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Transforming Indian farms through AI technology 25

कृषि क्षेत्र में AI का बढ़ता दखल, प्रतिदिन 20 हजार से अधिक किसान ई-मित्र का करते हैं उपयोग

हाल के वर्षों में, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का खेती में बड़े पैमाने पर प्रयोग किया गया है। एआई किसानों को किसी विशेष मौसम परिदृश्य के लिए सर्वोत्तम बीज चुनने में मदद करता है। एआई-संचालित समाधान किसानों को कम संसाधनों में अधिक उत्पादन करने और फसल की गुणवत्ता में सुधार करने में मददगार है।भारत सरकार ने किसानों की सहायता के लिए कृषि क्षेत्र में विभिन्न चुनौतियों के समाधान करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता विधियों को अपनाया है।

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कृषि क्षेत्र में AI का उपयोग :
किसान ई-मित्र’, AI -संचालित चैटबॉट : यह पीएम किसान सम्मान निधि योजना से जुड़े प्रश्नों के उत्तर देने में किसानों की सहायता के लिए विकसित किया गया है। कई भाषाओं में उपलब्‍ध यह चैटबॉट अन्य सरकारी कार्यक्रमों में सहायता के लिए विकसित किया जा रहा है। किसान ई-मित्र प्रतिदिन 20,000 से अधिक किसानों के प्रश्नों का उत्तर देता है और अब तक 92 लाख से अधिक प्रश्नों का उत्तर दे चुका है।

राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली : यह प्रणाली जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाले उत्पादन नुकसान से निपटने के लिए ,फसलों में कीटों का पता लगाने के लिए एआई और मशीन लर्निंग का उपयोग करती है। वर्तमान में 10,000 से अधिक कार्यकर्ताओं द्वारा इसका उपयोग किया जा रहा है। यह कीट निगरानी प्रणाली फसलों को कीटों से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए किसानों को कीटों की तस्वीरें खींचने की सुविधा उपलब्ध करती है। अब तक इस प्रणाली से लगभग 1 लाख अपलोड की गई छवियों के साथ 61 फसलों और 400 से अधिक कीटों की पहचान की गई है।

चावल और गेहूं की फसलों के लिए डेटा सेट का उपयोग : चावल और गेहूं की फसलों के लिए उपग्रह, मौसम और मिट्टी की नमी डेटासेट का उपयोग करके फसल स्वास्थ्य मूल्यांकन और फसल स्वास्थ्य निगरानी के लिए क्षेत्र की तस्वीरों का उपयोग करके एआई-आधारित विश्लेषण किया जाता है।

AI का उपयोग करके, किसान अब उन्नत डेटा और एनालिटिक्स टूल तक पहुँच सकते हैं जो बेहतर खेती को बढ़ावा देंगे, दक्षता में सुधार करेंगे और नकारात्मक पर्यावरणीय प्रभावों को कम करते हुए जैव ईंधन और खाद्य उत्पादन में बर्बादी को कम करेंगे । AI और मशीन लर्निंग ने विभिन्न उद्योगों को बदल दिया है।

झारखंड राय विश्वविद्यालय में भारतीय ज्ञान परंपरा पर शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला का होगा आयोजन

झारखंड राय विश्वविद्यालय रांची में शनिवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के आई के एस डिविजन के निर्देशानुसार भारतीय ज्ञान परंपरा पर एक दिवसीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन सिद्धांत फाउंडेशन के द्वारा किया जा रहा है। भारतीय ज्ञान परंपरा विषय पर शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित करने के लिए देश के 13 विश्वविद्यालयों का चयन किया गया है जिनमें झारखंड राय विश्वविद्यालय भी शामिल है। झारखंड राय विश्वविद्यालय के दो शिक्षक मास्टर ट्रेनर के रूप में चयनित हैं।

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शिक्षकों को प्राचीन भारतीय ज्ञान प्रणाली और शिक्षा पद्धतियों के बारे में जानकारी प्रदान करेगी। कार्यशाला का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप भारतीय ज्ञान परंपरा को शामिल करने के उद्देश्यों को पूरा करना है। कार्यशाला शिक्षकों को भारतीय ज्ञान परंपरा के बारे में ज्ञान प्रदान करने और उन्हें अपनी शिक्षण पद्धतियों में शामिल करने में मददगार साबित होगी।

UG – PG के स्टूडेंट्स के लिए IKS अनिवार्य, अर्जित करने होंगे 5% क्रेडिट

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत छात्रों के लिए नए सत्र से एक महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) ने सभी विश्वविद्यालयों को पत्र लिखकर निर्देश जारी किया है कि यूजी-पीजी पाठ्यक्रमों में भारतीय ज्ञान प्रणाली को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। अब छात्रों को अपनी डिग्री के लिए आवश्यक कुल क्रेडिट में से कम से कम 5 प्रतिशत क्रेडिट भारतीय ज्ञान प्रणाली से अर्जित करने होंगे।

पत्र में लिखा है कि कुल क्रेडिट में से 50 फीसदी प्रमुख विषयों (मेजर डिसिप्लिन) से होने जरूरी होंगे। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत उच्च शिक्षा पाठ्यक्रम में IKS के समावेशन हेतू यह दिशा-निर्देश है। इसके तहत स्नातक और स्नातकोत्तर पाठयक्रमों के छात्रों को भारतीय ज्ञान प्रणाली की पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। यूजी और पीजी पाठ्यक्रमों के छात्रों को कुल क्रेडिट में से पांच फीसदी क्रेडिट भारतीय ज्ञान प्रणाली की पढ़ाई के बाद अर्जित करने होंगे।

यूजीसी उच्च शिक्षण संस्थानों के प्रोफेसर को भी भारतीय ज्ञान प्रणाली के तहत प्रशिक्षण दे रहा है। इसका मकसद यूजी और पीजी पाठ्यक्रमों में पढ़ाई से पहले शिक्षकों को भी तैयार करना है।

यूजीसी का यह कदम भारतीय शिक्षा प्रणाली को अधिक समावेशी और समृद्ध बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। इस पहल से न केवल छात्रों को अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर मिलेगा, बल्कि भारत की पारंपरिक शिक्षा प्रणाली को वैश्विक स्तर पर पहचान भी मिलेगी। विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया गया है कि वे जल्द से जल्द अपने पाठ्यक्रमों में भारतीय ज्ञान प्रणाली से संबंधित विषयों को लागू करें, ताकि छात्र इसका लाभ उठा सकें।

