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झारखंड राय विश्वविद्यालय में प्राचीन लौह निर्माण भट्टी का उद्घाटन

झारखंड राय विश्वविद्यालय रांची के परिसर में बीते गुरुवार को प्राचीन लौह निर्माण भट्टी का उद्घाटन किया गया। जिसका उद्घाटन शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अतुल कोठारी, प्रो. (डॉ.) गौतम सूत्रधार, निदेशक, एनआईटी जमशेदपुर ने किया। झारखंड राय विश्वविद्यालय रांची में आयोजित चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व का समग्र विकास विषय पर विद्यार्थी प्रतिनिधि केंद्रित तीन दिवसीय कार्यशाला में शामिल होने रांची पहुंचे थे। झारखंड राय विश्वविद्यालय में धातु विज्ञान और धातु कर्म के क्षेत्र में भारतीय ज्ञान परंपरा की विशिष्ठ पहचान दर्शाती प्राचीन लौह निर्माण भट्टी (ब्लूमरी फर्नेस ) का निर्माण किया गया है। यह एक प्रकार की धातु कर्म भट्टी है जिसका उपयोग प्राचीन समय में लोहे के ऑक्साइडों को गलाने के लिए व्यापक रूप से किया जाता था। यह तकनीक भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ी है जिसकी सहायता से ढलुआ लोहा बनाया जाता था।इस अवसर पर डॉ. अतुल कोठारी ने भट्टी की निर्माण प्रक्रिया, इसके पारंपरिक और वैज्ञानिक पक्षों तथा भारतीय धातु-विज्ञान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को समझाया ।

एनआईटी जमशेदपुर के प्रो. (डॉ.) गौतम सूत्रधार, झारखंड राय विश्वविद्यालय की कुलाधिपति प्रो. (डॉ.) सविता सेंगर तथा कुलपति प्रो. (डॉ.) पीयूष रंजन भी इस महत्वपूर्ण क्षण में उपस्थित रहे। अतिथियों ने इसे अनुभव–आधारित शिक्षण का सशक्त उदाहरण बताते हुए कहा कि ऐसे प्रयास विद्यार्थियों में अनुसंधान, स्वदेशी तकनीकों की समझ और नवाचार के प्रति रुचि विकसित करते हैं। झारखंड राय विश्वविद्यालय रांची में चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व का समग्र विकास विषय पर तीन दिनों के कार्यशाला का आयोजन किया गया था।

जिसमें पंचकोश अवधारणा (अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय और आनंदमय कोश ) आधारित भारतीय ज्ञान परंपरा के माध्यम से विद्यार्थियों और शिक्षकों के समग्र व्यक्तित्व विकास को समझना और उसे जीवन में व्यावहारिक रूप से लागू करना था।

Workshop on Character building through Panchakosha theory (10)

चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व का समग्र विकास विषय पर तीन दिवसीय कार्यशाला संपन्न

झारखंड राय विश्वविद्यालय, रांची में 20 से 22 नवंबर 2025 तक चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व का समग्र विकास विषय पर विद्यार्थी प्रतिनिधि केंद्रित तीन दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा के माध्यम से विद्यार्थियों और शिक्षकों के समग्र व्यक्तित्व विकास को समझना और उसे जीवन में व्यावहारिक रूप से लागू करना था। इस दौरान पंचकोश अवधारणा (अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय और आनंदमय कोश ) पर आधारित शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक विकास विकास पर जोर रहा।

उद्घाटन सत्र :

उद्घाटन सत्र में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अतुल कोठारी, प्रो. (डॉ.) गौतम सूत्रधार, निदेशक, एनआईटी जमशेदपुर कुलाधिपति प्रो. (डॉ.) सविता सेंगर झारखंड राय विश्वविद्यालय, रांची और कुलपति प्रो. (डॉ.) पीयूष रंजन की गरिमामयी उपस्थिति रही। सत्र के मुख्य वक्ता डॉ. कोठारी ने कार्यक्रम की शुरुआत ॐ तथा “तमसो मा ज्योतिर्गमय” मंत्र के सामूहिक उच्चारण से करवाई और विद्यार्थियों से अनुभव साझा करने को कहा। उन्होंने बताया कि यदि किसी कक्षा की शुरुआत ॐ से हो, तो वातावरण शांत रहता है, मन स्थिर होता है और एकाग्रता स्वाभाविक रूप से बढ़ती है। उन्होंने विद्यार्थियों से यह भी पूछा कि कौन–कौन सुबह अपने इष्ट देवता का स्मरण करके आता है, और सुझाव दिया कि उसी समय ॐ का उच्चारण मानसिक संतुलन के लिए अत्यंत लाभकारी है।

चरित्र निर्माण पर बोलते हुए उन्होंने स्वामी विवेकानंद के विचार “Good habit is value” का उल्लेख किया और कहा कि बच्चे वही सीखते हैं जो वे बड़ों को करते हुए देखते हैं। एक चोर की कहानी के माध्यम से उन्होंने समझाया कि छोटी गलतियों पर समय रहते रोक लगाने से बड़े अपराध टल सकते हैं, इसलिए प्रारंभिक जीवन में सही दिशा देना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि घरेलू कार्य—जैसे झाड़ू–पोंछा या अपने कार्य स्वयं करना—व्यायाम का ही रूप हैं और आत्मनिर्भरता बढ़ाते हैं। जापान का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहाँ लोग अपना काम स्वयं करते हैं और यही आदतें राष्ट्रीय चरित्र का आधार बनती हैं।

पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता की जिम्मेदारी और प्राणायाम के महत्व को उन्होंने विशेष रूप से रेखांकित किया।

डॉ. कोठारी ने छात्र-प्रतिनिधियों से अपेक्षा की कि वे कार्यशाला से प्राप्त सीख को अपने साथियों तक पहुँचाएँ और भारतीय ज्ञान परंपरा के मूल्यों को व्यवहार में उतारने में अग्रणी भूमिका निभाएँ। सत्र के अंत में विश्वविद्यालय की अर्धवार्षिक पत्रिका ‘संवित्’ का लोकार्पण किया गया।

पत्रिका लोकार्पण के उपरांत विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति में लोह-निर्माण भट्टी का उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर डॉ. अतुल कोठारी ने भट्टी की निर्माण प्रक्रिया, इसके पारंपरिक और वैज्ञानिक पक्षों तथा भारतीय धातु-विज्ञान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को समझा। एनआईटी जमशेदपुर के प्रो. (डॉ.) गौतम सूत्रधार, झारखंड राय विश्वविद्यालय की कुलाधिपति प्रो. (डॉ.) सविता सेंगर तथा कुलपति प्रो. (डॉ.) पीयूष रंजन भी इस महत्वपूर्ण क्षण में उपस्थित रहे। अतिथियों ने इसे अनुभव–आधारित शिक्षण का सशक्त उदाहरण बताते हुए कहा कि ऐसे प्रयास विद्यार्थियों में अनुसंधान, स्वदेशी तकनीकों की समझ और नवाचार के प्रति रुचि विकसित करते हैं।

पंचकोश आधारित सत्र :

