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Now Board Exams to be Conducted Twice a Year – Advantages

The idea of conducting board exams twice a year aligns with the principles of flexibility and continuous assessment advocated by National Curriculum Framework (NCF) and National Education Policy (NEP). Assessing students’ progress biannually will foster a deeper understanding of subjects, reduce the pressure of a single high-stakes exam, and allow students to adapt and improve throughout the academic year.

Conducting exams twice a year also complements the skill-based learning approach of NEP, as students are more likely to engage with subjects in a practical and meaningful manner. It encourages teachers to adopt innovative assessment methods that reflect the real-world applications of knowledge, promoting critical thinking and problem-solving skills.

Its Advantages:

  1. Holistic Development: Both NCF and NEP emphasize a holistic approach to education, focusing on the physical, cognitive, emotional, and social development of students.
  2. Skill-Based Learning: The NEP promotes skill-based learning, aligning education with real-world demands and making students more employable.
  3. Multidisciplinary Approach: The emphasis on multidisciplinary in NEP encourages students to explore diverse fields and develop a broader understanding of subjects.
  4. Flexibility: The policies advocate flexible learning pathways, allowing students to choose subjects and courses based on their interests and aspirations.
  5. Teacher Empowerment: NCF and NEP recognize the pivotal role of teachers and aim to provide them with professional development opportunities and autonomy in curriculum implementation.
  6. Promotion of Local Languages: NEP promotes the use of mother tongue or local languages as the medium of instruction, fostering better understanding and learning outcomes.
  7. Integration of Technology: Both policies acknowledge the role of technology in education, advocating its integration to enhance learning experiences.
  8. Focus on Early Childhood Education: NEP emphasizes early childhood care and education, recognizing its significance in laying the foundation for lifelong learning.

National Curriculum Framework (NCF) and National Education Policy (NEP) 2020: Envisioning Educational Transformation

National Curriculum Framework (NCF):
The National Curriculum Framework is a comprehensive document that outlines the guiding principles and framework for school education in India. It provides a roadmap for the development of curricular materials, teaching methods, and assessment practices. The NCF focuses on making education more holistic, flexible, and relevant to the evolving needs of students, society, and the nation.

National Education Policy 2020 (NEP):
The National Education Policy 2020 is a landmark policy that seeks to transform the education system in India. It aims to bring about significant changes across all levels of education, from school to higher education. The NEP emphasizes flexibility, multidisciplinarity, and skill development, with the goal of fostering creativity, critical thinking, and holistic development among students.

Incorporating biannual exams resonates with the overarching vision of NCF and NEP to create a dynamic, learner-centered education system that prepares students for the challenges of the modern world. It aligns assessment practices with the principles of continuous improvement and encourages a more comprehensive understanding of subjects, contributing to the holistic transformation of education in India.

10 वीं और 12 वीं की बोर्ड परीक्षा अब साल में दो बार होगी आयोजित

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत किए जा रहे बदलावों को लेकर एक बड़ा फैसला आया है। वर्ष 2024 से बोर्ड एग्जाम साल में दो बार कराए जाएंगे। यह फैसला शिक्षा मंत्रालय द्वारा लिया गया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 23 अगस्त को इसकी घोषणा करते हुए कहा कि ” NEP 2020 के तहत बनाया जा रहा नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क तैयार है। 2024 के एकडैमिक साल के लिए किताबें भी तैयार की जा रही हैं। नए पैटर्न के अनुसार 2024 से बोर्ड परीक्षा साल में दो बार आयोजित किया जायेगा।

मंत्रालय का यह फैसला परीक्षा के प्रेशर को कम करने के लिए लिया गया है। छात्रों के पास अब एग्जाम की तैयारी के लिए ज्यादा मौका होगा। नए बदलाव के अनुसार छात्र उस वक्त परीक्षा दे सकते हैं जब उन्हें लगे कि वो उस सब्जेक्ट के लिए तैयार हैं। इतना ही नहीं अब छात्र दो बोर्ड एग्जाम में स्कोर किए गए अपने बेस्ट स्कोर को दिखा सकेंगे। मंत्रालय की ओर से कहा गया कि देश के स्कूलों को उचित समय में ‘ऑन डिमांड’ परीक्षा कराने की क्षमता विकसित करनी होगी।

12वीं के बाद कृषि क्षेत्र में हैं करियर के कई मौके:
https://www.jru.edu.in/programs/department-of-agriculture-2/b-sc-hons-agriculture/
NEP 2020 के तहत छात्रों को अब दो भाषाएं पढ़नी होंगी। जिसमें से एक भारतीय भाषा होगी। ऐसा भारत की सांस्कृतिक समझ को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है। छात्रों को क्लास 11वीं और 12वीं में ये दो भाषाएं पढ़नी होंगी। नए पाठ्यक्रम के तहत छात्रों को उनकी समझ और योग्यता के आधार पर परखा जाएगा, न कि कोचिंग और किसी सब्जेक्ट को रटने के आधार पर। इसके अलावा छात्रों में प्रैक्टिकल स्किल्स भी विकसित करने पर जोर रहेगा।

बीबीए देता है प्रोफेशनल डिग्री के बाद नौकरी और हायर एजुकेशन का ऑप्शन
https://www.jru.edu.in/programs/faculty-of-commerce-management/bba/

