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Bsc in Radiology - Blog JRU

2025 में किस दिन मनाया जायेगा वर्ल्ड रेडियोग्राफी डे जानिए। चिकित्सा क्षेत्र में एक्स-रे का क्या है महत्त्व ?

वर्ल्ड रेडियोग्राफी डे हर साल 8 नवम्बर को मनाया जाता है, जो चिकित्सा क्षेत्र में रेडियोलॉजी और एक्स-रे जैसी तकनीकों के योगदान को मान्यता देने का दिन है, यह दिन विलहेम रंटगेन द्वारा 1895 में एक्स-रे की खोज की वर्षगांठ के रूप में मनाया जाता है, जिसने चिकित्सा विज्ञान में क्रांति ला दी, इस दिन का उद्देश्य रेडियोलॉजी के पेशेवरों की भूमिका को सम्मानित करना और लोगों में जागरूकता फैलाना है, यह रेडियोलॉजी के क्षेत्र में हो रहे नए विकास और शोध को बढ़ावा देने का भी एक अवसर है।

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वर्ल्ड रेडियोग्राफी डे कब मनाया जाता है?
वर्ल्ड रेडियोग्राफी डे हर साल 8 नवम्बर को मनाया जाता है, यह दिन रेडियोलॉजी के क्षेत्र में किए गए योगदान और एक्स-रे जैसी तकनीकों के महत्व को स्वीकार करने के लिए है, रेडियोलॉजिस्ट और चिकित्सा पेशेवर इस दिन की घटनाओं और जागरूकता कार्यक्रमों में भाग लेते हैं, यह दिन चिकित्सा विज्ञान के विकास की दिशा में एक मील का पत्थर है।

वर्ल्ड रेडियोग्राफी डे क्यों मनाया जाता है?
वर्ल्ड रेडियोग्राफी डे मनाने का मुख्य उद्देश्य रेडियोलॉजी और चिकित्सा इमेजिंग के योगदान को मान्यता देना है, जो रोगों के निदान और उपचार में सहायक होते हैं, इस दिन को मनाकर हम रेडियोलॉजी के पेशेवरों के कार्यों का सम्मान करते हैं और उनके प्रयासों को उजागर करते हैं, यह दिन चिकित्सा में नए विकास और तकनीकी इनोवेशन को बढ़ावा देने का भी अवसर है.

वर्ल्ड रेडियोग्राफी डे क्यों 8 नवम्बर को मनाया जाता है?
8 नवम्बर को वर्ल्ड रेडियोग्राफी डे मनाने की वजह यह है कि 8 नवम्बर 1895 को जर्मन वैज्ञानिक विलहेम रंटगेन ने एक्स-रे की खोज की थी, यह खोज चिकित्सा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लायी और बीमारी के निदान के तरीके को पूरी तरह से बदल दिया। इस दिन को उसी ऐतिहासिक खोज की याद में मनाया जाता है.

वर्ल्ड रेडियोग्राफी डे का उद्देश्य क्या है?
वर्ल्ड रेडियोग्राफी डे का उद्देश्य रेडियोलॉजी के क्षेत्र में कार्यरत पेशेवरों की भूमिका को सम्मानित करना और चिकित्सा में रेडियोलॉजिकल तकनीकों के महत्व को जनता तक पहुंचाना है, यह दिन रेडियोलॉजी के महत्व को समझाने और इसके प्रति जागरूकता फैलाने का एक जरिया है, साथ ही, यह रेडियोलॉजी के क्षेत्र में नई संभावनाओं और विकास को प्रोत्साहित करता है.

वर्ल्ड रेडियोग्राफी डे कैसे मनाया जाता है?
वर्ल्ड रेडियोग्राफी डे को मनाने के लिए चिकित्सा संस्थानों, अस्पतालों और रेडियोलॉजिस्ट द्वारा जागरूकता कार्यक्रम, सेमिनार, कार्यशालाएँ और पब्लिक लैक्चर्स आयोजित किए जाते हैं, सोशल मीडिया पर इस दिन के महत्व को साझा करने के लिए पोस्ट्स और कैम्पेन चलाए जाते हैं, इसके अलावा, रेडियोलॉजिस्ट और चिकित्सा पेशेवर इस दिन को अपने योगदान को साझा करके मान्यता प्राप्त करते हैं।

बीएससीरेडियोलॉजी के बारे में यहाँ मिलेगी पूरी जानकारी :
रेडियोलॉजी में बैचलर ऑफ साइंस (बीएससी) रेडियोलॉजी के बारे में अधिक व्यापक और गहन समझ की चाह रखने वालों के लिए, रेडियोलॉजी में बीएससी करना एक बेहतरीन विकल्प है। यह स्नातक कार्यक्रम आम तौर पर तीन साल का होता है और एक अच्छी तरह से गोल पाठ्यक्रम प्रदान करता है जो चिकित्सा इमेजिंग, रेडियोग्राफिक प्रक्रियाओं और रोगी देखभाल के विभिन्न पहलुओं को कवर करता है।

बीएससी रेडियोलॉजी के छात्र रेडियोग्राफिक प्रक्रियाओं की पेचीदगियों में तल्लीन हो जाते हैं, मरीजों को कैसे रखना है, इमेजिंग उपकरण कैसे चलाना है, और उच्च गुणवत्ता वाली नैदानिक छवियाँ कैसे खींचते हैं, यह सीखते हैं। यह व्यावहारिक प्रशिक्षण नैदानिक सेटिंग में आवश्यक तकनीकी कौशल विकसित करने के लिए महत्वपूर्ण है।

12वीं के बाद रेडियोलॉजी पाठ्यक्रम:
12वीं पूरी करने के बाद करियर का चुनाव महत्वपूर्ण निर्णय है। 12वीं के बाद रेडियोलॉजी पाठ्यक्रम उन लोगों के लिए एक आशाजनक अवसर प्रदान करता हैं जो प्रौद्योगिकी और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र से आकर्षित हैं।अगर आप ने किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10+2 की शिक्षा पूरी की है और आपके गणित, भौतिकी, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान जैसे विषयों में न्यूनतम 50% या उससे अधिक अंक है तो 12वीं के बाद बीएससी रेडियोलॉजी पाठ्यक्रम आपके लिए बेस्ट ऑप्शन हैं। रेडियोलॉजी में बीएससी करने से इस क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के रोजगार के अवसर खुल सकते हैं, जिनमें रेडियोलॉजिक टेक्नोलॉजिस्ट, सीटी स्कैन या एमआरआई टेक्नोलॉजिस्ट, और इंटरवेंशनल रेडियोग्राफी जैसे पद शामिल हैं। रेडियोलॉजी में बीएससी एक अच्छा करियर विकल्प हो सकता है। रेडियोलॉजी में निरंतर तकनीकी प्रगति इसे एक गतिशील और विकसित करियर पथ बनाती है।

India State of Forest Report

India State of Forest Report

India is ranks amongst the top 10 countries of the world, in terms of forest area and holds 3rd position for
highest annual net gain in forest cover between 2010-2020, as per Global Forest Resource Assessment (GFRA, 2020) published by FAO.
Therefore, India’s forests act as a net sink of corbon. This shows the commitment of our country towards climate change
mitigation and adaptaion.

