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वेस्ट मैनेजमेंट: झारखंड राय विश्वविद्यालय के छात्रों ने बनाया हर्बल गुलाल

झारखंड राय विश्वविद्यालय रांची के B.Sc Agriculture के विद्यार्थियों ने पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य जागरूकता का संदेश देते हुए हर्बल गुलाल तैयार किया है। कैंपस में विद्यार्थियों का यह प्रयास होली जैसे त्यौहार को इको फ्रेंडली बनाने और त्यौहारों को मानाने की भारतीय ज्ञान परंपरा का भी प्रतीक है। बी एस सी एग्रीकल्चर अंतिम वर्ष की छात्रा दीपिका इस बारे में बताती है हर्बल गुलाल बनाना और इसकी तकनीक से अवगत होना ही हमारे एक्सपेरिमेंटल लर्निंग प्रोग्राम का उद्देश्य नहीं है बल्कि यह प्रयास आत्मनिर्भर भारत के सपने की तरफ भी एक कदम है।

B.Sc Agri - Course Strip

खास बात ये है कि छात्रों ने खुद से लागत लगाकर इको फ्रेंडली हर्बल गुलाल को तैयार किया है. साथ ही साथ इसकी बिक्री से होने वाली आमदनी भी वह खुद को और बेहतर करने पर खर्च करने में लगने वाले हैं।

B.Sc (Hons.) Agriculture अंतिम वर्ष के विद्यार्थी शुभम और स्नेहा कोनार ने हर्बल गुलाल बनाने और बिक्री से जुड़ी जानकारी साझा करते हुए बताया की इस प्रयास में 14 विद्यार्थी शामिल हैं। हमने आभी तक 200 पैकेट हर्बल गुलाल की बिक्री की है। इसमें सबसे पहले विश्वविद्यालय के शिक्षकों एवं कर्मियों को इको फ्रेंडली होली मनाने और हर्बल गुलाल के प्रयोग के प्रति जागरूक करते हुए बेचा गया है। इको-फ्रेंडली गुलाल एकदम चिकना और मुलायम होता है, जिसे रंग के हिसाब से अलग-अलग पैकेट्स में पैक किया गया है।

झारखंड राय विश्वविद्यालय कृषि विभाग की प्रोफेसर डॉ. नेहा ग्रेस एंजेल किस्कू ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा की कृषि स्नातक की पढाई कर रहे विद्यार्थियों को अंतिम वर्ष में एक प्रायोगिक प्रशिक्षण जिसे एक्सपेरिमेंटल लर्निंग प्रोग्राम (ELP) कहा जाता है करना होता है। हर्बल गुलाल बनाना और इसकी बिक्री पूरी तरह एग्री वेस्ट मैनेजमेंट को बढ़ावा देने का ही एक प्रयास है। हर्बल गुलाल बनाने में जो फुल इस्तेमाल किये गए हैं वे सभी मंदिरों में पूजा के दौरान इस्तेमाल किये गए हैं जिन्हें बाद में फेक दिया जाता है। विद्यार्थियों ने पहले चरण में इस प्रकार के फूलों को नामकुम और आस पास के क्षेत्रों के मंदिरों से इक्कठा किया ऑफ़ इसकी अछि तरह सफाई कर इनमें लगी पत्तियों को हटाया गया। फिर इन्हें गर्म पानी में उबाल कर इनसे प्राकृतिक रंग प्राप्त किया गया। फिर इसमें अरारोट और फिटकरी उचित मात्र में मिलायी गयी ताकि गुलाल के रंग फटे नहीं। तैयार होने से पहले इसमें बेहद सिमित मात्रा में सुगंध डाला जाता है। तीन से चार दिनों की मेहनत के बाद हर्बल गुलाल इस्तेमाल के लिए तैयार हो जाता है।

विद्यार्थियों के इस प्रयास पर झारखंड राय विश्वविद्यालय रांची के कुलपति प्रो ० (डॉ ०) पीयूष रंजन ने कहा की विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को साकार करने में विश्वविद्यालय भी अपना योगदान कर रहा है। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य विद्यार्थियों को एग्री वेस्ट मैनेजमेंट के बारे में जानकारी देने के साथ उन्हें स्किल बनाकर बिजनेस और स्टार्टअप के क्षेत्र में मेंटरिंग प्रदान करना है। अगले चरण में विद्यार्थी वर्मी कम्पोस्ट और सुगंधित अगरबत्ती का भी निर्माण करने वाले हैं।

6th Convocation JRU (6)

झारखंड राय यूनिवर्सिटी का छठा दीक्षांत समारोह। 494 को मिली डिग्री,उपाधियां

झारखंड राय विश्वविद्यालय, रांची का छठा दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल सह विश्वविद्यालय के विजिटर संतोष कुमार गंगवार ने आज उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि कि यह उपलब्धि विद्यार्थियों के कठिन परिश्रम, अनुशासन और समर्पण का परिणाम है। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल शैक्षणिक यात्रा का समापन नहीं, बल्कि एक नई जीवन-यात्रा का शुभारंभ है। शिक्षा का उद्देश्य मात्र डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, नैतिक मूल्यों का विकास और समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना को सशक्त करना है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपेक्षा की कि वे अपने ज्ञान एवं कौशल का उपयोग राष्ट्र एवं समाज के कल्याण में करें।

राज्यपाल महोदय ने कहा कि आज हमारा देश नए आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प के साथ प्रगति के पथ पर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास” का मंत्र देश को नई दिशा दे रहा है। ‘विकसित भारत @2047’ के संकल्प को साकार करने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। ‘मेक इन इंडिया’, ‘स्टार्टअप इंडिया’ और ‘डिजिटल इंडिया’ जैसे नवाचार-आधारित अभियानों ने युवाओं को रोजगार खोजने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजक बनने की प्रेरणा दी है।

राज्यपाल महोदय ने कहा कि वर्तमान समय में विश्व तीव्र परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है, जहाँ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल तकनीक, हरित ऊर्जा और नवाचार जैसे क्षेत्र नए अवसर प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित वैश्विक AI सम्मेलन का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत तकनीकी नेतृत्व की दिशा में सशक्त रूप से आगे बढ़ रहा है। ऐसे समय में आपकी बेहतर एवं अनुकूल क्षमता, निरंतर सीखने की प्रवृत्ति और रचनात्मक सोच आपकी सबसे बड़ी शक्ति होगी।

राज्यपाल महोदय ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे केवल पेशेवर सफलता तक सीमित न रहें, बल्कि ईमानदारी, करुणा, समर्पण और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे मूल्यों को अपने जीवन में आत्मसात करें। उन्होंने कहा कि प्रतिष्ठा पद से नहीं, बल्कि कर्म और चरित्र से प्राप्त होती है।

राज्यपाल महोदय ने कहा कि झारखंड केवल प्राकृतिक संसाधनों की भूमि नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, संस्कृति और संभावनाओं की धरती है। यदि राज्य के युवा अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग समाज एवं राज्य के विकास में करेंगे, तो झारखंड देश के अग्रणी राज्यों में स्थान प्राप्त कर सकता है। शिक्षा का वास्तविक मूल्य तभी है जब वह समाज के अंतिम व्यक्ति तक सकारात्मक परिवर्तन पहुँचा सके।

