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झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी, रांची और एनएसई अकादमी लिमिटेड के बीच एम्.ओ. यू

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी, रांची के डिपार्टमेंट ऑफ़ मैनेजमेंट और एनएसई (NSE) एकडेमी लिमिटेड के बीच मंगलवार को यूनिवसिटी के कमड़े स्थित कैंपस में एम् ओ यू(MOU) संपन्न हुआ।इसका उद्देश्य एमबीए और बीबीए के स्टूडेंट्स को वित्तीय सेवा के सेक्टर में विशेष व्यावहारिक गुणों के बारे में बताना है । इसके साथ ही वित्तीय सेक्टर से जुड़े रोजगार के अन्य आयामों जैसे शेयर मारकेट, म्युचूअल फण्ड , बैंकिंग, एसेट्स मैनेजमेंट कंसल्टिंग और अन्य कार्यों के बारे में जानकारी देकर उन्हें रोजगार के लिए तैयार करना है।वित्तीय सेवा के सेक्टर में स्टूडेंट्स को स्वरोजगार करने केनये अवसरों से भी अवगत कराया जायेगा। इस अवसर पर एनएसई के सीनियर मैनजेर अविवेक गुप्ता ने झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डॉ. पीयूष रंजन को एम् ओ यू की कॉपी सौपीं।

इस अवसर पर डिपार्टमेंट ऑफ़ मैनेजमेंट के एच. ओ. डी. डॉ रौशन कुमार और डॉ. अभिषेक प्रताप एवं यूनिवर्सिटी फाइनेंस ऑफिसर सत्यप्रकाश राय उपस्थित थे।एमओयू की जानकारी जनसंपर्क विभाग के डॉ. प्रशांत जयवर्धन ने दिया।

कैरियर अपॉर्चुनिटीज इन गवर्नमेंट सेक्टर पर वर्कशॉप का आयोजन

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी, रांची कमड़े कैंपस में एनआईबीएम (पीओ मेकर ) इंस्टिट्यूट, रांची द्वारा “कैरियर ऑपर्चुनिटीज़ इन गवर्नमेंट सेक्टर” विषय पर वर्कशॉप का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य फाइनल सेमेस्टर के स्टूडेंट्स को सरकारी क्षेत्र में उपलब्ध रोजगार के अवसरों से अवगत कराना था। इस दौरान स्टूडेंट्स का मार्गदर्शन करने और रोजगार के अवसरों से संबंध में विस्तार पूर्वक बताने के लिए एनआईबीएम के सीईओ मनोज कुमार गुप्ता और इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ कॉर्पोरेट अफेयर्स के सीनियर फैकल्टी डॉ. रमन वल्लभ उपस्थित थे। वर्कशॉप के समापन के अवसर पर झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी, रांची और एनआईबीएम इंस्टिट्यूट के बीच एक करार भी किया गया जिसमें यूनिवर्सिटी के वार्षिक उत्सव “तरंग 2020” के लिए एनआईबीएम को एजुकेशन पार्टनर बनाया गया। वर्कशॉप के दौरान डिप्लोमा,बीटेक,बीसीए, एमसीए, बीबीए और एमबीए फाइनल सेमेस्टर के 250 स्टूडेंट्स शामिल हुए ।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर डिपाटमेंट ऑफ़ लाइफ स्किल्स की प्रो. रश्मि ने एनआईबीएम के मनोज गुप्ता को बुके और मोमेंटो देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम के सफल संचालन में सहयोग प्रो.अनुराधा ने किया।

राय यूनिवर्सिटी द्वारा आयोजित जनजातीय किसानों के मशरूम प्रशिक्षण का समापन

ICAR- खुम्ब अनुसंधान निदेशालय, सोलन, हिमाचल प्रदेश द्वारा झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी, रांची नामकुम कैंपस में दो दिवसीय मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। अनुसूचित जनजाति उपयोजना(2019-2020)के तहत जनजातीय किसानों के लिए इसका आयोजन किया गया था. जिसमें 100 से ज्यादा किसानशामिल हुए।

