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JRU CONVOCATION (4)

झारखंड राय विश्वविद्यालय का चतुर्थ दीक्षांत समारोह : 575 विद्यार्थियों को मिली डिग्री । 2 को चांसलर अवार्ड ,17 को गोल्ड मेडल, 44 को पीएचडी की डिग्री

झारखंड राय विश्वविद्यालय, रांची के चतुर्थ दीक्षांत समारोह में 575 विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गई । इस दौरान 2 छात्रों को चांसलर अवार्ड एवं 17 को गोल्ड मेडल , 3 को डॉक्टरेट की मानद उपाधि, 44 शोध छात्रों को पी एच डी और 3 को एम टेक की डिग्री प्रदान की गई । दीक्षांत समारोह के दौरान 325 स्नातक उपाधि धारक, 93 स्नातकोत्तर की उपाधि वाले एवं 43 डिप्लोमा छात्रों को डिग्री दी गई।

समारोह के मुख्य अतिथि :

झारखंड राय विश्व विद्यालय के चतुर्थ दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि केंद्रीय कृषि ,किसान कल्याण एवं जनजातीय कल्याण विभाग के केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा थे। विशिष्ट अतिथि के रूप में रिपब्लिक ऑफ़ नामीबिया टू इंडिया के हाई कमिश्नर गैब्रियल पी सीनिम्बो और राज्यपाल के शिक्षा सलाहकार प्रो० ई बालागुरुस्वामी उपस्तिथ थे। दीक्षांत समारोह के दौरान झारखंड राय विश्वविद्यालय की चांसलर डॉ. हरबीन अरोड़ा राय भी अतिथि की तौर पर उपस्थित रहीं।

दीक्षांत समारोह में तीन प्रसिद्ध व्यक्तित्व को मानद पी एच डी उपाधि से सम्मानित किया गया जिनमें नित्या मोहन खेमका : निदेशक ग्लोबल हेल्थ थिंक टैंक। नंद एंड खेमका ग्रुप की सलाहकार। मोनिका जिग्नोस: नामीबिया की प्रसिद्ध समाजसेवी और कानून की जानकार। रोहिता बोगोलागमा: यू के में श्रीलंका के हाई कमिश्नर। श्रीलंका के विख्यात कानून निर्माता शामिल थे।

झारखंड राय विश्व विद्यालय के चतुर्थ दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण एवं जनजातीय कल्याण मंत्री अर्जुन मुंडा ने अपने संबोधन के दौरान शिक्षा और पर्यावरण की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इरादा आसमान छूने का हो लेकिन पांव जमीन पर हो। उन्होंने देश के विकास की चर्चा करते हुए कहा कि 2047 एक विकसित भारत का आह्वान है । एक विकसित भारत जिसमें सभी के लिए अवसर हो। दीक्षांत समारोह में उपस्थित छात्रों से उन्होंने कहा की 2047 का विकसित भारत कैसा हो उसमें रोजगार से जुड़े कैसे अवसर होंगे यह भी जानना आवश्यक है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भारतीय भाषाओं के महत्व पर बात करते हुए उन्होंने कहा की आज भाषाओं का बंधन टूटा है। मातृ भाषा का महत्व को बल मिला है।

देश में किसानों और कृषि क्षेत्र में अवसरों और उपलब्धियों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा की देश खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर बना है। किसानों को सरकार के नई योजनाओं और तकनीक की जानकारी से भी अवगत कराने का कार्य किया जा रहा है। दीक्षांत समारोह में उपस्थित छात्रों से कहा की कुछ भी जीवन में प्राप्त करें कहीं भी कार्य करें जीवन में चेतना, संवेदना और सकारात्मकता को कभी नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि जो बाजार में गुम हो जाता है उसे खोजा जा सकता है लेकिन जो खुद में गुम हो जाए उसे खोजना मुश्किल है।

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JRU 4th Convocation

दीक्षांत समारोह को रिपब्लिक ऑफ नांबिया टू इंडिया के हाई कमीशन गैब्रियल पी सिनिंबो ने भी संबोधित किया। उन्होंने दीक्षांत समारोह में शामिल छात्रों को उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामना देते हुए कहा भारत संभावनाओं से भरा देश है। इसकी युवा शक्ति इसकी पूंजी है।

JRU CONVOCATION (2)

राज्यपाल के शिक्षा सलाहकार प्रो0 ई बालागुरु स्वामी ने भारत की प्राचीन ज्ञान और विज्ञान युक्त परंपरा की चर्चा करते हुए इसे एक समृद्ध परंपरा बताया। उन्होंने कहा भारत के युवा प्रचुर मात्रा में क्षमता रखते हैं । भारत एक तीव्र गति से आगे बढ़ने वाला देश बन चुका है जिसमें विज्ञान के क्षेत्र में भी कीर्तिमान स्थापित किया है। विद्यार्थियों से आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि आप कहीं भी कार्य करें लेकिन राष्ट्र प्रथम

4th Convocation JRU

झारखंड राय विश्व विद्यालय की कुलाधिपति डॉ. हरबिन अरोड़ा राय ने दीक्षांत समारोह के दौरान विचार प्रकट करते हुए कहा कि छात्रों यहां से जाने के बाद सोचना है की जीवन कैसा होना चाहिए । उन्होंने विद्यार्थियों से कहा की आप जहां भी जाए अपनी संस्कृति को साथ लेकर जाएं। यह आपकी पूंजी है । एक संपत्ति है।