कार्यशाला के पहले दिन अन्नमय एवं प्राणमय कोश से जुड़े सत्र में भोजन और स्वास्थ्य के वैज्ञानिक संबंध, श्वास–प्रश्वास तथा ऊर्जा–संतुलन, और भावनात्मक स्थिरता जैसे विषयों पर चर्चा की गई। अन्नमय कोश सत्र में चर्चा के दौरान डॉ ० डी ० एन ० सिंह प्रांत प्रमुख विद्वत परिषद् , विद्या भारती झारखंड ने अन्न की महत्ता एवं जीवन में अन्न की उपयोगिता एवं महत्त्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा की अन्न केवल भोजन नहीं बल्कि शारीरिक एवं मानसिक विकास का भी प्रमुख कारक तत्व है। इसी सत्र के छात्र गतिविधि सत्र का संचालन प्रो ० रश्मि ने किया जिन्होंने कार्यशाला में उपस्तिथ विद्यार्थियों के साथ अन्न मय कोश से जुड़ी विभिन्न गतिविधियां करवायी। कार्यशाला का दूसरा सत्र प्राणमयकोश का रहा जिसमें प्रतिभागियों को प्राण , प्राणायाम और श्वास तंत्र के बारे में जानकारी प्रदान की गयी। विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए डॉ ० प्रशांत जयवर्धन ने प्राण एवं प्राणमय कोश के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी दी। उन्होंने पंच कोश में प्राणमय कोश के महत्त्व एवं अन्य कोश की साथ उसके संबंधों पर प्रकाश डाला। प्राणमय कोश विद्यार्थी गतिविधि सत्र का संचालन शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के प्रांत संयोजक महेंद्र कुमार सिंह ने किया। उन्होंने अपना अनुभव साझा करते हुए प्राणमय कोश विकास के लिए विद्यार्धियों से प्राणायाम, मुद्रा और बंध का अभ्यास करवाया।

कार्यशाला के दूसरे दिन मनोमय कोश एवं विज्ञानमय कोश पर आधारित विचार एवं गतिविधियाँ साझा की गयी। मनोमय कोश विकास पर डॉ ० ललिता राणा , प्राध्यापक आनंदा कॉलेज ( प्रांत संयोजक चरित्र निर्माण ) एवं प्रो ० राजन तिवारी ने विचार प्रस्तुत किया एवं मनोमय कोश से जुड़ी गतिविधियाँ आयोजित की।

विज्ञानमय कोश सत्र में कुलाधिपति प्रो. (डॉ.) सविता सेंगर और डॉ. के.पी. दत्ता ने संबोधित करते हुए बताया कि विज्ञानमय कोश बुद्धि, विवेक और निर्णय क्षमता का स्तर है। उन्होंने कहा कि जब व्यक्तित्व परिपक्व नहीं होता, तो निर्णय मूल्यों के बजाय स्वार्थ से प्रभावित होते हैं, जिससे समाज में विश्वास की कमी पैदा होती है। विज्ञानमय कोश का विकास व्यक्ति में तटस्थता, पारदर्शिता और स्पष्ट निर्णय क्षमता को मजबूत करता है।

कुलाधिपति महोदया का विचार–प्रवर्तक व्याख्यान :

कुलाधिपति महोदया ने कहा कि पंचकोश केवल शरीर की परतों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्तित्व के सूक्ष्म आयामों को समझने का माध्यम है। उन्होंने समझाया कि विज्ञानमय कोश वह स्तर है जहाँ बुद्धि, विवेक और निर्णय क्षमता विकसित होती है। अनेक बार लोग बिना परिणामों पर विचार किए आदत या भावनाओं के प्रभाव में निर्णय ले लेते हैं।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि व्यवहारिक जीवन में लोग डॉक्टरों और वकीलों पर इसलिए भरोसा नहीं कर पाते क्योंकि कभी–कभी डॉक्टर दवा कंपनियों के दबाव में दवाइयाँ लिख देते हैं और वकील आर्थिक लाभ के लिए सच को मोड़ देते हैं। यह समस्या पेशों की नहीं, बल्कि व्यक्तित्व–विकास की कमी का परिणाम है। उन्होंने कहा कि विश्वास वहीं बनता है जहाँ पारदर्शिता और ईमानदारी हो। विज्ञानमय कोश का विकास व्यक्ति को न अंध–विश्वास में जीने देता है और न संदेह में; बल्कि तथ्य, विवेक और तटस्थ दृष्टि से निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करता है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि गलतियाँ होना समस्या नहीं, लेकिन वही गलती दोबारा न दोहराना ही वास्तविक सीख है। जीवन में अपना मार्ग स्वयं चुनना चाहिए और दूसरों से तुलना के बजाय आत्म–विकास पर ध्यान देना चाहिए।

दूसरे दिन का अंतिम सत्र आनंद मय कोश का रहा जिसमें जीवन में आनंद एवं पंच कोश में आनंद विषय पर डॉ ० अमरकांत झा , क्षेत्रीय संयोजक चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व का समग्र विकास शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास एवं प्रो ० ओम प्रकाश सत्यम ने व्याख्यान एवं गतिविधि आयोजित किया।

इसमें बताया गया कि आनंद बाहरी परिस्थितियों पर नहीं, बल्कि आंतरिक स्थिरता और मूल्य–आधारित जीवन पर निर्भर करता है। समूह चर्चा और अनुभव–विनिमय के आधार पर आगे की कार्ययोजना तैयार की गई, जिसमें प्रतिभागियों ने अपने-अपने संस्थानों में चरित्र–निर्माण और भारतीय ज्ञान परंपरा आधारित गतिविधियों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

कार्यशाला का तीसरा एवं समापन दिवस का पहला सत्र गट सह चर्चा एवं आगामी कार्य योजना आधारित रखा गया था जिसमें सभी पांच कोश के विद्यार्थी एवं कोश प्रभारियों ने अपने अपने विचार कथन रखे। इस दौरान कोश विकास से जुड़ी आगामी कार्य योजना भी प्रस्तुत की गयी। कार्यशाला का समापन सत्र अनुभव कथन एवं समहू चर्चा पर केंद्रित रखा गया था। समापन सत्र को डॉ. विजय सिंह, डीन ( योजना एवं विकास ) सह क्षेत्र संयोजक शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास , डॉ. अमृता मजूमदार, कुल सचिव झारखंड राय विश्वविद्यालय , डॉ ० हरमीत कौर डीन ( मैनेजमेंट ) डॉ. सुमित पांडेय , डीन अकादमिक नेतृत्व ने सम्बोधित किया। इस दौरान तीन दिनों तक पंचकोश चर्चा एवं गतिविधियों में प्रतिभागियों की सक्रिय सहभागिता की सबने सराहना की। इस दौरान सभी ने कहा की तीन दिनों तक चले इस संवाद और प्रशिक्षण ने न केवल ज्ञान का विस्तार किया, बल्कि जीवन–दृष्टि को भी नई दिशा प्रदान की। कार्यशाला ने यह संदेश स्थापित किया कि शिक्षा का लक्ष्य केवल पेशेवर उत्कृष्टता नहीं, बल्कि संवेदनशील, सजग और मूल्यनिष्ठ समाज का निर्माण है।