कार्यशाला के पहले दिन सामूहिक दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुरुवात किया गया जिसमें डीएमआर के वैज्ञानिक डॉ. मनोज नाथ और राय यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डॉ. पीयूष रंजन शामिल हुए । इस अवसर पर वैज्ञानिक डॉ. नाथ ने “मशरूम और उससे जुड़े प्रशिक्षण के लाभों से किसानो को अवगत कराया और सरकार द्वारा संचालित योजनाओं और प्रशिक्षण के लाभों से भी अवगत कराया।“

रजिस्ट्रार डॉ. पीयूष रंजन ने अपने सम्बोधन के दौरान कहा की “राय यूनिवर्सिटी जनजातीय युवाओं के शैक्षणिक विकास के लिए कार्य करता रहा है। विश्वविद्यालय का एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट भी अपने कार्यों में सामाजिक भागेदारी को बढ़ावा देने में संलग्न है। समय समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन करके उद्यमिता को बढ़ावा दिया जा रहा है। “

मशरूम प्रशिक्षण कार्यक्रम के आयोजन पर प्रकाश डालते हुए प्रो. हेमलता ने बताया की “मशरूम एक बहुउपयोगी खाद्य है जिसका इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा होता है. उन्होंने विस्तार पूर्वक मशरूम के प्रकार और वर्तमान समय में इसकी उत्पादन तकनीक और महत्व पर प्रकाश डाला।“दूसरे सत्र में रंजीत पाल ने “ऑस्टर मशरूम उत्पादन के तरीके और प्रशिक्षण प्राप्त करते समय बरती जाने वाली सावधानियों पर प्रकाश डाला” ।

कार्यशाला के दूसरे दिन किसानों को व्यावहारिक प्रशिक्षण देने आये डीएमआर वैज्ञानिको रूपम विश्वास और देवज्योति मुखर्जी ने मशरूम उत्पादन करने का व्यावहारिक ज्ञान दिया और किसानों से मशरूम के बैग भी तैयार करवाए। साथ ही बीज, उत्पादन, संवर्धन और प्रसंस्करण से जुडी जानकारी भी प्रदान की। प्रशिक्षण के समापन के बाद सभी किसानों को प्रमाणपत्र और मशरूम उत्पादन से जुडी सामग्री प्रदान की गयी। डीएमआर वैज्ञानिको ने कार्यक्रम के सफल संचालन और मशरूम उत्पादन के लिए आये किसानों की रूचि और लगन की सराहना की और कहा की इस प्रकार के कार्यक्रम अगर दोबारा आयोजित किये जाते है तो वे जरूर शामिल होंगे। कार्यक्रम का आयोजन और सफल संचालन डिपार्टमेंट ऑफ़ एग्रीकल्चर के डॉ. अलोक कुमार ने किया।

बीएससी एग्रीकल्चर स्टूडेंट्स ने किया राम कृष्ण मिशन आश्रम का शैक्षणिक भ्रमण

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी, रांची नामकुम कैंपस के बीएससी एग्रीकल्चर के 4th सेमेस्टर के स्टूडेंट्स ने 28 जनवरी को रांची मोरहाबादी स्थित रामकृष्ण मिशन आश्रम का भ्रमण किया। आध्यात्मिक जागरण के साथ रामकृष्ण मिशन आश्रम रांची समेत पूरे झारखंड में लोगों के सर्वांगीण विकास की दिशा में उल्लेखनीय कार्य कर रहा है। 1927 से ही यह आश्रम योग, संस्कृति, परंपरा वैदिक और आध्यात्मिक ज्ञान से लोगों को रूबरु करा रहा है। स्वामी रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद के दिव्य ज्ञान, संदेश और विचारों से बिहार व झारखंड के लोगों को अवगत कराने के लिए इस आश्रम की स्थापना की गई थी।