भारतीय ज्ञान प्रणाली के अंतर्गत वेद, उपनिषद, आयुर्वेद, योग, ज्योतिष, वास्तु शास्त्र, भारतीय गणित, तर्कशास्त्र, साहित्य, कला, दर्शन और प्राचीन विज्ञान की विभिन्न धाराओं को पढ़ाया जाएगा। छात्रों को इन विषयों से जुड़े पाठ्यक्रमों का अध्ययन करना होगा और 5% क्रेडिट प्राप्त करने होंगे।

यूजीसी ने यह भी सुनिश्चित किया है कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के शिक्षक भारतीय ज्ञान प्रणाली को प्रभावी ढंग से पढ़ा सकें। इसके लिए उन्हें विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे अपने विषयों में भारतीय ज्ञान प्रणाली को जोड़कर छात्रों को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान कर सकें।

यूजीसी का यह कदम भारतीय शिक्षा प्रणाली को अधिक समावेशी और समृद्ध बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। इस पहल से न केवल छात्रों को अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर मिलेगा, बल्कि भारत की पारंपरिक शिक्षा प्रणाली को वैश्विक स्तर पर पहचान भी मिलेगी।

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All information related to BBA course in Ranchi, Jharkhand

BBA COLLEGES IN RANCHI AND OTHER IMPORTANT DETAILS

What is BBA?

BBA stands for Bachelor of Business Administration. It is a three years program which prepares you for managerial roles in various industries.
Depending on your interests, career goals, and strengths you can choose this management focussed program to grow your career in corporates/MNCs.

Here’s a quick guide to help you decide:

Four reasons why you should consider BBA:

You want a career in business, management, or entrepreneurship.
You enjoy subjects like marketing, finance, HR, or operations.
You want to develop leadership, problem-solving, and communication skills.
You plan to do an MBA later, as BBA provides a strong foundation.

10 jobs after BBA and salary (Approx.)

Marketing Executive

Role: Develop marketing strategies, manage campaigns, and analyze market trends.

Salary: ₹3-6 LPA

Business Development Executive

Role: Identify business opportunities, build client relationships, and drive sales.

Salary: ₹3-7 LPA

Human Resource (HR) Executive

Role: Manage recruitment, employee relations, and organizational policies.

Salary: ₹3-6 LPA

Financial Analyst

Role: Analyze financial data, prepare reports, and assist in investment decisions.

Salary: ₹4-8 LPA

Operations Manager

Role: Oversee business operations, improve efficiency, and manage resources.

Salary: ₹5-10 LPA

Retail Manager

Role: Handle store operations, sales, and customer service in retail businesses.

Salary: ₹4-7 LPA

Sales Manager

Role: Lead sales teams, set targets, and drive revenue growth.

Salary: ₹5-10 LPA

Entrepreneur

Role: Start and manage your own business in any sector.

Salary: Varies (can be unlimited based on success)

Digital Marketing Executive

Role: Manage online campaigns, SEO, social media, and brand promotion.

Salary: ₹3-7 LPA

Investment Banker (After Additional Certifications)

Role: Help companies raise capital, manage mergers, and analyze market risks.

Salary: ₹8-20 LPA

Salaries depend on the company, location, and experience level. With an MBA or specialized certifications, you can further increase your earning potential!

BBA colleges in Ranchi (BBA colleges in Jharkhand)

Jharkhand Rai University offers best BBA program for students of Ranchi, Jharkhand. Here, along with classroom study, students get to attend many expert talks, seminars, conferences. These industry talks provide them with opportunities to increase their network, which helps them in their career.
The overall objective of the course is to prepare young professionals to be responsible and responsive to the demands of society in an ever-changing environment. Needless to mention that the Business Lab at the campus can be utilized by the students for further insights.

Few recruiters who have visited our campus in the past are – Axis Bank, Jindal Steel, Reliance Retail, Indiamart, Kotak Life Insurance, Concentrix and many more renowned corporates.

BBA course fees (at Jharkhand Rai University)

Check details of BBA course fees at Jharkhand Rai University here.

 

5 Reasons to Study BBA at Jharkhand Rai University (JRU)

Jharkhand Rai University (JRU), Ranchi, is a premier institution in Jharkhand, offering BBA program designed to equip students with industry-relevant knowledge, management expertise, and problem-solving leadership skills. Here’s why JRU is the ideal choice for pursuing a BBA:

Industry-Oriented Curriculum

The BBA program at JRU is designed to provide in-depth knowledge of business management, finance, marketing, and entrepreneurship, keeping pace with the latest industry trends.

Experienced Faculty & Practical Learning

Learn from expert faculty members with industry experience and engage in hands-on learning through case studies, internships, and live projects.

Placement & Career Opportunities

JRU has strong industry ties, offering excellent placement opportunities with top companies, preparing students for leadership roles in business and management.

Skill Development & Leadership Training

The program focuses on enhancing communication, analytical thinking, and leadership skills, ensuring students develop a competitive edge in the corporate world.

Modern Infrastructure & Student Support

With state-of-the-art facilities, digital learning resources, and mentorship programs, JRU provides a supportive environment for academic and personal growth.

Benefits of doing a BBA

Strong Business Foundation – Gain knowledge in management, marketing, finance, HR, and entrepreneurship.
High Employability – Opens doors to jobs in banking, corporate firms, startups, and government sectors.
Leadership & Management Skills – Develop problem-solving, decision-making, and teamwork abilities.
Pathway to MBA – Provides a solid base for pursuing an MBA for better career prospects.
Entrepreneurial Opportunities – Equips you with skills to start and manage your own business.
Global Career Scope – Many multinational companies prefer BBA graduates for managerial roles.

Why BBA can give you early career advantage?

BBA, your best choice – Unlike general degrees, BBA gives you direct industry-relevant knowledge, making it easier to land a job right after graduation.
Diverse Career Paths – You’re not stuck in one field! BBA grads can work in finance, marketing, HR, consulting, operations, or even start their own business.
Networking Opportunities – Business schools offer internships, corporate exposure, and alumni connections that can boost your career early on.
Practical Learning – Unlike theory-heavy degrees, BBA includes case studies, real-world business challenges, and internships to make learning hands-on.
Flexibility for Future Studies – If you decide later that you want to specialize (like in Data Analytics, International Business, or Digital Marketing), BBA allows for smooth transitions.

