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2026 में AI की पढ़ाई है जरुरी। चमकेगी किस्मत, ट्रेंड में हैं पांच बेस्ट कोर्स

टेक्नोलॉजी दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की कर रही है. टेक्नोलॉजी सेक्टर में इस वक्त सबसे ज्यादा AI (Artificial Intelligence) का बोलबाला है. हर देश में एआई के बारे में पढ़ाया जा रहा है. स्कूल से लेकर कॉलेज और ऑफिस तक एआई एजुकेशन अपने पैर पसार रही है. कहना गलत नहीं होगा कि आने वाले कुछ समय के अंदर एआई अनिवार्य विषय बनने वाला है. इसलिए एआई को समझने और अपनी पढ़ाई व ऑफिस में इस्तेमाल करने के लिए इसकी तैयारी में जुट जाने का यही समय है।

AI वह तकनीक है जिसमें कंप्यूटर इंसानी दिमाग जैसी क्षमता से सोचते, सीखते और निर्णय लेते हैं। 2026 में AI इसलिए ज़रूरी है क्योंकि यह आईटी बैंकिंग, हेल्थकेयर, एजुकेशन, बिज़नेस—में तेजी से नौकरियों को बदल रहा है और नई हाई-पेड स्किल्स पैदा कर रहा है।आज AI हर इंडस्ट्री की रीढ़ बन चुका है। स्टूडेंट, जॉब-सीकर और प्रोफेशनल के लिए आवश्यक हो गया है।

2026 में AI सीखना क्यों जरूरी है?
दुनिया तेजी से AI-फर्स्ट इकॉनमी बन रही है जहां हर काम—लेखन, कोडिंग, मार्केटिंग, डिजाइन, कस्टमर सपोर्ट—AI से तेज़ और बेहतर हो रहा है।

AI अकादमिक क्षेत्र के लिए कितना जरुरी हैं ?
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) विश्वभर के उद्योगों का एक प्रमुख हिस्सा बनती जा रही है, जिसके चलते अधिक से अधिक लोग यह सवाल पूछ रहे हैं कि एआई पाठ्यक्रम लेना सार्थक है या नहीं ? उच्चतर शिक्षा में इसकी उपयोगिता कितनी है।

एआई पाठ्यक्रम किसी व्यक्ति के करियर लक्ष्यों के आधार पर काफी मूल्यवान साबित हो सकते हैं। रोजमर्रा के कामों में एआई टूल्स का उपयोग बढ़ने के साथ, इनका प्रभावी ढंग से उपयोग करना सीखने से आपको तेजी से बदलते बाजार में प्रतिस्पर्धी बने रहने में मदद मिल सकती है।

कार्यस्थल पर प्रासंगिक बने रहने के लिए एआई कोर्स करना एक समझदारी भरा कदम हो सकता है। टास्कर के अनुसार, ये कोर्स सिर्फ तकनीकी ज्ञान ही नहीं सिखाते, बल्कि इससे कहीं अधिक जानकारी प्रदान करते हैं।

12वीं के बाद चुने ये 5 एआई कोर्स :

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में डिप्लोमा :
    एआई के डिप्लोमा कोर्स में आपको एआई के बेसिक, पायथन प्रोग्रामिंग, मशीन लर्निंग कॉन्सेप्ट और डेटा प्रोसेसिंग के बारे में पूरी जानकारी मिलेगी. इसमें एआई टूल्स को हैंडलिंग करना भी सिखाया जाता है।
  • बी.टेक इन AI एंड डेटा साइंस :
    बी.टेक इन AI एंड डेटा साइंस रोजगार परक पाठ्यक्रम है। यह एक अंडरग्रेजुएट इंजीनियरिंग कोर्स है, जिसमें छात्रों को डेटा साइंस, मशीन लर्निंग, क्लाउड कंप्यूटिंग, बिग डेटा और प्रोग्रामिंग लैंग्वेंज सीखने को मिलेंगी। यह कोर्स करने के बाद एआई एक्सपर्ट, डेटा साइंटिस्ट बन सकते हैं, जो हेल्थ और फाइनेंस सेक्टर में नौकरी के बड़े अवसर देता है।
  • बी.सी.ए इन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस :
    साइंस और कॉमर्स स्ट्रीम से 12वीं पास करने वाले विद्यार्थियों के बीच BCA in AI कोर्स खासा लोकप्रिय है। यह एक ग्रेजुएट डिग्री प्रोग्राम है, जिसमें कंप्यूटर एप्लीकेशन के साथ एआई व मशीन लर्निंग के कॉन्सेप्ट को सिखाया जाता है. इसमें आपको डेटा एनालिसिस, कंप्यूटर प्रोग्रामिंग, मशीन लर्निंग, डीप लर्निंग, एल्गोरिदम डिजाइन और एआई के बारे में पढ़ाया जाता है।
  • बीएससी एआई एंड डेटा साइंस :
    BSC in AI & Data Science 3 साल का अंडर ग्रेजुएट कोर्स है. इसमें आपको मशीनों को सोचने, सीखने और डेटा साइंस, जिसमें प्रोग्रामिंग, मशीन लर्निंग, सांख्यिकी, डेटा माइनिंग और विजुअलाइजेशन जैसे विषय सीखने को मिलेंगे।
  • रोबोटिक्स एंड एआई डिप्लोमा :
    अगर आप हार्डवेयर और मशीनों के साथ काम करने के इच्छुक हैं, तो इसके लिए रोबोटिक्स एंड एआई डिप्लोमा बेस्ट है. इसमें आपको रोबोटिक्स साइंस और मशीनरी प्रैक्टिकल अभ्यास करने का मौका मिलेगा. साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ-साथ कंप्यूटर साइंस भी सीखने को मिलेगी।
  • 3 AI स्किल करेंगे करियर की राह आसान :
    बारहवीं करने के बाद अगर स्टूडेंट्स तीन एआई स्किल को सीख लेंगे तो उनके करियर की राह आसान हो सकती है। यह स्किल उनके हुनर को थोड़ा और शार्प करके प्रोफेशनल तरक्की में मदद कर सकते हैं।

बेसिक प्रोग्रामिंग :
साइंस स्टूडेंट को बेसिक प्रोग्रामिंग आनी ही चाहिए। आजकल के समय में पायथन ऐसी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज है जो एआई और डेटा साइंस में खूब इस्तेमाल की जाती है। इसकी मांग बाकियों के मुकाबले ज्यादा भी है। इसलिए इस स्किल को सीख लें।

डेटा हैंडलिंग :
डेटा हैंडलिंग माने डेटा सेट को कलेक्ट करके साफ और ऑर्गेनाइज करें। ऐसा करने के लिए पांडास और NumPy आपके काम आ सकते हैं।

नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग :
ह्यूमन लैंग्वेज के साथ एआई कैसे काम करता है इसे समझना महत्वपूर्ण है। जैसे : चैटबॉट्स, ट्रांसलेशन और सेंटिमेंट ऐनालिसिस।

JAC Board Exam Blog - JRU

JAC 10वीं और 12 वीं की बोर्ड परीक्षा 3 फ़रवरी से, टाइम टेबल जारी

झारखंड 10वीं और 12वीं क्लास के छात्रों का इंतजार खत्म हो गया है। जेएसी ने बोर्ड एग्जाम की डेटशीट जारी कर दी है। माध्यमिक और इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षाएं 3 फरवरी 2026 से शुरू होंगी। झारखंड बोर्ड द्वारा जारी डेटशीट के अनुसार, 10वीं क्लास के बोर्ड एग्जाम 03 फरवरी 2026 से शुरू होंगे और 17 फरवरी 2026 तक चलेंगे। सभी परीक्षाएं सिंगल शिफ्ट में सुबह 9:45 बजे से दोपहल 1:00 बजे तक होंगी। हालांकि 3 फरवरी को आईटी और अन्य वोकेशनल सब्जेक्ट्स के पेपर सुबह 9:45 बजे से दोपहर 12:35 बजे तक चलेंगे। झारखंड बोर्ड 12वीं परीक्षा दूसरी पाली (दोपहर 2:00 बजे से शाम 5:15 बजे) में होगी और 23 फरवरी तक चलेगी।