रांची जिले में आश्रम के तीन केंद्र संचालित होते है जिनमें रांची के अनगड़ा प्रखंड के गेतलसूद में दिव्यायन नाम से रामकृष्ण मिशन आश्रम के द्वारा एग्रीकल्चर डिमोंस्ट्रेशन सेंटर चलाया जा रहा है। यहां आधुनिक तरीके से खेती कर आसपास के ग्रामीणों को रोजगार से जोड़ने की दिशा में उल्लेखनीय काम किए जा रहे हैं। किसानों को गोबर और केंचुआ खाद बनाने से लेकर उन्नत तरीके से खेती, मछली पालन, कुक्कुट पालन, रेशम कीट पालन, मधुमक्खी पालन, बकरी पालन आदि का प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार से जोड़ा जा रहा है। वहीं तुपुदाना सेनीटोरियम में आश्रम की ओर से डेयरी में दूध उत्पादन कर लोगों को शुद्ध दूध उपलब्ध कराया जाता है। डेयरी के माध्यम से ग्रामीणों को रोजगार से भी जोड़ा गया है।

मोरहाबादी स्थित आश्रम प्रशिक्षण और कौशल विकास केंद्र के रूप में कार्य करता है। कृषि की नवीनतम तकनीक और प्रशिक्षण के साथ यह केंद्र किसानों और युवाओं को जीवन कौशल से भी परिचित करने का कार्य करता है। बीएससी एग्रीकल्चर के स्टूडेंट्स ने आश्रम भ्रमण के दौरान कृषि, कौशल विकास, आजीविका संवर्धन और नवीनतम तकनीक के जरिये किसानो को मिलने वाले व्यवहारिक ज्ञान का अनुभव प्राप्त किया। 37 सदस्यों के दल का नेतृत्व प्रो. हेमलता और प्रो. सुषमा प्रिया ने किया।

Charcoal Painting Workshop at JRU

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी, रांची, कमड़े कैंपस में कल्चरल क्लब के द्वारा आयोजित चारकोल पेंटिंग वर्कशॉप के दौरान स्टूडेंट्स ने कागज पर उकेरा उँगलियों का जादू।1 दिवसीय वर्कशॉप के आयोजन का उद्देश्य स्टूडेंट्स को विषय प्रकृति के साथ जोड़ना था। वर्कशॉप का विषय था “स्वच्छता अपने आसपास”। स्वतंत्र चित्रकार प्रवीण करमाकर ने वर्कशॉप के दौरान स्टूडेंट्स को पेंटिंग की बारीकियों से परिचित करवाया और चित्र कला से जुडी तकनीकों का ज्ञान दिया। एक सफल चित्रकार मौलिक और तकनीकी पक्ष के बीच संतुलन बैठा कर संतुलित और बेहतर आकृति को जन्म देता है। वर्कशॉप में सभी संकाय से स्टूडेंट्स शामिल हुए। विज्ञान और कला का अनोखा संगम वर्कशॉप के दौरान देखने को मिला जब स्टूडेंट्स ने अपनी भावनाओं को चारकोल के जरिये उकेरा।

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी में SAP पर वेबिनार का आयोजन

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी, कमड़े कैंपस में IT क्षेत्र की अद्यतन तकनीक SAP (सिस्टम एप्लीकेशन एंड प्रोडक्ट्स) विषय पर वेबिनार (वेब के द्वारा सेमिनार) का आयोजन किया गया। इन्फोसिस बेंगलुरु में सेवारत एस ए पी बी डब्ल्यू /हाना कंसल्टेंट वरुण कुमार वर्मा ने ऑनलाइन सेमिनार के जरिये बी टेक (कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग), MCA और BCA के विद्यार्थियों को SAP के बारे में विस्तार से समझाया। देश के ज्यादातर बड़े उद्योगों में लागू SAP सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन के गुणों , उसकी शक्ति और उपयोगिता के बारे में श्री वर्मा ने स्लाइड्स और लाइव डेमो के जरिये विद्यार्थियों को समझाया। श्री वर्मा ने SAP के क्षेत्र में करियर प्रॉस्पेक्ट्स बताये। SAP में फंक्शनल कंसल्टेंट, कोड डेवलपर समेत कई भूमिकाएं और पदों के बारे में श्री वर्मा ने बताया। उन्होंने अपने संबोधन के दौरान जानकारी दी कि SAP के प्लेटफार्म पर नौकरी पाने के लिए B.Tech. (कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग), MCA या BCA जैसी कोई IT डिग्री होना अनिवार्य नहीं है । एक साइंस ग्रेजुएट, एक MBA जैसे डिग्री धारी भी SAP की ट्रेनिंग लेकर इस क्षेत्र में सफल पेशेवर बन सकते हैं । श्री वर्मा ने SAP ट्रेनिंग फीस, ट्रेनिंग अवधि और सर्टिफिकेशन के बारेमें भी बताया। वेबिनार का आयोजन विश्वविद्यालय के कंप्यूटर साइंस एंड इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी विभाग ने किया। वेबिनार के संचालन में सक्रिय भूमिका प्रो. अनुराधा शर्मा और प्रो. राजन तिवारी ने निभायी।