राज्यपाल महोदय ने कहा कि राज्य की उच्च शिक्षा को बेहतर एवं गुणात्मक बनाने हेतु वे निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने इच्छा व्यक्त की कि राज्य के विश्वविद्यालयों की गणना राष्ट्रीय स्तर के उत्कृष्ट विश्वविद्यालयों में हों। निजी विश्वविद्यालयों की भूमिका भी इसमें अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने गुणवत्ता, अनुसंधान, नवाचार और नैतिक मूल्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर बल दिया और कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा उसके विद्यार्थियों की उपलब्धियों और समाज में उनके योगदान से निर्मित होती है।

राज्यपाल महोदय ने विद्यार्थियों से कहा कि हर महान उपलब्धि एक स्वप्न से प्रारंभ होती है। बड़े सपने देखिए, परिश्रम कीजिए और अपने लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्ध रहिए। असफलताओं से घबराइए मत, उनसे सीख लेकर उन्हें सफलता में परिवर्तित कीजिए। आत्मविश्वास, धैर्य और निरंतर प्रयास से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं रहता। जहाँ भी जाएँ, अपने विश्वविद्यालय, अपने परिवार और अपने राज्य का नाम गौरवान्वित करें।

भारत की उस मौलिक ज्ञान परंपरा का अनुसरण करें : अर्जुन मुंडा

राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि झारखंड राय विश्वविद्यालय कई शोध, तकनीकी संस्थानों के साथ शिक्षा को आगे बढ़ा रहे है।उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में जहां आप शोध और ज्ञान के माध्यम से कार्यों को आगे बढ़ा रहे हैं वहीं कई बातें है जिनका उल्लेख किया जाना जरूरी है । उन्होंने कहा कि जिस धरती पर आप है झारखंड वहां अलग अलग स्थानों पर अलग अलग खनिज एवं संपदा मिलते है लेकिन धरती एक ही है।।

झारखंड का नाम इसी लिए पड़ा क्योंकि प्रकृति की विशेषता है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत ने दुनिया के साथ मंच साझा करते हुए AI के माध्यम से एक भौतिक धरातल जो खोज, शोध और ज्ञान को असीम विस्तार देते हुए उसकी संभावनाओं पर कार्य करने का अवसर देता है। प्रधानमंत्री जी चाहते है कि देश और अधिक विकास और शोध क्षेत्र में आगे बढ़े। हमें इन क्षेत्रों में अभी और ठोस कार्य की जरूरत है।

भारत कई क्षेत्रों में उत्पादन की भूमिका में है लेकिन हमें अपने इंडीजीनस तकनीक को याद रखना जरूरी है। साथ ही नई तकनीक का ईजाद कैसे हो इस पर भी ध्यान देने की जरूरत है।

भारत को केवल उत्पादन आधारित नहीं बल्कि शोध आधारित ज्ञान की जरूरत है।

दीक्षांत समारोह में उपस्थित विद्यार्थियों से उन्होंने कहा कि आप केवल जॉब्स को ध्यान में रखकर डिग्री प्राप्त नहीं करें बल्कि भारत की उस मौलिक ज्ञान परम्परा का भी अनुसरण करें।

विद्यार्थी विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी पूंजी , राष्ट्र की धरोहर : डॉo हरबिन अरोड़ा राय।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए झारखंड राय विश्वविद्यालय की पूर्व कुलाधिपति सह G 100, विकी, ऑल, विमेन इकोनॉमिक फोरम और शी इकोनॉमी की संस्थापक डॉo हरबिन अरोड़ा राय ने विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के आयोजन पर कहा दीक्षा हमारी ज्ञान परंपरा का अभिन्न हिस्सा है इस परंपरा के साथ आज आप सभी विद्यार्थियों को भी जुड़ने का मौका मिला है।

आज का समारोह विश्वविद्यालय की उस परंपरा को भी दर्शा रहा है जिसके गवाह आप सभी बन रहे हैं।

उन्होंने कहा कि राष्ट्र और विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी पूंजी आप है ।ऐसा नहीं है कि विश्वविद्यालय से पढ़ाई पूरी होने के बाद आप इससे अलग हो गए है अब आप एलुमनाई के तौर पर अपनी सेवाएं देंगे।

प्रधानमंत्री जी मन की बात, चाय पर चर्चा और परीक्षा पर चर्चा करते हैं हमने आज यहां मानसिक स्वास्थ्य जैसे विषयों पर विश्वविद्यालय के द्वारा किए जा रहे कार्यों के बारे में जाना। यह विषय बेहद संवेदनशील है जिस पर कार्य किया जाना आवश्यक है।

आधी आबादी के लिए शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण: उच्चायुक्त सेशेल्स गणराज्य

सेशेसेल्स गणराज्य की भारत उच्चायुक्त श्रीमती ललतियाना एकौचे ने भारत और सेशेल्स के आपसी संबंधों की चर्चा करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच कई क्षेत्रों में कार्य किया जा रहा है जिनमें शिक्षा महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि महिला शक्ति का उत्थान महत्वपूर्ण है वह अपने देश की पहली महिला उच्चायुक्त है जो दर्शाता है कि आधी आबादी के लिए शिक्षा कितना महत्वपूर्ण हैं।

शिक्षा का उद्देश्य केवल उपार्जन नहीं, चरित्र, ज्ञान एवं नवोन्मेष भी महत्वपूर्ण: कुलपति प्रो ० पीयूष रंजन

दीक्षांत समारोह के प्रारंभ होने पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो o डॉo पीयूष रंजन ने विश्वविद्यालय रिपोर्ट पढ़ते हुए कहा कि विश्वविद्यालय स्थापना काल से चार मार्गदर्शन स्तंभों पर कार्य कर रहा है । विश्वविद्यालय में 21 कार्यक्रम ,8 फैकल्टी और 6 विभाग संचालित हो रहे हैं ।पिछले अकादमिक वर्ष में विद्यार्थियों के नामांकन में 35 प्रतिशत की बढ़ोतरी इस बात को दर्शाती है की गुणवत्ता, ज्ञान, कौशल, नवोन्मेष और ज्ञान परंपरा को लेकर हमारा ध्येय सही दिशा में है।

कुलपति प्रो o पीयूष रंजन ने बताया कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल ज्ञान आधारित समाज का निर्माण करना ही नहीं है बल्कि चरित्र निर्माण और राष्ट्र के लिए उत्तम नागरिक तैयार करना भी है।

झारखंड राय विश्वविद्यालय कक्षा आधारित शिक्षा के साथ व्यावहारिक और स्व ज्ञान प्राप्त शिक्षा पर जोर देता है। विश्वविद्यालय ने पिछले कुछ वर्षों ने अकादमिक और शोध क्षेत्र में कई उपलब्धियां हासिल की हैं जिनमें आईआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ एम ओ यू, शिक्षकों का 30 से अधिक पेटेंट और विद्यार्थियों के स्टार्टअप को मिली स्वीकारता शामिल है।। दीक्षांत समारोह का संचालन विश्वविद्यालय की कुलसचिव डॉo अमृता मजूमदार ने किया।

