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UGC दे रही है मौका आपको अपने कॉलेज के ब्रांड एम्बेसडर बनने का

NEP सारथी बन छात्र करेंगे राष्ट्रीय शिक्षा नीति का प्रचार

NEP सारथी, यूजीसी की एक पहल है. इसका उद्देश्य छात्रों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के प्रावधानों को लागू करने में शामिल करना और उच्च शिक्षा में सुधार लाना है। एनईपी सारथी के ज़रिए, छात्रों को एनईपी के बारे में जागरूक किया जाता है और उन्हें इस नीति के कार्यान्वयन में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

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यूजीसी के अध्यक्ष एम. जगदीश कुमार ने एनईपी 2020 की परिवर्तनकारी प्रक्रिया में छात्रों की भागीदारी के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि छात्र शिक्षा प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, और किसी भी शिक्षा प्रणाली के सफल कार्यान्वयन के लिए छात्रों का इसमें इंवॉल्वमेंट और कमिटमेंट महत्वपूर्ण है और आजीवन सीखने को बढ़ावा देना है। NEP सारथी के माध्यम से, हमारा उद्देश्य एक ऐसे वातावरण को बढ़ावा देना है जहां छात्र सक्रिय रूप से योगदान कर सकें और NEP 2020 के प्रावधानों का प्रभावी उपयोग कर सकें।

कौन बन सकता है NEP सारथी?
यूजीसी ने उच्च शिक्षण संस्थानों के कुलपतियों से निम्नलिखित पैरामीटर पर खरा उतरने वाले विद्यार्थियों को एनईपी सारथी के लिए नामांकित कर सकते हैं ।विद्यार्थी में उत्कृष्ट व्यक्तित्व, उत्कृष्ट संचार कौशल, संगठनात्मक क्षमता, रचनात्मकता, जिम्मेदारी की भावना और टीमों का नेतृत्व करने की क्षमता होनी चाहिए।

    NEP सारथी उद्देश्य:

  • कैंपस में छात्रों के बीच जागरूकता पैदा करें और NEP 2020 की पहल को बढ़ावा दें
  • एनईपी 2020 पहलों के कार्यान्वयन में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए छात्रों को प्रोत्साहित और प्रेरित करें
  • छात्रों पर एनईपी 2020 की पहलों के प्रभाव को समझने और उनकी चिंताओं को दूर करने के लिए यूजीसी के लिए एक फीडबैक तंत्र स्थापित करना

एनईपी सारथी की भूमिका:

  • NEP 2020 को बढ़ावा देने के लिए एक राजदूत के रूप में काम करें
  • NEP 2020 के बारे में जागरूकता पैदा करें
  • NEP 2020 के बारे में जानकारी का प्रसार करें
  • सोशल मीडिया पर NEP 2020 पहलों को बढ़ावा दें
  • एनईपी 2020 के कार्यान्वयन में सुधार के लिए छात्रों से फीडबैक एकत्र करें
  • NEP 2020 पहलों के बारे में छात्रों और अन्य हितधारकों को मार्गदर्शन प्रदान करें और बताएं कि वे उनसे कैसे लाभान्वित हो सकते हैं

NEP सारथी की जिम्मेदारी:

  • नवीनतम एनईपी पहलों के बारे में जागरूकता अभियान आयोजित करें
  • छात्र समूहों से जुड़ें
  • छात्रों, संकाय सदस्यों, प्रशासकों और यूजीसी के बीच सार्थक संवाद स्थापित करना।
  • परिसर में प्रदर्शन के लिए प्रत्येक एनईपी पहल पर संक्षिप्त नोट्स तैयार करें
  • कार्यक्रम, वाद-विवाद, चर्चा, प्रतियोगिताएं, प्रश्नोत्तरी, नुक्कड़, चौपाल की योजना बनाएं
  • सोशल मीडिया गतिविधियां या अभियान आरंभ करें
  • कॉलेज उत्सवों में एनईपी हेल्प डेस्क स्थापित करें

झारखंड के 45 विद्यार्थी चुने गए एनईपी सारथी, इनमें हैं 30 छात्राएं।
यूजीसी ने कुल 117 उच्च शिक्षण संस्थानों से 725 विद्यार्थियों का चयन एनईपी सारथी के रूप में किया है। सारथी यानी स्टूडेंट एंबेसडर फॉर एकेडमिक रिफार्म इन ट्रांसफॉर्मिंग हायर एजुकेशन इन इंडिया के रूप में झारखंड के 45 विद्यार्थी चुने गये हैं। एनईपी सारथी के लिए चुने गए छात्रों को यूजीसी और विश्वविद्यालय द्वारा सर्टिफिकेट ऑफ रिकग्निशन दिया जायेगा । उन्हें यूजीसी के ऑनलाइन कार्यक्रमों में हिस्सा लेने का मौका मिलेगा. इसके अलावा उनके लेख यूजीसी के न्यूजलेटर में प्रकाशित किये जायेंगे।

Generation Beta starts from 2025 JRU Blog

भारत का पहला जेन बीटा बच्चा किस प्रदेश में है ? क्या है उसका नाम। जानिए पूरी जानकारी

साल 2025 में जिन बच्‍चों का जन्‍म होगा, उन्‍हें जेन बीटा कहा जाएगा। 2025 में जन्म लेने वाली यह जेनरेशन ऐसी दुनिया में बड़ी होगी जहां रोजमर्रा की जिंदगी में तकनीक पूरी तरह से फैल चुकी है। साल 2025 में एक नई पीढ़ी का स्वागत हुआ है, जिसे जनरेशन बीटा के नाम से जाना जाता है। इस जनरेशन में 1 जनवरी 2025 और लगभग 2039 के बीच जन्मे बच्चे शामिल हैं।

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2025 से जनरेशन बीटा पीढ़ी अस्तित्व में आई है।
वर्ष 2025 से एक और पीढ़ी ‘जेनरेशन बीटा’ या ‘जेन बीटा’ अस्तित्व में आ गई है। भारत में इस पीढ़ी का पहला बच्चा मिजोरम के आइजोल में जन्मा है। बच्चे का जन्म एक जनवरी को रात 1203 बजे आइजोल के डर्टलैंग के सिनोड अस्पताल में हुआ। मीडिया में आयी जानकारी के अनुसार जन्म के समय बच्चे का वजन 3.12 किलोग्राम था। अस्पताल के मुताबिक, बच्चा स्वस्थ है। परिवार ने बच्चे का नाम फ्रेंकी रखा है। उसके पिता का नाम जेडडी रेमरुअत्संगा और मां का नाम रामजिरमावी है।