How to increase your salary after BBA?

Pursue MBA (₹10-30 LPA post-MBA from top B-schools)
Get certifications (CFA, Digital Marketing, HR Analytics, etc.)
Gain experience & develop leadership, communication, and analytical skills
Work in high-demand industries (finance, tech, consulting, e-commerce)

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28 मार्च : राष्ट्रीय खरपतवार प्रशंसा दिवस

कुछ खरपतवार पर्यावरण और व्यक्तियों के लिए फायदेमंद होते हैं। उनमें से कुछ न केवल पौष्टिक खाद्य पदार्थ और वनस्पति के रूप में काम करते हैं। बल्कि औषधीय गुण भी रखते हैं। राष्ट्रीय खरपतवार प्रशंसा दिवस हर साल 28 मार्च को मनाया जाता है। राष्ट्रीय खरपतवार प्रशंसा दिवस हमें यह याद दिलाता है कि खरपतवार सिर्फ़ वे पौधे नहीं होते जो वहाँ उगते हैं जहाँ आप नहीं चाहते, बल्कि वे हमारे लिए उपयोगी भी हो सकते हैं। राष्ट्रीय खरपतवार प्रशंसा दिवस की स्थापना लोगों को यह याद दिलाने के लिए की गई थी कि खरपतवार सिर्फ़ एक पौधा है जो वहाँ उगता है जहाँ आप नहीं चाहते कि वह उगे।

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झारखंड में पाए जाने वाले प्रमुख खरपतवार :
सांवां, कोदो, मकड़ा वनचरी, गेहूं का मामा, जंगली जई, मोथा, लुम्बर घास, बथुआ चटरी-मटरी, हिरनखुरी, सैंजी, अंकरी, अंकरा, जंगली पालक, जंगली गाजर, पचकोटा, लहसुआ, गाजर घास प्रमुख हैं।

गेहूं की फसल का दुश्मन है ‘गेहूं का मामा’
भारत में रबी फसल का सबसे खतरनाक खरपतवार फालारिस माइनर यानि मंडूसी है जिसे गुल्ली डंडा, गेहूं का मामा और कनकी भी कहा जाता हैं। यह आम धारणा हौ कि मंडूसी का बीज भारत में उस समय पर आया जब हमने साठ के दशक में बड़े पैमाने पर मैक्सिको से बौनी किस्म की गेहूं का बीज आयात किया.गेहूं की की ज्यादा पैदावार देने वाली बौनी किस्मों के साथ-साथ अधिक खाद से पानी देने के परिणाम स्वरूप और मंडूसी को भी वृद्धि का अनुकूल वातावरण मिला, जिसके कारण तेजी से ये फैलता गया।

गेहूँ के खेत में गेहूँ के मामा के पौधों की पहचान काफी मुश्किल होती है लेकिन ध्यान से देखने पर पता चलता है कि गेहूँ के मामा के पौधे सामान्यतः गेहूँ के मुकाबले हल्के रंग के होते है। गेहूँ के मामा में कैग्यूद तथा गेहूँ में आरिकल्ज ज्यादा विकसित होते है।

आइसोप्रोट्यूरान नामक खरपतवारनाशी को सत्तर के दशक के अंत में गेहूँ के मामा के नियंत्रण के लिए प्रमाणित किया गया। जो लगभग एक दशक तक बहुत प्रभावशाली भी रहा। लेकिन पूरी तरह से इसी खरपतवारनाशी पर हमारी निर्भरता का परिणाम यह हुआ कि इस खरपतवारनाशी का गेहूँ के मामा पर असर न होने की खबरे उत्तर-पश्चिम भारत में नब्बे के दशक के आरम्भ में मिलनी शुरू हुई।

आइसोप्रोट्यूरान के असरदार न रहने से पिछले सालो में गेहूँ उत्पादन में भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है। गेहूँ का मामा का नियंत्रण आज गेहूँ की उत्पादकता वृद्धि के रास्ते में एक प्रश्न चिन्ह बनकर रह गया है।

गेहूं का मामा (फालारिस माइनर) नियंत्रण :

  • खरपतवार रहित बीज का प्रयोग करें
  • सही समय पर खरपतवारनाशी का प्रयोग करें
  • सही दूरी पर बुवाई करें
  • मेड़ पर बिजाई करें
  • खरपतवारनाशी का प्रयोग करें
btech CSE

B.Tech CSE :भारत में इंजीनियरिंग का भविष्य । बीटेक सीएसई क्यों चुनें?

आईटी के क्षेत्र में जितनी तेजी से वृद्धि हो रही है ,जैसे-जैसे प्रौद्योगिकी का विस्तार हो रहा है, विशेषज्ञों का मानना है कि आईटी पेशेवरों की मांग भी तेजी से बढ़ेगी। ऐसे इंजीनियरों की जरूरत भी बढ़ रही है जो इस तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्र के साथ तालमेल बिठा सकें। बीटेक सीएसई का अध्ययन छात्रों को आईटी में सफल करियर के लिए आवश्यक कौशल विकसित करने में मदद करता है।

B.Tech CSE STRIP

बहुत से लोग आश्चर्य करते हैं कि कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग वास्तव में क्या है और यह इंजीनियरिंग के अन्य ब्रांच से भिन्न कैसे है। यह लेख कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग (B Tech CSE) के अध्ययन के विभिन्न पहलुओं पर एक नज़र डालता है। हम यह भी बताएंगे कि यदि आप आईटी या प्रोग्रामिंग में अपना करियर बनाना चाहते हैं तो यह आपके लिए सबसे अच्छे विकल्पों में से एक क्यों हो सकता है। तो चलिए इस विषय पर सीधे चर्चा करते हैं!