झारखंड राय विश्वविद्यालय के छठे दीक्षांत समारोह में कुल 494 विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गयी जिसमें 380 छात्र एवं 114 छात्राएँ थी । महामहिम राज्यपाल ने 14 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल और 2 को चांसलर मेडल प्रदान किया । गोल्ड मेडल प्राप्त करने वालों में 6 छात्र एवं 8 छात्राएँ थी। समारोह में स्नातकोत्तर विषय के 107 विद्यार्थी , स्नातक के 315, डिप्लोमा पाठ्यक्रम के 61 एवं पीएचडी उपाधि प्राप्त करने वाले 11 शोध छात्र – छात्राएं भी शामिल हुए ।

6th Convocation of Jharkhand Rai University

6th Convocation Ceremony, Jharkhand Rai University, Ranchi

PRESS RELEASE

Jharkhand Rai University, Ranchi Hosts 6th Convocation Ceremony

Ranchi, Jharkhand – Jharkhand Rai University (JRU) successfully held its 6th Convocation Ceremony on Wednesday, 25th February 2026 at the JUT Auditorium, Namkum, Ranchi. The event marked a proud milestone in the academic journey of graduating students, celebrating their achievements and future aspirations.

All Programs STRIP

The ceremony was graced by the esteemed presence of His Excellency Shri Santosh Kumar Gangwar, Hon’ble Governor of Jharkhand and Visitor of Jharkhand Rai University, who presided as the Chief Guest.

6th Convocation JRU Ranchi

The convocation was attended by international dignitaries, adding a global dimension to the celebration. The event also witnessed the presence of corporate leaders, academicians, enthusiastic well‑wishers, students, media representatives, and members of the wider community, making it a truly memorable and inclusive occasion.

Addressing the convocation ceremony, the Governor said, “The responsibility lies upon our students to channel their knowledge toward nation‑building. You must strive to become job creators, not merely job seekers. Today, the youth of Bharat has innumerable opportunities before them. With your skills, innovation, and positive thinking, you will make Bharat truly Aatma Nirbhar.”

 6th Convocation of Jharkhand Rai University

Prof. (Dr.) Savita Sengar, Chancellor, Jharkhand Rai University, in her Welcome Address conveyed that for graduates their skills are not just tools for personal success but instruments of social transformation. Giving back to society is the highest expression of education.

Similarly, other distinguished speakers shared their thoughts while wishing students for a successful career ahead.

H.E. Mrs. Lalatiana Accouche, High Commissioner to India, Republic of Seychelles congratulated the university, its students, faculty, and parents for their achievements and excellent results.

She encouraged students to remain true to the values they have imbibed at Jharkhand Rai University. She emphasized that education must uplift not only individuals but also communities they touch. True success, she said, is measured by the positive impression you leave on others.

Shri Arjun Munda Ji, former Cabinet Minister, Government of India and Former Chief Minister of Jharkhand reflected, “The university is one, yet its students — each with unique skills — will illuminate diverse industries with responsibility and vision. The knowledge you gain here carries the expectation that you will guide the future of this nation”.

He stressed the need for innovation and the indigenous development of technologies, reminding us that true progress lies in creating solutions rooted in our own strengths.

Dr. Harbeen Arora Rai, former Chancellor, Jharkhand Rai University; Founder – G100, ALL, WEF, WICCI, SHEconomy remarked, “Just like your parents act as your safety net, we are also here to support you. Count on us as your safety net. Anytime you are seeking help or seeking support you are always welcome to your home that is JRU.”

Prof. (Dr.) Piyush Ranjan, Vice Chancellor, Jharkhand Rai University, expressed gratitude to all dignitaries, faculty, students, and guests, underscoring the university’s commitment to nurturing talent and contributing to nation‑building.

He added, “In a rapidly changing academic and professional landscape, Jharkhand Rai University is advancing towards Outcome‑Based Education (OBE) to ensure students are equipped for the challenges of tomorrow.”

The convocation concluded with the conferring of degrees and honours upon graduating students, marking the beginning of their new journey as professionals and leaders.

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For Media Queries:

Jharkhand Rai University

Raja Ulatu, Namkum, Ranchi, Jharkhand

[Mr Kiran, Media Manager, Mob- 7338332503]

International conference on innovative convergence of sustainable future

झारखंड राय विश्वविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन काआयोजन

झारखंड राय विश्वविद्यालय, रांची में शुक्रवार से दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन ” इनोवेटिव कन्वर्जेन्स फॉर सस्टेनेबल फ्यूचर” का प्रारंभ हुआ।

अंतराष्ट्रीय सम्मलेन का विधिवत उद्घाटन दीप प्रज्वलित कर किया गया। इसके उपरांत स्मारिका का विमोचन किया गया जिसे सम्मानित अतिथि सरला बिरला विश्वविद्यालय के कुलपति (प्रो०) जेगनाथन चोकलिंगम, मुख्य अतिथि निदेशक (वित्त) झारखंड उर्जा संचार निगम लिमिटेड श्री अमित बैनर्जी एवं विशिष्ट अतिथि (डॉ०) रमेश चन्द्र मीणा, अतिरिक्त निदेशक सॉफ्टवेर टेक्नोलोजी पार्क ऑफ़ इंडिया,रांची एवं झारखंड राय विश्वविद्यालय, रांची के कुलपति (प्रो०) पीयूष रंजन ने किया

स्वागत भाषण करते हुए झारखंड राय विश्वविद्यालय, रांची के कुलपति प्रो ० पीयूष रंजन ने विषय पर प्रकाश डालते हुई कहा की अंतराष्ट्रीय सम्मलेन का यह विषय हमारे वर्तमान के सामने की चुनौतियों को दर्शाता है आज चुनौतियाँ बड़ी है। आज की वैश्विक चुनौतियाँ हैं जलवायु परिवर्तन , संसाधन का आभाव, सामाजिक असमानताएं एवं तकनीकी भटकाव। इन चुनौतियों का समाधान विचारों का समावेश, अनुशासनों का अभिसरण, सांस्कृतिक जुड़ाव एवं मूल्य प्रणाली से जुड़े सिद्धांतों में छुपा हुआ है। इसके लिए सहयोगात्मक प्रयास सर्वाधिक महत्वपूर्ण है।

कुलपति प्रो० पीयूष रंजन ने भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े सिद्धांत “वसुधैव कुटुम्बकम् एवं “सर्वे भवन्तु सुखिनः” की चर्चा करते हुए कहा की इन पंक्तियों में संपूर्ण रूप से पुरे प्रकृति को समझने का ज्ञान समाया हुआ है। यह हमें स्मरण दिलाता है की सतत विकास केवल एक मॉडल या केवल एक विचार नहीं बल्कि यह हमारी सभ्यता में गहराई से समाया हुआ लोकाचार है।

विशिष्ट अतिथि सरला बिरला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो ० जेगनाथन चोकलिंगम ने सस्टेनेबल एवं कन्वर्जेन्स को सिक्के का एक पहलू बताते हुए कहा की झारखंड राज्य शब्द में ही सस्टेनेबिलिटी छिपा हुआ है। झारखंड शब्द में जल , जंगल, जमीन , जानवर और जन समाहित है। ये 5 J मिलकर झारखंड को परिभाषित करते हैं उसी प्रकार सतत विकास के लिए सेवा, संकल्प, समर्पण, संस्कृति, समाज एवं सन्यास की आवश्यकता है। सन्यास से सनातन का बनेगा जिसका अर्थ है देना अथवा त्याग ।