ALL PROGRAMS-STRIP

10वीं परीक्षाओं के लिए एडमिट कार्ड 16 जनवरी से 17 जनवरी तक डाउनलोड कर पाएंगे. 10वीं, 12वीं की लिखित परीक्षा के बाद प्रैक्टिकल परीक्षाए और इंटरनल मूल्यांकन का आयोजन किया जाएगा. प्रैक्टिकल परीक्षाएं और इंटरनल असिसमेंट 24 फरवरी से 7 मार्च तक चलेगी. इंटरनल परीक्षाओं का नंबर 25 फरवरी से 9 मार्च कर अपलोड किया जाएगा. जैक ने कहा है कि प्रैक्टिकल परीक्षा में अनुपस्थित होंगे तो उन्हें परीक्षा में शामिल होने नहीं दिया जाएगा।

छात्रों की जानकारी के लिए बता दें कि झारखंड बोर्ड की ओर से कक्षा 10वीं की परीक्षाओं का आयोजन सुबह की शिफ्ट में प्रातः 9:45 से लेकर दोपहर 1 बजे तक करवाया जायेगा वहीं इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षाओं का आयोजन दूसरी शिफ्ट में दोपहर 2 बजे से लेकर शाम 5:15 तक करवाया जायेगा।

JAC 10th 12th Time Table 2026

परीक्षा की तिथि कक्षा 10वीं/विषय कक्षा 12वीं/विषय
3 फरवरी 2026 IIT एवं अन्य वोकेशनल विषय वोकेशनल सब्जेक्ट
4 फरवरी 2026 हिन्दी-ए, हिन्दी-बी अर्थशास्त्र (साइंस-कॉमर्स), मानवशास्त्र
5 फरवरी 2026 कॉमर्स, गृह विज्ञान गणित/ सांख्यिकी
6 फरवरी 2026 उर्दू, बांग्ला, उड़िया अर्थशास्त्र (आर्ट्स), एकाउंटेंसी
7 फरवरी 2026 सामाजिक विज्ञान भौतिक विज्ञान
9 फरवरी 2026 विज्ञान बायोलॉजी (बॉटनी+जूलॉजी), बिजनेस स्टडीज, समाजशास्त्र
10 फरवरी 2026 संगीत जियोलॉजी, बिजनेस गणित, भूगोल
11 फरवरी 2026 गणित एंटरप्रेन्योरशिप, होम साइंस
13 फरवरी 2026 अंग्रेजी फिलॉसफी, केमिस्ट्री
14 फरवरी 2026 खड़िया खोरठा, कुरमाली, नागपुरी पंचपरगनि इतिहास
16 फरवरी 2026 संस्कृत राजनीतिक विज्ञान
17 फरवरी 2026 अरबी, फारसी, हो, मुंडारी मनोविज्ञान, कंप्यूटर साइंस
18 फरवरी 2026 हिन्दी-ए, अंग्रीज-ए (कला)
20 फरवरी 2026 हिन्दी-ए, अंग्रेजी-ए, संगीत
21 फरवरी 2026 वैकल्पिक विषय, अतिरिक्त विषय
23 फरवरी 2026 हिन्दी-बी और मातृभाषा
International conference on innovative convergence of sustainable future

झारखंड राय विश्वविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन काआयोजन

झारखंड राय विश्वविद्यालय, रांची में शुक्रवार से दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन ” इनोवेटिव कन्वर्जेन्स फॉर सस्टेनेबल फ्यूचर” का प्रारंभ हुआ।

अंतराष्ट्रीय सम्मलेन का विधिवत उद्घाटन दीप प्रज्वलित कर किया गया। इसके उपरांत स्मारिका का विमोचन किया गया जिसे सम्मानित अतिथि सरला बिरला विश्वविद्यालय के कुलपति (प्रो०) जेगनाथन चोकलिंगम, मुख्य अतिथि निदेशक (वित्त) झारखंड उर्जा संचार निगम लिमिटेड श्री अमित बैनर्जी एवं विशिष्ट अतिथि (डॉ०) रमेश चन्द्र मीणा, अतिरिक्त निदेशक सॉफ्टवेर टेक्नोलोजी पार्क ऑफ़ इंडिया,रांची एवं झारखंड राय विश्वविद्यालय, रांची के कुलपति (प्रो०) पीयूष रंजन ने किया

स्वागत भाषण करते हुए झारखंड राय विश्वविद्यालय, रांची के कुलपति प्रो ० पीयूष रंजन ने विषय पर प्रकाश डालते हुई कहा की अंतराष्ट्रीय सम्मलेन का यह विषय हमारे वर्तमान के सामने की चुनौतियों को दर्शाता है आज चुनौतियाँ बड़ी है। आज की वैश्विक चुनौतियाँ हैं जलवायु परिवर्तन , संसाधन का आभाव, सामाजिक असमानताएं एवं तकनीकी भटकाव। इन चुनौतियों का समाधान विचारों का समावेश, अनुशासनों का अभिसरण, सांस्कृतिक जुड़ाव एवं मूल्य प्रणाली से जुड़े सिद्धांतों में छुपा हुआ है। इसके लिए सहयोगात्मक प्रयास सर्वाधिक महत्वपूर्ण है।

कुलपति प्रो० पीयूष रंजन ने भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े सिद्धांत “वसुधैव कुटुम्बकम् एवं “सर्वे भवन्तु सुखिनः” की चर्चा करते हुए कहा की इन पंक्तियों में संपूर्ण रूप से पुरे प्रकृति को समझने का ज्ञान समाया हुआ है। यह हमें स्मरण दिलाता है की सतत विकास केवल एक मॉडल या केवल एक विचार नहीं बल्कि यह हमारी सभ्यता में गहराई से समाया हुआ लोकाचार है।

विशिष्ट अतिथि सरला बिरला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो ० जेगनाथन चोकलिंगम ने सस्टेनेबल एवं कन्वर्जेन्स को सिक्के का एक पहलू बताते हुए कहा की झारखंड राज्य शब्द में ही सस्टेनेबिलिटी छिपा हुआ है। झारखंड शब्द में जल , जंगल, जमीन , जानवर और जन समाहित है। ये 5 J मिलकर झारखंड को परिभाषित करते हैं उसी प्रकार सतत विकास के लिए सेवा, संकल्प, समर्पण, संस्कृति, समाज एवं सन्यास की आवश्यकता है। सन्यास से सनातन का बनेगा जिसका अर्थ है देना अथवा त्याग ।

कुलपति प्रो ० जे ० चोकलिंगम ने वर्तमान चुनौतियों की चर्चा करते हुए कहा की संसाधन के सामने जनसंख्या एक बड़ी चुनौतियाँ हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा पलायन या प्रवास की जगह अपने निवास स्थान को बेहतर बनाने का प्रयास वर्तमान समय की मांग है। तकनीक एवं विज्ञान की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा की भविष्य की चुनौतियों से ज्यादा वर्तमान में हमारे सामने जो समस्यायें खड़ी है उनकी चिंता और समाधान पर ध्यान देने की आवश्यता अधिक है।

स्वामी विवेकानंद के सपनों का भारत पर बोलते हुए उन्होंने कहा की स्वामी जी के सपनों का भारत आध्यात्मिकता एवं वैज्ञानिकता के भाव से भरा हुआ था। उन्होंने पश्चिम की ओर देखने की जगह पर पश्चिम को भारत का अनुसरण करने का मंत्र दिया।

उद्घाटन सत्र को मुख्य अतिथि निदेशक (वित्त) झारखंड उर्जा संचार निगम लिमिटेड श्री अमित बैनर्जी एवं विशिष्ट अतिथि डॉ ० रमेश चन्द्र मीणा ,अतिरिक्त निदेशक सॉफ्टवेर टेक्नोलोजी पार्क ऑफ़ इंडिया रांची ने भी संबोधित किया।

उद्घाटन सत्र का धनयवाद ज्ञापन डीन मैनेजमेंट डॉ ० हरमीत कौर ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा की अन्तराष्ट्रीय सम्मलेन में दो दिनों तक कई विशेषज्ञों के द्वारा अपने शोध पत्र पढ़े जायेंगे।