डॉ. अरोड़ा ने संसार, समरसता, सकारात्मकता और सतर्कता को वर्तमान जीवन के चार स्तंभ बताते हुए कहा कि आगे बढ़ने और सफल होने के लिए यह आवश्यक है। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा, भारतीय होने पर गौरव करने पर भी विस्तार पूर्वक चर्चा की। दीक्षांत समारोह का स्वागत भाषण करते हुए झारखंड राय विश्वविद्यालय रांची की कुलपति प्रो. सविता सेंगर ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की चर्चा करते हुए कहा कि” विश्वविद्यालय यूजीसी और शिक्षा मंत्रालय के निर्देशानुसार कार्य कर रहा है। अभी विश्वविद्यालय में 7 फैकल्टी में 19 से ज्यादा कोर्स चलाए जा रहे हैं। जिसमें 10 यूजी कोर्स 5 पीजी कोर्सेज और डिप्लोमा के कोर्स शामिल है।

4th Convocation JRU

प्रो. सेंगर ने अकादमिक और शोध क्षेत्र में उपलब्धियों की चर्चा करते हुए कहा की अब तक विश्वविद्यालय ने 21 से ज्यादा एम ओ यू देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ किया है । वहीं 14 से ज्यादा पेटेंट भी विश्वविद्यालय के शिक्षकों के द्वारा प्राप्त किया गया है। विश्वविद्यालय को राज्य और केंद्र प्रायोजित 3 प्रोजेक्ट भी प्राप्त हुए है।

कुलपति सेंगर ने भारतीय ज्ञान परंपरा और मूल्यों की चर्चा करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ विद्यार्थियों में नैतिकता के गुण भी समाहित करने का कार्य कर रहा है। विश्वविद्यालय ने शिक्षा के साथ शोध और अन्वेषण को प्रमुखता देते हुए छात्रों के लिए कैम्पस में इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल की स्थापना की है। यह सेल विद्यार्थियों के मौलिक विचारों को मंच प्रदान करते हुए उन्हें उद्यमिता की तरफ ले जाने का कार्य करता है। यहां पढ़ाई करने वाले छात्रों ने 20से ज्यादा स्टार्ट अप को अपने नाम से पंजीकृत कराया है।

विद्यार्थियों की उपलब्धि की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा की यहां पढ़ाई कर रहे छात्रों ने राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय प्रतियोगिता परीक्षा में भी सफलता हासिल किया है। इनमें गेट, टॉफेल और सी ए की परीक्षाएं शामिल हैं। विश्वविद्यालय की एक छात्रा को 26 जनवरी के गणतंत्र दिवस परेड में कर्तव्य पथ पर चलने का भी अवसर प्राप्त हुआ है।

दीक्षांत समारोह के समापन पर धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कुलसचिव डॉ. पीयूष रंजन ने सभी विद्यार्थियों को उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामना देते हुए जीवन में बड़े मुकाम हासिल करने के लिए तैयार होने को कहा। उन्होंने कहा की आप कैम्पस की दुनिया से निकल कर वास्तविक दुनिया के साथ परिचित होने जा रहे है। यहां आपका एक ही दोस्त है और वह है कौशल और ज्ञान।

JRU Ranchi convocation

Celebrating The Success Of Our Students – Convocation Ceremony, JRU Ranchi

Jharkhand Rai University, Ranchi organised its 4th Convocation Ceremony on Friday April 5, 2024.

Jru Ranchi convocation ceremony Shri. Arjun Munda, Hon’ble  Minister – Ministry of Tribal Affairs and Agriculture & Farmers Welfare, Govt. of India was the Chief Guest and delivered the Convocation Address. Prof. (Dr.) E. Balagurusamy, Academic Advisor to the Hon’ble Governor of Jharkhand  was the Guest of Honour and delivered the Special Address.

H.E. Mr Gabriel P. Sinimbo,  High Commissioner of the Republic of Namibia to India  was the Guest of Honour and delivered the Special Address. Dr. Harbeen Arora Rai,  Hon’ble Chancellor, Jharkhand Rai University, Ranchi delivered the Welcome Address. While Prof. (Dr.) Savita Sengar, Vice Chancellor, Jharkhand Rai University presented the report on major achievements of the university for the 2023/2024 Academic Session.

Jru Ranchi convocation ceremony

Board of Governors, JRU Ranchi; Members of Board of Management, Academic Council, members of the staff, teaching and support; alumni; benefactors; parents; well-wishers; friends from media; and students were present for the iconic event at JUT Auditorium, Namkum, Ranchi, Jharkhand.

At the Convocation ceremony, more than 500 students were awarded degrees. Hrithik Ranjan Verma, Master of Business Administration and Prachi Kumari, Master of Computer Application received the Chancellor’s Medal. A total of 20 students received gold medals.

Jru Ranchi convocation ceremony

Addressing the graduating students at the Convocation ceremony, Chief Guest Shri. Arjun Munda,  Hon’ble  Minister – Ministry of Tribal Affairs and Agriculture & Farmers Welfare, Govt. of India encouraged students to stay connected with nature, culture and environment so that with progress, we can all take the benefit of our “samskritik virasat”. He told the students to think beyond personal goals and career achievements. “It is time to think about collective growth and think for the nation’s progress”, he said.

Jru Ranchi convocation ceremony

While addressing the convocation,  H.E. Mr Gabriel P. Sinimbo,  High Commissioner of the Republic of Namibia to India congratulated and extended his best wishes to the graduating students.

During her address Dr. Harbeen Arora Rai,  Hon’ble Chancellor, Jharkhand Rai University stressed on the need for positive thinking. The Chancellor added that we should all be proud of our Indian culture, of being Indian and of being a part of this rich heritage, which is so inclusive that the message we send out to the world is – वसुधैव कुटुम्बकम्.

Addressing the Convocation ceremony, Prof. (Dr.) E. Balagurusamy, Academic Advisor to the Hon’ble Governor of Jharkhand told the students to “take oath as to what I can do for India to make the my nation a developed country. No matter where you go, think about India.”

Prof. (Dr.) Savita Sengar, Vice Chancellor said, “For long now JRU Ranchi has built the capacity to train, mentor and support young minds who can propel the growth during the Amrit Kaal of Bharat from 2022 to 2047.”