कुलपति प्रो ० जे ० चोकलिंगम ने वर्तमान चुनौतियों की चर्चा करते हुए कहा की संसाधन के सामने जनसंख्या एक बड़ी चुनौतियाँ हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा पलायन या प्रवास की जगह अपने निवास स्थान को बेहतर बनाने का प्रयास वर्तमान समय की मांग है। तकनीक एवं विज्ञान की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा की भविष्य की चुनौतियों से ज्यादा वर्तमान में हमारे सामने जो समस्यायें खड़ी है उनकी चिंता और समाधान पर ध्यान देने की आवश्यता अधिक है।

स्वामी विवेकानंद के सपनों का भारत पर बोलते हुए उन्होंने कहा की स्वामी जी के सपनों का भारत आध्यात्मिकता एवं वैज्ञानिकता के भाव से भरा हुआ था। उन्होंने पश्चिम की ओर देखने की जगह पर पश्चिम को भारत का अनुसरण करने का मंत्र दिया।

उद्घाटन सत्र को मुख्य अतिथि निदेशक (वित्त) झारखंड उर्जा संचार निगम लिमिटेड श्री अमित बैनर्जी एवं विशिष्ट अतिथि डॉ ० रमेश चन्द्र मीणा ,अतिरिक्त निदेशक सॉफ्टवेर टेक्नोलोजी पार्क ऑफ़ इंडिया रांची ने भी संबोधित किया।

उद्घाटन सत्र का धनयवाद ज्ञापन डीन मैनेजमेंट डॉ ० हरमीत कौर ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा की अन्तराष्ट्रीय सम्मलेन में दो दिनों तक कई विशेषज्ञों के द्वारा अपने शोध पत्र पढ़े जायेंगे।

IRON MAKING TECHNOLOGY

झारखंड राय विश्वविद्यालय में प्राचीन लौह निर्माण भट्टी का उद्घाटन

झारखंड राय विश्वविद्यालय रांची के परिसर में बीते गुरुवार को प्राचीन लौह निर्माण भट्टी का उद्घाटन किया गया। जिसका उद्घाटन शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अतुल कोठारी, प्रो. (डॉ.) गौतम सूत्रधार, निदेशक, एनआईटी जमशेदपुर ने किया। झारखंड राय विश्वविद्यालय रांची में आयोजित चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व का समग्र विकास विषय पर विद्यार्थी प्रतिनिधि केंद्रित तीन दिवसीय कार्यशाला में शामिल होने रांची पहुंचे थे। झारखंड राय विश्वविद्यालय में धातु विज्ञान और धातु कर्म के क्षेत्र में भारतीय ज्ञान परंपरा की विशिष्ठ पहचान दर्शाती प्राचीन लौह निर्माण भट्टी (ब्लूमरी फर्नेस ) का निर्माण किया गया है। यह एक प्रकार की धातु कर्म भट्टी है जिसका उपयोग प्राचीन समय में लोहे के ऑक्साइडों को गलाने के लिए व्यापक रूप से किया जाता था। यह तकनीक भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ी है जिसकी सहायता से ढलुआ लोहा बनाया जाता था।इस अवसर पर डॉ. अतुल कोठारी ने भट्टी की निर्माण प्रक्रिया, इसके पारंपरिक और वैज्ञानिक पक्षों तथा भारतीय धातु-विज्ञान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को समझाया ।

एनआईटी जमशेदपुर के प्रो. (डॉ.) गौतम सूत्रधार, झारखंड राय विश्वविद्यालय की कुलाधिपति प्रो. (डॉ.) सविता सेंगर तथा कुलपति प्रो. (डॉ.) पीयूष रंजन भी इस महत्वपूर्ण क्षण में उपस्थित रहे। अतिथियों ने इसे अनुभव–आधारित शिक्षण का सशक्त उदाहरण बताते हुए कहा कि ऐसे प्रयास विद्यार्थियों में अनुसंधान, स्वदेशी तकनीकों की समझ और नवाचार के प्रति रुचि विकसित करते हैं। झारखंड राय विश्वविद्यालय रांची में चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व का समग्र विकास विषय पर तीन दिनों के कार्यशाला का आयोजन किया गया था।

जिसमें पंचकोश अवधारणा (अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय और आनंदमय कोश ) आधारित भारतीय ज्ञान परंपरा के माध्यम से विद्यार्थियों और शिक्षकों के समग्र व्यक्तित्व विकास को समझना और उसे जीवन में व्यावहारिक रूप से लागू करना था।

Workshop on Character building through Panchakosha theory (10)

चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व का समग्र विकास विषय पर तीन दिवसीय कार्यशाला संपन्न

झारखंड राय विश्वविद्यालय, रांची में 20 से 22 नवंबर 2025 तक चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व का समग्र विकास विषय पर विद्यार्थी प्रतिनिधि केंद्रित तीन दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा के माध्यम से विद्यार्थियों और शिक्षकों के समग्र व्यक्तित्व विकास को समझना और उसे जीवन में व्यावहारिक रूप से लागू करना था। इस दौरान पंचकोश अवधारणा (अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय और आनंदमय कोश ) पर आधारित शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक विकास विकास पर जोर रहा।

उद्घाटन सत्र :

उद्घाटन सत्र में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अतुल कोठारी, प्रो. (डॉ.) गौतम सूत्रधार, निदेशक, एनआईटी जमशेदपुर कुलाधिपति प्रो. (डॉ.) सविता सेंगर झारखंड राय विश्वविद्यालय, रांची और कुलपति प्रो. (डॉ.) पीयूष रंजन की गरिमामयी उपस्थिति रही। सत्र के मुख्य वक्ता डॉ. कोठारी ने कार्यक्रम की शुरुआत ॐ तथा “तमसो मा ज्योतिर्गमय” मंत्र के सामूहिक उच्चारण से करवाई और विद्यार्थियों से अनुभव साझा करने को कहा। उन्होंने बताया कि यदि किसी कक्षा की शुरुआत ॐ से हो, तो वातावरण शांत रहता है, मन स्थिर होता है और एकाग्रता स्वाभाविक रूप से बढ़ती है। उन्होंने विद्यार्थियों से यह भी पूछा कि कौन–कौन सुबह अपने इष्ट देवता का स्मरण करके आता है, और सुझाव दिया कि उसी समय ॐ का उच्चारण मानसिक संतुलन के लिए अत्यंत लाभकारी है।

चरित्र निर्माण पर बोलते हुए उन्होंने स्वामी विवेकानंद के विचार “Good habit is value” का उल्लेख किया और कहा कि बच्चे वही सीखते हैं जो वे बड़ों को करते हुए देखते हैं। एक चोर की कहानी के माध्यम से उन्होंने समझाया कि छोटी गलतियों पर समय रहते रोक लगाने से बड़े अपराध टल सकते हैं, इसलिए प्रारंभिक जीवन में सही दिशा देना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि घरेलू कार्य—जैसे झाड़ू–पोंछा या अपने कार्य स्वयं करना—व्यायाम का ही रूप हैं और आत्मनिर्भरता बढ़ाते हैं। जापान का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहाँ लोग अपना काम स्वयं करते हैं और यही आदतें राष्ट्रीय चरित्र का आधार बनती हैं।

पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता की जिम्मेदारी और प्राणायाम के महत्व को उन्होंने विशेष रूप से रेखांकित किया।

डॉ. कोठारी ने छात्र-प्रतिनिधियों से अपेक्षा की कि वे कार्यशाला से प्राप्त सीख को अपने साथियों तक पहुँचाएँ और भारतीय ज्ञान परंपरा के मूल्यों को व्यवहार में उतारने में अग्रणी भूमिका निभाएँ। सत्र के अंत में विश्वविद्यालय की अर्धवार्षिक पत्रिका ‘संवित्’ का लोकार्पण किया गया।

पत्रिका लोकार्पण के उपरांत विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति में लोह-निर्माण भट्टी का उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर डॉ. अतुल कोठारी ने भट्टी की निर्माण प्रक्रिया, इसके पारंपरिक और वैज्ञानिक पक्षों तथा भारतीय धातु-विज्ञान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को समझा। एनआईटी जमशेदपुर के प्रो. (डॉ.) गौतम सूत्रधार, झारखंड राय विश्वविद्यालय की कुलाधिपति प्रो. (डॉ.) सविता सेंगर तथा कुलपति प्रो. (डॉ.) पीयूष रंजन भी इस महत्वपूर्ण क्षण में उपस्थित रहे। अतिथियों ने इसे अनुभव–आधारित शिक्षण का सशक्त उदाहरण बताते हुए कहा कि ऐसे प्रयास विद्यार्थियों में अनुसंधान, स्वदेशी तकनीकों की समझ और नवाचार के प्रति रुचि विकसित करते हैं।

पंचकोश आधारित सत्र :

कार्यशाला के पहले दिन अन्नमय एवं प्राणमय कोश से जुड़े सत्र में भोजन और स्वास्थ्य के वैज्ञानिक संबंध, श्वास–प्रश्वास तथा ऊर्जा–संतुलन, और भावनात्मक स्थिरता जैसे विषयों पर चर्चा की गई। अन्नमय कोश सत्र में चर्चा के दौरान डॉ ० डी ० एन ० सिंह प्रांत प्रमुख विद्वत परिषद् , विद्या भारती झारखंड ने अन्न की महत्ता एवं जीवन में अन्न की उपयोगिता एवं महत्त्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा की अन्न केवल भोजन नहीं बल्कि शारीरिक एवं मानसिक विकास का भी प्रमुख कारक तत्व है। इसी सत्र के छात्र गतिविधि सत्र का संचालन प्रो ० रश्मि ने किया जिन्होंने कार्यशाला में उपस्तिथ विद्यार्थियों के साथ अन्न मय कोश से जुड़ी विभिन्न गतिविधियां करवायी। कार्यशाला का दूसरा सत्र प्राणमयकोश का रहा जिसमें प्रतिभागियों को प्राण , प्राणायाम और श्वास तंत्र के बारे में जानकारी प्रदान की गयी। विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए डॉ ० प्रशांत जयवर्धन ने प्राण एवं प्राणमय कोश के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी दी। उन्होंने पंच कोश में प्राणमय कोश के महत्त्व एवं अन्य कोश की साथ उसके संबंधों पर प्रकाश डाला। प्राणमय कोश विद्यार्थी गतिविधि सत्र का संचालन शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के प्रांत संयोजक महेंद्र कुमार सिंह ने किया। उन्होंने अपना अनुभव साझा करते हुए प्राणमय कोश विकास के लिए विद्यार्धियों से प्राणायाम, मुद्रा और बंध का अभ्यास करवाया।

कार्यशाला के दूसरे दिन मनोमय कोश एवं विज्ञानमय कोश पर आधारित विचार एवं गतिविधियाँ साझा की गयी। मनोमय कोश विकास पर डॉ ० ललिता राणा , प्राध्यापक आनंदा कॉलेज ( प्रांत संयोजक चरित्र निर्माण ) एवं प्रो ० राजन तिवारी ने विचार प्रस्तुत किया एवं मनोमय कोश से जुड़ी गतिविधियाँ आयोजित की।

विज्ञानमय कोश सत्र में कुलाधिपति प्रो. (डॉ.) सविता सेंगर और डॉ. के.पी. दत्ता ने संबोधित करते हुए बताया कि विज्ञानमय कोश बुद्धि, विवेक और निर्णय क्षमता का स्तर है। उन्होंने कहा कि जब व्यक्तित्व परिपक्व नहीं होता, तो निर्णय मूल्यों के बजाय स्वार्थ से प्रभावित होते हैं, जिससे समाज में विश्वास की कमी पैदा होती है। विज्ञानमय कोश का विकास व्यक्ति में तटस्थता, पारदर्शिता और स्पष्ट निर्णय क्षमता को मजबूत करता है।

कुलाधिपति महोदया का विचार–प्रवर्तक व्याख्यान :

कुलाधिपति महोदया ने कहा कि पंचकोश केवल शरीर की परतों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्तित्व के सूक्ष्म आयामों को समझने का माध्यम है। उन्होंने समझाया कि विज्ञानमय कोश वह स्तर है जहाँ बुद्धि, विवेक और निर्णय क्षमता विकसित होती है। अनेक बार लोग बिना परिणामों पर विचार किए आदत या भावनाओं के प्रभाव में निर्णय ले लेते हैं।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि व्यवहारिक जीवन में लोग डॉक्टरों और वकीलों पर इसलिए भरोसा नहीं कर पाते क्योंकि कभी–कभी डॉक्टर दवा कंपनियों के दबाव में दवाइयाँ लिख देते हैं और वकील आर्थिक लाभ के लिए सच को मोड़ देते हैं। यह समस्या पेशों की नहीं, बल्कि व्यक्तित्व–विकास की कमी का परिणाम है। उन्होंने कहा कि विश्वास वहीं बनता है जहाँ पारदर्शिता और ईमानदारी हो। विज्ञानमय कोश का विकास व्यक्ति को न अंध–विश्वास में जीने देता है और न संदेह में; बल्कि तथ्य, विवेक और तटस्थ दृष्टि से निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करता है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि गलतियाँ होना समस्या नहीं, लेकिन वही गलती दोबारा न दोहराना ही वास्तविक सीख है। जीवन में अपना मार्ग स्वयं चुनना चाहिए और दूसरों से तुलना के बजाय आत्म–विकास पर ध्यान देना चाहिए।

दूसरे दिन का अंतिम सत्र आनंद मय कोश का रहा जिसमें जीवन में आनंद एवं पंच कोश में आनंद विषय पर डॉ ० अमरकांत झा , क्षेत्रीय संयोजक चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व का समग्र विकास शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास एवं प्रो ० ओम प्रकाश सत्यम ने व्याख्यान एवं गतिविधि आयोजित किया।