तीन दिनों तक आयोजित कार्यशाला का सफल संचालन प्रो ० अनुराधा शर्मा , प्रो ० रागिनी कुमारी , डॉ ० कुमार अमरेंद्र ( कौटिल्य ज्ञान केंद्र ) एवं प्रो ० विक्रांत रवि ने किया।

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पंचकोश के अनुरूप एनईपी का लक्ष्य विद्यार्थियों का चतुर्दिक विकास करना है: डॉo सलूजा

झारखंड राय विश्वविद्यालय रांची में पिछले दो दिनों से चल रहे राष्ट्रीय कार्यशाला ” चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व का सम्पूर्ण विकास ” का सोमवार को समापन हो गया। तीन दिनों के दौरान कुल बारह सत्र आयोजित हुए। पूर्व के दो दिन में पंचकोश के पांच कोशों अन्नमय कोश, प्राणमय कोश, मनोमय कोश, विज्ञानमय कोश और आनंदमय कोश पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गयी। अभ्यास सत्र आयोजित हुए जिसमें समूह चर्चा, विचार और कार्य के तरीकों पर प्रतिभागियों ने रोड मैप तैयार किया। पर्यावरण एवं स्वक्षता को लेकर विशेष संभाषण हुआ। तीसरे और कार्यशाला के अंतिम दिन नौवें सत्र का विषय “पढ़ाने की कला ” पर डॉ ० चाँद किरण सलूजा (अकादमिक निदेशक संस्कृत संवर्धन प्रतिष्ठानम नयी दिल्ली ) ने विस्तार पूर्वक अपनी बातें रखी। डॉ ० सलूजा ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति में निर्दिष्ट बातों की चर्चा करते हुए कहा की इस निति का उद्देश्य शिक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार करना है जिसमें उच्च शिक्षा में सुधार सुधार भी शामिल है। उन्होंने बताया की ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था की आवश्यकताओं की पूर्ति करने , शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने, नवाचार और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिये नई शिक्षा नीति की आवश्यकता थी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में शिक्षा की पहुँच, समता, गुणवत्ता, वहनीयता और उत्तरदायित्व जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया गया है।

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मूल विषय पढ़ाने की कला की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा की पढ़ाने की कला के साथ पढने की कला भी आवश्यक है। विद्यार्थी के साथ शिक्षक को भी यह ज्ञान होना आवश्यक है। उन्होंने कहा की कुशल शिक्षक को विद्यार्थी के मनोमय एवं आनंदमय का भी ध्यान रखना चाहिए। व्यक्तित्व निर्माण की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा की शिक्षक संवाद, संचार, बौद्धिक संवाद एवं करुणा भाव के साथ कार्य करते हुए इसमें भी योगदान कर सकता है।

कार्यशाला में उपस्थित विभिन्न कॉलेजों एवं विश्वविद्यालयों से आए प्रतिभागी शिक्षकों के साथ समूह चर्चा के दौरान कुलाधिपति प्रो० सविता सेंगर ने पंच कोश अवधारणा एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति से जुड़े प्रश्नों पर राय देते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति का प्रमुख लक्ष्य चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व का संपूर्ण विकास है।

National Workshop on character building JRU

राष्ट्रीय कार्यशाला के समापन अवसर पर न्यास के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष सुरेश गुप्ता जी का संबोधन हुआ। इस अवसर पर न्यास के राष्ट्रीय सह संयोजक डॉ० राजेश्वर परासर भी उपस्थित थे। झारखंड राय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो० (डॉ०) पीयूष रंजन ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा की तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला को सफल बनाने में न्यास के राष्ट्रीय सचिव डॉ ० अतुल भाई कोठारी की मुख्य भूमिका रही उनके मार्गदर्शन में ही इसकी रूप रेखा तय की गयी। मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित कुलाधिपति डॉ ० अजय कुमार तिवारी , डॉ ० मनोहर भंडारी, डॉ० चाँद किरण सलूजा एवं डॉ० राजीश्वर पराशर ने पंच कोश और चरित्र निर्माण पर विस्तारपूर्वक अपनी बातें रखी जो प्रतिभागियों के लिए संग्रहनीय है। उन्होंने राष्ट्रीय कार्यशाला में अन्य प्रदेशों से पहुंचे प्रतिभागियों एवं राज्य के अन्य जिलों से आये प्रतिभागी शिक्षकों का भी धन्यवाद किया।

Character building and overall personality development (1)

झारखंड राय विश्वविद्यालय में चरित्र निर्माण पर तीन दिवसीय कार्यशाला प्रारंभ

झारखंड राय विश्वविद्यालय रांची में शनिवार से तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला ” चरित्र निर्माण एवं चरित्र का सम्पूर्ण विकास ” प्रारंभ हुआ। कार्यशाला का विधिवत उद्घाटन दीप प्रज्जवलित कर गणेश वंदना के साथ किया गया। दीप प्रज्जवलन शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव डॉ ० अतुल भाई कोठारी, झारखंड राय विश्वविद्यालय की कुलाधिपति प्रो ० ( डॉ ०) सविता सेंगर, स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय, सागर के कुलाधिपति डॉ० अजय कुमार तिवारी, प्रो ० (डॉ ०) पीयूष रंजन कुलपति झारखंड राय विश्वविद्यालय, डॉ० मनोहर भंडारी, प्रो ० (डॉ ०) विजय कुमार सिंह डीन सरला बिरला विश्वविद्यालय, अमर कांत झा क्षेत्रीय संयोजक न्यास ने सामूहिक रूप से किया।

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कार्उयशाला के उद्घाटन सत्र का स्वागत भाषण करते कुलाधिपति प्रो ० (डॉ ०) सविता सेंगर ने कहा की चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व का सम्पूर्ण विकास विषय पर आयोजित यह कार्यशाला भारतीय ज्ञान परंपरा एवं भारतीय दृष्टिकोण को समझने का प्रयास है। विश्वविद्यालय ने अप्रैल महीने में परिसर में कौटिल्य ज्ञान केंद्र भी स्थापित किया है। यह केंद्र भारतीय ज्ञान परंपरा और भारतीय दृष्टिकोण को व्यक्त करने का केंद्र है। कार्यशाला के आयोजन के उद्देश्यों की चर्चा करते हुए कुलाधिपति ने कहा की व्यक्तित्व का अर्थ बहरी सुंदरता नहीं है जब हम भारतीय ज्ञान परंपरा और पंच कोश की बात करते हैं तो भारतीय दृष्टिकोण को उसमें शामिल करना होगा। न्यास के इस विषय पर बनाये गए पाठ्यक्रम को भी विश्वविद्यालय ने अपनाया है। चरित्र निर्माण एवं चरित्र का सम्पूर्ण विकास पाठ्यक्रम प्रारंभ करने का उद्देश्य है विद्यार्थियों में समाज एवं राष्ट्र के प्रति सकारात्मक सोच का भाव पैदा करना । यह भाव विद्यार्थियों के व्यक्तित्व में नजर आना चाहिए की वह समाज, राष्ट्र, स्वयं के लिए कितना सोचते है। कुलाधिपति प्रो ० सेंगर ने कहा कार्यशाला में अगले दो दिनों तक इसी विषय पर चर्चा होगी।