Yoga day JRU 2025

योग: शरीर, मन और आत्मा का संगम

“योग वह विज्ञान है जो मनुष्य को स्वयं से मिलवाता है, और भीतर के मौन में सच्ची शांति का अनुभव कराता है।”

— स्वामी विवेकानंद

मैं अपनी बात की शुरुआत एक छोटी-सी कविता से करना चाहती हूँ —
एक ऐसी कविता जो योग के सार को महसूस करने में मदद करती है,क्योंकि मेरे लिए योग सिर्फ एक अभ्यास नहीं, बल्कि जीवन का एहसास है।

योग का प्रकाश

साँसों की लय में जब शांति उतरती है,
मन की लहरें धीरे ठहरती हैं।
तन की थकन, मन का भ्रम मिटता है,
योग से जीवन पुनः खिलता है।

सूर्य नमस्कार में नई ऊर्जा आती है,
ध्यान में आत्मा मुस्कुराती है।
हर आसन कहे – यह मार्ग अनोखा है,
योग ही जीवन की सच्ची रोशनी का झरोखा है।

प्रस्तावना

भारतीय संस्कृति की सबसे प्राचीन और समृद्ध देनों में से एक है — योग। यह केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुशासन (spiritual discipline) है जो शरीर, मन और आत्मा को एक सूत्र में बाँधता है। संस्कृत शब्द ‘योग’ का अर्थ है — “संयोजन” या “एकता”। यह व्यक्ति को स्वयं से, समाज से और परमात्मा से जोड़ने का माध्यम है।

आज जब दुनिया तनाव, चिंता और असंतुलन से जूझ रही है, तब योग जीवन में शांति, संतुलन और सकारात्मकता का संदेश देता है।

योग का ऐतिहासिक और दार्शनिक आधार

योग का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। इसका उल्लेख ऋग्वेद, उपनिषदों और भगवद्गीता में मिलता है।
लेकिन योग को एक व्यवस्थित दर्शन के रूप में प्रस्तुत किया गया पतंजलि ऋषि द्वारा, जिन्होंने “योगसूत्र” की रचना की।

पतंजलि के अनुसार —

“योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः”
(योग मन की वृत्तियों का निरोध है।)

अर्थात् योग वह साधन है जो मन के उतार-चढ़ाव को शांत कर आत्मा को स्थिर बनाता है।

अष्टांग योग: जीवन जीने की कला

पतंजलि ने योग को आठ अंगों में बाँटा — जिसे अष्टांग योग कहा जाता है:

  1. यम – नैतिक अनुशासन (अहिंसा, सत्य, अस्तेय आदि)
  2. नियम – आत्मसंयम (शौच, संतोष, तप, स्वाध्याय, ईश्वर-प्रणिधान)
  3. आसन – शरीर को स्थिर और स्वस्थ रखने की विधि
  4. प्राणायाम – श्वास-प्रश्वास का नियंत्रण
  5. प्रत्याहार – इंद्रियों पर नियंत्रण
  6. धारणा – एकाग्रता का अभ्यास
  7. ध्यान – गहन मनन और ध्यान
  8. समाधि – आत्मा का परमात्मा में लय

इन आठों चरणों से योगी धीरे-धीरे आत्म-ज्ञान और मुक्ति की ओर अग्रसर होता है।

योग और मानसिक स्वास्थ्य

आधुनिक जीवन में तनाव, चिंता, अवसाद और अनिद्रा जैसी समस्याएँ सामान्य हो गई हैं। योग इन मानसिक विकारों से निपटने का एक प्राकृतिक और स्थायी समाधान प्रदान करता है।

नियमित योगाभ्यास से —

  • मन शांत होता है,
  • विचारों में स्पष्टता आती है,
  • भावनाओं पर नियंत्रण रहता है,
  • और आत्मविश्वास बढ़ता है।

कई वैज्ञानिक शोधों ने सिद्ध किया है कि योग कॉर्टिसोल (stress hormone)को कम करता है और सिरोटोनिन (happiness hormone) को बढ़ाता है।

योग का वैश्विक प्रसार

21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (International Yoga Day) के रूप में मनाना इस बात का प्रमाण है कि योग अब केवल भारत की संपत्ति नहीं, बल्कि विश्व की धरोहर बन चुका है।

संयुक्त राष्ट्र ने इसे भारत की पहल पर 2015 से वैश्विक स्तर पर मान्यता दी।

आज न्यूयॉर्क से लेकर टोक्यो तक, लाखों लोग योग के माध्यम से स्वास्थ्य और आत्मिक शांति प्राप्त कर रहे हैं।

भारतीय ज्ञान परंपरा में योग का स्थान

भारतीय ज्ञान परंपरा का मूल लक्ष्य रहा है — “सर्वे भवन्तु सुखिनः” यानी सबका कल्याण।
योग इसी भावना का विस्तार है — यह केवल व्यक्ति को स्वस्थ नहीं करता, बल्कि समाज में सद्भाव, संतुलन और करुणा की भावना जगाता है।

योग को हमारे वेद, उपनिषद और गीता ने **कर्मयोग, ज्ञानयोग और भक्तियोग** जैसे विविध रूपों में प्रस्तुत किया है — जो दर्शाता है कि योग केवल शारीरिक अभ्यास नहीं, बल्कि **सम्पूर्ण जीवन का दर्शन** है।

निष्कर्ष

योग केवल शरीर की मुद्रा नहीं, यह **मन की स्थिरता और आत्मा की जागरूकता** की साधना है।
यह हमें सिखाता है कि सच्ची खुशी बाहरी चीज़ों में नहीं, बल्कि **अंतर की शांति** में है।

“योगः कर्मसु कौशलम्” — भगवद्गीता
अर्थात् — योग जीवन के प्रत्येक कर्म को कुशलता और संतुलन से करने की कला है।

इसलिए, आज के युग में योग को अपनाना केवल स्वास्थ्य का उपाय नहीं, बल्कि **जीवन का उत्सव** है — जहाँ शरीर, मन और आत्मा एक साथ मुस्कुराते हैं।

समापन संदेश:

भारतीय ज्ञान परंपरा का यह उपहार हमें याद दिलाता है कि योग केवल भारत की प्राचीन विद्या नहीं, बल्कि मानवता के कल्याण का मार्ग है।
आइए, हम सब योग को अपने जीवन का हिस्सा बनाकर शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक पूर्णता की ओर कदम बढ़ाएँ।

लेखक: रीमशा उरुज़
छात्रा, झारखण्ड राय विश्वविद्यालय

IRON MAKING TECHNOLOGY

झारखंड राय विश्वविद्यालय में प्राचीन लौह निर्माण भट्टी का उद्घाटन

झारखंड राय विश्वविद्यालय रांची के परिसर में बीते गुरुवार को प्राचीन लौह निर्माण भट्टी का उद्घाटन किया गया। जिसका उद्घाटन शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अतुल कोठारी, प्रो. (डॉ.) गौतम सूत्रधार, निदेशक, एनआईटी जमशेदपुर ने किया। झारखंड राय विश्वविद्यालय रांची में आयोजित चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व का समग्र विकास विषय पर विद्यार्थी प्रतिनिधि केंद्रित तीन दिवसीय कार्यशाला में शामिल होने रांची पहुंचे थे। झारखंड राय विश्वविद्यालय में धातु विज्ञान और धातु कर्म के क्षेत्र में भारतीय ज्ञान परंपरा की विशिष्ठ पहचान दर्शाती प्राचीन लौह निर्माण भट्टी (ब्लूमरी फर्नेस ) का निर्माण किया गया है। यह एक प्रकार की धातु कर्म भट्टी है जिसका उपयोग प्राचीन समय में लोहे के ऑक्साइडों को गलाने के लिए व्यापक रूप से किया जाता था। यह तकनीक भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ी है जिसकी सहायता से ढलुआ लोहा बनाया जाता था।इस अवसर पर डॉ. अतुल कोठारी ने भट्टी की निर्माण प्रक्रिया, इसके पारंपरिक और वैज्ञानिक पक्षों तथा भारतीय धातु-विज्ञान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को समझाया ।