The India State of Forest Report (ISFR) 2023 has been published by the Forest Survey of India (FSI).

It is a biennial assessment of the country’s forest resources using satellite data and field information. ISFR 2023 is published in two volumes. The first report was published in 1987, and the recently published ISFR 2023 marks the 18th edition.

India State of Forest Report 2023 highlights are as follows –

  1. For the first time, the report showcases forest cover change matrix inside and outside forest areas have been provided separately for clarity in analysis.
  2. In the present report, FSI has given forest cover information for 751 districts including those created in the recent
    past, as against 636 districts given in ISFR 2021.
  3. The India State of Forest Report (ISFR) 2023 shows that the country’s Forest and Tree cover now spans 827,357 square kilometers, covering 25.17% of the nation’s total land area.
  4. This includes 715,343 square kilometers (21.76%) of forest cover and 112,014 square kilometers (3.41%) of tree cover. This progress reflects India’s successful efforts to balance development with environmental conservation.
  5. The India State of Forest Report (ISFR) 2023 highlights positive growth in India’s forest cover, increasing from 698,712 km² in 2013 to 715,343 km² in 2023.
  6. Fire incidents have also decreased, with 203,544 fire hotspots recorded in 2023-24, down from 223,333 in 2021-22.
    In line with India’s Nationally Determined Contributions (NDC) target, the country has achieved a carbon sink of 30.43 billion tonnes of CO2 equivalent.
  7. This represents an additional 2.29 billion tonnes of carbon sink in Forest and Tree Cover since 2005, nearing the target of 2.5 to 3.0 billion tonnes of CO2 equivalent by 2030.
  8. In this report, Agroforestry has been analyzed separately as it accounts for 1,27,590 km2 of tree cover and 1,292 M m3 of Growing stock and serves as livelihood enhancer.
  9. For this report, Forest Cover Mapping was carried out using medium-resolution indigenous satellite data, sourced from the Indian Space Research Organization’s (ISRO) indigenous LISS-III sensor.
  10. The report shows that the maximum increase in forest and tree cover has been observed in the States of Chhattisgarh (683.62 km2) followed by Uttar Pradesh (559.19 km2), Odisha (558.57 km2) and Rajasthan (394.46 km2).
  11. The maximum decrease in forest and tree cover has been noticed in the state of Madhya Pradesh (612.41 km2) followed by Karnataka (459.36 km2), Ladakh (159.26 km2) and Nagaland (125.22 km2).
  12. The total forest and tree cover in the North Eastern region is 1,74,394.70 km2, which is 67% of geographical area of these states. The current assessment shows adecrease of forest cover of 327.30 km2 in the region.

For more information, visit Forest Survey of India – https://fsi.nic.in/index.php

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भारत में 1,57,066 स्टार्टअप मान्यताप्राप्त। स्टार्ट अप इण्डिया को बढ़ावा देने में महिला शक्ति आगे

भारत ने वैश्विक स्तर पर सबसे वाइब्रन्ट स्टार्टअप इकोसिस्टम में से एक के रूप में एक विशिष्ट पहचान बनायी है। यह तीसरे सबसे बड़े स्टार्टअप हब के रूप में जाना जाता है। 100 से अधिक यूनिकॉर्न के साथ, भारतीय स्टार्टअप परिदृश्य नवाचार और उद्यमिता के भविष्य को आकार दे रहा है। भारत में 73,000 से अधिक स्टार्टअप में कम से कम एक महिला निदेशक हैं। इन्हे स्टार्टअप इंडिया पहल के तहत मान्यता दी गई है। यह सरकार द्वारा समर्थित 1,57,066 स्टार्टअप में से लगभग आधे का प्रतिनिधित्व करता है। यह नवाचार और आर्थिक विकास को आगे बढ़ाने में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है।

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भारत में उद्यमशीलता की भावना पिछले दशक में एक आदर्श बदलाव से गुज़री है। बेंगलुरु, हैदराबाद, मुंबई और दिल्ली-एनसीआर जैसे शहर नवाचार के केंद्र बन गए हैं। किफायती इंटरनेट की व्यापक उपलब्धता, साथ ही युवा और गतिशील कार्यबल ने फिनटेक, एडटेक, हेल्थ-टेक और ई-कॉमर्स सहित विविध क्षेत्रों में स्टार्टअप के विकास को बढ़ावा दिया है। स्टार्टअप इंडिया द्वारा “भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम रिपोर्ट” के अनुसार, भारत के स्टार्टअप ने स्थानीय और वैश्विक समस्याओं को हल करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), ब्लॉकचेन और आईओटी जैसी उभरती हुई तकनीकों का लाभ उठाया है। इनक्यूबेटर, एक्सेलेरेटर और मजबूत मेंटरिंग नेटवर्क द्वारा समर्थित नवाचार की इस संस्कृति ने एक अनूठे इकोसिस्टम को बढ़ावा दिया है। यह अत्याधुनिक समाधानों के साथ जमीनी चुनौतियों को दूर करता है।

केंद्र सरकार ने स्टार्टअप की परिवर्तनकारी क्षमता को पहचानते हुए उद्यमिता का समर्थन और पोषण करने के लिए कई पहल किये हैं। 2016 में शुरू किया गया स्टार्टअप इंडिया कार्यक्रम इस युगांतरकारी प्रयास की आधारशिला रहा है। 25 दिसंबर 2024 तक उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग ने 1,57,066 स्टार्टअप को मान्यता दी गई है और पोर्टल पर 7,59,303 उपयोगकर्ता पंजीकृत हैं।

मुख्य विशेषताएं :