1946-1964 बेबी बूमर जेनरेशन: द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद जनसंख्या वृद्धि से यह नाम मिला।

1901-1924 ग्रेटेस्ट जेनरेशन: इस पीढ़ी ने महामंदी और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अपना जीवन यापन किया। इस पीढ़ी को पारंपरिक मूल्यों के लिए जाना जाता है।

एक पीढ़ी 15-20 साल की अवधि की होती है। जिसका नाम उस वक्त के सांस्कृतिक और आर्थिक घटनाओं के आधार पर तय किया जाता है।

1965-1979 जेनरेशन X: इस दौरान इंटरनेट की शुरुआत हुई। इस पीढ़ी के लोग तेजी से बदले।

1981-1996 जेनरेशन Y: इस पीढ़ी के लोगों ने टेक्नोलॉजी के साथ खुद को अपडेट किया।

1925-1945 साइलेंट जेनरेशन: महामंदी और द्वितीय विश्व युद्ध के परिणामों के कारण इस पीढ़ी को यह नाम मिला। इस पीढ़ी के बच्चे अधिक मेहनती और आत्मनिर्भर थे।

क्यों कहे जाते हैं ये बच्चे जेन बीटा ?
1 जनवरी 2025 से लेकर 2039 के बीच पैदा होने वाले बच्चों को ‘जेन बीटा’ के नाम से जाना जाएगा। समाज पर अध्ययन करने वाले मार्क मैक्रिंडल ने यह शब्द गढ़ा है और कहा है कि 2035 तक यह पीढ़ी वैश्विक जनसंख्या का 16 हिस्सा बन जाएगी। बच्चों की ये पीढ़ी दुनिया को अपने तरीके से नया आकार देगी। यह अब तक की सबसे स्मार्ट और एडवांस पीढ़ी मानी जाएगी, जहां हर चीज एक क्लिक की दूरी पर होगी।

बेबी बूमर्स से लेकर जनरेशन बीटा तक का सफ़र:

बेबी बूमर्स और जनरेशन एक्स
जिन लोगों का जन्म 1946 से लेकर 1964 के बीच में हुआ, उन्हें बेबी बूमर्स के नाम से जाना जाता है। जनरेशन एक्स साल 1965 से लेकर साल 1980 के बीच में जन्मे लोगों को कहा जाता है।

मिलेनियल्स
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मिलेनियल्स साल 1981 से लेकर साल 1996 के बीच में पैदा हुए लोगों को कहा जाता है। जनरेशनल ग्रुप तेजी से महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। अलग-अलग एज ग्रुप्स में जन्मे लोगों को अलग-अलग तरह के अनुभवों का सामना करना पड़ता है, जो उनकी पर्सनालिटी पर भी असर डालते हैं। एक पीढ़ी की आर्थिक, राजनीतिक और तकनीकी सोच का अगली पीढ़ी पर भी प्रभाव पड़ता है।

जनरेशन जेड और जनरेशन अल्फा
जनरेशन अल्फा में साल 2010 से लेकर साल 2024 तक जन्मे बच्चे शामिल हैं। इसी तरह से जनरेशन जेड में साल 1996 से लेकर साल 2010 के बीच में जन्मे लोग शामिल होते हैं।

जेनेरशन बीटा
साल 2025 में जिन बच्‍चों का जन्‍म होगा, उन्‍हें जेन बीटा कहा जाएगा। जेन बीटा के पेरेंट्स के सामने सबसे बढ़ी चुनौती इस पीढ़ी को तकनीक की इस दुनिया में बच्‍चों की परवरिश करने के लिए खुद को तैयार करना है। बच्चों में शुरू से ही कुछ पर्यावरण-अनुकूल आदतें जैसे कि रीसाइक्लिंग और पानी की बचत करना सिखाना होगा। बच्‍चों को इमोशनल इंटेलिजेंस का गुण भी सिखाना होगा। इसमें बच्चों को अपनी भावनाओं को समझना और उन्हें व्यक्त करना शामिल है। इमोशनल ग्रोथ के लिए जनरल लिखने या कहानी सुनाने जैसी एक्टिविटीज काम आ सकती हैं।

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बैचलर ऑफ़ होटल मैनेजमेंट कोर्स करने के कौन सी स्किल जरुरी है ? किन विषयों की होती है पढ़ाई पूरी जानकारी के यहाँ मिलेगी

आज के दौर में लोगों को घूमना फिरना काफी पसंद है। यही वजह है कि होटल मैनेजमेंट डिग्री होल्डर्स की डिमांड होटल और रिसोर्ट में काफी बढ़ रही है। अगर आप भी इसमें ध्यान देते हैं तो निश्चित है कि आगे चलकर के आप काफी अच्छी सैलरी प्राप्त करेंगे, साथ ही आपको घूमने का मौका भी मिलेगा।

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होटल इंडस्ट्री से जुड़े किसी भी प्रबंधन को होटल मैनेजमेंट कहा जाता है दूसरे शब्दों में कहें तो होटल, रेस्टोरेंट की सर्विस, प्रोडक्ट और बिजनेस को सही ढंग से चलाने की कला ही होटल मैनेजमेंट कहलाती है। इसमें आपको यह सिखाया जाता है कि ग्राहकों से किस प्रकार का व्यवहार करना है और किस प्रकार से ग्राहकों का ध्यान रखते हुए आपको उस कंपनी या फिर होटल को आगे बढ़ाना है जिसके लिए आप काम करते हैं।

होटल मैनेजमेंट कोर्स क्या हैं ?
होटल मैनेजमेंट एक प्रोफेशनल कोर्स है। इस कोर्स के अपने कुछ नियम हैं और कोर्स के लिए अलग-अलग प्रकार की योग्यताएं भी मांगी जाती है। सामान्य तौर पर इस कोर्स में एडमिशन पाने के लिए नीचे दी गई योग्यता को आपको पूरा करना आवश्यक होता है।