एनआईटी जमशेदपुर के प्रो. (डॉ.) गौतम सूत्रधार, झारखंड राय विश्वविद्यालय की कुलाधिपति प्रो. (डॉ.) सविता सेंगर तथा कुलपति प्रो. (डॉ.) पीयूष रंजन भी इस महत्वपूर्ण क्षण में उपस्थित रहे। अतिथियों ने इसे अनुभव–आधारित शिक्षण का सशक्त उदाहरण बताते हुए कहा कि ऐसे प्रयास विद्यार्थियों में अनुसंधान, स्वदेशी तकनीकों की समझ और नवाचार के प्रति रुचि विकसित करते हैं। झारखंड राय विश्वविद्यालय रांची में चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व का समग्र विकास विषय पर तीन दिनों के कार्यशाला का आयोजन किया गया था।

जिसमें पंचकोश अवधारणा (अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय और आनंदमय कोश ) आधारित भारतीय ज्ञान परंपरा के माध्यम से विद्यार्थियों और शिक्षकों के समग्र व्यक्तित्व विकास को समझना और उसे जीवन में व्यावहारिक रूप से लागू करना था।

Workshop on Character building through Panchakosha theory (10)

चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व का समग्र विकास विषय पर तीन दिवसीय कार्यशाला संपन्न

झारखंड राय विश्वविद्यालय, रांची में 20 से 22 नवंबर 2025 तक चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व का समग्र विकास विषय पर विद्यार्थी प्रतिनिधि केंद्रित तीन दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा के माध्यम से विद्यार्थियों और शिक्षकों के समग्र व्यक्तित्व विकास को समझना और उसे जीवन में व्यावहारिक रूप से लागू करना था। इस दौरान पंचकोश अवधारणा (अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय और आनंदमय कोश ) पर आधारित शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक विकास विकास पर जोर रहा।

उद्घाटन सत्र :

उद्घाटन सत्र में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अतुल कोठारी, प्रो. (डॉ.) गौतम सूत्रधार, निदेशक, एनआईटी जमशेदपुर कुलाधिपति प्रो. (डॉ.) सविता सेंगर झारखंड राय विश्वविद्यालय, रांची और कुलपति प्रो. (डॉ.) पीयूष रंजन की गरिमामयी उपस्थिति रही। सत्र के मुख्य वक्ता डॉ. कोठारी ने कार्यक्रम की शुरुआत ॐ तथा “तमसो मा ज्योतिर्गमय” मंत्र के सामूहिक उच्चारण से करवाई और विद्यार्थियों से अनुभव साझा करने को कहा। उन्होंने बताया कि यदि किसी कक्षा की शुरुआत ॐ से हो, तो वातावरण शांत रहता है, मन स्थिर होता है और एकाग्रता स्वाभाविक रूप से बढ़ती है। उन्होंने विद्यार्थियों से यह भी पूछा कि कौन–कौन सुबह अपने इष्ट देवता का स्मरण करके आता है, और सुझाव दिया कि उसी समय ॐ का उच्चारण मानसिक संतुलन के लिए अत्यंत लाभकारी है।

चरित्र निर्माण पर बोलते हुए उन्होंने स्वामी विवेकानंद के विचार “Good habit is value” का उल्लेख किया और कहा कि बच्चे वही सीखते हैं जो वे बड़ों को करते हुए देखते हैं। एक चोर की कहानी के माध्यम से उन्होंने समझाया कि छोटी गलतियों पर समय रहते रोक लगाने से बड़े अपराध टल सकते हैं, इसलिए प्रारंभिक जीवन में सही दिशा देना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि घरेलू कार्य—जैसे झाड़ू–पोंछा या अपने कार्य स्वयं करना—व्यायाम का ही रूप हैं और आत्मनिर्भरता बढ़ाते हैं। जापान का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहाँ लोग अपना काम स्वयं करते हैं और यही आदतें राष्ट्रीय चरित्र का आधार बनती हैं।

पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता की जिम्मेदारी और प्राणायाम के महत्व को उन्होंने विशेष रूप से रेखांकित किया।

डॉ. कोठारी ने छात्र-प्रतिनिधियों से अपेक्षा की कि वे कार्यशाला से प्राप्त सीख को अपने साथियों तक पहुँचाएँ और भारतीय ज्ञान परंपरा के मूल्यों को व्यवहार में उतारने में अग्रणी भूमिका निभाएँ। सत्र के अंत में विश्वविद्यालय की अर्धवार्षिक पत्रिका ‘संवित्’ का लोकार्पण किया गया।

पत्रिका लोकार्पण के उपरांत विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति में लोह-निर्माण भट्टी का उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर डॉ. अतुल कोठारी ने भट्टी की निर्माण प्रक्रिया, इसके पारंपरिक और वैज्ञानिक पक्षों तथा भारतीय धातु-विज्ञान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को समझा। एनआईटी जमशेदपुर के प्रो. (डॉ.) गौतम सूत्रधार, झारखंड राय विश्वविद्यालय की कुलाधिपति प्रो. (डॉ.) सविता सेंगर तथा कुलपति प्रो. (डॉ.) पीयूष रंजन भी इस महत्वपूर्ण क्षण में उपस्थित रहे। अतिथियों ने इसे अनुभव–आधारित शिक्षण का सशक्त उदाहरण बताते हुए कहा कि ऐसे प्रयास विद्यार्थियों में अनुसंधान, स्वदेशी तकनीकों की समझ और नवाचार के प्रति रुचि विकसित करते हैं।

पंचकोश आधारित सत्र :

कार्यशाला के पहले दिन अन्नमय एवं प्राणमय कोश से जुड़े सत्र में भोजन और स्वास्थ्य के वैज्ञानिक संबंध, श्वास–प्रश्वास तथा ऊर्जा–संतुलन, और भावनात्मक स्थिरता जैसे विषयों पर चर्चा की गई। अन्नमय कोश सत्र में चर्चा के दौरान डॉ ० डी ० एन ० सिंह प्रांत प्रमुख विद्वत परिषद् , विद्या भारती झारखंड ने अन्न की महत्ता एवं जीवन में अन्न की उपयोगिता एवं महत्त्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा की अन्न केवल भोजन नहीं बल्कि शारीरिक एवं मानसिक विकास का भी प्रमुख कारक तत्व है। इसी सत्र के छात्र गतिविधि सत्र का संचालन प्रो ० रश्मि ने किया जिन्होंने कार्यशाला में उपस्तिथ विद्यार्थियों के साथ अन्न मय कोश से जुड़ी विभिन्न गतिविधियां करवायी। कार्यशाला का दूसरा सत्र प्राणमयकोश का रहा जिसमें प्रतिभागियों को प्राण , प्राणायाम और श्वास तंत्र के बारे में जानकारी प्रदान की गयी। विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए डॉ ० प्रशांत जयवर्धन ने प्राण एवं प्राणमय कोश के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी दी। उन्होंने पंच कोश में प्राणमय कोश के महत्त्व एवं अन्य कोश की साथ उसके संबंधों पर प्रकाश डाला। प्राणमय कोश विद्यार्थी गतिविधि सत्र का संचालन शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के प्रांत संयोजक महेंद्र कुमार सिंह ने किया। उन्होंने अपना अनुभव साझा करते हुए प्राणमय कोश विकास के लिए विद्यार्धियों से प्राणायाम, मुद्रा और बंध का अभ्यास करवाया।

कार्यशाला के दूसरे दिन मनोमय कोश एवं विज्ञानमय कोश पर आधारित विचार एवं गतिविधियाँ साझा की गयी। मनोमय कोश विकास पर डॉ ० ललिता राणा , प्राध्यापक आनंदा कॉलेज ( प्रांत संयोजक चरित्र निर्माण ) एवं प्रो ० राजन तिवारी ने विचार प्रस्तुत किया एवं मनोमय कोश से जुड़ी गतिविधियाँ आयोजित की।