Character building and overall personality development (9)

कार्यशाला के मुख्य वक्ता शिक्षाविद एवं न्यास के राष्ट्रीय सचिव डॉ० अतुल भाई कोठारी ने अपना संबोधन पंचकोश की अवधारणा के साथ प्रारम्भ किया। उन्होंने विस्तार पूर्वक अन्नमय कोश, प्राणमय कोश, मनोमया कोश, विज्ञानमय कोश एवं आनंदमय कोश की चर्चा की।

उन्होंने कहा की पंचकोश, भारतीय दर्शन में मानव शरीर की पांच परतों या आवरणों को दर्शाता है,ये कोश शारीरिक, मानसिक, और आध्यात्मिक स्तरों पर मानव अस्तित्व को समझने में मदद करते हैं। पंचकोशों के अंदर ही हमारी तीनों प्रकार की चेतना यानि चेतन, अवचेतन और अचेतन विचरण करती है। ये पांच कोश एक-दूसरे से बहुत ही गहरे रूप में जुड़ी हुई हैं और अध्यात्म में जब लोग जैसे-जैसे गहराई में उतरते हैं, वह एक-एक करके सभी कोशों के प्रति जागरूक होते जाते हैं।पंचकोशों की अवधारणा मानव अस्तित्व को समझने और आत्म-साक्षात्कार की ओर बढ़ने के लिए एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक है। डॉ० कोठारी ने अपने संबोधन के दौरान मंत्र , योग विद्या एवं आचरण और व्यवहार पर भी विस्तार पूर्वक बातें रखी।

कार्यशाला का दूसरा एवं तीसरा सत्र अन्नमय कोश एवं प्राणमय कोश विषय पर केन्द्रित था जिसके मुख्य वक्ता डॉ० मनोहर भंडारी थे। डॉ० भंडारी चिकित्सक के साथ हिंदी भाषा उत्थान के लिए भी कई महत्वपूर्ण कार्य किये हैं। उन्होंने अन्नमय कोश एवं प्राणमय कोश पर विस्तार से अपनी बातें रखते हुए बताया की शरीर, भोजन (अन्न) से पोषित होता है। यह कोश मानव शरीर का भौतिक रूप है जो भोजन से पोषित होता है और अन्य कोशों के साथ मिलकर मानव अस्तित्व का निर्माण करता है। चिकित्सा पद्धतियों की पहुच स्थूल शरीर तक है जबकी कितने ही रोग ऐसे हैं जो अन्नमय कोश की विकृति के कारण उत्पन्न होते हैं और जिसे चिकित्सक ठीक करने मे प्रायः असमर्थ हो जाते हैं प्राणमय कोश की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा की प्राणमय कोश, शरीर का दूसरा आवरण या परत है, जो ऊर्जा से संबंधित है। इसे जीवन शक्ति से बना हुआ माना जाता है, और यह भौतिक शरीर में मौजूद होता है, जो पूरे जीव में व्याप्त है।

उन्होंने अपने लम्बे चिकित्सीय अनुभव के साथ पंच कोश को जोड़ते हुए विस्तार पूर्वक कई बातें बताई। कार्यशाला के प्रथम दिन के चौथे सत्र को स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय , सागर के कुलाधिपति डॉ० अजय कुमार तिवारी ने संबोधित किया। उन्होंने मनो मया कोश पर अपनी बातें रखी इस दौरान उन्होंने मनो मया कोश में मन की अवधारणा पर भारतीय दर्शन और चिंतकों के विचारों से अवगत कराने का कार्य किया।

Facilitated ceremony for 12th students

झारखंड राय विश्वविद्यालय रांची में सम्मान समारोह का आयोजन

झारखंड राय विश्वविद्यालय, रांची में गुरुवार को 12 वीं में बेहतर प्रदर्शन करने वाले छात्र छात्राओं को सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह में संत जॉन इंटर कॉलेज के 94 विद्यार्थियों को मेडल एवं प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। समारोह का विधिवत उद्घाटन दीप प्रज्वलित कर किया गया।

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कार्यक्रम का स्वागत भाषण करते हुए झारखंड राय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो० (डॉ०) पीयूष रंजन ने 12 वीं की परीक्षा में बेहतर अंक लाने वाले विद्यार्थियों के उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए कहा की प्रतिभा सम्मान का यह कार्यक्रम आपके मेहनत , लगन और परिश्रम का परिणाम है। अपने 12 वीं की परीक्षा में जो अंक प्राप्त किया है वह सिर्फ एक आस्पेक्ट है। तीन घंटे की परीक्षा में आपके ज्ञान और कौशल का मूल्यांकन संभव नहीं है। मार्क्स के साथ जीवन में और भी बहुत सारी आवश्यक चीजें शामिल है। झारखंड राय विश्वविद्यालय में हम गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ साथ व्यक्तित्व के सम्पूर्ण विकास पर जोर देते हैं। चरित्र निर्माण एवं देश के जिम्मेदार नागरिक बनाने पर हमारा जोर रहता है।

कुलपति प्रो ० पीयूष रंजन ने विद्यार्थियों से कहा की अब तक अपने जीवन में जो भी सफलता प्राप्त की है वह सामूहिक प्रयास का नतीजा है इस सफलता में आपके माता -पिता एवं शिक्षकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है जो हमेशा आपके पीछे खड़े रहते हैं आपको सही मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। 12 वीं की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद अब आप सब की विद्यालय शिक्षा का अंत हो रहा है और अब आपको नयी यात्रा के लिए खुद को तैयार करना है। आप उच्च शिक्षा के लिए किसी भी संकाय का चुनाव करें हरेक विषय में अवसर है। किस विषय का चुनाव करना है यह आपकी रुचि पर निर्भर करता है।उन्होंने कहा की मैं विद्यार्थियों से हमेशा कहता हूँ की ऑलवेज ड्रीम बिग लेकिन सपना नींद में नहीं बल्कि सपना ऐसा हो जो हमें सोने न दे। आने वाले समय में आप जो भी करना चाहते हैं उसके लिए लगन , मेहनत और दृढ़ इक्षा तो जरुरी है ही लेकिन जरुरी या भी है की अच्छा इंसान बने।

झारखंड राय विश्वविद्यालय की डीन (कॉमर्स एवं मैनेजमेंट संकाय ) प्रो ० (डॉ०) हरमीत कौर ने अपने सम्बोधन के दौरान कहा की 12 वीं के बाद विद्यार्थियों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह होता है की इसके बाद अब क्या करें ? उन्होंने वाणिज्य विषय में कैरियर बनाने की इक्षा रखने वाले छात्र छात्राओं को इसके बारे में विस्तार पूर्वक बतलाया। उन्होंने कहा की आज के दौर में कॉमर्स का मतलब केवल अकॉउंटेन्सी की पढ़ाई नहीं रह गयी है। आज इसका दायरा बहुत बढ़ चूका है। उन्होंने विद्यार्थियों को ट्रेडीसनल कॉमर्स की जगह मॉडर्न सिलेबस के साथ बीकॉम की पढ़ाई करने की सलाह दी।