  • दसवीं अथवा 12वीं कक्षा को 55% अंकों के साथ पास करना आवश्यक है।
  • इसमें मास्टर डिग्री हासिल करने के लिए ग्रेजुएट होना आवश्यक है।
  • एंट्रेंस एग्जाम भी कुछ इंस्टिट्यूट लेते हैं उसे आपको देना जरूरी है।
  • बातचीत करने की कला अच्छी होनी चाहिए।
  • अंग्रेजी भाषा की साधारण समझना आवश्यक है।
  • दिमाग रचनात्मक होना चाहिए।
  • पर्सनैलिटी अच्छी होनी चाहिए।

12 वीं के बाद क्यों करें BHM?
आप होटल मैनेजमेंट के कोर्स को UG लेवल अथवा PG लेवल पर कर सकते हैं। ऐसे विद्यार्थी जो 12वीं कक्षा को पास करने के बाद होटल मैनेजमेंट का कोर्स करना चाहते हैं, वह यूजी लेवल पर कोर्स करने के लिए पात्र होते हैं, वही जो विद्यार्थी ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद होटल मैनेजमेंट से संबंधित कोर्स करना चाहते हैं वह पीजी लेवल पर कोर्स करने के लिए पात्रता रखते हैं।

बैचलर ऑफ होटल मैनेजमेंट एक ऐसा कोर्स है, जो कुल 4 साल का होता है और यह अंडर ग्रेजुएट कोर्स की श्रेणी में आता है अर्थात 12वीं पास व्यक्ति इस कोर्स में एडमिशन प्राप्त कर सकते हैं।

यह कोर्स टोटल 8 सेमेस्टर में विभाजित होता है और इसमें हर सेमेस्टर में विद्यार्थियों को थ्योरेटिकल और प्रैक्टिकल सब्जेक्ट की स्टडी करवाई जाती है। नीचे हमने आपको उन सब्जेक्ट के नाम दिए हैं, जो होटल मैनेजमेंट के बैचलर प्रोग्राम में आपको पढाए जाते हैं।

BHM के विषयों के बारे में जानकारी :

  • इवेंट मैनेजमेंट
  • हाउस कीपिंग
  • ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट
  • पब्लिक रिलेशन
  • एकाउंटिंग
  • बिज़नस लॉ
  • कम्युनिकेशन स्किल
  • बिज़नस एथिक्स
  • फ़ूड प्रोडक्शन
  • फ्रंट एंड ऑपरेशन
  • मैनेजमेंट स्किल्स
  • ट्रेवल एंड टूरिज्म

होटल मैनेजमेंट के क्षेत्र में एंट्री करने के लिए आपके अंदर कुछ आवश्यक कौशल भी होने चाहिए, जो नीचे बताए गए हैं। होटल मैनेजमेंट कोर्स के लिए कौशल :

  • अच्छी बातचीत की कला।
  • अच्छी पर्सनालिटी।
  • क्रिएटिव होना चाहिए।
  • ग्राहक का सम्मान करना आना चाहिए‌।
  • अनुशासन में रहना चाहिए।
  • अच्छा श्रोता वाला होना चाहिए।
  • भरपूर आत्मविश्वास होना चाहिए।
  • समय का पाबंद होना चाहिए।
  • जिम्मेदारी लेने वाला होना चाहिए।

होटल मैनेजमेंट का कोर्स करने के बाद आपको संभावित तौर पर नियुक्ति मिलती है :

  • मेनेजर ऑफ़ होटल |
  • किचेन मेनेजर |
  • इवेंट मेनेजर |
  • फ्रंट ऑफिस मेनेजर |
  • बैंक्वेट मेनेजर |
  • शेफ |
  • डायरेक्टर ऑफ़ होटल ऑपरेशन |
  • फ्लोर सुपरवाइजर |
  • हाउस कीपिंग मेनेजर |
  • गेस्ट सर्विस सुपरवाइजर/ मेनेजर |
  • वेडिंग कोऑर्डिनेटर |
  • रेस्टोरेंट मेनेजर |
  • फ़ूड सर्विस मेनेजर |
  • फ़ूड एंड विबरेज सुपरवाइजर |
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2025 में किस दिन मनाया जायेगा वर्ल्ड रेडियोग्राफी डे जानिए। चिकित्सा क्षेत्र में एक्स-रे का क्या है महत्त्व ?

वर्ल्ड रेडियोग्राफी डे हर साल 8 नवम्बर को मनाया जाता है, जो चिकित्सा क्षेत्र में रेडियोलॉजी और एक्स-रे जैसी तकनीकों के योगदान को मान्यता देने का दिन है, यह दिन विलहेम रंटगेन द्वारा 1895 में एक्स-रे की खोज की वर्षगांठ के रूप में मनाया जाता है, जिसने चिकित्सा विज्ञान में क्रांति ला दी, इस दिन का उद्देश्य रेडियोलॉजी के पेशेवरों की भूमिका को सम्मानित करना और लोगों में जागरूकता फैलाना है, यह रेडियोलॉजी के क्षेत्र में हो रहे नए विकास और शोध को बढ़ावा देने का भी एक अवसर है।

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वर्ल्ड रेडियोग्राफी डे कब मनाया जाता है?
वर्ल्ड रेडियोग्राफी डे हर साल 8 नवम्बर को मनाया जाता है, यह दिन रेडियोलॉजी के क्षेत्र में किए गए योगदान और एक्स-रे जैसी तकनीकों के महत्व को स्वीकार करने के लिए है, रेडियोलॉजिस्ट और चिकित्सा पेशेवर इस दिन की घटनाओं और जागरूकता कार्यक्रमों में भाग लेते हैं, यह दिन चिकित्सा विज्ञान के विकास की दिशा में एक मील का पत्थर है।

वर्ल्ड रेडियोग्राफी डे क्यों मनाया जाता है?
वर्ल्ड रेडियोग्राफी डे मनाने का मुख्य उद्देश्य रेडियोलॉजी और चिकित्सा इमेजिंग के योगदान को मान्यता देना है, जो रोगों के निदान और उपचार में सहायक होते हैं, इस दिन को मनाकर हम रेडियोलॉजी के पेशेवरों के कार्यों का सम्मान करते हैं और उनके प्रयासों को उजागर करते हैं, यह दिन चिकित्सा में नए विकास और तकनीकी इनोवेशन को बढ़ावा देने का भी अवसर है.