Prof. (Dr.) Piyush Ranjan, Registrar thanked all those present at the ceremony for their participation and attention.

It is important to note that today Jharkhand Rai University is among 153 universities in India, out of over 1400, playing a role in shaping the vision of Viksit Bharat @2047, in line with the vision set forth by Hon’ble Prime Minister under the direction of Niti Aayog and UGC.

Worthy of note is the fact that Jharkhand Rai University has developed its own campus at Raja Ulatu, Namkum, Ranchi which includes 1,00,000 sq. ft. area of Academic Block, a separate building for boys and girls hostel spread across 40,000 sq. ft. area and 25,000 sq. ft. area of Administrative Block.

 

Fourth Convocation Ceremony JRU Ranchi

Fourth Convocation Ceremony of Jharkhand Rai University – Watch Live

Live Streaming 4th Convocation, JRU Ranchi 

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The 4th Convocation of Jharkhand Rai University, Ranchi will be held on Friday April 5, 2024, 10:00 am onwards at JUT Auditorium, Namkum, Ranchi, Jharkhand.

Shri. Arjun Munda, Hon’ble Minister – Ministry of Tribal Affairs and Agriculture & Farmers Welfare, Govt. of India will be the Chief Guest & deliver the Convocation Address

Prof. (Dr.) E. Balagurusamy, Academic Advisor to the Hon’ble Governor of Jharkhand will be the Guest of Honour & deliver the Special Address

H.E. Mr Gabriel P. Sinimbo, High Commissioner of the Republic of Namibia to India will be the Guest of Honour & deliver the Special Address

Dr. Harbeen Arora Rai, Hon’ble Chancellor, Jharkhand Rai University, Ranchi will deliver the Welcome Address.

 

changes in mat 2024

Changes in MAT 2024

The new version of the Management Aptitude Test (MAT) for admissions into MBA & PGDM programs has been revealed by All India Management Association (AIMA).
Students of Ranchi, Jharkhand interested in appearing for MAT 2024 can find all the information here on this page.

When will the new MAT version be introduced?

According to a press release by AIMA, MAT 2.0 will be introduced from May 2024.

What are the new segments in MAT 2.0? ( pattern of MAT 2024)

The evolved version of the MAT 2024 exam aims to cover new segments like current business and economic trends.

What is new in MAT 2.0?

The new version of the exam aims to offer a fresh perspective on management education aligned with industry practices and growing educational requirements.

What will be the time duration for MAT 2024 exams?

The exam duration will be 120 minutes.

How many questions will students have to attempt during MAT 2024? ( pattern of MAT 2024)

Students will now be required to attempt 150 questions.

Check the MBA fees and program details here.

What is the eligibility criteria for MAT 2024?

Graduates in any discipline. Final-year students of Graduate courses can also apply.

Application Fee for MAT 2024

The examination fee for MAT May 2024 is ₹2100/-. Candidates can opt for an additional test mode by paying an extra fee of ₹1200/-.

MAT May 2024 Exam Dates and Schedule:
● PBT mode (Paper Based Test): The test date is 2 June, and registration will end on 28 May.

● CBT (Computer-Based Test): The test date is 26 May, and registration will end on 19 May.

● IBT-1 (Internet-Based Test): Test date is 19 May, and registration will end on 16 May.

● IBT-2: The test date is 24 May, and registration will end on 21 May.

● IBT-3: The test date is 31 May, and registration will end on 28 May.

For more information, visit the official website of AIMA here.

Polytechnic Entrance Competitive Examination Admit card

Download Jharkhand Polytechnic Admit Card 2024

Students of Jharkhand are waiting for Jharkhand Polytechnic Admit Card 2024. This page gives details about how to easily download Jharkhand Polytechnic Admit Card 2024. Read and follow the steps mentioned here.

Jharkhand Combined Entrance Competitive Examination Board (J.C.E.C.E.B.) will release the exam admit card for the upcoming Jharkhand Polytechnic Entrance Competitive Examination 2024 ( P.E.C.E.) . Candidates who applied for this Examination of J.C.E.C.E.B. will be able to download their Jharkhand Polytechnic Admit Card 2024 through the Admit Card download link.

Jharkhand Polytechnic Admit Card 2024

झारखंड संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद (JCECEB) द्वारा झारखंड Polytechnic प्रवेश परीक्षा 2024 का आयोजन 07 अप्रैल 2024 दिन रविवार को 10:30 AM से 01:00 PM तक किया जायेगा। झारखंड पॉलिटेक्निक प्रवेश परीक्षा OMR Sheet पर आधारित Offline Mode के माध्यम से ली जाएगी। जिसके लिए पर्षद द्वारा परीक्षा के 4 दिन पूर्व Admit Card जारी किया जायेगा।

Who conducts the Polytechnic Entrance Competitive Examination 2024?

This exam is conducted by Jharkhand Combined Entrance Competitive Examination Board (JCECEB)

How can I download the admit card for Polytechnic Entrance Competitive Examination 2024?

It can be downloaded easily from the link given below. Just follow the easy steps.

When will the admit card be released for Polytechnic Entrance Competitive Examination 2024?

Admit Card will be released 4 Days Before Exam.

When will the Polytechnic Entrance Competitive Examination 2024 be conducted?

Exam Date for Polytechnic Entrance Competitive Examination 2024 is 7 April 2024

Exam Centers List for Jharkhand Polytechnic Admit Card 2024 – 
Ranchi
Hazaribagh
Jamshedpur
Dhanbad
Dumka
Chaibasa
Bokaro
Palamu

How to Download Jharkhand Polytechnic Admit Card 2024?

Go Official Website http://jceceb.jharkhand.gov.in/
On Home Page click the Download button
The “Admit Card” button will appear below “Home”
Or Click this Admit Card link and directly go to admit card page – Download Admit Card 
A form will appear below
From drop down menu, select and Click Jharkhand Polytechnic Admit Card
Put Your Reg. No. And Date of Birth
Download Your Admit Card in PDF.
Print This Admit Card.