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी में चारकोल पेंटिंग वर्कशॉप का आयोजन

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी, रांची, कमड़े कैंपस में 1 दिवसीय चारकोल पेंटिंग वर्कशॉप का आयोजन किया गया। वर्कशॉप का विषय “स्वच्छता अपने आसपास” था। वर्कशॉप का आयोजन जेआरयू कल्चरल क्लब(JRUCC) के द्वारा आयोजित किया गया था, जिसमे स्टूडेंट्स को चारकोल पेंटिंग की बारीकियों से अवगत करने के लिए स्वतंत्र चित्रकार प्रवीण करमाकर उपस्थित थे. प्रवीण करमाकर फैब्रीनो एक्वारेलो, इटली और इनवाटर कलर इंडिया के कंट्री हेड है।

रांची के चित्रकार प्रवीण कर्मकार अपनी पेंटिंग कला को लेकर चर्चित रहे है. इटली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय कला प्रदर्शनी ‘फेब्रियानो इन एक्वारिले में इनकी पेंटिंग ‘झूमर-2 को अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त कला समीक्षकों ने न सिर्फ सराहा, बल्कि पुरस्कृत भी किया। प्रवीण झारखंड ही नहीं, पड़ोसी राज्य बिहार, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ आदि से भी एकमात्र चित्रकार हैं, जिनकी पेंटिंग इस प्रदर्शनी के लिए चयनित हुई। उन्होंने ऑन द स्पॉट पेंटिंग में भी पुरस्कार जीतकर राज्य और देश का मान बढ़ाया है।

पिछले दिनों झारखण्ड दौरे पर आये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनके बनाये हुये चित्रों की सराहना की थी, जिसमे एक वृद्ध महिला प्रधानमंत्री को आशीर्वाद दे रही है । आयुष्मान भारत योजना के शुभारंभ के अवसर पर यह तस्वीर प्रधानमंत्री को भेंट की गयी थी जिसमें झारखण्ड के कला और संस्कृति को एक साथ प्रदर्शित करने का कार्य प्रवीण ने बखूबी किया था।

वर्कशॉप के दौरान प्रवीण ने स्टूडेंट्स को चारकोल पेंटिंग के संबंध में जानकारी देते हुए बताया की “चारकोल लकड़ी कोयला का एक प्रकार का शुष्क कला माध्यम है, जो बारीक जमी हुई जैविक सामग्री से बना होता है। चारकोल जो बहुत हल्के या तीव्रता से काले होते हैं, जबकि आसानी से हटाने योग्य होते हैं, चित्र बनाते समय इसका उपयोग अक्सर लकड़ी का कोयला चित्रण के साथ किया जाता है ताकि लकड़ी के कोयले की धूल को मिटाने या रगड़ने से रोकने के लिए स्थिति को मजबूत किया जा सके।चारकोल पेंसिल लकड़ी के एक जैकेट में संलग्न लकड़ी का कोयला से मिलकर बनता है। वर्कशॉप में उन्होंने कई चित्र बनाकर दिखाए और स्टूडेंट्स को भी प्रेरित किया। इस दौरान उन्होंने कहा की “चित्रकार को मौलिक और तकनीकी पक्ष, दोनों के बीच संतुलन बैठाना होता है।तभी एक संतुलित और बेहतर आकृति जन्म लेती है।“

वर्कशॉप के आयोजन में कल्चरल क्लब कन्वेनर प्रो. अनुराधा शर्मा, और क्लब के सदस्यों का योगदान था।