वर्ल्ड रेडियोग्राफी डे क्यों 8 नवम्बर को मनाया जाता है?
8 नवम्बर को वर्ल्ड रेडियोग्राफी डे मनाने की वजह यह है कि 8 नवम्बर 1895 को जर्मन वैज्ञानिक विलहेम रंटगेन ने एक्स-रे की खोज की थी, यह खोज चिकित्सा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लायी और बीमारी के निदान के तरीके को पूरी तरह से बदल दिया। इस दिन को उसी ऐतिहासिक खोज की याद में मनाया जाता है.

वर्ल्ड रेडियोग्राफी डे का उद्देश्य क्या है?
वर्ल्ड रेडियोग्राफी डे का उद्देश्य रेडियोलॉजी के क्षेत्र में कार्यरत पेशेवरों की भूमिका को सम्मानित करना और चिकित्सा में रेडियोलॉजिकल तकनीकों के महत्व को जनता तक पहुंचाना है, यह दिन रेडियोलॉजी के महत्व को समझाने और इसके प्रति जागरूकता फैलाने का एक जरिया है, साथ ही, यह रेडियोलॉजी के क्षेत्र में नई संभावनाओं और विकास को प्रोत्साहित करता है.

वर्ल्ड रेडियोग्राफी डे कैसे मनाया जाता है?
वर्ल्ड रेडियोग्राफी डे को मनाने के लिए चिकित्सा संस्थानों, अस्पतालों और रेडियोलॉजिस्ट द्वारा जागरूकता कार्यक्रम, सेमिनार, कार्यशालाएँ और पब्लिक लैक्चर्स आयोजित किए जाते हैं, सोशल मीडिया पर इस दिन के महत्व को साझा करने के लिए पोस्ट्स और कैम्पेन चलाए जाते हैं, इसके अलावा, रेडियोलॉजिस्ट और चिकित्सा पेशेवर इस दिन को अपने योगदान को साझा करके मान्यता प्राप्त करते हैं।

बीएससीरेडियोलॉजी के बारे में यहाँ मिलेगी पूरी जानकारी :
रेडियोलॉजी में बैचलर ऑफ साइंस (बीएससी) रेडियोलॉजी के बारे में अधिक व्यापक और गहन समझ की चाह रखने वालों के लिए, रेडियोलॉजी में बीएससी करना एक बेहतरीन विकल्प है। यह स्नातक कार्यक्रम आम तौर पर तीन साल का होता है और एक अच्छी तरह से गोल पाठ्यक्रम प्रदान करता है जो चिकित्सा इमेजिंग, रेडियोग्राफिक प्रक्रियाओं और रोगी देखभाल के विभिन्न पहलुओं को कवर करता है।

बीएससी रेडियोलॉजी के छात्र रेडियोग्राफिक प्रक्रियाओं की पेचीदगियों में तल्लीन हो जाते हैं, मरीजों को कैसे रखना है, इमेजिंग उपकरण कैसे चलाना है, और उच्च गुणवत्ता वाली नैदानिक छवियाँ कैसे खींचते हैं, यह सीखते हैं। यह व्यावहारिक प्रशिक्षण नैदानिक सेटिंग में आवश्यक तकनीकी कौशल विकसित करने के लिए महत्वपूर्ण है।

12वीं के बाद रेडियोलॉजी पाठ्यक्रम:
12वीं पूरी करने के बाद करियर का चुनाव महत्वपूर्ण निर्णय है। 12वीं के बाद रेडियोलॉजी पाठ्यक्रम उन लोगों के लिए एक आशाजनक अवसर प्रदान करता हैं जो प्रौद्योगिकी और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र से आकर्षित हैं।अगर आप ने किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10+2 की शिक्षा पूरी की है और आपके गणित, भौतिकी, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान जैसे विषयों में न्यूनतम 50% या उससे अधिक अंक है तो 12वीं के बाद बीएससी रेडियोलॉजी पाठ्यक्रम आपके लिए बेस्ट ऑप्शन हैं। रेडियोलॉजी में बीएससी करने से इस क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के रोजगार के अवसर खुल सकते हैं, जिनमें रेडियोलॉजिक टेक्नोलॉजिस्ट, सीटी स्कैन या एमआरआई टेक्नोलॉजिस्ट, और इंटरवेंशनल रेडियोग्राफी जैसे पद शामिल हैं। रेडियोलॉजी में बीएससी एक अच्छा करियर विकल्प हो सकता है। रेडियोलॉजी में निरंतर तकनीकी प्रगति इसे एक गतिशील और विकसित करियर पथ बनाती है।

India State of Forest Report

India State of Forest Report

India is ranks amongst the top 10 countries of the world, in terms of forest area and holds 3rd position for
highest annual net gain in forest cover between 2010-2020, as per Global Forest Resource Assessment (GFRA, 2020) published by FAO.
Therefore, India’s forests act as a net sink of corbon. This shows the commitment of our country towards climate change
mitigation and adaptaion.

The India State of Forest Report (ISFR) 2023 has been published by the Forest Survey of India (FSI).

It is a biennial assessment of the country’s forest resources using satellite data and field information. ISFR 2023 is published in two volumes. The first report was published in 1987, and the recently published ISFR 2023 marks the 18th edition.