 

Mining Placement JRU

झारखंड राय विश्वविद्यालय के 8 छात्र गेट परीक्षा 2024 में हुए सफल

झारखंड रॉय विश्वविद्यालय रांची के माइनिंग इंजीनियरिंग संकाय के 8 विद्यार्थियों ने इस वर्ष आयोजित गेट की परीक्षा में सफलता प्राप्त किया है। वर्ष 2024 में आयोजित गेट परीक्षा में विश्वविद्यालय के 8 छात्रों ने सफलता हासिल कर एक नया इतिहास रचा है। सफलता प्राप्त करने वाले छात्रों में अलिकट्टी रविंद्र( AIR 362) बंटी कुमार( AIR 655) गनगुला रवितेजा (AIR 724) सेगम साईं कुमार( AIR 1292 ) राज शुभम(AIR1463) सोनू कुमार( AIR 1679) रौशन रोहित मिंज (AIR 1959) कुंदन कुमार( AIR 1959) का नाम शामिल है।

JRU STRIP Mining

बी टेक के छात्रों की सफलता पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. पीयूष रंजन ने उनके उज्जवल भविष्य की कामना की है। उन्होंने कहा कि “देश की प्रतिष्ठित परीक्षा गेट में विश्वविद्यालय के माइनिंग इंजीनियरिंग के छात्रों की यह सफलता और भी छात्रों को प्रतियोगी परीक्षा में शामिल होने और सफल होने में सहायक साबित होगा।“

विद्यार्थियों की सफलता पर हर्ष व्यक्त करते हुए संकाय के समन्वयक प्रो. सुमीत किशोर ने कहा कि माइनिंग के विद्यार्थियों के लिए गेट परीक्षा की तैयारी के लिए विश्वविद्यालय के सहयोग से पूर्व में भी ऑनलाइन कक्षाओं का आयोजन कर गेट परीक्षा में सफलता प्राप्त करने के लिए प्रेरित करने का कार्य किया गया है। इस वर्ष गेट परीक्षा में 8 विद्यार्थियों ने सफलता प्राप्त कर विश्वविद्यालय का नाम रौशन किया है।“

विश्वविद्यालय के द्वारा माइनिंग इंजीनियरिंग में दो पाठ्यक्रम संचालित किये जाते है। डिप्लोमा इन माइनिंग इंजीनियरिंग और बीटेक इन माइनिंग इंजीनियरिंग। डिप्लोमा इंजीनियरिंग 3 वर्षीय पाठ्यक्रम है जबकि बीटेक माइनिंग 4 वर्षीय पूर्णकालिक पाठ्यक्रम है।

माइनिंग इंजीनियरिंग क्या हैं?
https://www.jru.edu.in/programs/b-tech-mining/

भारत में माइनिंग इंजीनियरिंग का उज्ज्वल करियर स्कोप है और वह भी खासकर भारत सरकार के ‘न्यू इंडिया मिशन’ के बाद। भारत की माइनिंग इंडस्ट्री 7 लाख से अधिक लोगों को रोज़गार मुहैया करवाती है और देश के जीडीपी में माइनिंग इंडस्ट्री का कुल योगदान लगभग 2.5 फीसदी है जो लगातार बढ़ रहा है।

अगर आपको माइनिंग में दिलचस्पी है तो आप भारत में एक माइनिंग इंजीनियर के तौर पर अपना करियर बना सकते हैं।माइनिंग इंजीनियरिंग करने वाले स्टूडेंट्स डिप्लोमा इन माइनिंग इंजीनियरिंग और बीटेक इन माइनिंग इंजीनियरिंग इन दोनों हो कोर्स को बेहद पसंद करते है।

माइनिंग इंजीनियरिंग के बाद रोजगार के अवसर:
https://www.jru.edu.in/programs/diploma-mining-engineering/

भारत छठा सबसे बड़ा लौह अयस्क का उत्पादन करने वाला और पांचवां बॉक्साइट अयस्क उत्पादक देश है। इसके पास 302 बिलियन कोयले का रिजर्व और 3000 से ज्यादा ऑपरेशनल माइंस हैं। इन अयस्कों की मांग दिन पर दिन बढ़ती जा रही है। सैलरी के मामले में यह सेक्टर बहुत अच्छा है। वह इसलिए क्योंकि इस क्षेत्र में काम बहुत है और लोग कम। इसमें माइनिंग कंपनी और कैंडिडेट, दोनों की परफॉर्मेंस अहमियत रखती हैं। माइनिंग के कोर सेक्टर में सैलरी पैकेज ज्यादा मिलता है क्योंकि उसमें फील्ड जॉब होती है। कोर सेक्टर में कंपनियां मैनेजमेंट ट्रेनी लेवल पर कैंडिडेट को लेती हैं और एक साल की ट्रेनिंग के बाद उन्हें मैनेजर पद पर प्रमोट कर देती हैं। दूसरा हिस्सा माइनिंग लॉज, सेफ्टी और अन्य जरूरतों का होता है।

बड़ी कंपनियों में मिलता है रोजगार:
कोल इंडिया लिमिटेड, टाटा स्टील, रियो टिनटो, वाइजैग स्टील, मोनेट इस्पात, वेदांता, एचजेडएल, एचसीएल, इलेक्ट्रोस्टील, द इंडियन ब्यूरो ऑफ माइनिंग, जियॉलजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, आईपीसीएल, नालको, अडानी माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड।