झारखंड राय विश्वविद्यालय के डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर प्रो० सब्यसाची चक्रवर्ती ने समारोह में उपस्तिथ विद्यार्थियों के साथ अनुभव साझा करते हुए कहा की झारखंड में अब उच्च शिक्षा की पढाई का दायरा बढ़ा है। विद्यार्थियों को पहले कई चुनिंदा कोर्स की पढाई करने के लिए रांची से बाहर जाना पड़ता था लेकिन पिछले कुछ वर्षों में बदलाव दिख रहा है। प्रो ० चक्रवर्ती ने उन्हें माईनिंग इंजीनियरिंग, होटल मैनेजमेंट और फार्मसी जैसे कोर्स के भविष्य के अवसरों से अवगत करते हुए कहा की आने वाले समय में इनमें जॉब के अवसर पैदा होंगे।

कार्यक्रम में उपस्थित संत जॉन इंटर कॉलेज के शिक्षक मो ० तहसीन आलम ने इस प्रकार के आयोजन पर विश्वविद्यालय का धन्यवाद जताते हुए कहा की सम्मान समारोह विद्यार्थियों में उत्साह और प्रेरणा जगाने का कार्य करता है। इस प्रकार के आयोजन के जरिये बच्चों के अंदर कुछ बेहतर करने की भावना जन्म लेती है। कार्यक्रम में झारखंड राय विश्वविद्यालय के डीन प्रो ० डॉ ० सुमित कुमार पांडेय भी उपस्थित थे।

ADIEU 2025 (1)

झारखंड राय विश्वविद्यालय में फेयरवेल पार्टी एडीआईइयू 2025 आयोजित

झारखंड राय विश्वविद्यालय रांची में शुक्रवार शाम फेयरवेल पार्टी एडीआईइयू 2025 का आयोजन किया गया। पास आउट विद्यार्थियों के लिए आयोजित इस रंगारंग शाम का आयोजन कल्चरल क्लब ने किया । फेयरवेल पार्टी का उद्घाटन पारंपरिक तरीके से दीप प्रज्वलित कर किया गया जिसमें झारखंड राय विश्वविद्यालय की चांसलर प्रो० (डॉ० ) सविता सेंगर, कुलसचिव प्रो० (डॉ०) पीयूष रंजन, डीन मैनेजमेंट डॉ० हरमीत कौर, डीन एक्सटर्नल रिलेशन प्रो० डॉ० अशफाक आलम , डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो० सब्यसाची चक्रवर्ती, डीन एकेडेमिक्स प्रो० (डॉ०) सुमित पांडे उपस्थित रहे। कार्यक्रम की रंगारंग शुरुआत मंत्रोच्चार के बीच वेलकम डांस के साथ किया गया।

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फेयरवेल एडीआईइयू 2025 के दौरान मिमे एक्ट, कविता पाठ , वाद्ययंत्र के जरिये कॉलेज लाइफ को दर्शाने के अलावा झारखण्ड के पारंपरिक सांस्कृतिक नृत्य का भी प्रदर्शन छात्र छात्राओं के द्वारा किया गया। विद्यार्थियों के समूह प्रदर्शन कॉमेडी एक्ट के बाद कार्यक्रम की दूसरी सबसे मुख्य प्रस्तुति हुई जिसे डांस झारखण्ड ग्रुप के कलाकारों के द्वारा प्रदर्शित किया गया। मौके पर उपस्थित डांस झारखण्ड के सीईओ राम सिंह ने भी अपना स्पेशल परफॉर्मेंस दिया। विदाई समारोह को यादगार बनाने में जूनियर्स ने कोई कसर बाकी नहीं रखी। देर शाम तक चले इस आयोजन में छात्र छात्राओं ने कई यादगार परफॉर्मेंस दिए।

फेयरवेल के दौरान पास आउट होने वाले विभिन्न विभागों के चुनिंदा विद्यार्थियों को पुरस्कृत भी किया गया जिन्होंने पढाई के दौरान अलग अलग गतिविधियों में अपना उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। इन विद्यार्थियों को कुलाधिपति प्रो० सविता सेंगर एवं कुलपति प्रो ० पीयूष रंजन ने मंच पर बुलाकर सम्मानित किया।
पुरस्कृत होने वाले विद्यार्थियों में बीपीटी की मुस्कान सेठी, डी फार्म के आर्यन कुमार, बी फार्म से हर्षित चंद्रा, बीसीए के संतोषी ओरांव , एमसीए के सरफराज अंसारी , बिटेक सीएससी ज्ञान कुमार लाल , डिप्लोमा माइनिंग नव राज सिंह , बीटेक माइनिंग के अविनाश कुमार, एलएलबी की प्रगति कुमारी, बीएससी एग्रीकल्चर के उत्सव कुमार, एमएससी एग्रीकल्चर की शालू कुमारी एम बी ए और बी बी ए के जुली टोप्पो और सानिया परवीन शामिल रहे। कार्यक्रम के दौरान पुस्तकालय का सबसे बढ़िया उपयोग करने के लिए दिया जाने वाला रंगनाथन अवार्ड बीटेक सीएसइ की छात्रा जीनत परवीन को दिया गया।

फेयरवेल पार्टी की देर शाम कार्यक्रम की सबसे अहम प्रस्तुति डीजे नितेश की रही जिन्होंने अपनी धुनों पर सभी स्टूडेंट्स को थिरकने को मजबूर कर दिया। हिंदी, भोजपुरी और रीमिक्स की बैक टू बैक धुन पर देर शाम तक कैंपस में स्टूडेंट्स ने मस्ती की।

Alumni Meet 25 (8)

झारखंड राय विश्वविद्यालय में एलुमनी मीट रेट्रोविले का आयोजन

झारखंड राय विश्वविद्यालय में शुक्रवार को एलुमनी मीट रेट्रोविले 2025 का आयोजन किया गया कार्यक्रम का शुभारंभ कार्यक्रम का आरंभ वैदिक मंत्रोचार के बीच गणेश वंदना के साथ किया गया । पूर्ववर्ती विद्यार्थियों के स्वागत के लिए कार्यक्रम स्थल को रंगोली से सजाया गया था । एलुमनी मीट में देश के कई शहरों में कार्यरत पूर्ववर्ती छात्र एवं छात्राएं शामिल हुई ।

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पूर्ववर्ती छात्रों को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय की चांसलर प्रो० (डॉ०) सविता सेंगर ने कहा कि “विश्वविद्यालय आपसे है पूर्ववर्ती छात्रों, वर्तमान और भविष्य में यहाँ

पढाई करने वाले विद्यार्थियों के द्वारा जब तक विश्वविद्यालय के कार्यों से अवगत करने का कार्य नहीं किया जायेगा तब तक सारे प्रयास निरर्थक हैं।