  • व्यापार करने में आसानी: सरलीकृत अनुपालन, स्व-प्रमाणन और एकल-खिड़की मंजूरी ने स्टार्टअप के लिए नौकरशाही बाधाओं को कम कर दिया है।
  • कर लाभ : पीआईबी रिपोर्ट के अनुसार योजना के अंतर्गत पंजीकृत स्टार्टअप को लगातार तीन वित्तीय वर्षों के लिए कर छूट मिलती है।
  • वित्त पोषण सहायता: स्टार्टअप के लिए फंड ऑफ फंड्स पहल ने शुरुआती चरण के वित्तपोषण को बढ़ावा देने के लिए ₹10,000 करोड़ आवंटित किए हैं।
  • क्षेत्र-विशिष्ट नीतियाँ: जैव प्रौद्योगिकी, कृषि और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे उद्योगों के लिए अनुकूलित नीतियों ने क्षेत्रीय विकास को प्रोत्साहित किया है।
  • भारत स्टार्टअप नॉलेज एक्सेस रजिस्ट्री: स्टार्टअप, निवेशकों, सलाहकारों, सेवा प्रदाताओं और सरकारी निकायों सहित उद्यमशीलता पारिस्थितिकी तंत्र के भीतर प्रमुख हितधारकों के बीच सहयोग को केंद्रीकृत, सुव्यवस्थित और बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया प्लेटफ़ॉर्म।
  • स्टार्टअप भारत के आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण :
  • भारतीय स्टार्टअप्स देश के विकास में महग्गतवपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं इसके जरिये
  • रोजगार सृजन :
  • जीडीपी वृद्धि :
  • विदेशी निवेश आकर्षित :
  • समावेशीपन को बढ़ावा :

भारत के स्टार्टअप न केवल स्थानीय समस्याओं का समाधान कर रहे हैं; वे वैश्विक स्तर पर धूम मचा रहे हैं। बायजूस, ज़ोमैटो, ओला और नायका जैसी कंपनियों ने दुनिया भर में अपने परिचालन का विस्तार किया है। इससे वैश्विक मंच पर भारत की क्षमता का पता चलता है। सिलिकॉन वैली में भारतीय मूल के स्टार्टअप की सफलता देश के वैश्विक प्रभाव को और उजागर करती है। स्टार्टअप इंडिया इंटरनेशनल गाइड के अनुसार भारतीय स्टार्टअप वैश्विक निगमों के साथ तेजी से साझेदारी कर रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रवेश कर रहे हैं। यूपीआई और आधार-सक्षम सेवाओं जैसे किफायती प्रौद्योगिकी समाधानों में भारत का नेतृत्व वैश्विक स्तर पर इसी तरह के नवाचारों को प्रेरित कर रहा है। इसके अतिरिक्त भारत के यूनिकॉर्न वैल्यूएशन ग्रोथ में वैश्विक साथियों से आगे निकल रहे हैं।

दुनिया का अग्रणी स्टार्टअप इकोसिस्टम बनने की दिशा में भारत की यात्रा जनसांख्यिकीय, आर्थिक और नीतिगत कारकों के संयोजन से प्रेरित है। युवा, शिक्षित आबादी, बढ़ते मध्यम वर्ग और डिजिटल तकनीकों की बढ़ती पहुंच के साथ, देश तेजी से विकास के लिए तैयार है। सरकार समर्थित नीतियों, निवेशक-अनुकूल वातावरण और नवाचार को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करने से भारत स्टार्टअप में वैश्विक नेता के रूप में स्थापित हुआ है। इसके अलावा, शिक्षाविदों, उद्योग और नीति निर्माताओं के बीच सहयोग एक स्थायी और समावेशी इकोसिस्टम सुनिश्चित करता है। भारत वैश्विक स्तर पर अपने समाधानों का नवाचार और निर्यात करना जारी रखते हुए , वैश्विक स्टार्टअप समुदाय के लिए बेंचमार्क स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

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2025 AI वर्ष घोषित । झारखंड में कितने हैं इंजीनियरिंग कॉलेज कहां कहां होती है AI की पढ़ाई

2024 खत्म होने वाला है। इस साल चैट जीपीटी कई मेजर अपग्रेड्स के साथ पावरफुल हुआ है। 2024 में कई चैटबॉट और वॉयस असिस्टेंट्स लॉन्च हुए हैं। AI तेजी से अपना दायरा बढ़ा रहा है। Sora जैसे टूल हाइपर रियलिस्टिक वीडियो क्रिएट कर रहे हैं। जेनरेटिव एआई का दखल हर क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहा है। इमेज क्रिएटर चैटबॉट्स को लोग खूब पसंद कर रहे हैं। आने वर्ष 2025 AI वर्ष घोषित किया गया है।

CSE IT

अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) ने वर्ष 2025 को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस A I वर्ष घोषित किया है। देश के सभी इंजीनियरिंग कॉलेजों में 2025 एआई वर्ष के रूप में मनाया जायेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के तहत भारत को विश्वगुरु बनाने के सपने को साकार करने के लिए 14 हजार इंजीनियरिंग कॉलेजों के 40 लाख छात्रों को एआई में दक्ष करेगा। इसके तहत सभी इंजीनियरिंग कॉलेजों 31 दिसंबर तक अपनी योजना को बनाकर एआईसीटीई को भेजनी होगी। खास बात यह है कि साल भर कैंपस में भारत को एआई, इनोवेशन और शिक्षा के क्षेत्र में भारत को विश्वगुरु बनाने का संकल्प लेने के साथ कार्यक्रम आयोजित होंगे।

AICTE के अध्यक्ष ने कहा है “जैसा कि हम 2025 को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के वर्ष के रूप में समर्पित करते हैं, आइए हम भविष्य के लिए तैयार कार्यबल का निर्माण करने के लिए एकजुट हों। साथ मिलकर, हम भारत को एआई नवाचार, नैतिकता और शिक्षा में वैश्विक नेता के रूप में आकार दे सकते हैं, जिससे आत्मनिर्भरता और समृद्धि के हमारे साझा दृष्टिकोण को पूरा किया जा सके।”

भारत अपने युवा शक्ति के दम पर दुनिया के लिए एआई वर्कफोर्स तैयार करेगा। इसके लिए 14 कॉलेजों के 40 लाख छात्रों को एआई में दक्ष किया जाएगा। इसके लिए कॉलेजों को एआई मल्टी डिसिप्लिनरी कोर्स और रिसर्च प्रोग्राम शुरू करने होंगे। साथ ही इंडस्ट्री की डिमांड आधारित एआई लैब स्थापित होंगी। एआई जागरूकता के लिए हैकथॉन, वर्कशॉप, विशेषज्ञों के विशेष एआई लेक्चर, एआई आधारित करियर काउंसलिंग

प्रोग्राम चलाए जाएंगे।

क्या होता है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI):
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एक ऐसी तकनीक है, जो मशीनों और कंप्यूटरों को इंसानों की तरह सोचने, समझने और निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करती है। इसका उद्देश्य है मशीनों को इस काबिल बनाना कि वे डेटा का विश्लेषण करके समस्याओं को हल कर सकें, भविष्यवाणी कर सकें और कार्य को स्वचालित कर सकें।