GATE Exam क्या है?
इंजीनियरिंग में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों के लिए गेट परीक्षा राष्ट्रीय स्तर की एक प्रतिष्ठित परीक्षा है। इसमें कुल 23 पेपर होते है। गेट परीक्षा को आईआईटी जेईई परीक्षा से भी कठिन समझा जाता है। आईआईटी जेईई का आयोजन बी.टेक कॉलेजों में प्रवेश के लिए किया जाता है जबकि गेट का आयोजन इंजीनियरिंग की मास्टर डिग्री यानी एम.टेक कॉलेजों में प्रवेश के लिए किया जाता है। इसलिए इस परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों का स्तर पीजी लेवल का होता है। गेट एग्जाम के स्कोर कार्ड की मान्यता 3 वर्ष की होती है, इसके आधार पर देश के टॉप कॉलेजों तथा यूनिवर्सिटीज के अंदर इंजीनियरिंग कोर्सेज में एडमिशन मिल सकता है।

HYDROPHONICS

झारखंड राय यूनिवर्सिटी की सहायक प्राध्यापक ने एक्वा फॉडर बेस्ड हाइड्रोफोनिक पर लिया पेटेंट।।

झारखण्ड राय विश्वविद्यालय, रांची के कृषि संकाय में सहायक प्राध्यापक नेहा कुमारी सिंह ने ” एक्वा फॉडर बेस्ड हायड्रोपोनिक डिवाइस ” का पेटेंट प्राप्त किया है। बिना मिट्टी के सिर्फ पानी के जरिए चारा उगाने की तकनीक पर आधारित उनका यह पेटेंट सूखे और पानी की कमी वाले क्षेत्रों के लिए बेहद उपयोगी है।प्रो.नेहा का यह पहला पेटेंट है।

झारखण्ड राय विश्वविद्यालय, रांची शोध और अन्वेषण के साथ बौद्धिक संपदा अधिकार को बढ़ावा देने के लिए कृत संकल्पित होकर कार्य कर रहा है। विश्वविद्यालय ने शिक्षकों के मौलिक कार्यों को पेटेंट करवाने और आईपीआर के इ प्रचार प्रसार को भी बढ़ावा देने का कार्य किया है। विश्वविद्यालय के 7 शिक्षकों ने अभी तक पेटेंट प्राप्त किया है।

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IPR के बारे में जानकारी:
बौद्धिक संपदा (आईपी) संपत्ति की एक श्रेणी है जिसमें अमूर्तता शामिल है मानव बुद्धि के निर्माण, और मुख्य रूप से कॉपीराइट, पेटेंट शामिल हैं। ट्रेडमार्क बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) किसी अन्य संपत्ति की तरह हैं सही जो रचनाकारों, या मालिकों, पेटेंट, ट्रेडमार्क या मालिकों की अनुमति देता है कॉपीराइट किए गए कार्यों को एक निर्माण में अपने स्वयं के काम या निवेश से लाभ उठाने के लिए। बौद्धिक संपदा कानून का मुख्य उद्देश्य एक के निर्माण को प्रोत्साहित करना है बौद्धिक वस्तुओं की विस्तृत विविधता।

कृषि स्नातकों के लिए अपना बिजनेस शुरू करने का सुनहरा अवसर:
https://www.jru.edu.in/programs/department-of-agriculture-2/b-sc-hons-agriculture/

पेटेंट किसे कहते हैं?
पेटेंट शब्द का उपयोग भौतिक आविष्कारों और बौद्धिक संपदा दोनों पर लागू होता है। एक पेटेंट किसी उत्पाद को बनाने और बेचने का अधिकार नहीं देता है; बल्कि यह दूसरों को अपने स्वयं के मौद्रिक लाभ के लिए एक आइटम या अपनी खुद की बौद्धिक संपदा के एक टुकड़े के उत्पादन पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार देता है।

प्रो. नेहा सिंह ने अपने पेटेंट के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि “ भारत जैसे देश में हाइड्रोपोनिक्स को गेम चेंजर विधि है। यह किसी भी वातावरण में सालभर की खेती की अनुमति देती है और कम पानी के उपयोग के साथ अधिक मात्रा में उत्पादन करने की संभावना प्रदान करती है।हाइड्रोपोनिक्स और अन्य मिट्टी-रहित कृषि तकनीक हमारी कृषि और कृषि उद्योग को अगले स्तर पर ले जाने में मदद कर सकती हैं। इस विधि के द्वारा पानी की बचत होती है। साथ ही किसान कम मेहनत में पशुओं के लिए हरा चारे का उत्पादन कर सकता है।

कृषि क्षेत्र में शोध, अन्वेषण और रोजगार वाला पाठ्यक्रम कौन हैं ?
https://www.jru.edu.in/programs/department-of-agriculture-2/m-sc-agriculture/

पिछले कुछ वर्षों में पेटेंट को लेकर देश में संवेदनशीलता बढ़ी है। इसे बढ़ावा देने के लिए सरकारी स्तर भी काफी प्रचार प्रसार किया गया है। पेटेंट की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया को बढ़ावा दिया जा रहा है। विधिक दिक्कतों को न्यूनतम करने में यह कारगर साबित हुआ है। भारत सरकार के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी इंडिया इस प्रकार के कार्यों के लिए कार्य कर रहा है।

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बीकॉम टैक्सेशन क्यों करें? कैसे बनाएं करियर

B.Com Taxation एक व्यावसायिक पाठ्यक्रम है। कॉमर्स, लॉ और मैनेजमेंट बैकग्राउंड के वैसे छात्र जो सीए, सीएस, आईसीडब्ल्यूए लेने के इच्छुक है उनके लिए यह पाठ्यक्रम एक मजबूत आधार प्रदान करता है। साथ ही, छात्रों को कर (टैक्स) परामर्श के क्षेत्र में विभिन्न पदों के लिए तैयार करता है। बी.कॉम टैक्सेशन प्रबंधकीय कौशल और मुख्य योग्यता प्रदान करते हुए स्नातकों को व्यवसाय जगत में करियर की एक विस्तृत श्रृंखला के लिए तैयार करता है। इस का उद्देश्य स्नातक स्तर के छात्रों को क्रमिक और प्रभावी तरीके से कराधान प्रणाली ( टैक्स सिस्टम) और वित्तीय सिद्धांतों( फाइनैंशल इंस्ट्रूमेंट) का समग्र ज्ञान प्रदान करना है। यह विशेष कार्यक्रम वित्तीय प्रबंधन, कर नियमों और रणनीतिक वित्तीय योजना की जटिलताओं में उत्कृष्टता प्राप्त करने का लक्ष्य रखने वाले व्यक्तियों के लिए तैयार किया गया है।