इसमें बताया गया कि आनंद बाहरी परिस्थितियों पर नहीं, बल्कि आंतरिक स्थिरता और मूल्य–आधारित जीवन पर निर्भर करता है। समूह चर्चा और अनुभव–विनिमय के आधार पर आगे की कार्ययोजना तैयार की गई, जिसमें प्रतिभागियों ने अपने-अपने संस्थानों में चरित्र–निर्माण और भारतीय ज्ञान परंपरा आधारित गतिविधियों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

कार्यशाला का तीसरा एवं समापन दिवस का पहला सत्र गट सह चर्चा एवं आगामी कार्य योजना आधारित रखा गया था जिसमें सभी पांच कोश के विद्यार्थी एवं कोश प्रभारियों ने अपने अपने विचार कथन रखे। इस दौरान कोश विकास से जुड़ी आगामी कार्य योजना भी प्रस्तुत की गयी। कार्यशाला का समापन सत्र अनुभव कथन एवं समहू चर्चा पर केंद्रित रखा गया था। समापन सत्र को डॉ. विजय सिंह, डीन ( योजना एवं विकास ) सह क्षेत्र संयोजक शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास , डॉ. अमृता मजूमदार, कुल सचिव झारखंड राय विश्वविद्यालय , डॉ ० हरमीत कौर डीन ( मैनेजमेंट ) डॉ. सुमित पांडेय , डीन अकादमिक नेतृत्व ने सम्बोधित किया। इस दौरान तीन दिनों तक पंचकोश चर्चा एवं गतिविधियों में प्रतिभागियों की सक्रिय सहभागिता की सबने सराहना की। इस दौरान सभी ने कहा की तीन दिनों तक चले इस संवाद और प्रशिक्षण ने न केवल ज्ञान का विस्तार किया, बल्कि जीवन–दृष्टि को भी नई दिशा प्रदान की। कार्यशाला ने यह संदेश स्थापित किया कि शिक्षा का लक्ष्य केवल पेशेवर उत्कृष्टता नहीं, बल्कि संवेदनशील, सजग और मूल्यनिष्ठ समाज का निर्माण है।

तीन दिनों तक आयोजित कार्यशाला का सफल संचालन प्रो ० अनुराधा शर्मा , प्रो ० रागिनी कुमारी , डॉ ० कुमार अमरेंद्र ( कौटिल्य ज्ञान केंद्र ) एवं प्रो ० विक्रांत रवि ने किया।

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पंचकोश के अनुरूप एनईपी का लक्ष्य विद्यार्थियों का चतुर्दिक विकास करना है: डॉo सलूजा

झारखंड राय विश्वविद्यालय रांची में पिछले दो दिनों से चल रहे राष्ट्रीय कार्यशाला ” चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व का सम्पूर्ण विकास ” का सोमवार को समापन हो गया। तीन दिनों के दौरान कुल बारह सत्र आयोजित हुए। पूर्व के दो दिन में पंचकोश के पांच कोशों अन्नमय कोश, प्राणमय कोश, मनोमय कोश, विज्ञानमय कोश और आनंदमय कोश पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गयी। अभ्यास सत्र आयोजित हुए जिसमें समूह चर्चा, विचार और कार्य के तरीकों पर प्रतिभागियों ने रोड मैप तैयार किया। पर्यावरण एवं स्वक्षता को लेकर विशेष संभाषण हुआ। तीसरे और कार्यशाला के अंतिम दिन नौवें सत्र का विषय “पढ़ाने की कला ” पर डॉ ० चाँद किरण सलूजा (अकादमिक निदेशक संस्कृत संवर्धन प्रतिष्ठानम नयी दिल्ली ) ने विस्तार पूर्वक अपनी बातें रखी। डॉ ० सलूजा ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति में निर्दिष्ट बातों की चर्चा करते हुए कहा की इस निति का उद्देश्य शिक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार करना है जिसमें उच्च शिक्षा में सुधार सुधार भी शामिल है। उन्होंने बताया की ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था की आवश्यकताओं की पूर्ति करने , शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने, नवाचार और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिये नई शिक्षा नीति की आवश्यकता थी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में शिक्षा की पहुँच, समता, गुणवत्ता, वहनीयता और उत्तरदायित्व जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया गया है।

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मूल विषय पढ़ाने की कला की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा की पढ़ाने की कला के साथ पढने की कला भी आवश्यक है। विद्यार्थी के साथ शिक्षक को भी यह ज्ञान होना आवश्यक है। उन्होंने कहा की कुशल शिक्षक को विद्यार्थी के मनोमय एवं आनंदमय का भी ध्यान रखना चाहिए। व्यक्तित्व निर्माण की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा की शिक्षक संवाद, संचार, बौद्धिक संवाद एवं करुणा भाव के साथ कार्य करते हुए इसमें भी योगदान कर सकता है।

कार्यशाला में उपस्थित विभिन्न कॉलेजों एवं विश्वविद्यालयों से आए प्रतिभागी शिक्षकों के साथ समूह चर्चा के दौरान कुलाधिपति प्रो० सविता सेंगर ने पंच कोश अवधारणा एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति से जुड़े प्रश्नों पर राय देते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति का प्रमुख लक्ष्य चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व का संपूर्ण विकास है।

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राष्ट्रीय कार्यशाला के समापन अवसर पर न्यास के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष सुरेश गुप्ता जी का संबोधन हुआ। इस अवसर पर न्यास के राष्ट्रीय सह संयोजक डॉ० राजेश्वर परासर भी उपस्थित थे। झारखंड राय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो० (डॉ०) पीयूष रंजन ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा की तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला को सफल बनाने में न्यास के राष्ट्रीय सचिव डॉ ० अतुल भाई कोठारी की मुख्य भूमिका रही उनके मार्गदर्शन में ही इसकी रूप रेखा तय की गयी। मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित कुलाधिपति डॉ ० अजय कुमार तिवारी , डॉ ० मनोहर भंडारी, डॉ० चाँद किरण सलूजा एवं डॉ० राजीश्वर पराशर ने पंच कोश और चरित्र निर्माण पर विस्तारपूर्वक अपनी बातें रखी जो प्रतिभागियों के लिए संग्रहनीय है। उन्होंने राष्ट्रीय कार्यशाला में अन्य प्रदेशों से पहुंचे प्रतिभागियों एवं राज्य के अन्य जिलों से आये प्रतिभागी शिक्षकों का भी धन्यवाद किया।

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झारखंड राय विश्वविद्यालय में चरित्र निर्माण पर तीन दिवसीय कार्यशाला प्रारंभ

झारखंड राय विश्वविद्यालय रांची में शनिवार से तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला ” चरित्र निर्माण एवं चरित्र का सम्पूर्ण विकास ” प्रारंभ हुआ। कार्यशाला का विधिवत उद्घाटन दीप प्रज्जवलित कर गणेश वंदना के साथ किया गया। दीप प्रज्जवलन शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव डॉ ० अतुल भाई कोठारी, झारखंड राय विश्वविद्यालय की कुलाधिपति प्रो ० ( डॉ ०) सविता सेंगर, स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय, सागर के कुलाधिपति डॉ० अजय कुमार तिवारी, प्रो ० (डॉ ०) पीयूष रंजन कुलपति झारखंड राय विश्वविद्यालय, डॉ० मनोहर भंडारी, प्रो ० (डॉ ०) विजय कुमार सिंह डीन सरला बिरला विश्वविद्यालय, अमर कांत झा क्षेत्रीय संयोजक न्यास ने सामूहिक रूप से किया।

