम रौशन किया है। रांची के गोविंद नगर रातू की रहने वाली जैस्मिन ज्योति ने सीएस प्रोफेशनल परीक्षा में ऑल इंडिया में पांचवा रैंक प्राप्त किया है। यह उनका दूसरा प्रयास था। जैस्मिन प्रोफेशनल एग्जाम और एग्जिक्यूटिव लेवल की परीक्षा दोनों ग्रुप को एक ही बार में क्वालीफाई किया है।

जैस्मिन की सफलता पर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. (डॉ.) सविता सेंगर ने अपने बधाई संदेश में उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए कहा है कि “आपका भविष्य आपकी कल्पना से कहीं अधिक उज्जवल हो, और आप वह सब कुछ हासिल करें जो आपका दिल चाहता है।“

झारखंड राय विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. पीयूष रंजन ने भी विधि छात्रा को अपनी ओर से शुभकामना देते हुए कहा ” आपकी यात्रा अभी शुरू हुई है, और मुझे विश्वास है कि भविष्य आपके लिए असाधारण सफलता और असीमित खुशियाँ लेकर आएगा।“

जैस्मिन की सफलता से विश्वविद्यालय के विधि संकाय में भी हर्ष और ख़ुशी का माहौल है। संकाय शिक्षकों ने भी जैस्मिन के उन्नत भविष्य की कामना करते हुए ढेरों शुभकामनाएं दी हैं।

एलएलबी के बाद हैं कई टॉप करियर ऑप्शन
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डीपीएस रांची से 12वीं करने और फिर रांची के संत जेवियर्स कॉलेज से बी कॉम ऑनर्स करने के दौरान ही जैस्मिन ने कंपनी सचिव (CS) परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी। सीएस की तैयारी के दौरान जैस्मिन को लॉ सब्जेक्ट के महत्व का पता चला। जैस्मिन का कहना है कि ” सीएस की तैयारी के दौरान टीचर बताते रहते थे कि लॉ की डिग्री इस प्रोफेशन में काफ़ी इंपॉर्टेंस रखती है। सीएस को लॉ के हर फील्ड की जानकारी होना जरूरी भी है। इसके बाद मैंने एल एल बी करने का फैसला लिया। लॉ करने के लिए मैंने झारखंड राय विश्वविद्यालय रांची का फैकल्टी ऑफ लीगल स्टडीज का चयन किया क्योंकि वर्किंग प्रोफेशनल्स की सुविधा को ध्यान में रखते हुए यहां अलग से व्यवस्था की गई है। अभी मैं एलएलबी फोर्थ सेमेस्टर की स्टूडेंट हूं। वर्ष 2025 में मेरी लॉ की डिग्री भी पूरी हो जायेगी।“

बीए एलएलबी कोर्स करने के अपने है फायदे
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अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि आज मैं बहुत खुश हूं। सीएस की परीक्षा पास करने के लिए मैंने प्रतिदिन 18-18 घंटे की पढ़ाई की है । इसमें 16 घंटे की पढ़ाई और 2 घंटा का ओपन बुक प्रैक्टिस शामिल है। साल 2020 में फाउंडेशन कोर्स के लिए मैंने रजिस्ट्रेशन करवाया था, उसके बाद 2023 में इसे क्लियर भी कर लिया। इस दौरान एक बार असफलता भी हाथ लगी लेकिन उनके माता-पिता ने मेरा हौसला बढ़ाया हौसला बढ़ाया और फिर और फिर पूरी लगन के साथ तैयारी करते हुए मुझे यह मुकाम मिला है। जैस्मिन ने युवा पीढ़ी को अपना सन्देश देते हुए कहा की फेल होने से डरे नहीं। बल्कि अगली बार दुगनी मेहनत के साथ अपना लक्ष्य पूरा करें।

आईसीएसआई परीक्षा भारत के कुछ कठिन परीक्षाओं में शामिल है। इस परीक्षा में रिजल्ट का प्रतिशत भी बहुत कम होता है। सीएस की परीक्षा 21 से 30 दिसंबर 2023 तक चली थी। 25 फरवरी को इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरी ऑफ इंडिया (ICSI) वर्ष 2023 की परीक्षा का परिणाम जारी किया गया।

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एलएलएम (LLM) का फुल फॉर्म क्या है? एलएलएम करने के फायदे क्या हैं?