India State of Forest Report 2023 highlights are as follows –

  1. For the first time, the report showcases forest cover change matrix inside and outside forest areas have been provided separately for clarity in analysis.
  2. In the present report, FSI has given forest cover information for 751 districts including those created in the recent
    past, as against 636 districts given in ISFR 2021.
  3. The India State of Forest Report (ISFR) 2023 shows that the country’s Forest and Tree cover now spans 827,357 square kilometers, covering 25.17% of the nation’s total land area.
  4. This includes 715,343 square kilometers (21.76%) of forest cover and 112,014 square kilometers (3.41%) of tree cover. This progress reflects India’s successful efforts to balance development with environmental conservation.
  5. The India State of Forest Report (ISFR) 2023 highlights positive growth in India’s forest cover, increasing from 698,712 km² in 2013 to 715,343 km² in 2023.
  6. Fire incidents have also decreased, with 203,544 fire hotspots recorded in 2023-24, down from 223,333 in 2021-22.
    In line with India’s Nationally Determined Contributions (NDC) target, the country has achieved a carbon sink of 30.43 billion tonnes of CO2 equivalent.
  7. This represents an additional 2.29 billion tonnes of carbon sink in Forest and Tree Cover since 2005, nearing the target of 2.5 to 3.0 billion tonnes of CO2 equivalent by 2030.
  8. In this report, Agroforestry has been analyzed separately as it accounts for 1,27,590 km2 of tree cover and 1,292 M m3 of Growing stock and serves as livelihood enhancer.
  9. For this report, Forest Cover Mapping was carried out using medium-resolution indigenous satellite data, sourced from the Indian Space Research Organization’s (ISRO) indigenous LISS-III sensor.
  10. The report shows that the maximum increase in forest and tree cover has been observed in the States of Chhattisgarh (683.62 km2) followed by Uttar Pradesh (559.19 km2), Odisha (558.57 km2) and Rajasthan (394.46 km2).
  11. The maximum decrease in forest and tree cover has been noticed in the state of Madhya Pradesh (612.41 km2) followed by Karnataka (459.36 km2), Ladakh (159.26 km2) and Nagaland (125.22 km2).
  12. The total forest and tree cover in the North Eastern region is 1,74,394.70 km2, which is 67% of geographical area of these states. The current assessment shows adecrease of forest cover of 327.30 km2 in the region.

For more information, visit Forest Survey of India – https://fsi.nic.in/index.php

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भारत में 1,57,066 स्टार्टअप मान्यताप्राप्त। स्टार्ट अप इण्डिया को बढ़ावा देने में महिला शक्ति आगे

भारत ने वैश्विक स्तर पर सबसे वाइब्रन्ट स्टार्टअप इकोसिस्टम में से एक के रूप में एक विशिष्ट पहचान बनायी है। यह तीसरे सबसे बड़े स्टार्टअप हब के रूप में जाना जाता है। 100 से अधिक यूनिकॉर्न के साथ, भारतीय स्टार्टअप परिदृश्य नवाचार और उद्यमिता के भविष्य को आकार दे रहा है। भारत में 73,000 से अधिक स्टार्टअप में कम से कम एक महिला निदेशक हैं। इन्हे स्टार्टअप इंडिया पहल के तहत मान्यता दी गई है। यह सरकार द्वारा समर्थित 1,57,066 स्टार्टअप में से लगभग आधे का प्रतिनिधित्व करता है। यह नवाचार और आर्थिक विकास को आगे बढ़ाने में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है।

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भारत में उद्यमशीलता की भावना पिछले दशक में एक आदर्श बदलाव से गुज़री है। बेंगलुरु, हैदराबाद, मुंबई और दिल्ली-एनसीआर जैसे शहर नवाचार के केंद्र बन गए हैं। किफायती इंटरनेट की व्यापक उपलब्धता, साथ ही युवा और गतिशील कार्यबल ने फिनटेक, एडटेक, हेल्थ-टेक और ई-कॉमर्स सहित विविध क्षेत्रों में स्टार्टअप के विकास को बढ़ावा दिया है। स्टार्टअप इंडिया द्वारा “भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम रिपोर्ट” के अनुसार, भारत के स्टार्टअप ने स्थानीय और वैश्विक समस्याओं को हल करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), ब्लॉकचेन और आईओटी जैसी उभरती हुई तकनीकों का लाभ उठाया है। इनक्यूबेटर, एक्सेलेरेटर और मजबूत मेंटरिंग नेटवर्क द्वारा समर्थित नवाचार की इस संस्कृति ने एक अनूठे इकोसिस्टम को बढ़ावा दिया है। यह अत्याधुनिक समाधानों के साथ जमीनी चुनौतियों को दूर करता है।

केंद्र सरकार ने स्टार्टअप की परिवर्तनकारी क्षमता को पहचानते हुए उद्यमिता का समर्थन और पोषण करने के लिए कई पहल किये हैं। 2016 में शुरू किया गया स्टार्टअप इंडिया कार्यक्रम इस युगांतरकारी प्रयास की आधारशिला रहा है। 25 दिसंबर 2024 तक उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग ने 1,57,066 स्टार्टअप को मान्यता दी गई है और पोर्टल पर 7,59,303 उपयोगकर्ता पंजीकृत हैं।

मुख्य विशेषताएं :

  • व्यापार करने में आसानी: सरलीकृत अनुपालन, स्व-प्रमाणन और एकल-खिड़की मंजूरी ने स्टार्टअप के लिए नौकरशाही बाधाओं को कम कर दिया है।
  • कर लाभ : पीआईबी रिपोर्ट के अनुसार योजना के अंतर्गत पंजीकृत स्टार्टअप को लगातार तीन वित्तीय वर्षों के लिए कर छूट मिलती है।
  • वित्त पोषण सहायता: स्टार्टअप के लिए फंड ऑफ फंड्स पहल ने शुरुआती चरण के वित्तपोषण को बढ़ावा देने के लिए ₹10,000 करोड़ आवंटित किए हैं।
  • क्षेत्र-विशिष्ट नीतियाँ: जैव प्रौद्योगिकी, कृषि और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे उद्योगों के लिए अनुकूलित नीतियों ने क्षेत्रीय विकास को प्रोत्साहित किया है।
  • भारत स्टार्टअप नॉलेज एक्सेस रजिस्ट्री: स्टार्टअप, निवेशकों, सलाहकारों, सेवा प्रदाताओं और सरकारी निकायों सहित उद्यमशीलता पारिस्थितिकी तंत्र के भीतर प्रमुख हितधारकों के बीच सहयोग को केंद्रीकृत, सुव्यवस्थित और बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया प्लेटफ़ॉर्म।
  • स्टार्टअप भारत के आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण :
  • भारतीय स्टार्टअप्स देश के विकास में महग्गतवपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं इसके जरिये
  • रोजगार सृजन :
  • जीडीपी वृद्धि :
  • विदेशी निवेश आकर्षित :
  • समावेशीपन को बढ़ावा :