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बी.कॉम टैक्सेशन कोर्स क्या है?
बी.कॉम (टैक्सेशन) का पूरा नाम बैचलर ऑफ कॉमर्स इन टैक्सेशन होता है। यह 3 वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम है। किसी भी स्ट्रीम से 12 वीं पास छात्र इस कोर्स को कर सकता है। इसे पूरा करने के बाद लेखा परीक्षक, आयकर अधिकारी, लागत लेखाकार, कर सलाहकार, बजट विश्लेषक, वित्त प्रबंधक, सहायक लेखाकार आदि पदों पर कार्य करने का अवसर मिलता है ।
बीकॉम टैक्सेशन के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए क्लिक करें: https://www.jru.edu.in/programs/bcom-taxation/
बीकॉम टैक्सेशन में क्या पढ़ना होता है?

बीकॉम टैक्सेशन पाठ्यक्रम वित्त, अर्थ, विधि और प्रबंधन का मिला जुला पाठ्यक्रम है। इसके मुख्य विषयों में शामिल हैं:

  • खाता लेनदेन
  • लेखा पुस्तकें
  • व्यावसायिक आंकड़े
  • पूंजी आय – व्ययक
  • केंद्रीय और बिक्री कर
  • कस्टम कानून प्रक्रियाएं
  • कर्मचारी प्रबंधन
  • कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम
  • व्यावहारिक अर्थशास्त्र
  • सूची प्रबंधन
  • ई-कॉमर्स सेवा कर प्रबंधन
  • आय वितरण
  • पेरोल प्रबंधन
  • अनुसंधान और रिपोर्ट प्रस्तुति

हर साल 1 लाख छात्र क्यों करते है बीबीए जाने :
https://www.jru.edu.in/programs/faculty-of-commerce-management/bba/

बीकॉम टैक्सेशन करने के क्या फायदे है?
देश की आर्थिक तरक्की के लिए टैक्सेशन बहुत जरूरी है और अगर कोई भी टैक्सेशन में अपना करियर बनाना चाहता है तो उसके लिए बीकॉम टैक्सेशन बेहतर ऑप्शन है। एक रिपोर्ट के मुताबिक नई जीएसटी कर व्यवस्था ने 1.3 मिलियन विशेषज्ञों की मांग पैदा की है। यह कर विशेषज्ञों की लगातार बढ़ती आवश्यकता को इंगित करता है। गहन कर ज्ञान और मजबूत विश्लेषणात्मक कौशल वाले स्नातकों की इस क्षेत्र में उच्च मांग है।

  • यह कोर्स विश्लेषणात्मक और प्रबंधकीय क्षमताओं से लैस होने , वित्त और कराधान पर ध्यान देने के साथ वाणिज्य के सभी प्रासंगिक क्षेत्रों में कौशल विकसित करने का मौका देता है।
  • इसे करने के बाद रोजगार कर विशेषज्ञ, कर सलाहकार, कर वकील विशेषज्ञ, कर नीति विश्लेषक, कर सलाहकार, लेखा सहायक, लागत लेखाकार, ऑडिटिंग क्लर्क, आदि पदों पर कार्य कर सकते हैं ।
  • डेलॉइट, अर्न्स्ट एंड यंग, जे. पी मॉर्गन चेज़ एंड कंपनी, एचडीएफसी बैंक प्राइवेट लिमिटेड, आदि बी.कॉम टैक्सेशन स्नातकों की प्रमुख भर्तीकर्ता हैं।

बीकॉम टैक्सेशन के बाद जॉब के अवसर :

  • चार्टेड अकाउंटेंट (CA)
  • इंस्टिट्यूट और कॉस्ट एंड वर्कस अकाउंटेंट इन इंडिया (ICWA)
  • कंपनी सेक्रेटरी (CS)
  • सर्टिफाइड मैनेजमेंट अकाउंटेंट(CMA)
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एमएसएमइ टूल रूम और झारखंड राय विश्वविद्यालय ने संयुक्त रूप से किया आई पी आर पर कार्यशाला का आयोजन

झारखंड गवर्नमेंट टूल रूम रांची एवं झारखंड राय विश्वविद्यालय रांची के सहयोग से शुक्रवार को “आई पी आर पेटेंट एंड प्रोसेस इन्वॉल्वड इन करंट प्रोस्पेक्टिव ऑन एकेडमिक एंड रिसर्च” विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यशाला में स्वागत संबोधन करते हुए एम एस एम इ टूल रूम रांची के प्राचार्य एम के गुप्ता ने केंद्र सरकार के एम एस एम इ मंत्रालय और टूल रूम रांची के द्वारा बौद्धिक संपदा अधिकार और कौशल विकास को लेकर किए जा रहे कार्यों की चर्चा करते हुए कहा कि ” टूल रूम रांची में 15 से ज्यादा प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे है। आईपीआर को बढ़ावा देने के लिए समय समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते है।

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प्राचार्य गुप्ता ने कहा कि टूल रूम रांची के जरिए अब तक 3 इनोवेटिव आइडिया को 15 लाख रुपए की राशि उपलब्ध कराई गई है। भारत सरकार के कई अन्य योजनाएं जिनमें एम एस एम ई बिजनेस स्कीम, अटल इनोवेशन लैब और झारखंड स्टार्टअप शामिल है के जरिए स्टार्टअप और इनोवेशन को बढ़ावा देने का कार्य किया जा रहा है