बीटेक कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग क्या हैं ?
बी टेक सीएसई इंजीनियरिंग में डिग्री है। यह चार साल की डिग्री है, लेकिन यह आपकी नियमित चार साल की डिग्री की तरह नहीं है। इन चार वर्षो के दौरान विद्यार्थियों को डेवलपर्स, सिस्टम प्रशासक या नेटवर्क इंजीनियर के रूप में प्रतिबद्ध कैरियर बनाने के लिए आवश्यक क्षमताओं और ज्ञान से लैस किया जाता है। रोजगार और बाजार की तलाश करने वालों के लिए, बी.टेक कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग नौकरी की संभावनाओं की विविधता का आकर्षक विकल्प बनाती है। यह कोर्स विशेष कंप्यूटर प्रोग्राम भाषाएं और कंप्यूटर तकनीक प्रदान करता है जो कंप्यूटर एप्लीकेशन के विभिन्न क्षेत्रों को विकसित करने में मदद करते हैं। यह कोर्स छात्रों की रचनात्मकता को प्रोत्साहित करने के लिए भी फायदेमंद है। यह कोर्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, बिग डेटा एनालिटिक्स, डेटाबेस मैनेजमेंट, मोबाइल कंप्यूटिंग आदि जैसे विशिष्ट क्षेत्रों को कवर करता है।

बीटेक सीएसई कोर्स क्यों चुने ?
बीटेक सीएसई इंजीनियरिंग, प्रौद्योगिकी और कंप्यूटर विज्ञान में अपना करियर बनाने के इच्छुक छात्रों के बीच एक लोकप्रिय कोर्स है। यह भारत भर के कॉलेजों में सबसे अधिक मांग वाले पाठ्यक्रमों में से एक है। बीटेक सीएसई को बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी – कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग (बीटेक-सीएसई) के रूप में भी जाना जाता है।आईटी उद्योग में बीटेक सीएसई कोर्स का एक मजबूत सार है।

बीटेक सीएसई में करियर संभावनाएं:
कंप्यूटर विज्ञान में करियर की तलाश करने वालों के लिए बीटेक सीएसई का अध्ययन करना आवश्यक है। बीटेक सीएसई कंप्यूटर विज्ञान के मूल सिद्धांतों को शामिल करता है और विषय की गहन समझ प्रदान करता है। यह डिग्री छात्रों को भविष्य को आकार देने वाले आईटी उद्योग में उच्च-स्तरीय अध्ययन और करियर के लिए तैयार करने में मदद करती है।

सॉफ्टवेयर इंजीनियर:
कंप्यूटर सॉफ्टवेयर इंजीनियर मशीनों के लिए ऑपरेटिंग सिस्टम और एप्लिकेशन तैयार करते हैं। वे सिस्टम कोडर, विश्लेषक और अन्य डेवलपर्स के साथ मिलकर फ्रेमवर्क तैयार करते हैं, क्षमताएं निर्धारित करते हैं और प्रदर्शन इंटरफेस चुनते हैं। कंप्यूटर सॉफ्टवेयर डिजाइनरों द्वारा प्रदान की जाने वाली अतिरिक्त सेवाओं में उपयोगकर्ता की जरूरतों का निरीक्षण, स्टाइल घटक सलाह और सॉफ्टवेयर सेटअप नियंत्रण शामिल हैं। जब वे सॉफ्टवेयर नेटवर्क बनाते हैं, तो डेवलपर्स को परिणामों का अनुमान लगाने के लिए गणितीय मॉडल और वैज्ञानिक परीक्षाओं पर विचार करना चाहिए।

वेब डिज़ाइनर/डेवलपर:
वेब डेवलपमेंट आपकी वेबसाइट को सर्वश्रेष्ठ संभव उपयोगकर्ता अनुभव देने की कुंजी है। वेब डिज़ाइनर/डेवलपर्स दिखने में शानदार डिज़ाइन बनाने, ग्राफ़िक्स और सामग्री को एकीकृत करने, वेबसाइट के प्रदर्शन को बेहतर बनाने, क्षमता बढ़ाने और अपने काम का कठोर परीक्षण करने के लिए ज़िम्मेदार होते हैं। यह हर डिवाइस पर वेबसाइट के निर्बाध प्रदर्शन को सुनिश्चित करता है।

एआई इंजीनियर:
एआई इंजीनियर तकनीकी दुनिया के बहुज्ञ होते हैं। वे जटिल डीप-लर्निंग न्यूरल नेटवर्क के माध्यम से एआई मॉडल को मशीन-लर्निंग एल्गोरिदम के साथ जोड़ते हैं जो कंपनियों को महत्वपूर्ण निर्णय लेने में मदद करते हैं। इन मॉडलों की ताकत मध्यम से लेकर जोरदार तक होती है।

कंप्यूटर हार्डवेयर इंजीनियर:
कंप्यूटर सिस्टम और संबंधित घटकों पर शोध, डिजाइन, विकास और परीक्षण करते हैं। ये हाई-टेक विशेषज्ञ सर्किट बोर्ड, मेमोरी सिस्टम और जटिल इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम बनाने के लिए विनिर्माण में काम करते हैं। प्रौद्योगिकी की दुनिया को आकार देने और नेटवर्क कनेक्टिविटी और विश्वसनीयता में सुधार करने में उनकी विशेषज्ञता महत्वपूर्ण है।

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गेट परीक्षा 2025 में झारखंड राय विश्वविद्यालय के 25 छात्र सफल

झारखंड राय विश्वविद्यालय रांची के बीटेक माइनिंग इंजीनियरिंग के 25 विद्यार्थियों ने गेट परीक्षा 2025 में सफलता प्राप्त किया है। ग्रेजुएट एप्टीट्यूड टेस्ट इन इंजीनियरिंग (GATE) परीक्षा का परिणाम 19 मार्च को जारी किया गया है।गेट की परीक्षा में 8 विद्यार्थियों का रैंक 1000 के अंदर है। बीटेक माइनिंग इंजीनियरिंग के सभाजीत मांझी ने 253 वां रैंक प्राप्त किया है, अलिकट्टी रविंद्र को 380, नितेश कुमार को 431, कोंडा पति भार्गव को 666, बंटी कुमार को 710, सौरव यादव को 904, अंकित कुमार को 976, सत्यम सिंह ने 976 वा रैंक प्राप्त किया है।

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दो विद्यार्थियों नितेश कुमार एवं राहुल कुमार ने इस बार दो विषयों में गेट परीक्षा 2025 उत्तीर्ण करने में सफलता प्राप्त किया है।

माइनिंग इंजीनियरिंग के 25 विद्यार्थियों के एक साथ गेट परीक्षा में सफल होने पर झारखंड राय विश्वविद्यालय की चांसलर प्रो० डॉ ० सविता सेंगर ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए सभी के उज्जवल भविष्य की कामना की है।