भारत के स्टार्टअप न केवल स्थानीय समस्याओं का समाधान कर रहे हैं; वे वैश्विक स्तर पर धूम मचा रहे हैं। बायजूस, ज़ोमैटो, ओला और नायका जैसी कंपनियों ने दुनिया भर में अपने परिचालन का विस्तार किया है। इससे वैश्विक मंच पर भारत की क्षमता का पता चलता है। सिलिकॉन वैली में भारतीय मूल के स्टार्टअप की सफलता देश के वैश्विक प्रभाव को और उजागर करती है। स्टार्टअप इंडिया इंटरनेशनल गाइड के अनुसार भारतीय स्टार्टअप वैश्विक निगमों के साथ तेजी से साझेदारी कर रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रवेश कर रहे हैं। यूपीआई और आधार-सक्षम सेवाओं जैसे किफायती प्रौद्योगिकी समाधानों में भारत का नेतृत्व वैश्विक स्तर पर इसी तरह के नवाचारों को प्रेरित कर रहा है। इसके अतिरिक्त भारत के यूनिकॉर्न वैल्यूएशन ग्रोथ में वैश्विक साथियों से आगे निकल रहे हैं।

दुनिया का अग्रणी स्टार्टअप इकोसिस्टम बनने की दिशा में भारत की यात्रा जनसांख्यिकीय, आर्थिक और नीतिगत कारकों के संयोजन से प्रेरित है। युवा, शिक्षित आबादी, बढ़ते मध्यम वर्ग और डिजिटल तकनीकों की बढ़ती पहुंच के साथ, देश तेजी से विकास के लिए तैयार है। सरकार समर्थित नीतियों, निवेशक-अनुकूल वातावरण और नवाचार को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करने से भारत स्टार्टअप में वैश्विक नेता के रूप में स्थापित हुआ है। इसके अलावा, शिक्षाविदों, उद्योग और नीति निर्माताओं के बीच सहयोग एक स्थायी और समावेशी इकोसिस्टम सुनिश्चित करता है। भारत वैश्विक स्तर पर अपने समाधानों का नवाचार और निर्यात करना जारी रखते हुए , वैश्विक स्टार्टअप समुदाय के लिए बेंचमार्क स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

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2025 AI वर्ष घोषित । झारखंड में कितने हैं इंजीनियरिंग कॉलेज कहां कहां होती है AI की पढ़ाई

2024 खत्म होने वाला है। इस साल चैट जीपीटी कई मेजर अपग्रेड्स के साथ पावरफुल हुआ है। 2024 में कई चैटबॉट और वॉयस असिस्टेंट्स लॉन्च हुए हैं। AI तेजी से अपना दायरा बढ़ा रहा है। Sora जैसे टूल हाइपर रियलिस्टिक वीडियो क्रिएट कर रहे हैं। जेनरेटिव एआई का दखल हर क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहा है। इमेज क्रिएटर चैटबॉट्स को लोग खूब पसंद कर रहे हैं। आने वर्ष 2025 AI वर्ष घोषित किया गया है।

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अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) ने वर्ष 2025 को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस A I वर्ष घोषित किया है। देश के सभी इंजीनियरिंग कॉलेजों में 2025 एआई वर्ष के रूप में मनाया जायेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के तहत भारत को विश्वगुरु बनाने के सपने को साकार करने के लिए 14 हजार इंजीनियरिंग कॉलेजों के 40 लाख छात्रों को एआई में दक्ष करेगा। इसके तहत सभी इंजीनियरिंग कॉलेजों 31 दिसंबर तक अपनी योजना को बनाकर एआईसीटीई को भेजनी होगी। खास बात यह है कि साल भर कैंपस में भारत को एआई, इनोवेशन और शिक्षा के क्षेत्र में भारत को विश्वगुरु बनाने का संकल्प लेने के साथ कार्यक्रम आयोजित होंगे।

AICTE के अध्यक्ष ने कहा है “जैसा कि हम 2025 को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के वर्ष के रूप में समर्पित करते हैं, आइए हम भविष्य के लिए तैयार कार्यबल का निर्माण करने के लिए एकजुट हों। साथ मिलकर, हम भारत को एआई नवाचार, नैतिकता और शिक्षा में वैश्विक नेता के रूप में आकार दे सकते हैं, जिससे आत्मनिर्भरता और समृद्धि के हमारे साझा दृष्टिकोण को पूरा किया जा सके।”

भारत अपने युवा शक्ति के दम पर दुनिया के लिए एआई वर्कफोर्स तैयार करेगा। इसके लिए 14 कॉलेजों के 40 लाख छात्रों को एआई में दक्ष किया जाएगा। इसके लिए कॉलेजों को एआई मल्टी डिसिप्लिनरी कोर्स और रिसर्च प्रोग्राम शुरू करने होंगे। साथ ही इंडस्ट्री की डिमांड आधारित एआई लैब स्थापित होंगी। एआई जागरूकता के लिए हैकथॉन, वर्कशॉप, विशेषज्ञों के विशेष एआई लेक्चर, एआई आधारित करियर काउंसलिंग

प्रोग्राम चलाए जाएंगे।

क्या होता है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI):
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एक ऐसी तकनीक है, जो मशीनों और कंप्यूटरों को इंसानों की तरह सोचने, समझने और निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करती है। इसका उद्देश्य है मशीनों को इस काबिल बनाना कि वे डेटा का विश्लेषण करके समस्याओं को हल कर सकें, भविष्यवाणी कर सकें और कार्य को स्वचालित कर सकें।

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12 वीं के बाद बीएससी रेडियोलॉजी और क्लिनिकल ट्रेनिंग के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करें

स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में, रेडियोलॉजी एक महत्वपूर्ण अनुशासन के रूप में खड़ा है। निदान और चिकित्सा इमेजिंग में इसकी बी भूमिका महत्वपूर्ण है। जैसे-जैसे तकनीक आगे बढ़ रही है, रेडियोलॉजी में कुशल पेशेवरों की मांग बढ़ रही है। यह लेख 12वीं कक्षा के बाद रेडियोलॉजी में बैचलर ऑफ साइंस (बीएससी) पर विशेष केंद्रित है।