कला, विज्ञान और वाणिज्य का रुकावट हुआ दूर:
एनसीएफ के तहत छात्रों के पास अलग-अलग सब्जेक्ट चुनने की आजादी होगी। कला, विज्ञान, वाणिज्य संकाय में किसी भी छात्र को उसी संकाय के विषय लेने के लिए मजबूर नहीं किया जायेगा। करेगी। यानि अगर कला का विद्यर्थी गणित और भौतिकी पढ़ना चाहता है तो वो यह विषय पढ़ सकता है। इसके साथी ही विज्ञानं के छात्र वाणिज्य और अर्थशास्त्र जैसे विषय पढ़ सकते हैं। शिक्षा की पहुँच सभी तक सुलभ हो इसके लिए शिक्षा मंत्रालय ने स्कूल में इस्तेमाल की जाने वाली किताबों के दामों को कम करने पर भी गंभीरता के साथ विचार प्रारंभ किया है।

Ethical education in higher studies blog

पंचकोश कोश अवधारणा: उच्च शिक्षा में चरित्र निर्माण पाठ्यक्रम

चरित्र का निर्माण शिक्षा का आवश्यक अंग है। चरित्र-निर्माण से व्यक्तित्व का विकास होता है। चरित्र का निर्माण जन्म से ही आरम्भ हो जाता है। पहले मूल प्रवृत्यात्मक व्यवहार चरित्र-निर्माण में होती है। कालांतर में अर्जित की गई अच्छी तथा बुरी आदतों के द्वारा चरित्र एक निश्चित रूप लेने लगता है। “चरित्र की शिक्षा, ईमानदारी, निरन्तरता, सत्य, सहयोग आदि गुणों के विकास के लिए है।

21वीं सदी की चुनौतियों से मुकाबले के लिए एनईपी-2020 के उद्देश्य बहुत उच्च और दूरगामी हैं। एनईपी-2020 का एक प्रमुख लक्ष्य विद्यार्थियों का चरित्र निर्माण है, ताकि शिक्षार्थियों के जीवन के सभी पक्षों और क्षमताओं का संतुलित विकास हो सके। भारतीय चिंतन परंपरा में चरित्र निर्माण और समग्र व्यक्तित्व विकास, विद्या या कहें कि शिक्षा का महत्वपूर्ण लक्ष्य माना जाता है। वर्तमान युग में चरित्र निर्माण और समग्र व्यक्तित्व विकास की जरूरत और बढ़ जाती है। युवाओं की इन्हीं जरूरतों को ध्यान में रखकर एनईपी-2020 के कार्यान्वयन की दिशा में मूल्य संवर्धन पाठ्यक्रम बनाए गए हैं।

बीबीए कोर्स की पूरी जानकारी:
https://www.jru.edu.in/programs/faculty-of-commerce-management/bba/

नई शिक्षा नीति का अनुपालन करते हुए झारखंड राय यूनिवर्सिटी रांची ने भी विद्यार्थियों के होलिस्टिक डेवलपमेंट (पंचकोश) को पाठ्यक्रम में शामिल किया है। इस पाठ्यक्रम को लाइफ स्किल के अंतर्गत शामिल करते इसे तीन भागों में बांटा गया है जिनमें चरित्र निर्माण, योग, सार्वभौमिक मूल्य और नैतिकता शामिल है।

मैकाले माडल की तरह ये कोरे सैद्धांतिक कोर्स नहीं होंगे, बल्कि प्राचीन भारतीय अध्ययन पद्धति या आधुनिक काल में महात्मा गांधी के मॉडल से प्रेरित सभी कोर्सों में प्रायोगिक अध्ययन कम से कम 50 प्रतिशत होगा। इन पाठ्यक्रमों को विज्ञान, कला और कॉमर्स आदि सभी के छात्र पढ़ सकते हैं। ये पाठ्यक्रम हमारे युवाओं में सामाजिक दायित्व का बोध और सेवा का भाव भरने के साथ उन्हें देश प्रेम का भाव भी विकसित करेंगे।

बीए एलएलबी में करियर:
https://www.jru.edu.in/programs/department-of-law/ba-llb/

युवाओं में बढ़ते असंतुलन, मानसिक तनाव और आक्रामकता आदि से निपटने में पंचकोश: होलिस्टिक डेवलपमेंट बहुत सहायक सिद्ध होगा। तैत्तिरीय उपनिषद में उल्लिखित ‘पंचकोश’ के आधार पर व्यक्तित्व-चरित्र का निर्माण युवाओं को एक नई दिशा देने का कार्य करेगा। योग: फिलासफी एंड प्रैक्टिस कोर्स भी आज के जटिल और तनावपूर्ण जीवन में बहुत उपयोगी सिद्ध होने वाला है।

अन्य कार्यों में भी भारतीय ज्ञान परंपरा के तत्वों को यथासंभव शामिल किया है। जैसे कांस्टीट्यूशनल वैल्यूज एंड फंडामेंटल ड्यूटीज वाले कोर्स में सेक्युलरिज्म के साथ-साथ सर्वधर्म समभाव की अवधारणा भी जोड़ी गई है। धर्म को लेकर हमारी संवैधानिक स्थिति सेक्युलरिज्म की अवधारणा के बजाय भारतीय सर्वधर्म समभाव की अवधारणा के ज्यादा अनुरूप है।

21वीं सदी में दुनिया में परचम लहराने को तैयार युवाओं का नया भारत आर्थिक रूप से तो तैयारी कर ही रहा है, लेकिन यह जरूरी है कि न्यू इंडिया संतुलित, चरित्रवान, सामाजिक दायित्व-बोध और राष्ट्र प्रेम के भाव से युक्त भी हो, तभी भारत पुन: जगद्गुरु बन पाएगा।