उन्होंने कहा की राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप कार्य करते हुए विश्वविद्यालय कार्य कर रहा है। विद्यायर्थियों को प्रतियोगी परीक्षा के लिए भी बेहतर माहौल प्रदान किया जाता है। पिछले कुछ वर्षों में विद्यार्थियों ने देश की कई प्रतिष्ठित परीक्षाओं जैसे सीयूईटी, जी पैट, सीएस में सफलता प्राप्त किया है। सरकारी क्षेत्र की नियुक्तियों में भी कई छात्र छात्रों ने सफलता अर्जित किया है।

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विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो० पीयूष रंजन ने गेट परीक्षा में उत्तीर्ण छात्रों को अपनी शुभकामना देते हुए कहा की विश्वविद्यालय गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा के साथ प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी को भी महत्त्व देता है। पूर्व में भी विश्वविद्यालय के छात्र छात्राओं ने कई परीक्षाओं में सफलता प्राप्त कर विश्वविद्यालय का नाम रौशन किया है। इतनी अधिक संख्या में छात्रों की सफलता के पीछे गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा , कठोर प्रशिक्षण एवं माइनिंग इंजीनियरिंग विभाग के शिक्षकों की कड़ी मेहनत शामिल है।

झारखंड राय विश्वविद्यालय माइनिंग इंजीनियरिंग विभाग के शिक्षकों ने विद्यारर्थियों की सफलता पर प्रत्तिक्रिया देते हुए कहा की झारखंड में निजी विश्वविद्यालयों में केवल यहाँ माइनिंग करने वाले विद्यार्थियों ने इतनी बड़ी संख्या में इस वर्ष सफलता प्राप्त किया है।

20 मार्च विश्व गौरैया दिवस : प्रकृति के नन्हे दूतों की भूमिका को श्रद्धांजलि

प्रत्येक वर्ष 20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस मनाया जाता है, जो जैव विविधता और पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में गौरैया के महत्व पर प्रकाश डालता है। नन्ही चिड़िया गौरेया दुनिया के कई देशों में पाई जाती है। हर साल ये दिवस विलुप्त की कगार पर आ गई गौरैया के प्रति लोगों की जागरूकता को बढ़ाने के लिए इसके संरक्षण के लिए मनाया जाता है। तेजी से बढ़ते प्रदूषण, बाज-चील, पतंगों से समेत अन्य कई कारणों से गौरेया की संख्या में बहुत कमी आई है। जिसकी वजह से अब नन्ही चिड़िया का अस्तित्व खत्म होने की कगार है, जिसे हम सबको मिलकर बचाना है। गौरैया की लगातार घटती संख्या को लेकर एक रिपोर्ट में बताया गया कि इस पारिस्थितिकी तंत्र को नष्ट करने के लिए इंसान ही जिम्मेदार है।

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गौरैया की घटती संख्या के पीछे जो कारण सामने आए हैं वो उनके रहवास की समस्या के साथ सबसे बड़ा कारण मोबाइल रेडिएशन हैं। शहरों में रहवास ना होने की वजह से गौरैया करंट या तीव्र ध्वनि की चपेट में आने से विलुप्त होती जा रही है। साथ ही मोबाइल रेडिएशन की वजह से मादा गौरैया की प्रजनन क्षमता भी खत्म हो जाती है।

साल 2010 में पहली बार 20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस मनाया गया था। विश्व गौरैया दिवस, नेचर फॉरएवर सोसाइटी ऑफ इंडिया के साथ-साथ फ्रांस की इकोसेज एक्शन फाउंडेशन की शुरू की गई एक पहल है। सोसाइटी की शुरुआत फेमस पर्यावरणविद् मोहम्मद दिलावर ने की थी। उन्हें 2008 में टाइम मैगजीन ने “हीरोज ऑफ एनवायरमेंट” में शामिल किया गया था।

छोटी चिड़िया गौरैया का वैज्ञानिक नाम पासर डोमेस्टिकस और सामान्य नाम हाउस स्पैरो है।गौरैया पासेराडेई परिवार की सदस्य है ,लेकिन इसे वीवरपिंच का परिवार का भी सदस्य माना जाता है।इस चिड़िया की ऊंचाई 16 सेंटीमीटर और विंगस्पैन 21 सेंटीमीटर होते हैं। वहीं एक गौरैया का वजन 25 से 40 ग्राम होता है।
अपना जीवनयापन करने के लिए गौरैया अनाज और कीड़े खाती है। ये गौरेया शहरों की अपेक्षा गांवों में रहना ज्यादा पसंद है। शहर के प्रदूषण और शोर-शराबा गौरेया को रास नहीं आता है।खेती-किसानी में रसायनिक उर्वरकों का बढ़ता प्रयोग बेजुबान पक्षियों और गौरैया के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया है. आहार भी जहरीले हो चले हैं। केमिलयुक्त रसायनों के अंधाधुंध प्रयोग से कीड़े मकोड़े भी विलुप्त हो चले हैं। जिससे गौरैयों भोजन का भी संकट खड़ा हो गया है। उर्वरकों के अधिक प्रयोग के कारण मिट्टी में पैदा होने वाले कीड़े-मकोड़े समाप्त हो चले हैं जिससे गौरैयों को भोजन नहीं मिल पाता है।

विश्व गौरैया दिवस 2025 का थीम ‘ प्रकृति के नन्हे दूतों को श्रद्धांजलि ‘ है, जो पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में गौरैया की महत्वपूर्ण भूमिका और संरक्षण प्रयासों की तत्काल आवश्यकता पर प्रकाश डालता है। यह थीम स्वस्थ पर्यावरण के संकेतक के रूप में गौरैया के महत्व पर जोर देती है और इन नन्हे दूतों की रक्षा के लिए अधिक जागरूकता और कार्रवाई का आह्वान करती है।

गौरैया को जैव संकेतक के रूप में पहचानते हुए, थीम इस बात पर जोर देती है कि उनकी उपस्थिति या अनुपस्थिति पर्यावरण के समग्र स्वास्थ्य को कैसे दर्शाती है। एक समृद्ध गौरैया आबादी पर्याप्त खाद्य स्रोतों, स्वच्छ हवा और पर्याप्त घोंसले के स्थानों के साथ एक संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत देती है, जबकि उनकी संख्या में गिरावट पर्यावरण क्षरण का संकेत दे सकती है। थीम गौरैया आबादी की रक्षा के लिए जागरूकता बढ़ाने और सक्रिय उपायों का आह्वान करती है, जिसमें प्राकृतिक आवासों को संरक्षित और बहाल करना, प्रदूषण को कम करना और हानिकारक कीटनाशकों के उपयोग को कम करना शामिल है।