विज्ञानमय कोश सत्र में कुलाधिपति प्रो. (डॉ.) सविता सेंगर और डॉ. के.पी. दत्ता ने संबोधित करते हुए बताया कि विज्ञानमय कोश बुद्धि, विवेक और निर्णय क्षमता का स्तर है। उन्होंने कहा कि जब व्यक्तित्व परिपक्व नहीं होता, तो निर्णय मूल्यों के बजाय स्वार्थ से प्रभावित होते हैं, जिससे समाज में विश्वास की कमी पैदा होती है। विज्ञानमय कोश का विकास व्यक्ति में तटस्थता, पारदर्शिता और स्पष्ट निर्णय क्षमता को मजबूत करता है।

कुलाधिपति महोदया का विचार–प्रवर्तक व्याख्यान :

कुलाधिपति महोदया ने कहा कि पंचकोश केवल शरीर की परतों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्तित्व के सूक्ष्म आयामों को समझने का माध्यम है। उन्होंने समझाया कि विज्ञानमय कोश वह स्तर है जहाँ बुद्धि, विवेक और निर्णय क्षमता विकसित होती है। अनेक बार लोग बिना परिणामों पर विचार किए आदत या भावनाओं के प्रभाव में निर्णय ले लेते हैं।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि व्यवहारिक जीवन में लोग डॉक्टरों और वकीलों पर इसलिए भरोसा नहीं कर पाते क्योंकि कभी–कभी डॉक्टर दवा कंपनियों के दबाव में दवाइयाँ लिख देते हैं और वकील आर्थिक लाभ के लिए सच को मोड़ देते हैं। यह समस्या पेशों की नहीं, बल्कि व्यक्तित्व–विकास की कमी का परिणाम है। उन्होंने कहा कि विश्वास वहीं बनता है जहाँ पारदर्शिता और ईमानदारी हो। विज्ञानमय कोश का विकास व्यक्ति को न अंध–विश्वास में जीने देता है और न संदेह में; बल्कि तथ्य, विवेक और तटस्थ दृष्टि से निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करता है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि गलतियाँ होना समस्या नहीं, लेकिन वही गलती दोबारा न दोहराना ही वास्तविक सीख है। जीवन में अपना मार्ग स्वयं चुनना चाहिए और दूसरों से तुलना के बजाय आत्म–विकास पर ध्यान देना चाहिए।

दूसरे दिन का अंतिम सत्र आनंद मय कोश का रहा जिसमें जीवन में आनंद एवं पंच कोश में आनंद विषय पर डॉ ० अमरकांत झा , क्षेत्रीय संयोजक चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व का समग्र विकास शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास एवं प्रो ० ओम प्रकाश सत्यम ने व्याख्यान एवं गतिविधि आयोजित किया।

इसमें बताया गया कि आनंद बाहरी परिस्थितियों पर नहीं, बल्कि आंतरिक स्थिरता और मूल्य–आधारित जीवन पर निर्भर करता है। समूह चर्चा और अनुभव–विनिमय के आधार पर आगे की कार्ययोजना तैयार की गई, जिसमें प्रतिभागियों ने अपने-अपने संस्थानों में चरित्र–निर्माण और भारतीय ज्ञान परंपरा आधारित गतिविधियों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

कार्यशाला का तीसरा एवं समापन दिवस का पहला सत्र गट सह चर्चा एवं आगामी कार्य योजना आधारित रखा गया था जिसमें सभी पांच कोश के विद्यार्थी एवं कोश प्रभारियों ने अपने अपने विचार कथन रखे। इस दौरान कोश विकास से जुड़ी आगामी कार्य योजना भी प्रस्तुत की गयी। कार्यशाला का समापन सत्र अनुभव कथन एवं समहू चर्चा पर केंद्रित रखा गया था। समापन सत्र को डॉ. विजय सिंह, डीन ( योजना एवं विकास ) सह क्षेत्र संयोजक शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास , डॉ. अमृता मजूमदार, कुल सचिव झारखंड राय विश्वविद्यालय , डॉ ० हरमीत कौर डीन ( मैनेजमेंट ) डॉ. सुमित पांडेय , डीन अकादमिक नेतृत्व ने सम्बोधित किया। इस दौरान तीन दिनों तक पंचकोश चर्चा एवं गतिविधियों में प्रतिभागियों की सक्रिय सहभागिता की सबने सराहना की। इस दौरान सभी ने कहा की तीन दिनों तक चले इस संवाद और प्रशिक्षण ने न केवल ज्ञान का विस्तार किया, बल्कि जीवन–दृष्टि को भी नई दिशा प्रदान की। कार्यशाला ने यह संदेश स्थापित किया कि शिक्षा का लक्ष्य केवल पेशेवर उत्कृष्टता नहीं, बल्कि संवेदनशील, सजग और मूल्यनिष्ठ समाज का निर्माण है।

तीन दिनों तक आयोजित कार्यशाला का सफल संचालन प्रो ० अनुराधा शर्मा , प्रो ० रागिनी कुमारी , डॉ ० कुमार अमरेंद्र ( कौटिल्य ज्ञान केंद्र ) एवं प्रो ० विक्रांत रवि ने किया।

Indian Knowledge Systems and Mathematics The Intellectual Journey of a Computer Science Researcher

भारतीय ज्ञान प्रणाली और गणित: एक कंप्यूटर विज्ञान शोधार्थी की बौद्धिक यात्रा

“कभी-कभी एक प्रश्न ही रास्ता खोल देता है, और उस पर चलने की जिज्ञासा जीवन बदल देती है।”

मेरी यह यात्रा भी एक ऐसे ही प्रश्न से शुरू हुई — “कंप्यूटर विज्ञान जैसे आधुनिक विषय से, क्या वाकई मैं हजारों वर्षों पुरानी भारतीय ज्ञान प्रणाली को जोड़ सकता हूँ?”

जब मुझे पहली बार विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यू.जी.सी.) द्वारा आयोजित 6-दिवसीय भारतीय ज्ञान प्रणाली के प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेने का अवसर मिला, मन में उत्साह तो था, लेकिन साथ ही शंका भी थी।

एक ओर भारतीय ज्ञान प्रणाली — ऋषियों की गहराई से उपजी वह विरासत, जो वेदों, गणित, खगोल, दर्शन, साहित्य, नृत्य और आयुर्वेद से समृद्ध है; और दूसरी ओर कंप्यूटर विज्ञान — आज की डिजिटल क्रांति का सबसे प्रमुख स्तंभ। दोनों के बीच की दूरी मुझे शुरुआत में असंभव-सी लगी। लेकिन जैसे-जैसे प्रशिक्षण आगे बढ़ा, मेरी सोच बदलने लगी।

6 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में जैसे ही मैंने भारतीय गणित पर आधारित सत्रों को ध्यानपूर्वक सुना, मेरी दृष्टि में परिवर्तन हुआ। मैंने जाना कि हमारे देश ने न केवल शून्य और दशमलव की खोज की, बल्कि गणना की विधियाँ, बीजगणित, त्रिकोणमिति, और खगोलगणित में भी अमूल्य योगदान दिया है।

आर्यभट्ट ने जिस खगोलगणित की नींव रखी, वह आज भी उपग्रहों की कक्षा निर्धारण में उपयोगी है।

पिंगलाचार्य के छंदशास्त्र में द्विआधारी गणना (द्वि-कोड प्रणाली) की झलक है, जिसे आज का कंप्यूटर विज्ञान अपनी नींव मानता है।

भास्कराचार्य की लीलावती पुस्तक में गणितीय अवधारणाएँ इतनी सरल भाषा में प्रस्तुत हैं कि वे आज के आधुनिक शिक्षण मॉडल से कहीं अधिक प्रभावी प्रतीत होती हैं।

मैं चकित था — क्या ये वही अवधारणाएँ हैं जिन पर आज कंप्यूटर विज्ञान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के तर्क-आधारित तंत्र कार्य करते हैं?
इस प्रशिक्षण के पश्चात, मुझे भारत भर से चुने गए लगभग 1000 प्रतिभागियों में से मुख्य प्रशिक्षक बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। यह मेरे लिए केवल सम्मान नहीं, बल्कि उत्तरदायित्व भी था — एक ऐसा उत्तरदायित्व, जो इस विरासत को केवल समझने का नहीं, बल्कि इसे आज की शिक्षा प्रणाली और तकनीकी क्षेत्र से जोड़ने का था।
इसके पश्चात मुझे “गणित” विषय पर केंद्रित विषय-विशिष्ट प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेने का अवसर मिला, जिसने मेरी सोच को और भी वैज्ञानिक, सुसंगत और गहराई से जुड़ा हुआ बना दिया।

अब सवाल यह था — मैं कंप्यूटर विज्ञान से होने के नाते भारतीय ज्ञान प्रणाली को कैसे जोड़ सकता हूँ?