12वीं के बाद रेडियोलॉजी पाठ्यक्रम:
12वीं पूरी करने के बाद करियर का चुनाव महत्वपूर्ण निर्णय है। 12वीं के बाद रेडियोलॉजी पाठ्यक्रम उन लोगों के लिए एक आशाजनक अवसर प्रदान करता हैं जो प्रौद्योगिकी और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र से आकर्षित हैं।

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बीएससी रेडियोलॉजी क्या हैं ?
रेडियोलॉजी में बैचलर ऑफ साइंस (बीएससी) रेडियोलॉजी के बारे में अधिक व्यापक और गहन समझ की चाह रखने वालों के लिए, रेडियोलॉजी में बीएससी करना एक बेहतरीन विकल्प है। यह स्नातक कार्यक्रम आम तौर पर तीन साल का होता है और एक अच्छी तरह से गोल पाठ्यक्रम प्रदान करता है जो चिकित्सा इमेजिंग, रेडियोग्राफिक प्रक्रियाओं और रोगी देखभाल के विभिन्न पहलुओं को कवर करता है।

बीएससी रेडियोलॉजी के छात्र रेडियोग्राफिक प्रक्रियाओं की पेचीदगियों में तल्लीन हो जाते हैं, मरीजों को कैसे रखना है, इमेजिंग उपकरण कैसे चलाना है, और उच्च गुणवत्ता वाली नैदानिक छवियाँ कैसे खींचते हैं, यह सीखते हैं। यह व्यावहारिक प्रशिक्षण नैदानिक सेटिंग में आवश्यक तकनीकी कौशल विकसित करने के लिए महत्वपूर्ण है।

रेडियो लॉजी की पढ़ाई और क्लिनिकल ट्रेनिंग:
रेडियोलॉजी में बीएससी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा व्यावहारिक क्लिनिकल ट्रेनिंग से जुड़ा है। यह व्यावहारिक अनुभव अस्पतालों या मेडिकल इमेजिंग सुविधाओं में होता है, जिससे छात्रों को अपने सैद्धांतिक ज्ञान को वास्तविक दुनिया के परिदृश्यों में लागू करने का मौका मिलता है। तकनीकी कौशल को निखारने, संचार क्षमताओं को विकसित करने और विविध रोगी मामलों के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए क्लिनिकल ट्रेनिंग महत्वपूर्ण है।

कैरियर विकास में बीएससी रेडियोलॉजी का महत्व :
रेडियोलॉजी में बीएससी की पढ़ाई अकादमिक योग्यता से कहीं आगे जाती है; यह मेडिकल इमेजिंग के क्षेत्र में एक पुरस्कृत और प्रभावशाली करियर के लिए आधार तैयार करती है। करियर विकास में बीएससी रेडियोलॉजी डिग्री के महत्व को समझें:

विविध करियर अवसर :
रेडियोलॉजी में बीएससी स्नातक के पास तलाशने के लिए कई कैरियर मार्ग हैं। अस्पतालों, डायग्नोस्टिक केंद्रों या विशेष इमेजिंग क्लीनिकों में काम कर सकते हैं। करियर विकल्पों में रेडियोलॉजिक टेक्नोलॉजिस्ट, सीटी स्कैन या एमआरआई टेक्नोलॉजिस्ट बनने का मौका मिल सकता है। बीएससी रेडियोलॉजी कार्यक्रमों का व्यापक पाठ्यक्रम छात्रों को सैद्धांतिक ज्ञान और व्यावहारिक कौशल के मिश्रण से लैस करता है, जो उन्हें स्वास्थ्य सेवा के उभरते परिदृश्य में चुनौतियों और अवसरों के लिए तैयार करता है।

बीएससी रेडियोलॉजी अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न :

12वीं के बाद बीएससी रेडियोलॉजी के लिए क्या योग्यता है?
आपको किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10+2 की शिक्षा पूरी करनी चाहिए। छात्रों के लिए गणित, भौतिकी, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान जैसे विषयों में न्यूनतम 50% या उससे अधिक अंक प्राप्त करना आवश्यक है।

क्या मुझे बीएससी रेडियोलॉजी के बाद नौकरी मिल सकती है?
हां, रेडियोलॉजी में बीएससी करने से इस क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के रोजगार के अवसर खुल सकते हैं, जिनमें रेडियोलॉजिक टेक्नोलॉजिस्ट, सीटी स्कैन या एमआरआई टेक्नोलॉजिस्ट, और इंटरवेंशनल रेडियोग्राफी जैसे पद शामिल हैं।

क्या बीएससी रेडियोलॉजी एक अच्छा करियर है?
हां, रेडियोलॉजी में बीएससी एक अच्छा करियर विकल्प हो सकता है। रेडियोलॉजी में निरंतर तकनीकी प्रगति इसे एक गतिशील और विकसित करियर पथ बनाती है।

रेडियोलॉजी के लिए कौन सा कोर्स सर्वोत्तम है?
रेडियोलॉजी में बैचलर ऑफ साइंस (बी.एससी.) रेडियोलॉजी में करियर बनाने के इच्छुक लोगों के लिए एक आम तौर पर चुना जाने वाला और अच्छी तरह से माना जाने वाला कोर्स है। आप इमेजिंग टेक्नोलॉजी में बी.एससी. भी चुन सकते हैं।

क्या रेडियोलॉजी एक उच्च वेतन वाली नौकरी है?
हां, रेडियोलॉजी को आम तौर पर उच्च वेतन वाला पेशा माना जाता है। रेडियोलॉजिस्ट, विशेष रूप से विशेषज्ञता वाले, अक्सर चिकित्सा निदान और इमेजिंग में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के कारण प्रतिस्पर्धी वेतन प्राप्त करते हैं।

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2 से 3 लाख प्रतिमाह कमाना चाहते हैं तो 12वीं के बाद करें ये कोर्स, विदेशों में भी है डिमांड

दुनियाभर में होटल मैनेजमेंट इंडस्ट्री का तेजी से विकास हो रहा है। जिस गति से इस क्षेत्र में विकास हो रहा है उसी गति से योग्य एवं पेशेवरों की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में रोजगार के मामले में उछाल देखने को मिला है जो आगे भी जारी रहने वाला है। अगर आप भी 12वीं के बाद कोई ऐसा प्रोफेशनल कोर्स करना चाहते हैं, जिसको करने के बाद आपको तुरंत ही बेहतर रोजगार के मौके उपलब्ध हों, तो ऐसे में आप होटल मैनेजमेंट के क्षेत्र में कदम रख सकते हैं।

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होटल मैनेजमेंट इंडस्ट्री में जाने के लिए क्या है योग्यता?

