झारखंड राय विश्वविद्यालय, रांची में शुक्रवार से दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन ” इनोवेटिव कन्वर्जेन्स फॉर सस्टेनेबल फ्यूचर” का प्रारंभ हुआ।
अंतराष्ट्रीय सम्मलेन का विधिवत उद्घाटन दीप प्रज्वलित कर किया गया। इसके उपरांत स्मारिका का विमोचन किया गया जिसे सम्मानित अतिथि सरला बिरला विश्वविद्यालय के कुलपति (प्रो०) जेगनाथन चोकलिंगम, मुख्य अतिथि निदेशक (वित्त) झारखंड उर्जा संचार निगम लिमिटेड श्री अमित बैनर्जी एवं विशिष्ट अतिथि (डॉ०) रमेश चन्द्र मीणा, अतिरिक्त निदेशक सॉफ्टवेर टेक्नोलोजी पार्क ऑफ़ इंडिया,रांची एवं झारखंड राय विश्वविद्यालय, रांची के कुलपति (प्रो०) पीयूष रंजन ने किया
स्वागत भाषण करते हुए झारखंड राय विश्वविद्यालय, रांची के कुलपति प्रो ० पीयूष रंजन ने विषय पर प्रकाश डालते हुई कहा की अंतराष्ट्रीय सम्मलेन का यह विषय हमारे वर्तमान के सामने की चुनौतियों को दर्शाता है आज चुनौतियाँ बड़ी है। आज की वैश्विक चुनौतियाँ हैं जलवायु परिवर्तन , संसाधन का आभाव, सामाजिक असमानताएं एवं तकनीकी भटकाव। इन चुनौतियों का समाधान विचारों का समावेश, अनुशासनों का अभिसरण, सांस्कृतिक जुड़ाव एवं मूल्य प्रणाली से जुड़े सिद्धांतों में छुपा हुआ है। इसके लिए सहयोगात्मक प्रयास सर्वाधिक महत्वपूर्ण है।
कुलपति प्रो० पीयूष रंजन ने भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े सिद्धांत “वसुधैव कुटुम्बकम् एवं “सर्वे भवन्तु सुखिनः” की चर्चा करते हुए कहा की इन पंक्तियों में संपूर्ण रूप से पुरे प्रकृति को समझने का ज्ञान समाया हुआ है। यह हमें स्मरण दिलाता है की सतत विकास केवल एक मॉडल या केवल एक विचार नहीं बल्कि यह हमारी सभ्यता में गहराई से समाया हुआ लोकाचार है।
विशिष्ट अतिथि सरला बिरला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो ० जेगनाथन चोकलिंगम ने सस्टेनेबल एवं कन्वर्जेन्स को सिक्के का एक पहलू बताते हुए कहा की झारखंड राज्य शब्द में ही सस्टेनेबिलिटी छिपा हुआ है। झारखंड शब्द में जल , जंगल, जमीन , जानवर और जन समाहित है। ये 5 J मिलकर झारखंड को परिभाषित करते हैं उसी प्रकार सतत विकास के लिए सेवा, संकल्प, समर्पण, संस्कृति, समाज एवं सन्यास की आवश्यकता है। सन्यास से सनातन का बनेगा जिसका अर्थ है देना अथवा त्याग ।
कुलपति प्रो ० जे ० चोकलिंगम ने वर्तमान चुनौतियों की चर्चा करते हुए कहा की संसाधन के सामने जनसंख्या एक बड़ी चुनौतियाँ हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा पलायन या प्रवास की जगह अपने निवास स्थान को बेहतर बनाने का प्रयास वर्तमान समय की मांग है। तकनीक एवं विज्ञान की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा की भविष्य की चुनौतियों से ज्यादा वर्तमान में हमारे सामने जो समस्यायें खड़ी है उनकी चिंता और समाधान पर ध्यान देने की आवश्यता अधिक है।
स्वामी विवेकानंद के सपनों का भारत पर बोलते हुए उन्होंने कहा की स्वामी जी के सपनों का भारत आध्यात्मिकता एवं वैज्ञानिकता के भाव से भरा हुआ था। उन्होंने पश्चिम की ओर देखने की जगह पर पश्चिम को भारत का अनुसरण करने का मंत्र दिया।
उद्घाटन सत्र को मुख्य अतिथि निदेशक (वित्त) झारखंड उर्जा संचार निगम लिमिटेड श्री अमित बैनर्जी एवं विशिष्ट अतिथि डॉ ० रमेश चन्द्र मीणा ,अतिरिक्त निदेशक सॉफ्टवेर टेक्नोलोजी पार्क ऑफ़ इंडिया रांची ने भी संबोधित किया।
उद्घाटन सत्र का धनयवाद ज्ञापन डीन मैनेजमेंट डॉ ० हरमीत कौर ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा की अन्तराष्ट्रीय सम्मलेन में दो दिनों तक कई विशेषज्ञों के द्वारा अपने शोध पत्र पढ़े जायेंगे।