और यहीं पर मुझे उत्तर मिले — गणित और कंप्यूटर विज्ञान के बीच उस अदृश्य पुल की खोज, जो सदियों पहले हमारे ऋषियों द्वारा स्थापित किया गया था।

भारतीय गणित और कंप्यूटर विज्ञान के सेतु

  • क्रमविधि (एल्गोरिदम) और भारतीय ज्ञान प्रणाली:
    पिंगलाचार्य द्वारा प्रतिपादित छंद विन्यास में ‘लघु’ और ‘गुरु’ की गणना वास्तव में द्विआधारी कोडिंग (0 और 1) जैसी है।
  • पुनरावृत्ति विधियाँ (रीकरिंग मैथड्स) और चक्रवाल पद्धति:
    भास्कराचार्य की चक्रवाल विधि आज के आवर्तक क्रमविधि (इटरेटिव एल्गोरिदम) जैसी ही है।
  • फ्रैक्टल पैटर्न और मंदिर वास्तुकला:
    भारतीय मंदिरों की संरचना में प्रयुक्त गणितीय पैटर्न, आज के संगणक ग्राफ़िक्स और डिज़ाइनिंग में प्रयुक्त “स्वरूप ज्यामिति” (फ्रैक्टल ज्योमेट्री) से मिलते हैं।
  • डेटा वर्गीकरण और नवरस सिद्धांत:
    भारतीय सौंदर्यशास्त्र में वर्णित ‘नवरस’ की प्रणाली, आज की भावनात्मक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (ए.आई.) मॉडलिंग में उपयोगी हो सकती है।

अर्थात् भारतीय ज्ञान प्रणाली, कंप्यूटर विज्ञान से केवल जुड़ती नहीं है — वह उसमें नव दृष्टिकोण, संवेदनशीलता, और भारतीयता का समावेश करती है।

आज मैं गौरव से कह सकता हूँ कि मुझे देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, और शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों में भारतीय ज्ञान प्रणाली विषय पर सत्र लेने का अवसर मिल रहा है।

  • विश्वविद्यालय अनुदान आयोग–शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशालाएँ
  • शिक्षकों के विकास कार्यक्रम (FDP.)
  • विषय-विशिष्ट अभिमुखीकरण सत्र
  • भारतीय ज्ञान प्रणाली जागरूकता एवं एकीकरण अभियान

इन सत्रों में मैं न केवल गणित और कंप्यूटर विज्ञान के शिक्षकों को प्रशिक्षण देता हूँ, बल्कि उन्हें यह विश्वास भी दिलाता हूँ कि भारतीय ज्ञान प्रणाली न केवल प्रासंगिक है, बल्कि अनिवार्य भी — यदि हम एक आत्मनिर्भर, मूल्यों पर आधारित, और नवाचार से परिपूर्ण शिक्षा प्रणाली चाहते हैं।

मेरी यह यात्रा बताती है कि प्राचीनता का अर्थ जड़ता नहीं होता, और आधुनिकता का अर्थ परंपरा से विमुख होना नहीं होता। यदि हम ध्यानपूर्वक देखें, तो भारतीय ज्ञान प्रणाली और कंप्यूटर विज्ञान के बीच गहरा तात्त्विक और व्यवहारिक संबंध मौजूद है।

आज आवश्यकता इस बात की है कि हम इस ज्ञान को पुनः अपने शिक्षण, अनुसंधान और नवाचार में समाहित करें — तभी हम सच्चे अर्थों में “भारत को ज्ञान-विज्ञान की विश्वगुरु परंपरा से जोड़ने” की दिशा में आगे बढ़ पाएँगे।


लेखक:
डॉ. कुमार अमरेन्द्र
संकाय सदस्य, कंप्यूटर विज्ञान एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, झारखंड राय विश्वविद्यालय, रांची
मुख्य प्रशिक्षक, भारतीय ज्ञान प्रणाली, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, शिक्षा मंत्रालय

CBSE 2026 Board Exam final date sheet

सीबीएसई ने जारी की कक्षा दसवीं और बारहवीं की फाइनल डेटशीट, यहां देखें पूरी जानकारी

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने वर्ष 2026 की बोर्ड परीक्षाओं की फाइनल डेटशीट जारी कर दी है। सीबीएसई कक्षा 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं 17 फरवरी 2026 से शुरू होंगी। कक्षा 10 की परीक्षाएं 17 फरवरी से 10 मार्च तक और कक्षा 12 की परीक्षा 17 फरवरी से 9 अप्रैल 2026 तक चलेगी । सभी परीक्षाएं सुबह 10:30 बजे से 12:30 या 1:30 बजे तक होंगी, विषय के अनुसार समय तय किया गया है।

जारी डेटशीट के अनुसार, सभी विद्यालयों द्वारा अपनी वार्षिक परीक्षाओं की सूची (एग्जामिनेशन) जमा कर दी गई है। विद्यालयों में लगभग 4,00,000 से अधिक शिक्षण संस्थानों को ध्यान में रखते हुए यह डेट शीट तैयार की गई है।

दो बार होगी 10वीं की बोर्ड परीक्षा :
सीबीएसई ने बताया कि सत्र 2026 से कक्षा 10वीं के लिए साल में दो बार बोर्ड परीक्षा होगी, जैसा कि नई शिक्षा नीति (NEP 2020) में सुझाव दिया गया है. बोर्ड ने पहली बार 24 सितंबर 2025 को टेंटेटिव डेट शीट जारी की थी ताकि छात्र और स्कूल पहले से तैयारी कर सकें। अब जब सभी स्कूलों ने अपने विषय संयोजन का डेटा भेज दिया है, तो फाइनल डेटशीट परीक्षा से 110 दिन पहले जारी की गई है।

एक शिफ्ट में होगी परीक्षा :
सीबीएसई की आधिकारिक अधिसूचना के मुताबिक कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा केवल एक शिफ्ट सुबह 10.30 बजे से लेकर दोपहर 1.30 बजे तक आयोजित कराई जाएगी।

एग्जाम कैलेंडर में हुआ बदलाव :
सीबीएसई की ओर से कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं के लिए फाइनल डेटशीट जारी कर दी गई है। ऐसे में उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वह अपने एग्जाम कैलेंडर को अपटेड कर लें, क्योंकि कक्षा दसवीं की बोर्ड परीक्षा में कई बदलाव किए गए हैं।

ऐसे चेक करें डेटशीट :
सीबीएसई के छात्र बोर्ड की अधिकारिक वेबसाइट पर जाकर डेटशीट चेक कर सकते हैं और यहीं से PDF भी डाउनलोड कर सकते हैं. इस बार कक्षा 10वीं के लिए दो बार बोर्ड परीक्षा का आयोजन होगा । नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत ये परीक्षा ली जाएगी. इससे पहले बोर्ड की तरफ से परीक्षाओं की टेंटेटिव डेटशीट जारी की गई थी। अब छात्रों के लिए फाइनल डेटशीट जारी की गई है।

सीबीएसई का कथन :
सीबीएसई की तरफ से बताया गया है कि डेटशीट इस बार 110 दिन पहले जारी कर दी गई है। साथ ही दोनों कक्षाओं में दो विषयों के लिए बीच का अंतराल दिया गया है। डेट शीट इस तरह से तैयार की गई है कि प्रस्तावित दो विषयों की परीक्षा एक तारीख पर न हो । बोर्ड परीक्षाओं को प्रवेश परीक्षाओं से काफी पहले खत्म करने की कोशिश की गई है, जिससे छात्रों को आसानी होगी ।

बोर्ड की तरफ से नोटिफिकेशन में बताया गया है कि मूल्यांकन के दौरान सभी विषयों के शिक्षक एक साथ और लंबे समय तक अपने विद्यालय से दूर नहीं रहेंगे। डेट शीट तैयार करते समय 40 हजार से ज्यादा विषय संयोजनों को ध्यान में रखते हुए डेटशीट तैयार की गई है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रावधानों के तहत होगी परीक्षा :