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12 वीं के बाद बीएससी रेडियोलॉजी और क्लिनिकल ट्रेनिंग के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करें

स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में, रेडियोलॉजी एक महत्वपूर्ण अनुशासन के रूप में खड़ा है। निदान और चिकित्सा इमेजिंग में इसकी बी भूमिका महत्वपूर्ण है। जैसे-जैसे तकनीक आगे बढ़ रही है, रेडियोलॉजी में कुशल पेशेवरों की मांग बढ़ रही है। यह लेख 12वीं कक्षा के बाद रेडियोलॉजी में बैचलर ऑफ साइंस (बीएससी) पर विशेष केंद्रित है।

12वीं के बाद रेडियोलॉजी पाठ्यक्रम:
12वीं पूरी करने के बाद करियर का चुनाव महत्वपूर्ण निर्णय है। 12वीं के बाद रेडियोलॉजी पाठ्यक्रम उन लोगों के लिए एक आशाजनक अवसर प्रदान करता हैं जो प्रौद्योगिकी और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र से आकर्षित हैं।

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बीएससी रेडियोलॉजी क्या हैं ?
रेडियोलॉजी में बैचलर ऑफ साइंस (बीएससी) रेडियोलॉजी के बारे में अधिक व्यापक और गहन समझ की चाह रखने वालों के लिए, रेडियोलॉजी में बीएससी करना एक बेहतरीन विकल्प है। यह स्नातक कार्यक्रम आम तौर पर तीन साल का होता है और एक अच्छी तरह से गोल पाठ्यक्रम प्रदान करता है जो चिकित्सा इमेजिंग, रेडियोग्राफिक प्रक्रियाओं और रोगी देखभाल के विभिन्न पहलुओं को कवर करता है।

बीएससी रेडियोलॉजी के छात्र रेडियोग्राफिक प्रक्रियाओं की पेचीदगियों में तल्लीन हो जाते हैं, मरीजों को कैसे रखना है, इमेजिंग उपकरण कैसे चलाना है, और उच्च गुणवत्ता वाली नैदानिक छवियाँ कैसे खींचते हैं, यह सीखते हैं। यह व्यावहारिक प्रशिक्षण नैदानिक सेटिंग में आवश्यक तकनीकी कौशल विकसित करने के लिए महत्वपूर्ण है।

रेडियो लॉजी की पढ़ाई और क्लिनिकल ट्रेनिंग:
रेडियोलॉजी में बीएससी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा व्यावहारिक क्लिनिकल ट्रेनिंग से जुड़ा है। यह व्यावहारिक अनुभव अस्पतालों या मेडिकल इमेजिंग सुविधाओं में होता है, जिससे छात्रों को अपने सैद्धांतिक ज्ञान को वास्तविक दुनिया के परिदृश्यों में लागू करने का मौका मिलता है। तकनीकी कौशल को निखारने, संचार क्षमताओं को विकसित करने और विविध रोगी मामलों के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए क्लिनिकल ट्रेनिंग महत्वपूर्ण है।

कैरियर विकास में बीएससी रेडियोलॉजी का महत्व :
रेडियोलॉजी में बीएससी की पढ़ाई अकादमिक योग्यता से कहीं आगे जाती है; यह मेडिकल इमेजिंग के क्षेत्र में एक पुरस्कृत और प्रभावशाली करियर के लिए आधार तैयार करती है। करियर विकास में बीएससी रेडियोलॉजी डिग्री के महत्व को समझें:

विविध करियर अवसर :
रेडियोलॉजी में बीएससी स्नातक के पास तलाशने के लिए कई कैरियर मार्ग हैं। अस्पतालों, डायग्नोस्टिक केंद्रों या विशेष इमेजिंग क्लीनिकों में काम कर सकते हैं। करियर विकल्पों में रेडियोलॉजिक टेक्नोलॉजिस्ट, सीटी स्कैन या एमआरआई टेक्नोलॉजिस्ट बनने का मौका मिल सकता है। बीएससी रेडियोलॉजी कार्यक्रमों का व्यापक पाठ्यक्रम छात्रों को सैद्धांतिक ज्ञान और व्यावहारिक कौशल के मिश्रण से लैस करता है, जो उन्हें स्वास्थ्य सेवा के उभरते परिदृश्य में चुनौतियों और अवसरों के लिए तैयार करता है।

बीएससी रेडियोलॉजी अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न :

12वीं के बाद बीएससी रेडियोलॉजी के लिए क्या योग्यता है?
आपको किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10+2 की शिक्षा पूरी करनी चाहिए। छात्रों के लिए गणित, भौतिकी, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान जैसे विषयों में न्यूनतम 50% या उससे अधिक अंक प्राप्त करना आवश्यक है।

क्या मुझे बीएससी रेडियोलॉजी के बाद नौकरी मिल सकती है?
हां, रेडियोलॉजी में बीएससी करने से इस क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के रोजगार के अवसर खुल सकते हैं, जिनमें रेडियोलॉजिक टेक्नोलॉजिस्ट, सीटी स्कैन या एमआरआई टेक्नोलॉजिस्ट, और इंटरवेंशनल रेडियोग्राफी जैसे पद शामिल हैं।

क्या बीएससी रेडियोलॉजी एक अच्छा करियर है?
हां, रेडियोलॉजी में बीएससी एक अच्छा करियर विकल्प हो सकता है। रेडियोलॉजी में निरंतर तकनीकी प्रगति इसे एक गतिशील और विकसित करियर पथ बनाती है।

रेडियोलॉजी के लिए कौन सा कोर्स सर्वोत्तम है?
रेडियोलॉजी में बैचलर ऑफ साइंस (बी.एससी.) रेडियोलॉजी में करियर बनाने के इच्छुक लोगों के लिए एक आम तौर पर चुना जाने वाला और अच्छी तरह से माना जाने वाला कोर्स है। आप इमेजिंग टेक्नोलॉजी में बी.एससी. भी चुन सकते हैं।

क्या रेडियोलॉजी एक उच्च वेतन वाली नौकरी है?
हां, रेडियोलॉजी को आम तौर पर उच्च वेतन वाला पेशा माना जाता है। रेडियोलॉजिस्ट, विशेष रूप से विशेषज्ञता वाले, अक्सर चिकित्सा निदान और इमेजिंग में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के कारण प्रतिस्पर्धी वेतन प्राप्त करते हैं।

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2 से 3 लाख प्रतिमाह कमाना चाहते हैं तो 12वीं के बाद करें ये कोर्स, विदेशों में भी है डिमांड

दुनियाभर में होटल मैनेजमेंट इंडस्ट्री का तेजी से विकास हो रहा है। जिस गति से इस क्षेत्र में विकास हो रहा है उसी गति से योग्य एवं पेशेवरों की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में रोजगार के मामले में उछाल देखने को मिला है जो आगे भी जारी रहने वाला है। अगर आप भी 12वीं के बाद कोई ऐसा प्रोफेशनल कोर्स करना चाहते हैं, जिसको करने के बाद आपको तुरंत ही बेहतर रोजगार के मौके उपलब्ध हों, तो ऐसे में आप होटल मैनेजमेंट के क्षेत्र में कदम रख सकते हैं।

BHM Jharkhand Rai University

होटल मैनेजमेंट इंडस्ट्री में जाने के लिए क्या है योग्यता?

