झारखंड राय विश्वविद्यालय रांची के परिसर में बीते गुरुवार को प्राचीन लौह निर्माण भट्टी का उद्घाटन किया गया। जिसका उद्घाटन शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अतुल कोठारी, प्रो. (डॉ.) गौतम सूत्रधार, निदेशक, एनआईटी जमशेदपुर ने किया। झारखंड राय विश्वविद्यालय रांची में आयोजित चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व का समग्र विकास विषय पर विद्यार्थी प्रतिनिधि केंद्रित तीन दिवसीय कार्यशाला में शामिल होने रांची पहुंचे थे। झारखंड राय विश्वविद्यालय में धातु विज्ञान और धातु कर्म के क्षेत्र में भारतीय ज्ञान परंपरा की विशिष्ठ पहचान दर्शाती प्राचीन लौह निर्माण भट्टी (ब्लूमरी फर्नेस ) का निर्माण किया गया है। यह एक प्रकार की धातु कर्म भट्टी है जिसका उपयोग प्राचीन समय में लोहे के ऑक्साइडों को गलाने के लिए व्यापक रूप से किया जाता था। यह तकनीक भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ी है जिसकी सहायता से ढलुआ लोहा बनाया जाता था।इस अवसर पर डॉ. अतुल कोठारी ने भट्टी की निर्माण प्रक्रिया, इसके पारंपरिक और वैज्ञानिक पक्षों तथा भारतीय धातु-विज्ञान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को समझाया ।
एनआईटी जमशेदपुर के प्रो. (डॉ.) गौतम सूत्रधार, झारखंड राय विश्वविद्यालय की कुलाधिपति प्रो. (डॉ.) सविता सेंगर तथा कुलपति प्रो. (डॉ.) पीयूष रंजन भी इस महत्वपूर्ण क्षण में उपस्थित रहे। अतिथियों ने इसे अनुभव–आधारित शिक्षण का सशक्त उदाहरण बताते हुए कहा कि ऐसे प्रयास विद्यार्थियों में अनुसंधान, स्वदेशी तकनीकों की समझ और नवाचार के प्रति रुचि विकसित करते हैं। झारखंड राय विश्वविद्यालय रांची में चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व का समग्र विकास विषय पर तीन दिनों के कार्यशाला का आयोजन किया गया था।
जिसमें पंचकोश अवधारणा (अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय और आनंदमय कोश ) आधारित भारतीय ज्ञान परंपरा के माध्यम से विद्यार्थियों और शिक्षकों के समग्र व्यक्तित्व विकास को समझना और उसे जीवन में व्यावहारिक रूप से लागू करना था।