विश्व गौरैया दिवस मनाने के तरीके :

  • पक्षी घर बनाएं: पक्षी घर बनाकर और उन्हें अपने बगीचे या समुदाय में रखकर गौरैया के लिए सुरक्षित घोंसले के स्थान बनाएं।
  • देशी पौधे लगाएं: देशी पौधे लगाने से गौरैया और अन्य पक्षियों को भोजन और आश्रय मिल सकता है।
  • कीटनाशकों का प्रयोग कम करें: गौरैया के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने के लिए अपने बगीचे में कीटनाशकों का प्रयोग कम से कम करें।
  • जागरूकता कार्यक्रमों में भाग लें: स्थानीय कार्यक्रमों और कार्यक्रमों में शामिल हों जिनका उद्देश्य गौरैया संरक्षण के बारे में जागरूकता बढ़ाना है।
  • गौरैया को भोजन दें: गौरैया के लिए अतिरिक्त भोजन का स्रोत उपलब्ध कराने के लिए अपने बगीचे या बालकनी में पक्षियों के लिए बीज, अनाज और पानी के बर्तन रखें।

प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना के लिए आवेदन अब 31 मार्च तक

प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना केंद्र सरकार की ख़ास पहल है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत की टॉप 500 कंपनियों से इंटर्नशिप स्कीम में भागीदारी बढ़ाने की अपील की है। केंद्रीय वित्त मंत्री दिनों PMIS APP लांच किया वहीं कोलकाता में प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना से जुड़ी जानकारियां देने के लिए पहला सुविधा केंद्र भी शुरू हो गया है। सरकार की इस योजना का मुख्य उद्देश्य दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों के युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करना और उन्हें उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल प्रदान करना है। वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान इस योजना के तहत 1.25 लाख इंटर्नशिप प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है. इसकी पायलट परियोजना 3 अक्टूबर 2024 को शुरू की गई थी. इस योजना में 327 से अधिक कंपनियों ने भाग लिया और अब तक 1.18 लाख से अधिक इंटर्नशिप के अवसर अधिसूचित किए गए हैं। PM Internship Scheme के जो भी युवा फॉर्म भरकर निबंधन करना चाहते हैं मोबाइल एप्प उनके लिए मददगार साबित होगा जबकि इंटर्नशिप से जुड़ी हर जानकारी सुविधा केंद्रों में मिलेगी। केंद्र सरकार की योजना कोलकाता की ही तरह देशभर में 47 सुविधा केंद्र बनाने की है। केंद्र सरकार का लक्ष्य है कि 1 करोड़ युवाओं को इंटर्नशिप का मौका दिया जाए। प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना के तहत युवाओं को 12 महीने तक ₹5,000 प्रति माह और ₹6,000 का एकमुश्त अनुदान मिलेगा। प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना का ऑफिशियल पोर्टल चलाने वाली संस्था भास्कराचार्य इंस्टीट्यूट फॉर स्पेस एप्लीकेशन जियोइंफॉर्मेटिक्स (BISAG) ने ही इस मोबाइल एप को बनाया है।

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क्या है पीएम इंटर्नशिप योजना ?
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 23 जुलाई को अपने बजट भाषण के दौरान युवाओं के लिए प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना की घोषणा की थी। इस योजना के तहत केंद्र की मोदी सरकार ने युवाओं को रोजगार के योग्य बनाने के उद्देश्य से पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है।

इस योजना के तहत इंटर्नशिप के लिए चयनित युवाओं को 5,000 रुपये प्रतिमाह मिलेंगे। इसके अतिरिक्त उन्‍हें इंटर्नशिप ज्वाइन करने पर 6000 रुपये की मदद दी जाएगी। इंटर्नशिप की अवधि 12 माह की होगी। चालू वित्त वर्ष में 1.25 लाख युवाओं को इंटर्नशिप का अवसर उपलब्ध कराने की सरकार की योजना है। इस योजना पर 800 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

इस योजना के तहत 5 साल में एक करोड़ युवाओं को प्रशिक्षण देने का बहरहाल लक्ष्‍य रखा गया है। वित्‍त मंत्री सीतारमण ने वित्‍त वर्ष 2024-25 के अपने बजट भाषण में कहा था कि सरकार इंटर्नशिप प्रदान करने के लिए एक व्‍यापक योजना शुरू करने वाली है। इसके तहत 5 साल में 1 करोड़ युवाओं को 500 शीर्ष कंपनियों में प्रशिक्षण का अवसर दिया जाएगा। उन्‍हें व्‍यापार के अलग- अलग क्षेत्र में 12 माह तक गुर सीखने के साथ ही रोजगार का अवसर भी प्राप्त होगा। इसके साथ ही सभी इंटर्नों को बीमा की सुविधा भी दी जाएगी।

पहले चरण में उम्मीदवार पोर्टल पर 12 से 25 अक्टूबर के बीच अपना रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। आवेदन करने वालों को 26 अक्टूबर को फाइनल किया जाएगा। कंपनियां उम्मीदवारों का चयन 12 अक्टूबर से 7 नवंबर के बीच करेगी। इसके बाद चयनित उम्मीदवारों के पास कंपनियों की इंटर्नशिप पेशकश स्वीकार करने के लिए 8 से 15 नवंबर तक का समय दिया जाएगा। इंटर्नशिप 2 दिसंबर से शुरू होगी जो कि 12 महीने तक चलेगी।

इंटर्नशिप के लिए चयनित युवाओं को प्रधानमंत्री जीवन ज्‍योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत बीमा कवर दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त कंपनियां चयनित उम्मीदवारों को अतिरिक्त बीमा दुर्घटना योजना उपलब्ध करा सकती है। पायलट परियोजना का प्रथम चरण दिसंबर के प्रथम सप्ताह में पूरी होने की संभावना है। इसके बाद इसे पूरी तरह लागू किया जाएगा। केंद्र सरकार की नौकरियों में आरक्षण का नियम इस योजना में भी लागू होगा।

कैसे करें रजिस्ट्रेशन ?