होटल मैनेजमेंट के क्षेत्र में आप 12वीं के बाद ही बैचलर डिग्री प्रोग्राम में प्रवेश ले सकते हैं। बैचलर ऑफ़ होटल मैनेजमेंट (BHM) एक चार साल का स्नातक कोर्स है। यह कोर्स होटल प्रबंधन के कई क्षेत्रों में जानकारी देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसमें लॉजिंग ऑपरेशन, पेय पदार्थ तैयार करना, कॉर्पोरेट वित्त, और फ़्रंट ऑफ़िस ऑपरेशन जैसे विषय शामिल हैं। इस कोर्स के ज़रिए छात्रों को आतिथ्य और पर्यटन के सभी पहलुओं में जानकारी मिलती है।

होटल इंडस्ट्री का क्षेत्र बहुत बड़ा है और देश के साथ विदेश में भी अलग महत्ता रखता है। इस क्षेत्र में कोर्स करने के बाद आप पढ़ाई के बाद इंटर्नशिप करके नौकरी की शुरुआत कर सकते हैं। इंटर्नशिप और अनुभव के बाद आप देश-विदेश की होटल इंडस्ट्री में नौकरी करने के लिए एलिजिबल हो जायेंगे। अनुभव और एक्सपीरियंस के बाद आप देश के साथ ही विदेश में भी अपनी पहचान बनाकर लाखों रुपये प्रतिमाह कमा सकते हैं।

बीएचएम कोर्स के लिए जरूरी स्किल्स :

होटल मैनेजमेंट इंडस्ट्री में करियर की संभावनाएं :

एक बार जब आप होटल मैनेजमेंट ग्रेजुएट बन जाते हैं, तो आपके लिए नौकरी की संभावनाओं की एक विस्तृत दुनिया खुल जाएगी। चूंकि हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री में संचालन, फूड एंड बेवरेज, फ्रंट ऑफिस, अकाउंटिंग, सिक्युरिटी आदि जैसे कई विभाग हैं, इसलिए आप अपना पसंदीदा विभाग चुन सकते हैं और इसमें विभिन्न नौकरियों के लिए आवेदन कर सकते हैं।

कोर्स खत्म होने के बाद मिलेगी इन फील्ड में जॉब्स :

  • मैनेजर ऑफ़ होटल
  • किचन मैनेजर
  • इवेंट मैनेजर
  • फ्रंट ऑफिस मैनेजर
  • बैंक्वेट मैनेजर
  • शेफ
  • डायरेक्टर ऑफ़ होटल ऑपरेशन
  • फ्लोर सुपरवाइजर
  • हाउस कीपिंग मैनेजर
  • गेस्ट सर्विस सुपरवाइजर/ मैनेजर
  • वेडिंग कोऑर्डिनेटर
  • रेस्टोरेंट मैनेजर
  • फ़ूड सर्विस मैनेजर
  • फ़ूड एंड वेबरेज सुपरवाइजर
Indian startup report

Indian Startup Ecosystem Report

Indian Startup Ecosystem Report – Commerce Ministry 

Despite the global slowdown in tech investments, Indian startups have attracted strong funding, raising a total of $11.3 billion in 2024. This is a 6% increase from the $10.7 billion raised in 2023.

Government-backed policies, an investor-friendly environment, and a focus on fostering innovation have positioned India as a global leader in startups.

According to the “Indian Startup Ecosystem Report” by Startup India, India’s startups have leveraged emerging technologies such as artificial intelligence (AI), blockchain, and IoT to solve local and global problems. This culture of innovation, supported by incubators, accelerators, and robust mentoring networks, has fostered a unique ecosystem that bridges grassroots challenges with cutting-edge solutions.

The Indian government has introduced several initiatives to support and nurture entrepreneurship. The flagship Startup India program, launched in 2016, has been a cornerstone in this effort.

Key points of “Indian Startup Ecosystem Report”

  1. India has emerged as one of the most vibrant startup ecosystems globally, earning its place as the 3rd largest startup hub.
    India has over 100+ unicorns.
  2. As on December 25, 2024, 157,066 startups have been recognized by Department for Promotion of Industry and Internal Trade (DPIIT) and 759,303 users are registered on the portal.
  3. India has more than 73,000 startups with at least one-woman director.
  4. This represents nearly half of the 1,57,066 startups supported by the government, showcasing the crucial role women play in driving innovation and economic growth.
  5. Cities like Bengaluru, Hyderabad, Mumbai, and Delhi-NCR have become epicenters of innovation.
  6. The Indian startup landscape is shaping the future of innovation and entrepreneurship.

To support this fervour, Government has taken several initiatives to support the startup ecosystem in India.

Initiatives such as the Atal Innovation Mission (AIM) and the National Initiative for Developing and Harnessing Innovations (NIDHI) provide infrastructure and financial support to innovators. Further, the Startup Accelerator of MeitY for Product Innovation, Development, and Growth (SAMRIDH) scheme launched in 2021, aims to support 300 software product startups over four years with an outlay of ₹99 crore, providing funding up to ₹40 lakh per startup through accelerators to scale their businesses.

According to the Startup India International Guide, Indian startups are increasingly partnering with global corporations and entering international markets. India’s leadership in affordable technology solutions, such as UPI and Aadhaar-enabled services, is inspiring similar innovations globally. Additionally, India’s unicorns are outpacing global peers in valuation growth, proving that the ecosystem’s foundation is robust and scalable.

Earlier, Bangalore has been listed within the world’s 20 leading startup cities in the 2019 Startup Genome Project ranking. It is also ranked as one of the world’s five fastest growing startup cities.

Indian startups raised Rs 29,247 crore through IPO in 2024, led by Swiggy and Ola Electric.

Ministry of ayush film series highlights

Ministry of Ayush launches film series

The Ministry of Ayush launched a film series titled “Ayush for All: Holistic Health Care through National Ayush Mission” on December 24, 2024.