एलएलएम (LLM) का फुल फॉर्म क्या है? 

एलएलएम का फुल फॉर्म है मास्टर ऑफ़ लेजिस्लेटिव लॉ.
LLM को मास्टर्स ऑफ लॉ या लैटिन लेगम मैजिस्टर के रूप में भी जाना जाता है।

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ललम करने के फायदे क्या हैं? LLM कोर्स के बाद जॉब प्रोफाइल्स
एलएलएम (LLM) करने के बाद आपको विशेष प्रोफाइल के जॉब्स उपलब्ध होते हैं
LLM कोर्स के बाद मिलने वाली जॉब प्रोफाइल्स इस प्रकार हैं

  • सॉलिसिटर
  • मजिस्ट्रेट
  • महान्यायवादी
  • जिला एवं सत्र न्यायाधीश
  • कानून विशेषज्ञ
  • लॉ रिपोर्टर
  • क़ानूनी सलाहकार
  • ट्रस्टी
  • नोटरी
  • वकील
  • सार्वजानिक अभियोक्ता
  • मुंसिफ (उप-मजिस्ट्रेट)
  • शिक्षक और व्याख्याता

एलएलएम कितने साल का होता है?
यह (LLM) दो साल का प्रोग्राम है.
यह डिग्री उम्मीदवारों को एक विशिष्ट क्षेत्र पर स्पेशलाइजेशन प्रदान करती है जैसे क्रिमिनल लॉ, एनवायरनमेंटल लॉ, कॉरपोरेट लॉ, ह्यूमन राइट्स लॉ, साइबर लॉ आदि।

जानिए  एलएलएम कोर्स के अन्य डिटेल्स – Click here

एलएलएम के क्या specialization होते हैं?
यहां एलएलएम स्पेशलाइजेशन (LLM specialisation) की सूची दी गई है (LLM specialization list)

  • एनवायरनमेंटल लॉ
  • कॉरपोरेट लॉ
  • इंटेलेकुलेट प्रॉपर्टी लॉ (आईपीआर)
  • ह्यूमन राइट्स लॉ
  • क्रिमिनल लॉ
  • कांस्टीट्यूशन लॉ
  • मैरीटाइम लॉ
  • साइबर लॉ
  • प्राइवेट एंड पब्लिक इंटरनेशनल लॉ
  • फैमिली लॉ
  • लेबर लॉ एंड एंप्लॉयमेंट लॉ
  • ट्रांसनेशनल लॉ
  • बिज़नेस लॉ
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एलएलएम क्यों करें? LLM kya hota hai?

  • LLB के बाद LLM उन लोगों के लिए है जो अपने लॉ करियर में एक सब्जेक्ट स्पेशलिस्ट बनना चाहते हैं.
  • आपने ये जरूर सुना होगा, या ऐसे लॉयर्स से मिले होंगे जिनको की एनवायर्नमेंटल लॉयर, या फिर आज कल साइबर लॉयर या फिर क्रिमिनल लॉयर, या कॉर्पोरेट लॉयर्स कहा जाता है.
  • इस प्रकार के लॉ स्पेशलिस्ट्स (कॉर्पोरेट लॉयर्स) अक्सर बड़े बड़े मल्टी नेशनल कम्पनीज में काम करते हैं.
  • एलएलएम जैसी डिग्री आमतौर पर उन लोगों द्वारा किया जाता है जो कानून के दायरे में विस्तार करना चाहते हैं और इसकी पेचीदगियों को समझते हैं।

एलएलएम के लिये योग्यता (LLM Karne Ke Liye Qualification)

  • इसे करने के लिए आपके पास LLB होनी चहिये। इसके साथ ही LLB में कम से कम 45% से ज्यादा मार्क्स होना चाहिए, तभी आप इस मास्टर कोर्स को कर सकते हैं।
  • कुछ यूनिवर्सिटी ऐसा मांग करती है, की आपका मार्क्स 50 से 55% से ऊपर रहेगा, तभी आपको एलएलएम में Admission मिलेगा। तो अगर आप LLM किसी प्रसिद्ध कॉलेज से करना चाहते है, तो आपके पास कम से कम LLB में 55% या उससे ज्यादा मार्क्स होने चहिये।
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CUET UG में आवेदन करने से पहले जानें जरूरी बातें : OMR मोड में हो सकती हैं परीक्षाएं

कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (सीयूइटी यूजी) अंडरग्रेजुएट की परीक्षा में इस वर्ष बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। बदलाव को लेकर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) योजना बना रही है। इस वर्ष से अंकों का सामान्यीकरण प्रक्रिया को समाप्त कर दिया जायेगा। साथ ही एक विषय की परीक्षा एक दिन में ही समाप्त करने को लेकर कार्य किया जा रहा है। अब परीक्षा अवधी भी कम हो जाएगी।

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यूजीसी के अध्यक्ष एम. जगदीश कुमार ने प्रेस विज्ञप्ति के जरिये इस विषय पर जानकारी देते हुए बताया है की ” एन टी ए इस वर्ष आयोजित होने वाली परीक्षा को ओ एम आर शीट और कंप्यूटर आधारित कराने को लेकर कार्य कर रहा है। पूर्व में आयोजित होने वाली परीक्षाएं महीने भर चला करती थी उसे कम अवधी में संपन्न करने को लेकर कार्य चल रहा है। इससे यह भी सुनिश्चित होगा की विद्यार्थियों को अपने पसंद के शहरों में परीक्षा देने का मौका मिलेगा। यूजीसी के अध्यक्ष ने कहा है कि जिन विषयों में विद्यार्थियों की संख्या अधिक होगी उनकी परीक्षा पेन पेपर मोड में एवं अन्य विषय जिनमें परीक्षार्थी काम संख्या में होंगे उन विषयों की परीक्षा ऑफलाइन मोड में आयोजित की जा सकती है।

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सीयूइटी यूजी में क्या है अंकों का सामान्यीकरण प्रक्रिया :
परीक्षा में परीक्षार्थियों को अलग अलग क्वेश्चन सेट दिए जाते हैं। एन टी ए का प्रयास होता है की परीक्षा का स्तर सामान्य रहे लेकिन यह आशंका बनी रहती है कि किसी पाली में परीक्षार्थी को कुछ कम कठिन प्रश्न मिले और किसी अन्य पाली में परीक्षार्थियों को कठिन प्रश्नों का सामना करना पड़े। इसे लेकर यह अंदेशा भी है कि वैसे परीक्षार्थियों को परीक्षा में कम अंक प्राप्त हो। इसी समस्या को दूर करने और निष्पक्ष परीक्षा आयोजित करने को लेकर एन टी ए के द्वारा प्रतिशत स्कोर के आधार पर अंको के सामान्यीकरण प्रक्रिया को समाप्त करने को लेकर विचार किया जा रहा है।

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एक ही शिफ्ट में होगा एग्जाम:
इस बार परीक्षा का आयोजन एक ही शिफ्ट में कराने की योजना बनाई गई है। पिछली बार परीक्षा का आयोजन तीन पालियों में किया गया था। एक ही पाली में परीक्षा होने से नंबरों के नॉर्मलाइजेशन की व्यवस्था भी खत्म हो सकती है। इस बार एक विषय की परीक्षा एक ही दिन कराने की योजना बनाई जा रही है।

एक विषय की परीक्षा एक ही दिन:
पिछले दो वर्षों से छात्रों को यथासंभव पहली पसंद का केंद्र प्रदान करने के प्रयास में एक ही पेपर के लिए दो या तीन दिनों की अवधि में परीक्षा आयोजित करनी पड़ती थी। इस वर्ष ओएमआर मोड अपनाने से स्कूलों और कॉलेजों में बड़ी संख्या में केंद्र उपलब्ध होंगे, जिससे एक ही दिन में एक विषय की परीक्षा देश भर में आयोजित की जा सकेगी।

List of PCI approved pharmacy college in Jharkhand

List of PCI approved pharmacy colleges in Jharkhand

  • Ranchi pharmacy college list

Among the top pharmacy college list in Ranchi, JRU Ranchi offers the best B.pharma course (PCI approved pharmacy course) for students of Ranchi, Jharkhand.