  • प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना की आधिकारिक वेबसाइट pminternship.mca.gov.in पर जाएं।
  • होम पेज पर दिए गए रजिस्ट्रेशन के लिंक पर क्लिक करें।
  • मांगी गई डिटेल को दर्ज करें और डॉक्यूमेंट अपलोड करें।
  • एक बार फार्म जरूर क्रॉस चेक करें इसके बाद ही सबमिट करें।

आवेदन करने के लिए पात्रता:
फुल टाइम नौकरी और पढ़ाई नहीं कर रहे 21 साल से 24 साल के युवा इसके लिए पोर्टल के माध्‍यम से अपना आवेदन कर सकते हैं। ऑनलाइन एजुकेशन प्रोग्राम से जुड़े उम्‍मीदवार आवेदन करने के पात्र हैं। जिन उम्मीदवारों ने हाई स्कूल, उच्च माध्यमिक स्कूल से परीक्षा पास की है, आईटीआई का प्रमाण पत्र है, पॉलिटेक्निक संस्थान से डिप्लोमा है, या बीए, बीएससी, बीकॉम, बीसीए, बीबीए, बी फार्मा जैसी डिग्री के साथ स्नातक हैं, वे इसके लिए पात्र होंगे।

कौन नहीं कर सकता है आवेदन:
इसमें जिन उम्मीदवारों के परिवार में किसी सदस्य की सालाना आय 2023-24 में 8 लाख रुपये से अधिक थी, उन्हें इस योजना से बाहर रखने का प्रावधान किया गया है।

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बीबीए और बीकॉम ऑनर्स में कौन है बेहतर ? किसमें है करियर बनाने के ज्यादा मौके

BBA और B.Com दोनों ही अंडर ग्रेजुएट कोर्स हैं। दोनों में कई समानताएं हैं। दोनों ही डिग्री कोर्स में करियर बनाने के कई विकल्प मौजूद हैं। कौन सा कोर्स बेहतर है, यह विद्यार्थी की रुचियों और करियर लक्ष्यों पर निर्भर करता है।

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BBA का फ़ुल फ़ॉर्म है – बैचलर ऑफ बिज़नेस एडमिनिस्ट्रेशन जबकि B.COM कोर्स का पूरा नाम है – बैचलर ऑफ़ कॉमर्स। दोनों पाठ्यक्रम 3 वर्षीय हैं और 6 सेमेस्टर में बांटे गए हैं।

बीबीए में प्रबंधन, विपणन, ह्यूमन रिसोर्स, और फाइनेंस जैसे विषय पढ़ाए जाते हैं. वहीं, बीकॉम में अकाउंटिंग, फाइनेंस, इकोनॉमिक्स, और ऑडिटिंग जैसे विषय पढ़ाए जाते हैं। व्यावहारिक अनुभव और इंटर्नशिप इस कोर्स के महत्वपूर्ण अंग है।

बीकॉम में व्यापार और वाणिज्य विषय के सैद्धांतिक अवधारणाओं पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। बीकॉम में अकाउंटिंग, वित्त, और व्यवसाय कानून में करियर बनाया जा सकता है ।

BBA कोर्स क्या है?
बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (BBA) की डिग्री प्रबंधन और व्यवसाय के महत्व पर केंद्रित है। इसमें मार्केटिंग, वित्त, मानव संसाधन और संचालन प्रबंधन जैसे विषय शामिल हैं। बीबीए कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों के प्रबंधकीय कौशल और नेतृत्व क्षमताओं को विकसित करना है, जो इसे व्यवसाय प्रबंधन और प्रशासन में काम करने के इच्छुक लोगों के लिए आदर्श बनाता है।

B.Com कोर्स क्या है?
बैचलर ऑफ कॉमर्स (B.Com) की डिग्री व्यवसाय और वाणिज्य सिद्धांतों की व्यापक समझ प्रदान करती है। इसमें अकाउंटिंग, वित्त, अर्थशास्त्र और प्रबंधन जैसे विषय शामिल हैं। बीकॉम कार्यक्रम विश्लेषणात्मक और वित्तीय कौशल विकसित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो इसे अकाउंटिंग, वित्त और अन्य वाणिज्य-संबंधित क्षेत्रों में करियर के लिए उपयुक्त बनाता है।

BBA करने के फ़ायदे :

  • प्रबंधकीय और नेतृत्व कौशल विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करता है।
  • एमबीए करने के लिए एक ठोस आधार प्रदान करता है।
  • व्यवसाय प्रबंधन में विविध कैरियर के अवसर प्रदान करता है।

B.COM करने के फ़ायदे:

  • मजबूत विश्लेषणात्मक और वित्तीय कौशल का निर्माण करता है।
  • वित्त, लेखांकन और वाणिज्य में विभिन्न भूमिकाओं के लिए छात्रों को तैयार करता है।
  • उद्यमिता सहित कैरियर विकल्पों में लचीलापन प्रदान करता है।

BBA और B.Com में समानताएं क्या है जानिए:

    बीबीए और बीकॉम कोर्स में कई तरह की समानताएं हैं.

  1. मैनेजमेंट और कॉमर्स से जुड़ा सिलेबस.
  2. दोनों कोर्स की अवधि 3 साल है.
  3. दोनों में एडमिशन के लिए 12वीं क्लास में कॉमर्स या साइंस स्ट्रीम में पास होना जरूरी है.
  4. प्रोफेशनल स्किल डेवलपमेंट पर फोकस.
  5. फाइनेंस, अकाउंटिंग और इकोनॉमिक्स की पढ़ाई.
  6. बिजनेस मैनेजमेंट, मार्केटिंग और ह्यूमन रिसोर्सेस में करियर के ऑप्शन.
  7. हायर एजुकेशन के विकल्प, जैसे कि एमबीए, एमकॉम, सीए, आईसीडब्ल्यूए.
  8. बिजनेस लीडरशिप और मैनेजमेंट स्किल्स को बढ़ावा.
  9. इंडस्ट्री और बिजनेस के विभिन्न सेक्टर में रिसर्च और एनालिटिकल स्किल डेवलपमेंट.
  10. प्रोफेशनल नेटवर्किंग और कम्युनिकेशन स्किल्स डेवलपमेंट