कुलाधिपति ने कहा की हमारी पहचान यह है की हम विद्यार्थियों को समुदाय निर्माण ,समाज निर्माण, राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए कितना तैयार करते हैं। सामाजिक परिवर्तन एवं राष्ट्र निर्माण में आपका योगदान और प्रयास विश्वविद्यालय का मापदंड है । पढ़ाई पूरी करने के बाद कितनों को जॉब्स मिली , कितनों ने उच्च शिक्षा प्राप्त किया यह केवल एक आंकड़ा भर है लेकिन इसके बाद अपने राष्ट्र निर्माण में कितना योगदान किया। हमारी बातों में कितना गर्व का अनुभव किया इसलिए आवश्यक है विश्ववविद्यालय से निकलने के बाद भी आप कैसे हमारे साथ जुड़े रहें। प्रो० सेंगर ने कहा की सबकुछ बदल जायेगा लेकिन आपकी बायो डेटा में लिखा विश्वविद्यालय का नाम नहीं बदल सकता है । उन्होंने कहा की दुनिया के प्रसिद्द विश्वविद्यालयों की प्रसिद्धि के पीछे एलुमनी का सबसे बड़ा योगदान है भारत में भी यह चर्चा जोर पकड़ चुकी है की कैसे पूर्ववर्ती विद्यार्थियों को संस्थान के साथ जोड़ा जाय और उनका अधिक से अधिक उपयोग संस्थान को आगे बढ़ाने में लिया जाय।

पूर्ववर्ती विद्यार्थियों के बीच विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा की विश्वविद्यालय का इनोवेशन इनोवेशन कौंसिल को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय पिछले चार वर्षों से स्टार रैंकिंग प्रदान कर रहा है। झारखंड राय विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति में जितने भी मापदंडों में से अधिकांश पर पहले दिन से कार्य प्रारंभ किया है। ऐकडेमिक बैंक ऑफ़ क्रेडिट के जरिये विश्वविद्यालय से जुड़े अब तक के सभी विद्यार्थियों का सर्टिफिकेट डिग्री डीजी लॉकर में है।
राष्ट्रीय शिक्षा निति के निर्देशों के अनुरूप शिक्षा में लचीलापन लाने के लिए स्वयं एवं मूक्स को भी हाइब्रिड मोड में प्रारंभ किया है।
कुलाधिपति प्रो ० सेंगर ने कहा की आपने किस संस्थान से पढ़ाई की है यह जीवन में बहुत मायने रखता है। अपने शैक्षणिक संस्थान का नाम गर्व से लिया करें।”

विश्वविद्यालय के स्थायी परिसर में पहली बार आयोजित पूर्ववर्ती छात्र सम्मेलन में स्वागत भाषण देते हुए झारखंड राय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो० (डॉ०) पीयूष रंजन ने कहा की “यह एक ऐसा अवसर है जब छात्र अपने अल्मा मेटर में एकत्र होते हैं, पुरानी यादों को ताज़ा करते हैं और नई उम्मीदों के साथ नए संवादों की प्रतीक्षा करते हैं। एलुमिनी मीट आप सभी के लिए अपने साथियों और शिक्षकों से मिलने और संपर्क को फिर से जीवंत करने का एक आदर्श मंच है। हमें आप पर गर्व है। देश के जिन संस्थानों में आप कार्यरत है वहां आप विश्वविद्यालय के एम्बेसडर के रूप में भी कार्य कर रहे हैं।”

कार्यक्रम में पहुंचे पूर्व छात्र व छात्राओं ने भी इस दौरान विश्वविद्यालय से अपने जुड़ाव को लेकर कई बातें साझा की और नए सुझाव भी दिए। इस दौरान पूर्ववर्ती छात्रों के कहा कि वह आज जो भी है, उसमें संस्थान की महत्वपूर्ण भूमिका है ,आज वह यहां आकर स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं वह इसके लिए विश्वविद्यालय के आभारी हैं। इस मौके पर बड़ी संख्या में विश्वविद्यालय के शिक्षक भी उपस्तिथ थे जिन्होंने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए पुराने दिनों की याद ताजा किया

झारखंड राय विश्वविद्यालय में भारतीय ज्ञान परंपरा पर शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला का होगा आयोजन

झारखंड राय विश्वविद्यालय रांची में शनिवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के आई के एस डिविजन के निर्देशानुसार भारतीय ज्ञान परंपरा पर एक दिवसीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन सिद्धांत फाउंडेशन के द्वारा किया जा रहा है। भारतीय ज्ञान परंपरा विषय पर शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित करने के लिए देश के 13 विश्वविद्यालयों का चयन किया गया है जिनमें झारखंड राय विश्वविद्यालय भी शामिल है। झारखंड राय विश्वविद्यालय के दो शिक्षक मास्टर ट्रेनर के रूप में चयनित हैं।

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शिक्षकों को प्राचीन भारतीय ज्ञान प्रणाली और शिक्षा पद्धतियों के बारे में जानकारी प्रदान करेगी। कार्यशाला का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप भारतीय ज्ञान परंपरा को शामिल करने के उद्देश्यों को पूरा करना है। कार्यशाला शिक्षकों को भारतीय ज्ञान परंपरा के बारे में ज्ञान प्रदान करने और उन्हें अपनी शिक्षण पद्धतियों में शामिल करने में मददगार साबित होगी।

UG – PG के स्टूडेंट्स के लिए IKS अनिवार्य, अर्जित करने होंगे 5% क्रेडिट

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत छात्रों के लिए नए सत्र से एक महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) ने सभी विश्वविद्यालयों को पत्र लिखकर निर्देश जारी किया है कि यूजी-पीजी पाठ्यक्रमों में भारतीय ज्ञान प्रणाली को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। अब छात्रों को अपनी डिग्री के लिए आवश्यक कुल क्रेडिट में से कम से कम 5 प्रतिशत क्रेडिट भारतीय ज्ञान प्रणाली से अर्जित करने होंगे।

पत्र में लिखा है कि कुल क्रेडिट में से 50 फीसदी प्रमुख विषयों (मेजर डिसिप्लिन) से होने जरूरी होंगे। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत उच्च शिक्षा पाठ्यक्रम में IKS के समावेशन हेतू यह दिशा-निर्देश है। इसके तहत स्नातक और स्नातकोत्तर पाठयक्रमों के छात्रों को भारतीय ज्ञान प्रणाली की पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। यूजी और पीजी पाठ्यक्रमों के छात्रों को कुल क्रेडिट में से पांच फीसदी क्रेडिट भारतीय ज्ञान प्रणाली की पढ़ाई के बाद अर्जित करने होंगे।

यूजीसी उच्च शिक्षण संस्थानों के प्रोफेसर को भी भारतीय ज्ञान प्रणाली के तहत प्रशिक्षण दे रहा है। इसका मकसद यूजी और पीजी पाठ्यक्रमों में पढ़ाई से पहले शिक्षकों को भी तैयार करना है।

यूजीसी का यह कदम भारतीय शिक्षा प्रणाली को अधिक समावेशी और समृद्ध बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। इस पहल से न केवल छात्रों को अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर मिलेगा, बल्कि भारत की पारंपरिक शिक्षा प्रणाली को वैश्विक स्तर पर पहचान भी मिलेगी। विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया गया है कि वे जल्द से जल्द अपने पाठ्यक्रमों में भारतीय ज्ञान प्रणाली से संबंधित विषयों को लागू करें, ताकि छात्र इसका लाभ उठा सकें।