B.Pharm STRIP

B.pharmacy course at JRU Ranchi tops the list among best colleges.

  • B.pharma college in Ranchi fee structure – 2024

B.Pharm fee structure at JRU Ranchi
Admission Fees 12,000
Security Deposit 5,000
For full details of semester fees check here.

For admission 2024 process and other details, please call Toll Free number – 1800-120-2546

  • PCI approved pharmacy college in Jharkhand

Bachelor of Pharmacy (B. Pharm) course offered by Jharkhand Rai University, Ranchi (JRU Ranchi) is approved by Pharmacy Council of India (PCI approved pharmacy course at JRU)

B.pharma course is a 4 year undergraduate program. It is designed to train the students to play an important role in healthcare pharmaceutical industry at various levels.

After the completion of B.pharma course, students become highly trained healthcare professionals who collaborate with patients, physicians, and other healthcare providers to optimize medication use and promote overall health.

  • Private B.pharma college in Ranchi
Click for B.Pharm Fee Structure

Jharkhand Rai University, offers Bachelor of Pharmacy (B. Pharm) course in Ranchi. JRU Ranchi is a is a private university.
The University is UGC approved and the B.pharma course is PCI approved.

  • JRU Ranchi college of pharmacy is private or government?

Bachelor of Pharmacy (B. Pharm) course offered by JRU Ranchi is approved by Pharmacy Council of India (PCI approved). Jharkhand Rai University is UGC approved.

  • Career after B.pharma

After graduation, the PCI approved Bpharma degree in Pharmacy makes students eligible to work at government and private hospitals, clinics, and medical shops.

As a registered pharmacist, students can work in various pharmaceutical organizations in specific departments like production, quality control, package marketing, and drug manufacturing.

CBSE Exam blog

सीबीएसई 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा में बदलाव। 15 फ़रवरी से होगी परीक्षा

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा 2024 15 फरवरी 2024 से शुरू हो रही है। 10वीं की परीक्षा 13 मार्च को समाप्त होगी, जबकि कक्षा 12वीं की परीक्षा 2 अप्रैल 2024 को समाप्त होगी। रेगुलर और प्राइवेट छात्रों के लिए एडमिट कार्ड अलग-अलग जारी होंगे। सीबीएसई 2024 परीक्षा का समय सुबह 10:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक है। कुछ विषयों की परीक्षाएं केवल दो घंटे की अवधि के लिए दोपहर 12:30 बजे तक आयोजित की जाएंगी।

शिक्षा में गतिशीलता और आमूलचूल परिवर्तन के लिए राष्ट्रीय क्रेडिट फ्रेमवर्क (NCRF) तैयार किया है। इसके लिए केंद्र सरकार द्वारा गठित उच्च-स्तरीय समिति ने स्कूली से उच्च शिक्षा तक एक एकीकृत क्रेडिट संचय और हस्तांतरण ढांचा तैयार किया है, जिसके तहत विद्यार्थियों को शैक्षणिक और कौशल विषयों में क्रेडिट दिया जाएगा। सभी राज्य बोर्ड, सीबीएसई और एनआईओएस बोर्ड के लिए दिशा निर्देश तैयार किए गए हैं।

विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने में कृषि स्नातकों की महत्वपूर्ण भूमिका
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शैक्षणिक सत्र 2024-25 से हुए अहम बदलाव:

  • 10वीं कक्षा में तीन भाषाएं शामिल होंगी, जिसमें दो भाषा कम से कम भारत में बोली जाने वाली होगी, वहीं सात मुख्य विषय होंगे। इसमें गणित और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग, सामाजिक विज्ञान, विज्ञान, कला शिक्षा, शारीरिक शिक्षा और कल्याण, व्यावसायिक शिक्षा और अंत: विषय क्षेत्र शामिल हैं। विद्यार्थी को सभी 10 विषयों में उत्तीर्ण होना होगा।
  • 12वीं में अब विद्यार्थियों को एक के बजाय दो भाषाएं पढ़नी होंगी। इसमें कम से कम एक भाषा भारत में बोली जाने वाली होगी, वहीं चार मुख्य विषय और एक वैकल्पिक विषय होगा। यह सभी विद्यार्थियों को चयनित करने होंगे। एनसीएफ के तहत इन विषयों को तीन समूह में बांटा गया है। जिसमें से विद्यार्थियों को किसी दो समूह से चार विषय चयनित करने होंगे।