झारखंड राय विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सविता सेंगर ने अपने विशेष संबोधन के दौरान भारतीय ज्ञान परंपरा, इंडिजिनस हेरिटेज और बौद्धिक अधिकार संपदा पर विस्तार पूर्वक चर्चा करते हुए कहा कि ” विचार का आना और विचार को बौद्धिक अधिकार संपदा में बदलना दो अलग अलग बातें है। विचार भी एक संपदा है इसका अधिकार आइडिया देने वाले के पास होना चाहिए।
प्रो. सेंगर ने कहा की नवीन विचारों का प्रभाव समाज और सामाजिक दायित्वों से भी जुड़ा हुआ है। आई पी आर और पेटेंट को लेकर हमारे समाज में बहुत जागरूकता नहीं रही है लेकिन अब इसके प्रति और इससे जुड़े कानूनी पहलू के प्रति लोगों में समझ बढ़ी है।

कार्यशाल के आयोजन पर उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों में , शिक्षकों में और नवीन विचार पर काम करने वाले लोगों में जन जागरूकता लाने में सफल साबित होंगे।

कुलपति सेंगर ने झारखंड के अगरिया जनजाति का उदाहरण देते हुए कहा कि इनके द्वारा बनाया गया ढलवा लोहा में जंक नहीं लगता है। यह एक प्रकार का युगांतर कारी कार्य है । लेकिन इसके बारे में कितनों को पता है। जिस प्रकार स्टील का अविष्कार एक बड़े बदलाव का वाहक बन गया उसी प्रकार लोहे के साथ इस जनजातीय समाज का प्रयोग भी एक अनोखा प्रयास है हमें इसकी सराहना करनी चाहिए। एन आई टी जमशेदपुर के द्वारा इस पर शोध कार्य किया जा रहा है।

उन्होंने जियो टैग का भी प्रश्न उठाते हुए कहा की देश के दो प्रदेशों में एक मिठाई को लेकर उठा विवाद भी आई पी आर और पहचान के प्रति हमारी अनदेखी को दर्शाता है।

झारखंड राय विश्विद्यालय के कुल सचिव डॉ. पीयूष रंजन ने कार्यशाला के आयोजन और औचित्य पर प्रकाश डालते हुए कहा की बौद्धिक विचार का संरक्षण आवश्यक है। एक अशिक्षित भी अपनी जमीन और ऐसे साधनों का संरक्षण और उससे जुड़े कागजातों के प्रति सचेत रहता है तो बौद्धिक समाज को भी अपने विचारों, बौद्धिक संपदा के संरक्षण के प्रति सचेत होने की आवश्यकता है।

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कुल सचिव ने कहा की भारत में प्रचुर मात्रा में बौद्धिक विचार और ज्ञान से भरे एकेडमिक और गैर एकेडमिक क्षेत्र से जुड़े लोग बेहतर कार्य कर रहे है लेकिन जानकारी और जागरूकता के अभाव में संपदा संरक्षण के प्रति उदासीनता है। उन्होंने कहा कि पीछे एक दशक में एक बड़ा परिवर्तन देखने को मिला है। आंकड़ों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा की इस वर्ष देश में 40हजार से ज्यादा पेटेंट पंजीकृत हुए है। इस परिवर्तन का कारण डोमेस्टिक पेटेंट का शामिल होना है। पहली बार देश में पेटेंट के मामले में देशी और घरेलू पेटेंट को प्राथमिकता देने का कार्य किया गया जिसके परिणामस्वरूप पेटेंट की संख्या में वृद्धि हुई है। यह एक स्वागत योग्य कदम है। इस प्रकार के कदम प्रधानमंत्री मोदी के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में भी सहायक साबित होंगे।

डॉ. पीयूष रंजन के आगे कहा कि जैसे जैसे देश में शोध,अन्वेषण और आई पी आर का दायरा बढ़ता है देश भी प्रगति करता है। देश की अर्थव्यवस्था में भी सुधार आता जाता है। आज भारत विश्व की पांच बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है ।

उन्होंने चीन का उदाहरण देते हुए कहा की याद देश आज विश्व की दूसरी बड़ी अर्थव्यवस्था है। लेकिन वर्ष 2003में चीन की अर्थव्यवस्था विश्व में 13वें नंबर की अर्थव्यवस्था थी। लेकिन 10 वर्षों में चीन के अंदर जो हम बड़ा बदलाव देख रहे हैं उसके पीछे एक मुख्य कारण इनोवेशन और पेटेंट है।

एक वर्ष के अंदर वहां 4 लाख से ज्यादा पेटेंट दर्ज किए गए हैं। वहीं 4.4मिलियन ट्रेडमार्क भी पंजीकृत किए गए है।

भारत में पेटेंट को लेकर बात करते हुए उन्होंने कहा की क्षेत्रीय स्तर पर भी हमारे देश में पेटेंट को लेकर विविधता है अधिकांश पेटेंट महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के राज्यों में होते आए है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी इस विषय पर गंभीर पहल देखने को मिल रही है।

तकनीकी सत्र को संबोधित करते हुए एन यू एस आर एल रांची की डॉ. श्वेता और प्रो. शांतनु ब्रज चौबे ने विस्तार पूर्वक सभी प्रतिभागियों को बौद्धिक संपदा अधिकार, उसके प्रकार, निबंधन की प्रक्रिया, केंद्र सरकार के द्वारा दिए जाने वाले सहयोग, विधिक नियमों और अन्य जानकारियों से अवगत कराने का कार्य किया।

कार्यक्रम के समापन पर टूल रूम रांची के वरीय प्रशासनिक अधिकारी आशुतोष मिश्रा ने धन्यवाद ज्ञापन किया।।

