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जीवन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सकारात्मक सोच और योग का महत्व : सन्यासी ब्रह्मचारी सौम्यानंद

विश्व योग दिवस के अवसर पर झारखंड राय विश्वविद्यालय, रांची में “योग एंड पॉजिटिव साइकोलॉजी फॉर मैनेजिंग कैरियर एंड लाइफ” विषय पर एक प्रेरक कार्यक्रम का आयोजन किया गया । कार्यक्रम में योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इंडिया के सन्यासी ब्रह्मचारी सौम्यानंद ने मुख्य वक्ता के रूप में भाग लिया।

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योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इंडिया की स्थापना 1917 में भारत के महान आध्यात्मिक नेता परमहंस योगानंद ने की थी, उन्होंने पश्चिम में योग का संदेश फैलाया था। योगानंद द्वारा गढ़ा गया, सोसायटी का नाम संस्कृत से लिया गया है, जिसमें योगोदा मूल शब्द, योग, जिसका अर्थ है “संघ” और दा, जिसका अर्थ है “वह जो प्रदान करता है” से लिया गया है। सत्संग मूल शब्दों से बना है, सत, जिसका अर्थ है “सत्य,” और संग, जिसका अर्थ है “संगति”।

ब्रह्मचारी सौम्यानंद ने अपने व्याख्यान में योग और सकारात्मक सोच के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कैसे योग न केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और तनाव प्रबंधन में भी मददगार हो सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि सकारात्मक सोच कैसे जीवन के सभी क्षेत्रों में सफलता प्राप्त करने में सहायक हो सकती है, खासकर करियर और जीवन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में।

कार्यक्रम की विधिवत शुरुवात दीप प्रज्जवलित कर किया गया। इस अवसर पर झारखण्ड राय विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो0 (डॉ०) सविता सेंगर एवं कुलसचिव डॉ० पीयूष रंजन उपस्थित थे। कुलपति प्रो० सेंगर ने अतिथियों का सम्मान पौधा देकर किया। इस अवसर पर योग्दा सत्संग के गौरव जी भी उपस्थित थे।

ब्रह्मचारी सौम्यानंद ने अपने व्याख्यान के दौरान निम्नलिखित बिंदुओं पर प्रकाश डाला:

  • योग और सकारात्मक सोच का महत्व।
  • योगासन और प्राणायाम का अभ्यास।
  • तनाव प्रबंधन और सकारात्मक सोच विकसित करना।
  • करियर और जीवन के लक्ष्यों को प्राप्त करना।

व्याख्यान समापन पर सन्यासी ब्रह्मचारी सौम्यानंद ने प्रश्न उत्तर सत्र के दौरान विद्यार्थियों के सवालों का जवाब देकर मन की शंका शांत किया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के छात्रों, शिक्षकों और एनएसएस के स्वयंसेवकों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। सभी ने ब्रह्मचारी सौम्यानंद के व्याख्यान को सराहा और उनसे प्रेरणा ली।

कृषि संकाय के छात्र अंशुल ने सन्यासी ब्रह्मचारी सौम्यानंद से प्रश्न करते हुए पूछा कि जन्म और मृत्यु का रहस्य क्या है ? वहीं छात्र देवयांग सारंगी ने जीवन काल में मोह और सांसारिक माया से जुड़ा सवाल पूछा ।

कार्यक्रम के आयोजन का उद्देश्य विश्व योग दिवस के अवसर पर विद्यार्थियों को योग के महत्त्व से अवगत कराते हुए उन्हें सकारात्मक सोच के साथ जीवन में आगे बढ़ने और लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए तैयार करना था। विश्व योग दिवस के महत्व को बढ़ावा देने और लोगों को योग अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने में कार्यक्रम सफल साबित हुआ।

कार्यक्रम का संचालन प्रबंधन संकाय की प्रो0 मानुषी राय ने जबकि धन्यवाद ज्ञापन झारखण्ड राय विश्वविद्यालय के एनएसएस समन्वयक प्रो0 ओम प्रकाश सत्यम ने किया।