सीबीएसई ने 10वीं और 12वीं दोनों कक्षाओं की परीक्षा तिथियां जारी कर दी हैं। यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) की सिफारिशों के तहत किया जा रहा है।

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झारखंड राय विश्वविद्यालय : रैगिंग मुक्त परिसर है संस्कृति हमारी

कैंपस जीवन सीखने और रोमांचक के नए अनुभवों के साथ विद्यार्थी के विकास विकास का एक दौर माना जाता है। यह एक ऐसी जगह है जहाँ छात्र आजीवन दोस्त बनाते हैं, शैक्षणिक सपनों को साकार करते हैं और वयस्कता में कदम रखते हैं। कुल मिलाकर कैंपस जीवन बौद्धिक विकास, सामाजिक जुड़ाव और व्यक्तिगत खोज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

हालाँकि इस जुड़ाव और सामाजिकता के दौरान कई बार दुर्घटनाएं भी घाट जाया करती हैं जो विद्यार्थी के जीवन में कभी न मिटने वाली वह घटना बन जाती है जिसके चलते कैंपस जीवन एक अभिशाप की तरह लगने लगता है। इस अभिशाप का नाम रैगिंग है।

यह शब्द पढ़ने में सामान्य लगता है। इसके पीछे छिपी भयावहता को वे ही छात्र समझ सकते हैं जो इसके शिकार हुए हैं। आधुनिकता के साथ रैगिंग के तरीके भी बदलते जा रहे हैं। रैगिंग आमतौर पर सीनियर विद्यार्थी द्वारा कॉलेज में आए नए विद्यार्थी से परिचय लेने की प्रक्रिया। लेकिन अगर किसी छात्र को रैगिंग के नाम पर अपनी जान गंवाना पड़े तो उसे क्या कहेंगे।

रैगिंग—एक ऐसी परेशान करने वाली प्रथा जिसमें दुर्व्यवहार, अपमान या हमला शामिल है—की छाया इस विद्यार्थी जीवन के सुखद माहौल को दुखद रूप से बिगाड़ सकती है, उत्साह को भय में और संभावनाओं को पीड़ा में बदल सकती है।

झारखंड राय विश्वविद्यालय : रैगिंग मुक्त कैंपस जीवन। एकता एवं अनुशासन

झारखंड राय विश्वविद्यालय (JRU) राँची रैगिंग के प्रति शून्य-सहिष्णुता की नीति पर कार्य करता है । विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता इसको लेकर अटल है।

यहाँ सुनिश्चित किया जाता है कि प्रत्येक छात्र परिसर में कदम रखते ही सुरक्षित, सम्मानित और सशक्त महसूस करे। रैगिंग-मुक्त परिसर केवल एक कानूनी आवश्यकता नहीं है; यह शैक्षिक दर्शन का एक मूलभूत आधार है।

रैगिंग क्या है और यह अस्वीकार्य क्यों है?

रैगिंग को अक्सर ग़लतफ़हमी में एक हानिरहित “परंपरा” या “बातचीत तोड़ने” का एक आसान तरीका मान लिया जाता है। यह एक ख़तरनाक ग़लतफ़हमी है। यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) रैगिंग को किसी भी ऐसे कृत्य के रूप में परिभाषित करता है जो निम्नलिखित का कारण बनता है या बनने की संभावना रखता है:

  • शारीरिक या मानसिक क्षति या शर्मिंदगी या शर्मिंदगी की भावना।
  • किसी जूनियर छात्र का अपमान या उसे परेशान करना।
  • अनुशासनहीनता या घोर दुर्व्यवहार में लिप्त होना।

रैगिंग के प्रभाव गंभीर और दीर्घकालिक होते हैं, जिनमें अत्यधिक तनाव और शैक्षणिक गिरावट से लेकर, चरम मामलों में, अपूरणीय मनोवैज्ञानिक आघात तक शामिल हो सकते हैं। यह मूल रूप से व्यक्ति की गरिमा और शांतिपूर्ण शिक्षा के उसके अधिकार का उल्लंघन करता है।

रैगिंग के विरुद्ध झारखंड राय विश्वविद्यालय की बहुआयामी रणनीति :

आपसी सम्मान और सौहार्द का माहौल बनाने के लिए, विश्वविद्यालय ने एक सशक्त, सतर्क और सक्रिय रैगिंग विरोधी तंत्र लागू किया है:

1. रैगिंग विरोधी समिति और दस्ता :

झारखंड राय विश्वविद्यालय की समर्पित रैगिंग विरोधी समिति (एआरसी) और रैगिंग विरोधी दस्ता (एआरएस) रैगिंग मुक्त परिसर के प्रयासों की रीढ़ हैं। इनमें वरिष्ठ संकाय, प्रशासनिक कर्मचारी और छात्र प्रतिनिधि शामिल हैं।

एआरसी सभी रैगिंग विरोधी उपायों की योजना बनाने, उन्हें लागू करने और उनकी देखरेख के लिए ज़िम्मेदार है। एआरएस विशेष रूप से छात्रावासों, कैंटीनों और सुनसान जगहों पर औचक निरीक्षण करता है, ताकि अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके और किसी भी संभावित घटना का तुरंत समाधान किया जा सके।

2. अनिवार्य रैगिंग विरोधी शपथपत्र :

प्रत्येक छात्र को प्रवेश के समय, अपने माता-पिता/अभिभावक के साथ एक अनिवार्य रैगिंग विरोधी शपथ पत्र/अंडरटेकिंग प्रस्तुत करना होता है । यह कानूनी दस्तावेज़ नियमों और रैगिंग में शामिल होने के गंभीर परिणामों के बारे में उनकी जागरूकता की पुष्टि करता है, और शुरू से ही जवाबदेही को मजबूत करता है।

3. तत्काल रिपोर्टिंग और परामर्श सेवाएँ :
तत्काल रिपोर्टिंग और परामर्श सेवा छात्रों को बिना किसी डर के अपनी बात कहने के लिए प्रोत्साहित करता है।
हेल्पलाइन और संपर्क:
विश्वविद्यालय के पूरे परिसर में आसानी से उपलब्ध, 24/7 एंटी-रैगिंग हेल्पलाइन नंबर और निर्धारित संपर्क केंद्र (संकाय/कर्मचारी) कार्यरत है।

गोपनीयता: सभी शिकायतों को अत्यंत गोपनीयता के साथ रखा जाता है।
सहायता: हमारी परामर्श सेवाएँ पीड़ितों को तत्काल मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक सहायता प्रदान करने के लिए उपलब्ध हैं, जिससे उन्हें ठीक होने और परिसर समुदाय में पुनः एकीकृत होने में मदद मिलती है।

4. अपराधियों के लिए कठोर दंड :

झारखण्ड राय विश्वविद्यालय कानून और यूजीसी नियमों का कड़ाई से पालन करता है। रैगिंग के दोषी पाए गए छात्रों पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाती है , जिसमें निम्नलिखित कदम शामिल हो सकते हैं:

  • विश्वविद्यालय से निलंबन या निष्कासन।
  • परिणाम या डिग्री रोक दी जाएगी।
  • कानून के अनुसार आपराधिक मुकदमा चलाया जाएगा।

समावेशिता की संस्कृति को बढ़ावा देना :

रैगिंग से जुड़ी घटनाओं पर विश्वविद्यालय का मिशन केवल अपराधियों को दंडित करने से कहीं आगे जाता है; यहाँ एक सकारात्मक और समावेशी परिसर संस्कृति का पोषण भी किया जाता है।

अभिविन्यास कार्यक्रम: हम नए छात्रों के लिए विस्तृत अभिविन्यास सत्र आयोजित करते हैं, जिसमें रैगिंग विरोधी नीति की स्पष्ट रूपरेखा दी जाती है और उन्हें उनके अधिकारों के बारे में शिक्षित किया जाता है।