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न :
स्टूडेंट्स अकसर यह सवाल पूछते हैं कि बीबीए और बीकॉम में कौन सा कोर्स बढ़िया है, किस्में जॉब्स के अवसर ज्यादा है और किस कोर्स की डिमांड अभी ज्यादा है। इन सवालों पर हमारे एक्सपर्ट की राय जानिए।

बीबीए या बीकॉम, किसकी सैलरी ज्यादा है?
बीबीए और बीकॉम दोनों स्नातक अच्छा वेतन कमा सकते हैं, लेकिन यह उद्योग और विशिष्ट नौकरी की भूमिका पर निर्भर करता है। आम तौर पर, बीबीए स्नातक प्रबंधकीय भूमिकाओं में अधिक कमा सकते हैं, जबकि बीकॉम स्नातक वित्त और लेखा में अधिक कमा सकते हैं।

बीबीए या बीकॉम – कौन सा बेहतर है?
दोनों ही कोर्स अलग-अलग हैं, बीबीए बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन और मैनेजमेंट पर केंद्रित है, जबकि बीकॉम अकाउंटिंग, फाइनेंस और इकोनॉमिक्स जैसे कॉमर्स सिद्धांतों पर केंद्रित है। व्यक्तिगत पसंद के आधार पर, कोई भी यह तय कर सकता है कि उसके लिए कौन सा बेहतर है।

बीबीए या बीकॉम में नौकरी के अधिक अवसर किसमें हैं?
दोनों ही डिग्रियाँ अलग-अलग क्षेत्रों में करियर के भरपूर विकल्प प्रदान करती हैं। बीबीए स्नातकों को अक्सर प्रबंधन और प्रशासन में भूमिकाएँ मिलती हैं, जबकि बीकॉम स्नातकों को वित्त, लेखा, परामर्श और अन्य क्षेत्रों में विविध अवसर मिलते हैं।

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प्रो ० महादेव लाल श्रॉफ जिनकी याद में मनाया जाता है राष्ट्रीय फार्मेसी शिक्षा दिवस।

भारतीय फार्मेसी शिक्षा के वास्तुकार : प्रो. महादेव लाल श्रॉफ के योगदान को याद करते हुए प्रतिवर्ष 6 मार्च को राष्ट्रीय फार्मेसी शिक्षा दिवस मनाया जाता है। वह भारत में फार्मेसी शिक्षा के जनक के तौर पर जाने जाते हैं। वह निश्चित रूप से इस देश में काम करने वाले सभी फार्मासिस्टों के लिए उनकी शाखाओं और कर्तव्यों की विविधता के बावजूद एक आदर्श बने हुए हैं। उन्होंने भारत में फार्मेसी शिक्षा के निर्माण में महान भूमिका निभाई, उन्होंने फार्मेसी पेशे के अन्य पहलुओं के विकास में भी योगदान दिया। महादेव लाल श्रॉफ का जन्म 6 मार्च, 1902 को बिहार के दरभंगा में हुआ था।

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प्रोफेसर श्रॉफ ने अपने प्रयासों से 1940 में बी.एच.यू. में एम.फार्मा की शिक्षा प्रारम्भ की थी. धीरे-धीरे भारत में विभिन्न स्थानों पर फार्मेसी शिक्षा का प्रसार हुआ. बता दें कि महादेव लाल श्रॉफ का जन्म बिहार के दरभंगा शहर में 6 मार्च 1902 को हुआ था. 25 अगस्त 1971 को उनका निधन हुआ था।

*नमक सत्याग्रह में 6 माह की जेल।*
प्रो o श्रॉफ केवल फार्मेसी शिक्षा में योगदान के कारण याद कीजिए जाते है ऐसा नहीं है उनके अंदर देशभक्ति की भावना भी कूट कूट कर भरी थी। श्री जमनालाल बजाज की प्रेरणा से उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से भाग लेना शुरू किया।
मार्च 1930 में भारत में ब्रिटिश सरकार द्वारा लगाए गए नमक कर के खिलाफ ‘नमक सत्याग्रह’ शुरू हुआ, तो श्रॉफ बिहार में हुए आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल हुए, जिसके कारण उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और छह महीने की जेल हुई। वे छह महीने तक हजारीबाग जेल में रहे, क्योंकि ब्रिटिश शासन की नो प्ली, नो प्लीडर, नो अपील नीति सत्याग्रहियों के साथ सख्ती से पेश आती थी। जेल से लौटने पर श्री बजाज ने अपनी वैज्ञानिक प्रतिभा को राजनीतिक गतिविधियों में इस्तेमाल करने के बजाय किसी शैक्षणिक क्षेत्र में उपयोग करना बेहतर समझा।

*फार्मेसी शिक्षा के महामना*
प्रो. श्रॉफ बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के स्टाफ में शामिल होने के बाद मालवीय जी को आने वाले वर्षों में भारत में फार्मास्युटिकल साइंस के पाठ्यक्रमों की महान क्षमता और संभावनाओं के बारे बताया , महान दूरदर्शी मालवीय जी को प्रस्ताव के महत्व को समझने में अधिक समय नहीं लगा और उनके संरक्षण में प्रो. श्रॉफ ने पहली बार भारत में फार्मास्युटिकल शिक्षा को व्यवस्थित करने का कार्य किया। उन्होंने इस परियोजना के लिए धन इकट्ठा करने का भी बीड़ा उठाया और इस तरह 1932 में पहली बार बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में फार्मास्युटिकल केमिस्ट्री का खंड स्थापित करने में सफल रहे, 1937 से बीएचयू में पूर्ण विकसित फार्मास्यूटिक्स विभाग का विकास किया। यह संयुक्त राज्य अमेरिका की शिक्षा प्रणाली के बराबर आधुनिक फार्मास्युटिकल शिक्षा की शुरुआत थी। इस प्रकार प्रो. श्रॉफ ने इस देश में फार्मास्युटिकल शिक्षा की आधारशिला रखी। इसके बाद, प्रो. श्रॉफ की गतिशीलता ने भारत के फार्मास्युटिकल क्षेत्र में एक तूफान खड़ा कर दिया। भारतीय फार्मेसी स्वर्गीय प्रोफेसर महादेव लाल श्रॉफ के प्रति बहुत आभारी है, जिन्होंने पहली बार इस देश में फार्मेसी शिक्षा को उत्कृष्ट बनाया और घरेलू जरूरतों के साथ-साथ विदेशों की मांगों के लिए प्रशिक्षित जन शक्ति प्रदान की।