भारतीय ज्ञान प्रणाली के अंतर्गत वेद, उपनिषद, आयुर्वेद, योग, ज्योतिष, वास्तु शास्त्र, भारतीय गणित, तर्कशास्त्र, साहित्य, कला, दर्शन और प्राचीन विज्ञान की विभिन्न धाराओं को पढ़ाया जाएगा। छात्रों को इन विषयों से जुड़े पाठ्यक्रमों का अध्ययन करना होगा और 5% क्रेडिट प्राप्त करने होंगे।

यूजीसी ने यह भी सुनिश्चित किया है कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के शिक्षक भारतीय ज्ञान प्रणाली को प्रभावी ढंग से पढ़ा सकें। इसके लिए उन्हें विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे अपने विषयों में भारतीय ज्ञान प्रणाली को जोड़कर छात्रों को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान कर सकें।

यूजीसी का यह कदम भारतीय शिक्षा प्रणाली को अधिक समावेशी और समृद्ध बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। इस पहल से न केवल छात्रों को अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर मिलेगा, बल्कि भारत की पारंपरिक शिक्षा प्रणाली को वैश्विक स्तर पर पहचान भी मिलेगी।

झारखंड राय विश्वविद्यालय का पांचवा दीक्षांत, 393 को मिली डिग्री, 10 को गोल्ड मेडल एवं 1 को चांसलर मेडल प्रदान किया गया

भारत को 2047 तक कई क्षेत्रों में आत्त्मनिर्भर बनांना है हमें युवाओं से उम्मीद है की भारत को विकसित कर गौरवान्वित करेंगे। आज भारत राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मना रहा है। यह हमलोगों के लिए ख़ुशी की बात है की आज ही के दिन झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी अपना पांचवा दीक्षांत समारोह मना रहा है। आज का दिन डिग्री लेने वाले सभी छात्र छात्राओं को ह्रदय से बधाई देता हूँ और उन्हें विकसित भारत के लिए आधार मानते हुए कड़ी मेहनत करने का आह्वाहन करता हूँ। उक्त बातें शुक्रवार को महामहिम राज्यपाल श्री संतोष गंगवार ने झारखण्ड राय विश्वविद्यालय के पांचवे दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कही।

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राज्यपाल ने छात्रों से कहा की जीवन में मार्ग ढूँढना है मंजिल तलाशनी है उपाधि केवल पुरस्कार नहीं बल्कि नयी शुरुवात है आपको समाज राज्य एवं, राष्ट्र को बहुत कुछ देना है और इसके लिए आपको कड़ी मेहनत करनी होगी।

विकसित भारत में झारखंड राय यूनिवर्सिटी सक्रिय भूमिका निभा रहा है, यहाँ अध्ययनरत छात्र छात्राओं को केवल शिक्षा ही नहीं बल्कि नवाचार, संस्कार शोध एवं तकनीक प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर भारत के लिए तैयार किया जा रहा है।

विशिष्ट अतिथि पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री अर्जुन मुंडा ने कहा समारोह के संबोधन के दौरान कहा कि दीक्षांत विद्यार्थियों को उत्साह एवं ऊर्जा प्रदान करता है पिछले दो दीक्षांत समारोह समारोह से मैं यहाँ आ रहा हूँ, यहाँ आकार अच्छा लगता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लायी गयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का व्यापक एवं सकारात्मक असर आने वाले दिनों में दिखेगा। भविष्य का भारत इस शिक्षा नीति के तहत उभरकर सामने आएगा। मुझे ख़ुशी है आप जैसे विद्यार्थियों के बल पर भारत आगे बढ़ रहा है । झारखंड की धरती पर झारखंड राय विश्वविद्यालय ने जो शैक्षणिक बीजारोपण किया है वह अब फल देने लगा है। आने वाले दिनों में झारखंड ऐसे विश्वविद्यालय के नाम से ही जाना पहचाना जायेगा।

स्वागत भाषण करते हुए झारखंड राय विश्वविद्यालय की चांसलर डॉ० हरबीन अरोड़ा राय ने कहा की नारी शक्ति से हर कोई जुड़ा हुआ है। हर इंसान की मातृत्व शक्ति नारी शक्ति है। उन्होंने शक्ति के 5 श्रोत पर चर्चा करते हुए कहा की पहली शक्ति श्रुति या ऋचा है जिसे हम ज्ञान कहते हैं। विश्वविद्यालय ज्ञान का केंद्र हैं। दूसरी शक्ति श्री की शक्ति है अर्थात भगवान की शक्ति। श्री की शक्ति शुभ की शक्ति है। यह भी नारी शक्ति है। जैसे श्रुति की शक्ति को अर्जित कर हमें उतरना पड़ता है उसी तरह श्री के भी तीन उप तत्व है ये हैं श्रेष्ठ, श्रेय एवं आश्रय। तीसरी शक्ति है शौर्य की शक्ति है। चतुर्थ शक्ति है शृंगार की शक्ति एवं पांचवी शक्ति है श्रम की। इन सारी शक्तियों को जोड़ने का कार्य नारी शक्ति करती है।

झारखंड राय विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो० (डॉ ०) सविता सेंगर ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की चर्चा करते हुए कहा की किसी भी राष्ट्र को दिशा देने में विश्वविद्यालय महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अगर विश्वविद्यालय जीवंत और गुंजायमान होंगे तो हमारा राष्ट्र और सभ्यता भी जीवंत होगा। झारखंड राय विश्वविद्यालय का मानना है शिक्षा का असली उद्देश्य है बेहतर समाज और राष्ट्र के निर्माण के लिए कुशल नागरिक का निर्माण करना ।

हमारा प्रयास है विकसित भारत के सपने को पूरा करने वाले युवाओं को प्रशिक्षित करना , उचित सलाह और समर्थन देकर नए सृजन में योगदान देने के काबिल बनाना। विश्वविद्यालय भविष्य के कार्यबल और नेतृत्व कर्ताओं को तैयार करने का कार्य करता है।

वर्ष 2023 -24 की उपलब्धियों की चर्चा करते हुए कुलपति प्रो ० सेंगर ने बताया की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना विकसित भारत का संकल्प 2047 को पूरा करने में देश के 153 विश्वविद्यालय सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं जिनमें झारखंड राय विश्वविद्यालय भी शामिल है। उन्होंने कहा कि [पिछले दो वर्षों में हमने कई उपलब्धियां प्राप्त की है । विश्वविद्यालय का आईईसी सेल पिछले तीन वर्षों से लगातार शीर्ष उपलब्धि हासिल कर रहा है जिसकी सराहना केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने भी की है। विश्वविद्यालय को वर्चुअल लैब उपयोगिता को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2024 में राज्य में दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रावधानों एवं निर्देशों का अनुपालन भी विश्विद्यालय त्वरित गति से कर रहा है। आउट कम बेस्ड एजुकेशन, एकैडमिक बैंक ऑफ़ क्रेडिट, डिजिलॉकर की सुविधा इसी दिशा में उठाये गए महत्वपूर्ण कदम हैं। उन्होंने बताया की वर्ष 2023 -24 में 298 विद्यार्थियों ने स्वयं- मूक्स की परीक्षा में 75 % अंको के साथ सफलता प्राप्त किया है। विश्वविद्यालय के प्रतिभाशाली छात्र छात्राओं ने देशके कई प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के पीजी पाठ्यक्रमों में सफलता प्राप्त की है। सीयूईटी , गेट , जी पैट जैसी कई परीक्षाओं में यहाँ के छात्रों ने सफलता विश्वविद्यालय का मान बढ़ाया है।