The series was unveiled by Shri Prataprao Jadhav, the Union Minister of State (IC), Ministry of Ayush and Union Minister of State, Ministry of Health & Family Welfare, Government of India.
During his address, the Minister highlighted the success of NAM and said, “The National Ayush Mission has empowered communities to with accessible and cost-effective healthcare based on traditional practices. This film series is a step towards making information about our initiatives readily accessible to the public, showcasing Ayush’s pivotal role in reducing disease burden and promoting wellness across the nation.”

Ministry of Ayush film series highlights –

  • The series highlights real-life stories of transformation, demonstrating how NAM, in collaboration with state/UT governments, has improved healthcare access and reduced out-of-pocket expenditures for rural and underserved populations.
  • It showcases the remarkable progress and transformative impact of the National Ayush Mission (NAM).
  • The launch of the series is in line with the efforts of the Ministry of Ayush underscoring the government’s commitment to bring equitable, affordable, and holistic healthcare to every citizen, including those in the remotest corners of the country.

NAM emphasizes the development of Ayush educational institutions to enhance the quality of education and research.
Moreover, the scheme has supported the establishment of 167 Integrated Ayush Hospitals and upgraded 416 Ayush Hospitals and 5036 dispensaries.

Ministry of Ayush launches film series
NAM has established 3883 Yoga Wellness Centres, 1055 Ayush Grams, and 12,500 Ayushman Arogya Mandir (Ayush) to promote holistic wellness nationwide.

The National Ayush Mission has been a significant initiative in revolutionizing healthcare delivery in distant corners of the country. By bridging the gap in healthcare access and promoting a holistic wellness model, NAM continues to transform lives and contribute to a healthier, more sustainable India.

PPC PIC JRU Blog

परीक्षा पर चर्चा के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू । 8 वें संस्करण के बारे में जानिए पूरी जानकारी

फ़रवरी का महीना परीक्षाओं का होता है। परीक्षार्थियों के मन में इसे लेकर तनाव, चिंता, और घबराहट जैसी भावनात्मक स्तिथि उत्पन्न होती है। दबाव को प्रबंधित करने और परीक्षाओं को उत्सव के रूप में लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का अनूठा इंटरैक्टिव कार्यक्रम, परीक्षा पे चर्चा (पीपीसी), अपने 8वें संस्करण के साथ वापस आ गया है। देश भर में वार्षिक परीक्षाएं शुरू होने से पहले जनवरी 2025 में PPC आयोजित किया जाएगा।

STRIP ALL COURSES

पीपीसी की शुरुआत परीक्षा के तनाव को कम करने, छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों को जीवन को एक “उत्सव” के रूप में मनाने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से शुरू की गई थी जो पिछले सात वर्षों में एक शानदार सफलता के साथ जारी है। पीपीसी का 7वां संस्करण भारत मंडपम, प्रगति मैदान, नई दिल्ली में आयोजित किया गया था, जिसमें देश-विदेश से प्रतिभागियों ने भाग लिया था।

परीक्षा पर चर्चा में कैसे हो शामिल:
पीपीसी 2025 के लिए पंजीकरण MyGov.in पर 14 दिसंबर 2024 से शुरू हो चुके हैं और 14 जनवरी 2025 तक खुले रहेंगे। पोर्टल पर कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों के लिए क्विज़ प्रतियोगिता (MCQ) विकसित की गई है।

पीपीसी 2025 के दौरान पूछे जाने वाले प्रश्नों का चयन:
छात्र अपनी पसंद के प्रश्न प्रस्तुत कर सकते हैं जो वे पंजीकरण प्रक्रिया के दौरान प्रधानमंत्री से पूछना चाहते हैं। प्रश्न परीक्षा के तनाव, करियर, भविष्य की आकांक्षाओं या सामान्य रूप से जीवन से संबंधित हो सकते हैं।

कक्षा 6 से 12 तक के स्कूली विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अभिभावकों का चयन ऑनलाइन क्विज प्रतियोगिता में भाग लेने वालों में से किया जाएगा।

प्रधानमंत्री के साथ संवाद के लिए भारत के विभिन्न क्षेत्रों से छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों द्वारा पूछे गए प्रश्नों का चयन किया जाएगा, जिसमें विभिन्न विषयों को शामिल किया जाएगा। पिछले वर्षों की तरह विदेश के छात्रों के प्रश्न भी शामिल किए जाएंगे।

PPC से जुड़ी मुख्य बातें:
2024 में 2.26 करोड़ प्रतिभागियों (2.06 करोड़ छात्र, 14.93 लाख शिक्षक और 5.69 लाख अभिभावक) ने कार्यक्रम में भाग लिया।

पीपीसी 2025 के लिए, प्रत्येक राज्य/केंद्र शासित प्रदेश से दो छात्र (कक्षा 9 से 12) और एक शिक्षक, कला उत्सव के विजेताओं और वीर गाथा, प्रेरणा पूर्व छात्रों और पीएम श्री स्कूलों के प्रतिभागियों को मुख्य कार्यक्रम के लिए विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जाएगा।

परीक्षाओं को त्यौहार के रुप में लें “उत्सव” के साथ मनाएं।
पीपीसी छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है, जो परीक्षाओं को सकारात्मकता और आत्मविश्वास के साथ लेने का संदेश देती है। परीक्षा पे चर्चा’ 2025 संस्करण के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू हो गई है. कार्यक्रम में शामिल होने के लिए रजिस्ट्रेशन करने की लास्ट डेट 14 जनवरी 2025 है।

‘परीक्षा पे चर्चा’ का यह 8वां संस्करण है, जिसका आयोजन जनवरी में भारत मंडपम, नई दिल्ली में किया जाएगा. मुख्य कार्यक्रम में भाग लेने के लिए चुने गए लगभग 2500 छात्रों को शिक्षा मंत्रालय की ओर से पीपीसी किट दी जाएगी. कार्यक्रम में पीएम मोदी अभिभावकों और शिक्षकों के साथ बोर्ड परीक्षाओं पर चर्चा करेंगे और स्टूडेंट्स को टिप्स देंगे ।

कार्यक्रम का आयोजन हर साल केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से किया जाता है. जिसमें पीएम मोदी बोर्ड परीक्षा में शामिल होने वाले स्टूडेंट्स से बातचीत करते हैं. साथ ही उन्हें परीक्षा के दबाव और तैयारी से जुड़े टिप्स में देते हैं. जिसे शिक्षा मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट,यूट्यूब आदि प्लेटफार्म पर देखा जा सकता है. अधिक जानकारी के लिए अभ्यर्थी परीक्षा पे चर्चा की आधिकारिक वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

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राष्ट्रीय किसान दिवस – National Farmer’s Day