होटल मैनेजमेंट के क्षेत्र में आप 12वीं के बाद ही बैचलर डिग्री प्रोग्राम में प्रवेश ले सकते हैं। बैचलर ऑफ़ होटल मैनेजमेंट (BHM) एक चार साल का स्नातक कोर्स है। यह कोर्स होटल प्रबंधन के कई क्षेत्रों में जानकारी देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसमें लॉजिंग ऑपरेशन, पेय पदार्थ तैयार करना, कॉर्पोरेट वित्त, और फ़्रंट ऑफ़िस ऑपरेशन जैसे विषय शामिल हैं। इस कोर्स के ज़रिए छात्रों को आतिथ्य और पर्यटन के सभी पहलुओं में जानकारी मिलती है।

होटल इंडस्ट्री का क्षेत्र बहुत बड़ा है और देश के साथ विदेश में भी अलग महत्ता रखता है। इस क्षेत्र में कोर्स करने के बाद आप पढ़ाई के बाद इंटर्नशिप करके नौकरी की शुरुआत कर सकते हैं। इंटर्नशिप और अनुभव के बाद आप देश-विदेश की होटल इंडस्ट्री में नौकरी करने के लिए एलिजिबल हो जायेंगे। अनुभव और एक्सपीरियंस के बाद आप देश के साथ ही विदेश में भी अपनी पहचान बनाकर लाखों रुपये प्रतिमाह कमा सकते हैं।

बीएचएम कोर्स के लिए जरूरी स्किल्स :

होटल मैनेजमेंट इंडस्ट्री में करियर की संभावनाएं :

एक बार जब आप होटल मैनेजमेंट ग्रेजुएट बन जाते हैं, तो आपके लिए नौकरी की संभावनाओं की एक विस्तृत दुनिया खुल जाएगी। चूंकि हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री में संचालन, फूड एंड बेवरेज, फ्रंट ऑफिस, अकाउंटिंग, सिक्युरिटी आदि जैसे कई विभाग हैं, इसलिए आप अपना पसंदीदा विभाग चुन सकते हैं और इसमें विभिन्न नौकरियों के लिए आवेदन कर सकते हैं।

कोर्स खत्म होने के बाद मिलेगी इन फील्ड में जॉब्स :

  • मैनेजर ऑफ़ होटल
  • किचन मैनेजर
  • इवेंट मैनेजर
  • फ्रंट ऑफिस मैनेजर
  • बैंक्वेट मैनेजर
  • शेफ
  • डायरेक्टर ऑफ़ होटल ऑपरेशन
  • फ्लोर सुपरवाइजर
  • हाउस कीपिंग मैनेजर
  • गेस्ट सर्विस सुपरवाइजर/ मैनेजर
  • वेडिंग कोऑर्डिनेटर
  • रेस्टोरेंट मैनेजर
  • फ़ूड सर्विस मैनेजर
  • फ़ूड एंड वेबरेज सुपरवाइजर
Indian startup report

Indian Startup Ecosystem Report

Indian Startup Ecosystem Report – Commerce Ministry 

Despite the global slowdown in tech investments, Indian startups have attracted strong funding, raising a total of $11.3 billion in 2024. This is a 6% increase from the $10.7 billion raised in 2023.

Government-backed policies, an investor-friendly environment, and a focus on fostering innovation have positioned India as a global leader in startups.

According to the “Indian Startup Ecosystem Report” by Startup India, India’s startups have leveraged emerging technologies such as artificial intelligence (AI), blockchain, and IoT to solve local and global problems. This culture of innovation, supported by incubators, accelerators, and robust mentoring networks, has fostered a unique ecosystem that bridges grassroots challenges with cutting-edge solutions.

The Indian government has introduced several initiatives to support and nurture entrepreneurship. The flagship Startup India program, launched in 2016, has been a cornerstone in this effort.

Key points of “Indian Startup Ecosystem Report”

  1. India has emerged as one of the most vibrant startup ecosystems globally, earning its place as the 3rd largest startup hub.
    India has over 100+ unicorns.
  2. As on December 25, 2024, 157,066 startups have been recognized by Department for Promotion of Industry and Internal Trade (DPIIT) and 759,303 users are registered on the portal.
  3. India has more than 73,000 startups with at least one-woman director.
  4. This represents nearly half of the 1,57,066 startups supported by the government, showcasing the crucial role women play in driving innovation and economic growth.
  5. Cities like Bengaluru, Hyderabad, Mumbai, and Delhi-NCR have become epicenters of innovation.
  6. The Indian startup landscape is shaping the future of innovation and entrepreneurship.

To support this fervour, Government has taken several initiatives to support the startup ecosystem in India.

Initiatives such as the Atal Innovation Mission (AIM) and the National Initiative for Developing and Harnessing Innovations (NIDHI) provide infrastructure and financial support to innovators. Further, the Startup Accelerator of MeitY for Product Innovation, Development, and Growth (SAMRIDH) scheme launched in 2021, aims to support 300 software product startups over four years with an outlay of ₹99 crore, providing funding up to ₹40 lakh per startup through accelerators to scale their businesses.

According to the Startup India International Guide, Indian startups are increasingly partnering with global corporations and entering international markets. India’s leadership in affordable technology solutions, such as UPI and Aadhaar-enabled services, is inspiring similar innovations globally. Additionally, India’s unicorns are outpacing global peers in valuation growth, proving that the ecosystem’s foundation is robust and scalable.

Earlier, Bangalore has been listed within the world’s 20 leading startup cities in the 2019 Startup Genome Project ranking. It is also ranked as one of the world’s five fastest growing startup cities.

Indian startups raised Rs 29,247 crore through IPO in 2024, led by Swiggy and Ola Electric.