प्रति वर्ष 1 लाख बच्चे क्यों चुनते है बीबीए कोर्स जानिए।
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  • क्रेडिट के आवंटन के लिए कुल अनुमानित 1200 शिक्षण घंटे प्रति वर्ष होंगे, जिसके लिए 40 क्रेडिट दिए जाएंगे।
  • एनसीआरएफ के तहत क्रेडिट गणना के लिए 30 शिक्षण घंटों को एक क्रेडिट के रूप में गिना जाएगा।
  • विद्यार्थियों की एक सत्र में न्यूनतम 75 प्रतिशत उपस्थिति जरूरी।
  • मुख्य परीक्षाओं में क्रेडिट, विद्यार्थियों के ग्रेड कार्ड में अंकों और ग्रेड के साथ दर्शाया जाएगा।
  • अर्जित क्रेडिट विद्यार्थी के अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट में जमा किया जाएगा जो डिजिलॉकर से जुड़ा होगा।
  • प्रत्येक विषय सात क्रेडिट का होगा, एक सत्र में 210 घंटे आवंटित किए गए हैं।
  • प्रत्येक अध्याय के लिए घंटे आवंटित हैं और इसे आगे सैद्धांतिक और व्यावहारिक घंटों में विभाजित किया गया है।
  • एक क्रेडिट प्रति सप्ताह एक घंटे के शिक्षण या दो घंटे के व्यावहारिक कार्य क्षेत्र कार्य के बराबर होगा। एक क्रेडिट का मतलब 15 घंटे के सिद्धांत (थ्योरी) या 30 घंटे की कार्यशाला या प्रयोगशाला कार्य के बराबर होगा।
Kumar Amrendra

प्रो. कुमार अमरेंद्र बने मास्टर ट्रेनर

झारखण्ड राय विश्वविद्यालय के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के सहायक प्राध्यापक कुमार अमरेंद्र को भारतीय ज्ञान परंपरा का प्रशिक्षण देने के लिए मास्टर ट्रेनर के रूप में चयनित किया गया है। यूजीसी के निर्देश पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत भारतीय ज्ञान परंपरा और चरित्र निर्माण विषय को उच्च शैक्षणिक संस्थानों में एक मूल विषय के रूप शामिल किया गया है।

मास्टर ट्रेनरों का चयन राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित लिखित परीक्षा में उत्तीर्ण होने के उपरांत किया गया है। शिक्षकों का प्रशिक्षण कार्यक्रम 26 फ़रवरी से 2 मार्च तक मध्यप्रदेश के भोपाल में आयोजित किया जायेगा। कुमार अमरेंद्र के चयनित होने पर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. ( डॉ.) सविता सेंगर ने अपने शुभकामना सन्देश में कहा है की कुमार अमरेंद्र विश्वविद्यालय के एक होनहार और मेहनती शिक्षक है। उन्होंने कहा है की हमारे युवाओं को भारत के प्राचीन पारंपरिक ज्ञान से अवगत कराने और इस ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक प्रगति और प्रौद्योगिकियों के साथ स्पष्ट रूप से शामिल करने की आवश्यकता है।

कुलसचिव डॉ. पीयूष रंजन ने बधाई देते हुए कहा कि यूजीसी के दिशानिर्देशों के तहत भारतीय ज्ञान परंपरा और चरित्र निर्माण जैसे विषयों को विश्वविद्यालय ने अपने पाठ्यक्रम में शामिल करते हुए इनका अध्ययन अध्यापन प्रारम्भ कर दिया है। विश्वविद्यालय द्वारा शिक्षकों के लिए भारतीय ज्ञान परंपरा विषय पर एफडीपी का भी आयोजन कराया जा चुका है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने में सहायक साबित होगी जिसमें युवा शक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका है।