कार्यशाला को सफल बनाने में झारखण्ड राय विश्विद्यालय की डीन मैनेजमेंट डॉ. हरमीत कौर एवं विधि संकाय की डॉ. खालिदा रहमान की विशेष भूमिका रही।

कार्यशाला में बड़ी संख्या में छात्र छात्राएं और शिक्षक शामिल हुए।।

झारखंड राय विश्वविद्यालय के कृषि संकाय के विद्यार्थियों ने किया एग्रोटेक किसान मेला 2024 का भ्रमण

“कृषि नवाचारों द्वारा पोषण, आय तथा रोजगार संवर्धन” पर आधारित एग्रोटेक किसान मेला 2024 का आयोजन बिरसा कृषि विश्वविद्यालय रांची में 2 से 4 मार्च के बीच आयोजित किया गया। मेले का उद्देश्य कृषि नवाचारों,युवा उद्यमियों को उन्नत कृषि, पशुपालन, वानिकी, डेयरी, जैव प्रौद्योगिकी, कृषि यंत्रीकरण, खाद्य प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्द्धन को बढ़ावा देना था।

कृषि नवाचारों द्वारा पोषण, आय तथा रोजगार संवर्द्धन को ध्यान में रखते हुए झारखण्ड राय विश्वविद्यालय के कृषि संकाय के 32 विद्यार्थियों के दल ने विभागीय शिक्षकों के मार्गदर्शन में एग्रोटेक किसान मेला 2024 का भ्रमण किया। इस दौरान विद्यार्थियों ने मेले में लगाए गए 125 से ज्यादा स्टॉलों का भ्रमण किया। मेले में राज्य के 24 जिलों से किसान शामिल हुए थे।

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इस दौरान विद्यार्थियों ने बिरसा कृषि विश्वविद्यालय की विभिन्न इकाइयों, राज्य में स्थित आईसीएआर के संस्थानों, बीज एवं उर्वरकों के विक्रेताओं, बैंक एवं वित्तीय संस्थानों, स्वयंसेवी संगठनों, टाटा ग्रुप के रांची कैंसर संस्थान, नर्सरी प्रतिष्ठानों, कृषि परामर्श सेवा केंद्र के बारे में जानकारी भी प्राप्त किया।

खेती-बाड़ी की पढ़ाई से भी मिल सकती हैं लाखों की नौकरी, स्टार्टअप का भी है मौका।
https://www.jru.edu.in/programs/department-of-agriculture-2/b-sc-hons-agriculture/

मेला का उद्घाटन केंद्रीय कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री अर्जुन मुंडा ने 2 मार्च को किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने झारखंड को पूरा सम्मान देने के लिए विकसित भारत संकल्प यात्रा की शुरुआत बिरसा भगवान की जन्मस्थली और उलिहातू से की तथा जंगल, पहाड़, पठार में रहनेवाले देश के 75 प्रिमिटिव ट्राइब्स के संरक्षण के लिए 24000 करोड़ रु की योजना जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान की शुरुआत झारखंड से की। पूर्वी भारत और झारखंड में कृषि विकास के लिए कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी। झारखंड के सभी 32 हजार गांवों के लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड बने, इसमें बिरसा कृषि विश्वविद्यालय को अग्रणी भूमिका निभानी है।

किसान मेला के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए झारखंड के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने कहा है कि कृषि यानी खेती-किसानी ही सभी संस्कृति की जननी है और बिना कृषि के किसी भी संस्कृति की कल्पना नहीं की जा सकती है। भारत सरकार द्वारा हरित क्रांति के जनक डॉ एम.एस स्वामीनाथन और पूर्व प्रधानमंत्री, किसान नेता चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न प्रदान करने का जिक्र करते हुए राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी ने कृषि वैज्ञानिकों और किसानों का सम्मान बढ़ाया है।

बीएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई और ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव का महत्त्व
https://www.jru.edu.in/dedicated-agriculture-land/

राज्यपाल ने जेनेटिक बीमारियों और एनिमल ब्रीडिंग से संबंधित डॉ नंदनी कुमारी की दो पुस्तकों, पशुपालन से संबंधित डॉ सुशील प्रसाद की एक पुस्तक तथा बिरसा किसान दैनंदिनी का लोकार्पण किया। उन्होंने मेला में विभिन्न प्रदर्शनी के विजेताओं तथा राज्य के सात अलग अलग जिलों से आए 7 प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया। जिन प्रगतिशील किसानों को राज्यपाल ने सम्मानित किया, उसमें धनबाद के कमल महतो, गिरिडीह के प्रदुमन महतो, खूंटी के निलेश कुमार, सरायकेला खरसावां के सोमराय मार्डी, रांची के राजेश्वर महतो, सिमडेगा के चूड़ामणि यादव और पश्चिमी सिंहभूम के पानी लागुरी का नाम शामिल है। उद्यान प्रदर्शनी में फूलों के वर्ग में भारतीय विधिक माप विज्ञान संस्थान (आईआईएलएम), कांके को सर्वाधिक 06 तथा सब्जियों के वर्ग में होचर गांव (कांके) के रामकुमार साहू को सर्वाधिक 05 पुरस्कार प्राप्त हुए।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक ने कहा कि झारखंड बागवानी, पशु उत्पादन एवं मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में एक बड़े हब के रूप में उभर सकता है, इसके उत्पादों की मांग देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी होगी। इसके लिए आर्थिक सहयोग के साथ-साथ पॉलिसी सपोर्ट की भी आवश्यकता है। अगली हरित क्रांति में मिट्टी और जल स्तर में पंजाब-हरियाणा जैसा दुष्परिणाम नहीं आए, इस पहलू का पूरा ख्याल रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि आईसीएआर के सभी शोध संस्थानों और देश के सभी कृषि विश्वविद्यालयों को आपस में मिलकर वन आईसीएआर की अवधारणा के साथ काम करना है।