*10 को गोल्ड मेडल 1 को चांसलर मेडल, 23 शोध छात्रों को मिली पीएचडी की उपाधि*

झारखंड राय विश्वविद्यालय, रांची के पांचवां दीक्षांत समारोह 28 फ़रवरी शुक्रवार को नामकुम परिसर में आयोजित हुआ । पांचवे दीक्षांत समारोह में कुल 393 विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गयी । महामहिम संतोष कुमार गंगवार ने 10 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल जबकि 1को चांसलर मेडल प्रदान किया ।

दीक्षांत समारोह में स्नातकोत्तर विषय के 122 विद्यार्थी , स्नातक के 184 , डिप्लोमा पाठ्यक्रम के 87 छात्र शामिल हैं। इसके अलावे 23 शोध छात्रों को पीएचडी एवं 3 को एमटेक इन रिसर्च की डिग्री प्रदान की जाएगी।

*महामहिम राज्यपाल ने शक्ति सूत्र :108 सूत्र किताब का किया लोकार्पण ।*

दीक्षांत समारोह में महामहिम राज्यपाल ने शक्ति सूत्र :108 सूत्र किताब का लोकार्पण भी किया। किताब की लेखक झारखंड राय विश्वविद्यालय की चांसलर डॉ० हरबीन अरोड़ा राय है। पुस्तक में शक्ति के 108 रूपों एवं सूत्रों का वर्णन किया गया है।

*दीक्षांत समारोह में देश- विदेश की नामी हस्तियां हुई शामिल।*

झारखंड राय विश्वविद्यालय, रांची के पांचवे दीक्षांत समारोह में देश विदेश की कई प्रसिद्ध हस्तियां उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के तौर पर कोस्टा रिका के पूर्व उप राष्ट्रपति एच इ एपसी कैम्पबेल बरर , आईवरी कोस्ट के पूर्व मंत्री एच इ इयू फरासी याओ , पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं पूर्व सांसद अर्जुन मुंडा, काइनेटिक इंजीनियरिंग लिमिटेड के वाइस चेयरमैन सुलाजा फिरोदिया मोटवानी, पावर्टी एजुकेशन फाउंडेशन मलेशिया के चेयरमैन डाटो हाजी जैनल अबिदीन हाजी सकोम, उपस्थित थे।

दीक्षांत समारोह में देश विदेश की कई गणमान्य हस्तियों के अलावा राज्य के कई विश्वविद्यालयों के कुलपति, कुलसचिव, बुद्धिजीवी एवं समाजसेवी उपस्थित थे।

5th Convocation Ceremony Jharkhand Rai University

5th Convocation Ceremony, Jharkhand Rai University

“Convocation ceremony is not an educational milestone. Rather it is a turning point and a start of a new chapter in the lives of students. This day celebrates the hard work, struggle and commitment of students,” said His Excellency Governor Shri Santosh Gangwar on Friday 28 February, 2025 while addressing the students during the 5th Convocation Ceremony at Jharkhand Rai University, Ranchi.
5th Convocation Ceremony Jharkhand Rai University
His Excellency, Shri. Santosh Gangwar, Hon’ble Governor of Jharkhand & Visitor, Jharkhand Rai University was the Chief Guest & presided over the Convocation.

5th Convocation Ceremony Jharkhand Rai University

Commending the activities of the University, the Governor said that Jharkhand Rai University is playing an active role in developing India. Students studying here are not only given education, but are trained to be innovators. They are being prepared for ‘self-reliant India’.

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“It is a historic moment for students who have worked relentlessly. I congratulate the professors who mentored these students in the right direction,” said the Governor.

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Shri. Arjun Munda Ji, Former Minister & Member of Parliament, Govt. of India said that the convocation provides enthusiasm and energy to the students to march forward towards their future.

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The minister added that the positive impact of the National Education Policy 2020 initiated by Prime Minister Narendra Modi is gradually unfolding.  “India will emerge under this education policy.  I am happy that India is moving forward on the strength of students like you. In the coming days, Jharkhand will be known for universities like Jharkhand Rai University, where the seeds of India’s future is being planted,” he said.

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The program was attended by esteemed special guests, including Dr. Epsy Campbell, former Vice President of Costa Rica, and Ms. Euphrasie Kouassi Yao, former Minister of Ivory Coast and UNESCO Chair holder.

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While addressing the students, Dr. Harbin Arora Rai, Chancellor of Jharkhand Rai University, said that everyone is connected with women power. The maternity power of every human being is female power. Discussing 5 sources of Shakti, she said that the first power is Shruti or Richa, which we call knowledge and university is the center of knowledge.  The second power is the power of Shri, that is, the power of God. This is also female power. The third power is the power of valor.  The fourth power is the power of decoration and the fifth power of labor.

5th convocation ceremony Jharkhand Rai University

Referring to the achievements of the university, Vice Chancellor of Jharkhand Rai University, Prof. (Dr.) Savita Sengar said that the university plays an important role in giving direction to any nation. If the universities are alive and resonant, then our nation and civilization will also be alive.

5th Convocation ceremony Jharkhand Rai University

Jharkhand Rai University believes that the real purpose of education is to build a skilled citizen for better society and nation, the VC said.

 

The convocation ceremony witnessed the presence of eminent international and national delegates from G100- Group of Global Women Leaders.

During the ceremony, three G100 Global Chairs H.E. Dr. Epsy Campbell Barr, H.E. Ms Euphrasie Kouassi Yao and Ms. Sulajja Firodia Motwani were awarded Honorary Doctorate, Honoris Causa for their excellence in respective fields.

Dr. Epsy Campbell in her acceptance remarks congratulated the graduates and said that I’m here because of “my journey of people who believe in possibilities to build together a better world between us women – men equal rights We need to build a new world, working without borders, by being a global tribe”. She thanked Dr Arora for the incredible movement in the form of G100.

Ms. Euphrasie Kouassi Yao in her acceptance speech appreciated the efforts made by Jharkhand Rai University towards ensuring quality education for all in the state.

Sulajja Firodia Motwani, Vice-chairperson, Kinetic Engineering Limited in her acceptance remarks said that her passion is to work towards green energy and create a better world for the future generations.

The grand academic procession of the Convocation was led by Dr Piyush Ranjan, Registrar, Jharkhand Rai University. Dr Ranjan congratulated the students for turning a new chapter in their lives.

A total of 393 students were awarded degrees at the ceremony. His Excellency Governor Shri Santosh Gangwar conferred the gold medal to 10 students while the Chancellor medal was given to 1.

One hundred twenty two postgraduate students,  184 graduate students, 87 students of diploma courses were awarded degrees and certificates.  Apart from this, 23 research students were awarded PhD and three M.Tech students got their research degrees.