National Farmer’s Day – 

राष्ट्रीय किसान दिवस 23 दिसंबर को मनाया जाता है| यह दिन किसानों के अमूल्य योगदान का उत्‍सव मनाता है।

अपनी कड़ी मेहनत और नवाचार के माध्यम से, वे लचीले और समृद्ध भारत को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह दिन हमारे किसानों के देश की प्रगति को आकार देने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को पहचानने का क्षण है।

किसान भारत की समृद्धि की नींव हैं। उनका अथक परिश्रम देश का पेट भरता है| ‘अन्नदाता’ के रूप में सम्मानित, किसान भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को कायम रखता है|

इस दिन भारत के पांचवें प्रधानमंत्री श्री चौधरी चरण सिंह की जयंती है, जो ग्रामीण मुद्दों की गहरी समझ और किसानों के कल्याण के लिए अटूट वकालत के लिए प्रसिद्ध हैं।

किसानों की अहम भूमिका को समझते हुए, भारत सरकार ने उनके सामाजिक और आर्थिक उत्थान को बढ़ावा देने के साथ-साथ सतत कृषि विकास सुनिश्चित करने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान), प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई), और प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना (पीएम-केएमवाई) जैसी योजनाओं का मुख्य उद्देश्य किसानों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना, जोखिम को कम करना, और दीर्घकालिक सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इन योजनाओं के माध्यम से सरकार तत्काल चुनौतियों का समाधान करने और किसानों की दीर्घकालिक जरूरतों को पूरा करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जाहिर करती है, जिससे कृषि क्षेत्र और राष्ट्र की रीढ़ को मजबूती मिले और एक स्थायी कृषि भविष्य का निर्माण हो सके।

राष्ट्र निर्माण और किसानों की भूमिका

देश के कुल 328.7 मिलियन हेक्टेयर भूमि में से लगभग 54.8% को कृषि भूमि के रूप में वर्गीकृत किया गया है। इस महत्वपूर्ण क्षेत्र की नींव किसान ही हैं।

भारत का कृषि क्षेत्र, देश की लगभग आधी जनसंख्‍या को रोजगार देता है, देश की अर्थव्यवस्था की आधारशिला और राष्ट्र-निर्माण का प्रमुख चालक बना हुआ है।

यह वित्त वर्ष 2023-24 में मौजूदा कीमतों पर सकल मूल्य वर्धित (जीवीए) में 17.7% का योगदान देता है।
उनकी भूमिका महज़ खेती से कहीं आगे तक फैली हुई है; वे ग्रामीण विकास और राष्ट्र-निर्माण के वास्तुकार हैं, खाद्य सुरक्षा प्रदान करते हैं और लाखों लोगों की आजीविका बनाए रखते हैं।

देश ने 2023-24 में332.2 मिलियन टन का रिकॉर्ड कुल अनाज उत्पादन हासिल किया, जो पिछले वर्ष के 329.7 मिलियन टन के उत्पादन को पार कर गया। यह उल्लेखनीय वृद्धि भारतीय किसानों के लचीलेपन और अटूट समर्पण का प्रमाण है, जिन्होंने राष्ट्र के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास किया है। उनके प्रयास मात्र फसल उगाने से परे हैं; वे ग्रामीण आजीविका का आधार हैं, जो अनगिनत समुदायों के आर्थिक परिदृश्य को आकार देते हैं। भारतीय कृषि की सफलता इन ‘अन्नदाताओं’ की भलाई के साथ गहराई से जुड़ी हुई है, जो कड़ी मेहनत, नवाचार और बलिदान की भावना का प्रतीक हैं।

भारत में किसानों के लिए प्रमुख 15 योजनाएँ

प्रमुख कृषि योजनाएं किसानों को समर्थन देने और उनकी आजीविका बढ़ाने के लिए शुरू की गई है।

प्रधानमंत्री किसान सम्‍मान निधि (पीएम-किसान) – इस योजना के तहत 11 करोड़ से अधिक किसान लाभान्वित हुए हैं। इसकी शुरुआत से लेकर अब तक भारत सरकार ने 18 किस्तों में 3.46 लाख करोड़रुपए से अधिक की राशि वितरित की है| 24 फरवरी 2019 को शुरू की गई पीएम-किसान योजना का उद्देश्य देश भर के भूमिधारक किसानों की वित्तीय ज़रूरतों को पूरा करना है। इस योजना के तहत, चौ-मासिक किस्तों में किसानों के बैंक खातों में सीधे 6,000 रुपये हस्तांतरित किए जाते हैं।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) – 2016 में शुरू की गई प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) का उद्देश्य किसानों को किफायती फसल बीमा प्रदान करना है| अपनी शुरुआत से लेकर अब तक इस योजना ने 68.85 करोड़ किसान आवेदनों का बीमा किया है और 1,65,966 करोड़ रुपएके दावे वितरित किए हैं।

प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना Pradhan (पीएम-केएमवाई) – 25 नवंबर 2024 तक, 24.66 लाख से अधिक किसानों ने इस योजना में नामांकन कराया है, जो उनके बुढ़ापे के दौरान वित्तीय सुरक्षा प्रदान करता है। 12 सितंबर 2019 को शुरू की गई पीएम-केएमवाई मासिक पेंशन की पेशकश करके कमजोर किसान परिवारों को सुरक्षा प्रदान करती है। 18 से 40 वर्ष की आयु के किसान इस योजना में मासिक योगदान करते हैं, जिसके बराबर राशि सरकार देती है।

संशोधित ब्याज अनुदान योजना (एमआईएसएस) – 2014-15 से, कृषि के लिए संस्थागत ऋण प्रवाह 8.5 लाख करोड़ रुपए से लगभग तिगुना बढ़कर 2023-24 तक 25.48 लाख करोड़ रुपए हो गया है। आसान और रियायती फसल ऋणों का वितरण दोगुना से अधिक हो गया है, केसीसी के माध्यम से ब्याज सब्सिडी 2023-24 में 2.4 गुना बढ़कर 14,252 करोड़ रुपए हो गई है।संशोधित ब्याज अनुदान योजना (एमआईएसएस) 3.00 लाख रुपए तक के ऋण पर 7% ब्याज दर के साथ रियायती अल्पकालिक कृषि ऋण प्रदान करती है, साथ ही समय पर पुनर्भुगतान के लिए अतिरिक्त 3% अनुदान भी देती है, जिससे प्रभावी दर 4% रह जाती है।

किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) – 1998 में शुरू की गई किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना किसानों को उनकी उत्पादन आवश्यकताओं के लिए कृषि इनपुट और नकदी तक आसान पहुंच प्रदान करती है। फरवरी 2019 में, रिजर्व बैंक ने कार्यशील पूंजी आवश्यकताओं के लिए पशुपालन और मत्स्य पालन को केसीसी सुविधा प्रदान की। 31 मार्च 2024 तक, 7.75 करोड़ सक्रिय केसीसी खाते हैं।