जेआरयू, रांची कैंपस में प्रधानमंत्री के तकनिकी सलाहकार दीपक वोहरा का व्याख्यान

न्यूज़ सोर्स : जेआरयू डिजिटल सेल

पोलैंड में भारत के राजदूत रहे पूर्व राजनीतिज्ञ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लेसोथो, गूईएना- बिसाउ और लद्दाख़ ऑटोनोमस हिल डेवलपमेंट कौंसिल लेह और कारगिल पर सलाहकार डॉ. दीपक वोहरा ने बुधवार (15 जनवरी) को झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी रांची, कमड़े कैंपस में व्याख्यान दिया। भारत के विदेश मंत्रालय में सचिव स्तर के अधिकारी डॉ. वोहरा कई देशों में भारत के राजदूत और विदेशी सरकारों के सलाहकार रह चुके है। इन्होनें दूरदर्शन के कई कार्यक्रमों में एंकरिंग किया है।

अपनी विदेश सेवा के दौरान आप फ्रांस, टुनिशिया, यूनाइटेड स्टेट, चैड, कैमरून, पापुआ न्यू गिनी, स्पेन, अर्मेनिया और सूडान, में अपनी सेवा दी है। मलेशिया में डिप्टी हाई कमिश्नर भी रह चुके है। डॉ. वोहरा एक मुखर वक्ता होने के साथ वर्तमान में ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी, प्रधानमंत्री के तकनिकी सलाहकार के तौर कार्यरत है।

डॉ. वोहरा विकासशील देशों में विकास और राजनितिक यांत्रिकी के जाकर है। इन्हें अफ़्रीकी देशों के राजनितिक मामलों की बेहतर समझ को लेकर ख्याति प्राप्त है। स्टीफेंस कॉलेज, दिल्ली और नेशनल डिफेंस कॉलेज से पास आउट डॉ.वोहरा ने राय यूनिवर्सिटी, रांची कैंपस में अपने संबोधन के दौरान बदलते भारत की तस्वीर पेश करते हुये कहा “भारत युवा शक्ति, आर्थिक और तकनिकी प्रगति की राह पर है। भारत की आबादी युवा जोश से भरी है,बदलते भारत की शक्ति को विश्व के देश भी पहचानते है, इसलिए भारत की चर्चा पुरे विश्व में है।“

चर्चा के दौरान उन्होंने बताया की “भारत की सेना विश्व की चौथी बड़ी ताकत है और 2028 तक हर भारतीय के लोगों के पास दो गुना धन होगा।“उन्होंने भारत के बदलते तस्वीर पर बोलते हुए कहा की ” भारत में कानून का राज है। कानून अपना काम बेहद ईमानदारी से कर रहा है। उन्होंने एलिसा आइरस की प्रसिद्ध पुस्तक ” आवर टाइम हैज कम” (OUR TIME HAS COME)की चर्चा करते हुए विश्व के बड़े देशों के समूहों में भारत के बढ़ते धमक को नए युग की शुरुवात बताया। उन्होंने कहा आज भारत यूएन में अपनी अहमियत रखता है. रूस जैसे महाशक्ति को लाइन ऑफ़ क्रेडिट के तहत ऋण की राशि देता है, बड़ी आपदाओं के होने पर खुद अपने को साबित करने की क्षमता से विश्व को आकर्षित कर रहा है। डॉ. वोहरा ने अपने कारगिल और नार्थ ईस्ट इलाकों में किये गये कार्यों और यादगार लम्हों को याद करते हुए बताया की ‘आपाती वार मेमोरियल’ कारगिल की लड़ाई की याद में बनायीं गयी है। सीमा सड़क संगठन की क्षमता और कार्य करने के तरीकों को अतुलनीय और सराहनीय कार्यों में शामिल किये जाने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा की इनके किये गए सड़क निर्माण कार्य अपने आप में भारत को नया आयाम देते है।

व्याख्यान कार्यक्रम समाप्त होने पर राय यूनिवर्सिटी, रांची के रजिस्ट्रार डॉ. पीयूष रंजन ने डॉ. दीपक वोहरा को पौधा और शॉल देकर सम्मानित किया।