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कार्उयशाला के उद्घाटन सत्र का स्वागत भाषण करते कुलाधिपति प्रो ० (डॉ ०) सविता सेंगर ने कहा की चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व का सम्पूर्ण विकास विषय पर आयोजित यह कार्यशाला भारतीय ज्ञान परंपरा एवं भारतीय दृष्टिकोण को समझने का प्रयास है। विश्वविद्यालय ने अप्रैल महीने में परिसर में कौटिल्य ज्ञान केंद्र भी स्थापित किया है। यह केंद्र भारतीय ज्ञान परंपरा और भारतीय दृष्टिकोण को व्यक्त करने का केंद्र है। कार्यशाला के आयोजन के उद्देश्यों की चर्चा करते हुए कुलाधिपति ने कहा की व्यक्तित्व का अर्थ बहरी सुंदरता नहीं है जब हम भारतीय ज्ञान परंपरा और पंच कोश की बात करते हैं तो भारतीय दृष्टिकोण को उसमें शामिल करना होगा। न्यास के इस विषय पर बनाये गए पाठ्यक्रम को भी विश्वविद्यालय ने अपनाया है। चरित्र निर्माण एवं चरित्र का सम्पूर्ण विकास पाठ्यक्रम प्रारंभ करने का उद्देश्य है विद्यार्थियों में समाज एवं राष्ट्र के प्रति सकारात्मक सोच का भाव पैदा करना । यह भाव विद्यार्थियों के व्यक्तित्व में नजर आना चाहिए की वह समाज, राष्ट्र, स्वयं के लिए कितना सोचते है। कुलाधिपति प्रो ० सेंगर ने कहा कार्यशाला में अगले दो दिनों तक इसी विषय पर चर्चा होगी।

Character building and overall personality development (9)

कार्यशाला के मुख्य वक्ता शिक्षाविद एवं न्यास के राष्ट्रीय सचिव डॉ० अतुल भाई कोठारी ने अपना संबोधन पंचकोश की अवधारणा के साथ प्रारम्भ किया। उन्होंने विस्तार पूर्वक अन्नमय कोश, प्राणमय कोश, मनोमया कोश, विज्ञानमय कोश एवं आनंदमय कोश की चर्चा की।

उन्होंने कहा की पंचकोश, भारतीय दर्शन में मानव शरीर की पांच परतों या आवरणों को दर्शाता है,ये कोश शारीरिक, मानसिक, और आध्यात्मिक स्तरों पर मानव अस्तित्व को समझने में मदद करते हैं। पंचकोशों के अंदर ही हमारी तीनों प्रकार की चेतना यानि चेतन, अवचेतन और अचेतन विचरण करती है। ये पांच कोश एक-दूसरे से बहुत ही गहरे रूप में जुड़ी हुई हैं और अध्यात्म में जब लोग जैसे-जैसे गहराई में उतरते हैं, वह एक-एक करके सभी कोशों के प्रति जागरूक होते जाते हैं।पंचकोशों की अवधारणा मानव अस्तित्व को समझने और आत्म-साक्षात्कार की ओर बढ़ने के लिए एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक है। डॉ० कोठारी ने अपने संबोधन के दौरान मंत्र , योग विद्या एवं आचरण और व्यवहार पर भी विस्तार पूर्वक बातें रखी।

कार्यशाला का दूसरा एवं तीसरा सत्र अन्नमय कोश एवं प्राणमय कोश विषय पर केन्द्रित था जिसके मुख्य वक्ता डॉ० मनोहर भंडारी थे। डॉ० भंडारी चिकित्सक के साथ हिंदी भाषा उत्थान के लिए भी कई महत्वपूर्ण कार्य किये हैं। उन्होंने अन्नमय कोश एवं प्राणमय कोश पर विस्तार से अपनी बातें रखते हुए बताया की शरीर, भोजन (अन्न) से पोषित होता है। यह कोश मानव शरीर का भौतिक रूप है जो भोजन से पोषित होता है और अन्य कोशों के साथ मिलकर मानव अस्तित्व का निर्माण करता है। चिकित्सा पद्धतियों की पहुच स्थूल शरीर तक है जबकी कितने ही रोग ऐसे हैं जो अन्नमय कोश की विकृति के कारण उत्पन्न होते हैं और जिसे चिकित्सक ठीक करने मे प्रायः असमर्थ हो जाते हैं प्राणमय कोश की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा की प्राणमय कोश, शरीर का दूसरा आवरण या परत है, जो ऊर्जा से संबंधित है। इसे जीवन शक्ति से बना हुआ माना जाता है, और यह भौतिक शरीर में मौजूद होता है, जो पूरे जीव में व्याप्त है।

उन्होंने अपने लम्बे चिकित्सीय अनुभव के साथ पंच कोश को जोड़ते हुए विस्तार पूर्वक कई बातें बताई। कार्यशाला के प्रथम दिन के चौथे सत्र को स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय , सागर के कुलाधिपति डॉ० अजय कुमार तिवारी ने संबोधित किया। उन्होंने मनो मया कोश पर अपनी बातें रखी इस दौरान उन्होंने मनो मया कोश में मन की अवधारणा पर भारतीय दर्शन और चिंतकों के विचारों से अवगत कराने का कार्य किया।

Facilitated ceremony for 12th students

झारखंड राय विश्वविद्यालय रांची में सम्मान समारोह का आयोजन

झारखंड राय विश्वविद्यालय, रांची में गुरुवार को 12 वीं में बेहतर प्रदर्शन करने वाले छात्र छात्राओं को सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह में संत जॉन इंटर कॉलेज के 94 विद्यार्थियों को मेडल एवं प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। समारोह का विधिवत उद्घाटन दीप प्रज्वलित कर किया गया।

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कार्यक्रम का स्वागत भाषण करते हुए झारखंड राय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो० (डॉ०) पीयूष रंजन ने 12 वीं की परीक्षा में बेहतर अंक लाने वाले विद्यार्थियों के उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए कहा की प्रतिभा सम्मान का यह कार्यक्रम आपके मेहनत , लगन और परिश्रम का परिणाम है। अपने 12 वीं की परीक्षा में जो अंक प्राप्त किया है वह सिर्फ एक आस्पेक्ट है। तीन घंटे की परीक्षा में आपके ज्ञान और कौशल का मूल्यांकन संभव नहीं है। मार्क्स के साथ जीवन में और भी बहुत सारी आवश्यक चीजें शामिल है। झारखंड राय विश्वविद्यालय में हम गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ साथ व्यक्तित्व के सम्पूर्ण विकास पर जोर देते हैं। चरित्र निर्माण एवं देश के जिम्मेदार नागरिक बनाने पर हमारा जोर रहता है।