कृषि अवसंरचना कोष (एआईएफ) – आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत 2020 में शुरू की गई कृषि अवसंरचना निधि (एआईएफ) योजना पूरे भारत में अवसंरचना परियोजनाओं को वित्तपोषित करके टिकाऊ कृषि का समर्थन करती है। यह 9% की अधिकतम ब्याज दर पर 2 करोड़ रुपए तक का ऋण प्रदान करती है, साथ ही 3% वार्षिक ब्याज अनुदान और सात वर्षों तक ऋण गारंटी शुल्क की प्रतिपूर्ति करती है, जिससे लाभार्थियों के लिए वहनीयता सुनिश्चित होती है। 24 नवंबर 2024 तक, एआईएफ के तहत 84,333 परियोजनाओं के लिए 51,448 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं।

नमो ड्रोन दीदी – 1,261 करोड़ रुपए के परिव्यय के साथ 2024-25 से 2025-26 के लिए अनुमोदित नमो ड्रोन दीदी योजना का लक्ष्य उर्वरक आार कीटनाशकों का प्रयोग और कृषि किराये की सेवाओं के लिए ड्रोन प्रदान करके 15,000 महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को सशक्त बनाना है। यह योजना ड्रोन, सहायक उपकरण और सहायक शुल्क की लागत की 80% केंद्रीय वित्तीय सहायता प्रदान करती है, जो अधिकतम 8 लाख रुपएतकहै। 3 दिसंबर 2024 तक, किसान ड्रोन प्रमोशन के लिए 141.41 करोड़रुपए जारीकिएजाचुकेहैं।

मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना – 2015 में शुरू की गई मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना का उद्देश्य मृदा स्वास्थ्य में सुधार करना और कुशल उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देना है। इस योजना के आरंभ के बाद से 24.60 करोड़ से अधिक कार्ड जारी किए गए हैं, जिनमें से 2023-24 में 36.61 लाख कार्ड बनाए गए हैं। मजबूत प्रयोगशाला नेटवर्क इस योजना का समर्थन करता है। मृदा उर्वरता मानचित्र विकसित करने के लिए सरकार की 2025-26 तक मिट्टी के 5 करोड़ नमूनों का परीक्षण करने की योजना है।

10,000 एफपीओ का गठन और संवर्धन – सरकार ने 2020 में10,000 किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के गठन और प्रचार के लिए 6,865 करोड़ रुपए के बजट के साथ योजना शुरू की। अब तक, 26.17 लाख लाभार्थी किसानों को शामिल करके 9,411 एफपीओ का गठन किया गया है, जिसका लक्ष्य सामूहिक खेती को बढ़ाना और बाजार पहुंच में सुधार करना है।

किसान कवच –  17 दिसंबर, 2024 को केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत के पहले कीटनाशक रोधी बॉडीसूट किसान कवच का अनावरण किया, जिसे किसानों को कीटनाशकों के हानिकारक प्रभावों से बचाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह अभूतपूर्व नवाचार किसानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के माध्यम से कृषि समुदाय को सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। इस कार्यक्रम में किसानों की सुरक्षा के महत्व पर बल देते हुए किसानों को किसान कवच सूट के पहले बैच का वितरण भी किया गया।

स्वच्छ संयंत्र कार्यक्रम –  केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 09.08.2024 को 1,765.67 करोड़ रुपए के परिव्यय के साथ स्वच्छ संयंत्र कार्यक्रम (सीपीपी) को स्‍वीकृति दी। सीपीपी का लक्ष्य रोग-मुक्त रोपण सामग्री प्रदान करके, उपज में वृद्धि के साथ जलवायु-लचीली किस्मों के प्रसार और उन्‍हें अपनाने का लाभ पहुंचाकर बागवानी फसलों की गुणवत्ता और उत्पादकता को बढ़ाना है।

डिजिटल कृषि मिशन – केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2.9.2024 को 2,817 करोड़ रुपए के परिव्यय के साथ डिजिटल कृषि मिशन को अनुमति दीजिसमें केंद्र का हिस्सा 1,940 करोड़ रुपए शामिल है। इस मिशन की कल्पना डिजिटल कृषि पहलों का समर्थन करने के लिए व्यापक योजना के रूप में की गई है, जिसमें डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे का निर्माण, डिजिटल सामान्य फसल अनुमान सर्वेक्षण (डीजीसीईएस) को लागू करना और केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों द्वारा अन्य आईटी पहल शामिल हैं।

ई-एनडब्ल्यूआर आधारित प्लेज फाइनेंसिंग (सीजीएस-एनपीएफ) के लिए क्रेडिट गारंटी योजना –  भारत सरकार ने 16 दिसंबर 2024 को ई-एनडब्ल्यूआर आधारित प्लेज फाइनेंसिंग (सीजीएस-एनपीएफ) के लिए क्रेडिट गारंटी योजना शुरू की, जिसमें 1,000 करोड़ रुपए का कोष प्रदान किया गया। इसका उद्देश्‍य किसानों के लिए फसल कटाई के बाद के वित्तपोषण का समर्थन करना है। इस योजना के तहत, किसान इलेक्ट्रॉनिक परक्राम्य गोदाम रसीदों (ई-एनडब्ल्यूआर) द्वारा समर्थित वेयरहाउसिंग डेवलपमेंट एंड रेगुलेटरी अथॉरिटी (डब्ल्यूडीआरए) से मान्यता प्राप्त गोदामों में संग्रहीत अपनी उपज को गिरवी रखकर ऋण प्राप्त कर सकते हैं।

राष्ट्रीय खाद्य तेल-तिलहन मिशन (एनएमईओ-तिलहन) – केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 3.10.2024 को 10,103 करोड़ रुपए के कुल परिव्यय के साथ राष्ट्रीय खाद्य तेल-तिलहन मिशन (एनएमईओ-तिलहन) को स्‍वीकृति दी। इस मिशन का लक्ष्य घरेलू तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देना और खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता हासिल करना है, जिसे 2024-25 से 2030-31 तक सात वर्ष की अवधि के लिए लागू किया जाएगा।

राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन – केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 25.11.2024 को स्टैंडअलोन केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (एनएमएनएफ) को स्‍वीकृति दी। इस योजना का कुल परिव्यय रु. 2,481 करोड़ (भारत सरकार का हिस्सा – 1,584 करोड़ रुपए; राज्य का हिस्सा – 897 करोड़ रुपए)है। यहदेश भर में रसायन मुक्त, प्राकृतिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।