संवादात्मक सत्र: वरिष्ठ छात्रों को रैगिंग के नकारात्मक प्रभावों के बारे में जागरूक करने और कनिष्ठ छात्रों के साथ स्वस्थ, रचनात्मक बातचीत को बढ़ावा देने के लिए नियमित कार्यशालाएं और संवादात्मक सत्र आयोजित किए जाते हैं। हम बदमाशी के बजाय मार्गदर्शन और सकारात्मक नेतृत्व को प्रोत्साहित करते हैं।

समुदाय निर्माण: कार्यक्रमों, क्लबों और सोसाइटियों को वरिष्ठ और कनिष्ठ छात्रों के लिए साझा हितों के आधार पर एक मंच के रूप में सक्रिय रूप से बढ़ावा दिया जाता है, जिससे वास्तविक सम्मान और सौहार्द को बढ़ावा मिलता है।

बदलाव के वाहक बनें अपनी भूमिका निभाएं :

झारखंड राय विश्वविद्यालय, रांची शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को सुरक्षित परिसर निर्माण की सामूहिक ज़िम्मेदारी से जोड़ता है। उनमें यह भावना भरने का कार्य भी करता है की आप सिर्फ़ एक छात्र नहीं हैं; आप विश्वविद्यालय समुदाय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

नए विद्यार्थियों जाने अपना अधिकार :

रैगिंग और उससे जुड़ी घटनाओं को समाप्त करने के लिए नए विद्यार्थियों को अपने प्राप्त अधिकारों के प्रति जागरूक होना भी आवश्यक है। अगर आपको कोई ख़तरा महसूस हो या रैगिंग की कोई घटना हो, तो तुरंत इसकी सूचना दें। आपका साहस ही सबसे महत्वपूर्ण है।

वरिष्ठ छात्रों के लिए निर्देश :

वरिष्ठ विद्यार्थी नए छात्र छात्राओं के लिए एक आदर्श बनें। अपने कार्यों से ही वरिष्ठ छात्र मानक स्थापित करते हैं। नए छात्रों के साथ दयालुता से पेश आएँ, मार्गदर्शन प्रदान करें और उन्हें विश्वविद्यालय की सर्वश्रेष्ठ विशेषताएँ दिखाएँ एवं अवगत कराने का कार्य करें।

अभिभावकों के लिए निर्देश :

अपने बच्चों के साथ इस मुद्दे पर चर्चा करें और सम्मान और करुणा के महत्व पर ज़ोर दें।

शिक्षकों , विद्यार्थियों एवं कर्मियों के सहयोग से हम सब मिलकर झारखंड राय विश्वविद्यालय को एक ऐसा परिसर बना रहे हैं जहाँ हर छात्र सुरक्षा, सम्मान और आपसी सम्मान को समान भाव से स्वीकार्य किया जाता है एवं परिभाषित वातावरण में विद्यार्थियों को सिखने , आगे बढ़ने और अपनी पूरी क्षमता हासिल करने का अवसर प्राप्त हो सके।

Mental Health The Invisible Burden of the Mind - JRU Blog KGK

मानसिक सेहत: मन का अदृश्य बोझ

(विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर विशेष)

मन का बोझ हमारे व्यक्तित्व का एक बड़ा रहस्य है। आजकल सभी लोग अपने शरीर का वजन घटाने में लगे हैं, लेकिन इस बात का हमें ख्याल ही नहीं आता कि शरीर के बोझ के अलावा हमारे मन पर भी, हमारे दिमाग पर भी हमेशा एक बोझ रहता है। जैसे शरीर बीमार होता है, हमारा मस्तिष्क भी बीमार होता या हो सकता है। हर साल की तरह इस वर्ष भी दस अक्टूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया गया। इस मौके पर हम बात करेंगे उस वजन की, जो दिखाई नहीं देता लेकिन हमारे जीवन पर, रोजाना की जिंदगी में उसका गहरा असर रहता है। यह वजन कई टन का होता है। कड़वा सच यह भी है कि शरीर की तरह मन का बोझ किसी दवाई से, इंजेक्शन से, किसी वर्कआउट से, जिम से या ट्रेडमिल पर चलने से कम नहीं होता।

कई बार यह बोझ उन लोगों को मानसिक तौर पर बीमार बना देता है जो बाहर से देखने में पूरी तरह फिट दिखते हैं क्योंकि यह बोझ भावनाओं का होता है, डर का होता है,टूटती उम्मीदों का होता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यू एच ओ) की नई रिपोर्ट के मुताबिक, पूरी दुनिया में 100 करोड़ से ज्यादा लोग मानसिक स्वास्थ्य (मेंटल हेल्थ) से जूझ रहे हैं। यह हिस्सा वैश्विक आबादी का लगभग 14% है। औसतन दुनिया में हर सात में से एक व्यक्ति किसी ना किसी मानसिक बीमारी का शिकार है। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है, यह एक वैश्विक आपदा है। मानसिक बोझ के भी कई स्तर हैं, उनमें से एक है – एंग्जायटी (बेचैनी) यानी भविष्य की चिंता। यह एक तरह का डर है जो हर पल हमें परेशान करता है कि भविष्य में क्या होगा, कल क्या होने वाला है।

एक आंकड़े के मुताबिक भारत में भी लगभग 20 करोड़ लोग किसी ना किसी मानसिक रोग से संघर्ष कर रहे हैं। इनमें से सिर्फ 10 से 15% लोग ही इसका इलाज करा पाते हैं। हमारे देश में 40 फीसदी युवाओं के लिए, टीनएजर्स के लिए टेंशन (तनाव) और एंग्जायटी एक बड़ी समस्या बन चुकी है। आज हमें यह समझने की जरूरत है कि हम ही अपने सबसे सच्चे दोस्त हैं लेकिन हम अपने साथ कितना समय बिताते हैं, ज्यादातर लोगों के पास इसका उत्तर ना में होगा। हम भागते जा रहे हैं, रुकने का नाम ही नहीं ले रहे।

मानसिक सेहत को दुरुस्त रखने के लिए एक थेरेपी (चिकित्सा) है, यह है ठहरने की थेरेपी। जरा ठहरिए, जरा रुकिए और कुछ देर कुछ मत कीजिए। यह है कुछ ना करने की थेरेपी। इस इलाज में आपको कुछ नहीं करना और यह सबसे मुश्किल है। बड़ी मुश्किल है कुछ देर के लिए कुछ ना करना, कुछ ना कहना और कुछ ना सोचना। इसे आप एक चैलेंज की तरह लीजिए और वो चैलेंज है कुछ नहीं करने का चैलेंज, कुछ नहीं सोचने का चैलेंज। ना काम, ना बात, ना शोर, बस कुछ देर के लिए अपने साथ बैठिए बिल्कुल चुपचाप। यह सुनने में तो बड़ा आसान लगता है लेकिन यही सबसे मुश्किल है क्योंकि जब शरीर रुकता है तो मन भागने लगता है। लेकिन आज आप रुकिए क्योंकि रुकने का मतलब है खुद से मिलना। यह देखिए कि आपका मन कितनी देर तक ठहर सकता है।

अंत में बोझिल मन से लड़ने के लिए प्रेरित करने वाली कुछ पंक्तियाँ आपके साथ शेयर करता हूं।
हम सिर्फ घटाते हैं अपने शरीर का वजन,
जबकि सैकड़ों टन के बोझ से पिस रहा है हमारा मन।
फोन में सैकड़ों नंबर सजे पड़े हैं,
पर दर्द सुनने वाले कहीं दूर खड़े हैं।
सोशल मीडिया पर दोस्त हैं हजार,
फिर भी मन के भीतर है एक गहरी दरार।
सैकड़ों जख्मों से छिल चुका है मन,
अब कौन लगाए इन घावों पर मरहम।
थाम लीजिए अब अपने मन की डोर,
तभी तो आएगी जिंदगी में एक नई भोर।
शांति से साधिए अपने भीतर का मन, शांति से साधिए अपने भीतर का मन।

ध्यान दें: मानसिक परेशानी के समाधान के लिए भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने हेल्पलाइन नंबर्स – 14416 or 1-800-891-4416 भी जारी किये हैं जिन पर आप कॉल कर सकते हैं।

राजन कुमार तिवारी
मनोमय कोश प्रभारी, झारखण्ड राय विश्वविद्यालय, रांची