कुलपति प्रो ० पीयूष रंजन ने विद्यार्थियों से कहा की अब तक अपने जीवन में जो भी सफलता प्राप्त की है वह सामूहिक प्रयास का नतीजा है इस सफलता में आपके माता -पिता एवं शिक्षकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है जो हमेशा आपके पीछे खड़े रहते हैं आपको सही मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। 12 वीं की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद अब आप सब की विद्यालय शिक्षा का अंत हो रहा है और अब आपको नयी यात्रा के लिए खुद को तैयार करना है। आप उच्च शिक्षा के लिए किसी भी संकाय का चुनाव करें हरेक विषय में अवसर है। किस विषय का चुनाव करना है यह आपकी रुचि पर निर्भर करता है।उन्होंने कहा की मैं विद्यार्थियों से हमेशा कहता हूँ की ऑलवेज ड्रीम बिग लेकिन सपना नींद में नहीं बल्कि सपना ऐसा हो जो हमें सोने न दे। आने वाले समय में आप जो भी करना चाहते हैं उसके लिए लगन , मेहनत और दृढ़ इक्षा तो जरुरी है ही लेकिन जरुरी या भी है की अच्छा इंसान बने।

झारखंड राय विश्वविद्यालय की डीन (कॉमर्स एवं मैनेजमेंट संकाय ) प्रो ० (डॉ०) हरमीत कौर ने अपने सम्बोधन के दौरान कहा की 12 वीं के बाद विद्यार्थियों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह होता है की इसके बाद अब क्या करें ? उन्होंने वाणिज्य विषय में कैरियर बनाने की इक्षा रखने वाले छात्र छात्राओं को इसके बारे में विस्तार पूर्वक बतलाया। उन्होंने कहा की आज के दौर में कॉमर्स का मतलब केवल अकॉउंटेन्सी की पढ़ाई नहीं रह गयी है। आज इसका दायरा बहुत बढ़ चूका है। उन्होंने विद्यार्थियों को ट्रेडीसनल कॉमर्स की जगह मॉडर्न सिलेबस के साथ बीकॉम की पढ़ाई करने की सलाह दी।

झारखंड राय विश्वविद्यालय के डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर प्रो० सब्यसाची चक्रवर्ती ने समारोह में उपस्तिथ विद्यार्थियों के साथ अनुभव साझा करते हुए कहा की झारखंड में अब उच्च शिक्षा की पढाई का दायरा बढ़ा है। विद्यार्थियों को पहले कई चुनिंदा कोर्स की पढाई करने के लिए रांची से बाहर जाना पड़ता था लेकिन पिछले कुछ वर्षों में बदलाव दिख रहा है। प्रो ० चक्रवर्ती ने उन्हें माईनिंग इंजीनियरिंग, होटल मैनेजमेंट और फार्मसी जैसे कोर्स के भविष्य के अवसरों से अवगत करते हुए कहा की आने वाले समय में इनमें जॉब के अवसर पैदा होंगे।

कार्यक्रम में उपस्थित संत जॉन इंटर कॉलेज के शिक्षक मो ० तहसीन आलम ने इस प्रकार के आयोजन पर विश्वविद्यालय का धन्यवाद जताते हुए कहा की सम्मान समारोह विद्यार्थियों में उत्साह और प्रेरणा जगाने का कार्य करता है। इस प्रकार के आयोजन के जरिये बच्चों के अंदर कुछ बेहतर करने की भावना जन्म लेती है। कार्यक्रम में झारखंड राय विश्वविद्यालय के डीन प्रो ० डॉ ० सुमित कुमार पांडेय भी उपस्थित थे।

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झारखंड राय विश्वविद्यालय में फेयरवेल पार्टी एडीआईइयू 2025 आयोजित

झारखंड राय विश्वविद्यालय रांची में शुक्रवार शाम फेयरवेल पार्टी एडीआईइयू 2025 का आयोजन किया गया। पास आउट विद्यार्थियों के लिए आयोजित इस रंगारंग शाम का आयोजन कल्चरल क्लब ने किया । फेयरवेल पार्टी का उद्घाटन पारंपरिक तरीके से दीप प्रज्वलित कर किया गया जिसमें झारखंड राय विश्वविद्यालय की चांसलर प्रो० (डॉ० ) सविता सेंगर, कुलसचिव प्रो० (डॉ०) पीयूष रंजन, डीन मैनेजमेंट डॉ० हरमीत कौर, डीन एक्सटर्नल रिलेशन प्रो० डॉ० अशफाक आलम , डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो० सब्यसाची चक्रवर्ती, डीन एकेडेमिक्स प्रो० (डॉ०) सुमित पांडे उपस्थित रहे। कार्यक्रम की रंगारंग शुरुआत मंत्रोच्चार के बीच वेलकम डांस के साथ किया गया।

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फेयरवेल एडीआईइयू 2025 के दौरान मिमे एक्ट, कविता पाठ , वाद्ययंत्र के जरिये कॉलेज लाइफ को दर्शाने के अलावा झारखण्ड के पारंपरिक सांस्कृतिक नृत्य का भी प्रदर्शन छात्र छात्राओं के द्वारा किया गया। विद्यार्थियों के समूह प्रदर्शन कॉमेडी एक्ट के बाद कार्यक्रम की दूसरी सबसे मुख्य प्रस्तुति हुई जिसे डांस झारखण्ड ग्रुप के कलाकारों के द्वारा प्रदर्शित किया गया। मौके पर उपस्थित डांस झारखण्ड के सीईओ राम सिंह ने भी अपना स्पेशल परफॉर्मेंस दिया। विदाई समारोह को यादगार बनाने में जूनियर्स ने कोई कसर बाकी नहीं रखी। देर शाम तक चले इस आयोजन में छात्र छात्राओं ने कई यादगार परफॉर्मेंस दिए।

फेयरवेल के दौरान पास आउट होने वाले विभिन्न विभागों के चुनिंदा विद्यार्थियों को पुरस्कृत भी किया गया जिन्होंने पढाई के दौरान अलग अलग गतिविधियों में अपना उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। इन विद्यार्थियों को कुलाधिपति प्रो० सविता सेंगर एवं कुलपति प्रो ० पीयूष रंजन ने मंच पर बुलाकर सम्मानित किया।
पुरस्कृत होने वाले विद्यार्थियों में बीपीटी की मुस्कान सेठी, डी फार्म के आर्यन कुमार, बी फार्म से हर्षित चंद्रा, बीसीए के संतोषी ओरांव , एमसीए के सरफराज अंसारी , बिटेक सीएससी ज्ञान कुमार लाल , डिप्लोमा माइनिंग नव राज सिंह , बीटेक माइनिंग के अविनाश कुमार, एलएलबी की प्रगति कुमारी, बीएससी एग्रीकल्चर के उत्सव कुमार, एमएससी एग्रीकल्चर की शालू कुमारी एम बी ए और बी बी ए के जुली टोप्पो और सानिया परवीन शामिल रहे। कार्यक्रम के दौरान पुस्तकालय का सबसे बढ़िया उपयोग करने के लिए दिया जाने वाला रंगनाथन अवार्ड बीटेक सीएसइ की छात्रा जीनत परवीन को दिया गया।

फेयरवेल पार्टी की देर शाम कार्यक्रम की सबसे अहम प्रस्तुति डीजे नितेश की रही जिन्होंने अपनी धुनों पर सभी स्टूडेंट्स को थिरकने को मजबूर कर दिया। हिंदी, भोजपुरी और रीमिक्स की बैक टू बैक धुन पर देर शाम तक कैंपस में स्टूडेंट्स ने मस्ती की।