जेआरयू स्टॉफ क्रिकेट 2020

जेआरयू फैकल्टी इलेवन की 7 विकेटों से रोमांचक जीत

झारखण्ड राय यूनिवर्सिटी, रांची स्टॉफ क्रिकेट मैच 2020 का आयोजन यूनिवर्सिटी कैंपस नामकुम में शनिवार 11 जनवरी को किया गया। यूनिवर्सिटी स्टॉफ क्रिकेट मैच में टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टॉफ की टीमें शामिल हुयी। टॉस टीचिंग स्टॉफ टीम के कैप्टन कुमार अमरेंद्र और नॉन टीचिंग टीम के कैप्टन अमित कुशवाहा के बीच हुआ जिसमे टीचिंग इलेवन ने टॉस जीत का पहले फील्डिंग करने का फैसला किया।

नॉन टीचिंग एलेवेन की तरफ से पहले बल्लेबाजी करने उतरे मिलन प्रामाणिक और रविंद्र सिंह ने ताबतोड़ बल्लेबाजी करते हुए पहले ओवर में ही 27 रन बना डाले। रविंद्र सिंह ने 9 छक्के और 2 चौकों के साथ तबातोड़ 63 रन जबकि साथी बल्लेबाज मिलन प्रामाणिक ने 23 रनो का योगदान दिया। 5 ओवरों में ही टीम का स्कोर 90 रनो को पार कर गया था लेकिन इसके बाद मिडिल आर्डर के बल्लेबाज कोई करिश्मा नहीं दिखा सके और विकेट का गिरना लगातार जारी रहा, कैप्टेन अमित कुशवाहा ने 23 रन बनाये और तीसरे बड़े स्कोरर साबित हुए, इसके बाद पूरी टीम 140 रनों पर ऑल आउट हो गयी।

टीचिंग स्टॉफ की तरफ से सबसे सफल गेंदबाज कुमार अमरेंद्र रहे जिन्होंने 7 विकेट झटके।साथी गेंदबाज प्रो. बिनोद महतो ने 1 और प्रो.राजीव नयन ने 2 विकेट चटकाये।

JRU Winner Team

JRU Winner Team

141 रनो का पीछा करने उतरी टीचिंग इलेवन की टीम के ओपनर बल्लेबाज प्रो. प्रकाश कुमार और प्रो. रघुवंश सिंह ने तेज शुरुवात करते हुए रनों की गति को आगे बढ़ने का काम किया। टीम को पहला झटका प्रकाश कुमार कुमार के रूप में लगा जो 1 रन बनाकर पवेलियन लौटे उसके बाद दूसरा झटका रघुवंश के आउट होने पर लगा जो 15 रन बनाकर आउट हुए।

इसके बाद टीम को जीत की ओर ले जाने का भार यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रार डॉ. पियूष रंजन ने संभाला जिनका साथ कुमार अमरेंद्र ने दिया। दोनों की लम्बी साझेदारी ने टीम को जीत के करीब पहुंचा दिया था लेकिन , 51 रन बनाकर कुमार अमरेंद्र की पारी का अंत हुआ। डॉ. रंजन ने 38 रन बनाये जिसमे 6 चौके और 1 छक्का शामिल था। 3 विकेट खोकर टीम ने मैच 141 रन बनाते हुए 7 विकेटों से जीत लिया ।

JRU Runner Team

JRU Runner Team

मैन ऑफ़ दी मैच का ख़िताब कुमार अमरेंद्र को उनके आल राउंड प्रदर्शन ( 51 रन और 7 विकेट ) को देखते हुए प्रदान किया गया।

मैच के दौरान अंपायर की भूमिका प्रो. सब्यसाची चक्रवर्ती और यूनिवर्सिटी फिजिकल इंस्ट्रक्टर सचिन सिंह ने निभायी। मैच का आँखों देखा हाल प्रो. राजन तिवारी ने जबकि स्कोर बोर्ड अपडेट किया प्रो. रौशन ने । मैच के दौरान यूनिवर्सिटी फैकल्टी स्टॉफ ने दोनों टीमों का हौसला बढ़ाया। विजेता और उपविजेता टीम को प्रो. सब्यसाची चक्रवर्ती ने ट्राफी देकर सम्मानित किया ।